एक नई सोच, एक नई धारा

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गोपाल मैदान में लोक संस्कृति का महाकुंभ: 21वें टुसू मेला में उमड़ा जनसैलाब, 41 हजार का प्रथम पुरस्कार

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

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​झारखंड की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपरा का प्रतीक ‘टुसू पर्व’ बुधवार को जमशेदपुर के ऐतिहासिक गोपाल मैदान (बिष्टुपुर) में पूरी भव्यता के साथ मनाया गया। झारखंडवासी एकता मंच द्वारा आयोजित इस 21वें टुसू मेला में कोल्हान समेत पूरे राज्य की सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम देखने को मिला।

​पारंपरिक लोककला और झुमर की धूम

​मेले का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक कार्यक्रम रहा, जहाँ ‘झुमर सम्राट’ संतोष महतो और उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और संतोष महतो के चर्चित झुमर गीतों पर गोपाल मैदान में मौजूद हजारों दर्शक झूमने पर मजबूर हो गए।

​आकर्षण का केंद्र: विशाल मूर्तियां और गगनचुंबी चौड़ल

​सुबह 8 बजे से ही श्रद्धालु और प्रतिभागी अपनी कलाकृतियों के साथ मैदान में जुटने लगे थे। इस वर्ष मेले की खासियतें इस प्रकार रहीं:

  • चौड़ल और प्रतिमाएं: रंग-बिरंगे कागजों और बांस से बने ऊंचे-ऊंचे चौड़ल और मां टुसू की सुंदर मूर्तियां आकर्षण का केंद्र रहीं। पिछली बार इनकी संख्या 350 से अधिक थी, लेकिन इस बार यह आंकड़ा और भी बड़ा नजर आया।
  • अतिथियों का आगमन: कोल्हान के अलावा रांची, तमाड़, बुंडू और सिल्ली जैसे क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम जताने पहुंचे।

​विजेताओं के लिए पुरस्कारों की बौछार

​आयोजकों ने इस वर्ष प्रतियोगिता की पुरस्कार राशि में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। विजेताओं को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा:

1. टुसू प्रतिमा प्रतियोगिता:

  • प्रथम पुरस्कार: 41,000 रुपये
  • द्वितीय पुरस्कार: 35,000 रुपये
  • तृतीय पुरस्कार: 31,000 रुपये

2. चौड़ल प्रतियोगिता:

  • प्रथम पुरस्कार: 31,000 रुपये
  • द्वितीय पुरस्कार: 25,000 रुपये
  • तृतीय पुरस्कार: 21,000 रुपये

3. बूढ़ी गाड़ी नाच प्रतियोगिता:

इसमें प्रथम स्थान पाने वाली टीम को 15,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।

​शहीदों को नमन और भव्य उद्घाटन

​समारोह का औपचारिक उद्घाटन मंच के मुख्य संयोजक आस्तिक महतो और सांसद विद्युत वरण महतो के नेतृत्व में हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत झारखंड के अमर शहीदों और मंच के पूर्व पदाधिकारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।

​देर शाम तक गोपाल मैदान दूधिया रोशनी में नहाया रहा, जहाँ पारंपरिक वेशभूषा में सजे पुरुष और महिलाएं झारखंडी गौरव का जश्न मनाते दिखे। यह मेला न केवल एक आयोजन था, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम साबित हुआ।

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​भक्ति या बीमारी? नंदपुर मंदिर की परिक्रमा करने वाले कुत्ते को हुआ ‘टिक फीवर’, नोएडा में चल रहा है इलाज

बिजनौर/नोएडा | 22 जनवरी, 2026

​नगीना-बढ़ापुर रोड स्थित गांव नंदपुर के नंदलाल देवता मंदिर में हनुमान जी की मूर्ति की सात दिनों तक लगातार परिक्रमा करने वाला कुत्ता इन दिनों सुर्खियों में है। जहाँ ग्रामीण इसे ‘दिव्य भक्ति’ से जोड़कर देख रहे थे, वहीं अब चिकित्सा जांच में कुत्ते की बिगड़ती सेहत का एक वैज्ञानिक कारण सामने आया है।

