एक नई सोच, एक नई धारा

संगत को पाकिस्तान ननकाणां साहिब के दर्शन कराने के लिए श्याम सिंह हुए सम्मानित

जमशेदपुर : श्री गुरु नानक देव जी के धर्म स्थल पाकिस्तान ननकाणा साहेब के दर्शन कर 13 सदस्यीय संगत का जत्था शहर पहुंचा। जहां जुगसलाई गौरी शंकर रोड गुरुद्वारा में सभी को सम्मानित किया गया। इधर, पाकिस्तान गुरुद्वारा साहिब भेजने की मुख्य भूमिका निभाने वाले श्री गुरुनानक सेवा दल के महासचिव सरदार श्याम सिंह भाटिया को जुगसलाई गुरुद्वारा कमिटी ने सारोपा देकर सम्मानित किया गया। श्याम सिंह ने बताया मई माह को सबका वीजा तैयारी पूरी कर 7 अप्रैल को जत्था पाकिस्तान सिखों के जत्थे को धार्मिक स्थल दर्शन करने के लिए रवानगी की गई। जहां संगत पंजा साहेब, सच्चा सौदा, लाहौर डेरा साहेब, रोड़ी साहेब, करतारपुर साहेब, दर्शन कर बाघा बॉर्डर के रास्ते वापस आए।

श्याम सिंह ने बताया कि दर्शन कर लौटी संगत ने अपने अनुभव को बताते हुए कहा की आज हम अपने आपको बहुत भाग्यशाली समझ रहे हैं, जिनको वाहेगुरुजी की किरपा से सारे धार्मिक और ऐतिहासिक गुरुद्वारा का दर्शन करने का मौका मिला। संगत ने बताया कि जमशेदपुर कि हर सिख को एक बार पाकिस्तान अपने ऐतिहासिक गुरुद्वारे का दर्शन जरूर करना चाहिए, ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को अपने गुरुओं का इतिहास बता सकें। श्याम सिंह ने बताया नवंबर महीने में श्री गुरुनानक देव जी महाराज के जन्म दिवस पर फिर जत्था पाकिस्तान जायेगा, जो इच्छुक श्रद्धालु हो। वो सितंबर महीने अपना पासपोर्ट के साथ श्याम सिंह से संपर्क करें। उनके मोबाइल नंबर 9431380604, 9110197659 पर भी संगत पूछताछ कर सकती है।

जेठ महीने की संग्रांद पर साकची गुरुद्वारा में सजा कीर्तन दरबार

जल्द पूर्ण हो जायेगा साकची गुरुद्वारा के सौंदर्यीकरण का कार्य : निशान सिंह

जेठ महीने की संग्राद को समर्पित कीर्तन तथा कथा दरबार के आयोजन में संगत ने शामिल हो सतगुरु की ओट में बैठकर जेठ माह का स्वागत किया। सोमवार को साकची गुरुद्वारा साहिब में कथा वाचक भाई अमृतपाल सिंह ने संगत के साथ गुरमत विचार साझा किये जबकि रागी जत्था भाई साहब भाई गुरदीप सिंह जी निक्कू टाटानगर वाले ने मधुर शब्द-कीर्तन द्वारा संगत को निहाल किया। बीबी इंदरप्रीत कौर ने भी इस अवसर पर कीर्तन गायन किया।

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कीर्तन दरबार की समाप्ति और गुरु ग्रन्थ साहिब के सम्मुख अरदास के उपरांत संगत के बीच कड़ाह प्रसाद एवं गुरु का अटूट लंगर बरताया गया। इस अवसर पर संगत को सम्बोधित करते हुए गुरुद्वारा के प्रधान निशान सिंह ने कहा की साकची गुरुद्वारा के सौन्दर्यीकरण का कार्य जल्द ही पूर्ण हो जायेगा इसके लिए वे अपील करते हैं कि संगत तन, मन और धन से इस सेवा में अपना सहयोग करे। संग्रांद कार्यक्रम को सफल बनाने में साकची गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी साकची (एसजीपीसी) सहित स्त्री सत्संग सभा साकची और सुखमणि साहिब कीर्तनी जत्था आदि ने सहयोग किया।

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आंध्र प्रदेश में सिख ग्रंथीयों को सरकारी अनुदान की घोषणा एक सकारात्मक पहल: भगवान सिंह

