एक नई सोच, एक नई धारा

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धनबाद: LC रोड पर बाइक रेस का खौफनाक अंत; 3 बाइकें टकराईं, 8 दोस्त लहूलुहान, 4 की हालत गंभीर

धनबाद | शनिवार, 17 जनवरी 2026

धनबाद: कोयलांचल की सड़कों पर रफ्तार का शौक एक बार फिर बड़े हादसे का कारण बना। शुक्रवार रात धनबाद के पॉश इलाके लुबी सर्कुलर रोड (LC Road) पर बाइक रेस के दौरान तीन मोटरसाइकिलें आपस में टकरा गईं। इस भीषण भिड़ंत में 8 युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से चार की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है।

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कैसे हुआ हादसा?

​प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस जांच के अनुसार, सभी आठ युवक आपस में दोस्त हैं। वे शुक्रवार रात सिटी सेंटर चौपाटी से नाश्ता करने के बाद रणधीर वर्मा चौक की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान चार-पांच बाइकों पर सवार होकर युवकों ने एलसी रोड पर रेस लगानी शुरू कर दी।

  • अनियंत्रित रफ्तार: जैसे ही बाइकें बीएसएस (BSS) कॉलेज के पास पहुँचीं, तेज रफ्तार के कारण दो बाइकें अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गईं।
  • चेन रिएक्शन: पीछे से तेज गति में आ रही तीसरी बाइक भी संभल नहीं पाई और वह भी इन दोनों बाइकों की चपेट में आ गई।

घायलों की सूची और अस्पताल में हड़कंप

​हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने सभी को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) पहुँचाया। एक साथ आठ घायलों के पहुँचने से अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में हड़कंप मच गया।

घायल युवकों का विवरण:

  1. हीरापुर झरनापाड़ा: छोटू यादव, पप्पू यादव, सोनू यादव।
  2. पुलिस लाइन: लव कुमार रवानी, राजा तिवारी, सौरभ यादव।
  3. धैया: शिव शंकर साव।
  4. बेकारबांध रामनगर: नीरज कुमार।

​डॉक्टरों ने सोनू, पप्पू, छोटू और सौरभ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स (RIMS), रांची रेफर किया है, हालांकि परिजनों ने उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया है।

पुलिस की कार्रवाई

​सूचना मिलते ही धनबाद थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुँची और छानबीन शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से दो बुरी तरह क्षतिग्रस्त बाइकें जब्त की हैं, जिनमें से एक हाई-स्पीड रेसर बाइक है और दूसरी का नंबर JH-10 DB 8173 है।

सड़क सुरक्षा पर सवाल

​यह हादसा एक बार फिर शहर की सड़कों पर देर रात होने वाली स्टंटबाजी और लापरवाही से बाइक चलाने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे की सटीक कड़ियों को जोड़ा जा सके।

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खादगढ़ा बस स्टैंड पर परिवहन विभाग का छापा: स्लीपर बसों में ‘स्लाइडर’ और ‘पार्टीशन’ पर लगी रोक, सुरक्षा नियमों में बड़ा बदलाव

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड पर जिला परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) के कड़े दिशा-निर्देशों के मद्देनजर, उप परिवहन आयुक्त हरविंश पंडित के नेतृत्व में अधिकारियों ने बसों की गहन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों को सख्त चेतावनी दी।

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21 बसों की जांच, अवैध एक्सटेंशन पर एक्शन

​अभियान के दौरान कुल 21 स्लीपर बसों की जांच की गई। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों में चेसिस (Chassis) को अवैध रूप से बढ़ाकर बॉडी बनाई गई है, उन्हें तत्काल सड़क से हटाया जाएगा। अब किसी भी बस का पंजीकरण तभी होगा जब उसके पास अधिकृत एजेंसी का फॉर्म-22/22A और विस्तृत लेआउट ड्राइंग (Layout Drawing) होगी।

बसों के भीतर तुरंत हटाने होंगे ये बदलाव

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। मौके पर ही निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए:

  • स्लाइडर और पार्टीशन: स्लीपर बर्थ में लगे स्लाइडर (पर्दे या दरवाजे) और चालक के केबिन के पार्टीशन को तुरंत हटाने का आदेश दिया गया। कुछ बसों से मौके पर ही इन्हें हटवाया भी गया।
  • आपातकालीन द्वार: इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और उनमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।

