एक नई सोच, एक नई धारा

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झारखंड में टला बड़ा रेल हादसा! टूटे पुल से गुजरने वाली थी ट्रेन; कैसे हुआ बचाव

झारखंड में बड़ा ट्रेन हादसा होने से बच गया। लोहरदगा-रांची मेमु ट्रेन रविवार दुर्घटनाग्रस्त होते-होते रह गई। समय रहते रेलवे प्रशासन को कोयल नदी पर बने रेलवे पुल के पांच नंबर पिलर के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी समय रहते मिल गई, इसलिए रांची से आने वाले मेमू ट्रेन को पूल से पहले ही रोक कर पैसेंजर खाली करा दिया गया।

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सभी रेलवे यात्री पांव पैदल रेलवे पु ल पार कर स्टेशन पहुंचे। इस दौरान मामले की जानकारी मिलने के बाद रेलवे अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं और मामले की जांच की जा रही है।

मिली जानकारी के अनुसार, दिनों की अपेक्षा आज ट्रेन में काफी भीड़ थी। रांची से चंदवा टोरी जा रही मेमो ट्रेन 68027 लगभग 9 बजे रांची से चली थी। बताया जाता है कि लोहरदगा पहुंचने से कुछ मिनटों पहले ही रेलवे कर्मी को पूल क्षतिग्रस्त होने की सूचना मिली । रेलवे कर्मी तत्परता दिखाते हुए जैसे ही मेमू ट्रेन रेलवे पुल के पास पहुंची उसे रोक दिया गया। पूल क्षतिग्रस्त होते ही पैसेंजरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया, पैसेंजर रेलवे ट्रैक से पुल पार होकर स्टेशन पहुंचे। वहीं जानकारी के बाद रेलवे के आला अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं।

इस मामले की जानकारी मिलने के बाद इस रूट पर रेलवे सेवा बंद कर दी गई है। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी टीम के अप्रूवल के बाद ही रेलवे सेवा की जाएगी बहाल। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है

क्यों क्षतिग्रस्त हुआ पिलर

मिली जानकारी के अनुसार, कोयल-शंख नदी में लगातार अवैध खनन चल रहा है। इस दौरान अवैध खनन की वजह से कोयल-शंख नदी पर बने पुल के पिलर नंबर 6 को क्षति पहुंची है, जिससे पिलर अब ट्रेन का भार सहने लायक नहीं रह गया है। इसकी वजह कोयल-शंख नदी में लगातार चल रहे अवैध खनन को बताया जा रहा है।

घटना की सूचना मिलने के बाद रेलवे की तकनीकी टीम मौके पर जां के लिए पहुंच गई है।रांची रेलमंडल की सीनियर डीसीएम शुचि सिंह ने बताया की पुल वाली सूचना सही है। हल्की दरार है। फिर भी सुरक्षा कारणों से इस लाइन में ट्रेन का आवागमन रोक दिया है। लोहरदगा मेमू पैसेंजर को नागजुवा स्टेशन से चलाया जा रहा है। वहीं राजधानी एक्सप्रेस भी परिवर्तित मार्ग से चलेगी।

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पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता का शिलापट्ट टूटा, कांग्रेस ने अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ केस दर्ज कराया

जमशेदपुर के मानगो में पोस्ट ऑफिस रोड–नजरिया स्कूल–गुरुद्वारा रोड वाली सड़क पर लगे पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के शिलापट्ट को अज्ञात लोगों ने तोड़ दिया। कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह गुड्डु के नेतृत्व में मानगो थाना पहुंचे और अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ केस दर्ज करवाया। सरकारी संपत्ति तोड़ने की इस घटना पर कड़ी कार्रवाई की मांग की जा रही है।

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जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता से जुड़ा शिलापट्ट तोड़े जाने का मामला गरम हो गया है। पोस्ट ऑफिस रोड से नजरिया स्कूल होते हुए गुरुद्वारा रोड को जोड़ने वाली सड़क पर लगा यह शिलापट्ट अज्ञात असामाजिक तत्वों ने तोड़ दिया।