झारखंड में भी आंध्र प्रदेश की तर्ज पर लागू हो ग्रंथीयों के लिए अनुदान प्रणाली

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन रेड्डी द्वारा सिख ग्रंथीयों के लिए सरकारी अनुदान की घोषणा का स्वागत और हर्ष जताते हुए सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह ने झारखंड में भी इस प्रणाली को लागु करने की माँग झारखंड सरकार से की है।
बुधवार को सीजीपीसी कार्यालय में बयान जारी करते हुए भगवान सिंह ने कहा कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन रेड्डी की जितनी तारीफ़ की जाये कम है श्री रेड्डी ने ग्रंथीयों को अनुदान नहीं उचित सम्मान देने की घोषणा की है जिसका सीजीपीसी स्वागत और प्रशंसा करती है। सरदार भगवान सिंह ने कहा कि वे एक प्रतिनिधिमण्डल के साथ बहुत जल्द झारखंड के मुख्यमंत्री से मिलकर इसे झारखंड में भी लागू करने का निवेदन करेंगे।
भगवान सिंह ने कहा की आन्ध्र प्रदेश सरकार ने
सिख धार्मिक संस्थानों को प्रॉपर्टी टैक्स से भी छूट देने की घोषणा कर सिख समुदाय को सम्मान दिया है।
गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई एस जगन रेड्डी द्वारा आंध्र प्रदेश में पुरोहित पादरी एवं मौलवियों को अनुदान मिलता रहा है और अब उसमें गुरुद्वारों के ग्रंथीयों को भी जोड़ा जा रहा है।
साथ ही साथ सिख धार्मिक संस्थानों को प्रॉपर्टी टैक्स से भी छूट देने की घोषणा आंध्र प्रदेश मुख्यमंत्री ने की है और इसके साथ ही वहां गुरमुखी को लेकर भी निगम गठन पर हामी भरी गयी है।

खालसा फतेह मार्च में सड़क पर उमड़ा सिख संगत का जन सैलाब

जस्सा सिंह रामगढ़िया व बाबा फूला सिंह को जमशेदपुर की संगत ने याद कर दी श्रद्धांजलि

गतका, मोटरसाइकल ग्रुप, घुड़सवार, गुरुमुखी-दस्तार सिखलाई व निहंग जत्था रहे आकर्षण का केंद्र

जमशेदपुर में खालसा फतेह मार्च के दौरान टिनप्लेट से लेकर साकची गुरुद्वारा तक सिख संगत का जन सैलाब देखने को मिला। रविवार को जरनैल जस्सा सिंह रामगढ़िया की 300वीं शताब्दी और अकाली बाबा फूला सिंह 200वीं शताब्दी को समर्पित खालसा फतेह मार्च टिनप्लेट गुरुद्वारा से प्रारंभ हुआ।

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सिख समाज के प्रभुत्व शख्सियतों में सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के प्रधान सरदार भगवान सिंह सहित चेयरमैन सरदार शैलेंद्र सिंह, तख़्त श्री पटना साहिब के महासचिव सरदार इंद्रजीत सिंह, गुरमीत सिंह तोते, समाजसेवी अमरप्रीत सिंह काले, सीजीपीसी के महासचिव अमरजीत सिंह, सलाहकार गुरचरण सिंह बिल्ला, साकची गुरुद्वारा के प्रधान सरदार निशान सिंह, कोषाध्यक्ष गुरनाम सिंह बेदी, अमरजीत भामरा, उपाध्यक्ष चंचल सिंह समेत टिनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के ओहदेदार और सीजीपीसी के अन्य सदस्यों ने फतेह मार्च को रवानगी देने उपरांत पैदल मार्च करते हुए साकची गुरुद्वारा पहुंचे।

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इससे पूर्व जमशेदपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार व धालभूम अनुमंडलाधिकारी पीयूष सिन्हा ने टिनप्लेट गुरुद्वारा पहुँचकर माथा टेका।
फ़तेह मार्च में गतका टीम मोटरसाइकिल ग्रुप, दस्तार व गुरमुखी सिखलाई ग्रुप, निहंग जत्थेबंदी आकर्षण का केंद्र रहे इसके अलावा घुड़सवारों का ग्रुप भी फतेह मार्च की शोभा बढ़ा रहे थे।

