साहिबगंज : एएनएम की लापरवाही से एक मासूम की जान पर बन गयी. वो तो खुशकिस्मति की बात है कि बच्चे की हालत स्थिर है। दरअसल नर्स ने 11 माह के बच्चे को एमआर टीकाकरण अभियान में एक ही दिन में दो बार टीका लगा दिया। बच्चे की स्थिति गंभीर हो जाने पर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बरहड़वा पहुंचे तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सरिता टुडू को घटना की जानकारी दी। इसके बाद सरिता टुडू की निगरानी में बच्चे का इलाज हुआ. स्थिति सामान्य होने के बाद स्वजन उसे घर ले गए।
परिजनों के मुताबिक उन्होंने एएनएम बताया कि एक बार वैक्सीन लग चुकी है, लेकिन एएनएम ने उनकी बात अनसुनी कर दी और फिर से वैक्सीन लगा दी। वैक्सीन लगने के बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ गयी। आरोप है कि सोमवार को हाटपाड़ा निवासी अमर भगत के 11 माह के पुत्र अजीत भगत को बरहड़वा सीएचसी की एक एएनएम ने एक ही दिन में मिजिल्स रूबैला की दो-दो बार वैक्सीन लगा दी थी। परिजनों ने पहले तो ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में बाद में बच्चे की तबीयत बिगड़ने लगी। शुक्रवार को बच्चे की तबीयत काफी बिगड़ गई। इसके बाद इलाज के लिए उसे अस्पताल लाया गया।
धनबाद : बलियापुर प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत के हुचुक टांड़ गांव में बुधवार को आयोजित भोक्ता मेला में विषाक्त चाट, गोलगप्पा व छोला-भटूरा खाकर 200 से अधिक लोग बीमार पड़ गये। फूड प्वाइजनिंग के शिकार लोग उल्टी, दस्त और पेट दर्द की शिकायत लेकर रात नौ बजे से आधी रात बाद तक एसएनमएमएमसीएच व शहर के अन्य अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते रहे। रात 11.30 बजे तक एसएनएमएमसीएच में 150 से अधिक मरीज पहुंच चुके थे। शहर के दूसरे निजी अस्पतालों में भी इलाज के लिए बीमारों को भर्ती कराया गया। बीमारों में एक वर्ष के बच्चा से लेकर 90 वर्ष के वृद्ध तक शामिल थे। इतनी संख्या में मरीजों के एक साथ आने पर एसएनएमएमसीएच में अफरा-तफरी की स्थिति पैदा हो गयी।
अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ-साथ सभी जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर व पारा मेडिकल स्टॉफ को इलाज में लगा दिया। इस दौरान बीमारों को प्राथमिक इलाज के साथ ग्लूकोज चढ़ाया गया। दूसरी ओर, पुलिस-प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की टीम देर रात हुचुक टांड़ गांव पहुंची। गांव में टीम कैंप कर बीमार लोगों की खोज-खबर लेती रही। बीमार लोग हुचुकुटांड़, करमाटांड़, बरई टोला, नीचे टोला, आदिवासी टोला, कुम्हार टोला, बीसीसीएल कॉलोनी करमाटांड़, धोखरा, कहालडीह, ढांगी आदि गांवों के रहनेवाले हैं।
एसएनएमएमसीएच में पांव रखने की नहीं थी जगह
एसएनएमएमसीएच के इमरजेंसी वार्ड में इतनी संख्या में मरीजों के एक साथ आने से एक भी बेड खाली नहीं बचा। अधिकतर मरीजों का इलाज जमीन पर लिटा कर किया गया। डॉक्टरों के अनुसार अधिकतर की स्थिति नियंत्रण में है। छोटे बच्चों में अधिक उल्टी के कारण पानी की कमी हो गयी है। उनका उपचार किया जा रहा है। इधर, मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने इन्हें इएनटी, सर्जरी व पीडियाट्रिक विभाग में शिफ्ट किया। इन वार्डों में बेड कम पड़ने की वजह से एक बेड पर दो से तीन मरीजों को लिटा कर इलाज किया गया।
