जमशेदपुर में शिक्षकों की कमी जल्द पूरी हो जाएगी। इसके लिए 21 शिक्षकों की बहाली की जाएगी। इनमें 13 प्रोफेसर भी शामिल हैं। स्थायी और संविदा पर होने वाली नियुक्ति के लिए संस्थान की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इस बार कुल 21 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग विभागों में होगी। संस्थान की अधिसूचना के मुताबिक,कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 6 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, वहीं, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में 3 शिक्षक नियुक्त होने हैं। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में 3 शिक्षकों की बहाली होगी , जबकि मेटलर्जी एंड मेटेरियल्स इंजीनियरिंग में 2, मैथमेटिक्स में दो शिक्षक बहाल होंगे।
डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर के लिए 2, सेंट्रल फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम के लिए 2 और फिजिक्स के लिए एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों को मानदेय के रूप में 70 हजार रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। वहीं, स्थायी नियुक्ति के लिए भी एनआईटी जमशेदपुर ने रिक्तियां निकाली हैं। 13 प्रोफेसर पद पर होने वाली इस नियुक्ति के लिए 19 जनवरी तक आवेदन किया जा सकता है। इसमें एससी के लिए एससी के लिए 4, एसटी के 2, ओबीसी के लिए 2, ईडब्ल्यूएस में 1 व अनारक्षित 4 पदों पर नियुक्त की जानी है।
बीपीएल बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के मामले में जमशेदपुर के निजी अंग्रेजी स्कूल एवं राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दोनों पक्ष इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं।
शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (एजेयूपीईआई) ने घोषणा कर दी कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि संगठन अब विचार कर रहा है कि निजी स्कूलों में या तो आगे बीपीएल छात्रों का नामांकन न लिया जाए अथवा मामले को न्यायालय में ले जाकर समाधान प्राप्त किया जाए। शुक्रवार को इसको लेकर बिष्टूपुर स्थित नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में एसोसिएशन की बैठक हुई।
इसमें एजेयूपीईआई के अध्यक्ष नकुल कमानी, उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, मानद सचिव डॉ. श्रीकांत नायर, मानद कोषाध्यक्ष आरके झुनझुनवाला, बी. चंद्रशेखर, टीना बोधनवाला, राजीव तलवार, दिवाकर सिंह, केपीजी नायर एवं शरद चंद्रन नायर शामिल हुए। बैठक के बाद संवाददाताओं को एसोसिएशन के सदस्यों ने बीपीएल बच्चों की फीस के रीइंबर्शमेंट यानी प्रतिपूर्ति को लेकर 17 नवंबर 2025 को शिक्षा विभाग से जारी पत्र के बारे में जानकारी दी और इसपर चिंता जाहिर की। ज्ञान तनेजा व श्रीकांत नायर ने बताया कि इस पत्र में राज्य सरकार द्वारा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) छात्रों के लिए निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति देने से स्कूलों को इनकार करने की जानकारी दी गई है। इसका कारण यह बताया गया कि संबंधित विद्यालय टाटा स्टील से लीज पर प्राप्त सरकारी भूमि पर स्थित हैं, इसलिए उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय की श्रेणी में रखा गया है और इस आधार पर आगे किसी प्रकार की प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं हैं। सरकार के इस आदेश की पुन : समीक्षा की मांग जमशेदपुर के स्कूलों में सरकार के इस आदेश से असंतोष है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय की समीक्षा की मांग की है और इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंचित वर्ग के छात्रों को सहयोग दिया जाना आवश्यक है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऐसी योजनाओं पर निर्भर है। संवाददाता को एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, जो 