एक नई सोच, एक नई धारा

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सीने पर बरसती रहीं गोलियां, फिर भी आतंकियों को मार गिराया, अब शौर्य चक्र से नवाजा गया जांबाज

मध्य प्रदेश के सतना जिले के शहीद कर्णवीर सिंह अपने अदम्य साहस के लिए ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित हुए‌। शहीद कर्णवीर के पिता रिटायर्ड मेजर रवि कुमार सिंह और मां मिथलेश कुमारी सिंह राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित हुए।

नक्सली मुठभेड़ में शहीद कर्णवीर को मरणोपरांत यह सम्मान मिला है।

शांति काल में असाधारण शौर्य का परिचय देते हुए मातृभूमि की रक्षा में प्राण गंवाने वाले कर्णवीर सिंह को मरणोपरांत यह सम्मान देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रदान किया।

विंध्य के सपूत के शौर्य और बलिदान को सम्मानित किए जाने के अवसर की जानकारी भारत के राष्ट्रपति के ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल के माध्यम से दी है। गौरतलब कि शहीद कर्णवीर सतना जिले की रामपुर बाघेलान तहसील के देवमऊ दलदल में उनका जन्म हुआ था। पूरा परिवार सतना शहर के वार्ड नंबर 22 उतैली में रहते हैं।

वर्ष 2017 में सूबेदार पद पर भर्ती हुए कर्णवीर भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट की 44वीं बटालियन राष्ट्रीय राइफल्स के जांबाज सदस्य थे। जम्मू कश्मीर के शोपियां में 20 अक्टूबर 2021 को आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में कर्णवीर शहीद हो गए थे। पूरी रात चली मुठभेड़ के दौरान कर्णवीर के सिर और सीने पर गोली खाई थी। उन्होंने दो आतंकी को ढ़ेर भी किया था। उनके गृह देवमऊ दलदल में स्थित सरकारी विद्यालय का नाम सीएम शिवराज सिंह चौहान की घोषणा अनुसार शहीद कर्णवीर के नाम से किया जा चुका है।

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गहलोत बनाम पायलट: पंजाब जैसा न हो जाए कांग्रेस का राजस्‍थान में हाल

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के विरुद्ध जिस तरह मोर्चा खोल दिया है, वह कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक बड़ी मुसीबत है, लेकिन इसके लिए वह स्वयं ही अधिक जिम्मेदार हैं। अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खटपट नई नहीं और न ही कांग्रेस नेतृत्व समेत अन्य कोई उससे अपरिचित है। दोनों नेताओं के बीच कलह से भली तरह परिचित होते हुए भी कांग्रेस नेतृत्व ने उसे दूर करने की कोशिश नहीं की। उसने समय-समय पर सचिन पायलट को कुछ आश्वासन अवश्य दिए, लेकिन उन्हें पूरा करने की दिशा में आगे नहीं बढ़ा। यदि उसे अपने आश्वासन पूरे ही नहीं करने थे तो फिर दिए ही क्यों?

यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि कांग्रेस नेतृत्व अशोक गहलोत के दबाव का सामना नहीं कर सका और उसने उनके आगे हथियार डाल दिए। यह तभी स्पष्ट हो गया था, जब अशोक गहलोत ने खुद को पार्टी अध्यक्ष बनाने की कांग्रेस नेतृत्व की पहल नाकाम कर दी थी। वह अपनी शर्तों पर कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाह रहे थे। जब नेतृत्व ने उनकी शर्तें मानने से इन्कार किया तो उनकी शह पर उनके समर्थक विधायकों ने बगावत कर दी। यह सीधे तौर पर कांग्रेस नेतृत्व ही नहीं, गांधी परिवार के खिलाफ खुला विद्रोह था, लेकिन कोई कुछ नहीं कर सका। अशोक गहलोत इस विद्रोह को हवा देने के बाद भी अपने पद पर बने रहे।

सचिन पायलट के तेवरों से यह साफ है कि उनका धैर्य जवाब दे गया है। उन्होंने पहले तो अपनी ही सरकार के भ्रष्टाचार के खिलाफ अनशन किया, फिर अशोक गहलोत के इस बयान के लिए उन्हें निशाने पर लिया कि उनकी सरकार बचाने में भाजपा नेता वसुंधरा राजे ने उनकी मदद की थी। सचिन पायलट ने यह कहकर अशोक गहलोत पर करारा हमला बोला कि लगता है उनकी नेता सोनिया गांधी नहीं, वसुंधरा राजे हैं। वह रुकने वाले नहीं, यह उनकी इस घोषणा से स्पष्ट होता है कि वह 11 मई से अपनी जन संघर्ष यात्रा निकालने जा रहे हैं।

