एक नई सोच, एक नई धारा

टाटानगर रेल खंड पर बड़ा हादसा टला: ओएचई तार में फंसा कपड़ा, घंटों खड़ी रही बादामपहाड़ पैसेंजर

जमशेदपुर/परसुडीह: बादामपहाड़ से टाटानगर आ रही पैसेंजर ट्रेन मंगलवार को एक अनहोनी का शिकार होते-होते बची। परसुडीह थाना क्षेत्र के मखदुमपुर फाटक के समीप ट्रेन के ओवरहेड इक्विपमेंट (OHE) तार में लाल रंग का एक बड़ा कपड़ा फंस गया। लोको पायलट की सूझबूझ और सतर्कता के कारण एक संभावित गंभीर दुर्घटना को समय रहते टाल दिया गया।

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लोको पायलट की सतर्कता ने बचाया ‘पैंटो’

​झारखंड नगर के समीप जब ट्रेन गुजर रही थी, तभी लोको पायलट की नजर बिजली के तारों (OHE) में फंसे लाल कपड़े पर पड़ी।

  • तकनीकी खतरा: लोको पायलट के अनुसार, यदि ट्रेन को उसी गति में आगे ले जाया जाता, तो इंजन के ऊपर लगा पैंटोग्राफ (Panto) उस कपड़े में फंसकर टूट सकता था।
  • गंभीर परिणाम: पैंटो गिरने से न केवल पूरी ओएचई लाइन क्षतिग्रस्त हो जाती, बल्कि ट्रेन के ऊपर हाई-वोल्टेज शार्ट सर्किट होने का भी खतरा था। खतरे को भांपते हुए लोको पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाकर ट्रेन रोक दी और रेलवे कंट्रोल को सूचित किया।

यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें: पैदल ही निकले लोग

​ट्रेन के घंटों तक मखदुमपुर फाटक के पास खड़े रहने से यात्रियों का सब्र जवाब दे गया।

  • असुविधा: उमस और गर्मी के बीच ट्रेन में फंसे बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी हुई।
  • पैदल मार्च: टाटानगर स्टेशन नजदीक होने के कारण कई यात्री ट्रेन से उतरकर पटरियों के सहारे पैदल ही अपने गंतव्य की ओर निकल पड़े। यात्रियों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर नाराजगी भी जाहिर की।

शरारत या लापरवाही?

​स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और रेलवे सूत्रों का मानना है कि यह किसी शरारती तत्व की करतूत हो सकती है। आशंका है कि किसी ने कपड़े को पत्थर में बांधकर बिजली के तारों की ओर फेंका होगा।

​”रेलवे की बिजली लाइनों के साथ इस तरह की छेड़छाड़ करना न केवल दंडनीय अपराध है, बल्कि यह सैकड़ों यात्रियों की जान जोखिम में डालने जैसा है।” — रेलवे सुरक्षा बल (RPF) सूत्र

रेलवे की कार्रवाई

​सूचना मिलते ही रेलवे की तकनीकी टीम (TRD विभाग) टावर वैगन के साथ मौके पर पहुंची। सीढ़ी की मदद से ओएचई तार में फंसे कपड़े को हटाया गया और पूरी लाइन की जांच की गई। तकनीकी क्लियरेंस मिलने के बाद ही ट्रेन को टाटानगर की ओर रवाना किया गया।

रेलवे की अपील: रेल प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे रेलवे ट्रैक के आसपास ऐसी गतिविधियों से बचें जिससे परिचालन प्रभावित हो।

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शोक समाचार: बिष्टुपुर राम मंदिर के महासचिव दुर्गा प्रसाद का निधन, शहर में शोक की लहर

जमशेदपुर: लौहनगरी के प्रतिष्ठित एवं प्राचीन बिष्टुपुर राम मंदिर के महासचिव दुर्गा प्रसाद (57 वर्ष) का मंगलवार सुबह निधन हो गया। वे पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ थे और टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में उनका इलाज चल रहा था। उनके निधन की खबर फैलते ही मंदिर समिति, श्रद्धालु और शहर के गणमान्य लोगों में शोक की लहर दौड़ गई है।

