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भारत-न्यूजीलैंड के बीच ऐतिहासिक ‘फ्री ट्रेड एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर; व्यापार और रोजगार के खुलेंगे नए द्वार

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नई दिल्ली: भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को एक बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर कर द्विपक्षीय संबंधों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इस समझौते को “पीढ़ी में एक बार होने वाला समझौता” करार दिया है, जो दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और सेवाओं के परिदृश्य को पूरी तरह बदल देगा।n7101143051777278392998c42a216f5c57e2d5d5c2440a2934c78916e2af606ed3212a208018b7022a73ad

10 साल का इंतजार और रिकॉर्ड तोड़ वार्ता

​इस समझौते का औपचारिक रूप वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले की उपस्थिति में दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि 2010 में शुरू हुई यह वार्ता 2015 में रुक गई थी, लेकिन मार्च 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद इसे दिसंबर 2025 तक अंतिम रूप दे दिया गया। यह भारत के सबसे तेजी से संपन्न होने वाले समझौतों में से एक बन गया है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

भारतीयों के लिए क्या है खास? (रोजगार और सेवाएं)

​इस समझौते के तहत सेवाओं के क्षेत्र में भारत को बड़ी सफलता मिली है:

  • 5000 पेशेवरों को मौका: आईटी, शिक्षा और वित्तीय सेवाओं से जुड़े 5000 भारतीय पेशेवरों को न्यूजीलैंड में 3 साल तक काम करने का अवसर मिलेगा।
  • सांस्कृतिक और विशेष क्षेत्र: योग प्रशिक्षक, आयुष विशेषज्ञ, शेफ और संगीत शिक्षकों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार के रास्ते खुलेंगे।
  • आईटी और पर्यटन: इन क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों को नए निवेश और विस्तार के मौके मिलेंगे।

व्यापार: भारत को मिलेगी ‘ड्यूटी-फ्री’ पहुंच

​अब भारत से न्यूजीलैंड निर्यात होने वाले टेक्सटाइल, लेदर, प्लास्टिक और इंजीनियरिंग सामानों पर कोई सीमा शुल्क (Duty) नहीं लगेगा।

  • निवेश का लक्ष्य: अगले 15 वर्षों में न्यूजीलैंड से भारत में लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद है।
  • न्यूजीलैंड को लाभ: न्यूजीलैंड को भारत में अपने 54% निर्यात (मीट, ऊन, कोयला आदि) पर तुरंत ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा।

घरेलू हितों की सुरक्षा: डेयरी और कृषि क्षेत्र सुरक्षित

​भारतीय किसानों और छोटे उत्पादकों के हितों का ध्यान रखते हुए, सरकार ने डेयरी, चीनी और कुछ संवेदनशील धातुओं को इस समझौते से बाहर रखा है। सेब, कीवी और शहद जैसे उत्पादों पर भी नियंत्रण बरकरार रखा गया है ताकि घरेलू बाजार प्रभावित न हो।

रणनीतिक और आर्थिक महत्व

​साल 2024 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 2.4 अरब डॉलर रहा था, जिसके अब कई गुना बढ़ने की संभावना है। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत अब व्यापार के लिए अधिक सरल और भरोसेमंद देश बन चुका है, जो दुनिया के लिए एक प्रमुख ‘गेटवे’ है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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