एक नई सोच, एक नई धारा

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जमशेदपुर: परसुडीह में ‘कार हॉस्पिटल’ गैराज में भीषण आगजनी, लाखों का नुकसान

जमशेदपुर, शनिवार: परसुडीह थाना क्षेत्र के करनडीह मेन रोड स्थित “कार हॉस्पिटल” नामक वाहन मरम्मत गैराज में शुक्रवार देर रात अज्ञात असामाजिक तत्वों ने आग लगा दी। इस घटना में गैराज में खड़ी तीन कारें जलकर पूरी तरह राख हो गईं, जबकि एक अन्य वाहन को गंभीर नुकसान पहुंचा है। घटना के समय मकर संक्रांति की छुट्टी के कारण गैराज में कोई कर्मचारी सक्रिय नहीं था।

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लाखों की संपत्ति स्वाहा

​गैराज संचालकों, वैद्यनाथ महतो और मंगल कुजूर के अनुसार, आग इतनी भीषण थी कि मरम्मत के लिए खड़ी गाड़ियां लोहे के ढांचे में तब्दील हो गई। जलने वाले वाहनों में शामिल हैं:

  • डस्टर कार (JH 10 AB 4439)
  • टाटा नैनो (JH 05 L 4648)
  • मारुति ऑल्टो (OR 02 BK 1670) इसके अलावा, बगल में खड़ी एक मारुति 800 (JH 05 H 3419) का पिछला हिस्सा भी आग की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया है।

सुनियोजित साजिश की आशंका

​गैराज संचालक वैद्यनाथ महतो ने आरोप लगाया कि यह हादसा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है। घटना के समय गैराज का केवल एक कर्मचारी वहां मौजूद था, जो ठंड के कारण कमरे के अंदर सो रहा था। संचालकों का मानना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने जानबूझकर गैराज को निशाना बनाया है।

पुलिस की कार्रवाई

​घटना की सूचना मिलते ही परसुडीह थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पुलिस आसपास के क्षेत्रों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि दोषियों की पहचान की जा सके। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही मामले का खुलासा कर अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

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जमशेदपुर में भाजपा का हल्ला बोल: बिगड़ती कानून-व्यवस्था के खिलाफ एसएसपी कार्यालय का ऐतिहासिक घेराव
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जमशेदपुर, शनिवार: शहर में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और चरमराती कानून-व्यवस्था के विरोध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आज सड़कों पर उतरकर जोरदार प्रदर्शन किया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत निकाली गई इस ‘आक्रोश रैली’ का नेतृत्व जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा दास साहू ने किया।

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मुख्यालय से एसएसपी दफ्तर तक गूंजा आक्रोश

​रैली की शुरुआत साकची स्थित भाजपा जिला मुख्यालय से हुई। हाथ में तख्तियां और झंडे लिए हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जिला प्रशासन और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आगे बढ़े। रैली जब वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्यालय पहुंची, तो वहां कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया।

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32 साल पुराना इतिहास दोहराया गया

​आंदोलन के दौरान भाजपा नेताओं ने इस प्रदर्शन को ऐतिहासिक बताया। नेताओं ने याद दिलाया कि ठीक 32 वर्ष पहले (1992 में) भी भाजपा ने इसी तरह कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर तत्कालीन एसपी परवेज हयात के कार्यकाल में कार्यालय का घेराव किया था। आज एक बार फिर अपराधियों के बढ़ते मनोबल ने पार्टी को उसी तरह के बड़े आंदोलन के लिए मजबूर कर दिया है।

प्रमुख आरोप और मांगें:

  • प्रशासन की विफलता: विधायक पूर्णिमा दास साहू ने आरोप लगाया कि शहर में हत्या, रंगदारी और चोरी की घटनाएं आम हो गई हैं, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
  • जनता में भय: नेताओं ने कहा कि आम नागरिक और व्यापारी वर्ग खौफ के साये में जी रहा है, जबकि अपराधियों को पुलिस का कोई डर नहीं रह गया है।
  • बड़े आंदोलन की चेतावनी: भाजपा ने जिला प्रशासन को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि अपराध पर शीघ्र नियंत्रण नहीं पाया गया, तो यह चिंगारी पूरे झारखंड में एक बड़े जनांदोलन का रूप लेगी।

पुलिस की प्रतिक्रिया

​प्रदर्शन को देखते हुए एसएसपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी और गश्ती बढ़ाने की मांग की।