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अस्वस्थता और अस्पताल में उपचार

​पारिवारिक सूत्रों और उनके करीबी सहयोगी दीनू (कदमा निवासी) के अनुसार, दो दिन पूर्व दुर्गा प्रसाद जी से बातचीत हुई थी। उन्होंने बताया था कि उनका ब्लड प्रेशर (BP) अनियंत्रित होकर काफी बढ़ गया था, जिसके बाद उन्हें तुरंत टीएमएच में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों के अथक प्रयासों के बावजूद मंगलवार सुबह करीब 9 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।

मिलनसार और सेवाभावी व्यक्तित्व

​दुर्गा प्रसाद जी को उनके व्यवहार कुशल और मिलनसार स्वभाव के लिए जाना जाता था।

  • संगठनात्मक कुशलता: वे लगातार दो कार्यकाल से महासचिव पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
  • धार्मिक सक्रियता: राम मंदिर में होने वाले हर छोटे-बड़े आयोजन, विशेषकर रामनवमी और स्थापना दिवस कार्यक्रमों में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रहती थी। वे समाज सेवा के कार्यों में भी अग्रणी रहते थे।

समाज में शोक और श्रद्धांजलि

​उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कांग्रेस नेता एआर कैलाश ने कहा, “दुर्गा प्रसाद जी का निधन समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपना जीवन मंदिर और सामाजिक सेवा को समर्पित कर दिया था।” शहर के विभिन्न संगठनों और मंदिर समितियों ने भी उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है।

कल होगी अंतिम विदाई

​दुर्गा प्रसाद जी का अंतिम संस्कार बुधवार (14 जनवरी) को किया जाएगा।

  • अंतिम यात्रा: सुबह 10 बजे उनके बागबेड़ा गणेश नगर (रोड नंबर-3) स्थित आवास से निकलेगी।
  • अंतिम संस्कार स्थल: बिष्टुपुर स्थित पार्वती घाट पर उनका दाह संस्कार संपन्न होगा।
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झारखंड भाजपा में ‘आदित्य’ युग का उदय: आदित्य साहू ने प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए किया नामांकन, 14 जनवरी को होगी औपचारिक घोषणा

रांची: झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) में संगठन के शीर्ष पद को लेकर चल रहा इंतजार अब समाप्त होने वाला है। सोमवार को राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन के दौरान जिस तरह से राज्य के तमाम दिग्गजों का जमावड़ा लगा, उसने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के केंद्रीय और राज्य नेतृत्व ने सर्वसम्मति से उनके नाम पर सहमति जताई है।

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वरिष्ठ नेताओं का भारी समर्थन: एकजुटता का शक्ति प्रदर्शन

​नामांकन की प्रक्रिया महज एक औपचारिकता नहीं, बल्कि भाजपा की अंदरूनी एकजुटता का संदेश भी थी। इस अवसर पर पार्टी के कई दिग्गज चेहरे एक साथ नजर आए:

  • बाबूलाल मरांडी: नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री।
  • अर्जुन मुंडा: पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता।
  • अन्नपूर्णा देवी: केंद्रीय मंत्री।
  • बिद्युत बरण महतो: जमशेदपुर सांसद।

रणनीतिक चयन: ‘सिंगल नामांकन’ का संदेश

​भाजपा ने इस बार चुनावी राजनीति के बजाय सहमति आधारित चयन को प्राथमिकता दी है।

  • एक ही नाम पर मुहर: पार्टी सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष के लिए केवल आदित्य साहू का ही नामांकन कराया गया है। यह ‘सिंगल नामांकन’ की रणनीति आगामी चुनौतियों को देखते हुए संगठन में किसी भी तरह के अंतर्विरोध को समाप्त करने के लिए अपनाई गई है।
  • संगठनात्मक अनुभव: आदित्य साहू को संगठन के कार्यों का गहरा अनुभव है और वे कार्यकर्ताओं के बीच भी लोकप्रिय माने जाते हैं।

