पोटका प्रखंड के टांगराईन गांव में दूसरों के घरों में काम करके अपनी माता का भरण पोषण करती की आदिम जनजाति की 12 वर्षीय पूरी सबर को टांगराईन उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक अरविन्द तिवारी के अथक प्रयास से पूरी सबर को बालश्रम से मुक्ति मिली.
अरविंद तिवारी ने पूरी सबर को स्कूल में दाखिला कराया. उल्लेखनीय है की टांगराईन स्कूल के प्रधानाध्यापक अरविन्द तिवारी लगातार प्रयास कर आदिम जनजाति के बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का काम कर रहे हैं. इसी क्रम में उन्होंने मंगलवार को 12 वर्षीय लड़की पूरी सबर को बालश्रम से मुक्त कराया.
12 वर्ष की पूरी अभी तक एक बार भी स्कूल नहीं गई है. उसके बारे में जानकारी मिलने पर प्रधानाध्यापक उसे किसी तरह समझा-बुझाकर विद्यालय लाए. लेकिन बच्ची शर्म और डर से स्कूल आना नहीं चाह रही थी. दूसरे दिन बुधवार को भी लगातार पूरी को जाकर विद्यालय लाया गया. आदिम जनजाति सबर बच्ची को नए ड्रेस और चप्पल प्रधानाध्यापक ने दिये. 2 महीने के अंदर ही प्रधानाध्यापक ने छह सबर बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराकर विद्यालय से जोड़ाहै. पूरी सबर के पिता की मौत 2 महीने पहले कैनाल में डूबने से हो गई थी. मालूम हो कि आदिम जनजाति के लोगों की स्थिति गरीबी और नशाखोरी के कारण काफी दयनीय है. बच्चे स्कूल जाने के बजाए विभिन्न घरों में धांगड़ (बाल श्रमिक) का कार्य करते हैं.
जमशेदपुर: उपद्रवियों द्वारा जमशेदपुर को साजिश के तहत अशांत करने की साजिश फलीभूत होता नजर आ रहा है. रामनवमी से शुरू हुआ विवाद अंदर ही अंदर अचानक सुलग उठा, और शनिवार को महावीरी झंडा उतारने के दौरान शास्त्री नगर ब्लॉक नंबर 3 स्थित जटाधारी हनुमान मंदिर के चौक पर झंडे के बांस में बंधे मांस के टुकड़े के बाद विवाद इस कदर भड़का कि रविवार देर शाम आते आते हिंसक रूप ले लिया।
बता दें कि शनिवार को जमशेदपुर के कदमा थाना अंतर्गत शास्त्री नगर ब्लॉक नंबर 3 स्थित जटाधारी हनुमान अखाड़ा का झंडा उतारने के दौरान झंडे के बांस में मांस का टुकड़ा पाया गया था। जिसे पॉलिथीन में लपेटकर बांधा गया था. जिसके बाद हिंदूवादी संगठन आक्रोशित हो उठे और जमकर बवाल काटा। देखते ही देखते दोनों समुदाय के लोग आमने- सामने हो गए। हालांकि शनिवार को किसी तरह प्रशासन ने समझा- बुझाकर मामले को शांत कराया. इधर रविवार को मंदिर कमेटी के लोग मंदिर में बैठक कर रहे थे। इसी दौरान दूसरे समुदाय के लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी. जिसके बाद लोग आक्रोशित हो उठे और दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई. हिंसा और आगजनी में कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए. दुकानों में आग लगा दी गई। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंची. पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने में खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा। इस हिंसक झड़प में 5- 6 पुलिसकर्मी घायल हो गए. जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया है। उधर जिले के तमाम आला अधिकारी मौके पर कैंप कर रहे हैं. उधर प्रशासन ने बढ़ते हिंसा को देखते हुए धारा 144 लागू कर दी है।
झारखंड के दिवंगत शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो शुक्रवार को पंचतत्व में विलीन हो गये। बोकारो जिला के चंद्रपुरा प्रखंड के भण्डारीदह के समीप दामोदर नदी घाट पर राजकीय सम्मान के साथ उनकी अंत्येष्टि सम्पन्न हुई। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन समेत हजारों की संख्या में लोग अंतिम यात्रा में शामिल हुए और उन्हें अंतिम विदाई दी। इससे पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत जगरनाथ महतो के अलारगो स्थित पैतृक आवास पर पहुंच कर शोकाकुल परिजनों से मिले और उन्हें ढांढस बंधाया। मुख्यमंत्री ने शोक संतप्त परिजनों से कहा, ‘दुख की इस घड़ी में हम सभी आपके साथ खड़े हैं। भगवान दिवंगत की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।’
