एक नई सोच, एक नई धारा

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टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन की हुंकार: ग्रेड रिवीजन और कर्मचारी पुत्रों की सीधी बहाली की मांग; ‘टाटा स्टील’ की तर्ज पर सुविधाओं पर जोर

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन ने बुधवार को यूनियन कार्यालय में एक महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक आयोजित की। यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर्मचारियों के हितों, विशेष रूप से ग्रेड रिवीजन और मैनपावर की कमी को लेकर प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया गया।

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​मैनपावर की कमी और ‘सीधी बहाली’ की मांग

​यूनियन ने कंपनी में मैनपावर की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। सदस्यों ने बताया कि काम के बढ़ते दबाव के कारण कर्मचारी न तो छुट्टियां ले पा रहे हैं और न ही उन्हें कैंटीन जाने का समय मिल पा रहा है।

  • बहाली का नया मॉडल: यूनियन ने मांग की है कि खाली पदों को भरने के लिए तत्काल कर्मचारी पुत्रों की बहाली की जाए।
  • सीधा रोल: स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह बहाली टाटा टेक्निकल सर्विसेज (TTSL) के माध्यम से न होकर, सीधे टाटा स्टील (टिनप्लेट डिवीजन) के रोल पर होनी चाहिए।

​ग्रेड रिवीजन और वित्तीय मांगे

​बैठक में ‘ग्रेड रिवीजन’ का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। यूनियन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. टाटा स्टील मानक: टिनप्लेट का ग्रेड समझौता टाटा स्टील लिमिटेड के मानकों के अनुरूप हो।
  2. ब्याज सहित एरियर: लंबित समझौते के कारण बकाया राशि का भुगतान प्रबंधन द्वारा ब्याज और एडवांस एरियर के साथ किया जाए।
  3. DA में वृद्धि: डीए (DA) पॉइंट रेट को बढ़ाकर 4 रुपये प्रति पॉइंट किया जाए और NS ग्रेड का विस्तार किया जाए।

​टाउनशिप और बुनियादी सुविधाओं पर नाराजगी

​यूनियन ने जुस्को (JUSCO) द्वारा टाउनशिप में साफ-सफाई और दवा छिड़काव के लिए शुल्क लेने पर कड़ी आपत्ति जताई।

  • क्वार्टर आवंटन: 10 नंबर बस्ती के कर्मचारियों को जल्द क्वार्टर आवंटित करने और नए क्वार्टरों में पानी की टंकी व मेंटेनेंस की समस्याओं को दूर करने की मांग की गई।
  • पार्किंग: टाटा स्टील की तर्ज पर कंपनी परिसर के अंदर ही टू-व्हीलर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

​बैठक में महामंत्री मनोज कुमार सिंह, उपाध्यक्ष परविंदर सिंह सोहल समेत कार्यकारिणी के सभी वरिष्ठ सदस्यों ने एकजुट होकर इन मांगों को प्रबंधन के समक्ष मजबूती से रखने का संकल्प लिया।

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टाटा स्टील की ‘ग्रीन माइनिंग’ की ओर बड़ी छलांग: वेस्ट बोकारो में पहला इलेक्ट्रिक ट्रक लॉन्च, 3000 पेड़ों के बराबर देगा लाभ

वेस्ट बोकारो/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​पर्यावरण संरक्षण और वर्ष 2045 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन के अपने महात्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में टाटा स्टील ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने वेस्ट बोकारो डिवीजन के वाशरी-3 कॉम्प्लेक्स में रॉ मैटेरियल डिवीजन (RMD) के इतिहास के पहले इलेक्ट्रिक ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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​जीरो-एमिशन तकनीक: प्रदूषण पर प्रहार

​मोंट्रा इलेक्ट्रिक और टाइकून इंडस्ट्रीज के सहयोग से पेश किया गया यह ट्रक पूरी तरह से अत्याधुनिक ‘जीरो-एमिशन’ तकनीक पर आधारित है। यह पहल न केवल टाटा स्टील के लिए बल्कि भारतीय खनन (Mining) क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

पर्यावरण पर प्रभाव के आंकड़े:

  • कार्बन कटौती: एक अकेला इलेक्ट्रिक ट्रक प्रति वर्ष वातावरण से लगभग 64 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) कम करेगा।
  • पेड़ों से तुलना: यह प्रभाव इतना व्यापक है कि यह 3,000 पेड़ों द्वारा साल भर में किए जाने वाले पर्यावरण शुद्धिकरण के बराबर है।
  • ध्वनि प्रदूषण: इलेक्ट्रिक इंजन होने के कारण खदानों में होने वाले भारी शोर (Noise Pollution) में भी भारी कमी आएगी।

