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बंगाल में ‘खूनी खेल’ जारी: सुवेंदु के खासमखास की सरेराह हत्या, 12 राउंड गोलियां दागकर फैलाई दहशत

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कोलकाता/मध्यमग्राम: पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन की आहट और चुनावी नतीजों के बाद शुरू हुआ मौत का तांडव थमने का नाम नहीं ले रहा है। राज्य में कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए हमलावरों ने अब बीजेपी के कद्दावर नेता सुवेंदु अधिकारी की ‘दाहिनी आंख’ कहे जाने वाले उनके निजी सहायक (PA) चंद्र नाथ रथ को मौत के घाट उतार दिया है। मध्यमग्राम में जिस तरह सरेराह इस वारदात को अंजाम दिया गया, उसने ममता सरकार के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी है।n711287764177812011789715624742cd6ec497cf37380d6843438488b52ef181c899f555dd7fabace4b92a

शार्प शूटरों का तांडव: पीछा किया, घेरा और फिर छलनी कर दिया सीना

​जानकारी के मुताबिक, यह कोई इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी ‘पॉलिटिकल हिट’ थी। चंद्र नाथ रथ अपनी गाड़ी से जा रहे थे, तभी पेशेवर शार्प शूटरों ने फिल्मी अंदाज में उनकी कार का पीछा किया। हमलावरों ने पहले गाड़ी को ओवरटेक कर उनका रास्ता रोका और फिर चंद सेकंड के भीतर करीब 12 राउंड ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोलियां चंद्र नाथ के सिर, सीने और पेट को पार कर गईं, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। उनके साथ मौजूद एक साथी भी इस हमले में लहूलुहान हुआ है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

“ममता सुवेंदु की जान लेना चाहती हैं” – बीजेपी का सीधा आरोप

​इस जघन्य हत्याकांड के बाद सूबे की सियासत में उबाल आ गया है। बीजेपी नेता अर्जुन सिंह ने सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर निशाना साधते हुए इसे एक बड़ा राजनैतिक षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने दहाड़ते हुए कहा:

“ममता बनर्जी सत्ता जाते देख अब बंगाल को जिहादियों के हवाले कर रही हैं। यह शार्प शूटरों का काम है और साफ दिख रहा है कि अगला निशाना सुवेंदु अधिकारी हैं। अब बंगाल में ‘योगी मॉडल’ के बिना इलाज मुमकिन नहीं है।”

 

​वहीं, केया घोष ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि एक पूर्व एयरफोर्स कर्मी, जो सुवेंदु दा का साया बनकर रहता था, उसे इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह टीएमसी के खूनी खेल के आड़े आ रहा था। उन्होंने साफ चेतावनी दी— “यह बीजेपी की गारंटी है कि हत्यारों को पाताल से भी खोज निकाला जाएगा।”

सुवेंदु अधिकारी के ‘चाणक्य’ थे चंद्र नाथ

​चंद्र नाथ रथ केवल एक पीए नहीं थे, बल्कि पिछले 10 सालों से सुवेंदु अधिकारी के हर राजनैतिक दांव-पेंच के पीछे का दिमाग थे। भवानीपुर के चुनावी रण से लेकर सांगठनिक मजबूती तक, वह सुवेंदु के सबसे भरोसेमंद सिपहसालार थे। उनकी हत्या कर सीधे तौर पर सुवेंदु अधिकारी की राजनैतिक कमर तोड़ने की कोशिश की गई है।

तीसरी धारा न्यूज इस घटना की कड़ी निंदा करता है। क्या बंगाल में लोकतंत्र अब सिर्फ गोलियों के दम पर चलेगा? क्या प्रशासन की चुप्पी अपराधियों को संरक्षण दे रही है? सवाल बड़े हैं, लेकिन जवाब देने वाला कोई नहीं।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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