बांग्लादेश में पिछले दो वर्षों से हिन्दू समुदाय पर हो रहे उत्पीड़न को लेकर जमशेदपुर में भी आक्रोश की लहर देखने को मिली. मंगलवार को शहर के विभिन्न हिन्दू संगठनों ने एकजुट होकर बांग्लादेश सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया.
इस आंदोलन में भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिन्दू परिषद, पूर्व सैनिक परिषद, महिला संगठन तथा किन्नर समाज के सदस्य बड़ी संख्या में शामिल हुए. सोनारी के कागलनगर बाजार से लेकर सोनारी एयरपोर्ट तक भव्य मशाल जुलूस निकाला गया और प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचारों की निंदा की.
प्रदर्शन के दौरान संगठनों ने झारखण्ड में रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की मांग की. वक्ताओं ने कहा कि बांग्लादेश सरकार को अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए, अन्यथा विरोध और तेज़ होगा.
शहर में हुए इस शांतिपूर्ण लेकिन तीखे प्रदर्शन में स्थानीय लोगों की भी बड़ी उपस्थिति रही, जिन्होंने एकस्वर में बांग्लादेश में हो रहे कथित अत्याचारों के खिलाफ नाराज़गी जताई और सरकार से ठोस कदम उठाने की अपील की.
टाटानगर रेलवे स्टेशन की स्टेशन सलाहकार समिति (एससीसी) की बैठक आज स्टेशन निदेशक के कार्यालय में आयोजित की गई. बैठक में समिति के पांच में से चार सदस्य, स्टेशन निदेशक सहित विभिन्न विभागों के पर्यवेक्षक और प्रभारी अधिकारी शामिल हुए. बैठक का मुख्य उद्देश्य स्टेशन पर वर्तमान यात्री सुविधाओं की समीक्षा और उनके स्तर में सुधार को लेकर सुझाव प्राप्त करना था.
शुरुआत में स्टेशन निदेशक ने स्टेशन परिसर में संचालित यात्री सेवाओं, चल रही परियोजनाओं और सुधार की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि स्वच्छता, सुरक्षा, खानपान और पार्किंग जैसी मुख्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रेलवे प्रशासन लगातार प्रयासरत है और इसमें समिति जैसी संस्थाओं की भूमिका अहम है.
यात्री सुविधाओं को लेकर समिति के सदस्यों ने प्लेटफॉर्म पर पेयजल की उपलब्धता, प्रतीक्षालयों में बैठने की पर्याप्त व्यवस्था, शौचालयों की नियमित सफाई और प्लेटफॉर्मों के बीच सुगम आवाजाही को लेकर सुझाव दिए. सदस्यों ने कहा कि शौचालयों की स्वच्छता और पेयजल बिंदुओं की नियमित जांच आवश्यक है, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो. स्टेशन प्रबंधन ने भरोसा दिलाया कि सफाई एवं सेवाओं की गुणवत्ता के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी.
सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में प्लेटफॉर्म और स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरों की सक्रियता, आरपीएफ और जीआरपी की गश्त बढ़ाने और संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान को लेकर अधिक प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया. समिति ने कहा कि सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता में रखते हुए तकनीकी साधनों और जनशक्ति का उचित उपयोग करना होगा, जिससे यात्रियों में भरोसा बने.
खानपान सेवाओं के संदर्भ में स्टॉलों पर मूल्य सूची प्रदर्शित करने, रेल नीर की उपलब्धता सुनिश्चित करने और खाद्य गुणवत्ता की जांच को नियमित रखने की बात कही गई. पार्किंग व्यवस्था में सुधार को लेकर भी अहम सुझाव सामने आए, जिसमें पार्किंग क्षेत्र का सुव्यवस्थित प्रबंधन, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई और प्रवेश-निकासी मार्गों में सुधार शामिल रहा. अंत में स्टेशन निदेशक ने समिति के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्राप्त सुझावों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि टाटानगर स्टेशन को अधिक सुविधाजनक और यात्री-केंद्रित बनाने के लिए रेलवे प्रशासन प्रतिबद्ध है और समिति के सुझाव इस दिशा में सहायक सिद्ध होंगे.
