एक नई सोच, एक नई धारा

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सारजामदा: मूलवासी कारूवा समाज के संस्थापक अमोल बेहरा की 15वीं पुण्यतिथि मनाई गई; समाजोत्थान का लिया संकल्प

जमशेदपुर (सारजामदा): सारजामदा पुरानी बस्ती स्थित जाहेर टोला में बुधवार को मूलवासी कारूवा समाज के संस्थापक अमोल बेहरा की 15वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समाज के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा बेहरा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए पदाधिकारियों और सदस्यों ने हिस्सा लिया।

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श्रद्धांजलि और संकल्प सभा

​कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पदाधिकारियों ने स्वर्गीय अमोल बेहरा के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने समाज के प्रति उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि अमोल बेहरा ने हमेशा पिछड़ों और मूलवासियों के उत्थान के लिए कार्य किया। समाज के प्रदेश अध्यक्ष कृष्णा बेहरा ने कहा कि अमोल बेहरा के दिखाए गए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर उनके द्वारा शुरू किए गए समाजोत्थान के अधूरे कार्यों को एकजुट होकर पूरा करने का संकल्प लिया गया।

प्रमुख पदाधिकारियों की उपस्थिति

​कार्यक्रम में समाज और विभिन्न संगठनों के कई वरिष्ठ सदस्य शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से:

  • गुरुचरण मुखी (प्रदेश कोषाध्यक्ष)
  • संजीत बेहरा (महासचिव)
  • रंजन कारूवा (वरिष्ठ संघ मित्र, मानवाधिकार सहायता संघ अंतरराष्ट्रीय एवं संरक्षक, SC/ST एकता मंच)
  • संजय मुखी, गणपति कारूवा, राजकुमार बेहरा, संतोष बेहरा, आनंद कारूवा

महिला शक्ति की भागीदारी

​कार्यक्रम में समाज की महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शारदा कारूवा, शोभा मुखी, भारती मुखी, देवी मुखी, मालती मुखी, दमयंती मुखी और सुलोचना मुखी सहित कई अन्य महिलाओं ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। युवाओं में विशाल तियु, सुजीत, अभिजीत और विमल मुखी ने भी समाज सेवा का संकल्प लिया।

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झारखंड में स्वास्थ्य क्रांति: ₹205 करोड़ की लागत से ब्लॉक स्तर पर बनेगा मज़बूत सुरक्षा कवच, मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की बड़ी पहल

रांची: झारखंड की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को आधुनिक और जन-केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने राज्य के सभी विधानसभा क्षेत्रों में 245 ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। ₹205 करोड़ के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट से राज्य के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इलाज की सूरत पूरी तरह बदल जाएगी।

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क्या है BPHU और यह कैसे करेगा काम?

​ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (BPHU) ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं का एक एकीकृत केंद्र होगा। यह केवल अस्पताल नहीं, बल्कि एक ‘सर्वेक्षण और रिस्पॉन्स’ यूनिट के रूप में कार्य करेगा।

इसके तीन मुख्य स्तंभ होंगे:

  1. सेवा केंद्र: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) या अनुमंडलीय अस्पताल के साथ मिलकर इलाज।
  2. BPHL (ब्लॉक पब्लिक हेल्थ लैब): बीमारियों की सटीक और त्वरित जांच के लिए ब्लॉक स्तर पर आधुनिक प्रयोगशाला।
  3. HMIS सेल: स्वास्थ्य डेटा का डिजिटल प्रबंधन, जिससे बीमारियों के फैलने से पहले ही उनकी पहचान हो सके।

मंत्री डॉ. इरफान अंसारी का विजन: “अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे इलाज”

​योजना की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा:

​”BPHU की स्थापना झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था को विकेंद्रीकृत (Decentralized) करने की दिशा में मील का पत्थर है। अब सुदूर आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को जांच या निगरानी के लिए जिला मुख्यालयों पर निर्भर नहीं रहना होगा। हमारा लक्ष्य ‘सर्वोच्च गुणवत्ता-सर्वोच्च प्राथमिकता’ है।”

​उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ईएसआईसी (ESIC) जैसे प्लेटफार्मों के साथ समन्वय कर तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों स्तरों पर स्वास्थ्य सेवाओं को अपग्रेड कर रही है।

प्रमुख लाभ: क्यों यह योजना ‘वरदान’ है?