अग्नि सुरक्षा: 1 महीने का अल्टीमेटम

​सड़क हादसों और बसों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है:

  1. FDSS अनिवार्य: सभी स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने के लिए बस ऑपरेटरों को एक महीने का समय दिया गया है।
  2. फायर एक्सटिंग्विशर: हर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र (ग्रीन जोन में) होना अनिवार्य है।

वाहन मालिकों के साथ बैठक

​जांच के बाद खादगढ़ा बस स्टैंड पर बस मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई। जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार और मोटरयान निरीक्षक विमल किशोर सिंह ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने और तय समय-सीमा में आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया है।

​”हमारा उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और जो ऑपरेटर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

हरविंश पंडित, उप परिवहन आयुक्त

संवाददाता, सिटी डेस्क

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ईरान संकट: ‘ऑपरेशन वापसी’ शुरू, तेहरान से दिल्ली पहुँचा भारतीयों का पहला जत्था

नई दिल्ली | शनिवार, 17 जनवरी 2026

नई दिल्ली: ईरान में गहराते राजनीतिक संकट, हिंसक प्रदर्शनों और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की धमकियों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर निकासी अभियान (Evacuation Drive) शुरू कर दिया है। देर रात ईरान की राजधानी तेहरान से विशेष उड़ान के जरिए भारतीय नागरिकों का पहला जत्था दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचा।

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एयरपोर्ट पर भावुक दृश्य: अपनों का इंतज़ार खत्म

​जैसे ही विशेष विमान दिल्ली पहुँचा, वहां पहले से मौजूद परिजनों की आँखों में आँसू और चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। उत्तर प्रदेश के अमरोहा, संभल और बिजनौर से बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों को लेने पहुँचे थे। जियारत के लिए ईरान गए इन परिवारों की वापसी को लेकर पिछले कई दिनों से घरवाले चिंतित थे।

ग्राउंड जीरो का आंखों देखा हाल: क्या कह रहे हैं यात्री?

​ईरान से लौटे यात्रियों ने वहां के हालातों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है:

  • हिंसक प्रदर्शन: यात्रियों ने पुष्टि की कि वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, आगजनी और गाड़ियों को जलाने की घटनाएं हो रही हैं।
  • राजनीतिक संघर्ष: वहां रजा पहलवी (प्रदर्शनकारी गुट) और अयातुल्ला खामनेई (सत्ता पक्ष) के समर्थकों के बीच भारी टकराव देखा जा रहा है।
  • डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट सेवाएं और आईएसडी कॉल पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जिससे वहां फंसे लोग अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।

“डर का माहौल नहीं, पर दहशत है”

​वापस लौटे एक यात्री ने बताया, “हमारी फैमिली जियारत के लिए गई थी। उपद्रव हो रहा है, लेकिन ईरानी लोग हमें नुकसान नहीं पहुँचा रहे हैं। उपद्रव के पीछे कुछ बाहरी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है।” वहीं एक अन्य यात्री ने कहा कि “मीडिया में हालात थोड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जा रहे हैं, लेकिन दहशत का माहौल जरूर है।”

दूतावास और भारत सरकार की भूमिका

​यात्रियों ने भारतीय दूतावास की सक्रियता और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दूतावास के अधिकारी 24/7 सक्रिय हैं और भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव मदद कर रहे हैं। दूतावास ने सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और अनावश्यक बाहर न निकलें।

​”भारत सरकार ने समय रहते कदम उठाया और हमारे अपनों को वापस ले आए। दूतावास ने हर मोड़ पर हमारा साथ दिया।”

एक लौटे हुए यात्री का बयान

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झारखंड निकाय चुनाव: खर्च की सीमा तय, मेयर के लिए 25 लाख और पार्षद के लिए 5 लाख तक की छूट

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: झारखंड में बहुप्रतीक्षित नगर निकाय चुनाव (Municipal Elections 2026) को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आयोग ने उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा (Expenditure Limit) निर्धारित कर दी है। यह सीमा जनसंख्या और निकाय के प्रकार के आधार पर तय की गई है।

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किसके लिए कितनी है खर्च की सीमा?

​निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवारों के खर्च का विवरण इस प्रकार है:

निकाय का प्रकारपदजनसंख्या/श्रेणीअधिकतम खर्च सीमा
नगर निगममेयर (Mayor)10 लाख से अधिक आबादी₹25,00,000
नगर निगमपार्षद (Ward Councilor)10 लाख से अधिक आबादी₹5,00,000
नगर निगममेयर (Mayor)10 लाख से कम आबादी₹15,00,000
नगर परिषदअध्यक्ष (President)1 लाख से अधिक आबादी₹10,00,000
नगर परिषदपार्षद (Ward Councilor)

नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी: सदस्यता हो सकती है रद्द

​आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर अपने संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को खर्च का पूरा हिसाब देना अनिवार्य है।

  • अयोग्यता की चेतावनी: यदि कोई विजयी प्रत्याशी समय सीमा के भीतर खर्च का ब्यौरा नहीं देता है, तो न केवल उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी, बल्कि उसे अगले 3 साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोक दिया जाएगा।
  • अभिकर्ता की जिम्मेदारी: प्रत्याशी द्वारा नियुक्त ‘निर्वाचन अभिकर्ता’ (Election Agent) इस हिसाब-किताब के लिए जिम्मेदार होगा।

प्रचार सामग्री और विरूपण पर सख्त रुख

​प्रचार के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति के विरूपण को लेकर आयोग बेहद सख्त है:

  1. सरकारी भवन: किसी भी सरकारी भवन पर झंडा, बैनर या पोस्टर लगाने पर सीधे FIR दर्ज की जाएगी।
  2. निजी भवन: यदि कोई प्रत्याशी किसी निजी मकान पर प्रचार सामग्री लगाना चाहता है, तो उसे उस भवन मालिक से लिखित सहमति पत्र लेना अनिवार्य होगा।
  3. डिजिटल निगरानी: चुनाव के दौरान सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार के खर्च को भी मुख्य खर्च में जोड़ा जाएगा।

संवाददाता, रांची ब्यूरो

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झारखंड मतदाता सूची संशोधन: भाजपा ने उठाए 18 हजार से अधिक नामों पर सवाल, कांग्रेस की ओर से सिर्फ 2 आपत्तियां

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद झारखंड की मतदाता सूची को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों और राजनीतिक दलों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों ने चुनावी तैयारियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की इस कवायद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है।

आंकड़ों का खेल: भाजपा बनाम कांग्रेस

​निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटवाने के मामले में भाजपा बेहद आक्रामक नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस का रुख इसके उलट है:

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विवरणभारतीय जनता पार्टी (BJP)कांग्रेस (INC)
नाम हटाने के लिए आपत्तियां18,89602
नए नाम जोड़ने के आवेदन (सभी दल)478 (कुल)

भाजपा का दावा: ‘फर्जी मतदाताओं’ पर प्रहार

​भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने गहन जमीनी सर्वे के बाद ये आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी के अनुसार, सूची में हजारों ऐसे नाम हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, क्षेत्र से स्थानांतरित (Shifted) हैं या पूरी तरह अपात्र हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इन ‘बोगस’ नामों का हटना अनिवार्य है।

कांग्रेस का तर्क: ‘राजनीति नहीं, पारदर्शिता’

​वहीं, महज 2 नाम हटवाने की आपत्ति पर कांग्रेस ने सफाई दी है कि उनकी पार्टी मतदाता सूची के नाम पर अनावश्यक राजनीति नहीं करना चाहती। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उन्होंने केवल उन्हीं नामों पर आपत्ति जताई है जहां गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

अंतिम तिथि बढ़ी: 19 जनवरी तक का समय

​प्रशासनिक कारणों और बढ़ती आपत्तियों को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 19 जनवरी कर दिया है।

  • डिजिटल सत्यापन: इस बार चुनाव आयोग आधार लिंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग कर रहा है।
  • फील्ड वेरिफिकेशन: सभी आपत्तियों की जांच बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर की जाएगी।

चुनाव आयोग का रुख

​चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि हर एक आपत्ति का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य तकनीक (Digital Verification) और मैन्युअल जांच के जरिए एक ऐसी सूची तैयार करना है जिसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न हो। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस प्रक्रिया को ‘निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला’ माना जा रहा है।