​भविष्य की योजना: डीजल मुक्त खदानें

​कोल बेनीफिकेशन के चीफ बीवी. सुधीर ने बताया कि यह कदम भारत के ‘लो-कार्बन इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम’ की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। फिलहाल, इस ट्रक का गहन ट्रायल किया जाएगा।

आगामी रणनीति:

  1. क्षमता का आकलन: आने वाले महीनों में ट्रक की कार्यक्षमता और भारी लोड सहने की शक्ति का परीक्षण होगा।
  2. चरणबद्ध विस्तार: सफल ट्रायल के बाद, खदानों में उपयोग होने वाले पारंपरिक डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की फ्लीट तैनात की जाएगी।
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औद्योगिक राजधानी से ‘डिफेंस हब’ तक: भारतीय सेना का अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ बन रहा है जमशेदपुर

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​जमशेदपुर की पहचान अब केवल टाटा स्टील और ट्रकों तक सीमित नहीं है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की लहर पर सवार होकर यह शहर अब भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार और सुरक्षा उपकरण तैयार करने वाले एक बड़े डिफेंस क्लस्टर के रूप में उभर रहा है। हाल ही में आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में आयोजित ‘डिफेंस कॉन्क्लेव-2026’ ने इस बदलाव पर मुहर लगा दी है।

​आदित्यपुर: नट-बोल्ट से मिसाइल लॉन्चर तक का सफर

​एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक, आदित्यपुर अब रक्षा उत्पादन का नया केंद्र है। यहाँ की 1200 से अधिक MSME इकाइयां अब केवल ऑटो पार्ट्स नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र के लिए जटिल पुर्जे बना रही हैं:

  • DRDO और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री: स्थानीय कंपनियां मिसाइल लॉन्चर के हाइड्रोलिक सिस्टम और सबमरीन के महत्वपूर्ण पार्ट्स की आपूर्ति कर रही हैं।
  • टैंक ट्रैक लिंक: टैंकों के चलने के लिए जरूरी ट्रैक लिंक्स का निर्माण अब यहीं के कुशल इंजीनियरों द्वारा किया जा रहा है।
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​टाटा मोटर्स: सीमाओं का ‘सारथी’

​1958 से सेना का साथ दे रही टाटा मोटर्स अब अपनी तकनीक को अगले स्तर पर ले गई है। जमशेदपुर प्लांट में तैयार हो रहे वाहन वैश्विक मानकों को चुनौती दे रहे हैं:

  • केस्ट्रल (Kestrel): यह एक ‘एम्फीबियस’ बख्तरबंद वाहन है जो जमीन और पानी दोनों में दुश्मन का मुकाबला कर सकता है।
  • मिसाइल वाहक: ब्रह्मोस, आकाश और पिनाक जैसी मिसाइलों को ढोने के लिए विशेष 12×12 और 8×8 हैवी ट्रक यहीं तैयार होते हैं।
  • MPV (माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल): जवानों को बारूदी सुरंगों के खतरों से बचाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन।

​रक्षा गलियारे (Defense Corridor) की बढ़ती मांग

​रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हाल ही में संकेत दिया है कि जमशेदपुर-आदित्यपुर-रांची-बोकारो को मिलाकर एक डिफेंस कॉरिडोर विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रमुख उपलब्धियां और मांगें:

​”झारखंड में वह इंजीनियरिंग क्षमता है जो भारत की विदेशों पर निर्भरता खत्म कर सकती है। यदि इसे औपचारिक रूप से डिफेंस कॉरिडोर घोषित किया जाता है, तो यह न केवल निर्यात का केंद्र बनेगा बल्कि हजारों रोजगार भी पैदा करेगा।”

​जमशेदपुर की सैन्य ताकत: एक नजर में

उत्पाद / श्रेणीविशेषता एवं उपयोग
मिसाइल लॉन्चर वाहनपिनाक, आकाश और ब्रह्मोस के लिए 8×8 और 12×12 ट्रक।
केस्ट्रल (Kestrel)जमीन और पानी दोनों पर चलने वाला बख्तरबंद कॉम्बैट वाहन।
हाइड्रोलिक सिस्टममिसाइल लॉन्चिंग और सबमरीन ऑपरेशंस के लिए सटीक पुर्जे।
MPV वाहनबारूदी सुरंगों के धमाकों को बेअसर करने वाली तकनीक।