27 अगस्त 2009 को लागू हुआ, उसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। झारखंड सरकार ने 11 मई 2011 को प्रकाशित राजपत्र के माध्यम से आरटीई अधिनियम को लागू कर यह भी स्पष्ट किया कि 3 से 4 वर्ष की आयु के बच्चों को भी प्रवेश स्तर पर शामिल किया जाएगा। पहले हुआ भुगतान, 2020 से करोड़ों रुपये फंसे राज्य सरकार ने 2010 से निजी स्कूलों को बीपीएल छात्रों की फीस का रीइंबर्शमेंट (प्रतिपूर्ति) देना शुरू किया, जो प्रति छात्र ₹425 प्रति माह निर्धारित किया गया। इस प्रकार सरकार प्रति छात्र ₹425 प्रति माह की राशि देने लगी, लेकिन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के तहत राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2020 से बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान बंद कर दिया। इसका उल्लेख निदेशक राज्य शिक्षा विकास विभाग द्वारा जारी पत्र में किया गया है। पत्र में जिला शिक्षा अधीक्षक को यह निर्देश दिया गया कि जिन विद्यालयों को झारखंड सरकार से भूमि या किसी भी प्रकार का अन्य लाभ प्राप्त हुआ है, उन्हें बीपीएल छात्रों की ट्यूशन फीस का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। इससे जमशेदपुर के स्कूलों को भुगतान नहीं किया गया। निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने का दिया हवाला बीपीएल बच्चों के एवज में प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने की बात कही। कहा कि जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां यह समस्या सामने आई है। निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कहा कि किसी भी स्कूल को सरकार से न तो जमीन मिली है और न ही किसी प्रकार की सहायता। कुछ विद्यालय टाटा स्टील से वार्षिक किराये पर ली गई भूमि पर संचालित हो रहे हैं।
मानगो एनसीपी कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महासचिव डॉ पवन कुमार पांडेय ने कहा कि झारखंड के शहीदों के परिजनों को झारखंड सरकार जल्द नौकरी प्रदान करे.
झारखंड में पेसा कानून को जमीन पर उतरने में 25 साल लग गये.
एनपीसी की बैठक की अध्यक्षता मानगो नगर निगम क्षेत्र प्रभारी तन्मय सरकार ने की. जबकि संचालन महानगर अध्यक्ष सौरव ओझा ने किया. बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष अनवर हुसैन, जिलाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, तेजपाल सिंह टोनी, कन्हैया अग्रवाल, विनोद सिंह, मनोज मलहान, आशुतोष कुमार सिंह समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.
रिम्स में मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली हो रही है. प्रमाण पत्र के लिए दलाल लोगों से दो हजार रुपये तक की मांग कर रहे हैं. मामला तब सामने आया जब इस संबंध में शिकायत रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार तक पहुंची.
गुरुवार को निदेशक ने प्रभारी अपर चिकित्सा अधीक्षक और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र काउंटर के कर्मचारियों को बुलाया.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जांच में आरोप सिद्ध हुआ तो चिन्हित कर्मचारियों को जेल भेजा जायेगा. निदेशक ने कहा कि मरीज की मौत के बाद प्रमाण पत्र के नाम पर पैसा लेना मानवता को शर्मसार करने वाला है. ऐसे लोग संस्थान की छवि खराब करते हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. मामला निदेशक तक पहुंचने के बाद काउंटर में तैनात कर्मचारियों में खौफ का माहौल है. उन्हें जेल जाने का भय सता रहा है.
हाल ही में महिला ने लगाया था आरोप
रामगढ़ निवासी गीता देवी ने 26 दिसंबर को मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर पैसा लेने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि आवेदन देते समय ही काउंटर के कर्मचारियों ने 200 रुपये लिये. इसके बाद फोन पर कर्मचारी ने बताया कि दो हजार रुपये देने पर शीघ्र प्रमाण पत्र मिल जायेगा.