झारखंड में कोरोना धीरे-धीरे पांव पसार रहा है। प्रदेश के 17 जिले अब तक इसकी गिरफ्त में आ चुके हैं। पिछले 24 घंटे में 27 नए मरीज सामने आए हैं। इसके बाद संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़कर 166 पहुंच गई है। कई स्थानों पर मास्क लगा कर रहने की सलाह दी गई है। अस्पतालों में प्रवेश से पहले मास्क को एक बार फिर अनिवार्य कर दिया गया है। पिछले 24 घंटे में 908 लोगों के सैंपल की जांच की गई। इस जांच में 27 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुी है।
कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा प्रकोप राजधानी रांची में हैं। रांची में 63 मरीज अस्पताल में हैं। पूर्वी सिंहभूम में 28 और देवघर में 14 मरीज उपचाराधीन हैं। पूर्वी सिंहभूम में पिछले 24 घंटे में 22, रांची में दो, सरायकेला में दो और कोडरमा में एक नया मरीज मिला है।
वैश्विक महामारी कोरोना का भारत में पिछले कुछ दिनों से एकबार फिर से खौफ बढ़ने लगा है। पिछले कई दिनों से देश में कोरोना के मामलों में लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है। इससे पहले देश में कोरोना धीरे-धीर दम तोड़ता नजर आ रहा था लेकिन मौसम में बदलाव के बीच एकबार फिर से कोरोना के नए मामले तेजी से बढ़ने लगी है। कोरोना मामलों में बढ़ोतरी पिछले 8 हफ्तों से लगातार बढ़ रही है। आलम यह है कि देश में पिछले कई दिनों से कोरोना के 3000 से ज्यादा नए केस सामने आ रहे हैं।
24 घंटे में कोरोना के 3641 नए केस आए
पिछले कुछ दिनों से देश में एकबार फिर से कोरोना के मामलों में तेजी देखी जा रही है। हालांकि कल के मुकाबले देश में आज कोरोना के दैनिक मामले में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। देश में आज कोरोना के 3641 नए केस सामने आए हैं। इस दौरान कोरोना संक्रमण की वजह से 11 लोगों की मौत की खबर है। इससे पहले पिछले दिन रविवार को देश में कोरोना के 3824 नए केस सामने आए थे जबकि 4 लोगों की मौत हुई थी। यानी कल के मुकाबले आज देश में कोरोना के 183 कम नए केस सामने आए हैं। वहीं शनिवार को देश में कोरोना के 2994 नए केस सामने आए थे जबकि 9 लोगों की मौत की खबर थी। वहीं शुक्रवार को देश में कोरोना के 3095 नए मामले आए थे, जबकि 5 लोगों की मौत की मौत हुई थी।
देश में फिर डराने लगा है कोरोना
स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से आज सुबह जारी आंकड़े के मुताबिक बीते 24 घंटे में देश में कोरोना संक्रमण के 3641 नए केस सामने आए। इस दौरान कोरोना संक्रमण की वजह से 11 व्यक्तियों की मौत की खबर है। वहीं इस दौरान कोरोना वायरस के संक्रमण को 1800 लोग मात देने में कामयाब रहे, यानी स्वस्थ्य हुए। इसके साथ ही देश में कोरोना के एक्टिव केस की संख्या उछलकर 20,000 के पार पहुंच गई है। आज देश में कोरोना के एक्टिव केसों की संख्या 20,219 हो गई है। इस तरह पिछले 24 घंटे में एक्टिव केस की संख्या में 2035 की तेजी दर्ज की गई है।
देश में अब तक कोरोना संक्रितों की संख्या 4,47,26,459 हुई
