एक नई सोच, एक नई धारा

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भारत का सबसे महंगा तलाक! जोहो के फाउंडर श्रीधर वेम्बू को जमा करने होंगे 14 हजार करोड़ के बॉन्ड

जोहो कंपनी के फाउंडर और सीईओ श्रीधर वेम्बू का तलाक भारत का सबसे महंगा तलाक माना जा रहा है। कैलिफोर्निया में चल रहे तलाक के मामले में अदालत ने श्रीधर वेम्बू को 1.7 अरब डॉलर के बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है।

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श्रीधर वेम्बू और उनकी पत्नी प्रमिला श्रीनिवासन के बीच इस तलाक का मुख्य कारण कस्टडी और जोहो में हिस्सेदारी को लेकर है। इस तलाक में विवाद की वजह कैलिफोर्निया में रहने के दौरान दंपति द्वारा जमा की गई वैवाहिक संपत्ति का बंटवारा है।

2019 में भारत वापस आ गए वेम्बू

आईआईटी-मद्रास से ग्रेजुएशन होने के बाद, वेम्बू 1989 में प्रिंसटन विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने के लिए अमेरिका गए थे। अमेरिका जाने के चार साल बाद 1993 में उन्होंने एंटरप्रेन्योर प्रमिला श्रीनिवासन से शादी कर ली।

साल 1996 में श्रीधर वेम्बू ने अपने साथियों के साथ मिलकर एडवेंटनेट नामक एक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कंपनी शुरू की और 2009 में इसका नाम बदलकर जोहो कॉर्पोरेशन कर दिया।

श्रीधर वेम्बू और प्रमिला श्रीनिवासन कैलिफोर्निया में करीब तीन दशक रहे। इस दंपति का एक 26 साल का बेटा भी है। 2019 में वेम्बू भारत वापस आ गए और तमिलनाडु के अपने पैतृक गांव मथलमपराई से जोहो का काम यहीं से देखने लगे।

पत्नी ने लगाए आरोप

फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक, वेम्बू ने अगस्त 2021 में तलाक के लिए याचिका दायर की। प्रमिला श्रीनिवासन ने आरोप लगाया कि वेम्बू ने कंपनी के अधिकांश शेयर अपनी बहन राधा वेम्बू और भाई शेखर को दे दिए हैं।

राधा के पास वर्तमान में कंपनी में करीब 47.8% हिस्सेदारी है, जबकि वेम्बू टेक्नोलॉजीज के संस्थापक शेखर के पास 35.2% हिस्सेदारी है। वेम्बू के पास स्वयं केवल 5% हिस्सेदारी है, जिसकी कीमत 225 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। श्रीधर वेम्बू ने पत्नी के लगाए सभी आरोपों को खारिज कर दिया और एक मनगढ़ंत कहानी करार दिया।

जमा करने होंगे 14 हजार करोड़ के बॉन्ड

जनवरी 2025 में कैलिफोर्निया की सर्वोच्च अदालत ने अपने आदेश में न्यायालय ने वेम्बू को 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर का बॉन्ड जमा करने का आदेश दिया है। भारतीय करेंसी में ये अमाउंट 14,000 करोड़ रुपये से भी ज्यादा है। अदालत ने कहा कि वैवाहिक संपत्ति पर श्रीनिवासन के अधिकारों को संभावित नुकसान से बचाने के लिए यह आवश्यक था।

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मुसाबनी में दर्दनाक हादसा! खड़े ट्रक में घुस गई स्कूटी; एक परिवार के 3 की मौत

पूर्वी सिंहभूम में दर्दनाक हादसा सामने आया है। यहां के मुसाबनी थाना क्षेत्र के सुरदा में खड़े हाइवा से टकरा बाइक सवार दो सगे भाई और भांजा समेत तीन की मौत हो गयी। वहीं, एक भाई गंभीर रूप से घायल हो गया।

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घटना शुक्रवार रात सवा सात बजे यूनियन बैंक के समीप की है। घायल भाई राहुल कर्मकार को जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल भेजा गया है।