जामताड़ा समेत पूरे प्रदेश के 25,428 पीडीएस डीलर अब टू-जी की जगह फोर-जी ई-पाश मशीन के जरिए अनाज का वितरण कर सकेंगे। जामताड़ा में प्रदेश के खाद्य आपूर्ति मंत्री डा इरफान अंसारी ने इस मशीन के वितरण की शुरूआत की।
मंत्री ने कहा कि यह गरीबों को अनाज वितरण के लिए यह तकनीकी रूप से ऐतिहासिक शुरूआत का दिन है। 15 नवंबर 2020 को टू-जी ई-पाश मशीन के जरिए पीडीएस दुकानदारों ने अनाज वितरण की शुरूआत की थी। लेकिन टू-जी नेटवर्क के जरिए अनाज वितरण में डीलरों को काफी मुश्किलोंं का सामना करना पड़ रहा था।
लेकिन अब पांच साल बाद फोर-जी ई-पाश मशीन के जरिए अनाज वितरण में लोगों को हो रही मुश्किलों से निजात मिल जाएगी। शुक्रवार को मंत्री जामताड़ा में ई-पाश मशीन वितरण के माैके पर बोल रहे थे।
मंत्री ने कहा कि नव वर्ष 2026 के शुभ अवसर पर झारखंड सरकार ने राज्य की जनता को एक ऐतिहासिक, क्रांतिकारी और दूरगामी सौगात देते हुए जन वितरण प्रणाली को तकनीकी रूप से पूरी तरह आधुनिक बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
कहा जनप्रिय एवं दूरदर्शी माननीय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के सशक्त नेतृत्व और मार्गदर्शन में वर्षों से जर्जर, धीमी और अविश्वसनीय हो चुकी पीडीएस व्यवस्था को जड़ से बदलते हुए अब टू-जी तकनीक को विदा कर अत्याधुनिक फोर-जी सक्षम ई-पाश मशीनों को लागू किया गया है। यह फैसला केवल मशीन बदलने का नहीं, बल्कि गरीबों के सम्मान, अधिकार और भरोसे को मजबूती देने का ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा कि मंत्री बनने के बाद जनता ने जो भरोसा उन्हें सौंपा था, आज उसी भरोसे को तकनीक, पारदर्शिता और गति के रूप में ज़मीन पर उतारा गया है। यह निर्णय आने वाले वर्षों में झारखंड की पीडएस व्यवस्था को पूरे देश के लिए माडल सिस्टम बनाएगा।
कहा अब राज्य की सभी 25,428 पीडीएस दुकानों पर फोर-जी नेटवर्क से युक्त ई-पाश मशीनें लगाई जा रही हैं, जिससे राशन वितरण तेज़, सरल और निर्बाध होगा,फर्जीवाड़े और बिचौलियों पर पूरी तरह रोक लगेगी, व्यवस्था पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी,लाभुकों को समय पर और सम्मान के साथ अनाज मिलेगा और नेटवर्क और तकनीकी बाधाएं लगभग समाप्त होंगी।
डा अंसारी ने स्पष्ट किया कि जब केंद्र सरकार द्वारा डीलर कमीशन जारी नहीं किया गया, तब भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर दुर्गा पूजा के अवसर पर राज्य सरकार ने अपने संसाधनों से 25,428 पीडीएस डीलरों का कमीशन जारी किया।
उन्होंने कहा कि हम डीलरों को सिर्फ दुकानदार नहीं, बल्कि पीडीएस व्यवस्था का मजबूत स्तंभ मानते हैं। सरकार हर हाल में उनके साथ खड़ी है, लेकिन ईमानदारी और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। हालांकि उन्होंने चुटकी भी ली कि दुकानदार को आधा किलो अनाज चोरी की तो छूट मिलनी चाहिए।
जामताड़ा को मिले छह एमओ
इस मौके पर उन्होंने कहा कि उन्होंने मंत्रालय संभालने के बाद प्र/Bशासनिक व्यवस्था को दुरूस्त करने का काम किया है।* वर्षों से रिक्त पदों को भरते हुए सभी जिलों में एमओ की बहाली की। जामताड़ा जिले को छह एमओ मिले हैं।
साथ ही पीडीएस संचालन की निगरानी व्यवस्था सुदृढ़ कर किसानों के हित में भंडारण क्षमता का विस्तार किया गया है। इसके तहत जामताड़ा में तीन नए आधुनिक गोदामों की स्वीकृति प्रदान की गई है।
उन्होंने डीलरों को भरोसा दिलाया के अगले कुछ दिनों के दौरान पीडीएस की दुकानों में दाल, चीनी के निश्शुल्क वितरण को शीघ्र ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण की जाएगी। इस मौके पर जामताड़ा डीसी रवि आनंद, डीएसओ कयूम अंसारी, पंकज रवि, कांग्रेस प्रवक्ता इरर्शादुल हक अर्सी और सलीम अंसारी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
रेलवे ने पश्चिम बंगाल के आसनसोल मंडल रेल प्रबंधक (Divisional Railway Manager) पर बड़ा एक्शन लिया है. DRM को पद से हटा दिया गया है. बताया जा रहा है कि हाल ही में जसीडीह झाझा के बीच मालगाड़ी पटरी से उतर गयी थी.