इसके साथ ही देश में कुल कोरोना संक्रमितों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 47 लाख 26 हजार 459 हो गई है। जबकि ठीक होने वाले लोगों का आंकड़ा बढ़कर 4 करोड़ 41 लाख 75 हजार 135 हो गया है। वहीं देश में अब तक कुल 5 लाख 30 हजार 892 लोग कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से दम तोड़ चुके हैं।
देश में अबतक कोरोना की ताजा स्थिति
अभी कुल एक्टिव केस- 20 हजार 219 अबतक कुल संक्रमित- 4 करोड़ 47 लाख 26 हजार 459 अबतक कुल डिस्चार्ज- 4 करोड़ 41 लाख 75 हजार 135 अबतक कुल मौतें- 5 लाख 30 हजार 892
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डेली पॉजिटिव रेट इस समय 2.87 फीसदी तो वीकली पॉजिटिव रेट 2.24 प्रतिशत है। कोरोना से ठीक होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देश में अब रिकवरी रेट बढ़कर 98.77 फीसदी पहुंच गया है। जबकि मृत्यु दर 1.19 फीसदी पर बरकरार है। वहीं सक्रिय मामलों में कुल संक्रमणों का 0.04 प्रतिशत शामिल है। मंत्रालय की वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के तहत अभी तक करीब कोविड-19 रोधी टीकों की 220.66 करोड़ खुराक दी जा चुकी है।
जमशेदपुर : टाटा मेन हॉस्पीटल ने जमशेदपुर के नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए एक नए ऑप्थल्मोलॉजी ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में चाणक्य चौधरी, वाइस प्रेसिडेंट कॉर्पोरेट सर्विसेज, टाटा स्टील के साथ श्रीमती रुचि नरेंद्रन, प्रेसिडेंट, जमशेदपुर आई हॉस्पिटल और डॉ. सुधीर राय, जनरल मैनेजर, मेडिकल सर्विसेज, टाटा स्टील व अन्य गणमान्य लोग शामिल थे।
ऑप्थल्मोलॉजी विभाग अब माइक्रोस्कोप, ऑपरेशन थिएटर टेबल, फ़ाकोमल्सीफिकेशन सिस्टम और एनेस्थीसिया मशीन जैसे आधुनिक चिकित्सा उपकरणों से लैस है। यह पहली बार है जब टीएमएच में आंखों की सर्जरी की जाएगी।
नई सुविधा में उन्नत चिकित्सा उपकरण जैसे Zeiss OPMI Lumera I माइक्रोस्कोप, Zeiss Opmi Lumera 300 और एक आधुनिक फ़ाकोमल्सीफिकेशन सिस्टम मशीन – सेंचुरियन गोल्ड विज़न सिस्टम है।
नए ऑप्थल्मोलॉजी ऑपरेशन थियेटर में अब तक 300 से अधिक मरीजों का ऑपरेशन किया जा चुका है।
पश्चिम बंगाल : कोलकाता में एक व्यक्ति के अंदर ऐसी बीमारी का पता चला है, जो किलर प्लांट फंगस के कारण होता है। किलर प्लांट फंगस यानी की पौधों से होने वाले रोग है। यह दुनिया का पहला ऐसा व्यक्ति है, जिसे यह बीमारी हुई है। बता दें कि रोगी एक पेशेवर प्लांट माइकोलॉजिस्ट है, जिसकी उम्र 61 साल है और वह सड़ने वाली सामग्री, मशरूम और विभिन्न पौधों के फंगस पर रिसर्च करते हुए काफी समय बिताया था।
बता दें कि संक्रमित व्यक्ति की आवाज में भारीपन आ गया था, उसे कुछ भी खाने में दिक्कत हो रही थी। जिसके बाद वह कोलकाता के एक अस्पताल में गया। जहां डॉक्टरों ने उसे बताया कि उसे तीन माह से खांसी, थकान और निगलने में दिक्कत की शिकायत है। डॉक्टरों ने मरीज़ का एक्स-रे और सीटी स्कैन किया। जिसके बाद रिपोर्ट में छाती का एक्स-रे नॉर्मल आया, लेकिन सीटी स्कैन के रिपोर्ट में उसकी गर्दन में एक पैराट्रैचियल फोड़ा दिखा। जिसके बाद डॉक्टरों ने इलाज कर फोड़ा को हटा दिया और परीक्षण के लिए एक नमूना “डब्ल्यूएचओ सहयोग केंद्र फॉर रेफरेंस एंड रिसर्च ऑन फंगी ऑफ मेडिकल इंपोर्टेंस” भेजा। जहां उन्हें चोंड्रोस्टेरियम परप्यूरियम का निदान किया गया।
डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें मधुमेह, एचआईवी संक्रमण, गुर्दे की बीमारी, किसी पुरानी बीमारी, प्रतिरक्षादमनकारी दवा के सेवन या आघात का कोई इतिहास नहीं था। डॉक्टरों ने कहा कि वह अपनी शोध गतिविधियों के हिस्से के रूप में लंबे समय से सड़ने वाली सामग्री, मशरूम और विभिन्न पौधों के कवक के साथ काम कर रहा था।
बता दें कि चोंड्रोस्टेरियम परप्यूरियम एक पौधा कवक है जो पौधों में सिल्वर लीफ रोग का कारण बनता है, विशेष रूप से गुलाब परिवार में। मानव में रोग पैदा करने वाले पौधे के कवक का यह पहला उदाहरण है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पारंपरिक तकनीक (माइक्रोस्कोपी और कल्चर) फंगस की पहचान करने में विफल रही हैं। केवल अनुक्रमण के माध्यम से ही इस असामान्य रोग जनक की पहचान का पता चल सकता है। यह मामला मनुष्यों में बीमारी पैदा करने के लिए पर्यावरण संयंत्र कवक की क्षमता पर प्रकाश डालता है और प्रेरक कवक प्रजातियों की पहचान करने के लिए आणविक तकनीकों के महत्व पर जोर देता है। शोधकर्ताओं ने लिखा है कि, “दो साल के फॉलो-अप के बाद रोगी बिल्कुल ठीक हो गया और उसके फिर से संक्रमित होने का कोई सबूत नहीं है।”
झारखंड : लातेहार जिले के चंदवा में सरहुल पर प्रसाद के रूप में मिले चना-गुड़ खाने से चेटर और सासंग पंचायत के करीब डेढ़ सौ लोग बीमार पड़ गए। गांव में अफरातफरी मचने के बाद पहुंची मेडिकल टीम ने पीड़ितों का उपचार किया। कई लोगों का चंदवा सीएचसी और लातेहार सदर अस्पताल में भी इलाज किया गया। दो लोगों को बेहतर इलाज के लिए रांची के रिम्स रेफर किया गया है। वहीं समाचार लिखे जाने तक 56 लोगों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
दामर शक्ति खूंटा स्थल में खाया था प्रसाद
मिली जानकारी के अनुसार, सरहुल पर चेटर और सांसग पंचायत के सैकड़ों लोग दामर शक्ति खूंटा स्थल पहुंचे थे। पर्व के बाद सभी को चना-गुड़ दिया गया था। इसके बाद सभी घर वापस आ गए। शनिवार की अहले सुबह से कई लोगों को उल्टी-दस्त और बुखार आने लगा। पीड़ितों ने ग्रामीण चिकित्सक से उपचार कराया। शनिवार की दोपहर तक मरीजों की संख्या बढ़ती चली गयी और रविवार को स्थिति विकराल हो गयी। देर शाम इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को मिली। इसके बाद एक टीम गांव में भेजी गयी। रविवार की रात 9:30 बजे से देर रात 2:30 बजे तक सैकड़ों ग्रामीणों का उपचार किया गया। सोमवार को सिविल सर्जन लातेहार ने स्वयं प्रभावित गांव का दौरा कर टीम को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
चना खाने से संक्रमित हो गए सैकड़ों लोग
डॉ एनके पांडेय चंदवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ एनके पांडेय ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह फूड प्वाइजनिंग का मामला लग रहा है। चना खाने से लोगों की तबीयत बिगड़ी है। पीड़ित लोगों का इलाज किया जा रहा है। सैंपल ले लिए गए हैं। जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। फिलहाल मरीजों का इलाज किया जा रहा है। डॉक्टरों की टीम मरीजों पर लगातार नजर रख रही है। हर तरह की स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं।