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​पीसीआर रिपोर्ट में ‘टिक फीवर’ की पुष्टि

​कुत्ते की तबीयत खराब होने के बाद उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया था। प्रेमपथ एनिमल शेल्टर (बिजनौर) के डॉ. अश्वनी चित्रांश ने बताया कि नोएडा स्थित मैक्स पेट जेड अस्पताल में कराए गए टेस्ट और पीसीआर रिपोर्ट से पता चला है कि कुत्ता ‘टिक फीवर’ (Tick Fever) से ग्रसित है।

चिकित्सकों का दावा:

डॉक्टरों के अनुसार, टिक फीवर में कुत्ते को बहुत तेज बुखार आता है और वह भ्रम (Confusion) या बेचैनी की स्थिति में एक ही चक्र में घूम सकता है। संभवतः इसी कारण वह मंदिर में लगातार परिक्रमा कर रहा था।

​नोएडा शेल्टर में 72 घंटे की निगरानी

​कुत्ते की स्थिति को देखते हुए उसे शिवालय एनिमल शेल्टर, नोएडा में स्थानांतरित कर दिया गया है।

  • उपचार: वर्तमान में मैक्स पेट जेड अस्पताल के डॉक्टरों के परामर्श पर इलाज जारी है।
  • अगला कदम: 72 घंटे की सघन निगरानी के बाद कुत्ते को एक बार फिर दिल्ली ले जाकर विस्तृत चेकअप कराया जाएगा। यदि स्थिति सामान्य रही, तो उसे वापस गांव नंदपुर छोड़ने का निर्णय लिया जाएगा।

​गांव में बेसब्री से हो रहा इंतजार

​दूसरी ओर, गांव नंदपुर में आस्था और चिंता का माहौल बना हुआ है। मंदिर की व्यवस्था संभाल रहे तुषार सैनी ने बताया कि भंडारे के बाद अब मेला तो समाप्त हो गया है, लेकिन ग्रामीणों की नजरें अब भी अपने उस ‘अनोखे भक्त’ पर टिकी हैं।

​ग्रामीण लगातार नोएडा की मेडिकल टीम को फोन कर कुत्ते के स्वास्थ्य की ‘पल-पल’ की जानकारी ले रहे हैं। हर कोई उसके जल्द स्वस्थ होकर गांव लौटने की प्रार्थना कर रहा है।

​क्या होता है टिक फीवर?

​यह कुत्तों में पाए जाने वाले ‘किलनी’ (Ticks) के काटने से फैलने वाला एक गंभीर संक्रमण है। इसके मुख्य लक्षणों में शामिल हैं:

  • ​बहुत तेज बुखार आना।
  • ​अत्यधिक सुस्ती और भूख न लगना।
  • ​जोड़ों में दर्द या चलने में लड़खड़ाहट।
  • ​गंभीर स्थिति में तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर असर पड़ना।
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टाटानगर-कीताडीह अतिक्रमण मामला: हाईकोर्ट से दुकानदारों को बड़ी राहत; 42 दिनों में पुनर्वास का आदेश, रेलवे को झटका

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​टाटानगर रेलवे स्टेशन चौक से कीताडीह जाने वाली मुख्य सड़क के किनारे बसे दुकानदारों के लिए झारखंड हाईकोर्ट का फैसला एक नई उम्मीद लेकर आया है। पिछले कई दिनों से चल रहे रेलवे के ‘बुलडोजर अभियान’ पर कोर्ट ने न केवल ब्रेक लगाया है, बल्कि विस्थापित हो रहे दुकानदारों के पुनर्वास (Rehabilitation) के लिए भी ऐतिहासिक आदेश जारी किया है।

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​हाईकोर्ट का अहम फैसला: एक माह की मोहलत

​हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दुकानदारों को बड़ी कानूनी राहत मिली। कोर्ट के आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • एक महीने का समय: दुकानदारों को अपनी स्वेच्छा से जगह खाली करने के लिए एक महीने की मोहलत दी गई है।
  • 42 दिनों में पुनर्वास: रेलवे अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि वे 42 दिनों के भीतर इन दुकानदारों को रेलवे क्षेत्र में ही कहीं और बसाने (Relocate) की व्यवस्था करें।
  • रिपोर्ट तलब: अदालत ने 42 दिन बीतने के बाद इस संबंध में एक विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

