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एक नई सोच, एक नई धारा

सरायकेला बैंक घोटाला: चाईबासा कोर्ट ने तत्कालीन मैनेजर समेत 3 को दोषी ठहराया, 30 मार्च को होगा सजा का एलान

चाईबासा/रांची: झारखंड के बहुचर्चित 32 करोड़ रुपये के सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में न्याय की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। चाईबासा स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।b0f9c5af3239becd7c99fc4ced38cb9bd81f712fb16e6d8263bc8681234dbdfb.0

​दोषियों की सूची में बड़े नाम शामिल

​अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जिन तीन लोगों को इस गबन का मुख्य सूत्रधार माना है, वे हैं:

  1. ​सुनील कुमार सत्पति: तत्कालीन शाखा प्रबंधक (मुख्य आरोपी)
  2. ​मनीष देवगम: बैंक कर्मचारी
  3. ​संजय डालमिया: व्यवसायी

​2019 से सुर्खियों में था मामला

​यह पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक में 32 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और गबन का खुलासा हुआ था। इस घोटाले ने राज्य के बैंकिंग सेक्टर और सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा दिया था। मामले की गहराई को देखते हुए इसकी जांच CID (Criminal Investigation Department) को सौंपी गई थी।1002518072

​CID की तफ्तीश ने खोला राज

​जांच के दौरान CID ने अदालत में पुख्ता दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के करोड़ों रुपये का निजी हितों के लिए गबन किया था। इन साक्ष्यों को आधार मानते हुए विशेष अदालत ने आरोपियों को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का दोषी पाया।

​अब सबकी नजरें 30 मार्च पर

​दोषी करार दिए जाने के बाद अब सजा की अवधि पर बहस होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में दोषियों को दी जाने वाली जेल की अवधि और जुर्माने की राशि का निर्धारण किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की प्रकृति और राशि को देखते हुए कोर्ट कड़ी सजा सुना सकता है।

​तीसरी धारा न्यूज की टिप्पणी: आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह फैसला एक नजीर साबित होगा, जिससे सरकारी और सहकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार करने वालों के मन में कानून का खौफ पैदा होगा।

 

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