स्थानीय कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, इस सड़क का निर्माण बन्ना गुप्ता के मंत्री रहते हुए कराया गया था और सड़क का उद्घाटन भी उनके हाथों से हुआ था। इसी काम का शिलापट्ट नजरिया स्कूल की दीवार पर लगाया गया था, जिसमें योजना का नाम और पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता का नाम दर्ज था।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अज्ञात लोगों ने जानबूझकर इस शिलापट्ट को क्षतिग्रस्त किया है, जो सरकारी संपत्ति के साथ तोड़फोड़ की घटना है। इसको लेकर पार्टी कार्यकर्ता मानगो नगर निगम अध्यक्ष और कांग्रेस नेता ओमप्रकाश सिंह गुड्डु के नेतृत्व में मानगो थाना पहुंचे।

थाने पहुंचकर कांग्रेस नेताओं ने अज्ञात असामाजिक तत्वों के खिलाफ लिखित शिकायत दी और दोषियों को चिन्हित कर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की। कार्यकर्ताओं ने कहा कि चाहे जो भी वजह हो, किसी को भी सरकारी शिलापट्ट या सार्वजनिक संपत्ति तोड़ने का अधिकार नहीं है।

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शिकायत दर्ज कराने वालों में प्रमुख रूप से बलजीत सिंह, बलदेव सिंह, बंटी गिरी, कल्लू सिंह, अनिल सिंह, नौसाद, जयदेव शर्मा, जोगिंदर, शिशु गोप, गोपाल यादव, बमबम पांडेय, मानगो मंडल अध्यक्ष राकेश दास, सरफराज़ खान, सन्नी औरंग समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल रहे।

कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर पुलिस जल्द दोषियों को नहीं पकड़ती, तो वे आंदोलन की रूपरेखा भी बना सकते हैं।

मानगो में पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के नाम वाले शिलापट्ट को तोड़ने की घटना ने स्थानीय राजनीति को गर्मा दिया है। कांग्रेस इसे सरकारी संपत्ति के अपमान और राजनीतिक साजिश के रूप में देख रही है, जबकि मामले की असल तस्वीर पुलिस जांच के बाद ही साफ होगी।

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भारत टैक्सी ऐप ने ओला-उबर को दी सीधी चुनौती, सस्ता सफर और ड्राइवरों की बढ़ी कमाई

नये साल की शुरुआत आम यात्रियों के लिए राहत लेकर आई है. 1 जनवरी से देश में सरकारी समर्थन प्राप्त नई कैब सर्विस भारत टैक्सी शुरू हो गई है. यह प्लैटफॉर्म ओला और उबर जैसी निजी कंपनियों की सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा दिलाने का दावा कर रहा है.फिक्स्ड किराया, जीरो कमीशन और बेहतर सुरक्षा फीचर्स के साथ यह ऐप तेजी से चर्चा में है. जानते हैं क्या है इसमें खास-

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फिक्स्ड किराया, सर्ज प्राइसिंग से छुटकारा
भारत टैक्सी की सबसे बड़ी खासियत इसका फिक्स्ड फेयर सिस्टम है. जाम, बारिश, ट्रैफिक या पीक टाइम में किराया नहीं बढ़ेगा. जितनी दूरी तय करेंगे, उतना ही किराया देना होगा. यही वजह है कि इसे आम लोगों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है.

कितना होगा किराया?
भारत टैक्सी में कार, ऑटो और बाइक तीनों विकल्प मौजूद हैं. शुरुआती 4 किलोमीटर का किराया सिर्फ ₹30 तय किया गया है. इसके बाद 12 किलोमीटर तक हर किलोमीटर ₹23 और उससे आगे प्रति किलोमीटर ₹18 देना होगा. उदाहरण के तौर पर, 12 किलोमीटर की राइड का किराया ₹214 और 15 किलोमीटर की राइड का किराया ₹228 होगा, जो मौजूदा कैब सर्विस से काफी सस्ता है.

किन शहरों में मिल रही सुविधा
फिलहाल भारत टैक्सी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, पुणे, हैदराबाद, नोएडा और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों में उपलब्ध है. शुरुआती चरण में ही इस ऐप पर 1.4 लाख से ज्यादा ड्राइवर जुड़ चुके हैं और दिल्ली में पायलट प्रोजेक्ट के दौरान रोजाना औसतन 5,500 राइड्स हो रही हैं.