14 जनवरी का इंतजार

​नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब केवल औपचारिक घोषणा बाकी है।

  • घोषणा की तिथि: 14 जनवरी तक आधिकारिक रूप से उनके नाम की घोषणा कर दी जाएगी।
  • भविष्य की चुनौतियां: आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को देखते हुए आदित्य साहू के कंधों पर संगठन को धार देने और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।
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जमशेदपुर: 18 जनवरी को सजेगा तैलिक साहू महासभा का ‘पारिवारिक मिलन’ समारोह; विधायक पूर्णिमा साहू को मिला निमंत्रण

जमशेदपुर: अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा, पूर्वी सिंहभूम द्वारा आगामी 18 जनवरी (रविवार) को सिदगोड़ा स्थित सोन मंडप में भव्य ‘पारिवारिक मिलन समारोह एवं वन भोज’ का आयोजन किया जा रहा है। इस गौरवशाली आयोजन की तैयारियों के क्रम में संस्था के एक प्रतिनिधिमंडल ने जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू से मुलाकात कर उन्हें कार्यक्रम का औपचारिक निमंत्रण सौंपा और उनका अभिवादन किया।

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समाज की मजबूती पर होगा मंथन

​जिला अध्यक्ष राकेश साहू ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए कहा कि इस मिलन समारोह का मुख्य उद्देश्य पूर्वी सिंहभूम जिले के समस्त तेली समाज के परिवारों को एक मंच पर लाना है। इस दौरान समाज की उन्नति, शैक्षणिक विकास और आपसी मजबूती पर विशेष विचार-विमर्श किया जाएगा।

दिग्गज राजनेताओं के जुटने की संभावना

​18 जनवरी को होने वाले इस कार्यक्रम में झारखंड की राजनीति और समाज के कई बड़े चेहरों के शामिल होने की उम्मीद है:

  • रघुवर दास: ओडिशा के महामहिम राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री।
  • ढुल्लू महतो: धनबाद सांसद।
  • अरुण साहू: तेली समाज के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष।
  • अंबा प्रसाद: बड़कागांव की पूर्व विधायक।

​इसके अलावा, प्रदेश के विभिन्न जिलों से साहू महासभा के जिला अध्यक्षों को भी इस समारोह में शामिल होने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद

​विधायक पूर्णिमा साहू को निमंत्रण देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से जिला महामंत्री पप्पू साहू, जिला सचिव अशोक साहू, और क्षेत्रीय अध्यक्ष उमेश साहू समेत समाज के कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

महत्वपूर्ण जानकारी:

  • दिनांक: 18 जनवरी, रविवार
  • स्थान: सोन मंडप, सिदगोड़ा, जमशेदपुर
  • मुख्य आकर्षण: पारिवारिक मिलन, सामूहिक वन भोज और सांगठनिक चर्चा।
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धुर्वा अपहरण मामला: 12 दिन बाद भी मासूमों का सुराग नहीं; अब देश भर के ‘बचपन बचाओ’ और ‘झालसा’ वॉलंटियर्स तलाशेंगे अंश-अंशिका

रांची: राजधानी के धुर्वा इलाके से गायब हुए दो बच्चों, अंश और अंशिका की तलाश में अब देश की सबसे बड़ी जांच और सामाजिक एजेंसियां एक साथ आ गई हैं। 12 दिनों की लंबी तलाश के बावजूद हाथ खाली रहने पर रांची पुलिस ने अपनी रणनीति बदलते हुए इनाम की राशि को बढ़ा दिया है और अब राष्ट्रीय स्तर के संगठनों की मदद ली जा रही है।