  • त्वरित महामारी नियंत्रण: किसी भी संक्रामक बीमारी या महामारी की पहचान ब्लॉक स्तर पर ही हो जाएगी, जिससे इसे फैलने से रोका जा सकेगा।
  • आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस: दुर्गम और वंचित समुदायों के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होंगी।
  • बेहतर डेटा प्रबंधन: डिजिटल सूचना प्रणाली (HMIS) के जरिए स्वास्थ्य जोखिमों की समय पर पहचान संभव होगी।
  • बुनियादी ढांचे में सुधार: रेफरल अस्पतालों और सदर अस्पतालों में बड़े पैमाने पर व्यापक सुधार किए जाएंगे।

PM-ABHIM और 15वें वित्त आयोग का सहयोग

​इस परियोजना को प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) और 15वें वित्त आयोग के सहयोग से धरातल पर उतारा जा रहा है। 245 इकाइयों की यह श्रृंखला झारखंड को देश के अग्रणी सार्वजनिक स्वास्थ्य मॉडलों की श्रेणी में खड़ा कर देगी।

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शिबू सोरेन को ‘भारत रत्न’ देने की मांग तेज; झारखंड आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र

जमशेदपुर: झारखंड आंदोलन के प्रणेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित करने की मांग जोर पकड़ रही है। पूर्वी सिंहभूम (जमशेदपुर) के झारखंड आंदोलनकारियों ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक मांग पत्र जिला उपायुक्त को सौंपा है।

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सदन से लेकर सड़क तक उठ रही मांग

​उल्लेखनीय है कि झारखंड विधानसभा ने पहले ही सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से शिबू सोरेन को मरणोपरांत भारत रत्न देने की सिफारिश की है। विधायक सरयू राय और अन्य नेताओं ने भी इस पहल का समर्थन किया है। आंदोलनकारियों का तर्क है कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन आदिवासियों, शोषितों और पीड़ितों के हक की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया।

आंदोलनकारियों का भावनात्मक संदेश

​आंदोलनकारियों द्वारा सौंपे गए पत्र में उल्लेख है कि:

  • अविस्मरणीय संघर्ष: झारखंड राज्य के निर्माण में गुरुजी का संघर्ष और बलिदान अतुलनीय है।
  • अंतिम विदाई: उनके देहावसान के उपरांत देश के कोने-कोने से लाखों लोगों ने उनके पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) पहुंचकर उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी थी, जो उनके प्रति जन-सम्मान का प्रतीक है।
  • सच्ची श्रद्धांजलि: समाज के अंतिम पंक्ति के लोगों के लिए न्याय की लड़ाई लड़ने वाले ऐसे महान नेता को भारत रत्न देना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

​दिशोम गुरु शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को 81 वर्ष की आयु में हुआ था। वे 3 बार राज्य के मुख्यमंत्री, 11 बार सांसद (लोकसभा और राज्यसभा) और केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहे। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के संस्थापक के रूप में उन्होंने अलग राज्य के आंदोलन का दशकों तक नेतृत्व किया।

​मांग पत्र सौंपने वाले प्रमुख आंदोलनकारियों में बिरसिंह सोरेन, उमानाथ झा, प्रकाश चंद्र मा, नंदा पाल, निता सरकार और अन्य शामिल रहे।

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करीम सिटी कॉलेज में मनाया गया ‘फाउंडर्स डे’; संस्थापक सैयद तफज्जुल करीम को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि

जमशेदपुर: साकची स्थित करीम सिटी कॉलेज के ऑडिटोरियम में बुधवार को संस्था के संस्थापक स्वर्गीय सैयद तफज्जुल करीम की 62वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक ‘फाउंडर्स डे’ के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर करीम ट्रस्ट के अधीन संचालित संस्थानों ने अपने संस्थापक के विजन को याद किया और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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ट्रस्टियों ने साझा किया भविष्य का रोडमैप

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सैयद अशफाक करीम (ट्रस्टी, करीम्स ट्रस्ट) और सैयद मंसूर अली (अध्यक्ष, सेंट्रल करमिया स्कूल) रहे। सभा को संबोधित करते हुए ट्रस्टी सैयद अशफाक करीम ने कहा:

​”हमारी नजर हमेशा इस बात पर होनी चाहिए कि हमने कहां से शुरुआत की थी, आज हम कहां हैं और भविष्य में हमें कहां जाना है। हमें अपने उद्देश्यों के प्रति ईमानदार रहकर समाज को शिक्षित बनाना है।”

​उन्होंने योग्य शिक्षकों और प्राध्यापकों की सराहना करते हुए संस्थान के प्रति अपने सपनों का विस्तारपूर्वक वर्णन किया।

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वार्षिक रिपोर्ट और उपलब्धियों का प्रस्तुतीकरण

​कार्यक्रम के दौरान ट्रस्ट के विभिन्न संस्थानों के प्रमुखों ने पिछले एक वर्ष की गतिविधियों और उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया:

  • डॉ. मोहम्मद रेयाज (प्राचार्य, करीम सिटी कॉलेज): कॉलेज की शैक्षणिक और सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
  • श्रीमती तलत बानो एवं वहीदा तबस्सुम: मिडिल और हाई स्कूल की प्रगति रिपोर्ट साझा की।
  • डॉ. मोहम्मद जकरिया (डायरेक्टर एजुकेशन): संस्थान के प्रशासनिक और शैक्षिक ढांचे की मजबूती पर जोर दिया।

25 वर्षों की सेवा का सम्मान और पुरस्कार वितरण

​फाउंडर्स डे के अवसर पर संस्थान ने अपने निष्ठावान कर्मियों को सम्मानित किया:

  • दीर्घ सेवा सम्मान: कॉलेज में 25 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपहार देकर सम्मानित किया गया।
  • छात्रों का उत्साहवर्धन: विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं और विशेष उपलब्धि हासिल करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया।
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कार्यक्रम का समापन

​कार्यक्रम का संचालन अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. एस.एम. यहिया इब्राहीम ने किया। शुभारंभ हाफिज मोहम्मद वालीउल्लाह द्वारा तिलावत-ए-कुरान से हुआ। समापन के अवसर पर सभी ने सामूहिक रूप से ‘कॉलेज तराना’ गाया और राष्ट्रगान के साथ सभा विसर्जित हुई।

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झारखंड के ‘जीवाश्मों’ को मिलेगा कानूनी सुरक्षा कवच: सरयू राय ने राज्यपाल को सौंपा ‘भू-विरासत विधेयक’ का प्रारूप

रांची: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने झारखंड की प्राचीन प्राकृतिक संपदा, विशेषकर राजमहल की पहाड़ियों में बिखरे करोड़ों साल पुराने जीवाश्मों (Fossils) के संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को उन्होंने राजभवन जाकर राज्यपाल को “झारखंड भू-विरासत (जीवाश्म) विधेयक-2026” का प्रारूप सौंपा और इसे आगामी बजट सत्र में पेश करने की अनुमति मांगी।

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धन विधेयक के रूप में पेश होगी ‘विरासत की सुरक्षा’

​सरयू राय ने बताया कि यह एक गैर-सरकारी धन विधेयक होगा। संवैधानिक नियमों के अनुसार, किसी भी धन विधेयक को विधानसभा में पेश करने से पहले राज्यपाल की पूर्व मंजूरी अनिवार्य है। राज्यपाल ने विधायक को आश्वस्त किया कि वे इस प्रारूप को अपनी अनुशंसा के साथ राज्य सरकार को भेजेंगे और औपचारिक प्रक्रिया पूरी होते ही इस पर अपनी सहमति प्रदान करेंगे।

खनन माफिया से ‘काष्ठ जीवाश्म’ को बचाने की चुनौती

​विधेयक लाने के पीछे का मुख्य उद्देश्य साहेबगंज और पाकुड़ जिलों में स्थित राजमहल की पहाड़ियों की सुरक्षा करना है। सरयू राय के अनुसार:

  • अनमोल धरोहर: यहाँ बड़ी संख्या में काष्ठ जीवाश्म (Wood Fossils) मौजूद हैं, जो पृथ्वी के इतिहास की गवाही देते हैं।
  • बर्बादी का डर: अनियंत्रित खनन और मानवीय गतिविधियों के कारण ये जीवाश्म नष्ट हो रहे हैं।
  • राष्ट्रीय विरासत: इन जीवाश्मों को राष्ट्रीय स्तर की धरोहर मानते हुए इनके संरक्षण के लिए एक सख्त अधिनियम और नियमावली बनाना समय की मांग है।