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सेंट्रल सिख नौजवान सभा ने ट्रैफ़िक कंट्रोलिंग की भूमिका बख़ूबी निभाई। नौजवान सभा ने इस बात का ख्याल रखा कि पालकी साहिब में संगत को प्रसाद लेने में किसी प्रकार की दिक्कत न हो और फतेह मार्च सुचारु रूप से ससमय साकची गुरुद्वारा पहुचें।
मुख्य आकर्षण का केंद्र सुसज्जित पालकी साहिब में टिनप्लेट से लेकर साकची गुरुद्वारा साहिब में समापन तक शब्द-कीर्तन होता रहा। संगत ने पालकी साहिब में सुशोभित गुरु ग्रंथ साहिब को माथा टेक कर प्रसाद ग्रहण किया। साकची हावड़ा ब्रिज पहुंचने पर फतेह मार्च का भव्य स्वागत आतिशबाजी चलाकर किया गया।
फतेह मार्च ससमय साकची गुरुद्वारा पहुंचा जहां अकाली दल के सदस्यों ने आनंद साहिब के पाठ के उपरांत मार्च समाप्ति की अरदास की। सीजीपीसी कार्यालय में संगत के लिये लंगर की व्यवस्था कि गई जहां संगत ने प्रसादरूपी लंगर छक कर गुरूघर की खुशियाँ प्राप्त की।

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फतेह मार्च के सफल आयोजन पर भगवान सिंह ने सीजीपीसी के तमाम सदस्यों का विशेषरूप से समूह साध संगत का तह-ए-दिल से स्वागत व धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि ख़ालसा फतेह मार्च को सिख संगत ने ही उम्मीद से ज्यादा सफल बनाया है।
जमशेदपुर सहित घाटशिला और चाईबासा की सिख संगत भी फ़तेह मार्च के दौरान जस्सा सिंह रामगढ़िया को श्रद्धांजलि देने जमशेदपुर पहुंची थी।

प्रधानगी सेवा मिलने पर सीजीपीसी ने तारा सिंह का किया सम्मान

सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी (सीजीपीसी) के प्रधान सरदार भगवान सिंह ने सोनारी गुरुद्वारा के चुने गए नए प्रधान सरदार तारा सिंह को सेवा मिलने पर सम्मानित किया।
मंगलवार को सीजीपीसी के अन्य सदस्यों में मुख्य रूप से महासचिव अमरजीत सिंह, सलाहकार गुरचरण सिंह बिल्ला, कोषाध्यक्ष गुरनाम सिंह बेदी व चंचल सिंह सरदार भगवान सिंह की अगुवाई में सोनारी गुरुद्वारा पहुंचकर नवनियुक्त प्रधान तारा सिंह को अगले तीन वर्ष की सेवा मिलने पर शॉल ओढ़ाकर और सिरोपा देकर सम्मानित किया।
सेवा मिलने के बधाई देते हुए सरदार भगवान सिंह ने कहा कि उन्हें आशा ही नहीं बल्कि पूर्ण विश्वास है कि सरदार तारा सिंह सिखों की साख को और ऊपर बुलंदियों तक ले जाएंगे। महासचिव अमरजीत सिंह और सलाहकार गुरचरण सिंह बिल्ला ने भी तारा सिंह को बधाई देते हुए उनके सफल कार्यकाल की कामना की

मनमत विकारों से निकालकर गुरमत से जोडती है सिख रहत मर्यादा: भगवान सिंह

हरविंदर जमशेदपुरी ने सिख रहत मर्यादा की 1000 प्रतियां सीजीपीसी को सौंपी

गुरुघरों में मर्यादा लागू होने से सिखों में वहम-भरम और कर्मकांडो से निश्चित मुक्ति मिलेगी: जमशेदपुरी

जमशेदपुर के सिख प्रचारक हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने सीजीपीसी के अध्यक्ष सरदार भगवान सिंह को सिख रहत-मर्यादा की 1000 प्रतियां सौंप कर जमशेदपुर में सिखों की सर्वोच्च संस्था से अपील की है कि रहत मर्यादा को सभी गुरद्वारों में यथाशीघ्र लागू करवाने की कवायद शुरू की जाये।
गुरुवार को सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के कार्यालय में गुरनाम सिंह बेदी, गुरपाल सिंह टिंकु, जगजीत सिंह विंकल, सुखविंदर सिंह राजू, पलविंदर सिंह एवं तरनप्रीत सिंह बन्नी की उपस्थिति में हरविंदर सिंह जमशेदपुरी ने सरदार भगवान सिंह को सिख रहत मर्यादा की प्रतियां भेंट की।

