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जमशेदपुर: शहर में रसोई गैस (LPG) की कृत्रिम किल्लत और कालाबाजारी की बढ़ती शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी के सख्त निर्देश पर गुरुवार को शहर की कई गैस एजेंसियों और गोदामों में ताबड़तोड़ औचक छापेमारी की गई। इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है।
छापेमारी अभियान का नेतृत्व धालभूम एसडीओ श्री अर्णव मिश्रा और एडीएम (विधि-व्यवस्था) श्री राहुल जी आनंद ने संयुक्त रूप से किया। प्रशासनिक टीम ने मानगो, डिमना, टेल्को और सिदगोड़ा जैसे प्रमुख शहरी इलाकों में स्थित गैस कार्यालयों और गोदामों की सघन जांच की।
जांच के दौरान इन बिंदुओं पर रहा मुख्य फोकस:
अभियान के दौरान सिदगोड़ा क्षेत्र में प्रशासन को एक बड़ी सफलता हाथ लगी। यहाँ एक गैस चूल्हा रिपेयरिंग की दुकान की आड़ में अवैध गैस रिफिलिंग का धंधा चल रहा था। बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरी जा रही थी, जो किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था।
कार्रवाई: अधिकारियों ने मौके पर ही दुकान को सील कर दिया और दुकानदार के खिलाफ कड़ी कानूनी धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कार्रवाई के बाद एसडीओ अर्णव मिश्रा ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि गैस की बनावटी किल्लत पैदा कर आम जनता को परेशान करने वाली एजेंसियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निरीक्षण अभियान निरंतर जारी रहेगा और नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज
रांची: स्मार्ट सिटी का दम भरने वाली राजधानी में पब्लिक ट्रांसपोर्ट की रीढ़ कही जाने वाली सिटी बस सेवा खुद अव्यवस्था के भंवर में फंसी है। शहर की सड़कों पर दौड़ती बसें यात्रियों को मंजिल तक तो पहुँचा रही हैं, लेकिन सफर की शुरुआत और इंतजार का अनुभव किसी सजा से कम नहीं है। आलम यह है कि करोड़ों के राजस्व के बावजूद यात्रियों के लिए एक ढंग का बस स्टॉपेज तक नसीब नहीं है।
शहर के मुख्य मार्गों पर बस स्टॉपेज की हकीकत बेहद डरावनी है। अधिकतर जगहों पर नगर निगम ने सड़क किनारे सिर्फ पीले रंग का निशान बनाकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली है।
सुनियोजित स्टॉपेज न होने का खामियाजा सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है। सिटी बस के चालक मेन रोड, लालपुर, डोरंडा, कांटाटोली और बिरसा चौक जैसे व्यस्त इलाकों में कहीं भी बस रोक देते हैं।
अराजकता का मंजर: पीछे से आ रहे वाहनों को अचानक ब्रेक मारना पड़ता है, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम लगता है, बल्कि गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है। पीक ऑवर्स में यह समस्या नासूर बन जाती है।
जो इक्का-दुक्का बस स्टॉपेज बने भी हैं, वे अब ‘सेफ्टी डेंजर जोन’ बन चुके हैं।
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम इन बस स्टॉपेज पर लगे विज्ञापनों से मोटा राजस्व वसूल रहा है। एजेंसियां विज्ञापन लगाकर कमाई कर रही हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधाओं के लिए एक ईंट तक नहीं जोड़ी जा रही।
क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? क्या स्मार्ट सिटी का सपना सिर्फ विज्ञापनों तक सीमित रहेगा या यात्रियों को उनके मौलिक अधिकार (सुरक्षित सफर और सुविधा) मिलेंगे?
रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज
देवघर: विश्व प्रसिद्ध द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक, बाबा बैद्यनाथ मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार को मंदिर की दानपेटियों की गिनती के दौरान भारतीय मुद्रा और अन्य विदेशी मुद्राओं (अमेरिकी डॉलर, यूरो, नेपाली रुपया) के साथ पाकिस्तानी करेंसी बरामद की गई है। बाबा मंदिर के इतिहास में यह संभवतः पहला मामला है जब दानपात्र से पाकिस्तान का नोट निकला है।
दानपेटी से 100 रुपये का पाकिस्तानी नोट मिलने के बाद स्थानीय पुलिस और खुफिया विभाग अलर्ट मोड पर हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही हैं कि यह नोट श्रद्धावश किसी पर्यटक द्वारा डाला गया है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है।
इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इसलिए भी बढ़ा दी है क्योंकि हाल ही में उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से पकड़े गए संदिग्धों के पास से बाबा मंदिर के फोटो और वीडियो मिले थे।
सूत्रों के अनुसार, पकड़े गए संदिग्धों का संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI से होने की आशंका जताई गई थी। वे पैसों के बदले भारत के संवेदनशील और धार्मिक स्थलों की रेकी कर सीमा पार जानकारी भेज रहे थे। इसके अलावा, जासूसी के आरोप में पकड़ी गई यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के भी सुल्तानगंज से देवघर तक के रूट की वीडियोग्राफी करने की बात सामने आ चुकी है।
हवाई सेवा शुरू होने के बाद देवघर में श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन उस अनुपात में सुरक्षा इंतजाम नाकाफी दिख रहे हैं।
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अब समय आ गया है जब बाबा मंदिर में भी तिरुपति या काशी विश्वनाथ की तर्ज पर सुरक्षा ऑडिट कर कड़े नियम लागू किए जाएं। मोबाइल और बैग ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ-साथ हर आने-जाने वाले की गहन तलाशी अनिवार्य होनी चाहिए।
तीसरी धारा न्यूज डेस्क
नई दिल्ली/डेस्क: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के पदचापों का सीधा असर अब भारतीय आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। देश की बड़ी प्राइवेट फ्यूल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का एलान किया है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में ₹5.30 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है।
इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य कारण हैं। रूस समर्थित नायरा एनर्जी, जो भारत में करीब 6,967 पेट्रोल पंप संचालित करती है, ने बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने का फैसला किया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
स्थानीय टैक्स और VAT के कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत ₹107.46 तक जा पहुँची है, जो देश के महानगरों में सर्वाधिक है।
देश के प्रमुख शहरों में आज के भाव (26 मार्च 2026)
|
शहर |
पेट्रोल (₹/लीटर) |
डीजल (₹/लीटर) |
|---|---|---|
|
हैदराबाद |
107.46 |
95.70 |
|
कोलकाता |
105.41 |
92.76 |
|
पटना |
105.20 |
92.10 |
|
मुंबई |
103.54 |
90.10 |
|
बेंगलुरु |
102.92 |
89.45 |
|
नई दिल्ली |
94.77 |
87.67 |
|
लखनऊ |
95.50 |
88.70 |
कीमतें बढ़ने और भविष्य में किल्लत की आशंका के चलते देश के कई हिस्सों में ‘पैनिक बाइंग’ (Panic Buying) की स्थिति देखी जा रही है। लोग डर के मारे गाड़ियों के टैंक फुल करवा रहे हैं, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं।
बढ़ती भीड़ और डर के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराकर ईंधन का स्टॉक न करें। सप्लाई चेन पर दबाव जरूर है, लेकिन फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।
तीसरी धारा न्यूज की सलाह: अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के इस दौर में पैनिक होने के बजाय धैर्य रखें और केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन लें। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
जमशेदपुर/जादूगोड़ा: देश की राजधानी नई दिल्ली में हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड के तार लौहनगरी जमशेदपुर और इसके ग्रामीण इलाकों से जुड़े पाए गए हैं। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा थाना अंतर्गत इचड़ा गांव से मुख्य आरोपी को दबोच लिया है।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान जादूगोड़ा निवासी राज भकत के रूप में हुई है। वहीं, इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जमशेदपुर के सीतारामडेरा निवासी आकाश कुमार कालिंदी को भी हिरासत में लिया है। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से इचड़ा गांव में छापेमारी कर राज को गिरफ्तार किया।
