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महिलाओं ने सिंदूर खेला के साथ दी मां दुर्गा को विदाई, अखंड सौभाग्य का मांगा वर

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जमशेदपुर : शारदीय नवरात्रि के दसवें दिन सिंदूर खेला का विशेष महत्व माना जाता है. नौ दिनों तक मां दुर्गा की विधिवत पूजा-अर्चना और आराधना करने के बाद दशमी तिथि को मां को विदाई दी जाती है. मान्यता है कि जिस प्रकार बेटी को ससुराल विदा करने से पहले उसका सोलह श्रृंगार किया जाता है, उसी तरह मां दुर्गा की पूजा के समापन पर सिंदूर अर्पण किया जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर चढ़ाकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करती हैं और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं.

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शहर के विभिन्न पंडालों और मंदिरों में भक्तजन बड़ी संख्या में एकत्रित हुए और शक्ति की देवी मां दुर्गा की आराधना की. महिलाओं ने मां की प्रतिमा पर सिंदूर अर्पित कर श्रद्धा प्रकट की और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सामूहिक रूप से उत्सव का आनंद लिया. इस अवसर पर वातावरण पूरी तरह भक्ति और आस्था से सराबोर हो गया. सिंदूर खेला के दौरान महिलाएं मां दुर्गा से प्रार्थना करती हैं कि जैसे उन्होंने मां को सिंदूर चढ़ाया है, वैसे ही उनका सुहाग अटूट रहे और परिवार में सुख-समृद्धि और धन की वर्षा होती रहे.

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दशमी के दिन यह परंपरा केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है. यह महिलाओं के बीच एकता, सौहार्द और आपसी स्नेह को मजबूत करती है. सिंदूर खेला में शामिल होकर महिलाएं न सिर्फ अपने सौभाग्य की मंगल कामना करती हैं, बल्कि पूरे समाज के कल्याण और खुशहाली की कामना भी करती हैं. पूजा-अर्चना और सिंदूर खेला के बाद भक्त भावुक होकर मां को विदा करते हैं और अगले वर्ष पुनः इसी उत्साह और श्रद्धा के साथ आगमन की प्रतीक्षा करते हैं। इस प्रकार चैत्र नवरात्रि की दशमी पर सिंदूर खेला उत्सव आस्था, परंपरा और आनंद का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है.

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