इसके कई कोच ब्रिज से नीचे गिए गए थे. रेलवे बोर्ड ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए थे. रेलवे ने इतने बड़े लेवल पर लिए एक्शन से ये स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी तरह की लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
रेल मंत्रालय के जारी आदेश में पूर्व रेलवे के आसनसोल डिवीजन की DRM विनीता श्रीवास्तव को पद से हटा दिया गया है. बोर्ड के रविन्द्र पाण्डेय द्वारा दिए गए आदेश में कहा गया है कि विनीता श्रीवास्तव पश्चिमी मध्य रेलवे के वापस कैडेर में भेजा जा रहा है. उनकी जगह सुधीर कुमार शर्मा को DRM कार्यभार सौंपा गया है. रेल मंत्रालय के आदेश में बताया गया कि तत्काल दोनों अधिकारी इस आदेश पर अमल करें.
अगस्त 2025 में संभाला था कार्यभार
अगस्त 2025 में DRM पद के लिए पहले जयंत कुमार के नाम का पत्र जारी हुआ था, लेकिन किन्हीं कारणों से उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था. इसके बाद विनीता श्रीवास्तव को यह जिम्मेदारी दी गई थी. अब महज पांच महीने के भीतर उनके तबादले को रेल दुर्घटना की जवाबदेही से जोड़कर देखा जा रहा है. रेलवे सूत्रों के अनुसार, हादसे की जांच और सुरक्षा मानकों में ढिलाई को लेकर रेलवे बोर्ड बेहद गंभीर है, और यह प्रशासनिक फेरबदल उसी दिशा में उठाया गया पहला बड़ा कदम है.
27 दिसंबर की रात जमुई में हुआ था रेल हादसा
बिहार के जमुई जिले में 27 दिसंबर की देर रात बड़ा रेल हादसा हुआ था. जसीडीह-झाझा मुख्य रेलखंड पर टेलवा बाजार हॉल्ट के पास बधुआ (बरुआ) नदी के पुल (पुल संख्या 676) पर सीमेंट से लदी एक मालगाड़ी पटरी से उतर गई. इसमें 8 से 19 डिब्बे पटरी से उतरे, जिनमें से 3 से 10 डिब्बे पुल से नीचे नदी में गिर गए. कई डिब्बे एक-दूसरे पर चढ़ गए और ट्रैक बिखर गए. इसके बाद ट्रैक सुधार के बाद 30-31 दिसंबर तक यातायात बहाल होने लगा. बताया जाता है कि इस हादसे से हजारों यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी.
झारखंड सरकार ने राज्य में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली (पेसा कानून-2025) लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही झारखंड में ग्राम सभाओं के पास असीमित अधिकार आ गए हैं।
राजस्व ग्राम की भूमिका के साथ-साथ गांवों में हर तरह के विवादों का निपटारा अब ग्राम सभा में होगा। इस एक्ट में ग्रामसभाओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं।
पंचायती राज विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में उल्लेख किया गया है प्रत्येक जिले के उपायुक्त की जिम्मेदारी होगी कि वे पारंपरिक ग्राम, ग्राम सभाओं और उनकी सीमाओं की मान्यता का प्रकाशन करें। सामान्यत: प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा, राजस्व ग्राम के समान होगी। प्रत्येक गांव की एक ग्राम सभा होगी, जिसका गठन ग्राम सभा निर्वाचक नामावली में निबंधित व्यक्तियों से होगी। उपायुक्त द्वारा प्रखंड स्तर पर एक टीम का गठन किया जाएगा। जो पारंपरिक ग्राम सभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर पारंपरिक ग्राम सभा की सीमाओं की पहचान और उसका अभिलेखन करेगी। उक्त टीम पारंपरिक ग्राम सभा क्षेत्रों की सीमाओं की अधिसूचना के लिए एक प्रस्ताव तैयार करेगी, जिसमें ग्राम सभा अंतर्गत आने वाली टोलास्तरीय ग्राम सभाओं का विवरण शामिल होगा। उपायुक्त इसे एक माह के लिए सार्वजनिक कर आपत्ति मांगेंगे। आपत्ति निराकरण के बाद तीन माह के भीतर सूची का प्रकाशन किया जाएगा।
