आदित्यपुर : सरायकेला खरसावां जिले आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया के फेज 6 स्थित बालाजी कृष्णा इंजीटेक में बुधवार को अचानक लगने से कंपनी में काम कर रहे करीब सात मजदूर बुरी तरह से झुलस गए है. सभी मजदूरों को टाटा मुख्य अस्पताल ले जाया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है. सूचना मिलते ही झारखंड अग्निशमन विभाग की एक गाड़ी मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने में जुट गई है, हालांकि समाचार लिखे जाने तक आग पर काबू नहीं पाया जा सका है.
आग कैसे लगी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है मिली जानकारी के अनुसार कंपनी के हीट ट्रीटमेंट मशीन के तेल लीकेज के दौरान अचानक चिंगारी भड़की और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया. इसकी जद में कंपनी में काम कर रहे सात मजदूर आ गए. वही इस अगलगी से कंपनी को भी भारी नुकसान होने का अनुमान है, हालांकि इस संबंध में कंपनी प्रबंधन की ओर से किसी तरह का भी कोई बयान जारी नहीं किया गया है. वहीं घायलों में ललन सिंह, सोमा जमुदा, दिलीप मुर्मू, अजय टांडी, सावन सोरेन, श्रीराम तप्पे शामिल है.
झारखण्ड : चतुर्थवर्गीय कर्मचारी से लेकर डीजीपी तक करीब 66 हजार पुलिसकर्मियों को भारतीय स्टेट बैंक से मुफ्त में 50 से 60 लाख रुपये का बीमा का लाभ मिलेगा। इसका नाम पुलिस सैलरी पैकेज दिया गया है। झारखंड पुलिस के 95 प्रतिशत कर्मियों का खाता एसबीआइ में है। इसी के एवज में बिना कोई प्रीमियम दिये उक्त लाभ पुलिसकर्मियों को मिलेगा। पुलिस सैलरी पैकेज के लिए झारखंड पुलिस व एसबीआइ के बीच एमओयू हुआ। (जारी…)
जाने किस स्थिति में कितना मिलेगा बीमा
पुलिस मुख्यालय सभागार में हुए एमओयू पर डीआइजी बजट शम्स तबरेज व डीजीएम देवेश मित्तल ने हस्ताक्षर किये। पुलिस सैलरी पैकेज में व्यक्तिगत दुर्घटना मृत्यु बीमा 50 लाख, स्थायी पूर्ण विकलांगता पर 50 लाख, स्थायी आंशिक विकलांगता पर 30 लाख रुपये मिलेंगे।
वायुयान दुर्घटना होने पर एक करोड़, व्यक्तिगत दुर्घटना में मृत्यु हाेने पर आश्रित बच्चों की उच्चतर शिक्षा के लिए बीमा राशि 10 लाख रुपये व अविवाहित बच्चों के विवाह के लिए भी बीमा राशि अधिकतम 10 लाख रुपये देने का प्रावधान है। नक्सली,उग्रवादी या अपराधियों के हमले में शहीद होने पर आश्रित को अतिरिक्त 10 लाख देने का प्रावधान किया गया है।
जमशेदपुर : बी सुशीला देवी जीवन के इस पड़ाव में शांति और अपनों के साथ की उम्मीद कर रही थीं, लेकिन आज वह और उनका बेटा अपने ही घर में खौफ के साये में जीने को मजबूर हैं। दामाद की धोखाधड़ी, बैंक के एक जिम्मेदार अधिकारी की कथित संलिप्तता और पुलिस प्रशासन की लचर कार्यशैली ने एक पूरे परिवार को मानसिक, आर्थिक और शारीरिक रूप से तोड़कर रख दिया है।
₹45.08 लाख का गबन: जून 2025 में हुआ खुलासा
मामले की शुरुआत तब हुई जब बी. सुशीला देवी के दामाद एस. योगेंद्र राव के व्यवहार में अचानक बदलाव आने लगा। शक होने पर जब सुशीला देवी ने अपने बैंक ऑफ इंडिया (टेल्को ब्रांच) के अकाउंट का विवरण निकाला, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई।
अकाउंट से कुल ₹45,08,000 की बड़ी रकम गायब थी। जांच में आरोप सामने आया कि एस. योगेंद्र राव ने सुशीला देवी की बेटी एस. वी. वी. लक्ष्मी को ढाल बनाकर इस पूरे गबन को अंजाम दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरी धोखाधड़ी में बैंक ऑफ इंडिया, टेल्को ब्रांच के तत्कालीन चीफ मैनेजर की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जिनकी मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी रकम का गबन संभव नहीं लगता।
आरोप है कि गबन किए गए इन्हीं पैसों से योगेंद्र राव ने अपना एक मकान भी बनवा लिया और काम निकल जाने के बाद अपनी ही बुजुर्ग सास को मारपीट कर घर से बाहर निकाल दिया।