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इस अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए भगवान सिंह ने कहा कि सिख एक अलग कौम है और कौम की अपनी अलग परम्पराएं हैं इसलिए हर सिख का कर्तव्य होना चाहिए की रहत मर्यादा में लिखे हर एक शब्द का वो अक्षरः पालन करे। सिख रहत मर्यादा इंसान को मनमत विकारों के निकालकर गुरमत से जोड़ने का काम करती है। उन्होने कहा की सिख सिद्धांतों में जन्म से लेकर मृत्यु तक करने वाले कार्यों में फ़र्क साफ़ समझ आ जायेगा। बच्चों के जन्म संस्कार से लेकर मृतक संस्कार में एक सिख को क्या-क्या करना चाहिये रहत मर्यादा में साफ़ दर्शाया गया है।
हरविंदर ने कहा गुरुघरों में मर्यादा लागू होने से सिखों में वहम-भरम और कर्मकांडो से निश्चित मुक्ति मिलेगी और समाज में एक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा। जमशेदपुरी ने कहा की सिख रहत मर्यादा में सबसे पहले सिख की तारीफ़ का ज़िक्र है और बताया गया है कि आखिर एक सिख की परिभाषा क्या है। इसे पढ़ने के बाद हर सिख का जीवन में बदलाव आना निश्चित है बशर्ते इसे लागू किया जाये।

रामनवमी 2023 : इस मुहूर्त में करें राम नवमी पूजा, जाने राशि के हिसाब से क्या लगाएं भोग, पूजन विधि और सामग्री

हर साल चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी को भगवान राम का जन्म उत्सव बेहद धूमधाम से मनाया जाता है। इसे राम नवमी के नाम से जाना जाता है। इस साल रामनवमी 30 मार्च को है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में यानी दोपहर के समय हुआ था। इसलिए राम नवमी की पूजा इसी मुहूर्त में की जाती है। सनातन धर्म के लोगों के लिए रामनवमी का उत्सव बहुत खास होता है। जिसे सभी लोग बेहद भक्ति भाव और आनंद के साथ मनाते हैं। इस दिन कई लोग व्रत उपवास करते हैं और भगवान राम के बाल स्वरूप की पूजा करते हैं। इस दिन कन्या पूजन भी किया जाता है। लोग अपने घर में कन्याओं को बुलाकर उन्हें हलवा, पूरी, खीर और फल मिठाइयां आदि अर्पित करते हैं। दरअसल इस दिन नौ कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। राम नवमी के दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री स्वरूप की पूजा होती है।

राम नवमी पूजा सामग्री

राम दरबार की तस्वीर, रौली, श्रीराम की पीतल या चांदी की मूर्ति, अभिषेक के लिए दूध, दही, शहद, शक्कर, गंगाजल, मौली, चंदन, अक्षत, कपूर, फूल, माला, सिंदूर, मिठाई, पीला वस्त्र, धूप, दीप, पान, लौंग, इलायची, अबीर, गुलाल, ध्वजा, केसर, पंचमेवा, पांच फल, हल्दी, इत्र, तुलसी दल, सुंदरकांड या रामायण की पुस्तक।

रामनवमी की सरल पूजा विधि

★ रामनवमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठ जाएं और स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लें।
★ भगवान राम का ध्यान करें और सच्चे मन से उनकी भक्ति करें।
★ फिर दोपहर 12 के करीब शुभ मुहूर्त में राम जी की पूजा शुरू करें।
★ राम नवमी पर श्री राम के बालरूप की पूजा की जाती है।
★ रामलला का श्रृंगार करें और उन्हें फूलों से सजाएं।
★ फिर उन्हें झुले में विराजमान करके, झुले को भी सजा लें।
★ इसके बाद एक ताबें का कलश लें उसमें आम के पत्ते, नरियल, पान आदि रखें। फिर इस कलश को चावल के ढेर पर स्थापित कर दें।
★ कलश के पास चौमुखी दीपक जला लें।
★ फिर श्री राम को खीर, फल, मिठाई, पंचामृत, कमल, तुलसी और फूल माला अर्पित करें।
★ फिर विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
★ इस दिन पंचामृत के साथ पीसे हुए धनिये में गुड़ मिलाकर प्रसाद बनाकर बांटा जाता है।