सचिन पायलट पिछले महीने जब एक दिन के लिए अनशन पर बैठे थे, तब कांग्रेस नेतृत्व ने अपनी अप्रसन्नता व्यक्त की थी, क्योंकि यह अनशन गहलोत सरकार के खिलाफ था। कांग्रेस नेतृत्व सचिन पायलट पर कार्रवाई करने की स्थिति में भी नहीं और उनकी शिकायतों का समाधान करने में भी सक्षम नहीं दिख रहा है। यदि गहलोत और पायलट के बीच खींचतान और बढ़ती है, जो कि साफ दिख रही है तो कांग्रेस को चुनावों में वैसा ही नुकसान उठाना पड़ सकता है, जैसा उसे पंजाब में उठाना पड़ा था। पंजाब में कांग्रेस नेताओं के बीच खींचतान इसीलिए बढ़ी थी, क्योंकि पार्टी नेतृत्व गांधी परिवार के चापलूस नेताओं के साथ खड़ा हो गया था। नतीजा यह हुआ कि वहां कांग्रेस बिखर गई।

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आदित्यपुर : पिता से झगड़े के बाद युवती ने घर में फांसी लगाकर की आत्महत्या

आदित्यपुर : आदित्यपुर की सालडीह बस्ती में एक युवती ने पिता से झगड़े के बाद घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। युवती सरस्वती लोहार पिता से झगड़े के बाद अपने कमरे में चली गई और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। लोगों ने सोचा कि वह ऐसे ही जाकर लेट गई होगी। जब काफी देर तक वह नहीं निकली तो घर के लोगों ने दरवाजा पीटना शुरू किया। लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया। तो सभी अवाक रह गए। सरस्वती लोहार का शव पंखे से लटक रहा था। परिजन उसे फौरन उतारकर जमशेदपुर में एमजीएम अस्पताल लाए। जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सरस्वती लोहार के पिता ने बताया कि वह काम करने के लिए गुजरात गई थी। गुजरात से 21 अप्रैल को लौट कर आई है। सरस्वती लोहार का शव एमजीएम अस्पताल में शव गृह में रखवा दिया गया है। रविवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। घटना की सूचना पुलिस को दे दी गई है।

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झारखंड में प्रधानमंत्री के मन की बात के गवाह बने 10 लाख से अधिक लोग

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के सामाजिक ताने-बाने को मजबूती देने, समाज को एक सूत्र में पिरोने और चरैवेति-चरैवेति-चरैवेति के संकल्प के साथ रविवार को 100वीं बार देश से मन की बात की. झारखंड भाजपा ने प्रधानमंत्री के मन की बात के 100वें एपिसोड को ऐतिहासिक बनाया. मन की बात सुनने के लिए प्रदेश भाजपा ने राज्य के कुल 9000 स्थानों पर कैंप लगाया गया, जहां 10 लाख से अधिक लोगों ने पीएम के मन की बात का 100वां एपिसोड सुना. रांची में मन की बात कार्यक्रम को लेकर झारखंड भाजपा नेताओं में उत्साह देखा गया.

रांची में खिजरी विधानसभा क्षेत्र के महिलौंग जतराटांड़ बूथ संख्या 187 पर बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोगों के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने मन की बात कार्यक्रम को सुना. उनके साथ प्रदेश महामंत्री प्रदीप वर्मा, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, छोटानागपुर सरना समिति के अध्यक्ष बिरसा पाहन, सुजाता मिंज, सोहन मुंडा, अशोक मुंडा, रतनू कुजूर, शिबू मुंडा सहित बड़ी संख्या में जनजातीय लोगों ने पीएम मोदी की मन की बात के 100वें संस्करण को सुना. दो हजार से ज्यादा आदिवासी महिला और पुरुष पारंपरिक वेषभूषा में कार्यक्रम में शामिल हुए.