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झारखंड स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: सरकारी अस्पतालों में फर्जी बिलिंग के खेल पर कसेगा शिकंजा, PPP मोड की सेवाओं की होगी सघन जांच

रांची/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​झारखंड के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित रेडियोलॉजी सेवाओं (एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को निजी एजेंसियों द्वारा जमा किए गए बिलों के ऑडिट का सख्त आदेश दिया है।

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​एक सप्ताह में मांगी गई ‘स्क्रूटनी’ रिपोर्ट

​स्वास्थ्य निगम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिम्स (रांची), एमजीएम (जमशेदपुर), और शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज (धनबाद) सहित सभी जिलों के सिविल सर्जनों को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच के 3 मुख्य आधार:

  1. मरीज का भौतिक सत्यापन: क्या बिल में दर्ज मरीज वास्तव में अस्पताल की ओपीडी या आईपीडी (भर्ती) का हिस्सा था?
  2. डाटा मिलान: जांच की तारीख, रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट की प्रमाणिकता का क्रॉस-वेरिफिकेशन।
  3. वैधता की जांच: क्या एजेंसियां वर्तमान में सक्रिय और वैध एग्रीमेंट के तहत सेवाएं दे रही हैं?

​जमशेदपुर एमजीएम: बिना वैध करार के चल रहा सेंटर

​जांच के घेरे में जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल सबसे प्रमुखता से उभरा है। यहाँ रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही एजेंसी ‘हेल्थमैप’ का करार पिछले महीने ही समाप्त हो चुका है।

​अस्पताल प्रबंधन द्वारा काम रोकने के निर्देश के बावजूद सेंटर का संचालन जारी है। एजेंसी का दावा है कि सरकार के साथ नया करार हो चुका है, लेकिन एमजीएम प्रशासन ने किसी भी आधिकारिक लिखित आदेश मिलने से इनकार किया है। यह स्थिति सरकारी तंत्र में समन्वय की कमी और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।

​सख्त कार्रवाई की चेतावनी

​स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा संदेश दिया है कि केवल उन्हीं जांचों का भुगतान किया जाएगा जो वास्तविक रूप से मरीजों के लिए की गई हैं। फर्जी, गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए बिलों के मामले में भुगतान रोकने के साथ-साथ संबंधित निजी एजेंसियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जांच में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।

​”हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सीधे गरीबों के इलाज के लिए हो, न कि निजी लाभ के लिए। किसी भी तरह की बिलिंग गड़बड़ी पर एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।” — विभाग के वरिष्ठ अधिकारी

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झारखंड के शहरों की बदलेगी सूरत: नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने यूके में सीखा ‘स्मार्ट सिटी’ का मंत्र

लंदन/रांची | 22 जनवरी, 2026

​झारखंड के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ और स्मार्ट बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में झारखंड का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूनाइटेड किंगडम (UK) के दौरे पर है। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य कोवेंट्री शहर के नवाचारों और स्थायी शहरी प्रबंधन (Sustainable Urban Management) मॉडल्स का अध्ययन करना है, ताकि उन्हें झारखंड की परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जा सके।

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​कोवेंट्री: भविष्य की शहरी मोबिलिटी का केंद्र

​प्रतिनिधिमंडल ने कोवेंट्री में शहरी नवाचार से जुड़े प्रमुख संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान टीम का फोकस मुख्य रूप से चार स्तंभों पर रहा:

  1. ज़ीरो-एमिशन सिटी मैनेजमेंट: प्रदूषण मुक्त शहर बनाने की तकनीक।
  2. भविष्य की मोबिलिटी: अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियां।
  3. नवोन्मेषी सार्वजनिक स्थल: नागरिकों के लिए बेहतर ओपन स्पेस और पार्कों का नियोजन।
  4. एकीकृत शहर नियोजन: तकनीक और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण का मेल।

​परिवहन में क्रांति: ईवी बसें और ‘वेरी लाइट रेल’

​दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कोवेंट्री सिटी बस डिपो का अवलोकन रहा। यहाँ प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आधारित शहरी परिवहन प्रणाली के संचालन मॉडल को समझा।