रामनवमी के मंत्र

★ ॐ रामभद्राय नम:
★ ॐ रामचंद्राय नम:
★ ॐ नमो भगवते रामचंद्राय
★ रां रामाय नम:

राम नवमी कथा

त्रेता युग के समय अयोध्या के राजा दशरथ अपनी तीन पत्नियों कौशल्या, केकई, और सुमित्रा के साथ रहते थे। उनके जीवन में किसी चीज की कमी नहीं थी लेकिन फिर भी वे परेशान रहते थे। उनके दुख का कारण था उनकी संतान का न होना। राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी। एक दिन उन्होंने संतान प्राप्ति के लिए ऋषि वशिष्ठ के सुझाव पर पुत्रकामेश्ती यज्ञ किया। इस यज्ञ को ऋषि ऋष्यशृंग ने संपन्न कराया था। इस यज्ञ के परिणाम स्वरुप अग्निदेव राजा दशरथ के सामने प्रकट हुए और उन्हें दिव्य खीर का एक कटोरा प्रदान किया। उन्होंने राजा दशरथ से खीर को अपनी तीनों पत्नियों के बीच बांटने की बात कही।

ऐसे में राजा दशरथ ने आधी खीर अपनी बड़ी पत्नी कौशल्या को और आधी खीर अपनी दूसरी पत्नी केकई को दे दी। वहीं इन दोनों ही रानियों ने अपनी खीर का कुछ हिस्सा रानी सुमित्रा को भी दे दिया। बताया जाता है इसके बाद चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन कौशल्या ने राम को, केकई ने भरत को और सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया। कहते हैं तभी से इस दिन को रामनवमी के रूप में मनाई जाने की परंपरा की शुरुआत हुई।

राम नवमी 2023 पर भगवान राम को राशि अनुसार लगाएं भोग

राशि भोग
★ मेष : अनार या गुड़ की मिठाई
★ वृषभ : सफेद रंग का रसगुल्ला
★ मिथुन : मीठा पान
★ कर्क : खीर का भोग
★ सिंह : मोती चूर के लड्डू या बेल फल
★ कन्या : हरे रंग का फल
★ तुला : काजू कतली मिठाई
★ वृश्चिक : हलवा-पूरी
★ धनु : बेसन का हलवे या मिठाई
★ मकर : सूखे मेवे
★ कुंभ : काले अंगूर और चना-हलवा
★ मीन : बेसन के लड्डू

राम नवमी पर क्या करें और क्या न करें

★ सूर्योदय से पहले उठकर गंगा नदी में स्नान करें।
★ अगर नदी स्नान संभव न हो तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगा मिलाकर स्नान कर लें। इससे आपके पिछले जन्म के पाप धुल जाएंगे।
★ भगवान राम की विधि विधान पूजा करें।
★ कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार दें।
★ इस दिन माता रानी को लाल चुनरी, लाल कपड़े, श्रृंगार सामग्री चढ़ाएं। साथ ही हलवा पूरी का भोग लगाएं।
★ इस दिन क्रोध न करें।
★ किसी का अपमान न करें।
★ शराब और तामसिक भोजन का सेवन ना करें।

    राम नवमी के नियम

    इस दिन ब्रह्मा मुहूर्त में उठकर नदी स्नान करने की परंपरा है। अगर ऐसा कर पाना संभव न हो तो घर के नहाने के पानी में ही थोड़ा सा गंगाजल डाल लें और उससे स्नान कर लें। इसके बाद भगवान राम और देवी दुर्गा की पूजा शुरू करें। इस दिन कन्याओं को भोजन कराएं और हवन भी करें। इसके साथ ही राम नवमी पर राम रक्षा स्त्रोत, राम मंत्र, और रामायण के बालकांड का पाठ करें।