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जांच का बढ़ता दायरा: 40 सदस्यों की SIT और CID अलर्ट

​रांची एसएसपी राकेश रंजन के निर्देश पर गठित 40 सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) न केवल झारखंड, बल्कि पड़ोसी राज्यों बिहार और पश्चिम बंगाल के संदिग्ध ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है।

  • बचपन बचाओ आंदोलन: पुलिस अब कैलाश सत्यार्थी के संगठन ‘बचपन बचाओ आंदोलन’ की मदद ले रही है। इस संगठन के सदस्य देश के 439 जिलों में सक्रिय हैं, जो संदिग्ध मानव तस्करी के पहलुओं की जांच करेंगे।
  • झालसा (JHALSA) की एंट्री: झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के लीगल वॉलंटियर्स को भी पूरे देश में अलर्ट कर दिया गया है।

इनाम की राशि में भारी इजाफा: अब 4 लाख की घोषणा

​रांची पुलिस ने आम जनता से सहयोग लेने के लिए इनाम की राशि को कई गुना बढ़ा दिया है।

  • नया इनाम: पहले यह राशि मात्र 51 हजार रुपये थी, जिसे अब बढ़ाकर 4 लाख रुपये (2 लाख अंश के लिए और 2 लाख अंशिका के लिए) कर दिया गया है।
  • गोपनीयता का वादा: एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति का नाम और पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।

सियासी हलचल: पीड़ित परिवार से मिले सुदेश महतो

​मंगलवार को आजसू (AJSU) सुप्रीमो सुदेश महतो और अजय नाथ शाहदेव पीड़ित परिवार के घर पहुंचे। उन्होंने परिजनों को ढांढस बंधाया और प्रशासन से अपील की कि वे अपनी तकनीक और मुखबिर तंत्र को और तेज करें। सुदेश महतो ने कहा, “यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता है। हम हर संभव मदद के लिए तैयार हैं।”

प्रमुख एजेंसियां जो तलाश में जुटी हैं:

एजेंसी/संगठन भूमिकारांची पुलिस SIT छापेमारी और तकनीकी साक्ष्यों की जांचCID झारखंड अंतरराज्यीय समन्वय और आपराधिक रिकॉर्ड की जांचबचपन बचाओ आंदोलन देशभर के 439 जिलों में नेटवर्क सक्रिय करनाझालसा (JHALSA) कानूनी स्वयंसेवकों के माध्यम से पहचान और जागरूकता

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गिग वर्कर्स की जीत: ब्लिंकिट समेत सभी प्लेटफॉर्म्स से हटेगा ’10 मिनट डिलीवरी’ का दावा, सरकार ने सुरक्षा को बताया सर्वोपरि

नई दिल्ली: देश के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स (गिग वर्कर्स) की लंबी लड़ाई आज रंग लाई। केंद्र सरकार के कड़े हस्तक्षेप के बाद, क्विक कॉमर्स दिग्गज Blinkit समेत Zepto, Swiggy और Zomato ने अपने विज्ञापनों और ऐप से ’10 मिनट में डिलीवरी’ का विवादास्पद दावा हटाने का फैसला किया है। केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

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सरकार का सख्त संदेश: “जान पहले, रफ्तार बाद में”

​श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी व्यावसायिक लाभ के लिए कामगारों की जान जोखिम में नहीं डाली जा सकती।

  • सुरक्षा प्राथमिकता: केंद्रीय मंत्री ने कंपनियों को दोटूक कहा कि 10 मिनट का दबाव डिलीवरी बॉयज को यातायात नियमों के उल्लंघन और सड़क हादसों की ओर धकेलता है।
  • विज्ञापनों पर रोक: कंपनियों ने आश्वासन दिया है कि वे अपने ब्रांडिंग, विज्ञापनों और सोशल मीडिया पोस्ट से समय सीमा (Time Limit) के दावों को तुरंत हटा लेंगे।