पुलिस ने रंगदारी माफिया पर बड़ी कार्रवाई करते हुए मानगो-डिमना मार्ग से तीन बदमाशों को गिरफ्तार किया है. एसएसपी को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ युवक सफेद रंग की आई-20 कार (I-20) में सवार होकर कारोबारियों से रंगदारी वसूली के इरादे से डिमना की ओर जा रहे हैं. सूचना के आधार पर सिटी एसपी कुमार शिवाशीष के निर्देश पर पटमदा डीएसपी के नेतृत्व में डिमना चौक, डी-चौधरी कॉम्पलेक्स के पास विशेष वाहन जांच अभियान चलाया गया. इसी दौरान एक संदिग्ध सफेद कार पुलिस टीम की नजर में आई. पुलिस ने कार को रुकने का संकेत दिया, लेकिन वाहन सवार युवक वाहन मोड़कर भागने लगे. तत्परता दिखाते हुए पुलिस टीम ने घेराबंदी कर कार को रोक लिया और तीनों को हिरासत में ले लिया.
गिरफ्तार युवकों की पहचान मो. अयाज उर्फ फैजल (24 वर्ष), मो. अरशद (27 वर्ष) और मो. अमान (24 वर्ष) के रूप में हुई है. तीनों मानगो और आजादनगर इलाके के रहने वाले हैं. पुलिस ने तलाशी के दौरान इनके पास से एक देशी कट्टा, बेसबॉल बैट, फोल्डिंग चाकू, स्टील रॉड, एक आई फोन और संबंधित सफेद आई-20 कार बरामद की है. सिटी एसपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पूछताछ में मो. अमान के पास से देशी कट्टा बरामद होने की पुष्टि हुई है. पूछताछ में अभियुक्तों ने कबूल किया कि वे ओलीडीह थाना क्षेत्र के कारोबारियों से रंगदारी वसूली की योजना बनाकर निकले थे और संभव विरोध या डराने-धमकाने के लिए हथियार और अन्य सामान अपने साथ रखे थे.
पुलिस के अनुसार इन तीनों ने मिलकर एक नया आपराधिक गैंग तैयार किया था और यह उनकी पहली बड़ी वारदात होने वाली थी. जांच में पता चला है कि गैंग का सरगना मो. अयाज उर्फ फैजल ने मुंगेर से अवैध हथियार मंगाए थे, ताकि जमशेदपुर में रंगदारी नेटवर्क खड़ा किया जा सके. पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. सिटी एसपी ने साफ कहा कि शहर में संगठित अपराध या रंगदारी तंत्र को किसी भी हाल में पनपने नहीं दिया जाएगा.
पत्रकार से मारपीट मामले में बड़ा एक्शन हुआ है। एसपी ने थानेदार को निलंबित कर दिया है। दरअसल पिछले दिनों दुमका जिले में पत्रकार मृत्युंजय पांडेय से दुर्व्यवहार और मारपीट करने का मामला आया था। शिकायत के अधार पर जांच करायी गयी, जिसक बाद विभागीय जांच के आधार पर एसपी पितांबर सिंह खेरवार ने हंसडीहा के थानेदार ताराचंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
है। ताराचंद्र के निलंबन के बाद, जिम्मी हांसदा को हंसडीहा थाने का नया प्रभारी नियुक्त किया गया है। आपको बता दें कि पत्रकार मृत्युंजय पांडेय के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट के आरोप लगे हैं। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे। मृत्युंजय पांडेय ने आरोप लगाया था कि हंसडीहा के तत्कालीन थानेदार ताराचंद्र ने उनके साथ ड्यूटी के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट की।
इस मामले ने तूल पकड़ा और पत्रकार संगठनों ने दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी। जिसके बाद एसपी ने पूरे मामले में जांच के आदेश दिये। जांच रिपोर्ट के आधार पर थाना प्रभारी को सस्पेंड किया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को जमशेदपुर में कहा कि हमारे आदिवासी समाज में कई समूह ऐसे हैं, जो स्वयं अपना विकास नहीं कर सकते। आजादी के 75 साल पूरे होने पर जब देश अमृतकाल का जश्न मना रहा है, तब मैंने सरकार से कहा कि आज भी कई आदिवासी भाई-बहन पेड़ों पर रहने को विवश हैं।