अंतिम दर्शन को उमड़ी जनता
दिवगंत शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो का पार्थिव शरीर बोकारो पहुंचने पर बड़ी संख्या में उनके शुभचिंतक उमड़ पड़े। मंत्री जगरनाथ महतो का पार्थिव शरीर लेकर काफिला बोकारो जिले के सीमा क्षेत्र में पेटवार स्थित चरगी घाटी पहुंचा। वहां डीसी कुलदीप चौधरी, एसपी चंदन झा, बोकारो विधायक विरंची नारायण, गोमिया के पूर्व विधायक योगेन्द्र प्रसाद ने शिक्षा मंत्री के पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन किये और उन्हें श्रद्धाजंलि दी। इससे पहले आलरगो स्थित उनके निवास स्थान पर हिन्दू रीति-रिवाज से पार्थिव शरीर को स्नान करा कर हल्दी चंदन का लगा कर अंतिम विदाई दी गयी। पार्थिव शरीर को कंधा के सहारे दामोदर नदी का तट ले जाया गया, जहां पर पुत्र राजू उर्फ अखिलेश कुमार ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर भाजपा, झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा के जिला एवं प्रखंड अध्यक्ष, सचिव और कोषाध्यक्ष सहित हजारों ग्रामीण उपस्थित थे। इससे पहले उनका शव पैतृक गांव अलारगो पहुंचने से पहले मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्र नाथ महतो, श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता, पूर्व सांसद रवीन्द्र कुमार पाण्डेय ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी।
अमीषा पटेल बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्रियों में शुमार हैं, लेकिन उनका नाम अक्सर कॉन्ट्रवर्सीज में फंसता रहता है। जहां अभिनेत्री इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘गदर 2’ को लेकर सुर्खियों में हैं। वहीं आज उनको लेकर एक ऐसी खबर आ रही है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में अभिनेत्री की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। एक्ट्रेस के खिलाफ अरगोड़ा के रहने वाले एक शख्स अजय कुमार सिंह ने साल 2018 में केस दर्ज किया था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि म्यूजिक मेकिंग के नाम पर अमीषा पटेल ने उनसे ढाई करोड़ रुपये लिए। पर यह म्यूजिक वीडियो बन नहीं पाया और अमीषा ने पैसे वापस नहीं किए।
इसी मामले में रांची के सिविल कोर्ट ने वॉरन्ट जारी किया है। अमीषा के खिलाफ समन जारी होने के बावजूद वह कोर्ट में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रही हैं। न ही अपने वकील को भेज रही हैं। ऐसे में अमीषा पटेल के खिलाफ दर्ज मामले में यह वॉरन्ट जारी हुआ है। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी। बता दें कि यह मामला अजय कुमार सिंह की ओर से अमीषा पटेल और उनके बिजनेस पार्टनर कुणाल के खिलाफ है।
अमीषा पटेल और उनके पार्टनर के खिलाफ शिकायत करने वाले अजय कुमार सिंह झारखंड के फिल्म निर्माता हैं। उन्होंने अभिनेत्री और उनके पार्टनर के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और चेक बाउंस का मामला दर्ज कराया था। समन के बावजूद अमीषा कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखने नहीं आई थीं, जिसकी वजह से कोर्ट नाराज हो गई।
कुछ दिनों पहले एक निजी समाचार चैनल को एक इमेल आता है। इस इमेल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जान से मारने की धमकी लिखी होती है। समाचार चैनल तुरंत इस मेल के बारे में पुलिस को सूचना देते हैं और पुलिस मामला दर्ज करके हाईलेवल की जांच शुरू कर देते हैं। जांच के दौरान पता चलता है कि ईमेल लखनऊ से भेजा गया था।
16 साल का है आरोपी लड़का
जिसके बाद नोएडा पुलिस ने शुक्रवार को लखनऊ से एक किशोर को पकड़ा। सहायक पुलिस आयुक्त (नोएडा) रजनीश वर्मा ने बताया कि बिहार के रहने वाले 16 वर्षीय लड़के को शुक्रवार की सुबह राज्य की राजधानी के चिनहट इलाके से पकड़कर यहां लाया गया। उन्होंने कहा, ‘‘यहां सेक्टर-20 थाने में पांच अप्रैल के मामले में एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद मामले की जांच की गई। धमकी भरा ई-मेल भेजने वाले का पता लगाने के लिए तकनीकी टीम को भी शामिल किया गया।’’