    चैत्र नवरात्रि 2023 : नवरात्रि के आठवें दिन होती है माँ महागौरी की पूजा, जाने क्या है पूजा विधि, मंत्र और आरती

    नवरात्रि में दुर्गा पूजा के दौरान अष्टमी पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन मां दुर्गा के महागौरी रूप का पूजन किया जाता है। सुंदर, अति गौर वर्ण होने के कारण इन्हें महागौरी कहा जाता है।

    पूजा विधि

    • नवरात्रि के आठवें दिन, शक्ति स्वरूपा महागौरी का दिन होता है।
    • मां की आराधना हेतु सर्वप्रथम देवी महागौरी का ध्यान करें।
    • हाथ जोड़कर इस मंत्र का उच्चारण करें-

    ‘सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
    सेव्यामाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥’

    • इस दिन कन्या पूजन और उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराने का अत्यंत महत्व है।
    • सौभाग्य प्राप्‍ति और सुहाग की मंगल कामना लेकर मां को चुनरी भेंट करने का भी इस दिन विशेष महत्व है।
    • इस मंत्र के उच्चारण के पश्चात महागौरी देवी के विशेष मंत्रों का जाप करें और मां का ध्यान कर उनसे सुख, सौभाग्य हेतु प्रार्थना करें।
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    देवी महागौरी के मंत्र

    ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

    • श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
      महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।
    • या देवी सर्वभू‍तेषु मां गौरी रूपेण संस्थिता।
      नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    महागौरी स्तोत्र

    सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
    ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
    सुख शान्तिदात्री धन धान्य प्रदीयनीम्।
    डमरूवाद्य प्रिया अद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
    त्रैलोक्यमंगल त्वंहि तापत्रय हारिणीम्।
    वददं चैतन्यमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥

    महागौरी ध्यान मंत्र

    वन्दे वांछित कामार्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
    सिंहरूढ़ा चतुर्भुजा महागौरी यशस्वनीम्॥
    पूर्णन्दु निभां गौरी सोमचक्रस्थितां अष्टमं महागौरी त्रिनेत्राम्।
    वराभीतिकरां त्रिशूल डमरूधरां महागौरी भजेम्॥
    पटाम्बर परिधानां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
    मंजीर, हार, केयूर किंकिणी रत्नकुण्डल मण्डिताम्॥
    प्रफुल्ल वंदना पल्ल्वाधरां कातं कपोलां त्रैलोक्य मोहनम्।
    कमनीया लावण्यां मृणांल चंदनगंधलिप्ताम्॥

    महागौरी कवच

    ओंकारः पातु शीर्षो मां, हीं बीजं मां, हृदयो।
    क्लीं बीजं सदापातु नभो गृहो च पादयो॥
    ललाटं कर्णो हुं बीजं पातु महागौरी मां नेत्रं घ्राणो।
    कपोत चिबुको फट् पातु स्वाहा मा सर्ववदनो॥

    अष्टमी के दिन महागौरी की आराधना इस तरह करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं, समस्त पापों का नाश होता है, सुख-सौभाग्य की प्राप्‍ति होती है और हर मनोकामना पूर्ण होती है।

    माँ महागौरी की आरती

    जय महागौरी जगत की माया।
    जया उमा भवानी जय महामाया।।
    हरिद्वार कनखल के पासा।
    महागौरी तेरा वहां निवासा।।
    चंद्रकली और ममता अंबे।
    जय शक्ति जय जय मां जगदंबे।।
    भीमा देवी विमला माता।
    कौशिकी देवी जग विख्याता।।
    हिमाचल के घर गौरी रूप तेरा।
    महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा।।
    सती ‘सत’ हवन कुंड में था जलाया।
    उसी धुएं ने रूप काली बनाया।।
    बना धर्म सिंह जो सवारी में आया।
    तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया।।
    तभी मां ने महागौरी नाम पाया।
    शरण आनेवाले का संकट मिटाया।।
    शनिवार को तेरी पूजा जो करता।
    मां बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता।।
    भक्त बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो।
    महागौरी मां तेरी हरदम ही जय हो।।

    चैत्र नवरात्रि 2023 : नवरात्रि के सातवें दिन करें माँ कालरात्रि की पूजा, जाने पूजा विधि