न तो उनके तन पर कपड़े हैं न रहने को घर। हमें उनकी मदद करनी चाहिए। सरकार ने इसको संज्ञान में लिया और देश के 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के लिए मिशन मोड पर विकास की पहल शुरू की है। बिरहोर समेत 75 पीवीटीजी के विकास लिए 24 हजार करोड़ का बजटीय प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान में सोमवार को ऑल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन और दिशोम जाहेरथान कमेटी की ओर से आयोजित 22वें संताली परसी माहा व ओलचिकी शताब्दी समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। उन्होंने संताली भाषा में भी कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम में राज्यपाल संतोष गंगवार तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी शामिल हुए।
‘हम आदिवासियों को भी सीखना होगा’
इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि आज भी हमारे आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे हैं या ऐसी कोई योजना उनके लिए लाई गई है। ये लोग यह भी नहीं जानते कि आवास बनने के लिए सीमेंट कहां से आएगा और घर कैसे बनेगा। उन्होंने कहा कि मेरे लोग (आदिवासी) आज भी पैसे का इस्तेमाल करना नहीं जानते। इसलिए सरकार उन्हें डायरेक्ट ट्रांसफर से पैसे देने की जगह इन्हें घर बनाकर दें। अब हम आदिवासियों को भी सीखना होगा। हमें खुद भी प्रयास करना होगा।
आदिवासी अफसर कम से कम दो लोगों को गोद लें
राष्ट्रपति ने कहा कि आज हमारे कुछ आदिवासी भाई-बहन पढ़-लिखकर बड़े-बड़े अफसर बन रहे हैं, लेकिन उनके घर-गांव पीछे छूट गए हैं। उनको समय निकालकर गांव-समाज के बीच जाना चाहिए और आदिवासियों को कुशल बनाने में मदद करनी चाहिए। जो आदिवासी नौकरी कर रहे हैं, उन्हें अपनी क्षमता के अनुरूप कम से कम हमें दो लोगों को विकसित करने की पहल करनी चाहिए।
राष्ट्रपति का संताली भाषा की समृद्धि में बड़ा योगदान: हेमंत
इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के सर्वोच्च पद पर बैठीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ओलचिकी लिपि और संताली भाषा के विकास में अपना अहम योगदान दिया है। राष्ट्रपति के ही प्रयास का प्रतिफल है कि संविधान को संताली में अनुवाद करवाया गया। उन्होंने ऐसा करके महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि रघुनाथ मुर्मू ने संतालों को अपनी लिपि देकर अलग पहचान दी है। वे हमारे दिलों में हमेशा अमर रहेंगे। राज्य सरकार आदिवासियों के विकास के लिए लगातार विभिन्न योजनाओं पर काम कर रही है। उनकी आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
राष्ट्रपति जनजातीय उत्थान की सशक्त उदाहरण: गवर्नर
इस अवसर पर राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि यह सिर्फ एक आम उत्सव नहीं बल्कि संस्कृति के जीवंत होने का परिचायक है। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रपति जनजातीय उत्थान की सशक्त उदाहरण हैं। राष्ट्रपति की जीवन यात्रा सबके लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी की नेतृत्व वाली सरकार ने वर्ष 2003 में संताली को आठवीं अनुसूची में शामिल किया था। उस समय मैं भी अटल सरकार में मंत्री था। उन्होंने रघुनाथ मुर्मू के योगदान पर चर्चा की। कहा कि ओलचिकी सिर्फ लिपि नहीं बल्कि सांस्कृतिक विरासत की पहचान है।
लगातार उपलब्धियों के बाद झारखंड में कृषि क्षेत्र अब एक नए मोड़ पर खड़ा है। वर्ष 2025 तक के युवा सफर में खेती, पशुपालन, मत्स्य और सहकारिता के क्षेत्र में जो मजबूत आधार तैयार हुआ है, उसी पर आगे बढ़कर वर्ष 2026 को कृषि नवाचार और किसान समृद्धि का वर्ष बनाने की तैयारी है।