समाज में परिवर्तन ला रहा मन की बात : दीपक प्रकाश

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि यह दुनिया का अनूठा कार्यक्रम है. प्रधानमंत्री के मन की बात से समाज में बदलाव हो रहा है. बेटी पढ़ाओ-बेटी बचाओ, वोकल फॉर लोकल सहित कई ऐसे आह्वान पीएम ने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से किया है कि एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना पूरा हो रहा है. विपक्ष द्वारा मन की बात कार्यक्रम पर तंज कसने के सवाल पर दीपक प्रकाश ने कहा कि आज विपक्ष पीएम और उनकी मन की बात कार्यक्रम की लोकप्रियता से घबराया हुआ है.

मन की बात एक प्रेरणादायक उद्बोधन : प्रदीप वर्मा

प्रदेश भाजपा के महामंत्री प्रदीप वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री के मन की बात कार्यक्रम एक प्रेरणादायक उद्बोधन है. मन की बात कार्यक्रम जन आंदोलन का रूप ले लिया है. यही कारण है कि आज यहां बड़ी संख्या में जनजातीय समाज के लोग भी मन की बात सुनने आये हैं.

कौन नेता कहां रहे उपस्थित

नेता विधायक दल और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी : गिरिडीह तिसरी प्रखंड के मंसाडीह उच्च विद्यालय प्रांगण

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास : सूर्य मंदिर टाउन हॉल, सिदगोड़ा, जमशेदपुर

क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नागेंद्र : हिनू मंडल के बूथ संख्या 405 पर

प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह : धनबाद

केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा : अंडमान, निकोबार द्वीप

केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी : कोडरमा

इनके अलावा भाजपा के प्रदेश पदाधिकारी, जिला पदाधिकारी, सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में बूथों पर शामिल हुए.

सर्वजन हिन्दू समिति द्वारा आयोजित मशाल जुलूस में उमड़ा जन सैलाब, जनता ने दिया साथ
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सर्वजन हिन्दू समिति द्वारा विगत दिनों कदमा हिंसा मामले में भाजपा नेता अभय सिंह सहित कई हिन्दूवादी नेताओं को झूठे आरोप में गिरफ्तार किए जाने और बेबुनियाद धारा लगाए जाने के विरुद्ध आज मशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें भारी संख्या में लोगों ने अपना समर्थन देते हुए इस जुलूस को सफल बनाया और सरकार की तुष्टिकरण की राजनीति के अधीन प्रशासन द्वारा किए गए इस कुकृत्य का जमकर विरोध किया। मशाल जुलूस जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (JNAC) से संध्या 6:00 बजे निकलते हुए साकची गोलचक्कर तक गयी। इस दौरान हिन्दू नेताओं के समर्थन और प्रशासन एवं तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली सरकार के विरोध में लोगों ने नारा लगाते हुए अपनी आवाज़ भी बुलन्द की। जिसमें हिन्दू कार्यकर्ताओं के साथ साथ महिलाओं और युवाओं ने भी बढ़ चढ़ कर अपनी भागीदारी दी। इस दौरान जनता पूर्णरूप से हिन्दूवादी नेताओं के समर्थन में दिखे। इससे पहले सर्वजन हिन्दू समिति द्वारा हस्ताक्षर अभियान चलाया गया था जिसमें हजारों हज़ार की संख्या में लोगों ने हस्ताक्षर कर अपना समर्थन निर्दोष हिन्दू नेताओं को दिया था, जिसके बाद 25 अप्रैल को तुलसी भवन में महाबैठक भी की गई थी और चरणबद्ध तरीके से आंदोलन की रणनीति भी बनाई गई थी। जिसके तहत आज मशाल जुलूस निकालने का कार्यक्रम बना था।