ड्राइवरों के लिए बड़ा फायदा
भारत टैक्सी जीरो कमीशन मॉडल पर काम करता है. यानी यात्रियों से लिया गया पूरा किराया सीधे ड्राइवर की जेब में जाएगा. इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी और वे अपने काम के मालिक खुद होंगे. यही वजह है कि बड़ी संख्या में ड्राइवर इस प्लैटफॉर्म से जुड़ रहे हैं.

सुरक्षा और अतिरिक्त फीचर्स
भारत टैक्सी ऐप को दिल्ली पुलिस और सरकारी सुरक्षा मानकों से जोड़ा गया है. सभी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य है.ऐप में इमरजेंसी बटन, लाइव लोकेशन शेयरिंग और ट्रिप हिस्ट्री जैसे फीचर्स मौजूद हैं. महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए इसे सबसे सुरक्षित विकल्प बताया जा रहा है. साथ ही, इस ऐप से मेट्रो टिकट भी बुक किये जा सकते हैं, जिससे पूरी यात्रा एक ही प्लैटफॉर्म पर प्लान हो सकती है.

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टाटा पावर में महिला कर्मी की छंटनी पर बवाल, यूनियन ने दी आंदोलन की चेतावनी

टाटा पावर की ठेका कंपनी मेसर्स बेसरा इंटरप्राइजेज की एक महिला कर्मचारी को काम से हटाए जाने का मामला तूल पकड़ लिया है.

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टाटा पावर की ठेका कंपनी मेसर्स बेसरा इंटरप्राइजेज की एक महिला कर्मचारी को काम से हटाये जाने का मामला तूल पकड़ लिया है. पिछले 15 वर्षों से हाउसकीपिंग का काम कर रही महिला कर्मी मिथिला पात्रो को एक जनवरी से बिना किसी पूर्व सूचना के काम से बैठा दिया गया है. इसके खिलाफ शनिवार को टाटा पावर मजदूर यूनियन ने साकची आम बागान स्थित कार्यालय में प्रेस वार्ता कर विरोध जताया और मामले की शिकायत उप-श्रमायुक्त से की है.

स्थानीय के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं : अंबुज ठाकुर
यूनियन के उपाध्यक्ष अंबुज ठाकुर ने प्रेस वार्ता में कहा कि कंपनी में ठेकेदार बदलने के बाद से ही पुराने कर्मचारियों की छंटनी की जा रही है. जिससे मजदूरों में भय और असंतोष व्याप्त है. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छंटनी तुरंत नहीं रोकी गयी तो यूनियन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा. महिला कर्मी मिथिला पात्रो स्थानीय हैं. स्थानीय मजदूरों के साथ अन्याय किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

अधिकारियों पर मिलीभगत का आरोप
पीड़ित महिला मिथिला पात्रो ने आरोप लगाते हुए कहा कि नये ठेकेदार मेसर्स बेसरा इंटरप्राइजेज ने उनका गेटपास बनाने से मना कर दिया है. महिला का दावा है कि उसे बताया गया कि टाटा पावर के अधिकारी सुभोजित घोष ने पुराने कर्मचारियों को धीरे-धीरे कम करने का निर्देश दिया है. मिथिला पात्रो ने कहा कि मेरे घर में कोई दूसरा कमाने वाला नहीं है. अचानक काम से हटाये जाने से भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है. महिला कर्मी ने कहा कि या तो मुझे काम पर वापस लिया जाये या फिर छंटनी का मुआवजा और ग्रेच्युटी का भुगतान कराया जाये.

पूर्व विधायक ने झाड़ा पल्ला
ठेका कंपनी पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा के पुत्र सौरभ बेसरा का बताया जा रहा है. इस संबंध में सूर्य सिंह बेसरा से संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि वे इस पर कुछ बोल पाने की स्थिति में नहीं हैं. मेसर्स बेसरा इंटरप्राइजेज उनके पुत्र सौरभ बेसरा का है.