संवाददाता, राजनीति डेस्क

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सीजीपीसी का बड़ा फैसला: बिष्टुपुर जी टाउन गुरुद्वारा कमेटी भंग, पांच सदस्यीय टीम को कमान

जमशेदपुर | शनिवार, 17 जनवरी 2026

जमशेदपुर: सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (CGPC) के प्रधान भगवान सिंह ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बिष्टुपुर जी टाउन गुरुद्वारा की मौजूदा कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कदम गुरुद्वारा साहिब के भीतर जारी आंतरिक विवादों को खत्म करने और निष्पक्ष चुनाव का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उठाया गया है।

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क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

​प्रधान भगवान सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा कमेटी के दो गुटों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। विवाद इतना बढ़ गया था कि:

  • कानूनी लड़ाई: दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ न्यायालय में मामले दर्ज करा रखे हैं।
  • व्यवस्था प्रभावित: इस आपसी विवाद के कारण गुरुद्वारा साहिब के धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ रही थी।
  • अनुशासनहीनता: गुरुद्वारा साहिब की गरिमा और शांति बनाए रखने के लिए पुरानी कमेटी को हटाना आवश्यक हो गया था।

पांच सदस्यीय कमेटी संभालेगी जिम्मेदारी

​गुरुद्वारा साहिब के रोजमर्रा के कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और प्रशासनिक संचालन के लिए एक विशेष पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यही कमेटी आगामी आदेश तक और नए चुनाव संपन्न होने तक पूरी व्यवस्था देखेगी।

नई संचालन एवं चुनाव कमेटी की संरचना:

| पद | नाम |

| चेयरमैन | सरदार शैलेंद्र सिंह |

| सदस्य | नरेंद्र पाल सिंह |

| सदस्य | अमरजीत सिंह |

| सदस्य | सुखविंदर सिंह राजू |

| सदस्य | दलजीत सिंह |

निष्पक्ष चुनाव की तैयारी

​सीजीपीसी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस समिति का प्राथमिक उद्देश्य न केवल प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाना है, बल्कि बिष्टुपुर गुरुद्वारा के प्रधान पद के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव आयोजित करना भी है। उन्होंने दोनों गुटों और संगत से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

संवाददाता, जमशेदपुर महानगर

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कन्हैया की तलाश में 7 राज्यों में पुलिस की दबिश: मिर्जापुर गैंग से जुड़े तार, 59 दिनों से लापता है मासूम

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के ओरमांझी से लापता 12 वर्षीय कन्हैया कुमार की बरामदगी के लिए रांची पुलिस की एसआईटी (SIT) ने अब तक का सबसे बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया है। गुरुवार देर रात से जारी इस कार्रवाई में झारखंड सहित देश के 7 राज्यों में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।

मानव तस्करों के ठिकानों पर रेड: इन राज्यों में अभियान जारी

​रांची के ग्रामीण एसपी प्रवीण पुष्कर के नेतृत्व में गठित विशेष टीम कन्हैया की तलाश में निम्नलिखित राज्यों और शहरों में छापेमारी कर रही है:

  • झारखंड: रांची (सिल्ली, टुटकी गांव, ओरमांझी), रामगढ़, लोहरदगा, गुमला और पलामू।
  • बिहार: औरंगाबाद (मानव तस्करों के संभावित ठिकानों पर)।
  • अन्य राज्य: राजस्थान (जयपुर), महाराष्ट्र (मुंबई), पश्चिम बंगाल और दिल्ली।

मिर्जापुर मानव तस्करी गैंग से जुड़ रहे तार

​जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर का एक खतरनाक मानव तस्करी गिरोह इन बच्चों के गायब होने के पीछे हो सकता है। पुलिस के अनुसार, हाल ही में बरामद हुए अंश और अंशिका के अपहरण में भी इसी गिरोह का हाथ था।

  • हिरासत में पूछताछ: पुलिस ने सिल्ली के टुटकी गांव से 5-6 ‘गुलगुलिया’ परिवार के लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।
  • लिंक की तलाश: औरंगाबाद से गिरफ्तार तस्कर नभ खेरवार और उसकी पत्नी सोनी कुमारी के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है।