​रेलवे की कार्रवाई और दुकानदारों का संघर्ष

​उल्लेखनीय है कि टाटानगर स्टेशन के विस्तार और आधुनिकीकरण योजना के तहत रेलवे इंजीनियरिंग विभाग ने अतिक्रमण हटाओ अभियान शुरू किया था।

  • हालिया कार्रवाई: स्टेशन-कीताडीह रोड पर स्थित कुल 25 दुकानों में से लगभग 12 दुकानों को पहले ही जमींदोज किया जा चुका था।
  • मलबे में तलाश: जिन दुकानदारों की दुकानें तोड़ी गई थीं, वे वर्तमान में मलबे से ईंटें और अपना जरूरी सामान निकालने में जुटे हैं। अब कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें भी पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।

​”परिवार पालने का मिलेगा सहारा”

​हाईकोर्ट के इस फैसले से उन दुकानदारों के चेहरे पर मुस्कान लौट आई है जो अपनी आजीविका छिनने के डर से सहमे हुए थे। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के उन्हें हटाना अन्यायपूर्ण था। अब रेलवे क्षेत्र में ही जगह मिलने के आश्वासन से उनकी रोजी-रोटी सुरक्षित होती दिख रही है।

​स्टेशन विस्तार योजना पर असर

​टाटानगर स्टेशन के गोलपहाड़ी और कीताडीह क्षेत्र में विस्तार की योजना लंबे समय से प्रस्तावित है। हाईकोर्ट में मामला लंबित होने के कारण यह अभियान रुका हुआ था। अब कोर्ट के इस संतुलित आदेश (हटाने और बसाने दोनों का निर्देश) के बाद रेलवे को अपनी विस्तार योजनाओं के साथ-साथ दुकानदारों के व्यवस्थित पुनर्वास पर भी काम करना होगा।

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जमशेदपुर में सरस्वती पूजा की धूम: विद्यापतिनगर में विराजीं 31 फीट की ‘झारखंड की सबसे बड़ी’ मां शारदे

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​लौहनगरी जमशेदपुर में विद्यादायिनी मां सरस्वती की आराधना की तैयारियां अपने शिखर पर हैं। इस वर्ष शहर में भक्ति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है, जहाँ बारीडीह का विद्यापतिनगर अपनी भव्यता के कारण पूरे झारखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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​विद्यापतिनगर: 31 फीट की प्रतिमा बनी आकर्षण का केंद्र

  • कलाकारी: बंगाल के कुशल कारीगर पिछले दो महीनों से इस प्रतिमा को जीवंत रूप देने में जुटे थे।
  • लागत: लगभग 2 लाख रुपये की लागत से तैयार इस प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन आज, 22 जनवरी की शाम को होगा।
  • विशेष कार्यक्रम: * 26 जनवरी: रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम।
    • 27 जनवरी: ‘जादूगर संध्या’ का विशेष आयोजन।
    • 28 जनवरी: प्रतिमा का विसर्जन।

​बारीडीह (ट्रांसपोर्ट कुआं मैदान) में राधा कृष्ण ब्वायज क्लब द्वारा इस वर्ष 31 फीट ऊंची मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है। आयोजन समिति का दावा है कि यह पूरे झारखंड की सबसे बड़ी सरस्वती प्रतिमा है।

​समिति के मुख्य संरक्षक प्रह्लाद लोहरा और अध्यक्ष अभिलाष गौड़ ने बताया कि महासचिव सुशील श्रीवास्तव और कोषाध्यक्ष कन्हैया चौबे सहित पूरी टीम इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में जुटी है।

​राज क्लब: 1980 से बरकरार है परंपरा

​सर्किट हाउस स्थित राज क्लब पूजा कमेटी ने भी अपना भव्य पंडाल तैयार कर लिया है। यहाँ वर्ष 1980 से निरंतर पूजा आयोजित की जा रही है, जो अपनी विशेष परंपरा के लिए जानी जाती है।