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अनियंत्रित स्कॉर्पियो पेड़ से टकरायी, तीन लोग घायल

देवघर-सुल्तानगंज मुख्य पथ पर जसीडीह थाना क्षेत्र के नैयाडीह मोड़ के समीप शुक्रवार की देर रात एक स्कार्पियो अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गयी. इस घटना में स्कॉर्पियो (जेएच 15 एके 9364) में सवार बिहार के बांका जिला अंतर्गत कटोरिया निवासी संतोष यादव, प्रमोद यादव, सुजीत यादव घायल हो गये. जिन्हें पुलिस ने इलाज के लिए सदर अस्पताल देवघर में भर्ती कराया. इनके प्राथमिक उपचार के बाद संतोष यादव को बेहतर इलाज के लिए देवघर एम्स रेफर कर दिया गया. घायल के परिजन ने बताया कि शुक्रवार की रात को सभी लोग स्कॉर्पियो से कटोरिया से देवघर आ रहे थे. इसी क्रम में उक्त स्थान पर स्कॉर्पियो चालक अनियंत्रित हो गया और गाड़ी पेड़ से टकरा गयी. घटना के बाद चालक वाहन छोड़ कर भाग गया. इसके बाद स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी थाना को दी. सूचना मिलते ही थाना से एएसआइ उमेश पांडे जवानों के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और जांच की. इसके बाद तीनों को उठा कर अस्पताल ले गये. वहीं घटना में स्कॉर्पियो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयी है. पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है.

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नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में लगेगी फरार अपराधियों की फोटो

चलती ट्रेन में होने वाले अपराध को रोकने के लिए आरपीएफ (रेल सुरक्षा बल) क्राइम मैपिंग सिस्टम का इस्तेमाल करेगी। क्राइम मैपिंग सिस्टम से आरपीएफ को ऐसे अपराधियों को पकड़ने में सहूलियत होगी, जो स्टेशन और ट्रेनों में अपराध करने के बाद से फरार चल रहे हैं।

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अपराधियों की फोटो, केस का रिकॉर्ड, उंगलियों के निशान व अन्य जानकारी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के पोर्टल पर अपडेट किया जाएगा। इससे फरार अपराधी के वेश भूषा बदलने पर भी स्क्रैच के माध्यम से पहचान करने, उसके ठिकाने का पता लगाने और पकड़ने में आरपीएफ को सहूलियत होगी। रेलवे बोर्ड से आरपीएफ महानिदेशक ने दक्षिण पूर्व जोन के आरपीएफ अफसरों को क्राइम मैपिंग सिस्टम में काम करने की ट्रेनिंग देने का आदेश दिया है।

इससे खड़गपुर में इंस्पेक्टरों को ट्रेनिंग दी गई है, जबकि सब इंस्पेक्टर को नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) पोर्टल संचालन की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि जांच अधिकारी अपराधियों को तकनीक के माध्यम से पकड़कर अन्य मामलों में उसकी संलिप्तता का पता लगा सकें। वहीं, एनसीआरबी से अपराधी की प्रवृत्ति या उसके अन्य कांडों को जानने-समझने में जांच अधिकारियों को सहायता मिलेगी। दूसरी ओर, दक्षिण पूर्व रेलवे जोन के बड़े स्टेशनों पर फेस डिटेक्टर कैमरा लगाने की योजना है। इससे भी क्राइम मैपिंग सिस्टम पर अपलोड जानकारी से अपराधियों की पहचान करने में सुरक्षा जवानों व जांच अधिकारियों को सहूलियत होगी।

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एनआईटी जमशेदपुर में 13 प्रोफेसर समेत 21 शिक्षकों की होगी बहाली

जमशेदपुर में शिक्षकों की कमी जल्द पूरी हो जाएगी। इसके लिए 21 शिक्षकों की बहाली की जाएगी। इनमें 13 प्रोफेसर भी शामिल हैं। स्थायी और संविदा पर होने वाली नियुक्ति के लिए संस्थान की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है।

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इस बार कुल 21 शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग विभागों में होगी। संस्थान की अधिसूचना के मुताबिक,कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में 6 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, वहीं, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग में 3 शिक्षक नियुक्त होने हैं। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में 3 शिक्षकों की बहाली होगी , जबकि मेटलर्जी एंड मेटेरियल्स इंजीनियरिंग में 2, मैथमेटिक्स में दो शिक्षक बहाल होंगे।