आरोपी नाबालिग को अब किशोर अदालत में पेश किया जाएगा
उन्होंने कहा, ‘‘जांच के आधार पर, ईमेल भेजने वाले का पता लगाया गया और लखनऊ के चिनहट क्षेत्र में उसकी मौजूदगी का पता चला। ई-मेल भेजने वाला एक स्कूली छात्र निकला, जिसने अभी-अभी अपनी 11वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी की है और इस सत्र में 12वीं कक्षा में पढ़ाई शुरू करेगा।’’ वर्मा ने कहा कि लड़के को यहां एक किशोर अदालत में पेश किया जा रहा है। एक मीडिया हाउस के प्रतिनिधि ने अपनी शिकायत में कहा था कि उन्हें प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की हत्या की धमकी देने वाला एक ई-मेल मिला है। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।
कर्नाटक में कुछ ही दिनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनावों से पहले सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारी में लगे हुए हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस ने चुनाव को लेकर कल 41 उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी है। दूसरी सूची में पार्टी ने तीन ऐसे उम्मीदवारों को भी टिकट दिया है जिन्होंने अपनी मूल पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा है। इस लिस्ट में कांग्रेस ने हाल ही में बीजेपी और जनता दल (एस) छोड़कर पार्टी में शामिल तीन नेताओं को भी टिकट दिया है। लेकिन, सूची जारी किये जाने के बाद पार्टी की स्टेट यूनिट में असहमति दिखाई दे रही है। केवल यहीं नहीं टिकट नहीं मिलने पर कई नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी भी जाहिर की है।
पार्टी की राज्य यूनिट के एक वर्ग में असंतोष
कांग्रेस की कर्नाटक यूनिट ने राज्य विधानसभा चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची की घोषणा कर दी है जिसके बाद से पार्टी की राज्य यूनिट के एक वर्ग में असंतोष दिख रहा है और कुछ नेताओं ने टिकट नहीं मिलने पर सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जताई है। कुछ नेताओं ने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है और कुछ नेताओं ने कहा है कि वे अपने समर्थकों के साथ विचार-विमर्श करेंगे एवं भविष्य के कदम को लेकर फैसला करेंगे।
सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस को जिले की सभी सीट पर हार मिले
चित्रदुर्ग से टिकट नहीं दिए जाने से नाराज विधान परिषद के पूर्व सदस्य रघु अचार ने कहा कि वह जनता दल (सेक्युलर) में 14 अप्रैल को शामिल हो जाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी चित्रदुर्ग जिले की सभी सीटों पर जीत हासिल करे। जद (एस) नेता टी. ए. श्रवण ने अचार से मुलाकात करने के बाद कहा कि उन्होंने कोई मांग नहीं रखी है, लेकिन वह उनके स्वाभिमान को ठेस पहुंचाए जाने के कारण यह सुनिश्चित करेंगे कि कांग्रेस को जिले की सभी सीट पर हार मिले।
अचार से मुलाकात की और उनका सहयोग मांगा
इससे पहले के सी वीरेंद्र ने अचार से मुलाकात की थी और उनका सहयोग मांगा था, जिस पर उन्होंने कहा था- अब बहुत देर हो चुकी है। मैं पहले ही 17 अप्रैल को नामांकन दाखिल करने की घोषणा कर चुका हूं। वीरेंद्र एक अच्छे मित्र हैं, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। कांग्रेस के उम्मीदवारों की सूची में वीरेंद्र का नाम भी शामिल है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, चित्रदुर्ग से टिकट के एक अन्य दावेदार एस के बसवराजन ने पार्टी से इस्तीफा देने और अपने समर्थकों एवं शुभचिंतकों की बैठक बुलाने का फैसला किया है, ताकि वह इस पर निर्णय ले सकें कि उन्हें आगे क्या करना है।
कांग्रेस ने मांड्या से पी. रविकुमार को टिकट दिया