एसएसपी खुद कर रहे मॉनिटरिंग, मां का रो-रोकर बुरा हाल

​रांची एसएसपी राकेश रंजन इस पूरे मिशन की पल-पल की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस टीम में सिटी एसपी पारस राणा और ट्रैफिक एसपी राकेश कुमार सिंह जैसे आला अधिकारी भी शामिल हैं।

उधर, ओरमांझी के सिलदिरी स्थित शंकर घाट पर कन्हैया की मां शांति देवी और पूरा परिवार टकटकी लगाए अपने लाल का इंतजार कर रहा है। मां का कहना है कि 59 दिन बीत गए हैं, पर अब भी उम्मीद है कि पुलिस उनके बेटे को वापस ले आएगी।

सूचना देने पर मिलेगा इनाम: ये हैं हेल्पलाइन नंबर

​पुलिस ने बसों और सार्वजनिक स्थानों पर कन्हैया के पोस्टर चिपकाए हैं। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाएगा और उन्हें उचित इनाम दिया जाएगा।

| पद / संपर्क | मोबाइल नंबर |

| :— | :— |

| कृष्णा (कन्हैया का भाई) | 8936877150 |

| डीएसपी, सिल्ली | 9431770066 |

| ओरमांझी थाना प्रभारी | 9431706183 |

संवाददाता, रांची ब्यूरो

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पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या के खिलाफ आज ‘झारखंड बंद’: राजधानी समेत कई जिलों में सुरक्षा सख्त, स्कूल बंद

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: पड़हा राजा सोमा मुंडा की नृशंस हत्या के विरोध में आज विभिन्न आदिवासी संगठनों ने ‘झारखंड बंद’ का आह्वान किया है। इस बंद को लेकर पूरे राज्य में तनाव का माहौल है और पुलिस प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है। शुक्रवार शाम को रांची, खूंटी और चाईबासा समेत कई जिलों में आदिवासी संगठनों ने मशाल जुलूस निकालकर सरकार के खिलाफ रोष प्रकट किया और जनता से बंद को सफल बनाने की अपील की।

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क्यों बुलाया गया है बंद?

​आदिवासी संगठनों का आरोप है कि पड़हा राजा सोमा मुंडा की हत्या कोई व्यक्तिगत रंजिश नहीं, बल्कि जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए उठने वाली बुलंद आवाज को दबाने की एक सोची-समझी साजिश है। संगठनों का कहना है कि जब तक मुख्य साजिशकर्ता और शूटर गिरफ्तार नहीं होते, उनका संघर्ष जारी रहेगा।

स्कूलों में छुट्टी, जनजीवन पर असर की संभावना

​बंद के मद्देनजर एहतियात बरतते हुए रांची और खूंटी के कई निजी स्कूलों ने शनिवार को छुट्टी घोषित कर दी है। परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि बंद समर्थकों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।

पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा इंतजाम

​पुलिस प्रशासन ने बंद को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं।

  • अब तक की गिरफ्तारी: पुलिस ने इस मामले में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
  • फरार अपराधी: मुख्य साजिशकर्ता, शूटर और भू-माफिया अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं, जिसे लेकर आदिवासियों में भारी आक्रोश है।
  • अलर्ट मोड: संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है और ड्रोन के जरिए निगरानी रखी जा रही है।

इन प्रमुख संगठनों का मिला समर्थन

​बंद को राज्य के लगभग सभी बड़े आदिवासी संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • ​आदिवासी समन्वय समिति (खूंटी)
  • ​केंद्रीय सरना समिति
  • ​आदिवासी जनपरिषद और आदिवासी महासभा
  • ​मानकी मुंडा संघ (चाईबासा)
  • ​आदिवासी छात्रसंघ और राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा
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लापता बच्चों को ढूंढने का श्रेय बजरंग दल को मिले, सरकार दे इनाम की राशि: विहिप

जमशेदपुर | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची/जमशेदपुर: रांची के धुर्वा से लापता हुए दो मासूम बच्चों, अंश और अंशिका की सुरक्षित बरामदगी के बाद अब श्रेय को लेकर राजनीति और बयानबाजी तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने दावा किया है कि बच्चों को खोजने में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की मुख्य भूमिका रही है, लेकिन सरकार और पुलिस प्रशासन उनका नाम लेने से कतरा रहे हैं।

