तीसरी धारा न्यूज
15 सितंबर 2026, जमशेदपुर।
एमजीएम (MGM) अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी सूझबूझ और सटीक चिकित्सा सेवा से एक 21 वर्षीय युवक को नया जीवन दिया है। सरायकेला-खरसावां जिले के रहने वाले इस युवक के पेट में पिछले कई वर्षों से पल रहे लगभग एक किलोग्राम वजनी ट्यूमर को डॉक्टरों की टीम ने सफल सर्जरी कर सुरक्षित बाहर निकाल दिया है।
20 वर्षों तक नजरअंदाज होती रही गंभीर समस्या
चिकित्सकों के अनुसार, युवक के जन्म के समय से ही उसकी दाहिनी अंडकोष की थैली खाली थी और अंडकोष शरीर के अंदर ही रह गया था। बचपन में न तो परिजनों का ध्यान इस ओर गया और न ही बड़ा होने पर युवक ने इसे गंभीरता से लिया।
लगभग चार साल पहले युवक को पेट में दर्द और अंदर कोई गोला बनने का अहसास हुआ। जब तकलीफ असहनीय हो गई, तब परिजनों ने इसे गंभीरता से लिया और करीब दो सप्ताह पहले उसे एमजीएम अस्पताल में भर्ती कराया।
जांच में कैंसर के लक्षण और ट्यूमर का खुलासा
एमजीएम अस्पताल में हुई विस्तृत जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि पेट के भीतर एक बेहद बड़ा ट्यूमर विकसित हो चुका है, जिसमें कैंसर के लक्षण भी मौजूद थे।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. एचआर खान के नेतृत्व में डॉ. एसपी गुप्ता और उनकी मेडिकल टीम ने मंगलवार को एक अत्यंत जटिल ऑपरेशन किया। डॉक्टरों की टीम ने पेट से करीब एक किलो का ट्यूमर सफलतापूर्वक बाहर निकाला। फिलहाल मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है।
अभिभावकों के लिए डॉक्टरों की महत्वपूर्ण सलाह
डॉक्टरों ने बताया कि नवजात शिशु के जन्म के समय दोनों अंडकोष अपने आप थैली में आ जाते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में ये नीचे उतरने के बजाय पेट या शरीर के ऊपरी हिस्से में ही अटक जाते हैं। समय पर इलाज न मिलने से इसमें ट्यूमर और कैंसर बनने का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है।
डॉ. एसपी गुप्ता ने सभी अभिभावकों को सलाह दी है कि बच्चे के जन्म के तुरंत बाद यह जांच जरूर करें कि दोनों अंडकोष सही स्थान पर हैं या नहीं। यदि कोई अनिमियतता दिखे, तो बिना देरी किए तत्काल शिशु रोग विशेषज्ञ या सर्जन से संपर्क करें ताकि समय रहते इस तरह की जटिलताओं से बचा जा सके।
तीसरी धारा न्यूज