​विशेष रूप से ‘कोवेंट्री वेरी लाइट रेल’ (Coventry Very Light Rail) तकनीक पर विस्तृत चर्चा हुई। इसे एक किफायती, टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल परिवहन समाधान के रूप में देखा जा रहा है। झारखंड सरकार राज्य के प्रमुख शहरों में इस मॉडल को लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है ताकि कम लागत में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।

​अकादमिक और प्रशासनिक तालमेल

​मंत्री सुदिव्य कुमार ने कोवेंट्री सिटी काउंसिल और कोवेंट्री यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे विश्वविद्यालय की रिसर्च और प्रशासन की नीतियों को मिलाकर एक टिकाऊ शहर का विकास किया जा सकता है।

​”कोवेंट्री का अनुभव झारखंड के शहरों को भविष्य के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के इन व्यावहारिक समाधानों को झारखंड के शहरी नियोजन और सार्वजनिक परिवहन में एकीकृत करेंगे।”

सुदिव्य कुमार, नगर विकास मंत्री, झारखंड

​आगामी योजना: झारखंड में क्या बदलेगा?

​इस अंतरराष्ट्रीय दौरे से प्राप्त सीख के आधार पर झारखंड के शहरों में निम्नलिखित बदलावों की उम्मीद है:

  • स्मार्ट डिपो प्रबंधन: बसों के परिचालन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
  • स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन: ज़ीरो-एमिशन फ्लीट को बढ़ावा।
  • टिकाऊ शहर नियोजन: सार्वजनिक स्थलों का इस तरह विकास कि वे पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित हों।

​यह दौरा झारखंड के शहरी विकास को सतत (Sustainable) और तकनीक-सक्षम (Tech-enabled) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

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सीमावर्ती क्षेत्रों से माओवाद के खात्मे के लिए ‘मेगा ब्लूप्रिंट’ तैयार; सारंडा और पोड़ाहाट में चलेगा निर्णायक अभियान

राउरकेला | 22 जनवरी, 2026

​ओडिशा और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों को माओवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी कमर कस ली है। राउरकेला स्थित पश्चिमांचल डीआईजी कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में माओवाद के खात्मे के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। यह बैठक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आईजी अमितेंद्रनाथ सिन्हा की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न हुई।

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​बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी

​इस रणनीतिक चर्चा में सुरक्षा एजेंसियों के कई बड़े चेहरे शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

  • दीपक कुमार, आईजी (ऑपरेशन)
  • तृप्तिकांत हाथी, डीआईजी
  • राजेश सुवर्णो, एडीजी (केंद्रीय गुप्तचर विभाग)
  • हरपाल सिंह, डीआईजी (भुवनेश्वर रेंज)
  • बृजेश कुमार राय, डीआईजी (पश्चिमी क्षेत्र)
  • नितेश वाधवानी, एसपी (राउरकेला)
  • अमित रेणु, एसपी (चाईबासा)

​इसके अलावा, सीआरपीएफ के कमांडेंट और राज्य खुफिया विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

​रणनीतिक ब्लूप्रिंट की मुख्य बातें

​करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों और माओवादी गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

  1. व्यापक सर्च ऑपरेशन: आने वाले कुछ दिनों में सुरक्षा बल इन दुर्गम क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करेंगे।
  2. ठिकानों का ध्वस्तीकरण: विशेष रूप से सारंडा और पोड़ाहाट जैसे संवेदनशील इलाकों में माओवादियों के छिपने के ठिकानों (Hideouts) को लक्षित कर उन्हें नष्ट किया जाएगा।
  3. इनामी माओवादी रडार पर: खुफिया जानकारी के अनुसार, इन घने जंगलों में 32 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक के इनामी माओवादी सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रणनीति के तहत इनकी पहचान सुनिश्चित कर रही हैं।

​”जल्द होगा माओवाद का अंत”

​चाईबासा के एसपी अमित रेणु ने विश्वास जताते हुए कहा कि इन इलाकों को बहुत जल्द माओवाद-मुक्त कर लिया जाएगा। राउरकेला पुलिस भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होकर सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों को कड़ा जवाब देगी।

​बैठक में स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से बिसरा, के. बलांग, चांदीपोष और लाठीकटा के थाना प्रभारियों ने भी हिस्सा लिया और जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने पर सहमति जताई।