बिरसानगर थाना की भूमिका संदिग्ध, 8 महीने से फाइल धूल फांक रही
धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद पीड़िता सुशीला देवी ने 24 दिसंबर 2025 को तत्कालीन एसएसपी से मुलाकात कर न्याय की गुहार लगाई थी। लेकिन अफसोस, महीनों बीत जाने के बाद भी उन्हें सिर्फ खोखले आश्वासन ही मिले।
मामला बिरसानगर थाना में बीते 8 महीनों से लंबित है। केस के इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) लालचंद बेदिया पर पीड़िता पक्ष ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि:
• आईओ द्वारा अब तक कोई ठोस या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई है।
• शिकायतकर्ताओं को थाने से कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता।
• पीड़िता पक्ष का सीधा आरोप है कि जांच अधिकारी आरोपियों पर कार्रवाई करने के बजाय हिंसा और दबंगई को बढ़ावा दे रहे हैं।
इंसाफ मांगने पर मिली मारपीट और धमकी
हद तो तब हो गई जब अपनी ही गाढ़ी कमाई गंवा चुकी बी. सुशीला देवी और उनके बड़े बेटे के साथ योगेंद्र राव और उसके साथियों ने मारपीट की। इस हिंसक वारदात की शिकायत भी तुरंत पुलिस और प्रशासन से की गई, लेकिन वहां भी उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी।
पीड़ित परिवार के अनुसार, आरोपी एस. योगेंद्र राव आए दिन शराब के नशे में धुत होकर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज करता है। सुशीला देवी के बड़े बेटे ने बताया कि वे लोग लगातार डर और आतंक के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल अपनी और अपनी माँ की सुरक्षा की गुहार लगाई है।
नए एसएसपी से उम्मीद की किरण
हाल ही में (दो दिन पूर्व) पीड़ित परिवार ने जमशेदपुर के नए एसएसपी से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई। नए एसएसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया है कि:
• इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा।
• कार्य में लापरवाही बरतने वाले इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर (IO) के खिलाफ जांच/इन्क्वारी बैठाई जाएगी।
अब देखना यह है कि नए कप्तान द्वारा बी सुशीला देवी को न्याय मिलेगा या अभी भी उन्हें लंबी लड़ाई लड़नी होगी।
जमशेदपुर: इंकैब (केबल कंपनी) के कर्मचारियों और पूर्व कर्मचारियों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां उन्हें अपने क्लेम की हुई पूरी राशि मिलने का इंतजार है, वहीं दूसरी तरफ बिजली दर और सिक्योरिटी मनी में हुई भारी वृद्धि ने उनके समक्ष नया संकट खड़ा कर दिया है।
अब केबल टाउन क्षेत्र में स्थित सभी 1050 फ्लैट, क्वार्टर और बंगलों में रहने वाले कर्मचारियों-अधिकारियों को अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी।
प्रत्येक परिवार पर पड़ेगा ₹2,500 से ₹3,000 का अतिरिक्त भार
टाटा स्टील यूआईएसएल (TSUISL) पूरे इंकैब क्षेत्र को एक प्वाइंट मानकर बिजली कनेक्शन प्रदान करती है। इस बिजली आपूर्ति का प्रबंधन और वितरण स्थानीय 8 कमेटियों द्वारा किया जाता है। हाल ही में कंपनी प्रबंधन ने बिजली की दरों में बढ़ोतरी के साथ-साथ सिक्योरिटी मनी की राशि में भी इजाफा कर दिया है।
कमिटी पर असर: प्रत्येक कमेटी को लगभग ₹5 लाख से ₹8 लाख तक अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी जमा करने का निर्देश मिला है।
निवासियों पर प्रभाव: इस वृद्धि के कारण हर परिवार पर ₹2,500 से ₹3,000 तक का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
आगामी कदम: सभी 8 कमेटियां जल्द ही अपने-अपने क्षेत्रों के क्वार्टर व फ्लैट निवासियों के साथ बैठक कर इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा करेंगी।
