तीसरी धारा न्यूज 23 सितंबर 2026 रांची
हाई कोर्ट परिसर में भव्य शपथ ग्रहण समारोह का हुआ आयोजन
झारखंड न्यायपालिका के इतिहास में बुधवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा, जब झारखंड हाई कोर्ट में तीन नए जजों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक ने नवनियुक्त तीनों जजों—जस्टिस मनोज प्रसाद, जस्टिस अखिल कुमार और जस्टिस राम शर्मा को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। समारोह की शुरुआत में हाई कोर्ट के महानिबंधक सत्यप्रकाश सिन्हा ने राष्ट्रपति द्वारा जारी नियुक्ति पत्र को हिंदी और अंग्रेजी में पढ़कर सुनाया। इसके बाद चीफ जस्टिस ने तीनों जजों को पुष्पगुच्छ देकर शुभकामनाएं दीं।
अखिल कुमार ने हिंदी तो मनोज प्रसाद व राम शर्मा ने अंग्रेजी में ली शपथ
शपथ ग्रहण के दौरान एक खास बात देखने को मिली, जब जस्टिस अखिल कुमार ने हिंदी भाषा में पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। वहीं, जस्टिस मनोज प्रसाद और जस्टिस राम शर्मा ने अंग्रेजी भाषा में शपथ ग्रहण की। इस गरिमामय समारोह में राज्य के महाधिवक्ता रोहितश्य राय, एडवोकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत कुमार, महासचिव नवीन कुमार, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल प्रशांत पल्लव सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ता, हाई कोर्ट रजिस्ट्री के पदाधिकारी, राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी समेत कई प्रशासनिक व न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे।
देवघर से निकलकर जज बनने तक का रहा है जस्टिस मनोज प्रसाद का सफर
नवनियुक्त जज जस्टिस मनोज प्रसाद का जन्म वर्ष 1973 में देवघर में हुआ था। इन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट फ्रांसिस स्कूल, देवघर से पूरी की और पटना यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। 1998 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित ‘कैंपस लॉ सेंटर’ से एलएलबी करने के बाद वे 1999 में वकील के तौर पर नामांकित हुए। उन्होंने मुख्य रूप से देवघर जिला अदालत में सिविल मामलों में प्रैक्टिस की। इसके बाद 4 मई 2012 को वे एडिशनल ज्यूडिशियल कमिश्नर (रांची) के रूप में झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस का हिस्सा बने थे।
जस्टिस अखिल कुमार और जस्टिस राम शर्मा का भी रहा है समृद्ध न्यायिक अनुभव
6 जनवरी 1972 को पटना में जन्मे जस्टिस अखिल कुमार ने पटना यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र में ऑनर्स और 1999 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से एलएलबी की डिग्री हासिल की। उन्होंने पटना हाई कोर्ट व जिला अदालत में वकालत की। वहीं, 7 जुलाई 1968 को दिल्ली में जन्मे जस्टिस राम शर्मा ने 1994 में दिल्ली से एलएलबी पास कर दिल्ली हाई कोर्ट व जिला अदालतों में लंबी वकालत की, जिसके बाद वे 26 मई 2012 को झारखंड सुपीरियर ज्यूडिशियल सर्विस में शामिल हुए। तीनों नए जजों के आगमन से हाई कोर्ट में लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
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