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बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दिखाई तत्परता

​विहिप सिंहभूम विभाग मंत्री अरुण सिंह ने बताया कि 2 जनवरी से लापता दोनों बच्चों को 14 जनवरी के दिन रामगढ़ जिले के चितरपुर स्थित पहाड़ी क्षेत्रों की बंजारा बस्ती में देखा गया था। चितरपुर समिति के बजरंग दल कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, बबलू साहू और सचिन कुमार को उन पर संदेह हुआ।

​कार्यकर्ताओं ने तुरंत इसकी जानकारी रामगढ़ पुलिस को दी और पुलिस टीम के मौके पर पहुँचने तक बच्चों की निगरानी की। अंततः पुलिस के सहयोग से बच्चों को सुरक्षित बचा लिया गया।

“सरकार की मानसिकता पर सवाल”

​अरुण सिंह ने झारखंड सरकार और डीजीपी (DGP) पर निशाना साधते हुए कहा कि पुलिस मुख्यालय द्वारा आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बजरंग दल का नाम न लेना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा:

  • सराहना का अभाव: कार्यकर्ताओं ने इनाम के लिए नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य के नाते बच्चों को खोजा, लेकिन सरकार को उनकी सराहना करनी चाहिए थी।
  • भेदभाव का आरोप: सरकार का नाम न लेना उनकी पक्षपाती मानसिकता को दर्शाता है।
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झारखंड में ‘निपाह’ की दस्तक का खतरा: बंगाल में मरीज मिलने के बाद राज्य भर में हाई अलर्ट जारी

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: कोरोना की यादें अभी धुंधली भी नहीं हुई थीं कि एक और जानलेवा वायरस ‘निपाह’ ने झारखंड की दहलीज पर दस्तक दे दी है। पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के दो पुष्ट मामले सामने आने के बाद झारखंड सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट (High Alert) घोषित कर दिया है। पड़ोसी राज्य होने के नाते झारखंड और बंगाल के बीच भारी आवाजाही को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग बेहद सतर्क है।

स्वास्थ्य विभाग की सख्त कार्रवाई: जिलों को निर्देश

​राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभियान (NHM) के निदेशक ने राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को तत्काल प्रभाव से कड़ी निगरानी रखने का आदेश दिया है।

  • बॉर्डर पर निगरानी: बंगाल से सटे जिलों (जैसे पूर्वी सिंहभूम, सरायकेला, पाकुड़, साहिबगंज) में विशेष चौकसी बरतने को कहा गया है।
  • ट्रैवल हिस्ट्री: हाल ही में बंगाल से लौटे व्यक्तियों की सेहत पर नजर रखने का निर्देश दिया गया है।
  • अस्पतालों को आदेश: सभी अस्पतालों को निर्देश है कि किसी भी संदिग्ध मरीज के मिलते ही उसकी सूचना तुरंत मुख्यालय को दी जाए।
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निपाह वायरस: लक्षण और बचाव

​डॉक्टरों के अनुसार, निपाह एक ‘जुनोटिक’ वायरस है जो जानवरों (मुख्यतः चमगादड़) से इंसानों में फैलता है। इसके लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना अनिवार्य है:

लक्षणबचाव के उपाय
तेज बुखार और असहनीय सिरदर्दपेड़ों से गिरे या पक्षियों द्वारा कुतरे फल न खाएं।
सांस लेने में अत्यधिक तकलीफकच्चे खजूर का रस या ताड़ी का सेवन न करें।
मानसिक भ्रम या बेहोशी की स्थितिसंक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें।
खांसी और बदन दर्दसाबुन से बार-बार हाथ धोएं।

सैंपल कलेक्शन के लिए विशेष प्रोटोकॉल

​स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि निपाह एक बेहद संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसके सैंपल लेने का काम केवल प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मी ही करेंगे। इलाज के दौरान पीपीई किट और अन्य सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि संक्रमण स्वास्थ्य कर्मियों तक न फैले।

अफवाहों से बचें, सतर्क रहें

​अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैलने वाली किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सतर्कता ही इस वायरस से बचने का सबसे बड़ा हथियार है। यदि आपके आसपास किसी में ऊपर दिए गए लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें।

संवाददाता, स्वास्थ्य डेस्क

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