इन 8 कमेटियों के अंतर्गत आती है बिजली आपूर्ति
न्यू केबल टाउन
ओल्ड केबल टाउन
न्यू डीएस फ्लैट
ओल्ड डीएस फ्लैट
डी-4 बंगला
ऑफिसर्स फ्लैट
हरिजन बस्ती
सी-टाइप सिक्योरिटी लाइन
सिक्योरिटी मनी न देने पर काटी गई थी बिजली
सिक्योरिटी मनी जमा न होने के कारण सोमवार (20 जुलाई) को कंपनी प्रबंधन द्वारा केबल टाउन क्षेत्र की बिजली काट दी गई थी। इसके बाद दो कमेटियों द्वारा तीन महीने का पोस्ट-डेटेड चेक (Post-Dated Cheque) जमा कराए जाने के बाद ही बिजली आपूर्ति बहाल हो सकी।
”केबल टाउन क्षेत्र में सिक्योरिटी मनी जमा नहीं करने पर बिजली काट दी गई थी। सांसद-विधायक की पैरवी के बावजूद कंपनी प्रबंधन ने छूट देने से इनकार कर दिया। इसलिए अब मजबूरी में सभी घरों से सिक्योरिटी मनी के रूप में अतिरिक्त राशि एकत्र कर जमा कराई जाएगी।”
जमशेदपुर: दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज और धक्का-मुक्की के विरोध में पूर्वी सिंहभूम जिला युवा कांग्रेस कमेटी ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
पूर्वी सिंहभूम जिला युवा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परविंदर सिंह के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त (DC) के माध्यम से देश के राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंपा।
“लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़”: परविंदर सिंह
ज्ञापन सौंपने के बाद युवा कांग्रेस अध्यक्ष परविंदर सिंह ने कहा कि हाल के दिनों में नीट पेपर लीक की घटनाओं ने देश के करोड़ों परीक्षार्थियों के भविष्य और विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई है। वर्षों की कठिन मेहनत के बावजूद परीक्षा प्रणाली से छात्रों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया है।
“पेपर लीक के सदमे के कारण कई होनहार छात्रों द्वारा आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाना अत्यंत चिंताजनक है। यह स्थिति पूरी शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर आंसू गैस छोड़ना और लाठीचार्ज करना पूरी तरह तानाशाही और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।” — परविंदर सिंह, अध्यक्ष (जिला कांग्रेस)
राष्ट्रपति से की गईं प्रमुख मांगें
युवा कांग्रेस ने राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में निम्नलिखित मांगों पर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया है:
निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच: नीट सहित हाल के सभी पेपर लीक मामलों की उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
पारदर्शी परीक्षा प्रणाली: भविष्य में किसी भी प्रकार की धांधली रोकने के लिए परीक्षा प्रबंधन को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाया जाए।
लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच: जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर बर्बरतापूर्वक बलप्रयोग करने वाले दोषी अधिकारियों को चिह्नित कर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
नैतिक जिम्मेदारी और इस्तीफे की मांग: परीक्षा प्रबंधन में गंभीर चूक की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तथा छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अपने पद से इस्तीफा दें।
प्रदर्शन में ये प्रमुख नेता रहे उपस्थित
उपायुक्त कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान युवा कांग्रेस के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें आशुतोष सिंह, फिरोज खान, संजीव राजन, रविंद्र मौर्या, बिरेंद्र तिवारी, राज किशोर, रियाजुद्दीन खान, रविन्द्र कुमार झा, राजेश कुमार और निखिल तिवारी सहित अन्य सदस्य मुख्य रूप से शामिल थे।