​कमेटी के अध्यक्ष बलराम तांती और सचिव कैलाश क्षत्रिय के अनुसार, इस वर्ष भी यहाँ की विद्युत सज्जा (Lighting) और आकर्षक पंडाल शहरवासियों के लिए मुख्य केंद्र रहेंगे। गुरुवार को उद्घाटन के बाद यहाँ तीन दिनों तक पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला चलेगा, जिसके बाद चौथे दिन विसर्जन किया जाएगा।

​सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम

​जमशेदपुर के इन दोनों प्रमुख पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने की संभावना है। इसे देखते हुए समितियों ने सुरक्षा, कतारबद्ध दर्शन और पार्किंग के लिए विशेष इंतजाम किए हैं। शहर के अन्य शिक्षण संस्थानों और मोहल्लों में भी पूजा को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।

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टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन की हुंकार: ग्रेड रिवीजन और कर्मचारी पुत्रों की सीधी बहाली की मांग; ‘टाटा स्टील’ की तर्ज पर सुविधाओं पर जोर

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​टाटा टिनप्लेट वर्कर्स यूनियन ने बुधवार को यूनियन कार्यालय में एक महत्वपूर्ण कार्यकारिणी बैठक आयोजित की। यूनियन के अध्यक्ष राकेश्वर पांडेय की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कर्मचारियों के हितों, विशेष रूप से ग्रेड रिवीजन और मैनपावर की कमी को लेकर प्रबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया गया।

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​मैनपावर की कमी और ‘सीधी बहाली’ की मांग

​यूनियन ने कंपनी में मैनपावर की भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। सदस्यों ने बताया कि काम के बढ़ते दबाव के कारण कर्मचारी न तो छुट्टियां ले पा रहे हैं और न ही उन्हें कैंटीन जाने का समय मिल पा रहा है।

  • बहाली का नया मॉडल: यूनियन ने मांग की है कि खाली पदों को भरने के लिए तत्काल कर्मचारी पुत्रों की बहाली की जाए।
  • सीधा रोल: स्पष्ट रूप से कहा गया कि यह बहाली टाटा टेक्निकल सर्विसेज (TTSL) के माध्यम से न होकर, सीधे टाटा स्टील (टिनप्लेट डिवीजन) के रोल पर होनी चाहिए।

​ग्रेड रिवीजन और वित्तीय मांगे

​बैठक में ‘ग्रेड रिवीजन’ का मुद्दा सबसे ऊपर रहा। यूनियन की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  1. टाटा स्टील मानक: टिनप्लेट का ग्रेड समझौता टाटा स्टील लिमिटेड के मानकों के अनुरूप हो।
  2. ब्याज सहित एरियर: लंबित समझौते के कारण बकाया राशि का भुगतान प्रबंधन द्वारा ब्याज और एडवांस एरियर के साथ किया जाए।
  3. DA में वृद्धि: डीए (DA) पॉइंट रेट को बढ़ाकर 4 रुपये प्रति पॉइंट किया जाए और NS ग्रेड का विस्तार किया जाए।

​टाउनशिप और बुनियादी सुविधाओं पर नाराजगी

​यूनियन ने जुस्को (JUSCO) द्वारा टाउनशिप में साफ-सफाई और दवा छिड़काव के लिए शुल्क लेने पर कड़ी आपत्ति जताई।

  • क्वार्टर आवंटन: 10 नंबर बस्ती के कर्मचारियों को जल्द क्वार्टर आवंटित करने और नए क्वार्टरों में पानी की टंकी व मेंटेनेंस की समस्याओं को दूर करने की मांग की गई।
  • पार्किंग: टाटा स्टील की तर्ज पर कंपनी परिसर के अंदर ही टू-व्हीलर पार्किंग बनाने का प्रस्ताव रखा गया।

​बैठक में महामंत्री मनोज कुमार सिंह, उपाध्यक्ष परविंदर सिंह सोहल समेत कार्यकारिणी के सभी वरिष्ठ सदस्यों ने एकजुट होकर इन मांगों को प्रबंधन के समक्ष मजबूती से रखने का संकल्प लिया।