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: निजी स्कूलों में गरीब बच्चों को मिलेगी मुफ्त शिक्षा, 25% कोटा अनिवार्य

सरायकेला-खरसावां: शिक्षा के अधिकार (RTE Act) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक दूरगामी फैसला सुनाया है, जिसका मानवाधिकार सहायता संघ (अंतरराष्ट्रीय) की जिला महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष श्रीमती सुमन कारूवा ने पुरजोर स्वागत किया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा कोई दया नहीं, बल्कि हर बच्चे का संवैधानिक अधिकार है।

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फैसले की मुख्य बातें

​सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि निजी और गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के बच्चों के लिए 25% आरक्षण केवल कागजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

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  • कानूनी बाध्यता: 25% कोटा स्कूलों के लिए कोई विकल्प नहीं बल्कि एक कानूनी अनिवार्यता है।
  • निगरानी व्यवस्था: सरकारों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत निगरानी तंत्र और स्पष्ट नियम बनाने का आदेश दिया गया है।
  • भेदभाव पर रोक: प्रवेश प्रक्रिया में किसी भी तरह के भेदभाव को रोकने और उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

किन स्कूलों पर लागू होगा आदेश?

​यह आदेश सभी निजी और गैर-सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होगा। हालांकि, संविधान के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार अल्पसंख्यक संस्थानों को इस नियम से छूट दी गई है।

गरीब बच्चों को होने वाले लाभ

​इस फैसले से समाज के वंचित वर्ग के बच्चों के लिए बड़े और महंगे स्कूलों के दरवाजे खुलेंगे:

  1. निशुल्क शिक्षा: फीस के साथ-साथ किताबों और प्राथमिक शिक्षा का पूरा खर्च मुफ्त रहेगा।
  2. सामाजिक समानता: अलग-अलग पृष्ठभूमि के बच्चे एक साथ पढ़ेंगे, जिससे सामाजिक समावेशन को बल मिलेगा।
  3. उज्जवल भविष्य: संसाधनों के अभाव में मेधावी बच्चे अब शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे।
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परसुडीह में शराब माफिया का तांडव: विरोध करने पर पूरे परिवार को लहूलुहान किया, पुलिस पर मिलीभगत के आरोप

जमशेदपुर | शनिवार, 17 जनवरी 2026

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जमशेदपुर: लौहनगरी के परसुडीह थाना अंतर्गत छोला गौड़ा (दुमका गोड़ा) क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ आवाज उठाना एक परिवार को भारी पड़ गया। शुक्रवार को शराब बिक्री का विरोध करने पर माफियाओं ने गुंडों के साथ मिलकर टिंकू, उनकी पत्नी श्याम और बुजुर्ग मां पर जानलेवा हमला कर दिया। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और पुलिस के प्रति भारी आक्रोश व्याप्त है।

10-15 गुंडों ने किया हथियारों से वार

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टिंकू और उनका परिवार लंबे समय से इलाके में चल रहे अवैध शराब के धंधे का विरोध कर रहा था। शुक्रवार को विरोध जताने के दौरान शराब माफिया ने करीब 10 से 15 भाड़े के गुंडों को बुलाया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से परिवार पर हमला कर दिया।

  • गंभीर रूप से घायल: हमले में तीनों सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने बीच-बचाव कर उन्हें माफिया के चंगुल से छुड़ाया और सदर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

पुलिस पर मिलीभगत का गंभीर आरोप

​अस्पताल में भर्ती घायल महिला (टिंकू की पत्नी) ने पुलिस प्रशासन पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा:

  • शिकायतों की अनदेखी: क्षेत्रवासियों ने पहले भी कई बार अवैध शराब की बिक्री और मारपीट की लिखित शिकायत की है, लेकिन पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
  • माफिया-पुलिस गठजोड़: पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस शराब माफिया के साथ मिलकर ‘कमीशन’ कमाती है, जिसके कारण अपराधी बेखौफ होकर आम जनता को निशाना बना रहे हैं।

जनता में उबाल: गिरफ्तारी की मांग

​घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस सदर अस्पताल पहुँची और घायलों का बयान दर्ज किया। हालांकि, घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी मुख्य हमलावर और माफिया पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि जल्द ही अवैध शराब के अड्डों को बंद नहीं किया गया और हमलावरों को नहीं पकड़ा गया, तो वे परसुडीह थाने का घेराव करेंगे।

​”हम सिर्फ शांति से रहना चाहते हैं और चाहते हैं कि हमारे मोहल्ले में शराब न बिके। क्या इसके बदले हमें मौत का डर झेलना होगा? पुलिस आखिर किसे बचा रही है?”