विधानसभा अध्यक्ष को भी दी जा चुकी है सूचना

​इससे पहले मंगलवार को सरयू राय ने इस विधेयक का प्रारूप विधानसभा अध्यक्ष को भी सौंपा था। उन्होंने सदन को सूचित किया है कि वे बजट सत्र-2026 के दौरान इसे सभा के पटल पर रखना चाहते हैं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो झारखंड अपने जीवाश्मों को संरक्षित करने के लिए कानून बनाने वाला देश का एक अग्रणी राज्य बन जाएगा।

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जमशेदपुर: श्रीनाथ विश्वविद्यालय में 20 फरवरी को मेगा जॉब फेयर; देश की दिग्गज कंपनियों में मिलेगा अप्रेंटिस और रोजगार का मौका

जमशेदपुर: युवाओं को कॉर्पोरेट जगत से जोड़ने और उन्हें रोजगार के बेहतरीन अवसर प्रदान करने के उद्देश्य से श्रीनाथ विश्वविद्यालय, जमशेदपुर आगामी 20 फरवरी 2026 को एक विशाल ‘मेगा अप्रेंटिस कम जॉब फेयर’ का आयोजन करने जा रहा है।

​यह आयोजन भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन बोर्ड ऑफ प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (पूर्वी क्षेत्र) के सहयोग से ‘नेशनल अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग स्कीम’ (NATS) के तहत किया जा रहा है।

कौन हो सकते हैं शामिल? (पात्रता)

​इस मेले में इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी और सामान्य स्नातक विषयों के छात्र भाग ले सकते हैं।

  • शैक्षणिक योग्यता: बी.ई./बी.टेक, डिप्लोमा (इंजीनियरिंग), बी.ए., बी.एससी., बी.कॉम., और नर्सिंग के छात्र।
  • बैच: साल 2021 से 2025 के बीच उत्तीर्ण विद्यार्थी।
  • नोट: माइनिंग शाखा को छोड़कर अन्य सभी शाखाओं के विद्यार्थी इसमें पात्र हैं।
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प्रमुख उद्देश्य: कौशल विकास और रोजगार

​विश्वविद्यालय के डीन प्रशासन डॉ. जे राजेश ने बताया कि इस फेयर का मुख्य उद्देश्य स्नातक और डिप्लोमा धारकों को देश की प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ व्यावहारिक अनुभव (On-the-Job Training) दिलाना है। इससे न केवल युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ेगी, बल्कि उन्हें उद्योगों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का मौका भी मिलेगा।

पंजीकरण प्रक्रिया और समय

​इच्छुक छात्र विश्वविद्यालय द्वारा जारी आधिकारिक लिंक या क्यूआर कोड के माध्यम से अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर सकते हैं।

  • पंजीकरण लिंक: https://acjf-moe.in/Registration
  • दिनांक: 20 फरवरी 2026
  • समय: सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक
  • स्थान: श्रीनाथ विश्वविद्यालय परिसर, आदित्यपुर, जमशेदपुर।

विश्वविद्यालय की अपील

​श्रीनाथ विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी संजय भारती ने आसपास के सभी शैक्षणिक संस्थानों से अपील की है कि वे अपने छात्रों तक यह जानकारी पहुँचाएँ ताकि अधिक से अधिक युवा इस सुनहरे अवसर का लाभ उठा सकें। उम्मीद जताई जा रही है कि यह मेगा फेयर झारखंड के युवाओं के करियर को एक नई दिशा प्रदान करेगा।

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उपायुक्त का सख्त रुख: मइयां सम्मान योजना के 1 लाख लाभुकों का होगा भौतिक सत्यापन, गड़बड़ी मिली तो जाएगी नौकरी

जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी की अध्यक्षता में बुधवार को समाहरणालय सभागार में जिला समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई। बैठक में उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं में विभागों के बीच संवादहीनता कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन के लिए अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया।

