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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: राष्ट्रगान के समान होगा ‘वंदे मातरम’ का दर्जा, अपमान करने पर होगी जेल

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नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिया गया है। केंद्र सरकार ने अब राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक दर्जा और सम्मान देने का फैसला किया है।n7112035751778050272254d5d0e2d14c2c50df9e4eeb32f46bacd33080cc1769a65c779b6376a163fb9824

कानून में होगा बड़ा बदलाव

​कैबिनेट ने ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ (Prevention of Insults to National Honour Act) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के बाद:

  • ​’वंदे मातरम’ का अपमान करना या इसके गायन में बाधा डालना अब एक दंडनीय अपराध होगा।
  • ​दोषी पाए जाने पर वही सजा मिलेगी जो राष्ट्रगान के अपमान पर दी जाती है—यानी 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों।
  • ​अभी तक इस कानून के तहत केवल राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान के अपमान पर ही कानूनी कार्रवाई का प्रावधान था।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

नया प्रोटोकॉल और नियम

​कैबिनेट के इस फैसले के साथ ही वंदे मातरम के गायन को लेकर कुछ कड़े प्रोटोकॉल भी लागू होंगे:

  1. गायन का समय: राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों को गाने के लिए अब एक निश्चित समय सीमा तय की गई है (लगभग 3 मिनट 10 सेकंड)।
  2. समान सम्मान: सरकारी आयोजनों में जब भी वंदे मातरम गाया जाएगा, सभी को राष्ट्रगान की तरह ही सावधान की मुद्रा में खड़ा होना अनिवार्य होगा।
  3. वरीयता: गृह मंत्रालय के हालिया दिशा-निर्देशों के अनुसार, आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम को राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा।

राजनीतिक और सांस्कृतिक महत्व

​यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब देश ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहा है। 1882 में बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का सबसे बड़ा उद्घोष था।

​राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत और वहां की सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार का मानना है कि यह कदम राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति देशवासियों में सम्मान की भावना को और मजबूत करेगा।

तीसरी धारा न्यूज के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।

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