डिजाइन एंड इनोवेशन सेंटर के लिए 2, सेंट्रल फॉर इंडियन नॉलेज सिस्टम के लिए 2 और फिजिक्स के लिए एक शिक्षक की नियुक्ति की जाएगी। इन शिक्षकों को मानदेय के रूप में 70 हजार रुपये प्रति माह दिए जाएंगे। वहीं, स्थायी नियुक्ति के लिए भी एनआईटी जमशेदपुर ने रिक्तियां निकाली हैं। 13 प्रोफेसर पद पर होने वाली इस नियुक्ति के लिए 19 जनवरी तक आवेदन किया जा सकता है। इसमें एससी के लिए एससी के लिए 4, एसटी के 2, ओबीसी के लिए 2, ईडब्ल्यूएस में 1 व अनारक्षित 4 पदों पर नियुक्त की जानी है।

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निजी स्कूलों ने दी बीपीएल बच्चों के नामांकन पर रोक की चेतावनी

बीपीएल बच्चों को नि:शुल्क पढ़ाने के मामले में जमशेदपुर के निजी अंग्रेजी स्कूल एवं राज्य सरकार के बीच टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है। दोनों पक्ष इस मामले में आमने-सामने आ गए हैं।

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शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस (एजेयूपीईआई) ने घोषणा कर दी कि अब आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि संगठन अब विचार कर रहा है कि निजी स्कूलों में या तो आगे बीपीएल छात्रों का नामांकन न लिया जाए अथवा मामले को न्यायालय में ले जाकर समाधान प्राप्त किया जाए। शुक्रवार को इसको लेकर बिष्टूपुर स्थित नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में एसोसिएशन की बैठक हुई।

इसमें एजेयूपीईआई के अध्यक्ष नकुल कमानी, उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, मानद सचिव डॉ. श्रीकांत नायर, मानद कोषाध्यक्ष आरके झुनझुनवाला, बी. चंद्रशेखर, टीना बोधनवाला, राजीव तलवार, दिवाकर सिंह, केपीजी नायर एवं शरद चंद्रन नायर शामिल हुए। बैठक के बाद संवाददाताओं को एसोसिएशन के सदस्यों ने बीपीएल बच्चों की फीस के रीइंबर्शमेंट यानी प्रतिपूर्ति को लेकर 17 नवंबर 2025 को शिक्षा विभाग से जारी पत्र के बारे में जानकारी दी और इसपर चिंता जाहिर की। ज्ञान तनेजा व श्रीकांत नायर ने बताया कि इस पत्र में राज्य सरकार द्वारा बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) छात्रों के लिए निर्धारित शुल्क की प्रतिपूर्ति देने से स्कूलों को इनकार करने की जानकारी दी गई है। इसका कारण यह बताया गया कि संबंधित विद्यालय टाटा स्टील से लीज पर प्राप्त सरकारी भूमि पर स्थित हैं, इसलिए उन्हें सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय की श्रेणी में रखा गया है और इस आधार पर आगे किसी प्रकार की प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं हैं। सरकार के इस आदेश की पुन : समीक्षा की मांग जमशेदपुर के स्कूलों में सरकार के इस आदेश से असंतोष है। उन्होंने सरकार के इस निर्णय की समीक्षा की मांग की है और इस बात पर जोर दे रहे हैं कि वंचित वर्ग के छात्रों को सहयोग दिया जाना आवश्यक है, जो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए ऐसी योजनाओं पर निर्भर है। संवाददाता को एसोसिएशन के सदस्यों ने बताया कि शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, जो 27 अगस्त 2009 को लागू हुआ, उसका उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना है। झारखंड सरकार ने 11 मई 2011 को प्रकाशित राजपत्र के माध्यम से आरटीई अधिनियम को लागू कर यह भी स्पष्ट किया कि 3 से 4 वर्ष की आयु के बच्चों को भी प्रवेश स्तर पर शामिल किया जाएगा। पहले हुआ भुगतान, 2020 से करोड़ों रुपये फंसे राज्य सरकार ने 2010 से निजी स्कूलों को बीपीएल छात्रों की फीस का रीइंबर्शमेंट (प्रतिपूर्ति) देना शुरू किया, जो प्रति छात्र ₹425 प्रति माह निर्धारित किया गया। इस प्रकार सरकार प्रति छात्र ₹425 प्रति माह की राशि देने लगी, लेकिन एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव के तहत राज्य सरकार ने 14 दिसंबर 2020 से बीपीएल छात्रों की फीस का भुगतान बंद कर दिया। इसका उल्लेख निदेशक राज्य शिक्षा विकास विभाग द्वारा जारी पत्र में किया गया है। पत्र में जिला शिक्षा अधीक्षक को यह निर्देश दिया गया कि जिन विद्यालयों को झारखंड सरकार से भूमि या किसी भी प्रकार का अन्य लाभ प्राप्त हुआ है, उन्हें बीपीएल छात्रों की ट्यूशन फीस का कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। इससे जमशेदपुर के स्कूलों को भुगतान नहीं किया गया। निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने का दिया हवाला बीपीएल बच्चों के एवज में प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं होने से निजी स्कूलों ने गंभीर वित्तीय संकट से जूझने की बात कही। कहा कि जमशेदपुर देश का एकमात्र ऐसा शहर है, जहां यह समस्या सामने आई है। निजी स्कूलों ने शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर कहा कि किसी भी स्कूल को सरकार से न तो जमीन मिली है और न ही किसी प्रकार की सहायता। कुछ विद्यालय टाटा स्टील से वार्षिक किराये पर ली गई भूमि पर संचालित हो रहे हैं।