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सारजामदा: मूलवासी कारूवा समाज के संस्थापक अमोल बेहरा की 15वीं पुण्यतिथि मनाई गई; समाजोत्थान का लिया संकल्प

जमशेदपुर (सारजामदा): सारजामदा पुरानी बस्ती स्थित जाहेर टोला में बुधवार को मूलवासी कारूवा समाज के संस्थापक अमोल बेहरा की 15वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समाज के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा बेहरा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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श्रद्धांजलि और संकल्प सभा

​कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों ने स्वर्गीय अमोल बेहरा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि अमोल बेहरा ने हमेशा पिछड़ों और मूलवासियों के उत्थान के लिए कार्य किया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा बेहरा ने कहा कि अमोल बेहरा के दिखाए गए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर उनके द्वारा शुरू किए गए समाजोत्थान के अधूरे कार्यों को एकजुट होकर पूरा करने का संकल्प लिया गया।

प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में समाज और विभिन्न संगठनों के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से:

  • गुरुचरण मुखी (प्रदेश कोषाध्यक्ष)
  • संजीत बेहरा (महासचिव)
  • रंजन कारूवा (वरिष्ठ संघ मित्र, मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय एवं संरक्षक, SC/ST एकता मंच)
  • संजय मुखी, गणपति कारूवा, राजकुमार बेहरा, संतोष बेहरा, आनंद कारूवा

महिला शक्ति की भागीदारी

​कार्यक्रम में समाज की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शारदा कारूवा, शोभा मुखी, भारती मुखी, देवी मुखी, मालती मुखी, दमयंती मुखी और सुलोचना मुखी सहित कई अन्य महिलाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। युवाओं में विशाल तियु, सुजीत, अभिजीत और विमल मुखी ने भी समाज सेवा का संकल्प लिया।

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झारखंड में स्वास्थ्य क्रांति: ₹205 करोड़ की लागत से ब्लॉक स्तर पर बनेगा मज़बूत सुरक्षा कवच, मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की बड़ी पहल

रांची: झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 245 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। ₹205 करोड़ के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इलाज की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी।

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क्या है BPHU और यह कैसे करेगा काम?

​ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का एक एकीकृत केंद्र होगा। यह केवल अस्पताल नहीं, बल्कि एक ‘सर्वेक्षण और रिस्पॉन्स’ यूनिट के रूप में कार्य करेगा।

इसके तीन मुख्य स्तंभ होंगे:

  1. सेवा केंद्र: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या अनुमंडलीय अस्पताल के साथ मिलकर इलाज।
  2. BPHL (ब्लॉक पब्लिक हेल्थ लैब): बीमारियों की सटीक और त्वरित जांच के लिए ब्लॉक स्तर पर आधुनिक प्रयोगशाला।
  3. HMIS सेल: स्वास्थ्य डेटा का डिजिटल प्रबंधन, जिससे बीमारियों के फैलने से पहले ही उनकी पहचान हो सके।

मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का विजन: “अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इलाज”

​योजना की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा:

​”BPHU की स्थापना झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को विकेंद्रीकृत (Decentralized) करने की दिशा में मील का पत्थर है। अब सुदूर आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को जांच या निगरानी के लिए जिला मुख्यालयों पर निर्भर नहीं रहना होगा। हमारा लक्ष्य ‘सर्वोच्च गुणवत्ता-सर्वोच्च प्राथमिकता’ है।”

​उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ईएसआईसी (ESIC) जैसे प्लेटफार्मों के साथ समन्वय कर तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड कर रही है।

प्रमुख लाभ: क्यों यह योजना ‘वरदान’ है?

  • त्वरित महामारी नियंत्रण: किसी भी संक्रामक बीमारी या महामारी की पहचान ब्लॉक स्तर पर ही हो जाएगी, जिससे इसे फैलने से रोका जा सकेगा।
  • आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस: दुर्गम और वंचित समुदायों के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी।
  • बेहतर डेटा प्रबंधन: डिजिटल सूचना प्रणाली (HMIS) के जरिए स्वास्थ्य जोखिमों की समय पर पहचान संभव होगी।
  • बुनियादी ढांचे में सुधार: रेफरल अस्पतालों और सदर अस्पतालों में बड़े पैमाने पर व्यापक सुधार किए जाएंगे।