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मइयां सम्मान योजना: लापरवाही पर बर्खास्तगी की चेतावनी

​बैठक में ‘मइयां सम्मान योजना’ की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि एक लाख से अधिक लाभुकों का भौतिक सत्यापन अभी लंबित है। उपायुक्त ने इसे जल्द पूर्ण करने का निर्देश देते हुए कड़ी चेतावनी दी:

  • शून्य सहिष्णुता: सत्यापन कार्य में यदि किसी भी कर्मी द्वारा अनैतिक गतिविधि या भ्रष्टाचार की शिकायत मिली, तो उसे तत्काल नौकरी से हटा दिया जाएगा।

सबर परिवारों के लिए ‘सैचुरेशन मोड’ में काम करने का निर्देश

​आदिम जनजाति सबर परिवारों के उत्थान को लेकर उपायुक्त ने सभी बीडीओ (BDO) को निर्देशित किया:

  • शिक्षा से जुड़ाव: सर्वे के आधार पर सबर समुदाय के ‘ड्रॉप आउट’ बच्चों को चिन्हित कर उन्हें वापस स्कूल भेजें।
  • पूर्ण लाभ: सबर परिवारों के प्रत्येक सदस्य को सरकार की सभी योजनाओं से जोड़ते हुए ‘सैचुरेशन मोड’ (शत-प्रतिशत लाभ) में लाएं।

छात्रावासों का होगा भौतिक सत्यापन

​जिला कल्याण पदाधिकारी को उन हॉस्टलों की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है जहाँ ऑक्यूपेंसी (छात्रों की उपस्थिति) शून्य या 50 फीसदी से कम है। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि जो हॉस्टल तैयार हैं, उनका संचालन तुरंत शुरू किया जाए। साथ ही, स्कूलों के भवन निर्माण और हैंडओवर की प्रक्रिया को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए बीडीओ और सीओ को समन्वय बनाने को कहा गया।

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अतिक्रमण रोकने के लिए लगेंगे बोर्ड

​विकास कार्यों के लिए अंचलों द्वारा जिन विभागों को जमीन हस्तांतरित कर दी गई है, वहां संबंधित विभाग को तुरंत अपना सूचना बोर्ड लगाने का निर्देश दिया गया है, ताकि जमीन पर कब्जा या विवाद की स्थिति न बने।

बैठक के मुख्य दिशा-निर्देश:

  • क्षेत्र भ्रमण: विभागीय पदाधिकारी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि क्षेत्र भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें।
  • त्वरित निष्पादन: भूमि हस्तांतरण, बिजली कनेक्शन और भुगतान से जुड़े लंबित मामलों को आपसी समन्वय से तुरंत सुलझाएं।
  • अंतिम व्यक्ति तक लाभ: जिला प्रशासन का लक्ष्य केवल आंकड़ों में लक्ष्य पाना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना है।
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मानगो मेयर चुनाव: कांग्रेस नेता अंसार खान ने किया अपनी पत्नी मोमिना बेगम की उम्मीदवारी का ऐलान; जनता के मशविरे पर लिया फैसला

जमशेदपुर (मानगो): नगर निकाय चुनावों की आहट के साथ ही मानगो क्षेत्र में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष और क्षेत्र के कद्दावर नेता अंसार खान ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि उनकी पत्नी मोमिना बेगम मानगो मेयर पद के लिए चुनाव लड़ेंगी।

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बस्ती वासियों की सलाह पर लिया निर्णय

​अंसार खान ने बताया कि वे पिछले कई दिनों से मानगो के विभिन्न वार्डों और बस्तियों में जनसंपर्क अभियान चला रहे थे। चूंकि मानगो मेयर की सीट महिला के लिए आरक्षित की गई है, इसलिए स्थानीय जनता और समर्थकों ने उनसे अपनी पत्नी को चुनाव मैदान में उतारने का मशविरा दिया। अंसार खान ने कहा, “बस्ती वासियों के प्यार और आश्वासन के बाद ही मैंने मोमिना बेगम को प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया है।”

कौन हैं अंसार खान? (एक कर्मठ पहचान)

​अंसार खान कांग्रेस के एक वरिष्ठ और सक्रिय चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उनकी पहचान केवल एक नेता की नहीं, बल्कि एक ‘जमीनी कार्यकर्ता’ की रही है:

  • संगठनात्मक अनुभव: वर्तमान में जिला उपाध्यक्ष होने के साथ-साथ वे झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रतिनिधि भी रह चुके हैं।
  • पूर्व मंत्री के करीबी: वे पूर्व स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता के प्रतिनिधि के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।
  • ‘मजदूर नेता’ की छवि: अंसार खान मानगो की जनता के बीच उस छवि के लिए चर्चित हैं, जब वे खुद कंधे पर सीढ़ी रखकर स्ट्रीट लाइटें ठीक करने निकल पड़ते थे।

जनता के बीच सक्रियता: 24/7 उपलब्ध

​मानगो की आवाम में अंसार खान अपनी त्वरित सेवा के लिए लोकप्रिय हैं। चाहे रोड, नाली, स्ट्रीट लाइट की समस्या हो या बिजली और पानी का संकट, दिन हो या रात, एक फोन कॉल पर वे मौके पर हाजिर रहते हैं। बस्ती क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर लगवाने से लेकर केबल दुरुस्त करवाने तक में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।

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मोमिना बेगम की दावेदारी से मुकाबला हुआ दिलचस्प

​अंसार खान की मजबूत पकड़ और सेवा भाव का लाभ उनकी पत्नी मोमिना बेगम को मिलने की उम्मीद है। समर्थकों का मानना है कि अंसार खान द्वारा किए गए विकास कार्यों और जनता के साथ उनके सीधे जुड़ाव के कारण मोमिना बेगम इस दौड़ में एक मजबूत प्रत्याशी के रूप में उभरेंगी।

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संसद अब और भी ‘स्मार्ट’: सांसदों को सीट पर बैठकर लगानी होगी डिजिटल हाजिरी; एआई (AI) संभालेगा अनुवाद का जिम्मा

नई दिल्ली/लखनऊ: संसद के आगामी बजट सत्र (28 जनवरी 2026 से शुरू) में लोकसभा सचिवालय एक नई और सख्त शुरुआत करने जा रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के दौरान घोषणा की कि अब सांसदों की हाजिरी की पुरानी व्यवस्था पूरी तरह बदल दी जाएगी।

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सीट पर बैठेंगे, तभी लगेगी हाजिरी

​अब तक सांसद सदन के बाहर रखे रजिस्टर में हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति दर्ज करा देते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था इतिहास बन जाएगी।

  • डिजिटल कंसोल: हर सांसद की सीट पर एक डिजिटल कंसोल लगाया गया है। सांसद अपनी आवंटित सीट पर बैठकर ही बायोमेट्रिक या डिजिटल तरीके से हाजिरी लगा पाएंगे।
  • नो वर्क, नो पे: यदि कोई सांसद देरी से आता है और तब तक सदन स्थगित हो जाता है, तो उसकी हाजिरी नहीं लग पाएगी। इसका सीधा असर उनके उस दिन के वेतन और भत्तों पर पड़ेगा।
  • अनुशासन: इस कदम का उद्देश्य सदन में सांसदों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना और ‘हस्ताक्षर करके चले जाने’ की प्रवृत्ति पर लगाम लगाना है।

एआई (AI) का ‘संसदीय अवतार’: 22 भाषाओं में अनुवाद की तैयारी

​संसद की कार्यवाही को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का परीक्षण शुरू कर दिया गया है।

  • रियल-टाइम अनुवाद: वर्तमान में एआई का उपयोग वक्ताओं के भाषणों को विभिन्न भाषाओं में अनुवाद करने के लिए किया जा रहा है। अभी यह 80% सटीक है, जिसे आईटी कंपनियों की मदद से 100% करने का लक्ष्य है।
  • समय की बचत: पहले कार्यवाही का ब्योरा वेबसाइट पर अपलोड होने में 4 घंटे लगते थे, जो एआई की मदद से अब मात्र 30 मिनट में हो जाएगा।
  • मानसून सत्र का लक्ष्य: मानसून सत्र 2026 तक अनुवाद प्रक्रिया को पूरी तरह एआई संचालित करने की योजना है।