बताया जाता है कि घाटशिला थाना क्षेत्र के जगन्नाथपुर निवासी राहुल कर्मकार अपने दो सगे भाई रोहित कर्मकार, समीर कर्मकार और भांजा राज गोप के साथ एक ही स्कूटी से दिन में ससुराल गया था। वहां से राहुल सभी के साथ रात लगभग 7.15 बजे अपने घर जगन्नाथपुर लौट रहा था। सुरदा यूनियन बैंक के पास पहुंचा था कि सड़क किनारे पहले से खराब पड़े हाइवा के अंदर स्कूटी समेत जा घुसा। इस घटना में रोहित कर्मकार (21 वर्ष), समीर कर्मकार (18 वर्ष) एवं राज गोप (17 वर्ष) की मौके पर मौत हो गयी। वहीं, भाई राहुल कर्मकार (26 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तत्काल घाटशिला अनुमंडल अस्पताल भेजा गया। राहुल की गंभीर हालत देख प्राथमिक उपचार के बाद जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल रेफर कर दिया गया।

इधर, जानकारी मिलने पर घाटशिला और मुसाबनी पुलिस घाटशिला अनुमंडल अस्पताल पहुंची तथा जानकारी ली। अस्पताल में जगन्नाथपुर समेत आसपास के दर्जनों ग्रामीण पहुंच गए। बताया जाता कि रोहित कर्मकार एवं राहुल दोनों शादीशुदा है। यह दोनों घाटशिला क्षेत्र के विभिन्न जगहों में जाकर मकान में पुट्टी करने का काम करते थे।

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जमशेदपुर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ तमाल देब का निधन

जमशेदपुर के प्रख्यात चिकित्सक डॉ तमाल देब का निधन हो गया. वे 80 साल के थे. वे पिछले कुछ दिनों से प्रोस्टेट कैंसर से पीड़ित थे और उनका इलाज चल रहा था. इलाज के दौरान ही उनका निधन हो गया. उनके निधन से चिकित्सा जगत में शोक की लहर है. तमाल देब ने अपने कैरियर में मरीजों को सस्ता और सटीक इलाज कराने में अहम भूमिका निभायी. वे जमशेदपुर के बारीडीह मर्सी अस्पताल में लोगों का इलाज करते थे जबकि प्राइवेट प्रैक्टिस भी करते थे. बारीडीह विजया गार्डेन निवासी तमाल देब अपना भरा पूरा परिवार छोड़ गये है.

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उनके निधन पर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के जमशेदपुर शाखा के उपाध्यक्ष डॉ मृत्युंजय सिंह ने गहरा शोक जताया है और कहा है कि यह अपूरणीय क्षति है. उनको सदा ही जनसेवक के तौर पर याद किया जाता रहेगा.

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आदिवासी भाषा और साहित्य की सोंधी महक के साथ शुरू हुआ प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव 2026

प्रथम पूर्वी सिंहभूम साहित्य उत्सव का शुभारंभ गोपाल मैदान में देश भर के नामचीन, जनजातीय एवं स्थानीय साहित्यकारों की उपस्थिति में संयुक्त रूप से दीप जलाकर हुआ। तीन दिन तक चलने वाले महोत्सव के पहले दिन झारखंड के जनजातीय साहित्यकारों की उपस्थिति विशेष उल्लेखनीय रही। श्री महादेव टोप्पो, डॉ पार्वती तिर्की डॉ अनुज लुगुन, श्री रवींद्रनाथ मुर्मू, श्रीमती जोबा मुर्मू, डॉ नारायण उरांव, श्री देवेंद्र नाथ चांपिया, श्री जेरी पिंटो सहित कई साहित्यकारों ने पहले दिन अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

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कार्यक्रम के शुरुआत में उप विकास आयुक्त श्री नागेंद्र पासवान ने स्वागत भाषण एवं विषय प्रवेश करते हुए बताया कि आयोजन का उद्देश्य साहित्य और समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करना है और युवाओं को रचनात्मक सृजन से जोड़ना है । साहित्यिक चेतना को नई दिशा देना है। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री, झारखण्ड का संदेश सुनाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की है कि इस आयोजन से कोल्हान की समृद्ध भाषा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयास, खासकर सोबरन मांझी पुस्तकालयों की स्थापना की चर्चा की।