झारखंड में इंफ्यूएंजा वायरस H3N2 ने दस्तक दे दी है। यहां इंफ्यूएंजा वायरस से पीड़ित दो मरीज मिले हैं। इनमें एक बुजुर्ग महिला और चार साल का बच्चा शामिल है। इफ्यूएंजा वायरस का पहला मामला जमशेदपुर से मिला। यहां एक 68 साल की महिला में इंफ्यूएंजा वायरस की पुष्टि हुई है। वहीं दूसरा मामला रांची का है जहां एक चार साल का बच्चा इंफ्यूएंजा वायरस पीड़ित है। इंफ्यूएंजा वायरस से पीड़ित महिला का टाटा मेन हॉस्पिटल और बच्चे का इलाज रांची के रानी चिल्ड्रन हॉस्पिटल में चल रहा है। दोनों को आइशोलेन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है।
महिला H3N2 वायरस से संक्रमित
जानकारी के मुताबिक, महिला को सर्दी, खांसी, बदन दर्द और गले में परेशानी थी, जिसके बाद वो 16 मार्च को टीएमएच हॉस्पिटल में भर्ती हुई। इसके बाद लक्षण के आधार पर उसके सैंपल को एमजीएम सेंटर के माइक्रोबॉयलॉजी डिपार्टमेंट भेजा गया, जहां उसकी जांच की गई। महिला की जांच रीपोर्ट कल यानी शनिवार को आई। जिसमें वो इंफ्यूएंजा वायरस पॉजिटिव पाई गई। वहीं बच्चे को तीन दिन पहले निममोनिया की शिकायत थी। इसके बाद उसके परिवार वालों ने उसे रानी चिल्ड्रन हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। लक्षण के आधार पर उसकी भी जांच एक प्राइवेट लैब में कराई गई। जिसमें वो भी इंफ्यूएंजा वायरस से पीड़ित पाया गया।
स्वास्थय विभाग ने जारी की एडवाइजरी
बता दें प्रदेश के स्वास्थय विभाग ने भी इंफ्यूएंजा वायरस H3N2 को लेकर सतर्क रहने के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही प्रदेश में H3N2 के मामले सामने आने के बाद टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट की रणनीति को अपनाने का निर्देश दिया है। एक हफ्ते पहले सरकार ने भी H3N2 के खतरे को देखते हुए गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सभी डीसी और सिविल सर्जन को वायरस के खतरे के निपटने के लिए तैयार रहने को कहा था।
कोरोना वायरस से अभी पूरी तरह पीछा भी नहीं छूटा है कि इसी बीच राज्य में नये वायरस एच3एन2 इंफ्लूएंजा का खतरा भी बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और लैब संचालकों की मानें, तो पिछले कुछ दिनों से इस वायरस से पीड़ित मरीज बढ़े हैं। हर दिन एक या दो मरीजों के सैंपल में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि हो रही है। हालांकि यह वायरस बच्चों, किशोर और युवाओं के लिए उतना खतरनाक नहीं माना जा रहा है, लेकिन बीमार लोगों और बुजुर्गों के लिए यह घातक हो सकता है। चिंता की बात इसलिए भी बढ़ गयी है, क्योंकि देश में इस वायरस से दो लोगों की मौत हो गयी है। ऐसे में सावधानी और सतर्कता बरतना जरूरी है।
एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस का लक्षण मौसमी बीमारी की तरह ही हैं। इसमें बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक से पानी गिरना, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान जैसे ही लक्षण दिखायी देते है। रिम्स के फिजिशियन डॉ विद्यापति ने बताया कि एच3एन2 इंफ्लूएंजा वायरस की गंभीरता के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है, लेकिन कोमोरबिडिटी (गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग) और बुजुर्गों को सावधान रहना चाहिए। मेडिसिन ओपीडी में 200 से 250 मरीज आ रहे हैं, जिसमें मौसमी बीमारी के 25 से 30 फीसदी मरीज है। एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि जांच के बाद ही की जा सकती है। इसकी चपेट में आनेवालों में खांसी ज्यादा दिनों तक रह रही है। वहीं, बुखार और अन्य समस्याएं कुछ दिन में ठीक हो जा रही हैं। सतर्कता बरतना इसलिए जरूरी है कि वायरस फेफड़ा तक नहीं पहुंचे, क्योंकि इसी के बाद यह घातक हो जाता है।
सदर अस्पताल में भी इंफ्लुएंजा के मरीज बढ़े
सदर अस्पताल में भी इंफ्लुएंजा के संक्रमण से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गयी है। विगत 15 दिनों में मौसमी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 200 से ज्यादा पहुंच गयी है। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ अजय कुमार झा ने बताया कि संक्रमण से बचाव जरूरी है। बिना सलाह के एंटीबायोटिक का उपयोग नहीं करें। अस्पताल में डॉक्टर से संपर्क कर ही दवा लें। मास्क पहनने से खुद और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
रिम्स में मशीन है, पर जांच किट नहीं
रिम्स में वायरस की जांच के लिए आरटीपीसीआर और जीनोम मशीन है, लेकिन वर्तमान समय में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की जांच के लिए किट नहीं है। किट नहीं होने से गंभीर मरीजों में इंफ्लूएंजा का लक्षण होते हुए भी इसकी जांच नहीं की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, इसलिए जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग से कोई आदेश नहीं मिला है। किट उपलब्ध होने पर जांच की जायेगी। इधर, निजी अस्पताल में जांच का खर्च 1,400 से 4,500 रुपये तक है। 4,500 रुपये में एच3एन2 इंफ्लूएंजा के साथ-साथ स्वाइन फ्लू की जांच भी एक साथ होती है।
डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य विभाग ने किया है आगाह
डब्ल्यूएचओ और स्वास्थ्य मंत्रालय ने एच3एन2 इंफ्लूएंजा को लेकर आगाह किया है। इससे संबंधित आदेश और गाइडलाइन जारी की गयी है। आइएमए ने भी सभी राज्य के डॉक्टरों को सतर्कता बरतने और अपने स्तर से व्यवस्था रखने का निर्देश दिया है। मंत्रालय द्वारा कहा गया है कि कोरोना संक्रमण अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, इसलिए कमजोर इम्युनिटी और बीमार लोगों पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। इससे संक्रमण के फैलाव का खतरा भी है।
इन गाइडलाइन का पालन आवश्यक
◆ कोरोना गाइडलाइन का पालन करें। ◆ मास्क का उपयोग करें और उसे पहनकर ही बाहर निकलें। ◆ सामान्य फ्लू होनेवाले व्यक्ति के संपर्क में आने से बचें। ◆ सर्दी और खांसी होने पर मास्क का उपयोग करें। ◆ जितना संभव हो, सामाजिक दूरी का पालन करें। ◆ ज्यादा जरूरत होने पर ही भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाये। ◆ लगातार हाथों की सफाई करें और सैनेटाइज करते रहें। ◆ शरीर में पानी की कमी नहीं होने दें। ◆ छींकते या खांसते समय मुंह और नाक को ढंक लेना चाहिए।