विधानसभाओं के लिए ’30 दिन’ का संकल्प

​ओम बिरला ने राज्य विधानसभाओं के गिरते कार्य दिवसों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अधिकांश विधानसभाएं साल में 30 दिन भी नहीं चल पा रही हैं। सम्मेलन में एक संकल्प पारित किया जाएगा कि देश की सभी विधानसभाएं साल में न्यूनतम 30 दिन अवश्य चलें।

अन्य महत्वपूर्ण घोषणाएं:

  • पेपरलेस विधायिका: संसद के साथ-साथ अब लगभग सभी विधानसभाएं ‘डिजिटल’ और ‘पेपरलेस’ हो चुकी हैं।
  • विपक्ष की भूमिका: बिरला ने अपील की कि विपक्ष को राष्ट्रपति के अभिभाषण और बजट चर्चा में सक्रिय रूप से अपनी बात रखनी चाहिए।
  • महाभियोग: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रक्रिया पर उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।
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दलमा बना ‘कार्निवोरस’ पौधों का नया ठिकाना: हाथियों के बाद अब मांसाहारी पौधों की खोज से शोधकर्ता उत्साहित

जमशेदपुर/दलमा: हाथियों के स्वर्ग के रूप में प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभयारण्य अब अपनी जैव विविधता के एक और रहस्यमयी पहलू के लिए चर्चा में है। वन विभाग और शोधकर्ताओं ने अभयारण्य के विभिन्न क्षेत्रों में दुर्लभ मांसाहारी (Insectivorous) पौधों की पहचान की है, जो इस प्राकृतिक आवास की समृद्धि को दर्शाता है।

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कहां मिले कौन से पौधे?

​अभयारण्य के अलग-अलग हिस्सों में दो प्रमुख मांसाहारी प्रजातियों की उपस्थिति दर्ज की गई है:

  • पटमदा क्षेत्र: यहाँ ड्रोसेरा बर्मानी (Drosera burmannii) नामक पौधा मिला है। यह लाल रंग का एक छोटा पौधा होता है, जिसके पत्तों पर चिपचिपी बूंदें होती हैं।
  • बालीगुमा और कोंकादाशा क्षेत्र: इन क्षेत्रों में यूटिकुलेरिया (Utricularia) प्रजाति की पहचान हुई है, जिसे ‘ब्लैडरवॉर्ट’ भी कहा जाता है।

कैसे काम करते हैं ये ‘शिकारी’ पौधे?

​ये पौधे उन क्षेत्रों में उगते हैं जहाँ मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी होती है। पोषण की इस कमी को पूरा करने के लिए इन्होंने एक अनोखा तरीका विकसित किया है:

  1. शिकार: ये पौधे कीटों और सूक्ष्म जीवों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
  2. ट्रैप: ड्रोसेरा अपनी चिपचिपी ग्रंथियों से कीटों को जकड़ लेता है, जबकि यूटिकुलेरिया पानी के भीतर वैक्यूम प्रेशर के जरिए कीटों को निगल जाता है।
  3. पाचन: शिकार को फंसाने के बाद ये पौधे एंजाइम्स के जरिए उसे पचा लेते हैं और नाइट्रोजन प्राप्त करते हैं।

संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कड़े कदम

​फॉरेस्ट गार्ड सह शोधार्थी राजा घोष ने इस खोज की पुष्टि करते हुए बताया कि इसकी विस्तृत जानकारी वरीय अधिकारियों को दे दी गई है। इन पौधों की संवेदनशीलता को देखते हुए विभाग ने निम्नलिखित योजना बनाई है:

  • प्रवेश पर नियंत्रण: उन विशेष क्षेत्रों में आम लोगों और मवेशियों के प्रवेश को सीमित किया जाएगा जहाँ ये पौधे पाए गए हैं।
  • प्राकृतिक आवास का संरक्षण: इन पौधों के अस्तित्व को बनाए रखने के लिए स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखा जाएगा।

दलमा के लिए गर्व का क्षण

​वन विभाग के अनुसार, मांसाहारी पौधों की मौजूदगी यह सिद्ध करती है कि दलमा का वातावरण प्रदूषण मुक्त है और यहाँ का पारिस्थितिक तंत्र बेहद संतुलित है। यह खोज भविष्य में वनस्पति विज्ञान के शोधकर्ताओं के लिए नए द्वार खोलेगी।

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