पटना | बिहार की सियासत में बुधवार को एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। करीब दो दशकों से राज्य की सत्ता के धुरी रहे नीतीश कुमार के बाद, अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पहली बार बिहार में मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली है। पटना स्थित लोकभवन में आयोजित एक भव्य समारोह में सम्राट चौधरी ने बिहार के नए मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली।
शपथ ग्रहण और नई टीम
राज्यपाल अता हसनैन ने सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ मंत्रिमंडल के अहम चेहरों ने भी जिम्मेदारी संभाली:
- बिजेंद्र प्रसाद यादव: उपमुख्यमंत्री
- विजय कुमार चौधरी: उपमुख्यमंत्री
समारोह में निवर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गरिमामयी उपस्थिति रही। इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, शिवराज सिंह चौहान और संगठन महामंत्री बीएल संतोष सहित एनडीए के कई दिग्गज नेता इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
भाजपा के लिए ‘निर्णायक मोड़’
1980 में गठन के बाद से बिहार में संगठन को सींचने वाली भाजपा के लिए यह महज सरकार बदलना नहीं, बल्कि एक बड़ी राजनीतिक उपलब्धि है।
- सहयोगी से नेतृत्व तक: 1990 के दशक में लालू यादव के उभार और 2005 के बाद जदयू के साथ गठबंधन में रहने वाली भाजपा हमेशा ‘छोटे भाई’ या सहयोगी की भूमिका में रही।
- 46 साल का इंतजार खत्म: करीब साढ़े चार दशक के लंबे संघर्ष के बाद भाजपा ने बिहार में सत्ता का शीर्ष पद (मुख्यमंत्री) हासिल किया है।
सत्ता का नया समीकरण और चुनौतियां
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बदलाव के साथ बिहार में सत्ता का संतुलन पूरी तरह बदल गया है। हालांकि, गठबंधन की राजनीति का दौर अब भी जारी है और भाजपा के सामने अब दोहरी चुनौती होगी:
- गठबंधन का संतुलन: सहयोगी दलों को साथ लेकर सरकार चलाना।
- जन अपेक्षाएं: नेतृत्वकर्ता की भूमिका में खुद को साबित करना और विकास की नई इबारत लिखना।
यह सत्ता परिवर्तन बिहार की सियासत में एक नए दौर की शुरुआत है, जहां अब भाजपा की नीतियों और सम्राट चौधरी के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा होगी।
रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क