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शहीदों के परिजनों को जल्द नौकरी दे सरकार : एनसीपी

मानगो एनसीपी कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय महासचिव डॉ पवन कुमार पांडेय ने कहा कि झारखंड के शहीदों के परिजनों को झारखंड सरकार जल्द नौकरी प्रदान करे.

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झारखंड में पेसा कानून को जमीन पर उतरने में 25 साल लग गये.

एनपीसी की बैठक की अध्यक्षता मानगो नगर निगम क्षेत्र प्रभारी तन्मय सरकार ने की. जबकि संचालन महानगर अध्यक्ष सौरव ओझा ने किया. बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष अनवर हुसैन, जिलाध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा, तेजपाल सिंह टोनी, कन्हैया अग्रवाल, विनोद सिंह, मनोज मलहान, आशुतोष कुमार सिंह समेत अन्य सदस्य उपस्थित थे.

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झारखंड में मौत के कागज पर सौदेबाजी, तत्काल प्रमाण पत्र के नाम पर वसूली

रिम्स में मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर अवैध वसूली हो रही है. प्रमाण पत्र के लिए दलाल लोगों से दो हजार रुपये तक की मांग कर रहे हैं. मामला तब सामने आया जब इस संबंध में शिकायत रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार तक पहुंची.

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गुरुवार को निदेशक ने प्रभारी अपर चिकित्सा अधीक्षक और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र काउंटर के कर्मचारियों को बुलाया.

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर जांच में आरोप सिद्ध हुआ तो चिन्हित कर्मचारियों को जेल भेजा जायेगा. निदेशक ने कहा कि मरीज की मौत के बाद प्रमाण पत्र के नाम पर पैसा लेना मानवता को शर्मसार करने वाला है. ऐसे लोग संस्थान की छवि खराब करते हैं, जिन पर सख्त कार्रवाई जरूरी है. मामला निदेशक तक पहुंचने के बाद काउंटर में तैनात कर्मचारियों में खौफ का माहौल है. उन्हें जेल जाने का भय सता रहा है.

हाल ही में महिला ने लगाया था आरोप

रामगढ़ निवासी गीता देवी ने 26 दिसंबर को मृत्यु प्रमाण पत्र के नाम पर पैसा लेने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि आवेदन देते समय ही काउंटर के कर्मचारियों ने 200 रुपये लिये. इसके बाद फोन पर कर्मचारी ने बताया कि दो हजार रुपये देने पर शीघ्र प्रमाण पत्र मिल जायेगा.

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