हड़ताल से शुरू हुआ था बदलाव का सफर

​इस फैसले के पीछे 31 दिसंबर की रात हुई गिग वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल की बड़ी भूमिका रही।

  • मजदूरों की मांग: डिलीवरी बॉयज ने मांग की थी कि तेज डिलीवरी के चक्कर में उन्हें ‘सुपरह्यूमन’ न समझा जाए और उनकी सुरक्षा के लिए विधिक ढांचा तैयार हो।
  • जोखिम की रिपोर्ट: आंकड़ों के अनुसार, कम समय में डिलीवरी के दबाव के कारण क्विक कॉमर्स सेक्टर में काम करने वाले युवाओं के सड़क हादसों में 25% की वृद्धि देखी गई थी।

कंपनियों का नया रुख

​अब कंपनियां ‘स्पीड’ के बजाय ‘विश्वसनीयता’ और ‘गुणवत्ता’ पर ध्यान केंद्रित करेंगी। जेप्टो, स्विगी और जोमैटो के अधिकारियों ने सहमति जताई है कि वे अपने एल्गोरिदम में बदलाव करेंगे ताकि डिलीवरी पार्टनर्स पर समय का अनुचित मानसिक और शारीरिक दबाव न रहे।

​”यह केवल गिग वर्कर्स की जीत नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि भारत के श्रम कानूनों में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ मानवीय मूल्यों का भी स्थान है।” — मनसुख मांडविया, केंद्रीय श्रम मंत्री

विशेषज्ञों की राय

​बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से भले ही ग्राहकों को सामान मिलने में कुछ मिनटों की देरी हो, लेकिन यह सड़कों को सुरक्षित बनाने और श्रम अधिकारों के संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

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सीनी: 40 दिनों से लापता कोमल मुखी का सुराग नहीं, मां ने जताई अनहोनी की आशंका; SP से लगाई गुहार

सरायकेला/सीनी: सीनी हरिजन बस्ती की रहने वाली कोमल मुखी पिछले 2 दिसंबर 2025 से लापता है, लेकिन सवा महीने बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। बेटी की तलाश में दर-दर भटक रही मां रानी मुखी अब अपनी पुत्री के साथ किसी अनहोनी की आशंका से थर्रा उठी हैं। उन्होंने सरायकेला-खरसावां आरक्षी अधीक्षक (SP) से न्याय और बेटी की सकुशल बरामदगी की गुहार लगाई है।

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शिवा मुखी एवं कोमल मुखी

क्या है पूरा मामला?

​परिजनों और दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, घटना 2 दिसंबर 2025 की है। आरोप है कि परसूडीह (झारखंड बस्ती) निवासी शिवा मुखी, पिता राजू मुखी, कोमल को शादी की नीयत से बहला-फुसलाकर भगा ले गया है।

कानूनी प्रक्रिया में देरी का आरोप:

  • 9 दिसंबर 2025: मां ने सीनी टीओपी (TOP) में पहला सनहा दर्ज कराया।
  • 4 जनवरी 2026: लगभग एक महीने बाद मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।
  • महिला थाना: सरायकेला महिला थाने में भी मामले की जानकारी दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है।

शादी का दावा बनाम मां की आशंका

​लापता युवती की मां रानी मुखी ने बताया कि आरोपी शिवा मुखी द्वारा सामाजिक स्तर पर यह प्रचारित किया जा रहा है कि उसने कोमल से शादी कर ली है। हालांकि, आरोपी के पास न तो कोई विवाह प्रमाण पत्र है और न ही उसने कोमल को उसकी मां या समाज के सामने पेश किया है।

मां के गंभीर सवाल:

  1. संपर्क पर पाबंदी: “अगर शादी हुई है, तो मुझे मेरी बेटी से मिलने क्यों नहीं दिया जा रहा?”
  2. सामाजिक बैठक से दूरी: आरोपी को सामाजिक बैठकों में बुलाया गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ, जिससे संदेह और गहरा गया है।
  3. अप्रिय घटना का डर: मां ने आशंका जताई है कि उनकी बेटी को बंधक बनाकर रखा गया है या उसके साथ कोई गंभीर घटना घटित हो सकती है।