मांड्या से टिकट मिलने की उम्मीद कर रहे के. के. राधाकृष्ण ने अपने समर्थकों से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा कि वह एक सप्ताह के लिए पूरे निर्वाचन क्षेत्र का दौरा करेंगे और फिर अपने अगले कदम को लेकर फैसला करेंगे। उन्होंने कहा कि वह अब भी पार्टी में हैं और वह पार्टी के नेताओं एवं उनके समर्थकों से मिलेंगे। उन्होंने कहा- मैं 13 अप्रैल के बाद अपने समर्थकों की बैठक बुलाऊंगा और अपने फैसले की घोषणा करुंगा. कांग्रेस ने मांड्या से पी. रविकुमार को टिकट दिया है।
हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई
वाई एस वी दत्ता को कडूर से टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं होने पर उन्होंने भी रविवार को अपने समर्थकों की एक बैठक बुलाई है। उन्होंने समर्थकों को पत्र लिखकर कहा है- हमारे स्वाभिमान को ठेस पहुंचाई गई है। इस सीट से कांग्रेस ने आनंद के एस दत्ता को उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस ने 41 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची कल जारी की थी। (भाषा इनपुट के साथ)
जेल में बंद ठग सुकेश चंद्रशेखर को लेकर एक और बड़ा खुलासा हुआ है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि सुकेश चंद्रशेखर रोहिणी जेल से वसूली का रैकेट चला रहा था। जेल से वसूली रैकेट चलाने में तीन जेल अधिकारी मदद कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार सुकेश ने प्रोटेक्शन मनी के रूप में करोड़ो रुपये जेल अधिकारियों को दिए थे। सूत्रों के अनुसार अधिकारी इस रिश्वत के बदले सुकेश को जेल में सुविधाएं देते थे।
सूत्रों के अनुसार दो अधिकारियों सुंदर बोरा को हर महीने 1.5 करोड़ रुपए और महेंद्र प्रसाद सुंदरीलाल को 25 लाख रुपए मिले थे। सूत्रों के अनुसार सुकेश चंद्रशेखर ने कथित तौर पर डीजी जेल को हर महीने करीब 2 करोड़ देने की बात कबूल की। सुकेश जेल से आईफोन 12 प्रो के ज़रिए वसूली करता था, यह फोन उसने पैरोल के दौरान चेन्नई से खरीदा था।
जेल अधिकारियों ने दिया था सिम कार्ड
सूत्रों के अनुसार जेल अधिकारियों ने सुकेश को एयरटेल सिम कार्ड मुहैया कराया था, जिससे वह जेल में इंटरनेट का इस्तेमाल करता था। सूत्रों के मुताबिक सुकेश चन्द्रशेखर जेल में टेलीग्राम और व्हाट्सऐप का इस्तेमाल करता था। सूत्रों ने बताया कि सुकेश को जेल में अलग बैरक में रखा गया था, कोरोना काल में भी उसको अलग बैरक में रखा गया था। सूत्रों की मानें तो सुकेश ने सेल में CCTV को पानी की बोतलों और पर्दों से ढक दिया था। इतना ही नहीं वह जेल में वकीलों से बात करने के लिए जेल अधीक्षक का ऑफिस इस्तेमाल करता था।
सूत्रों के अनुसार धर्म सिंह मीणा दीपक से पैसे लेता था और उसको जेल अधिकारियों के बीच बांटता था। जेल अधिकारियों को पैसे बाटने के लिए धर्म सिंह मीणा को अलग से पैसे मिलते थे। सूत्रों के मुताबिक सुकेश से मिलने वालों का पैसों का इस्तेमाल अधिकारी घरेलू खर्च, फ्लैट खरीदने और डाकघर बचत खाते समेत अन्य जगहों पर निवेश करते थे।
झारखण्ड न्यूज़ डेस्क, पूर्वी सिंहभूम के पूर्व सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार लाल की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने उने पुन बहाल करने का आदेश सरकार को दिया है. जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने डॉ. लाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
छह साल तक विभागीय कार्रवाई के बाद डॉ. लाल को वर्ष 2022 में बर्खास्त कर दिया गया था. इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. सुनवाई के दौरान डॉ लाल का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार व अपराजिता भारद्वाज की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रार्थी पर नौकरी में रहते हुए चुनाव लड़ने का आरोप लगाते हुए विभागीय कार्रवाई के बाद बर्खास्त कर दिया गया. आरोप है कि वर्ष 1995, 2001 और 2005 में बिना पद छोड़े ही विधानसभा का चुनाव लड़ा था. इसके लिए वर्ष 2016 में उन्हें शो कॉज जारी किया गया. विभागीय कार्रवाई में 21 साल की देरी का भी कोई कारण नहीं बताया गया. प्रार्थी ने कहा कि उन्होंने 1995 और 2001 में कोई चुनाव नहीं लड़ा है. जहां तक 2005 की बात है, तो उन्होंने चुनाव से पहले अपना त्याग पत्र दिया था.