सरकार, कृषि विभाग और किसान- तीनों की साझा भागीदारी से 2026 में झारखंड को कृषि में नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बढ़ा हुआ 4000 करोड़ का कृषि बजट, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सिंचाई विस्तार, पशुधन विकास योजनाएं और सहकारिता के सशक्त ढांचे ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाला वर्ष केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि किसानों की आय, बाजार तक पहुंच और जोखिम प्रबंधन और मूल्य संवर्धन पर केंद्रित होगा। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि झारखंड में कृषि क्षेत्र अब केवल वृद्धि के दौर में नहीं, बल्कि स्थायित्व और गुणवत्ता के चरण में प्रवेश कर चुका है। यदि योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावी रहा, तो आने वाला वर्ष झारखंड को आत्मनिर्भर और लाभकारी कृषि राज्य बनाने के साथ ही स्थायित्व और समृद्धि की दिशा तय करने वाला वर्ष हो सकता है।
पांच बड़ी उम्मीदें
1. कृषि आय में 20-25% तक बढ़ोतरी की उम्मीद: धान उत्पादकता 11 से बढ़कर 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर हो चुकी है। इसी आधार पर फसल विविधीकरण, बागवानी और पशुपालन को जोड़कर 2026 में किसानों की औसत आय में 20-25% तक बढ़ोतरी की उम्मीद जताई जा रही है।
2. सिंचाई क्षेत्र में बड़ा विस्तार: ड्रिप इरिगेशन का दायरा क्रमवार बढ़कर 35,000 हेक्टेयर तक पहुंच चुका है। 2026 में इसे वर्षा-आश्रित क्षेत्रों तक और फैलाकर सिंचित रकबे में ठोस वृद्धि की संभावना है।
3. दाल-तिलहन में राष्ट्रीय पहचान: दालों का रकबा 1.14 लाख से बढ़कर आठ लाख हेक्टेयर हो चुका है। उत्पादकता बढ़कर 1,069 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पर आ चुका है। 2026 में झारखंड के देश के शीर्ष पांच दाल उत्पादक राज्यों में शामिल होने की उम्मीद है।
4. पशुपालन से ग्रामीण आय में उछाल: दूध उत्पादन 10 लाख टन से बढ़कर 34 लाख टन हो चुका है। फिलहाल दूध की प्रति व्यक्ति उपलब्धता 237 ग्राम प्रतिदिन है। इसे 2026 में राष्ट्रीय औसत के करीब लाने का लक्ष्य रखा गया है।
5. डिजिटल और पारदर्शी कृषि व्यवस्था: 36 लाख से अधिक किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्लॉकचेन आधारित योजनाओं से लाभान्वित हो चुके हैं। 2026 में सभी प्रमुख योजनाओं को डिजिटल ट्रैकिंग से जोड़ने की उम्मीद है।
नीतियों को जमीन पर उतारने की रहेगी चुनौती
कृषि विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती योजनाओं को जमीन तक प्रभावी रूप से पहुंचाने की होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म और ब्लॉकचेन जैसी तकनीकों का विस्तार तो हुआ है, लेकिन ग्रामीण स्तर पर डिजिटल साक्षरता और नेटवर्क की कमी अभी भी बड़ी बाधा है। आज भी बहुत किसान सरकारी योजनाओं से दूर हैं। अनियमित मानसून, अल्प या अतिवृष्टि और अचानक मौसम बदलाव के कारण फसल जोखिम बढ़ रहा है, जिससे फसल बीमा और राहत तंत्र को और मजबूत करना आवश्यक होगा। इसके अलावा, सिंचाई विस्तार और जल-संरक्षण योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन, छोटे और सीमांत किसानों को खाद, बीज की राहत, बाजार से जोड़ना तथा कोल्ड स्टोरेज और प्रसंस्करण सुविधाओं का समान वितरण भी बड़ी चुनौती रहेगी।
टूर्नामेंट में मुख्य अतिथि के रूप में अशोक मिश्रा (भारतीय क्रिकेटर सौरभ तिवारी के कोच) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के खेल आयोजनों से बच्चों में जीत-हार को समझने का जज़्बा पैदा होता है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों को यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि जीत हासिल करने के लिए क्या विशेष किया जाए।
इस टूर्नामेंट में कुल 16 टीमों ने भाग लिया। सभी खिलाड़ियों ने खेल के दौरान अपनी प्रतिभा और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान पूरी बस्ती में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और बस्तीवासियों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