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टाटा स्टील की ‘ग्रीन माइनिंग’ की ओर बड़ी छलांग: वेस्ट बोकारो में पहला इलेक्ट्रिक ट्रक लॉन्च, 3000 पेड़ों के बराबर देगा लाभ

वेस्ट बोकारो/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​पर्यावरण संरक्षण और वर्ष 2045 तक ‘नेट जीरो’ (Net Zero) कार्बन उत्सर्जन के अपने महात्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में टाटा स्टील ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने वेस्ट बोकारो डिवीजन के वाशरी-3 कॉम्प्लेक्स में रॉ मैटेरियल डिवीजन (RMD) के इतिहास के पहले इलेक्ट्रिक ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

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​जीरो-एमिशन तकनीक: प्रदूषण पर प्रहार

​मोंट्रा इलेक्ट्रिक और टाइकून इंडस्ट्रीज के सहयोग से पेश किया गया यह ट्रक पूरी तरह से अत्याधुनिक ‘जीरो-एमिशन’ तकनीक पर आधारित है। यह पहल न केवल टाटा स्टील के लिए बल्कि भारतीय खनन (Mining) क्षेत्र के लिए भी एक मील का पत्थर मानी जा रही है।

पर्यावरण पर प्रभाव के आंकड़े:

  • कार्बन कटौती: एक अकेला इलेक्ट्रिक ट्रक प्रति वर्ष वातावरण से लगभग 64 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) कम करेगा।
  • पेड़ों से तुलना: यह प्रभाव इतना व्यापक है कि यह 3,000 पेड़ों द्वारा साल भर में किए जाने वाले पर्यावरण शुद्धिकरण के बराबर है।
  • ध्वनि प्रदूषण: इलेक्ट्रिक इंजन होने के कारण खदानों में होने वाले भारी शोर (Noise Pollution) में भी भारी कमी आएगी।

​भविष्य की योजना: डीजल मुक्त खदानें

​कोल बेनीफिकेशन के चीफ बीवी. सुधीर ने बताया कि यह कदम भारत के ‘लो-कार्बन इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम’ की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। फिलहाल, इस ट्रक का गहन ट्रायल किया जाएगा।

आगामी रणनीति:

  1. क्षमता का आकलन: आने वाले महीनों में ट्रक की कार्यक्षमता और भारी लोड सहने की शक्ति का परीक्षण होगा।
  2. चरणबद्ध विस्तार: सफल ट्रायल के बाद, खदानों में उपयोग होने वाले पारंपरिक डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह इलेक्ट्रिक वाहनों की फ्लीट तैनात की जाएगी।
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औद्योगिक राजधानी से ‘डिफेंस हब’ तक: भारतीय सेना का अभेद्य ‘सुरक्षा कवच’ बन रहा है जमशेदपुर

जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​जमशेदपुर की पहचान अब केवल टाटा स्टील और ट्रकों तक सीमित नहीं है। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की लहर पर सवार होकर यह शहर अब भारतीय सेना के लिए अत्याधुनिक हथियार और सुरक्षा उपकरण तैयार करने वाले एक बड़े डिफेंस क्लस्टर के रूप में उभर रहा है। हाल ही में आदित्यपुर ऑटो क्लस्टर में आयोजित ‘डिफेंस कॉन्क्लेव-2026’ ने इस बदलाव पर मुहर लगा दी है।

​आदित्यपुर: नट-बोल्ट से मिसाइल लॉन्चर तक का सफर

​एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक, आदित्यपुर अब रक्षा उत्पादन का नया केंद्र है। यहाँ की 1200 से अधिक MSME इकाइयां अब केवल ऑटो पार्ट्स नहीं, बल्कि रक्षा क्षेत्र के लिए जटिल पुर्जे बना रही हैं:

  • DRDO और ऑर्डिनेंस फैक्ट्री: स्थानीय कंपनियां मिसाइल लॉन्चर के हाइड्रोलिक सिस्टम और सबमरीन के महत्वपूर्ण पार्ट्स की आपूर्ति कर रही हैं।
  • टैंक ट्रैक लिंक: टैंकों के चलने के लिए जरूरी ट्रैक लिंक्स का निर्माण अब यहीं के कुशल इंजीनियरों द्वारा किया जा रहा है।
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​टाटा मोटर्स: सीमाओं का ‘सारथी’

