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महाराष्ट्र विधानसभा में ‘तीन तलाक’ और ‘बहुविवाह’ पर भारी हंगामा, बीजेपी विधायकों और सना मलिक के बीच तीखी बहस

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तीसरी धारा न्यूज (मुंबई):

​महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को तीन तलाक और बहुविवाह के मुद्दे पर सदन में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे द्वारा केंद्र सरकार के ‘तीन तलाक’ (Triple Talaq) कानून को महाराष्ट्र में कड़ाई से लागू करने को लेकर लाए गए ‘ध्यान आकर्षण’ प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने आ गए। राकांपा (NCP) विधायक सना मलिक द्वारा कुरान और पाकिस्तान के कानूनों का हवाला दिए जाने पर बीजेपी विधायकों ने तीखी आपत्ति जताई।IMG 20260625 172358

​देवयानी फरांडे ने दिया पाकिस्तान का उदाहरण

​प्रस्ताव पेश करते हुए बीजेपी विधायक देवयानी फरांडे ने पड़ोसी देश पाकिस्तान के कानूनों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “अगर हम 1947 में भारत से अलग हुए पाकिस्तान को देखें, तो वहां भी बहुविवाह (Polygamy) के लिए पहली पत्नी से लिखित अनुमति और एक मध्यस्थता परिषद (Arbitration Council) की मंजूरी जरूरी होती है। इसी कड़े कानून के कारण पाकिस्तान में बहुविवाह की दर सिर्फ 1 प्रतिशत है।” उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि उन्होंने खुद पिछले डेढ़ महीने में तीन तलाक के तीन मामले देखे हैं, जिन पर पुलिस ने कार्रवाई की है।b 1

​सना मलिक के बयान से भड़का हंगामा

​जब राकांपा (NCP) विधायक सना मलिक ने इस मामले पर अपना पक्ष रखा, तो सदन का माहौल गर्मा गया। सना मलिक ने सवाल उठाया कि क्या इस तरह का अत्याचार सिर्फ मुस्लिम महिलाओं के साथ ही हो रहा है? उन्होंने बहुविवाह पर तर्क देते हुए कहा:

  • कुरान के नियम लागू हों: पाकिस्तान ने कुछ नया नहीं किया, उसने बस कुरान में बताए गए मुस्लिम कानून को लागू किया है। भारत को भी पाकिस्तान की तरह कुरान की शिक्षाओं के आधार पर कानून लाना चाहिए।
  • तीन तलाक पर सफाई: तलाक के कई तरीके हैं (तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन), जिन्हें हम मानते हैं। ‘तलाक़-ए-बिद्दत’ (एक बार में तीन तलाक) केवल एक सांस्कृतिक प्रथा थी, जिसका कुरान में जिक्र नहीं है।
  • हर धर्म में बहुविवाह: क्या सिर्फ मुस्लिम पुरुष ही एक से ज्यादा शादियां करते हैं? यह प्रथा हर धर्म में मौजूद है। इस पर समग्रता से कानून बनना चाहिए।

​”देश संविधान से चलेगा, कुरान से नहीं” — अतुल भातखलकर

​सना मलिक के इस बयान पर बीजेपी विधायक अतुल भातखलकर ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह ‘ध्यान आकर्षण प्रस्ताव’ केवल यह जांचने के लिए है कि तीन तलाक कानून सही ढंग से लागू हो रहा है या नहीं। यहाँ कुरान, पाकिस्तान और इस्लामी परंपराओं पर भाषण देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने दो टूक कहा, “यह देश भारत के संविधान के अनुसार चलता है, किसी धार्मिक किताब या कुरान के अनुसार नहीं।”a 2

​सरकार का पक्ष: ‘यूसीसी’ लागू होने पर सब पर प्रभावी होंगे नियम

​सदन में बढ़ते हंगामे के बीच गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने सरकार का पक्ष रखते हुए स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने सना मलिक के सवालों का जवाब देते हुए कहा:

​”हमारे पास दूसरे धर्मों से तीन तलाक को लेकर कोई शिकायतें नहीं आई हैं क्योंकि यह प्रथा कुछ खास समुदायों में ही रही है। केंद्र सरकार ने मोबाइल मैसेज, ईमेल या फोन पर तुरंत तलाक देने की अन्यायपूर्ण प्रथा को खत्म करने के लिए यह कानून बनाया है और राज्य सरकार इसे पूरी तरह लागू करना सुनिश्चित कर रही है।”

 

​गृह राज्य मंत्री ने भरोसा दिलाते हुए आगे कहा कि जब राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू हो जाएगा, तो बहुविवाह और विवाह से जुड़े सभी नियम किसी एक खास धर्म के लिए नहीं, बल्कि सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होंगे। सरकार किसी खास समुदाय को निशाना नहीं बना रही है, बल्कि महिलाओं के अधिकारों की रक्षा कर रही है।

— तीसरी धारा न्यूज

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