प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग

​थानों के चक्कर लगाकर थक चुकी रानी मुखी ने अंततः जिला आरक्षी अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर गुहार लगाई है कि उनकी बेटी को बरामद किया जाए और आरोपी पर सख्त कार्रवाई की जाए। स्थानीय लोगों में भी पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश देखा जा रहा है।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: कुत्ते के काटने पर अब राज्य सरकारें देंगी मुआवजा, ‘कुत्ता प्रेमियों’ को भी लगाई फटकार

नई दिल्ली: देश के शहरी इलाकों, खासकर दिल्ली-एनसीआर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर सुप्रीम कोर्ट ने आज (13 जनवरी 2026) एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है कि आवारा कुत्तों के हमले में घायल होने या मौत होने की स्थिति में अब राज्य सरकारें पीड़ित परिवार को मुआवजा देने के लिए बाध्य होंगी।

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“कुत्तों को घर ले जाएं, सड़कों पर आतंक न फैलाएं”

​मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ की बेंच ने आवारा कुत्तों को खिलाने वाले (Feeders) और उनके प्रति अत्यधिक सहानुभूति रखने वालों पर कड़ी टिप्पणी की।

  • जवाबदेही तय: जस्टिस नाथ ने कहा, “जो लोग कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उन्हें जिम्मेदारी भी लेनी होगी। अगर आपको उनसे इतना ही प्रेम है, तो उन्हें अपने घर के अंदर रखें। उन्हें सड़कों पर भटकने के लिए क्यों छोड़ा जाता है, जहाँ वे बच्चों और बुजुर्गों को डराते और काटते हैं?”
  • भावुकता बनाम सुरक्षा: जब वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इसे एक भावुक मुद्दा बताया, तो कोर्ट ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह भावुकता केवल कुत्तों के लिए ही क्यों दिखाई देती है, उन मासूमों के लिए क्यों नहीं जो इनके हमलों का शिकार हो रहे हैं?

प्रमुख कानूनी निर्देश और पिछली सख्तियां

​सुप्रीम कोर्ट ने न केवल मुआवजे का प्रावधान किया है, बल्कि पिछले साल (7 नवंबर 2025) दिए गए अपने आदेशों की भी याद दिलाई।

कोर्ट के कड़े निर्देश:

  1. प्रतिबंधित क्षेत्र: अस्पताल, स्कूल, बस स्टैंड, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों को ‘कुत्ता मुक्त’ (Dog-Free) जोन घोषित किया गया है।
  2. राज्य की जिम्मेदारी: स्थानीय निकायों और राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों का प्रवेश वर्जित हो।
  3. मुआवजा नीति: अब प्रत्येक राज्य को एक नीति बनानी होगी जिसके तहत कुत्ते के हमले के शिकार लोगों को उनकी चोट की गंभीरता या मृत्यु के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।

देशभर में कुत्तों का आतंक: एक नजर

​हाल के महीनों में गाजियाबाद, नोएडा और दिल्ली की लिफ्ट और पार्कों में पालतू और आवारा कुत्तों द्वारा बच्चों को लहूलुहान करने की कई वीडियो वायरल हुई थीं। इन घटनाओं के बाद देशभर में ‘डॉग लवर्स’ और आम निवासियों के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी।

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पोटका: मकर मेलों में ‘हब्बा-डब्बा’ पर रोक लगाने की मांग, कांग्रेस ने थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन

पोटका (पूर्वी सिंहभूम): झारखंड के सांस्कृतिक पर्व मकर संक्रांति (टुसू) के अवसर पर पोटका प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित होने वाले मेलों में बड़े पैमाने पर होने वाले ‘हब्बा-डब्बा’ (जुआ) के खिलाफ कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी के सचिव जयराम हंसदा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पोटका थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर इन अवैध गतिविधियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।