सरकार और प्रशासन की मनमानी हिन्दू समाज सहन नहीं करेगा – दिनेशानंद गोस्वामी

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जुलूस में उपस्थित भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी ने अपने वक्तव्य में कहा कि निर्दोष हिन्दू नेताओं को गलत धाराएं लगा कर प्रशासन ने जिस तरह से उन्हें गिरफ्तार किया है, उसका पुरजोर विरोध लगातार हो रहा है और तब तक होता रहेगा जब तक सभी निर्दोषों के ऊपर लगी धाराओं को प्रशासन हटा कर उन्हें रिहा नहीं करती है। ये तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली सरकार और उनके इशारों पर काम करने वाली प्रशासन की मनमानी अब हिन्दू समाज सहन नहीं करेगा। प्रशासन इस बात की जाँच क्यों नहीं कर रही कि जब पहले दिन (8 अप्रैल) माहौल खराब हुआ तो दूसरे दिन (9 अप्रैल) को गणेश पूजा मैदान में इफ्तार पार्टी के आयोजन की अनुमति कैसे मिली इन्हें और उपद्रवियों ने किसके संरक्षण में मंदिर में बैठे लोगों और बाद में वहाँ तैनात प्रशासन के ऊपर पथराव किया। सरकार और प्रशासन सुन लें शोषण भी हिंदुओं का और सजा भी हिंदुओं को यह अब हिन्दू समाज कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।

यह आंदोलन दिन प्रतिदिन एक विशाल रूप लेता रहेगा – हलधर नारायण साह

वहीं हलधर नारायण साह ने भी सरकार और प्रशासन के कार्यशैली पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि भाजपा नेता अभय सिंह और विहिप नेताओं की गिरफ्तारी जिस तरह से प्रशासन ने की वो इमरजेंसी के दौर से भी ज्यादा भयावह स्थिति थी। जो अपने घर मे थे, जिनका दूर दूर तक कदमा हिंसा मामले में कोई उपस्थिति नहीं थी, जो शहर में भी मौजूद नहीं थे उन्हें भी एक समुदाय विशेष को खुश करने वाली इस सरकार के इशारों पर प्रशासन ने गिरफ्तार किया और बेबुनियाद धाराएं लगा कर उन्हें जेल भेज दिया। अपने संवैधानिक अधिकार के तहत ज्ञापन देने गए कुछ हिन्दू नेताओं को भी उठा कर जेल में डाल देना प्रशासन द्वारा किया गया एक शर्मनाक कार्य है और प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरुपयोग भी है। हमारी माँग अनुसार इस मुद्दे की उच्च स्तरीय न्यायिक या सीबीआई जांच हो और निर्दोषों पर लगे सभी धाराओं से उन्हें मुक्त कर रिहा किया जाए और असली दोषी को पकड़ कर उस पर कार्रवाई हो, अन्यथा यह आंदोलन दिन प्रतिदिन एक विशाल रूप लेता रहेगा और तब तक चलता रहेगा जब तक हमारी माँग पूरी नहीं होती।

हिन्दू के अंदर का सैलाब एक जनसैलाब का रूप ले चुका है – रविंदर सिंह

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मशाल जुलूस में शामिल हुए भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य रविंदर सिंह रिंकू ने इस पूरे मामले में अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि अभय सिंह और विहिप नेताओं की गिरफ्तारी सरकार और प्रशासन की सोची समझी साजिश के तहत हुई है। जिस तरह से कश्मीर में आतंकियों को पकड़ने के लिए इंटरनेट और फ़ोन सुविधाओं को बंद कर दिया जाता है ठीक उसी प्रकार सरकार की मंशा को अंजाम तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने भी शहर में दिन भर इंटरनेट सुविधा को बाधित रखा। जिससे यह बात तो साफ होती है कि उनकी नीयत में खोट थी और वो इस बात से भलीभांति वाकिफ़ भी थे। सरकार यह बात भूल जाती है कि हिन्दू समाज बेहद सहनशील समाज है लेकिन जब कोई अपनी उद्दंडता की पराकाष्ठा को पार करता है तो फिर एक जनसैलाब ही उठता है और आज हिन्दू के अंदर का सैलाब एक जनसैलाब का रूप ले चुका है, अब भी यदि सरकार और प्रशासन इसे नहीं समझ रही तो यह कहना गलत नहीं होगा कि वे अपने अहम में अंधे हो चुके हैं, लेकिन अहम तो रावण का नहीं रहा तो फिर राम भक्तों के आगे इनका कैसे रहेगा।