​1958 से सेना का साथ दे रही टाटा मोटर्स अब अपनी तकनीक को अगले स्तर पर ले गई है। जमशेदपुर प्लांट में तैयार हो रहे वाहन वैश्विक मानकों को चुनौती दे रहे हैं:

  • केस्ट्रल (Kestrel): यह एक ‘एम्फीबियस’ बख्तरबंद वाहन है जो जमीन और पानी दोनों में दुश्मन का मुकाबला कर सकता है।
  • मिसाइल वाहक: ब्रह्मोस, आकाश और पिनाक जैसी मिसाइलों को ढोने के लिए विशेष 12×12 और 8×8 हैवी ट्रक यहीं तैयार होते हैं।
  • MPV (माइन प्रोटेक्टेड व्हीकल): जवानों को बारूदी सुरंगों के खतरों से बचाने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए वाहन।

​रक्षा गलियारे (Defense Corridor) की बढ़ती मांग

​रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने हाल ही में संकेत दिया है कि जमशेदपुर-आदित्यपुर-रांची-बोकारो को मिलाकर एक डिफेंस कॉरिडोर विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं।

प्रमुख उपलब्धियां और मांगें:

​”झारखंड में वह इंजीनियरिंग क्षमता है जो भारत की विदेशों पर निर्भरता खत्म कर सकती है। यदि इसे औपचारिक रूप से डिफेंस कॉरिडोर घोषित किया जाता है, तो यह न केवल निर्यात का केंद्र बनेगा बल्कि हजारों रोजगार भी पैदा करेगा।”

​जमशेदपुर की सैन्य ताकत: एक नजर में

उत्पाद / श्रेणीविशेषता एवं उपयोग
मिसाइल लॉन्चर वाहनपिनाक, आकाश और ब्रह्मोस के लिए 8×8 और 12×12 ट्रक।
केस्ट्रल (Kestrel)जमीन और पानी दोनों पर चलने वाला बख्तरबंद कॉम्बैट वाहन।
हाइड्रोलिक सिस्टममिसाइल लॉन्चिंग और सबमरीन ऑपरेशंस के लिए सटीक पुर्जे।
MPV वाहनबारूदी सुरंगों के धमाकों को बेअसर करने वाली तकनीक।

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झारखंड स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई: सरकारी अस्पतालों में फर्जी बिलिंग के खेल पर कसेगा शिकंजा, PPP मोड की सेवाओं की होगी सघन जांच

रांची/जमशेदपुर | 22 जनवरी, 2026

​झारखंड के सरकारी अस्पतालों में पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित रेडियोलॉजी सेवाओं (एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई) में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एंड प्रोक्योरमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (JMHIDPCL) ने राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों को निजी एजेंसियों द्वारा जमा किए गए बिलों के ऑडिट का सख्त आदेश दिया है।

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​एक सप्ताह में मांगी गई ‘स्क्रूटनी’ रिपोर्ट

​स्वास्थ्य निगम ने स्पष्ट किया है कि सरकारी धन का दुरुपयोग किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रिम्स (रांची), एमजीएम (जमशेदपुर), और शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज (धनबाद) सहित सभी जिलों के सिविल सर्जनों को 7 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

जांच के 3 मुख्य आधार:

  1. मरीज का भौतिक सत्यापन: क्या बिल में दर्ज मरीज वास्तव में अस्पताल की ओपीडी या आईपीडी (भर्ती) का हिस्सा था?
  2. डाटा मिलान: जांच की तारीख, रिकॉर्ड और मेडिकल रिपोर्ट की प्रमाणिकता का क्रॉस-वेरिफिकेशन।
  3. वैधता की जांच: क्या एजेंसियां वर्तमान में सक्रिय और वैध एग्रीमेंट के तहत सेवाएं दे रही हैं?

