एक नई सोच, एक नई धारा

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झारखंड: जंगली फल खाने से 27 छात्र बीमार, 5 को सदर अस्पताल किया गया रेफ़र

झारखंड: शनिवार को चतरा जिले में चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जहाँ एक के बाद एक छात्र अचानक बीमार पड़ने लगे तो परिजनों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में परिजन उन्हें अस्पताल ले गए। जहां डॉक्टरों की टीम उनके इलाज में जुटी हुई है। बताया जा रहा है कि छात्रों ने जंगल से कुछ फल खा लिए थे, जिसके बाद उनकी सेहत बिगड़ गई।

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जंगली फल खाने से 27 छात्र बीमार पड़ गए। इन छात्रों ने अपने स्कूल के पास स्थित एक जंगल में यह फल खाये थे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि घटना राजपुर थाना क्षेत्र के पकरी गांव में हुई। पुलिस ने जब बच्चों के बीमार होने के संबंध में जानकारी जुटाई तो एक बच्चे ने बताया कि वे गांव में अपने प्राथमिक विद्यालय से सटे जंगल में गए थे और कुछ जंगली फल खाए थे, जिसके बाद वे बीमार पड़े।

सिविल सर्जन श्यामनंदन सिंह ने बताया कि बीमार पड़ने वाले बच्चों की उम्र करीब आठ – नौ साल है। उन्होंने कहा कि बच्चों को जिले के कान्हाचट्टी प्रखंड स्थित स्वास्थ्य उपकेंद्र में भर्ती कराया गया था और बाद में, उनमें से पांच को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। सिंह ने कहा, सभी छात्रों की हालत स्थिर है। राज्य के श्रम मंत्री सत्यानंद भोक्ता ने स्वास्थ्य केंद्र का दौरा किया और बीमार बच्चों से बात की।
डॉक्टरों ने बताया कि छात्रों की हालत खतरे से बाहर है। जैसे ही उनकी सेहत में सुधार होने लगेगा, उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। अभी छात्रों को खाने के लिए केवल लिक्विड फूड ही दिया जा रहा है। वहीं, अस्पताल में छात्रों के परिजन भी मौजूद हैं। परिजन अपने बच्चों की ठीक होने की दुआ मांग रहे हैं। परिजनों ने कहा कि उन्हें तो जानकारी ही नहीं थी कि बच्चों ने कुछ ऐसा खाया है, जब उनकी तबीयत खराब होने लगी तब जाकर पूरे मामले के बारे में पता लगा। बच्चों ने परिजनों को बताया कि जंगल में पेड़ के ऊपर फल को देख लालच आ गई थी, जिसके बाद वह फल को तोड़कर खा लिए थे।

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पश्चिम बंगाल: कोलकाता में बच्चों पर कहर बरपा रहा एडेनो वायरस, जाने बीमारी के लक्षण

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एडेनोवायरस बच्चों पर कहर बनकर टूट रहा है। इसके मामले तेजी से बढ़े हैं। स्थिति ऐसी है पिछले दिनों बहुत सारे बच्चे इस बीमारी के शिकार हो गए। हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले 24 घंटे में यहां 5 बच्चों की मौत हो गई। सिर्फ 2 बच्चों में इस बीमारी की पुष्टि हुई। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग हलचल में आ गई है। गौरतलब है कि इन तमाम बच्चों में सांस लेने से जुड़ी दिक्कत थी और सबका इलाज चल रहा था। ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिरकार ये एडेनोवायरस है क्या, कैसे होता है और इसके लक्षण क्या हैं।

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एडेनोवायरस वायरस, आईकोसोहेड्रल वायरस (icosohedral viruses) हैं जिनमें डबल डीएनए वाला वायरस बोला जाता है। इतना ही नहीं ये 50 प्रकार के होते हैं और इंसानों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। एडेनोवायरस, सतहों पर रहते हैं जैसे कि डोरनॉब्स, ऑब्जेक्ट्स और स्विमिंग पूल और छोटी झीलों का पानी। ध्यान देने वाली बात ये है कि एडेनोवायरस सबसे अधिक श्वसन संबंधी बीमारी का कारण बनता है और निमोनिया, ब्रोंकाइटिस जैसे लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है। बच्चों में मल, दूषित पानी, गंदे डायपर और गंदे हाथों से ये इंफेक्शन तेजी से फैल सकता है। साथ ही स्विमिंग पूल, दूषित पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से भी ये फैल सकता है।

बीमारी के लक्षण

-जुकाम
-बुखार
-सांस की नली में सूजन
-निमोनिया
-कंजंक्टिवाइटिस
-मूत्राशय का संक्रमण
-मैनिंजाइटिस और एन्सेफलाइटिस।
ध्यान देने वाली बात ये है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों में ये गंभीर भी हो सकता है, जिससे बच्चों की मौत भी हो सकती है।

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एनपीपीए द्वारा तय किया गया डायबिटीज और उच्च रक्तचाप समेत 74 दवाओं की कीमत

दवाओं की कीमतों के रेगुलेटर एनपीपीए ने सोमवार को कहा कि उसने डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर के इलाज की दवाओं समेत 74 दवाओं की रिटेल कीमत तय कर दी है। राष्ट्रीय दवा मूल्य निर्धारण प्राधिकरण या National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) ने बीती 21 फरवरी को हुई प्राधिकरण की 109वीं बैठक में लिए गए फैसले के आधार पर दवाओं के (कीमत नियंत्रण) आदेश 2013 के तहत दवाओं की कीमतें तय की हैं।
नोटिफिकेशन के मुताबिक, एनपीपीए ने डेपाग्लिफ्लोजिन सिटाग्लिप्टिन और मेटफॉर्मिन हाइड्रोक्लोराइड (एक्सटेंडेड-रिलीज़ टैबलेट) की एक टैबलेट की कीमत 27.75 रुपये तय की है।
इसी तरह, दवाओं की कीमत को तय करने वाले रेगुलेटर ने ब्लडप्रेशर कम करने वाली दवा टेल्मिसर्टन और बिसोप्रोलोल फ्यूमरेट की एक टैबलेट की कीमत 10.92 रुपये तय की है। एनपीपीए ने मिर्गी और न्यूट्रोपेनिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा समेत 80 नोटिफाइड दवाओं (एनएलईएम 2022) की अधिकतम कीमतों को भी संशोधित किया है।
Sodium Valproate की एक टैबलेट (200 एमजी) वाली दवा की कीमत में एनपीपीए ने संशोधन कर दिया है और इसे 3.20 रुपये प्रति टैबलेट पर फिक्स कर दिया है। इसके अलावा Filgrastim injection (एक वॉयल) की कीमत 1034.51 रुपये पर निर्धारित कर दी गई है। इसके अलावा Hydrocortisone जो कि एक स्टेरॉयड है, इसकी कीमत में बदलाव करके इसे 13.28 रुपये प्रति टैबलेट पर कर दिया गया है।

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एनपीपीए द्वारा किया जाता है दवाओं और दवाओं के फॉर्मूलेशन की कीमत पर फैसला

एनपीपीए दवाओं के (कीमत नियंत्रण) आदेश के प्रावधानों को लागू करने के साथ इनमें संशोधन भी करता है। कंट्रोल्ड बल्क ड्रग्स और फॉर्मूलेशन की कीमतों को निर्धारित करने के अलावा एनपीपीए के पास दवाओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने की भी जिम्मेदारी होती है।

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