पंचायती राज विभाग द्वारा जारी उक्त अधिसूचना में पेसा कानून को लेकर विभिन्न प्रावधानों को स्पष्ट किया गया है। इस अधिसूचना में पारंपरिक ग्राम सभा से लेकर उच्चतर स्तर की सभा, ग्राम सभी की बैठक, बैठक की तारीख व समय, ग्राम सभा अध्यक्ष एवं सहायक सचिव के कर्तव्य, ग्राम सभा की बैठक का संचालन और निर्णय की प्रक्रिया, ग्राम सभा कोष, सामुदायिक संसाधनों का प्रबंधन, परंपराओं संरक्षण एवं विवादों का निपटारा, पुलिस की भूमिका, ग्राम सभा के द्वारा दंड, निर्णय पर अपीलीय अधिकार, विकास योजना का प्रस्ताव एवं अनुमोदन, ग्राम सभा द्वारा सामाजिक अंकेक्षण, भू अर्जन एवं पुनर्स्थापन, लघु जल निकायों का प्रबंधन, लघु खनिज, मादक द्रव्यों का नियंत्रण, लघु वनोपज, संक्रमित भूमि का प्रत्यावर्तन, बाजारों का प्रबंधन, उधार पर नियंत्रण आदि का जिक्र प्रमुखता सेकिया गया है।
माह में एक बार होगी बैठक
प्रत्येक ग्राम सभा की बैठक माह में कम से कम एक बार होगी। यह बैठक सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 1/10 सदस्यों अथवा 50 सदस्यों, जो भी कम हो, उसके लिखित या ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति, जिला परिषद या उपायुक्त द्वारा अपेक्षा किए जाने के सात दिनों के अंदर होगी। बैठक और कार्यवाही सार्वजनिक रूप से आयोजित की जाएगी। बैठकों की तारीख, समय तथा स्थान पारंपरिक रूप से ग्राम सभी की अध्यक्षता कर रहे ग्राम प्रधान या उसके द्वारा नामित व्यक्ति द्वारा किया जाएगा। बैठक की कार्यवाही के संचालन की शक्ति ग्राम प्रधान के पास होगी। बैठकों का संचालन अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाएगा, जिसे अध्यक्ष के नाम से संबोधित किया जाएगा। ग्राम पंचायत का कार्यालय ही ग्राम सभा का कार्यालय होगा। बैठक के समस्त विषय पर निर्णय सर्वसम्मति से लिए जाएंगे। ग्राम सभा अलग-अलग योजनाओं की निगरानी करेगी, कार्य की गुणवत्ता, खर्च और मस्टर रोल की जांच करेगी तथा प्रवासी श्रमिकों के पंजीकरण और सुरक्षा को भी सुनिश्चित करेगी।
बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा
और बाहर ले जाए जाने वाले श्रमिकों की पूरी जानकारी ग्राम सभा को देनी होगी। लाभार्थियों की पहचान का अधिकार ग्राम सभा को दिया गया है। पात्रता मानदंडों के अनुसार पारदर्शी और सर्वसम्मत चयन होगा तथा प्रतीक्षा सूची भी बनाई जाएगी। आपात स्थिति में प्राथमिकता बदलने का प्रावधान भी रखा गया है। सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं जैसे स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, पीडीएस दुकान आदि की निगरानी से संबंधित है। ग्राम सभा नियमित समीक्षा, सामाजिक अंकेक्षण और आवश्यक सुधारात्मक निर्देश जारी कर सकेगी।
क्या मिला अधिकार
● बाल श्रम पर पूर्ण प्रतिबंध, बाहर ले जाने वाले श्रमिकों की जानकारी देनी होगी
● ग्राम सभा की सहमति के बिना शराब निर्माण, भंडारण और विक्रय नहीं
● पुलिस द्वारा यथाशीघ्र गिरफ्तारी के संबंध में पूरी जानकारी ग्राम सभा को देनी होगी
● विकास योजनाओं, संसाधनों के उपयोग और सामाजिक संस्थाओं की निगरानी
● ग्राम सभा को लघु वनोपज के स्वामित्व, संग्रहण, उपयोग और विपणन का भी पेसा में अधिकार दिया गया है
● ग्रामीण क्षेत्र में स्थित स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र और पीडीएस दुकान आदि की निगरानी का अधिकार ग्रामसभा को
समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित जन शिकायत निवारण दिवस में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने विभिन्न प्रखंड एवं शहरी क्षेत्र से आए नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। इस दौरान नागरिकों द्वारा पुश्तैनी जमीन पर अवैध दखल, जमीन विवाद, स्वास्थ्य समस्या, मुख्य सड़क पर पार्किंग, स्कूल फीस में रियायत, चारदिवारी पर आपत्ति समेत अन्य जनहित से जुड़ी समस्याएं और मांगपत्र को रखा ।
उपायुक्त द्वारा सभी नागरिकों की समस्याओं को क्रमवार सुनते हुए प्राप्त आवेदनों को संबंधित विभागों एवं पदाधिकारियों को अग्रसारित कर स्पष्ट निर्देश दिया गया कि प्रत्येक आवेदन पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें । कई आवेदनों का ऑन द स्पॉट समाधान किया गया । उपायुक्त द्वारा सभी विभागीय पदाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि जन शिकायत निवारण दिवस में प्राप्त आवेदनों का निष्पादन प्राथमिकता से करेंगे। विभागीय समीक्षा के क्रम में जनशिकायत में प्राप्त आवेदनों की भी समीक्षा नियमित की जा रही है ताकि जनसमस्याओं का समाधान त्वरित रूप से किया जा सके।
भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2023 बैच के पदाधिकारी श्री अर्नव मिश्रा ने धालभूम अनुमंडल के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) के रूप में आज पदभार ग्रहण किया। पदभार ग्रहण के पश्चात नवपदस्थापित अनुमंडल पदाधिकारी ने जिला दण्डाधिकारी सह उपायुक्त से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने उपायुक्त को अपनी ओर से नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
शिष्टाचार भेंट के दौरान उपायुक्त द्वारा श्री मिश्रा को उनके नवीन दायित्व के लिए शुभकामनाएं दी गईं एवं प्रशासनिक कार्यों के सुचारु संचालन, जनहित से जुड़े विषयों के प्रभावी निष्पादन तथा अनुमंडल क्षेत्र में बेहतर विधि-व्यवस्था संधारण के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।
भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 11 प्रशिक्षु अधिकारियों ने अपने दो दिवसीय विंटर स्टडी टूर के समापन अवसर पर समाहरणालय में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उपायुक्त ने प्रशिक्षु अधिकारियों का स्वागत करते हुए जिले की प्रशासनिक संरचना, औद्योगिक विकास, जनजातीय बहुल क्षेत्र में प्रशासनिक चुनौतियों, नवाचार आधारित शासन एवं जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की।
उपायुक्त ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि फील्ड स्तर का प्रशासनिक अनुभव नीति निर्माण की नींव होता है और ऐसे शैक्षणिक भ्रमण अधिकारियों को जमीनी वास्तविकताओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने जमशेदपुर के औद्योगिक मॉडल, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, संसाधन प्रबंधन तथा सामाजिक समावेशन पर भी अपने अनुभव साझा किए। शिष्टाचार भेंट के दौरान प्रशिक्षु अधिकारी श्री हरिप्रसाथ एम, श्री सुशांत कुमार, सुश्री शिवानी मोहन, श्री सक्षम भाटिया, श्री पाटिल कृष्णा बाबरुवान, सुश्री कुमुद मिश्रा, सुश्री फरखंदा कुरैशी, श्री दिव्यांश मीणा, श्री अभिषेक कुमार सिंह, सुश्री गोवसिका पी.आर. एवं श्री अंकित पांडेय उपस्थित रहे।
प्रशिक्षु अधिकारियों ने जिले में प्राप्त सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए उपायुक्त के प्रति आभार व्यक्त किया तथा अध्ययन भ्रमण के दौरान प्राप्त अनुभवों को अपने प्रशासनिक प्रशिक्षण में अत्यंत उपयोगी बताया। यह संवादात्मक बैठक प्रशिक्षु अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक एवं ज्ञानवर्धक रही।