जमशेदपुर: शहर के बागबेड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत डीबी रोड पर गुरुवार सुबह हुए भीषण सड़क हादसे के बाद अब पीड़ित परिजनों में पुलिस प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। हादसे में गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में चल रहा है, जहाँ एक ओर इलाज के भारी-भरकम खर्च से परिजन परेशान हैं, वहीं दूसरी ओर आरोपी चालक की गिरफ्तारी न होने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।
8 लाख रुपये का बिल, पुलिस पर आरोपी को छोड़ने का आरोप
पीड़ित परिजनों के अनुसार, TMH प्रशासन द्वारा एक घायल के इलाज के लिए लगभग 8 लाख रुपये का बिल थमा दिया गया है, जिसे चुकाने में परिवार पूरी तरह असमर्थ है।
इसके साथ ही परिजनों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का दावा है कि:
हादसे के आरोपी चालक की पहचान अरुण के रूप में हुई है, जबकि कार मालिक का नाम अवधेश बताया जा रहा है।
घटना के बाद आरोपी खुद दूसरी गाड़ी में सवार होकर बागबेड़ा थाना पहुँचा था।
परिजनों द्वारा पहचान किए जाने के बावजूद पुलिस ने उसे हिरासत में नहीं लिया और न ही कोई पूछताछ की, जिसके बाद आरोपी आराम से थाना परिसर से निकल गया।
पुलिस की इस निष्क्रियता से आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने सड़क पर टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।
थाना प्रभारी पर दुर्व्यवहार का आरोप
गुरुवार शाम अस्पताल और थाना परिसर में परिजनों का भारी हुजूम देखने को मिला। परिजनों का आरोप है कि बागबेड़ा थाना प्रभारी ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और यहाँ तक कह दिया कि “वे खुद आरोपी को पकड़कर लाएं।”
हालाँकि, इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है और पुलिस की ओर से इस संबंध में कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
कैसे हुआ हादसा?
गौरतलब है कि गुरुवार सुबह करीब 7:00 बजे एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार कार ने सबसे पहले अपने बच्चों को स्कूल छोड़कर लौट रहे एक TVS XL सवार को जोरदार टक्कर मारी। इसके बाद कार बेकाबू होकर तीन अन्य लोगों को रौंदती चली गई।
कुल घायल: 4 लोग (सभी की स्थिति गंभीर)
कार की स्थिति: दुर्घटना के बाद चालक वाहन छोड़कर मौके से भाग निकला था, जिसे बाद में पुलिस ने जब्त कर लिया।
पुलिस का पक्ष
बागबेड़ा थाना पुलिस का कहना है कि दुर्घटनाग्रस्त कार को जब्त कर लिया गया है और मामले की गहनता से जाँच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों को आश्वस्त किया है कि फरार चालक को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कदमा स्थित डीबीएमएस (DBMS) इंग्लिश स्कूल के बाहर खड़ी कार में जोरदार टक्कर मारने के मामले में पुलिस ने अपनी जांच तेज कर दी है। पुलिस ने दुर्घटना में इस्तेमाल की गई इनोवा कार को जब्त कर लिया है और उसकी तकनीकी व दस्तावेजी जांच शुरू कर दी है।
CCTV फुटेज से खुले राज, चालक निकला नाबालिग
घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद पुलिस के हाथ महत्वपूर्ण साक्ष्य लगे हैं। सीसीटीवी फुटेज से साफ हो गया है कि एक तेज रफ्तार इनोवा कार ने वहां खड़ी कार को सीधी टक्कर मारी थी। पुलिस की शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि दुर्घटना के वक्त इनोवा कार को एक नाबालिग चला रहा था।
वाहन मालिक पर भी गिर सकती है गाज
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस दुर्घटना के मामले में कानूनी धाराओं के साथ-साथ मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि गाड़ी जानबूझकर नाबालिग को चलाने के लिए दी गई थी, तो इनोवा के वाहन स्वामी (Owner) के खिलाफ भी नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