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इन गांवों में जुए का सबसे अधिक खतरा

​ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उन क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है जहाँ मेलों की आड़ में जुआ सिंडिकेट सक्रिय रहता है:

  • ​तिलाई टांड़ और शोहदा
  • ​मानपुर और शर्मांडा
  • ​बांसिला और तूरी
  • ​बालीडीह, बालीजुड़ी और टंगरसाई

बर्बाद हो रहे हैं मध्यम वर्गीय और मजदूर परिवार

​जयराम हंसदा ने चिंता जताते हुए कहा कि पोटका एक ग्रामीण और मजदूर बहुल क्षेत्र है। यहाँ के लोग दिन भर कड़ी मेहनत कर पैसे कमाते हैं, लेकिन मकर पर्व के दौरान लगने वाले मेलों में ‘हब्बा-डब्बा’ के जाल में फंसकर अपनी जमापूंजी गंवा देते हैं।

​”जुआ न केवल आर्थिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि इससे परिवारों में कलह और अपराध को बढ़ावा मिलता है। मध्यम वर्गीय परिवारों को इस दलदल से बचाना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए।” — जयराम हंसदा, सचिव, जिला कांग्रेस

प्रशासनिक रुख और प्रतिनिधिमंडल

​थाना प्रभारी ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि प्रभावी प्रतिबंध के लिए प्रशासन को मेलों के दौरान विशेष पुलिस गश्त और सख्त निगरानी सुनिश्चित करनी होगी।

प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से शामिल थे:

  • ​सौरव चटर्जी
  • ​आनंद पाल
  • ​लालटू दास
  • ​लासा मुर्मू
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‘घोटाले में भी घोटाला’: बाबूलाल मरांडी का ACB पर बड़ा हमला, शराब घोटाले की जांच को बताया ‘वसूली का खेल’

रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता बाबूलाल मरांडी ने राज्य में कथित शराब घोटाले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। मरांडी ने सोशल मीडिया (X) पर सिलसिलेवार हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में जांच के नाम पर “घोटाले में भी घोटाला” चल रहा है और एसीबी अब एक स्वतंत्र एजेंसी के बजाय ‘वसूली एजेंट’ की तरह काम कर रही है।

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मरांडी के आरोपों के मुख्य बिंदु:

​बाबूलाल मरांडी ने एसीबी की कार्यशैली पर तीन गंभीर आरोप जड़े हैं:

  1. ‘रेट’ तय करने के लिए गिरफ्तारी: मरांडी का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी का मकसद न्याय दिलाना नहीं, बल्कि उनके मन में डर पैदा कर सौदेबाजी (डील) का ‘रेट’ तय करना है।
  2. चार्जशीट में जानबूझकर देरी: उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे ही पर्दे के पीछे से पैसे पहुंच जाते हैं, एसीबी जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं करती। इसका उद्देश्य ‘बड़ी मछलियों’ (प्रभावशाली आरोपियों) को अदालत से आसानी से डिफ़ॉल्ट जमानत (Bail) दिलाने का रास्ता साफ करना है।
  3. केंद्रीय एजेंसी की मांग: मरांडी ने साफ तौर पर कहा कि अब इस मामले की निष्पक्ष जांच केवल केंद्रीय एजेंसियां (ED/CBI) ही कर सकती हैं, क्योंकि राज्य की एजेंसियां सत्ता के दबाव में खेल कर रही हैं।
  4. भाजपा का रुख: भाजपा नेताओं का कहना है कि राज्य सरकार अपनी पसंदीदा एजेंसियों के माध्यम से भ्रष्टाचार की परतों को ढंकने की कोशिश कर रही है।
  5. सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे संवैधानिक संस्थाओं की छवि धूमिल करने की कोशिश बताया है।
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