उपायुक्त, पूर्वी सिंहभूम श्री कर्ण सत्यार्थी ने इस आयोजन को लेकर कहा कि ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों, लेखकों एवं कलाकारों को सुनने, संवाद कर उनकी साहित्य, कला व संस्कृति को नजदीक से समझने का अवसर मिला। आशा है कि यह उत्सव रचनात्मक संवाद और सांस्कृतिक समृद्धि का सशक्त मंच बनेगा।

प्रथम सत्र

झारखंड आदिवासी भाषा साहित्य की विश्व दृष्टि

राष्ट्रीय साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित डॉक्टर पार्वती तिर्की और डॉक्टर अनुज लुगुन ने विषय पर अपने विचार व्यक्त किये। विषय को विस्तार देते हुए डॉक्टर पार्वती तिर्की ने कहा आदिवासी साहित्य में वाचिक साहित्य और लिखित साहित्य की परंपरा रही है। वाचिक साहित्य में वाचन का दर्शन है और इस के सृजन में आदिवासी समूह के बड़े बुजुर्ग स्त्री पुरुष सभी का सृजन सामूहिक रूप से शामिल है। आदिवासी साहित्य सृजनशीलता की प्रक्रिया में समाज का सहियापन और कृति में जो सामूहिकता है यह एक तरह से अंतः संबंधित है। सृजनशीलता में सब की सहभागिता और कृति में सामूहिकता का जो विजन है यह आदिवासी साहित्य को उसके समय की विश्व दृष्टि से जोड़ती है। डॉ अनुज लुगुन ने विषय को आगे बढ़ाते हुए कहा कि आदिवासी साहित्य में मौजूद दृष्टि और उपनिवेशवाद के विरोध की ऐतिहासिक चेतना इसे न सिर्फ अन्य भारतीय साहित्य बल्कि विश्व के हर उस भाषा से जोड़ती है ,जहां यह संघर्ष किसी न किसी रूप में मौजूद रहा है। हालांकि जनजातीय भाषाओं के साहित्य का मूल्यांकन उस दृष्टि से नहीं हो पाया है, इस पर ध्यान देने की जरूरत है ।

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द्वितीय सत्र

विषय आदिवासी इतिहास का अध्याय

सत्र को संबोधित करते हुए श्री डोगरो बिरुली ने कहा कि वह समाज मृत है जहां साहित्य का अस्तित्व नहीं है। प्रोफेसर डी0 एन चाम्पिया, पूर्व अध्यक्ष बिहार विधानसभा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आधुनिक भाषाएं प्राकृतिक और अपभ्रंश काल से होते हुए 12वीं शताब्दी के आसपास अस्तित्व में आई जबकि आदिवासी भाषा और उसका इतिहास इससे काफी पहले से है। यह प्रकृति प्रदत्त प्रकृति पोषित और विकसित भाषा है इसलिए इसका कोई व्याकरण नहीं है। अन्य आधुनिक भाषाएं आदिवासी भाषाओं की संतानें है इसके प्रमाण सत्यम शिवम सुंदरम दिनाम हयाती शून्यहितम इत्यादि उद्धरणों को आदिवासी भाषाओं की दृष्टि से व्याख्यातित कर देखा जा सकता है।

तृतीय सत्र

विषय a good life lessons in living and leaving

तीसरे सत्र को शुरू करते हुए अक्षय बाहिबाला ने जेरी पिंटो से उनकी नई किताब पर चर्चा की । पैलियेटिव केयर के इतिहास और वर्तमान पर विस्तार से चर्चा करते हुए जेरी पिंटो ने इसकी बुनियादी जरूरत पर प्रतिभागियों का ध्यान आकर्षित किया और इसे विस्तार देने की आवश्यकता पर बल दिया।