    नवरात्रि के सातवें दिन दुर्गाजी की सातवीं शक्ति देवी कालरात्रि की पूजा का विधान है। मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी भी कहा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार देवी कालरात्रि शनि ग्रह को नियंत्रित करती हैं अर्थात इनकी पूजा से शनि के दुष्प्रभाव दूर होते हैं। दुर्गा पूजा के दिन साधक का मन ‘सहस्त्रार चक्र’ में स्थित रहता है। उसके लिए ब्रह्माण्ड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। इस चक्र में स्थित साधक का मन पूरी तरह से माँ कालरात्रि के स्वरूप में स्थित रहता है। यह शुभंकरी देवी हैं इनकी उपासना से होने वाले शुभों की गणना नहीं की जा सकती।

    मां का स्वरूप

    पुराणों के अनुसार देवी दुर्गा ने राक्षस रक्तबीज का वध करने के लिए कालरात्रि को अपने तेज से उत्पन्न किया था। इनकी उपासना से प्राणी सर्वथा भय मुक्त हो जाता है। इनके शरीर का रंग घने अन्धकार की तरह एकदम काला है और सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है व इनके तीन नेत्र हैं जो ब्रह्माण्ड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के सामान चमकीली किरणें प्रवाहित होती रहती हैं।इनकी नासिका के श्वास से अग्नि की भयंकर ज्वालाएं निकलती रहती हैं एवं इनका वाहन गर्दभ है।इनके ऊपर उठे हुए दाहिने हाथ की वर मुद्रा से सभी को वर प्रदान करती हैं तथा दाहिनी तरफ का नीचे वाला हाथ अभय मुद्रा में है।बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में लोहे का काँटा तथा नीचे वाले हाथ में खडग धारण किए हुए हैं। माँ कालरात्रि का स्वरुप देखने में अत्यंत भयानक है,लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं।इसी कारण इनका एक नाम शुभंकरी भी है अतः इनसे भक्तों को किसी भी प्रकार भयभीत अथवा आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है।

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    पूजा फल

    माता कालरात्रि अपने उपासकों को काल से भी बचाती हैं अर्थात उनकी अकाल मृत्यु नहीं होती।इनके नाम के उच्चारण मात्र से ही भूत,प्रेत,राक्षस और सभी नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।माँ कालरात्रि दुष्टों का विनाश करने वाली हैं एवं ये ग्रह-बाधाओं को भी दूर करने वाली हैं। इनके उपासक को अग्नि-भय, जल-भय, जंतु-भय, शत्रु-भय, रात्रि-भय आदि कभी नहीं होते। अतः हमें निरंतर इनका स्मरण,ध्यान और पूजन करना चाहिए। सभी व्याधियों और शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए माँ कालरात्रि की आराधना विशेष फलदायी है।

    पूजा विधि

    कलश पूजन करने के उपरांत माता के समक्ष दीपक जलाकर रोली, अक्षत,फल,पुष्प आदि से पूजन करना चाहिए। देवी को लाल पुष्प बहुत प्रिय है इसलिए पूजन में गुड़हल अथवा गुलाब का पुष्प अर्पित करने से माता अति प्रसन्न होती हैं। मां काली के ध्यान मंत्र का उच्चारण करें, माता को गुड़ का भोग लगाएं तथा ब्राह्मण को गुड़ दान करना चाहिए।

    ध्यान मंत्र-

    एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्त शरीरिणी॥
    वामपादोल्लसल्लोह लताकण्टकभूषणा।
    वर्धन मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

    माँ की आरती

    कालरात्रि जय जय महाकाली।
    काल के मुंह से बचाने वाली।।
    दुष्ट संहारिणी नाम तुम्हारा।
    महा चंडी तेरा अवतारा।।
    पृथ्वी और आकाश पर सारा।
    महाकाली है तेरा पसारा।।
    खंडा खप्पर रखने वाली।
    दुष्टों का लहू चखने वाली।।
    कलकत्ता स्थान तुम्हारा।
    सब जगह देखूं तेरा नजारा।।
    सभी देवता सब नर नारी।
    गावे स्तुति सभी तुम्हारी।।
    रक्तदंता और अन्नपूर्णा।
    कृपा करे तो कोई भी दुःख ना।।
    ना कोई चिंता रहे ना बीमारी।
    ना कोई गम ना संकट भारी।।
    उस पर कभी कष्ट ना आवे।
    महाकाली मां जिसे बचावे।।
    तू भी ‘भक्त’ प्रेम से कह,
    कालरात्रि मां तेरी जय।।