मिली जानकारी के अनुसार, ठगी का यह मामला 16 मार्च को तब सामने आया जब पश्चिमी दिल्ली के साइबर थाने में एक पीड़ित ने 7 लाख रुपये की चपत लगने की शिकायत दर्ज कराई थी।
दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया:
गिरफ्तारी के बाद आरोपी राज भकत को घाटशिला अनुमंडल न्यायालय में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से ट्रांजिट रिमांड की मांग की, जिसे मंजूर कर लिया गया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस टीम आरोपी को पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह केवल एक छोटी ठगी का मामला नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि राज भकत और आकाश कालिंदी किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और जमशेदपुर में इनके और कौन-कौन से साथी सक्रिय हैं।
तीसरी धारा न्यूज की अपील: साइबर ठगों से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी (OTP), बैंक विवरण या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहे ।
चाईबासा/रांची: झारखंड के बहुचर्चित 32 करोड़ रुपये के सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में न्याय की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। चाईबासा स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जिन तीन लोगों को इस गबन का मुख्य सूत्रधार माना है, वे हैं:
यह पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक में 32 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और गबन का खुलासा हुआ था। इस घोटाले ने राज्य के बैंकिंग सेक्टर और सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा दिया था। मामले की गहराई को देखते हुए इसकी जांच CID (Criminal Investigation Department) को सौंपी गई थी।
जांच के दौरान CID ने अदालत में पुख्ता दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के करोड़ों रुपये का निजी हितों के लिए गबन किया था। इन साक्ष्यों को आधार मानते हुए विशेष अदालत ने आरोपियों को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का दोषी पाया।
दोषी करार दिए जाने के बाद अब सजा की अवधि पर बहस होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में दोषियों को दी जाने वाली जेल की अवधि और जुर्माने की राशि का निर्धारण किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की प्रकृति और राशि को देखते हुए कोर्ट कड़ी सजा सुना सकता है।
तीसरी धारा न्यूज की टिप्पणी: आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह फैसला एक नजीर साबित होगा, जिससे सरकारी और सहकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार करने वालों के मन में कानून का खौफ पैदा होगा।
मनीला/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में गहराते तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस ने मौजूदा संकट को देखते हुए देश में ‘राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल’ (National Energy Emergency) की घोषणा कर दी है। 2020 के कोविड संकट के बाद यह देश का पहला राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन जैसा कदम है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह से मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटने के डर से सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है ताकि ईंधन की जमाखोरी रोकी जा सके और आवश्यक सेवाओं के लिए भंडार सुरक्षित रहे।
जब किसी देश की ऊर्जा सप्लाई (पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली) में अचानक बड़ी बाधा आती है, तो सरकारें संसाधनों को नियंत्रित करने के लिए ‘एनर्जी लॉकडाउन’ लगाती हैं। इसमें:
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 90% कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट संकट भारत के लिए दोहरे खतरे की घंटी है:
प्रधानमंत्री का संदेश: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में इस स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि हमें कोरोना जैसी अनिश्चित चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।
अगर स्थिति ‘एनर्जी लॉकडाउन’ तक पहुँचती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ेगा। बिजली उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की रफ्तार थम सकती है।
तीसरी धारा न्यूज इस वैश्विक संकट पर पल-पल की नजर बनाए हुए है।
इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारी पड़ गया है। जहाँ एक ओर शरीफ ‘सार्थक वार्ता’ की मेजबानी के सपने देख रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और रिपब्लिकन नेता लौरा लूमर ने पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ बताते हुए कड़ी फटकार लगाई है।
लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर शहबाज शरीफ के पोस्ट को शेयर करते हुए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान की साख पर सवाल उठाते हुए कहा:
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश करते हुए कहा था कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो पाकिस्तान ‘निर्णायक वार्ता’ की मेजबानी को अपना सम्मान समझेगा। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजनयिक माध्यमों से संघर्ष समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी रविवार को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। रिपोर्टों के अनुसार:
लौरा लूमर को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘फायरब्रांड’ समर्थक माना जाता है। वह फ्लोरिडा से रिपब्लिकन उम्मीदवार रह चुकी हैं और हाल ही में भारत दौरे पर भी आई थीं। वह अपने कट्टर और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं, विशेषकर कट्टरपंथ और आतंकवाद के मुद्दों पर।
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमलों को 5 दिनों के लिए स्थगित कर रहा है। ट्रंप ने इसे ‘सार्थक बातचीत’ का परिणाम बताया है। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में इस वार्ता का केंद्र बन पाता है या लौरा लूमर जैसे समर्थकों का दबाव ट्रंप को पाकिस्तान से दूर रखता है।
रिपोर्ट: अंतरराष्ट्रीय डेस्क, तीसरी धारा न्यूज
जमशेदपुर: विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अनुसूचित जाति (SC) के अधिकारों और धर्मांतरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। सिंहभूम विभाग के मंत्री अरुण सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह फैसला संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने वाला है।
विहिप नेता अरुण सिंह ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का यह निर्णय ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950’ के पूर्णतः अनुरूप है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं। धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति इस श्रेणी का हिस्सा नहीं रह जाता, इसलिए उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता।
अरुण सिंह ने ईसाई और मुस्लिम नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:
विहिप ने सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार उस ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए हैं जो हिन्दू समाज की संरचना से उपजा था।
”यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से अलग हो जाता है जिसके आधार पर ये अधिकार दिए गए थे। केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में ‘घर वापसी’ करने और समाज द्वारा स्वीकार किए जाने पर ही वह पुनः इन अधिकारों का पात्र बन सकता है।”
आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए अरुण सिंह ने कहा कि विहिप के कार्यकर्ता अब देशभर में ऐसे लोगों की पहचान करेंगे जिन्होंने धर्मांतरण के बावजूद अनुसूचित समाज के अधिकारों का गलत लाभ उठाया है। संगठन का लक्ष्य ऐसे लोगों से अधिकार छीनकर उन वास्तविक पात्रों को दिलाना है जो इसके हकदार हैं।
रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज
बहरागोड़ा/पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर दशकों से दफन एक महाविनाशकारी खतरा बुधवार को हमेशा के लिए खत्म हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय के दो विशालकाय जिंदा बमों को भारतीय सेना के जांबाज इंजीनियरों ने एक बेहद जटिल और साहसिक ऑपरेशन के जरिए सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया।
इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेना ने अपना कंट्रोल सेंटर मुख्य ब्लास्ट साइट से करीब 1.5 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर बनाया था। रिमोट के जरिए जैसे ही बटन दबा, एक जोरदार धमाके के साथ सदियों पुराना यह खतरा जमींदोज हो गया।
मंगलवार को पूरे दिन नदी के बहाव और भौगोलिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सेना की 50 सदस्यीय टीम ने मास्टर प्लान तैयार किया:
सफलतापूर्वक बम डिफ्यूज होते ही वहां मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों का चेहरा खुशी से खिल उठा। सेना के इस अदम्य साहस को सलाम करते हुए पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि सेना ने एक बड़ी मुसीबत को बिना किसी जान-माल के नुकसान के टाल दिया।
ये बम 227 किलो वजनी थे और द्वितीय विश्व युद्ध के समय के थे। इतने दशकों बाद भी इनके सक्रिय होने की संभावना ने प्रशासन की नींद उड़ा रखी थी। भारतीय सेना की इंजीनियरिंग विंग ने जिस सटीकता से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह उनकी पेशेवर दक्षता का प्रमाण है।
विशेष रिपोर्ट: रक्षा डेस्क, तीसरी धारा न्यूज