चौथे सत्र का विषय था ओलचिकी लिपि का शताब्दी वर्ष। विषय पर चर्चा करने के लिए जोबा मुर्मू, रानी मुर्मू ,रविंद्र मुर्मू, वीर प्रताप मुर्मू मंचासीन हुए। वार्ता के दौरान ओलचिकी लिपि की जरूरत ,उत्पत्ति और विकास पर दृष्टि डालते हुए गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू के योगदान की चर्चा की गई। वार्ता का सफल संचालन करते हुए रविंद्रनाथ मुर्मू ने कहा कि पंडित रघुनाथ मुर्मू ने साहित्य की लगभग हर विधाओं में अपनी रचनाओं के माध्यम से न सिर्फ संथाली जीवन के हर सांस्कृतिक, दैनिक जीवन को छुआ बल्कि उनका हिस्सा बन गई।

पांचवें सत्र में कुडुख भाषा के संरक्षण और विकास में लगे तथा पेशे से चिकित्सक डॉ नारायण उरांव ने विचार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्कृति तभी बचेगी, जब भाषा बचेगी। भाषा तभी बचेगी, जब स्कूलों में भी मातृभाषा में पढ़ाई होगी। उन्होंने कुडुख भाषा और उसकी लिपि तोलोंग सिकि के इतिहास और विकास पर अपना विचार व्यक्त किया।

छठे सत्र में स्थानीय एवं देश भर में प्रतिष्ठित साहित्यकार जयनंदन के साथ अजय मेहताब ने वार्ता की। विषय था मजदूरों के शहर में साहित्य की पौध । जयनंदन ने कहा कि भले ही यह शहर मजदूरों का है, लेकिन उनकी परेशानियों और संवेदनाओं को शहर के साहित्यकारों ने शब्दों में उतारा है। उन्होंने स्वर्गीय कमल, गुरु वचन सिंह ,सी भास्कर राव ,निर्मला ठाकुर सहित कई साहित्यकारों के नाम का उल्लेख किया ,जिन्होंने शहर का नाम साहित्य के क्षेत्र में रोशन किया। उन्होंने कहा कि कंपनी ने विभिन्न भाषा और संस्कृतियों को समृद्ध करने में काफी सहयोग किया है। उन्होंने नाटय कर्मियों के लिए प्रेक्षागृह सस्ते दर में उपलब्ध नहीं होने पर चिंता व्यक्त की । उन्होंने अपनी चर्चित कहानियों एवं उपन्यासों की रचना प्रक्रिया पर भी जानकारी साझा की। सातवां एवं अंतिम सत्र में डॉ हिमांशु वाजपेयी एवं प्रज्ञा शर्मा ने दास्तान रानी लक्ष्मीबाई की बुलंद एवं रोचक अंदाज में जिसे दास्तानगो कहते हैं उसमें प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित लोगों ने काफी सराहा। देर शाम कस्तूरबा विद्यालय सहित विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

कार्यक्रमों के सफल संचालन में एसडीओ धालभूम श्री अर्नव मिश्रा, डीटीओ श्री धनंजय, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्री पंचानन उरांव, जिला शिक्षा अधीक्षक श्री आशीष पांडेय व अन्य पदाधिकारियों का योगदान रहा।पहले दिन का समापन स्थानीय साहित्यकारों की कवि गोष्ठी के साथ संपन्न हुआ।

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माननीय मंत्री खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामला विभाग, झारखंड E-Pose मशीन वितरण के जिला स्तरीय कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हुए शामिल

बिरसा मुंडा टाउन हॉल, सिदगोड़ा में आयोजित जिला स्तरीय E-Pose मशीन वितरण कार्यक्रम में झारखंड सरकार के खाद्य सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामला विभाग के मंत्री डॉ इरफान अंसारी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । इस अवसर पर उन्होने 20 जन वितरण प्रणाली संचालकों के बीच सांकेतिक रूप से E-Pose मशीन वितरित किया। कार्यक्रम में जिला परिषद अध्यक्ष, जिला परिषद उपाध्यक्ष, उप विकास आयुक्त, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, बीडीओ, एमओ, प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी व अन्य संबंधित शामिल हुए। गौरतलब है कि सभी जन वितरण प्रणाली संचालकों को 4G E-Pose मशीन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि राश वितरण कार्य में तकनीक का उपयोग कर और सुगमता लाई जा सके। पूर्वी सिंहभूम जिले अन्तर्गत कुल 1242 जन वितरण प्रणाली विक्रता कार्यरत हैं जिसमें अनुभाजन क्षेत्रान्तर्गत 427 एवं प्रखण्ड क्षेत्रान्तर्गत 815 जन वितरण प्रणाली विक्रता शमिल हैं ।