​जमशेदपुर एमजीएम: बिना वैध करार के चल रहा सेंटर

​जांच के घेरे में जमशेदपुर का एमजीएम अस्पताल सबसे प्रमुखता से उभरा है। यहाँ रेडियोलॉजी सेवाएं दे रही एजेंसी ‘हेल्थमैप’ का करार पिछले महीने ही समाप्त हो चुका है।

​अस्पताल प्रबंधन द्वारा काम रोकने के निर्देश के बावजूद सेंटर का संचालन जारी है। एजेंसी का दावा है कि सरकार के साथ नया करार हो चुका है, लेकिन एमजीएम प्रशासन ने किसी भी आधिकारिक लिखित आदेश मिलने से इनकार किया है। यह स्थिति सरकारी तंत्र में समन्वय की कमी और नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करती है।

​सख्त कार्रवाई की चेतावनी

​स्वास्थ्य विभाग ने कड़ा संदेश दिया है कि केवल उन्हीं जांचों का भुगतान किया जाएगा जो वास्तविक रूप से मरीजों के लिए की गई हैं। फर्जी, गलत या बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए बिलों के मामले में भुगतान रोकने के साथ-साथ संबंधित निजी एजेंसियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जांच में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय होगी।

​”हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग सीधे गरीबों के इलाज के लिए हो, न कि निजी लाभ के लिए। किसी भी तरह की बिलिंग गड़बड़ी पर एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है।” — विभाग के वरिष्ठ अधिकारी

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झारखंड के शहरों की बदलेगी सूरत: नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने यूके में सीखा ‘स्मार्ट सिटी’ का मंत्र

लंदन/रांची | 22 जनवरी, 2026

​झारखंड के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ और स्मार्ट बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में झारखंड का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इन दिनों यूनाइटेड किंगडम (UK) के दौरे पर है। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य कोवेंट्री शहर के नवाचारों और स्थायी शहरी प्रबंधन (Sustainable Urban Management) मॉडल्स का अध्ययन करना है, ताकि उन्हें झारखंड की परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जा सके।

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​कोवेंट्री: भविष्य की शहरी मोबिलिटी का केंद्र

​प्रतिनिधिमंडल ने कोवेंट्री में शहरी नवाचार से जुड़े प्रमुख संस्थानों का दौरा किया। इस दौरान टीम का फोकस मुख्य रूप से चार स्तंभों पर रहा:

  1. ज़ीरो-एमिशन सिटी मैनेजमेंट: प्रदूषण मुक्त शहर बनाने की तकनीक।
  2. भविष्य की मोबिलिटी: अत्याधुनिक परिवहन प्रणालियां।
  3. नवोन्मेषी सार्वजनिक स्थल: नागरिकों के लिए बेहतर ओपन स्पेस और पार्कों का नियोजन।
  4. एकीकृत शहर नियोजन: तकनीक और नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण का मेल।

​परिवहन में क्रांति: ईवी बसें और ‘वेरी लाइट रेल’

​दौरे का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कोवेंट्री सिटी बस डिपो का अवलोकन रहा। यहाँ प्रतिनिधिमंडल ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आधारित शहरी परिवहन प्रणाली के संचालन मॉडल को समझा।

​विशेष रूप से ‘कोवेंट्री वेरी लाइट रेल’ (Coventry Very Light Rail) तकनीक पर विस्तृत चर्चा हुई। इसे एक किफायती, टिकाऊ और नागरिक-अनुकूल परिवहन समाधान के रूप में देखा जा रहा है। झारखंड सरकार राज्य के प्रमुख शहरों में इस मॉडल को लागू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है ताकि कम लागत में प्रभावी सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जा सके।

​अकादमिक और प्रशासनिक तालमेल

​मंत्री सुदिव्य कुमार ने कोवेंट्री सिटी काउंसिल और कोवेंट्री यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों के साथ संवाद किया। इस चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि कैसे विश्वविद्यालय की रिसर्च और प्रशासन की नीतियों को मिलाकर एक टिकाऊ शहर का विकास किया जा सकता है।

​”कोवेंट्री का अनुभव झारखंड के शहरों को भविष्य के लिए तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा। हम अंतरराष्ट्रीय स्तर के इन व्यावहारिक समाधानों को झारखंड के शहरी नियोजन और सार्वजनिक परिवहन में एकीकृत करेंगे।”

सुदिव्य कुमार, नगर विकास मंत्री, झारखंड

​आगामी योजना: झारखंड में क्या बदलेगा?