छह साल तक चली विभागीय कार्रवाई उनके त्यागपत्र पर क्या निर्णय लिया गया, इसके बारे में उन्होंने विभाग से कई बार जानकारी मांगी थी. लेकिन उन्हें कोई दस्तावेज नहीं दिया गया. छह साल तक चली विभागीय कार्रवाई के दौरान संचालन पदाधिकारी ने भी बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग से दस्तावेज मांगे थे, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया. इसके बाद अचानक उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था. हाईकोर्ट के फैसले पर जमशेदपुर आईएमए ने खुशी जाहिर की है. एसोसिएशन के सचिव डॉ. सौरभ चौधरी ने कहा कि फैसले से चिकित्सक समुदाय में खुशी है. कुछ विधायकों को यह समझने की जरूरत है कि राजनीतिक लड़ाई और महत्वाकांक्षा के लिए डॉक्टर को बलि का बकरा बनाना गलत है.
यह है मामला डॉ. एके लाल पर नौकरी में रहते बिहार के झंझारपुर से विधानसभा से चुनाव लड़ने का आरोप था. मामला 2005 का है. शिकायत के बाद अक्तूबर 2014 से जांच शुरू हुई. 2022 में जिले के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. लाल को बर्खास्त कर दिया गया. डॉ. एके लाल के मुताबिक, चुनाव में नामांकन के साथ नौकरी से त्यागपत्र की जानकारी दी थी, लेकिन त्यागपत्र मंजूर नहीं हुआ और नाम वापसी का समय गुजर चुका था. इससे नामांकन के बावजूद चुनाव प्रचार व अन्य प्रक्रिया से दूर रहे थे. बर्खास्तगी के बाद डॉ. एके लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. डॉ. लाल फिलहाल रिटायर हो चुके हैं.
पश्चिम मेदिनीपुर जिला अंतर्गत खड़गपुर ग्रामीण के खेमाशुली में बुधवार की सुबह से कुड़मी समाज का रेल चक्का जाम आंदोलन शुरू हो गया I इसके चलते रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग दोनों जाम हो गए।
जानकारी के अनुसार, अब तक दक्षिण पूर्व रेलवे की 48 ट्रेनों के रद्द होने की सूचना है।
कुड़मी समाज की अनुसूचित जनजाति में शामिल होने की मांग
कुड़मी समाज अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर आंदोलनरत है। कुर्मी समुदाय के सदस्यों का दावा है कि उन्हें 1931 तक अनुसूचित जनजाति के रूप में पंजीकृत किया गया था, लेकिन देश आजाद होने के बाद कुछ अज्ञात कारणों से उन्हें एसटी सूची से बाहर रखा गया। उनका कहना है कि वे ओबीसी सूची में शामिल हैं, जबकि एसटी समुदाय की सुविधाओं के पात्र हैं।
बंंगाल व झारंखड में कुर्मी के वोट हैं बेहद अहम
एक आंकड़े में तो इस बात तक का खुलासा हुआ है कि बंगाल में लगभग 50 लाख कुर्मी हैं। जंगलमहल के चार जिलों में कम से कम 35 विधानसभा सीटों पर इनके वोट महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यानि इन सीटों पर इस समुदाय के लोगों के वोट से उम्मीदवारों की हार-जीत-हार तय होती है। कुर्मी संगठनों के दावे के मुताबिक, झारखंड में उनकी आबादी 25 प्रतिशत है।
आंदोलन की भनक लगते ही रेलवे ने कई ट्रेनों को किया रद्द
समाज ने इससे पहले दिन राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम करने की कोशिश की थी। अब कुड़मी समाज के प्रतिनिधियों ने खेमाशुली में रेल ट्रैक पर उतर कर रेलवे परिचालन सेवा को पूरी तरह से बाधित कर दिया है। इस आंदोलन की पूर्व में भनक लगते ही रेलवे ने इस डिवीजन से चलने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है।
आरपीएफ व पुलिस बल ने संभाला मोर्चा