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माननीय मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि नई मशीन से लाभुकों के साथ-साथ जन वितरण प्रणाली विक्रताओं के समय की बचत होगी । अब अधिक सुगमता से लाभुक अपना खाद्यान्न प्राप्त कर सकेंगे वहीं जन वितरण प्रणाली विक्रताओं को भी तकनीकी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होने कहा कि राज्य भरमें धान अधिप्राप्ति योजना के तहत खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में बायोमीट्रिक सत्यापन कर निबंधित किसानों से धान का क्रय 15 दिसम्बर 2025 से किया जा रहा है। इस वर्ष किसानों को 2.450/- रूपये प्रति क्विटल की दर से एकमुश्त एवं त्वरित भुगतान का प्रावधान किया गया है। ई-उपार्जन मोबाईल एप्लिकेशन से किसान स्वंय पंजीकरण, स्लॉट बकिंग और भुगतान स्थिति देख सकते हैं।

बता दें कि पूर्वी सिहभूम में कुल 53 धान अधिप्राप्ति केन्द्रों में 4G E-POS Machine के माध्यम से धान अधिप्राप्ति की जा रही है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत जिले में 3,65,410 (तीन लाख पैंसठ हजार चार सौ दस), पूर्वविक्ता प्राप्त गृहस्थ परिवार के 14,05,466 (चौदह लाख पाँच हजार चार सौ छियासठ) सदस्यों एवं अन्त्योदय अन्न योजना के तहत 54.015 (चौवन हजार पन्द्रह) परिवारों के 1,71,201 (एक लाख इकहत्तर हजार दो सौ एक) सदस्यों का राशन कार्ड बनाया गया है। इस प्रकार पूर्वी सिंहभूम जिले में कुल 4,19,425 (चार लाख उन्नीस हजार चार सौ पच्चीस) परिवारों का राशन कार्ड बनाया गया है, जिसमें कुल सदस्यों की संख्या 15,76,667 (पन्द्रह लाख छिहत्तर हजार छः सौ सडसठ) है। पूर्वविक्ता प्राप्त गृहस्थ परिवार अन्तर्गत 05 किलोग्राम प्रति सदस्य एवं अन्त्योदय अन्न योजना अन्तर्गत परिवारों को प्रति कार्ड 35 किलोग्राम खाद्यान्न (चावल एवं गेहूँ) निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना अन्तर्गत वर्तमान में 41,525 (इकतालीस हजार पाँच सौ पच्चीस) परिवारों के 1,25,212 (एक लाख पच्चीस हजार दो सौ बारह) सदस्यों को प्रति लाभुक 5 कि०ग्रा० की दर से खाद्यान्न झारखण्ड सरकार द्वारा निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

पी०वी०टी०जी० डाकिया योजना के तहत जिले में कुल 5.105 आदिम जनजाति परिवारों को 35 किलोग्राम चावल का पैकैट उनके घर तक पहुंचाकर निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

सरकारी भोजन केन्द्र योजना के तहत् जिले में कुल 17 नियमित मुख्यमंत्री दाल-भात केन्द्रों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 4.600 गरीब व्यक्तियों को 5 रूपये प्रति प्लेट की दर से खाना उपलब्ध कराया जाता है। सोना-सोबरन धोती-साडी योजना के तहत् राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित लाभुक परिवारा को प्रत्येक छः माह में एक बार प्रति परिवार एक साडी एवं एक धाती/ लुगी. 10 रूपये प्रति वस्त्र की अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

चना दाल वितरण योजना के तहत् राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित सभी परिवारों के लिए प्रति परिवार एक किलोग्राम चना दाल प्रतिमाह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।

नमक वितरण योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं झारखण्ड राज्य खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित सभी परिवारों के लिए प्रति परिवार एक किलो आयोडीन युक्त नमक पैकेट प्रतिमाह निःशुल्क उपलब्ध गराग जा रहा है।