एक आक्रोशित क्षेत्रवासी

संवाददाता, क्राइम डेस्क

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धनबाद: LC रोड पर बाइक रेस का खौफनाक अंत; 3 बाइकें टकराईं, 8 दोस्त लहूलुहान, 4 की हालत गंभीर

धनबाद | शनिवार, 17 जनवरी 2026

धनबाद: कोयलांचल की सड़कों पर रफ्तार का शौक एक बार फिर बड़े हादसे का कारण बना। शुक्रवार रात धनबाद के पॉश इलाके लुबी सर्कुलर रोड (LC Road) पर बाइक रेस के दौरान तीन मोटरसाइकिलें आपस में टकरा गईं। इस भीषण भिड़ंत में 8 युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से चार की स्थिति अत्यंत नाजुक बताई जा रही है।

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कैसे हुआ हादसा?

​प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस जांच के अनुसार, सभी आठ युवक आपस में दोस्त हैं। वे शुक्रवार रात सिटी सेंटर चौपाटी से नाश्ता करने के बाद रणधीर वर्मा चौक की ओर लौट रहे थे। इसी दौरान चार-पांच बाइकों पर सवार होकर युवकों ने एलसी रोड पर रेस लगानी शुरू कर दी।

  • अनियंत्रित रफ्तार: जैसे ही बाइकें बीएसएस (BSS) कॉलेज के पास पहुँचीं, तेज रफ्तार के कारण दो बाइकें अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गईं।
  • चेन रिएक्शन: पीछे से तेज गति में आ रही तीसरी बाइक भी संभल नहीं पाई और वह भी इन दोनों बाइकों की चपेट में आ गई।

घायलों की सूची और अस्पताल में हड़कंप

​हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने सभी को शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SNMMCH) पहुँचाया। एक साथ आठ घायलों के पहुँचने से अस्पताल की इमरजेंसी सेवा में हड़कंप मच गया।

घायल युवकों का विवरण:

  1. हीरापुर झरनापाड़ा: छोटू यादव, पप्पू यादव, सोनू यादव।
  2. पुलिस लाइन: लव कुमार रवानी, राजा तिवारी, सौरभ यादव।
  3. धैया: शिव शंकर साव।
  4. बेकारबांध रामनगर: नीरज कुमार।

​डॉक्टरों ने सोनू, पप्पू, छोटू और सौरभ की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें रिम्स (RIMS), रांची रेफर किया है, हालांकि परिजनों ने उन्हें निजी अस्पतालों में भर्ती कराया है।

पुलिस की कार्रवाई

​सूचना मिलते ही धनबाद थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुँची और छानबीन शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से दो बुरी तरह क्षतिग्रस्त बाइकें जब्त की हैं, जिनमें से एक हाई-स्पीड रेसर बाइक है और दूसरी का नंबर JH-10 DB 8173 है।

सड़क सुरक्षा पर सवाल

​यह हादसा एक बार फिर शहर की सड़कों पर देर रात होने वाली स्टंटबाजी और लापरवाही से बाइक चलाने की प्रवृत्ति पर सवाल खड़ा करता है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि हादसे की सटीक कड़ियों को जोड़ा जा सके।

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खादगढ़ा बस स्टैंड पर परिवहन विभाग का छापा: स्लीपर बसों में ‘स्लाइडर’ और ‘पार्टीशन’ पर लगी रोक, सुरक्षा नियमों में बड़ा बदलाव

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: झारखंड की राजधानी रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड पर जिला परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बड़ा अभियान चलाया। केंद्रीय सड़क परिवहन संस्थान (CIRT) के कड़े दिशा-निर्देशों के मद्देनजर, उप परिवहन आयुक्त हरविंश पंडित के नेतृत्व में अधिकारियों ने बसों की गहन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों को सख्त चेतावनी दी।

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21 बसों की जांच, अवैध एक्सटेंशन पर एक्शन

​अभियान के दौरान कुल 21 स्लीपर बसों की जांच की गई। परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन बसों में चेसिस (Chassis) को अवैध रूप से बढ़ाकर बॉडी बनाई गई है, उन्हें तत्काल सड़क से हटाया जाएगा। अब किसी भी बस का पंजीकरण तभी होगा जब उसके पास अधिकृत एजेंसी का फॉर्म-22/22A और विस्तृत लेआउट ड्राइंग (Layout Drawing) होगी।