20 जुलाई को हुआ था हादसा
गौरतलब है कि यह हादसा बीते 20 जुलाई को हुआ था। इनोवा की भीषण टक्कर से खड़ी कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी, वहीं कार चालक राजा सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।
सोनारी थाना क्षेत्र में सूदखोरी, मारपीट और पुलिसिया दबाव का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। कुम्हारपाड़ा निवासी एवं “एम.बी.ए. गोलगप्पावाला” के संचालक बजरंग प्रसाद ने पूर्वी सिंहभूम के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित ने आरोप लगाया है कि सोनारी थाना प्रभारी के संरक्षण में सूदखोर और पुलिस पदाधिकारी मिलकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और उनका व्यवसाय जबरन बंद करवा दिया गया है।
मूल राशि से अधिक चुकाने के बावजूद अतिरिक्त मांग
शिकायत के अनुसार, आर्थिक तंगी के कारण बजरंग प्रसाद ने मनीष सिंह नामक व्यक्ति से ₹1.70 लाख उधार लिए थे। इसके एवज में 10% मासिक ब्याज तय किया गया था और सुरक्षा के नाम पर दो हस्ताक्षरित (Signed) ब्लैंक चेक भी जमा करा लिए गए थे।
बजरंग प्रसाद का दावा है कि वे नगद और ऑनलाइन माध्यम से मूल राशि से अधिक (लगभग ₹2 लाख) चुका चुके हैं, जिसके पुख्ता साक्ष्य उनके पास मौजूद हैं। इसके बावजूद उनसे लगातार अतिरिक्त पैसों की अवैध मांग की जा रही है।
सादे कागज पर दस्तखत कराने का आरोप
पीड़ित का आरोप है कि बीते 11 फरवरी 2026 को सोनारी थाना में दबाव बनाकर उनसे एक सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए, जिसमें 4 महीने के भीतर ₹2 लाख और लौटाने की बात लिखवा ली गई।
ठेले पर पहुंचकर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी
मामला 21 जुलाई 2026 की शाम का है। बजरंग प्रसाद के अनुसार, शाम करीब 7:30 बजे मनीष सिंह, प्रकाश ठाकुर और बिष्टुपुर थाना में पदस्थापित पुलिस पदाधिकारी बलराम साहू उनके गोलगप्पा ठेले पर पहुंचे।
आरोप है कि इन लोगों ने बजरंग और उनके पिता के साथ गाली-गलौज व हाथापाई की और जबरन ठेला बंद करवा दिया। साथ ही, दोबारा दुकान लगाने पर जान से मारने व गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।
थाना प्रभारी और पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाने का आरोप
शिकायत पत्र में बजरंग प्रसाद ने सोनारी थाना प्रभारी मधुसूदन डे एवं पुलिस अवर निरीक्षक धनंजय कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ये अधिकारी उन्हें बार-बार थाना बुलाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे और सूदखोरों के पक्ष में दबाव बना रहे थे।
SSP से निष्पक्ष जांच और सुरक्षा की मांग
बजरंग प्रसाद ने जिले के वरीय पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आरोपी सूदखोरों व पक्षपात करने वाले पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने तथा उन्हें निर्भय होकर पुनः अपना गोलगप्पा ठेला संचालित करने की अनुमति प्रदान करने की मांग की है।
संपादकीय टिप्पणी: पुलिस प्रशासन से यह अपेक्षा की जाती है कि छोटे व्यवसायियों को सुरक्षा मिले और सूदखोरी जैसी कुप्रथाओं पर लगाम लगे। अब देखना होगा कि जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं।
बागबेड़ा कॉलोनी के कुंवर सिंह मैदान स्थित रोड नंबर-3 के निवासियों को अब जलभराव और टूटी सड़कों की समस्या से राहत मिलने जा रही है। पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता की त्वरित पहल पर पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (PHED) ने महज 24 घंटे के भीतर पाइपलाइन लीकेज मरम्मत, क्षतिग्रस्त स्लैब की मरम्मत और अधूरे पक्कीकरण का कार्य शुरू करवा दिया है।
क्या थी समस्या?