चीनी वितरण योजना के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम अन्तर्गत अन्त्योदय अन्न योजना के तहत 54,015 परिवारों को एक किलोग्राम चीनी प्रतिमाह निर्धारित अनुदानित दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

झारखण्ड राज्य आकस्मिक खाद्यान्न कोष के तहत् राशन कार्ड से वंचित योग्य लाभुकों को इस कोष के माध्यम से स्थानीय बाजार से न्यूनतम दर पर चावल खरीदकर उपलब्ध कराया है ताकि किसी व्यक्ति की भूख से मृत्यु नहीं हो।

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पीएम-कुसुम योजना अंतर्गत सोलर पंप सेट योजना से पूर्वी सिंहभूम के किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) योजना के घटक-बी के अंतर्गत झारखंड में सोलर पंप सेट योजना का क्रियान्वयन झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (जेरेडा) द्वारा किया जा रहा है। इस योजना का उदेश्य किसानों को स्वच्छ एवं सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराकर सिंचाई को सुगम बनाना तथा डीजल एवं पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करना है। योजना के तहत सोलर पंप सेट से किसानों को दिन के समय निर्बाध सिंचाई सुविधा मिलेगी, ईंधन व्यय में कमी आएगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा कृषि लागत घटने से किसानों की आय में वृद्धि होगी।

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उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना पूर्वी सिंहभूम के किसानों को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने एवं सतत कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उपायुक्त के निर्देश पर योजना से किसानों को जोड़ने के लिए सभी प्रखंडों में 9 एवं 10 जनवरी को प्रत्येक पंचायतों में कैम्प आयोजित कर प्रति पंचायत 50-50 आवेदन सृजित करने का अभियान चलाया जा रहा है। प्रखण्ड प्रशासन की ओर से सभी पंचायतों में शिविर का आयोजन कर कृषक मित्रों के सहयोग से किसानों का आवेदन कराते हुए 12 जनवरी तक प्रज्ञा केन्द्र के माध्यम से जेरेडा पोर्टल में आवेदन को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया संपन्न की जायगी।

झारखण्ड सरकार के प्रयास से राज्य में सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा आधारित एक आधुनिक और ऊर्जा-सक्षम समाधान हेतु राज्य एवं केंद्र सरकार के आर्थिक सहयोग से झारखंड के किसानों को 96-97% अनुदान पर सोलर पंप उपलब्ध कराया जा रहा है। झारखण्ड सरकार का अनुदान – 71-72% तथा केंद्र सरकार का अनुदान – लगभग 25% इच्छुक किसानों को पम्पसेट की क्षमता के आधार पर लाभार्थी किसानों को मिलने वाले अंशदान देय इस प्रकार होगा :-
2 एचपी सोलर पम्पसेट – ₹5,000 (वास्तविक कीमत ₹1.80 लाख)
3 एचपी सोलर पम्पसेट – ₹7,000 (वास्तविक कीमत ₹2.16 लाख)
5 एचपी सोलर पम्पसेट – ₹10,000 (वास्तविक कीमत ₹3.18 लाख)
अब तक झारखंड ने 40,000 से अधिक सोलर पम्पसेट अधिष्ठापित कर लगभग 100 MW क्षमता हासिल की है, जिससे राज्य ने देश के शीर्ष पाँच अग्रणी राज्यों में अपनी जगह बनाई है।
योजना से झारखंड राज्य का स्थायी निवासी किसान, जिनकी स्वयं की कृषि भूमि हो, जो पहले से सोलर पंप का लाभ न लिया हो वैसे किसान योजना का लाभ प्राप्त कर सकते है। योजना का लाभ लेने के लिए किसान के पास पानी का स्त्रोत (जैसे बोरिंग, कुआं, तालाब इत्यादि) होना अनिवार्य हैं। किसान जिनके खेती में बिजली की सुविधा पहले से है, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं। एक किसान परिवार को एक से अधिक सोलर पम्पसेट नहीं दिया जा सकता है। किसान जो किसी अन्य योजना से पहले से ही सोलर पम्पसेट ले चुके हैं, वे इस योजना का लाभ नहीं ले सकते हैं।
सोलर पम्पसेट हेतु आवेदन करने तथा विस्तृत जानकारी www.pmkusum.jharkhand.gov.in  पर उपलब्ध है।