हिन्दुओं की सहनशीलता को कमजोरी समझना सरकार की सबसे बड़ी भूल – अमिताभ सेनापति

वहीं अमिताभ सेनापति ने भी इस पूरे प्रकरण का विरोध करते हुए कहा कि जिस तरह से निर्दोष लोगों पर प्रशासन ने कार्रवाई की है वह लोकतंत्र की दृष्टि से समाज पर एक बुरा असर छोड़ रही है। यह सरकार पूर्ण रूप से हिन्दू विरोधी है और इसी सरकार के आदेश पर प्रशासन हिंदुओं के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई कर रही है। जिसके कारण आज सारे हिंदुओं के अंदर एक आक्रोश है। प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी मंत्री या सरकार के निर्देश और दबाव में उनके द्वारा किसी निर्दोष को बेबुनियाद धारा पर गिरफ्तार कर जेल भेजना पूरे समाज को कलंकित करने के समान है। हिन्दुओं की सहनशीलता को उनकी कमजोरी समझना इस सरकार और उनके मंत्री की सबसे बड़ी भूल है और यह बहुत जल्द इन्हें समझ आएगी और यह चीज़ प्रशासन को भी देखने मिलेगा।

सरकार की उदासीनता और उनकी मशीनरी की निष्क्रियता है इन सबकी वजह – रामचन्द्र सहिस

जुलूस में सम्मिलित आजसू अध्यक्ष रामचन्द्र सहिस ने भी प्रशासन के इस कृत्य पर आपत्ति जताते हुए कहा कि जमशेदपुर एक शांतिप्रिय शहर है जो साम्प्रदायिक सद्भाव के साथ चलता है, लेकिन कुछ लोग शहर के शांतिपूर्ण वातावरण को दूषित करने का कार्य किया है और राज्य सरकार की उदासीनता और उनकी मशीनरी की निष्क्रियता के कारण आज हमारे हिन्दू भाइयों पर जो अमानवीय कार्रवाई हुआ है उसके विरुद्ध आज हम सभी की एकजुटता यह बताती है कि हमारे लोगों के साथ गलत किया जाएगा तो हम खामोश नहीं बैठेंगे, संवैधानिक तरीके से ही सही लेकिन आवाज़ बुलंद रहेगी।

गौरतलब हो कि पिछले दिनों कदमा के शास्त्री नगर में हुए हिंसा में प्रशासन ने अभय सिंह को उनके निवास स्थान से सुबह गिरफ्तार किया था, वहीं ज्ञापन देने गए विहिप नेताओं को भी गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके विरोध में सभी हिन्दू मंच एकजुट होकर सर्वजन हिन्दू समिति के अधीन अपना रोष व्यक्त करने लिए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन को आगे बढ़ा रहे हैं। इन्होंने अपनी माँग में कहा है कि इस पूरे घटनाक्रम की न्यायिक या सीबीआई जांच होनी चाहिए, गिरफ्तार निर्दोषों को सभी धाराओं से मुक्त करते हुए बा-इज्जत बरी किया जाए और असली गुनाहगारों की गिरफ्तारी हो।

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इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सर्वजन हिंदू समिति के संयोजक डॉ दिनेशानंद गोस्वामी, झारखंड के पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, श्रीमती बारी मुर्मू, पंकज सिन्हा, ब्रह्मदेव शर्मा, दिलीप सिंह, निर्भय सिंह, हलधर नारायण साह, अमिताभ सेनापति, सुबोध श्रीवास्तव, शिव शंकर सिंह, अरुण सिंह , राज नारायण शर्मा, रामनाथ सिंह, राजपति देवी, मंजू सिंह, विजय तिवारी, रवि प्रकाश सिंह, राजन सिंह, अनिल सिंह, कन्हैया सिंह, रविंदर सिंह रिंकू, चंद्रशेखर मिश्रा, मनोज बाजपेई, बलबीर मंडल, अमित शर्मा, संजीव सिन्हा, पप्पू सिंह, जितेंद्र राय, सुमित श्रीवास्तव, किशोर ओझा, विमल बैठा, प्रीति सिन्हा, रीना साहू, राजेश सिंह, अमन ठाकुर, सुमन अग्रवाल,भूषण दीक्षित, सुनील सिंह, लालचंद सिंह, अमर सिंह, रंजन सिंह, नरेश अग्रवाल, अजय श्रीवास्तव, विकास सिंह, विजेंद्र तिवारी, ध्रुव मिश्रा, शंकर रेड्डी, शिव प्रकाश शर्मा, सुनील तिवारी, ताराचंद कालिंदी, सत्येंद्र पासवान, शैलेश गुप्ता, दिनेश शर्मा, कन्हैया पुष्टि, रामचंद्र प्रसाद, सुभाष पांडे, नागेश प्रसाद, नुनू मिश्रा, रविंद्र मिश्रा, अतुल कुमार सिंह, लल्लन चौहान, गंगा साहू, वीरेंद्र सिंह, राहुल सिंह, संजय दुबे, अमित पाठक, सौरभ कुमार, ऋषि पांडे, सुधीर सिंह आदि सैकड़ों हिंदूवादी नेताओं सहित हजारों की संख्या में आक्रोशित जनता ने इस मशाल जुलूस में शिरकत कर इस आंदोलन को सफल बनाया एवं शासन के खिलाफ अपनी आवाज को बुलंद किया। इस कार्यक्रम का सफल संचालन भाजयुमो जिला उपाध्यक्ष सुमित श्रीवास्तव ने किया एवं धन्यवाद ज्ञापन भाजपा जिला मंत्री जितेंद्र राय ने किया।