फाइनल मुकाबले में बस्ती सुपर किंग की टीम विजेता बनी, जबकि पुच्चू 11 की टीम उपविजेता रही। दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया।
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में मैनेजमेंट टीम के सदस्य कन्हैया कुमार शर्मा, उत्तम गोराई, संतोष कुमार लाल, स्वप्न गोप, रवि सिंह, अमित डे, हेमराज कुमार, राकेश चंद्रा, सुमित कुमार सहित बस्ती के सभी गणमान्य लोगों का विशेष योगदान रहा ।
आयोजकों एवं अतिथियों ने सभी खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
घड़ी की सुइयां शाम के 3.45 बजा रही थीं। एनआइटी के दीक्षा समारोह से लौटते वक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अचानक आदित्यपुर और खरकई ब्रिज के बीच अपना काफिला रुकवा दिया।प्रोटोकॉल और कड़े सुरक्षा घेरे की परवाह किए बगैर वे गाड़ी से उतरीं और घंटों से इंतजार कर रहे आम लोगों के बीच जा पहुंचीं।
राष्ट्रपति को अपने करीब पाकर जनता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सोमवार की शाम जमशेदपुर के इतिहास में एक भावुक अध्याय के रूप में दर्ज हो गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एनआइटी के कार्यक्रम के बाद वापस लौट रही थीं। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप और उमस की परवाह किए बिना अपनी ”दीदी” और देश की राष्ट्रपति की एक झलक पाने को बेताब थे। लोगों को उम्मीद थी कि वे केवल हाथ हिलाते हुए गुजर जाएंगी, लेकिन जो हुआ, उसने सभी को अचंभित कर दिया।
अचानक थमे पहिए, और सड़क पर उतरीं राष्ट्रपति
जैसे ही काफिला खरकई ब्रिज के पास पहुंचा, राष्ट्रपति ने गाड़ी रोकने का इशारा किया। सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते, इससे पहले ही द्रौपदी मुर्मू कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गईं। उनके चेहरे पर वही पुरानी सौम्य मुस्कान थी।
उन्होंने सड़क के दोनों किनारों पर खड़े लोगों के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। वे बैरिकेडिंग के बिल्कुल करीब पहुंचीं और बुजुर्गों से उनका हाल-चाल पूछा।
लगा जैसे घर की कोई बड़ी बुजुर्ग मिल रही हों
भीड़ में मौजूद साकची की रहने वाली कॉलेज छात्रा रिया अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थीं। राष्ट्रपति को देख उनकी आंखें नम हो गईं। रिया ने कहा, हमने सोचा था सिर्फ गाड़ी दिखेगी, लेकिन वे तो हमारे पास आ गईं।
मैंने उन्हें नमस्ते किया तो उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया। लगा ही नहीं कि वे देश की राष्ट्रपति हैं, लगा घर की कोई बड़ी बुजुर्ग हैं। वहीं, अपनी मां की गोद में बैठे आठ साल के आरव ने खुशी से उछलते हुए कहा, मैम ने मुझे हाथ हिलाया। मैंने टीवी पर देखा था, आज सच में देख लिया।
सुरक्षाकर्मियों के फूले हाथ-पांव
राष्ट्रपति का यह अंदाज जनता के लिए जितना सुखद था, सुरक्षाकर्मियों के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण। जैसे ही राष्ट्रपति भीड़ की ओर बढ़ीं, एसपीजी और जिला पुलिस के जवानों के हाथ-पांव फूल गए। वे तत्काल सुरक्षा घेरा (रिंग) बनाने की कोशिश करने लगे, लेकिन लोगों के प्यार से अभिभूत राष्ट्रपति सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना आगे बढ़ती रहीं।
वे बच्चों के सिर पर हाथ फेर रही थीं और महिलाओं का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं। राष्ट्रपति की इस आत्मीयता को देख भीड़ का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
गूंज उठे भारत माता की जय के नारे
पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और द्रौपदी मुर्मू जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। कुछ युवतियों ने मोबाइल से इस पल को कैद किया। जुगसलाई की स्नेहा ने कहा, ‘हम तीन घंटे से खड़े थे, पैर दुख रहे थे।