*आवेदन प्रक्रिया*
01 इच्छुक किसान अपना आवेदन राज्य सरकार के  PM-KUSUM PORTAL Www.pmkusum.jharkhand.gov.in के माध्यम से लाभार्थी अंशदान के साथ ऑनलाइन आवेदन कर Acknowledgement slip  कर सकते हैं।
02 आवेदन की स्थिति, पंप लगने के बाद की समस्याएं एवं रख-रखाव हेतु ऑनलाइन कंप्लेंट www.pmkusum.jharkhand.gov.in अथवा www.jreda.com पर दर्ज करा सकते हैं।
03 इस योजना के तहत् किसान को केवल एक सोलर पम्प सेट आवश्यकतानुसार “प्रथम आओ प्रथम पाओ“ के आधार उपलब्ध कराया जाएगा।
04 किसान PM-KUSUM App  अथवा Portal  के माध्यम से सोलर पंप की लाइव मॉनिटरिंग एवं चालू स्थिति देख सकते हैं। जो कि Google Play Store से डाउनलोड किया जा सकता है।

आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज –
भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, फोटो आदि अपलोड करना होगा। आवेदन की जांच उपरांत पात्र किसानों का चयन किया जाएगा।  इस योजना के तहत् किसान को केवल एक सोलर पम्प सेट आवश्यकतानुसार “प्रथम आओ प्रथम पाओ“ के आधार उपलब्ध कराया जाएगा। चयनित किसानों को निर्धारित अंशदान जमा करने के पश्चात सोलर पंप सेट स्थापित किया जाएगा। योजना से संबंधित विस्तृत जानकारी, आवेदन तिथि एवं दिशा-निर्देश जेरेडा की वेबसाइट अथवा नोडल विभाग के रूप में नामित कृषि विभाग से ली जा सकती है। अधिक जानकारी हेतु जिला कृषि पदाधिकारी (संपर्क सूत्र: 9934958010) अथवा संबंधित प्रखण्ड विकास पदाधिकारी से संपर्क किया जा सकता है।

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एरीज ग्रुप ऑफ कंपनीज ने पीपुल्स अकादमी को डिजिटल क्लास रूम प्रदान किया

जमशेदपुर : एरीज ग्रुप ऑफ कंपनीज ने साकची बाराद्वारी स्थित पीपुल्स अकादमी में एक डिजिटल क्लासरूम प्रदान किया है। इस अवसर पर एरीज ग्रुप के मैनेजर दीनू भास्करा, सिद्धार्थ, एचएसई गौतम एवं साहिल, सुकुमार, शुभम के साथ साथ स्कूल के प्रधानाचार्य चरणदीप पाण्डेय, पूर्व डीएसपी आर.के सिंह डॉ सुबेंदु घोष, ओम प्रकाश चौबे और सभी शिक्षक गण उपस्थित थे।

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इस मौके पर प्रधानाचार्य ने कहा कि यह पहल शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे छात्रों को आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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बागबेड़ा कॉलोनी में सैकड़ों जरूरतमंदों के बीच निःशुल्क कंबल वितरण

बढ़ती ठंड को मध्य नजर रखते हुए बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत अंतर्गत पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के नेतृत्व में काली मंदिर परिसर में सैकड़ों जरूरतमंद लाभुकों के बीच निःशुल्क कंबल का वितरण किया गया।

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निःशुल्क कंबल वितरण कार्यक्रम में बतौर अतिथि पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह, अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार अपराध रोधी संगठन की झारखंड प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व छात्र नेत्री अर्चना सिंह, यूथ इंटर के जिला अध्यक्ष रंजन सिंह एवं समाजसेवी राजा ओझा उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया। इसके पश्चात अतिथियों द्वारा बारी-बारी से जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया।
इस अवसर पर पूर्व जिप उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कंबल वितरण कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे एक नेक और सराहनीय पहल बताया। वहीं पूर्व छात्र नेत्री अर्चना सिंह ने छूटे हुए जरूरतमंदों के बीच भी शीघ्र निःशुल्क कंबल वितरण करने की घोषणा की। पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा का यह कार्य आगे भी लगातार जारी रहेगा।