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झारखंड में 9वीं-12वीं तक के सर्वाधिक छात्र छोड़ते हैं पढ़ाई, जांच का आदेश

झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ रहे हैं। हाई स्कूल व प्लस टू स्कूलों की कक्षाओं में छात्र-छात्राओं का ड्रॉप आउट दर सबसे अधिक है। गढ़वा में हाई-प्लस टू स्कूलों में सबसे ज्यादा 21 फीसदी छात्र-छात्राओं का ड्रॉप आउट है।

वहीं, गुमला में 16 प्रतिशत, सिमडेगा-साहिबगंज में 15-15 प्रतिशत, खूंटी में 14 प्रतिशत और पश्चिमी सिंहभूम-लोहरदगा में 13-13 प्रतिशत छात्र-छात्राओं का ड्रॉप आउट है। इसका खुलासा स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के आंकड़ों से हुआ है। शिक्षा विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है और बीच में पढ़ाई छोड़ने के कारणों की जांच का निर्देश दिया है।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने दिया जांच का आदेश
जिलों द्वारा प्रखंडवार, संकुलवार और विद्यालयवार इसकी जांच की जाएगी। स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने राज्य में प्राइमरी (प्राथमिक), अपर प्राइमरी (मिडिल), एलीमेंट्री (प्रारंभिक), सेकेंड्री (हाई) और हाइयर सेकेंड्री (प्लस टू) का एनुवल एवरेज ड्रापआउट रेट जारी किया है। इसमें प्राइमरी स्कूलों (पहली से पांचवीं) में ओवर ऑल ड्रॉप आउट 1.78 प्रतिशत है। वहीं, अपर प्राइमरी (छठी से आठवीं) में 3.86 प्रतिशत ड्रॉप आउट दर है। इसके अलावा सेकेंड्री (नौंवी-10वीं) में 3.2 प्रतिशत, जबकि हाइयर सेकेंड्री (नौवीं से 12वीं) में ड्रॉप आउट सबसे ज्यादा 7.98 प्रतिशत है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक क्लास में छात्र-छात्राओं का ड्रॉप आउट दर काफी अधिक है। इसे कम किये जाने की आवश्यकता है, ताकि झारखंड की स्थिति बेहतर हो सके।

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव के रवि कुमार ने बताया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में ड्रॉप आउट हो रहा है। हाई-प्लस टू स्कूलों में यह सबसे ज्यादा है। सभी जिलों को निर्देश दिया गया है कि स्कूलों में बड़ी संख्या में ड्रॉप आउट का क्या कारण है, इसकी जांच करें। प्रखंडवार, संकुलवार और विद्यालयवार ड्रॉप आउट की जांच की जाएगी।

● रांची जिले में 2.59 प्रतिशत जबकि गढ़वा जिले में प्लस टू में सबसे ज्यादा 21 फीसदी ड्रॉप आउट

● गुमला में 16 प्रतिशत, सिमडेगा-साहिबंगज में 15-15, खूंटी में 14 फीसदी ने छोड़ी पढ़ाई

– पश्चिमी सिंहभूम और लोहरदगा में 13-13 प्रतिशत छात्र-छात्राएं छोड़ चुके हैं विद्यालय

शिक्षा विभाग की ओर से पिछले साल कराए गए सर्वे के अनुसार करीब 56 हजार बच्चे स्कूली शिक्षा से बाहर हैं। तीन से 18 साल के ये बच्चे वैसे हैं जो स्कूल जाने के बाद ड्रॉप आउट हुए हैं। वहीं, इसमें छह से 14 आयु वर्ग के बच्चों को देखा जाए तो उनकी संख्या 37 हजार है। ये भी पहले स्कूल जाते थे, लेकिन अब नहीं जा पा रहे हैं।