    चैत्र नवरात्रि 2023 : नवरात्रि का आज छठा दिन, करें माँ कात्यायनी की आराधना, जाने पूरी विधि

    नवरात्रि के छठवें दिन देवी के कात्यायनी स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘आज्ञा चक्र’ में स्थित होता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है।परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्त को सहज भाव से मां कात्यायनी के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।

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    मां का स्वरूप
    मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं,इनका स्वरूप अत्यंत ही भव्य और दिव्य है। इनका वर्ण स्वर्ण के समान चमकीला और भास्वर है। शेर पर सवार मां की चार भुजाएं हैं, इनके बायें हाथ में कमल और तलवार व दाहिनें हाथों में स्वास्तिक व आशीर्वाद की मुद्रा अंकित है। भगवान कृष्ण को पाने के लिए व्रज की गोपियों ने इन्ही की पूजा कालिंदी नदी के तट पर की थी।ये ब्रज मंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में प्रतिष्ठित हैं।

    कौन हैं मां कात्यायनी
    कत नामक एक प्रसिद्द महर्षि थे,उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्व प्रसिद्द महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक बड़ी कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी कि मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। कुछ काल पश्चात जब दानव महिषासुर का अत्याचार पृथ्वी पर बहुत अधिक बढ़ गया था तब भगवान ब्रह्मा,विष्णु, महेश तीनों ने अपने-अपने तेज़ का अंश देकर महिषासुर के विनाश के लिए एक देवी को प्रकट किया। महर्षि कात्यायन ने सर्वप्रथम इनकी पूजा की और देवी इनकी पुत्री कात्यायनी कहलाईं।

    पूजाविधि
    दुर्गा पूजा के छठे दिन भी सर्वप्रथम कलश व देवी के स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा कि जाती है। पूजा की विधि शुरू करने पर हाथों में सुगन्धित पुष्प लेकर देवी को प्रणाम कर देवी के मंत्र का ध्यान करना चाहिए। मां को श्रृंगार की सभी वस्तुएं अर्पित करें। मां कात्यायनी को शहद बहुत प्रिय है इसलिए इस दिन मां को भोग में शहद अर्पित करें। देवी की पूजा के साथ भगवान शिव की भी पूजा करनी चाहिए।

    पूजा फल
    देवी भागवत पुराण के अनुसार देवी के इस स्वरूप की पूजा करने से शरीर कांतिमान हो जाता है। इनकी आराधना से गृहस्थ जीवन सुखमय रहता है। मां कात्यायिनी की भक्ति और उपासना द्वारा मनुष्य को बड़ी सरलता से अर्थ, धर्म, काम,मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति हो जाती है। उसके रोग,शोक, संताप और भय आदि सर्वथा नष्ट हो जाते हैं।

    किनको होगा लाभ
    जिनके विवाह में विलम्ब हो रहा हो या जिनका वैवाहिक जीवन सुखी नहीं है वे जातक विशेष रूप से मां कात्यायिनी की उपासना करें,लाभ होगा।

    स्तुति मंत्र
    या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

    चंद्र हासोज्जवलकरा शार्दूलवर वाहना|
    कात्यायनी शुभंदद्या देवी दानवघातिनि||

    आरती

    जय जय अम्बे जय कात्यानी।
    जय जगमाता जग की महारानी।।
    बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
    वहा वरदाती नाम पुकारा।।
    कई नाम है कई धाम है।
    यह स्थान भी तो सुखधाम है।।
    हर मंदिर में ज्योत तुम्हारी।
    कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।।
    हर जगह उत्सव होते रहते।
    हर मंदिर में भगत है कहते।।
    कत्यानी रक्षक काया की।
    ग्रंथि काटे मोह माया की।।
    झूठे मोह से छुडाने वाली।
    अपना नाम जपाने वाली।।
    बृह्स्पतिवार को पूजा करिए।
    ध्यान कात्यानी का धरिये।।
    हर संकट को दूर करेगी।
    भंडारे भरपूर करेगी।।
    जो भी माँ को ‘चमन’ पुकारे।
    कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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