बसों के भीतर तुरंत हटाने होंगे ये बदलाव

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि कई बसों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी। मौके पर ही निम्नलिखित निर्देश जारी किए गए:

  • स्लाइडर और पार्टीशन: स्लीपर बर्थ में लगे स्लाइडर (पर्दे या दरवाजे) और चालक के केबिन के पार्टीशन को तुरंत हटाने का आदेश दिया गया। कुछ बसों से मौके पर ही इन्हें हटवाया भी गया।
  • आपातकालीन द्वार: इमरजेंसी एग्जिट और रूफ हैच की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और उनमें कोई रुकावट नहीं होनी चाहिए।

अग्नि सुरक्षा: 1 महीने का अल्टीमेटम

​सड़क हादसों और बसों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है:

  1. FDSS अनिवार्य: सभी स्लीपर बसों में फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (FDSS) लगाने के लिए बस ऑपरेटरों को एक महीने का समय दिया गया है।
  2. फायर एक्सटिंग्विशर: हर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का अग्निशमन यंत्र (ग्रीन जोन में) होना अनिवार्य है।

वाहन मालिकों के साथ बैठक

​जांच के बाद खादगढ़ा बस स्टैंड पर बस मालिकों के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई। जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार और मोटरयान निरीक्षक विमल किशोर सिंह ने स्पष्ट किया कि यात्रियों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वाहन स्वामियों ने विभागीय निर्देशों का पालन करने और तय समय-सीमा में आवश्यक बदलाव करने का आश्वासन दिया है।

​”हमारा उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है, और जो ऑपरेटर नियमों का पालन नहीं करेंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”

हरविंश पंडित, उप परिवहन आयुक्त

संवाददाता, सिटी डेस्क

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ईरान संकट: ‘ऑपरेशन वापसी’ शुरू, तेहरान से दिल्ली पहुँचा भारतीयों का पहला जत्था

नई दिल्ली | शनिवार, 17 जनवरी 2026

नई दिल्ली: ईरान में गहराते राजनीतिक संकट, हिंसक प्रदर्शनों और अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप की धमकियों के बीच भारत सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर निकासी अभियान (Evacuation Drive) शुरू कर दिया है। देर रात ईरान की राजधानी तेहरान से विशेष उड़ान के जरिए भारतीय नागरिकों का पहला जत्था दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचा।

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एयरपोर्ट पर भावुक दृश्य: अपनों का इंतज़ार खत्म

​जैसे ही विशेष विमान दिल्ली पहुँचा, वहां पहले से मौजूद परिजनों की आँखों में आँसू और चेहरे पर राहत साफ दिखाई दी। उत्तर प्रदेश के अमरोहा, संभल और बिजनौर से बड़ी संख्या में लोग अपने परिजनों को लेने पहुँचे थे। जियारत के लिए ईरान गए इन परिवारों की वापसी को लेकर पिछले कई दिनों से घरवाले चिंतित थे।

ग्राउंड जीरो का आंखों देखा हाल: क्या कह रहे हैं यात्री?

​ईरान से लौटे यात्रियों ने वहां के हालातों पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है:

  • हिंसक प्रदर्शन: यात्रियों ने पुष्टि की कि वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, आगजनी और गाड़ियों को जलाने की घटनाएं हो रही हैं।
  • राजनीतिक संघर्ष: वहां रजा पहलवी (प्रदर्शनकारी गुट) और अयातुल्ला खामनेई (सत्ता पक्ष) के समर्थकों के बीच भारी टकराव देखा जा रहा है।
  • डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट सेवाएं और आईएसडी कॉल पूरी तरह बंद कर दी गई हैं, जिससे वहां फंसे लोग अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पा रहे थे।

“डर का माहौल नहीं, पर दहशत है”

​वापस लौटे एक यात्री ने बताया, “हमारी फैमिली जियारत के लिए गई थी। उपद्रव हो रहा है, लेकिन ईरानी लोग हमें नुकसान नहीं पहुँचा रहे हैं। उपद्रव के पीछे कुछ बाहरी तत्वों का हाथ बताया जा रहा है।” वहीं एक अन्य यात्री ने कहा कि “मीडिया में हालात थोड़े बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए जा रहे हैं, लेकिन दहशत का माहौल जरूर है।”

