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बहरागोड़ा: स्वर्णरेखा में ‘दूसरे विश्व युद्ध’ का अंत! भारतीय सेना ने रिमोट से उड़ाए 227 किलो के दो जिंदा बम

बहरागोड़ा/पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर दशकों से दफन एक महाविनाशकारी खतरा बुधवार को हमेशा के लिए खत्म हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय के दो विशालकाय जिंदा बमों को भारतीय सेना के जांबाज इंजीनियरों ने एक बेहद जटिल और साहसिक ऑपरेशन के जरिए सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया।

​1.5 KM दूर से रिमोट से ‘ब्लास्ट’, थर्रा उठी धरती

​इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेना ने अपना कंट्रोल सेंटर मुख्य ब्लास्ट साइट से करीब 1.5 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर बनाया था। रिमोट के जरिए जैसे ही बटन दबा, एक जोरदार धमाके के साथ सदियों पुराना यह खतरा जमींदोज हो गया।

​ऑपरेशन ‘सुरक्षा घेरा’: 15 फीट गहरा गड्ढा और बालू की दीवारें

​मंगलवार को पूरे दिन नदी के बहाव और भौगोलिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सेना की 50 सदस्यीय टीम ने मास्टर प्लान तैयार किया:

  • ​सुरक्षा बंकर: बमों को जमीन के अंदर 15 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया।
  • ​एनर्जी कंट्रोल: विस्फोट की ऊर्जा को नीचे की ओर सीमित रखने के लिए चारों ओर बालू की बोरियों का एक अभेद्य सुरक्षा घेरा (बंकर) बनाया गया।
  • ​गांव खाली: एहतियात के तौर पर आसपास के गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया गया था और जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहा।

​‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजा स्वर्णरेखा तट

​सफलतापूर्वक बम डिफ्यूज होते ही वहां मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों का चेहरा खुशी से खिल उठा। सेना के इस अदम्य साहस को सलाम करते हुए पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि सेना ने एक बड़ी मुसीबत को बिना किसी जान-माल के नुकसान के टाल दिया।

​क्यों खास था यह ऑपरेशन?

​ये बम 227 किलो वजनी थे और द्वितीय विश्व युद्ध के समय के थे। इतने दशकों बाद भी इनके सक्रिय होने की संभावना ने प्रशासन की नींद उड़ा रखी थी। भारतीय सेना की इंजीनियरिंग विंग ने जिस सटीकता से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह उनकी पेशेवर दक्षता का प्रमाण है।

​विशेष रिपोर्ट: रक्षा डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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