लेकिन जब महामहिम ने कार रोककर हमें देखा, तो सारी थकान मिट गई। यह उनका बड़प्पन है कि वे अपनी जड़ों और अपने लोगों को नहीं भूली हैं। करीब पांच से सात मिनट तक लोगों के बीच रहने के बाद राष्ट्रपति वापस अपनी कार में बैठीं और काफिला आगे बढ़ गया, लेकिन वे अपने पीछे छोड़ गईं कभी न भूलने वाली सुनहरी यादें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समय झारखंड के दौरे पर हैं। जमशेदपुर के करनडीह पहुंचीं राष्ट्रपति ओलचिकी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। मुर्मू ने कहा कि ओलचिकी को जन जन तक पहुंचाने के लिए दीवार पर संताली लिपि में कलाकृतियां बनाएं।
उन्होंने कहा कि ओलचिकी के विस्तार और उत्थान में मेरा भी छोटा सा योगदान रहा है। अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा अवश्य सिखायें। एकजुट होकर इसे और समृद्ध बनाने में योगदान दें। सिर्फ संताली ही नहीं हो, मुंडा, समेत सभी का उत्थान करना है। इसके लिए जो आगे रहेगा उन्हें पीछे रह गए भाषा को साथ खींच कर आगे ले आना है।
उनके कपड़े नहीं हैं और हम…
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 75 पीवीटी ट्राइबल (पर्टिक्यूलरली वुलरेनेबल ट्राइबल ग्रुप) अभी भी पेड़ में रहते हैं। उनके घर नहीं हैं। उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतपाल वर्ष मना रहे हैं। आखिरकार सरकार ने बात सुनी और बिरहोड समेत सभी आदिवासी के लिए 24 हजार करोड़ से उनके विकास को काम करने का मिशन शुरू किया। उन्होंने कहा कि ये आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे हैं। ये लोग यह भी नहीं जानते कि सीमेंट कहां से आएगा, घर कैसे बनेगा। इसलिए उन्हें घर बनाकर देना होगा।
इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता
राष्ट्रपति ने कहा आदिवासी अभी भी बच्चे हैं। इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता। इसलिए उन्हें पैसे नहीं दें। इन्हें घर बनाकर दें। राष्ट्रपति ने कहा लेकिन हमें भी सीखना होगा। हमारे माता पिता भी हमेशा हमारा हाथ पकड़कर नहीं चलते। हमें खुद भी प्रयास करना होगा। दूसरों को देख कर चलना होगा। पहले जब मैं राजनीति में नहीं थी, तो मां से पूछा तो उन्होंने कहा बताया कि शिक्षा कितना जरूरी है, लेकिन इससे हम हमारे गांव घर से अलग हो गए, लेकिन समय निकाल कर हमें अपने गांव अपने भाई बहनों का हाल चाल लेना है। हमें कम से कम दो लोगों को विकसि करना है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमें क्षमता के हिसाब से गांव को गोद लेना है। ताकि जो पीछे रह गए उन्हें अपने साथ खड़े कर सकें। उन्होंने कारणडीह में महिलाओं को आगे मौका दिए जाने पर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वे अपना रास्ता खोज लेंगी। मुझे खुशी है कि हमारे लोग अब आगे बढ़ते दिख रहे हैं। उन्होंने अपील की कि संतालों के विकास को हमें खुद प्रयास करना होगा।
जमशेदपुर : जमशेदपुर के दौरे पर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सोनारी एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया. भारी धुंध के कारण करीब आधे घंटे देर से वह सोनारी एयरपोर्ट पर उतरी.
जमशेदपुर के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और मंत्री दीपक बिरुआ के अलावा तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उनका अभिनंदन किया गया. वे जमशेदपुर के करणडीह में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद एनआइटी जमशेदपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने के बाद शाम को वापस रांची लौटेगी. उनके साथ राज्यपाल और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी है. वे लोग सभी कार्यक्रम में उनके साथ रहेंगे.