दूतावास और भारत सरकार की भूमिका

​यात्रियों ने भारतीय दूतावास की सक्रियता और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि दूतावास के अधिकारी 24/7 सक्रिय हैं और भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव मदद कर रहे हैं। दूतावास ने सभी भारतीयों को सलाह दी है कि वे सुरक्षित स्थानों पर रहें और अनावश्यक बाहर न निकलें।

​”भारत सरकार ने समय रहते कदम उठाया और हमारे अपनों को वापस ले आए। दूतावास ने हर मोड़ पर हमारा साथ दिया।”

एक लौटे हुए यात्री का बयान

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झारखंड निकाय चुनाव: खर्च की सीमा तय, मेयर के लिए 25 लाख और पार्षद के लिए 5 लाख तक की छूट

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: झारखंड में बहुप्रतीक्षित नगर निकाय चुनाव (Municipal Elections 2026) को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में आयोग ने उम्मीदवारों के लिए चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा (Expenditure Limit) निर्धारित कर दी है। यह सीमा जनसंख्या और निकाय के प्रकार के आधार पर तय की गई है।

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किसके लिए कितनी है खर्च की सीमा?

​निर्वाचन आयोग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, उम्मीदवारों के खर्च का विवरण इस प्रकार है:

निकाय का प्रकारपदजनसंख्या/श्रेणीअधिकतम खर्च सीमा
नगर निगममेयर (Mayor)10 लाख से अधिक आबादी₹25,00,000
नगर निगमपार्षद (Ward Councilor)10 लाख से अधिक आबादी₹5,00,000
नगर निगममेयर (Mayor)10 लाख से कम आबादी₹15,00,000
नगर परिषदअध्यक्ष (President)1 लाख से अधिक आबादी₹10,00,000
नगर परिषदपार्षद (Ward Councilor)

नियमों का उल्लंघन पड़ेगा भारी: सदस्यता हो सकती है रद्द

​आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनाव लड़ने वाले सभी उम्मीदवारों को चुनाव समाप्त होने के 30 दिनों के भीतर अपने संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर (RO) को खर्च का पूरा हिसाब देना अनिवार्य है।

  • अयोग्यता की चेतावनी: यदि कोई विजयी प्रत्याशी समय सीमा के भीतर खर्च का ब्यौरा नहीं देता है, तो न केवल उसकी सदस्यता रद्द कर दी जाएगी, बल्कि उसे अगले 3 साल के लिए चुनाव लड़ने से भी रोक दिया जाएगा।
  • अभिकर्ता की जिम्मेदारी: प्रत्याशी द्वारा नियुक्त ‘निर्वाचन अभिकर्ता’ (Election Agent) इस हिसाब-किताब के लिए जिम्मेदार होगा।

प्रचार सामग्री और विरूपण पर सख्त रुख

​प्रचार के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति के विरूपण को लेकर आयोग बेहद सख्त है:

  1. सरकारी भवन: किसी भी सरकारी भवन पर झंडा, बैनर या पोस्टर लगाने पर सीधे FIR दर्ज की जाएगी।
  2. निजी भवन: यदि कोई प्रत्याशी किसी निजी मकान पर प्रचार सामग्री लगाना चाहता है, तो उसे उस भवन मालिक से लिखित सहमति पत्र लेना अनिवार्य होगा।
  3. डिजिटल निगरानी: चुनाव के दौरान सोशल मीडिया और डिजिटल प्रचार के खर्च को भी मुख्य खर्च में जोड़ा जाएगा।

संवाददाता, रांची ब्यूरो

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झारखंड मतदाता सूची संशोधन: भाजपा ने उठाए 18 हजार से अधिक नामों पर सवाल, कांग्रेस की ओर से सिर्फ 2 आपत्तियां

रांची | शनिवार, 17 जनवरी 2026

रांची: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद झारखंड की मतदाता सूची को लेकर राज्य की सियासत गरमा गई है। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों और राजनीतिक दलों द्वारा दर्ज कराई गई आपत्तियों ने चुनावी तैयारियों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की इस कवायद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच के आंकड़ों में जमीन-आसमान का अंतर देखने को मिल रहा है।

आंकड़ों का खेल: भाजपा बनाम कांग्रेस

​निर्वाचन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटवाने के मामले में भाजपा बेहद आक्रामक नजर आ रही है, जबकि कांग्रेस का रुख इसके उलट है:

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विवरणभारतीय जनता पार्टी (BJP)कांग्रेस (INC)
नाम हटाने के लिए आपत्तियां18,89602
नए नाम जोड़ने के आवेदन (सभी दल)478 (कुल)