​इस अंतरराष्ट्रीय दौरे से प्राप्त सीख के आधार पर झारखंड के शहरों में निम्नलिखित बदलावों की उम्मीद है:

  • स्मार्ट डिपो प्रबंधन: बसों के परिचालन के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग।
  • स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन: ज़ीरो-एमिशन फ्लीट को बढ़ावा।
  • टिकाऊ शहर नियोजन: सार्वजनिक स्थलों का इस तरह विकास कि वे पर्यावरण के अनुकूल और सुरक्षित हों।

​यह दौरा झारखंड के शहरी विकास को सतत (Sustainable) और तकनीक-सक्षम (Tech-enabled) बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

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सीमावर्ती क्षेत्रों से माओवाद के खात्मे के लिए ‘मेगा ब्लूप्रिंट’ तैयार; सारंडा और पोड़ाहाट में चलेगा निर्णायक अभियान

राउरकेला | 22 जनवरी, 2026

​ओडिशा और झारखंड के सीमावर्ती इलाकों को माओवाद से पूरी तरह मुक्त करने के लिए सुरक्षा बलों ने अपनी कमर कस ली है। राउरकेला स्थित पश्चिमांचल डीआईजी कार्यालय में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में माओवाद के खात्मे के लिए एक ठोस ब्लूप्रिंट तैयार किया गया। यह बैठक केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के आईजी अमितेंद्रनाथ सिन्हा की प्रत्यक्ष निगरानी में संपन्न हुई।

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​बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी

​इस रणनीतिक चर्चा में सुरक्षा एजेंसियों के कई बड़े चेहरे शामिल हुए, जिनमें शामिल हैं:

  • दीपक कुमार, आईजी (ऑपरेशन)
  • तृप्तिकांत हाथी, डीआईजी
  • राजेश सुवर्णो, एडीजी (केंद्रीय गुप्तचर विभाग)
  • हरपाल सिंह, डीआईजी (भुवनेश्वर रेंज)
  • बृजेश कुमार राय, डीआईजी (पश्चिमी क्षेत्र)
  • नितेश वाधवानी, एसपी (राउरकेला)
  • अमित रेणु, एसपी (चाईबासा)

​इसके अलावा, सीआरपीएफ के कमांडेंट और राज्य खुफिया विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

​रणनीतिक ब्लूप्रिंट की मुख्य बातें

​करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक में कोल्हान और सारंडा क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों और माओवादी गतिविधियों पर विस्तृत चर्चा की गई।

  1. व्यापक सर्च ऑपरेशन: आने वाले कुछ दिनों में सुरक्षा बल इन दुर्गम क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अभियान शुरू करेंगे।
  2. ठिकानों का ध्वस्तीकरण: विशेष रूप से सारंडा और पोड़ाहाट जैसे संवेदनशील इलाकों में माओवादियों के छिपने के ठिकानों (Hideouts) को लक्षित कर उन्हें नष्ट किया जाएगा।
  3. इनामी माओवादी रडार पर: खुफिया जानकारी के अनुसार, इन घने जंगलों में 32 लाख रुपये से लेकर 1 करोड़ 20 लाख रुपये तक के इनामी माओवादी सक्रिय हैं। सुरक्षा एजेंसियां विशेष रणनीति के तहत इनकी पहचान सुनिश्चित कर रही हैं।

​”जल्द होगा माओवाद का अंत”

​चाईबासा के एसपी अमित रेणु ने विश्वास जताते हुए कहा कि इन इलाकों को बहुत जल्द माओवाद-मुक्त कर लिया जाएगा। राउरकेला पुलिस भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल होकर सीमावर्ती क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों को कड़ा जवाब देगी।

​बैठक में स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से बिसरा, के. बलांग, चांदीपोष और लाठीकटा के थाना प्रभारियों ने भी हिस्सा लिया और जमीनी स्तर पर सूचना तंत्र को मजबूत करने पर सहमति जताई।

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