खेमाशुली में कुड़मी समाज के आंदोलन के मद्देनजर रेलवे ने भी बड़े स्तर पर तैयारी की है। रेलवे के द्वारा काफी संख्या में आरपीएफ के जवानों को खेमाशुली में प्रतिनियुक्त किया गया। वहीं विधि व्यवस्था के लिए राज्य पुलिस बल भी अलर्ट पर हैं। इस कुड़मी आंदोलन पर रेलवे व जिला प्रशासन की कड़ी नजर हैं।
दिल्ली सरकार कीआबकारी नीति में कथित घोटाले से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत अवधि समाप्त होने पर आज बुधवार को ईडी की टीम ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया।
ताजा मामले में कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत 17 अप्रैल, 2023 तक बढ़ा दी है।
इससे पहले 22 मार्च को अदालत ने रिमांड की अवधि समाप्त होने पर सिसोदिया को न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सिसोदिया इसके साथ ही सीबीआई मामले में भी न्यायिक हिरासत में जेल में हैं।
सिसोदिया के वकील ने कोर्ट में दी थी ये दलीलें-
सिसोदिया की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता विवेक जैन ने कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता है। जहां तक रिश्वत लेने का मामला है तो सिसोदिया व उनके परिवार के किसी सदस्य के खाते में कोई पैसा नहीं आया है। यह नीति कई विभागों के साथ उपराज्यपाल के पास और हर स्तर पर मंजूर हुई।
विवेक जैन ने कहा कि न तो कोई आरोप है और न ही ऐसा साक्ष्य है कि सिसोदिया ने रुपये लिए हैं। इतना ही नहीं नीति के लागू होने के बाद सरकार को बीते दस सालों में सबसे ज्यादा राजस्व मिला।
विवेक जैन ने कहा कि ऐसी कोई सामग्री नहीं पेश गई कि मनी लांड्रिंग अपराध करने में विजय नायर सिसोदिया के प्रतिनिधि थे। ऐसा भी नहीं है कि सिसोदिया ने किसी को बोला है कि ये नियम छोड़ दें या इसे लाइसेंस दे दें।
विवेक जैन ने कहा कि अभियोजन पक्ष का आरोप है कि मैंने कैबिनेट फाइल से छेड़छाड़ की, लेकिन ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि इस तरह का नोट कैबिनेट के पास गया था।
वहीं, ईडी की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता जोहेब हुसैन ने कहा कि हम कुछ नए साक्ष्य जुटा रहे हैं, जोकि हवाला ऑपरेटर से जुड़ा है। ऐसे में हमें जिरह पेश करने के लिए 10 या 11 अप्रैल तक का समय चाहिए। ईडी की अपील स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सुनवाई 12 अप्रैल के लिए स्थगित कर दी।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले, 3 अप्रैल को सीबीआई से जुड़े मामले में मनीष सिसोदिया को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने मनीष सिसोदिया की न्यायिक हिरासत को 17 अप्रैल तक बढ़ा दिया। 31 मार्च को अदालत ने इसी मामले में सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
वहीं, बीते शुक्रवार को सीबीआई के मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत देने से इनकार करते हुए राउज एवेन्यू की विशेष सीबीआई अदालत ने कहा कि पूरे मामले में आपराधिक साजिश रचने का सिसोदिया को प्रथम दृष्टया सूत्रधार माना जा सकता है।
गौरतलब है कि आबकारी नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई ने 26 फरवरी को आठ घंटे की लंबी पूछताछ के बाद सिसोदिया को गिरफ्तार किया था और अदालत ने उन्हें छह मार्च को न्यायिक हिरासत में जेल में भेज दिया था। ईडी के मनी लांड्रिंग मामले में भी न्यायिक हिरासत में हैं।