एच3एन2 इंफ्लूएंजा के लक्षण
◆ बुखार ◆ खांसी ◆ गले में खराश ◆ नाक से पानी गिरना ◆ शरीर और सिर में दर्द ◆ ठंड लगना और थकान ◆ सामान्य वायरस में भी आराम करें. ◆ पौष्टिक खाना को डायट में शामिल करें
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
मत घबरायें, नहीं है जानलेवा
लैब में प्रतिदिन एक से दो सैंपल में एच3एन2 इंफ्लूएंजा की पुष्टि हो रही है। दो महीना में 50 से 55 में इसकी पुष्टि हुई है। हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह उतना जानलेवा नहीं है। इसमें बीमारी ठीक होने में 12 से 15 दिनों का समय लग रहा है। बुजुर्ग और कोमोरबिडिटी वाले मरीजों का विशेष ख्याल रखना है।
हेल्थ टिप्स : बॉलीवुड के मशहूर एक्टर सतीश कौशिक की कार्डियक अरेस्ट से हुई मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। 8 मार्च को दोस्तों संग घंटों होली खेलने के बाद रात को अचानक उनको बेचैनी सांस लेने में परेशानी हुई थी। सतीश कौशिक की कार्डियक अरेस्ट से मौत इस मायने भी हैरान करने वाली है क्योंकि वो रोजाना जिम में घंटों पसीना बहाते थे। इससे पहले भी हमारे सामने ऐसे कई केस आ चुके हैं, जिसमें लोगों को घूमते, जिम करते डांस करते हार्ट अटैक से मरते देखा गया है। इन मामलों में लोगों को अस्पताल तक ले जाने के मौका भी नहीं मिला। ऐसे में कार्डियक अरेस्ट क्या है इसके क्या लक्षण होते हैं क्या इसका अटैक आने पर व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है। आज हम कुछ ऐसे ही पहलुओं पर चर्चा करेंगे।
कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक बंद नहीं होता
गाजियाबाद एमएमजी हॉस्पिटल के डॉ. आलोक रंजन बताते हैं कि कार्डियक अरेस्ट में दिल काम करना बंद कर देता है। इस स्थिति में दिल ब्लड को पंप नहीं कर पाता कुछ पलों में पूरी बॉडी इससे प्रभावित हो जाती है। जानने वाली बात यह है कि कार्डियक अरेस्ट में दिल अचानक बंद नहीं होता, बल्कि इससे पहले 3 से 5 मिनट के लिए हार्ट बीट अचानक तेज ( 350 से 400 बीट्स प्रति मिनट ) हो जाती हैं। इसके बाद हार्ट काम करना बंद कर देता है। इस दौरान इंसान को बचाने के लिए केवल 3 से 5 मिनट का ही समय मिलता है। इस समय अगर मरीज को सीपीआर या इलेक्ट्रिक शॉक मिल जाए तो उसकी जान बच सकती है। क्योंकि सीपीआर इलेक्ट्रिक शॉक से फेफड़ों में पर्याप्त ऑक्सीजन बनी रहती है।
युवाओं में क्या आ रही यह बीमारी
डॉ. रंजन बताते हैं कि आजकल युवाओं में कार्डियक अरेस्ट के ज्यादा केस देखने को मिल रहे हैं. जिसकी वजह क्षमता से ज्यादा मेहनत करना, जिम में ज्यादा वजह उठाना, कई घंटे तक वर्क आउट करना है. इसके साथ ही स्मोकिंग, गलत खान-पान, खराब लाइफस्टाइन, शराब पीना, रात के देर तक जगना जरूरत से कम सोना आदि कारण भी कार्डियक अरेस्ट की संभावनाओं को बढ़ाती हैं. डॉ. रंजन कहते हैं कि हेल्दी फिट रहने के लिए रोजना 30 से 40 मिनट का वर्क आउट भी काफी हो. इसमें घर पर ही बॉडी वेट एक्सरसाइज, कार्डियो एक्सरसाइज, रनिंग जॉगिंग या फिर ब्रिस्क वॉक को भी शामिल किया जा सकता है.
कार्डियक अरेस्ट के लक्षण
बेचैनी बेहोशी हार्ट रेट तेज बढ़ना सीने में जकड़न दर्द चक्कर आना सांस लेने में परेशानी उल्टी होना पेट सीने में साथ में दर्द