हाल ही में इंटर-कनेक्शन के बाद क्षेत्र के लगभग 50 घरों में जलापूर्ति तो बहाल कर दी गई थी, लेकिन मुख्य पाइपलाइन से लगातार हो रहे पानी के रिसाव के कारण सड़क पर जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। इसके अलावा क्षतिग्रस्त स्लैब के कारण हादसों का डर बना रहता था, जिससे स्थानीय राहगीरों और निवासियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
कार्रवाई का विवरण
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने पीएचईडी (PHED) के कार्यपालक अभियंता सुमित कुमार को एक मांग पत्र सौंपा था। पत्र में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई थी कि यदि संवेदक द्वारा तय समय सीमा के भीतर काम पूरा नहीं किया जाता, तो उसे ब्लैकलिस्ट (Blacklist) करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
मांग पत्र पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्यपालक अभियंता ने कनीय अभियंता आशुतोष को स्थल निरीक्षण कर तुरंत काम शुरू कराने का निर्देश दिया। निर्देश मिलते ही संवेदक ने मजदूर लगाकर लीकेज मरम्मत और पक्कीकरण का कार्य प्रारंभ करा दिया।
“मैं वादों में नहीं, धरातल पर काम करने में विश्वास रखता हूँ। क्षेत्र की जनता की समस्याओं का समाधान ही मेरी पहली प्राथमिकता है। त्वरित कार्रवाई के लिए मैं पीएचईडी (PHED) अधिकारियों और सहयोग के लिए स्थानीय जनता का आभार व्यक्त करता हूँ।”
— सुनील गुप्ता, पंचायत समिति सदस्य
स्थानीय लोगों में खुशी की लहर
वर्षों पुरानी समस्या का इतनी जल्दी समाधान होने पर स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है और सुनील गुप्ता के प्रयासों की जमकर सराहना की है। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि का ऐसा तत्पर रवैया ही क्षेत्र के विकास को नई दिशा देता है।
जमशेदपुर (तीसरी धारा न्यूज): मानगो और डिमना रोड क्षेत्र के निवासियों को जल्द ही नाली की गंदगी और जल जमाव की समस्या से बड़ी राहत मिलने जा रही है। मानगो नगर निगम की मेयर सुधा गुप्ता की विशेष पहल पर अब टाटा स्टील यूआइएसएल (पूर्व में जुस्को) की सफाई टीम नगर निगम क्षेत्र में मोर्चा संभालने जा रही है।
बुधवार से जुस्को का तकनीकी अमला और सफाई कर्मी पूरी तैयारी के साथ सड़कों पर उतरेंगे। इससे पूर्व मंगलवार को जुस्को की टीम ने नगर निगम के अधिकारियों के साथ मिलकर क्षेत्र के उन संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण किया, जहाँ अक्सर नालियाँ जाम हो जाती हैं।
संयुक्त अभियान में जुटेगा अमला
इस पूरे प्रोजेक्ट में नगर निगम के नियमित व ठेका सफाई कर्मचारियों के साथ-साथ जुस्को की विशेष टीम लगातार सक्रिय रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, जब तक पूरे इलाके को जल जमाव से मुक्त और साफ-सुथरा नहीं बना दिया जाता, तब तक यह सफाई अभियान निरंतर जारी रहेगा।
रंगीला वाइन शॉप से होगी शुरुआत
मानगो क्षेत्र में सफाई अभियान का आगाज डिमना रोड स्थित रंगीला वाइन शॉप के पास से होगा, जो आगे बढ़ते हुए मानगो चौक की दिशा में जाएगा। अभियान के तहत सबसे पहले देशबंधु लेन और दरभंगा डेयरी के आसपास होने वाले गंभीर जल जमाव की समस्या का प्राथमिकता के आधार पर समाधान किया जाएगा।
नालियों पर अतिक्रमण करने वालों को 24 घंटे का अल्टीमेटम
नगर निगम ने नालियों पर किए गए अवैध कब्जों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को क्षेत्र में माइकिंग कराकर अतिक्रमणकारियों को 24 घंटे के भीतर खुद से कब्जा हटाने का सख्त निर्देश दिया जाएगा। अल्टीमेटम की समय-सीमा समाप्त होते ही प्रशासन पुलिस बल के सहयोग से अतिक्रमण हटाएगा और नालियों की व्यापक सफाई सुनिश्चित करेगा।
जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी सरजामदा स्थित बड़ा सरजामदा तालाब के किनारे विधायक निधि से करीब 13 लाख रुपये की लागत से बन रहा 230 फीट लंबा आरसीसी (RCC) गार्डवाल पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सका और ताश के पत्तों की तरह ढह गया।
गार्डवाल गिरने के साथ ही तालाब की मेढ़ पर दूसरे विभाग द्वारा बनाई जा रही 10 फीट चौड़ी और 700 फीट लंबी सड़क का एक बड़ा हिस्सा भी पानी के तेज बहाव में बह गया। इस घटना को चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन प्रशासनिक सुध का आलम यह है कि अब तक न तो कोई विभागीय जांच टीम मौके पर पहुंची है और न ही संबंधित इंजीनियर या ठेकेदार ने स्थिति का जायजा लेना मुनासिब समझा है।
देर रात तेज आवाज के साथ ढहा निर्माण, आवागमन ठप
ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार देर रात करीब 2 बजे मूसलाधार बारिश के दौरान अचानक तेज आवाज हुई और गार्डवाल का बड़ा हिस्सा सड़क समेत भरभरा कर ढह गया। इस हादसे के कारण उत्तरी सरजामदा और शंकरपुर को जोड़ने वाली एकमात्र मुख्य सड़क पूरी तरह बंद हो गई है, जिससे दोनों गांवों का आपस में संपर्क पूरी तरह कट गया है। ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
घटिया निर्माण सामग्री और अनदेखी का आरोप
स्थानीय निवासियों ने निर्माण कार्य में बड़े पैमाने पर धांधली और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि:
निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया।
तय मानकों के अनुरूप सरिया (छड़) नहीं लगाया गया।
काम के दौरान कई बार गुणवत्ता को लेकर शिकायतें की गईं, लेकिन ठेकेदार ने विभागीय शह पर शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया।
इसके अलावा, तालाब से जल निकासी के लिए पुलिया का निर्माण होना तय था, लेकिन दो गांवों के बीच विवाद के कारण जल निकासी का सही इंतजाम नहीं किया जा सका। बारिश के दौरान पानी का दबाव अचानक बढ़ा और घटिया निर्माण के कारण गार्डवाल और सड़क दोनों बह गए, जिससे भारी मृदा अपरदन (मिट्टी का कटाव) भी हुआ है।
50 हजार की मछलियों पर मंडराया संकट:
तालाब के मालिक वारिस महतो ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि उन्होंने हाल ही में करीब 50 हजार रुपये की मछली का बीज तालाब में डाला था। गार्डवाल टूटने के कारण अब सारी मछलियों के बह जाने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार को बार-बार गुणवत्ता सुधारने को कहा गया था, पर किसी ने ध्यान नहीं दिया और न ही विभागीय इंजीनियर कभी मुआयना करने आए।
ग्रामीणों की मांग: उपायुक्त कराएं उच्चस्तरीय जांच
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार व संबंधित लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग की है।
मामले पर पक्ष-विपक्ष (बयान)
ठेकेदार का पक्ष: “दो गांवों के बीच जल निकासी को लेकर आपसी विवाद के कारण स्थायी समाधान नहीं निकल सका, इसी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जहां तक सड़क और गार्डवाल निर्माण की बात है, कार्य पूरी गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार विभागीय इंजीनियरों की निगरानी में कराया गया है।” — संतोष ओझा, ठेकेदार
“दो गांवों के बीच जल निकासी को लेकर आपसी विवाद के कारण स्थायी समाधान नहीं निकल सका, इसी वजह से यह स्थिति उत्पन्न हुई है। जहां तक सड़क और गार्डवाल निर्माण की बात है, कार्य पूरी गुणवत्ता और स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार विभागीय इंजीनियरों की निगरानी में कराया गया है।”