PM-ABHIM और 15वें वित्त आयोग का सहयोग

​इस परियोजना को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से धरातल पर उतारा जा रहा है। 245 इकाइयों की यह श्रृंखला झारखंड को देश के अग्रणी सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडलों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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शिबू सोरेन को ‘भारत रत्न’ देने की मांग तेज; झारखंड आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के प्रणेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग जोर पकड़ रही है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के झारखंड आंदोलनकारियों ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक मांग पत्र जिला उपायुक्त को सौंपा है।

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सदन से लेकर सड़क तक उठ रही मांग

​उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से शिबू सोरेन को मरणोपरांत भारत रत्न देने की सिफारिश की है। विधायक सरयू राय और अन्य नेताओं ने भी इस पहल का समर्थन किया है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, शोषितों और पीड़ितों के हक की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

आंदोलनकारियों का भावनात्मक संदेश

​आंदोलनकारियों द्वारा सौंपे गए पत्र में उल्लेख है कि:

  • अविस्मरणीय संघर्ष: झारखंड राज्य के निर्माण में गुरुजी का संघर्ष और बलिदान अतुलनीय है।
  • अंतिम विदाई: उनके देहावसान के उपरांत देश के कोने-कोने से लाखों लोगों ने उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) पहुंचकर उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी थी, जो उनके प्रति जन-सम्मान का प्रतीक है।
  • सच्ची श्रद्धांजलि: समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले ऐसे महान नेता को भारत रत्न देना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

​दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में हुआ था। वे 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री, 11 बार सांसद (लोकसभा और राज्यसभा) और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक के रूप में उन्होंने अलग राज्य के आंदोलन का दशकों तक नेतृत्व किया।

​मांग पत्र सौंपने वाले प्रमुख आंदोलनकारियों में बिरसिंह सोरेन, उमानाथ झा, प्रकाश चंद्र मा, नंदा पाल, निता सरकार और अन्य शामिल रहे।

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करीम सिटी कॉलेज में मनाया गया ‘फाउंडर्स डे’; संस्थापक सैयद तफज्जुल करीम को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

जमशेदपुर: साकची स्थित करीम सिटी कॉलेज के ऑडिटोरियम में बुधवार को संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सैयद तफज्जुल करीम की 62वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक ‘फाउंडर्स डे’ के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर करीम ट्रस्ट के अधीन संचालित संस्थानों ने अपने संस्थापक के विजन को याद किया और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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ट्रस्टियों ने साझा किया भविष्य का रोडमैप

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैयद अशफाक करीम (ट्रस्टी, करीम्स ट्रस्ट) और सैयद मंसूर अली (अध्यक्ष, सेंट्रल करमिया स्कूल) रहे। सभा को संबोधित करते हुए ट्रस्टी सैयद अशफाक करीम ने कहा:

​”हमारी नजर हमेशा इस बात पर होनी चाहिए कि हमने कहां से शुरुआत की थी, आज हम कहां हैं और भविष्य में हमें कहां जाना है। हमें अपने उद्देश्यों के प्रति ईमानदार रहकर समाज को शिक्षित बनाना है।”

​उन्होंने योग्य शिक्षकों और प्राध्यापकों की सराहना करते हुए संस्थान के प्रति अपने सपनों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।

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वार्षिक रिपोर्ट और उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण

​कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के विभिन्न संस्थानों के प्रमुखों ने पिछले एक वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया:

  • डॉ. मोहम्मद रेयाज (प्राचार्य, करीम सिटी कॉलेज): कॉलेज की शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
  • श्रीमती तलत बानो एवं वहीदा तबस्सुम: मिडिल और हाई स्कूल की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
  • डॉ. मोहम्मद जकरिया (डायरेक्टर एजुकेशन): संस्थान के प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे की मजबूती पर जोर दिया।

25 वर्षों की सेवा का सम्मान और पुरस्कार वितरण

​फाउंडर्स डे के अवसर पर संस्थान ने अपने निष्ठावान कर्मियों को सम्मानित किया:

  • दीर्घ सेवा सम्मान: कॉलेज में 25 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
  • छात्रों का उत्साहवर्धन: विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।
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कार्यक्रम का समापन

​कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. एस.एम. यहिया इब्राहीम ने किया। शुभारंभ हाफिज मोहम्मद वालीउल्लाह द्वारा तिलावत-ए-कुरान से हुआ। समापन के अवसर पर सभी ने सामूहिक रूप से ‘कॉलेज तराना’ गाया और राष्ट्रगान के साथ सभा विसर्जित हुई।

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