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दुःखद: पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का निधन, लंबे समय से थे बीमार

एक बड़ी ही दुखभरी खबर सामने आ रही है।

पू्र्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल का देहांत हो गया है। प्रकाश सिंह बादल, जोकि कुछ दिनों से अस्पताल में इलाजाधीन थे, की मौत की खबर सुनते ही पंजाब के साथ-साथ पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है या यूं कहें कि पंजाब की सियासत को एक बड़ा झटका लगा है। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले तबीयत खराब होने के चलते प्रकाश सिंह बादल को फोर्टिस अस्पताल में दाखिल करवाया गया था, जहां उनका इलाज चल रहा था।

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‘जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा’: कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने खुले मंच से लोगों को हिंसा के लिए भड़काया, मनरेगा मजदूरों के बहाने दिखाई घृणा

उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा। अक्सर विवादित बयानों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाले कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने एक बार फिर से भड़काऊ बातें की हैं।

पार्टी ने उन्हें नवंबर 2023 में ‘अखिल भारतीय असंगठित कामगार और कर्मचारी कॉन्ग्रेस’ का अध्यक्ष बनाया था। उदित राज ने ट्विटर पर अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वो भाषण देते हुए दिख रहे हैं। साथ ही कैप्शन में लिखा, “जो भी मोदी भक्त होगा, मारा जाएगा।” लोग उनके इस बयान की आलोचना कर रहे हैं।

2014 में भाजपा के ही टिकट पर नॉर्थ-वेस्ट दिल्ली से सांसद चुने गए उदित राज का 2019 में टिकट कट गया, जिसके बाद उन्होंने कॉन्ग्रेस का दामन थाम लिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ उलूल-जलूल बकने लगे। भाजपा ने उनका टिकट काट कर गायक हंस राज हंस को उम्मीदवार बनाया था, जिन्हें जीत भी मिली। इसके बाद वो उदित राज भाजपा के खिलाफ हर एक विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हैं और भड़काऊ बयान देते हैं।

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हालिया बयान उन्होंने मनरेगा मजदूरों के समर्थन में आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में दिया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा है कि यूपी न तो दंगा मुक्त हुआ है और न ही गुंडा मुक्त हुआ है। माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ की हत्या पर उदित राज ने यूपी सरकार को भला-बुरा कहा था। हाल ही में वो हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहुँचे थे और वहाँ भी मोदी सरकार के खिलाफ बयान दिया था।

जंतर-मंतर पर आयोजित हालिया प्रदर्शन में उन्होंने ‘मनरेगा मजदूर भूखा है, मोदी का वादा झूठा है’ का नारा भी दिया। बता दें कि सरकार पर मनरेगा बजट में कटौती का आरोप लगाते हुए ये विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। कई कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। बैनर पर ‘मनरेगा बचाओ, ग्रामीण भारत बचाओ’ लिखा हुआ था। हाल ही में उदित राज में फ़्रांस और इजरायल में दंगों के हवाला देते हुए भारत में भी ऐसा होने का डर दिखाया था।

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झारखंड: ईद की ड्यूटी खत्म कर लौट रहे थे पुलिसकर्मी, कंटेनर व पुलिस वाहन में टक्कर से 1 जवान की मौत, 10 घायल

कोडरमा जिले के चंदवारा थाना क्षेत्र अंतर्गत मदनगुंडी गौरी नदी पुल के समीप सोमवार दोपहर को कोडरमा पुलिस के एक वाहन (नंबर जेएच-12बी-4227) और कंटेनर (नंबर यूपी-53एफटी-2690) के बीच हुई आमने-सामने की टक्कर में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गयी, जबकि कंटेनर चालक सहित झारखंड पुलिस के नौ जवान घायल हो गए.

गंभीर रूप से घायल सात लोगों को बेहतर इलाज के लिए रिम्स रांची रेफर किया गया. इस दौरान रास्ते में गणेश की मौत हो गयी. मृतक की पहचान पुलिस जवान गणेश भगत (जमशेदपुर) के रूप में हुई है.