भाजपा का दावा: ‘फर्जी मतदाताओं’ पर प्रहार

​भाजपा नेताओं का कहना है कि उन्होंने गहन जमीनी सर्वे के बाद ये आपत्तियां दर्ज कराई हैं। पार्टी के अनुसार, सूची में हजारों ऐसे नाम हैं जो या तो मृत हो चुके हैं, क्षेत्र से स्थानांतरित (Shifted) हैं या पूरी तरह अपात्र हैं। निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए इन ‘बोगस’ नामों का हटना अनिवार्य है।

कांग्रेस का तर्क: ‘राजनीति नहीं, पारदर्शिता’

​वहीं, महज 2 नाम हटवाने की आपत्ति पर कांग्रेस ने सफाई दी है कि उनकी पार्टी मतदाता सूची के नाम पर अनावश्यक राजनीति नहीं करना चाहती। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि उन्होंने केवल उन्हीं नामों पर आपत्ति जताई है जहां गड़बड़ी के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

अंतिम तिथि बढ़ी: 19 जनवरी तक का समय

​प्रशासनिक कारणों और बढ़ती आपत्तियों को देखते हुए निर्वाचन विभाग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 19 जनवरी कर दिया है।

  • डिजिटल सत्यापन: इस बार चुनाव आयोग आधार लिंकिंग और डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग कर रहा है।
  • फील्ड वेरिफिकेशन: सभी आपत्तियों की जांच बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर की जाएगी।

चुनाव आयोग का रुख

​चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि हर एक आपत्ति का निष्पक्ष निस्तारण किया जाएगा। आयोग का उद्देश्य तकनीक (Digital Verification) और मैन्युअल जांच के जरिए एक ऐसी सूची तैयार करना है जिसमें फर्जीवाड़े की कोई गुंजाइश न हो। आगामी चुनावों के मद्देनजर इस प्रक्रिया को ‘निष्पक्ष चुनाव की आधारशिला’ माना जा रहा है।

संवाददाता, राजनीति डेस्क

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सीजीपीसी का बड़ा फैसला: बिष्टुपुर जी टाउन गुरुद्वारा कमेटी भंग, पांच सदस्यीय टीम को कमान

जमशेदपुर | शनिवार, 17 जनवरी 2026

जमशेदपुर: सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (CGPC) के प्रधान भगवान सिंह ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए बिष्टुपुर जी टाउन गुरुद्वारा की मौजूदा कमेटी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है। यह कदम गुरुद्वारा साहिब के भीतर जारी आंतरिक विवादों को खत्म करने और निष्पक्ष चुनाव का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उठाया गया है।

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क्यों लिया गया यह सख्त फैसला?

​प्रधान भगवान सिंह ने बताया कि गुरुद्वारा कमेटी के दो गुटों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। विवाद इतना बढ़ गया था कि:

  • कानूनी लड़ाई: दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ न्यायालय में मामले दर्ज करा रखे हैं।
  • व्यवस्था प्रभावित: इस आपसी विवाद के कारण गुरुद्वारा साहिब के धार्मिक और प्रशासनिक कार्यों में बाधा आ रही थी।
  • अनुशासनहीनता: गुरुद्वारा साहिब की गरिमा और शांति बनाए रखने के लिए पुरानी कमेटी को हटाना आवश्यक हो गया था।

पांच सदस्यीय कमेटी संभालेगी जिम्मेदारी

​गुरुद्वारा साहिब के रोजमर्रा के कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और प्रशासनिक संचालन के लिए एक विशेष पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। यही कमेटी आगामी आदेश तक और नए चुनाव संपन्न होने तक पूरी व्यवस्था देखेगी।

नई संचालन एवं चुनाव कमेटी की संरचना:

| पद | नाम |

| चेयरमैन | सरदार शैलेंद्र सिंह |

| सदस्य | नरेंद्र पाल सिंह |

| सदस्य | अमरजीत सिंह |

| सदस्य | सुखविंदर सिंह राजू |

| सदस्य | दलजीत सिंह |

निष्पक्ष चुनाव की तैयारी

​सीजीपीसी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि इस समिति का प्राथमिक उद्देश्य न केवल प्रबंधन को सुचारू रूप से चलाना है, बल्कि बिष्टुपुर गुरुद्वारा के प्रधान पद के लिए निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव आयोजित करना भी है। उन्होंने दोनों गुटों और संगत से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

संवाददाता, जमशेदपुर महानगर

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