— संतोष ओझा, ठेकेदार
विभाग का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: “मुझे अभी इसकी जानकारी नहीं है, देखना पड़ेगा। फिलहाल मैं इसकी लागत और लंबाई के बारे में कुछ नहीं बता सकता।” — विजय भूषण, जूनियर इंजीनियर
“मुझे अभी इसकी जानकारी नहीं है, देखना पड़ेगा। फिलहाल मैं इसकी लागत और लंबाई के बारे में कुछ नहीं बता सकता।”
आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के वार्ड नंबर 28 के निवासियों के लिए 21 जुलाई की शाम एक ऐतिहासिक और राहत भरी सौगात लेकर आई। जिंदल कंपनी द्वारा संचालित घर-घर पेयजल आपूर्ति योजना के तहत की जा रही टेस्टिंग के दौरान जैसे ही शाम 4 बजे नलों से पानी की धार फूटी, पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई।
रोड नंबर 31 और 32 के लगभग हर घर तक पानी पहुँचा। हालांकि शुरुआती चरण में पानी कुछ मिट्टी युक्त था, लेकिन दशकों से पानी के गंभीर संकट से जूझ रहे स्थानीय लोगों के चेहरे पर नल से गिरता पानी देखकर अपार उत्साह और संतोष साफ नजर आया।
”50 साल का संकट खत्म हुआ”: अधिवक्ता ओम प्रकाश ने साझा किए पुराने दिन
वार्ड नंबर 31 के वरिष्ठ निवासी एवं अधिवक्ता ओम प्रकाश ने 57 वर्षों के अपने अनुभवों को साझा करते हुए आदित्यपुर के जल संकट के दर्दनाक दौर को याद किया:
शुरुआती दौर का संघर्ष: पहले पीएचईडी (PHED) द्वारा दिन में तीन बार केवल आधे-आधे घंटे के लिए पानी दिया जाता था। लोग पानी खींचने के लिए नलों के नीचे गड्ढे खोदकर बाल्टी से पानी भरते थे। धीरे-धीरे यह आपूर्ति घटकर दिन में एक बार पर सिमट गई।
जन-आक्रोश और मुकदमे: आपूर्ति ठप होने पर हजारों की भीड़ पीएचईडी कार्यालय या सीतारामपुर फिल्टर प्लांट पर प्रदर्शन करने पहुँच जाती थी। कई बार इंजीनियरों को जनता के आक्रोश का सामना करना पड़ता था और मामले मुकदमों तक पहुँच जाते थे।
पाताल पहुँच चुका भूजल: 1983-84 में यूनिसेफ के सहयोग से जो चापाकल लगे थे, तब 70-80 फीट पर पानी मिल जाता था। आज अंधाधुंध बोरिंग के कारण भूजल स्तर 600-700 फीट से भी नीचे चला गया है।
”50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों ने पानी की असली किल्लत और दर्द झेला है। आज नल से पानी गिरता देख हर कोई बेहद खुश है। अब हम सभी नागरिकों की जिम्मेदारी है कि इस जल का दुरुपयोग न करें और इसे सड़कों पर व्यर्थ न बहने दें।”
— ओम प्रकाश, अधिवक्ता (स्थानीय निवासी)
डीसी ने दिया 31 जुलाई 2026 का लक्ष्य, जिंदल कंपनी युद्धस्तर पर जुटी
जिंदल परिवार के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि आदित्यपुर-2 क्षेत्र के लगभग सभी वार्डों में जलापूर्ति की टेस्टिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।
क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत: गेल (GAIL) द्वारा गैस पाइपलाइन बिछाने के क्रम में कई स्थानों पर पेयजल पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है, जिसकी मरम्मत के लिए तकनीकी टीम दिन-रात काम कर रही है।
डेडलाइन पर जोर: सरायकेला-खरसावां के उपायुक्त (DC) श्री नीतीश कुमार द्वारा योजना को पूरी तरह सुचारू करने के लिए 31 जुलाई 2026 की समय-सीमा तय की गई है।
कंपनी के प्रतिनिधियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा दिए गए इस लक्ष्य को तय समय के भीतर पूरा करने के लिए उनकी टीम जी-जान से जुटी हुई है, ताकि जल्द ही पूरे आदित्यपुर को नियमित और स्वच्छ पेयजल मिल सके।