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कंबल पाकर जरूरतमंदों के चेहरे खुशी से खिल उठे और उन्होंने अतिथियों एवं आयोजकों को इस पुनीत कार्य के लिए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में वार्ड सदस्य सीमा पांडे, समाजसेवी संदीप सिंह, पूर्व मुखिया बाहामुनि हेंब्रम, समाजसेवी मुदिता सिंह, महेंद्र भारती, उमेश सिंह, समाजसेवी अंकित सिंह, रवि, अमन सहित कई लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

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पथ निर्माण को लेकर बागबेड़ा प्रतिनिधिमंडल कार्यपालक अभियंता से किया मुलाकात

आज बागबेड़ा का एक प्रतिनिधिमंडल पूर्व जिला पार्षद किशोर यादव के नेतृत्व में पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता दीपक सहाय से साकची स्थित उनके कार्यालय में मिलकर ज्ञापन सौंपकर टाटानगर स्टेशन से बडौदा घाट तक सड़क की मरम्मत एवं कालीकरण (ब्लैक टॉप) की मांग रखी। उल्लेखनीय है कि पथ निर्माण विभाग द्वारा लगभग पाँच~छ: वर्ष पूर्व टाटानगर स्टेशन से बडौदा घाट तक सड़क का निर्माण कराया गया था।

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वर्तमान में उक्त सड़क पर वायरलेस मैदान के पास, शौचालय के समीप, गांधी नगर सिंहभूम लाइब्रेरी के पास, रेलवे स्कूल के पास सहित कई स्थानों पर बड़े-बड़े गड्ढे हो जाने के कारण सड़क अत्यंत जर्जर अवस्था में है। इस सड़क से प्रतिदिन हजारों लोगों का आवागमन होता है, जिससे आम जनता को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा एवं दुर्घटना घट रही है। कार्यपालक अभियंता ने प्रतिनिधिमंडल के माँग को गंभीरता पूर्वक सुना एवं उपरोक्त सड़क की मरम्मती, एक लेयर कालीकरण सड़क निर्माण का एक सप्ताह में टेंडर निकालने का आश्वासन दिये।
प्रतिनिधि मंडल में मुख्य रूप से किशोर यादव ,धर्मेंद्र चौहान, सपन कुमार साव, विष्णु ठाकुर, उपमुखिया संतोष ठाकुर एवं प्राण राय शामिल थे।

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बढ़ती ठंड को देखते हुए उपायुक्त ने स्कूलों में बढ़ाई छुट्टी

भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त मौसम पूर्वानुमान के अनुसार अगले कुछ दिनों तक ठंड एवं शीतलहर के कारण तापमान न्यूनतम होने से संबंधित चेतावनी उपलब्ध करायी गयी है। इस संबंध में उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी के आदेशानुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा-163 के तहत् पूर्वी सिंहभूम जिला अंतर्गत संचालित सभी सरकारी / अल्पसंख्यक / निजी विद्यालयों में वर्ग नर्सरी से 12वीं तक की कक्षाओं में पठन-पाठन का कार्य दिनांक 09.01.2026 से 10.01.2026 तक स्थगित किया गया है। सभी विद्यालय प्रबंधन को निदेशित किया गया वे उपरोक्त आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करेंगे।

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यदि उक्त अवधि में किसी विद्यालय में प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित है तो अपने विवेकानुसार विद्यालय में परीक्षा का संचालन करेंगे। सरकारी विद्यालय शिक्षकों हेतु खुले रहेंगे, जिसमें शिक्षक एवं शिक्षकेत्तर कर्मी विद्यालय में उपस्थित होकर अपनी उपस्थिति eVV पर दर्ज करेंगे एवं विद्यालय के गैर शैक्षणिक कार्यों को निष्पादन करेंगे।

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