आधा घंटा तक वाहन में फंसा रहा ड्राइवर

जानकारी के अनुसार घायल सभी जवान जिला बल के हैं और ये तिलैया डैम में ईद की ड्यूटी कर सोमवार को करीब एक बजे लौट रहे थे. इसी दौरान गौरी नदी पुल के समीप सामने से आ रहे एक कंटेनर वाहन ने पुलिस की गाड़ी में टक्कर मार दी. दुर्घटना में पुलिस वैन पर सवार सभी लोग घायल हो गए. घटना के बाद हाईवे पेट्रोलिंग व थाना पुलिस के सहयोग से सभी घायल पुलिस जवानों को पिकअप वाहन के जरिए सदर अस्पताल कोडरमा लाया गया. घटना में कंटेनर का चालक बक्सर निवासी संजय सिंह करीब आधा घंटे तक वाहन में फंसा रहा़ बाद में क्रेन की मदद से उसे बाहर निकालकर इलाज के लिए भेजा गया. घटना की जानकारी मिलने के बाद घायल पुलिस जवानों की स्थिति जानने पुलिस अधीक्षक कुमार गौरव, एसडीपीओ प्रवीण पुष्कर व थाना प्रभारी नीतिश कुमार भी सदर अस्पताल पहुंचे. अधिकारियों ने घायल जवानों की स्थिति और इलाज की जानकारी ली.

ये हैं घायल

घायलों में कंटेनर चालक संजय सिंह बक्सर (बिहार), पुलिसकर्मी राहुल कुमार सिंह (जमशेदपुर), सुनील कुमार झा व संजय कु सिंह (लातेहार), सतीश कुमार (बोकारो), तेजनारायण सिंह (रांची), विकास चिक बड़ाइक (गुमला), चमरा मुंडा (खूंटी), विनोद मरांडी (जामताड़ा), रामविलास भगत व चंदन सिंह के नाम शामिल हैं. सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद राहुल कुमार सिंह, सुनील कुमार झा, संजय कुमार सिंह, सतीश कुमार, तेजनारायण सिंह, विकास चिक बड़ाइक, चालक संजय सिंह को रेफर किया गया है. बताया जाता है कि सभी जवान हजारीबाग के पदमा ट्रेनिंग सेंटर से ईद के दिन ड्यूटी के लिए कोडरमा पहुंचे थे.

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स्तंभकार और लेखक तारिक फतह का निधन, बेटी ने दी जानकारी

कनाडा में रहने वाले पाकिस्तानी मूल के जाने-माने स्तंभकार और लेखक तारिक फतह का 73 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी बेटी नताशा फतह ने सोमवार को इसकी पुष्टि की। वह कैंसर से पीड़ित थे।

लंबी बीमारी के बाद आज उनका निधन हो गया।

तारिक की बेटी नताशा फतेह ने अपने पिता तारिक फतेह की कई तस्वीरें ट्विटर पर शेयर कीं हैं। नताशा ने फोटो शेयर करते हुए लिखा, “पंजाब का शेर, हिन्दुस्तान का बेटा, कनाडा से प्यार करने वाला, सच्चा वक्ता, न्याय के लिए लड़ने वाला और दलितों और शोषितों की आवाज तारिक फतेह का निधन।

नताशा ने आगे लिखा कि, उनकी क्रांति उन लोगों के जरिए बनी रहेगी, जो उन्हें जानते थे और प्यार करते थे। इससे पहले 21 अप्रैल को कई रिपोर्ट्स में तारिक फतह की मौत का दावा किया गया था। जिसकी बाद में फर्जी होने की पुष्टि हुई थी।

तारिक इस्लाम और आतंकवाद पर अपने प्रगतिशील विचारों के लिए जाने जाते थे। पाकिस्तान के खिलाफ उग्र रुख रखने वाले तारिक फतह ने अक्सर भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को अपना समर्थन देते नजर आते रहे हैं। फतह का जन्म 1949 में पाकिस्तान में हुआ था। बाद में 1980 के दशक की शुरुआत में वह कनाडा चले गए।

तारिक फतेह कई भाषाओं के जानकार थे। उनकी हिंदी, इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी और अरबी जैसी भाषाओं पर समान पकड़ थी। तारिक फतेह को ह्यूमन राइट्स ऐक्टिविस्ट के तौर पर भी जाना जाता था।

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