एक नई सोच, एक नई धारा

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प्रेरणा: पद्मश्री छुटनी महतो के संघर्ष को मिला सम्मान, वीर सिंह देवगम ने अमानवीय कुप्रथा के विरुद्ध उनके साहस को सराहा

सरायकेला-खरसावां / चाईबासा: समाज में व्याप्त अंधविश्वास और डायन-कुप्रथा जैसी कुरीतियों के विरुद्ध दशकों से जंग लड़ रहीं पद्मश्री श्रीमती छुटनी महतो के प्रयासों को एक बार फिर सम्मानित किया गया है। झारखंड जनशक्ति क्रांतिकारी मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष सह सिंहभूम लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी श्री वीर सिंह देवगम ने नववर्ष के उपलक्ष्य में उनसे भेंट कर उनके ऐतिहासिक योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया।

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​”लाखों महिलाओं के लिए जीवनदायिनी बनीं छुटनी महतो”

​मुलाकात के दौरान वीर सिंह देवगम ने कहा कि छुटनी महतो का संघर्ष केवल एक व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि मानवता को बचाने का एक महाअभियान है। उन्होंने रेखांकित किया कि:

  • साहसिक प्रयास: जिस अमानवीय कुप्रथा के नाम पर निर्दोष महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता था, उसके खिलाफ छुटनी महतो ने ढाल बनकर काम किया।
  • जनजागरण का प्रभाव: उनके निरंतर अभियानों के फलस्वरूप अब तक लाखों महिलाओं की जान बचाई जा सकी है और समाज में जागरूकता का प्रसार हुआ है।
  • ऐतिहासिक योगदान: अंधविश्वास को जड़ से मिटाने के लिए उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगा।

​सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ साझा रणनीति पर चर्चा

​सम्मान समारोह के दौरान केवल औपचारिक भेंट ही नहीं हुई, बल्कि सामाजिक बुराइयों को और अधिक सशक्त तरीके से समाप्त करने के लिए संयुक्त प्रयासों पर भी गंभीर चर्चा की गई। वीर सिंह देवगम ने विश्वास दिलाया कि वे और उनका मोर्चा सामाजिक बदलाव के इस अभियान में हर संभव सहयोग प्रदान करेंगे।

​एक नजर पद्मश्री छुटनी महतो के सफर पर

​श्रीमती छुटनी महतो स्वयं कभी इस कुप्रथा का शिकार हुई थीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय इसे अपनी ताकत बनाया। आज वे झारखंड के सरायकेला जिले में एक ‘पुनर्वास केंद्र’ चलाती हैं, जहाँ प्रताड़ित महिलाओं को आश्रय और नया जीवन दिया जाता है। भारत सरकार ने उनके इसी अदम्य साहस के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है।

​निष्कर्ष: समाज के लिए संदेश

​इस मुलाकात ने समाज को यह संदेश दिया है कि जब तक समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले व्यक्तित्वों का सम्मान होगा, तब तक अंधविश्वास जैसी कुरीतियां पैर नहीं पसार पाएंगी। श्री देवगम द्वारा किया गया यह सम्मान समारोह सामाजिक कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है।

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भाजपा में ‘नितिन नबीन’ युग की शुरुआत: 44 वर्षीय युवा नेता ने संभाली राष्ट्रीय अध्यक्ष की कमान

नई दिल्ली | 20 जनवरी, 2026

​भारतीय जनता पार्टी (BJP) के इतिहास में आज 20 जनवरी 2026 का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। बिहार की राजनीति के दिग्गज और पांच बार के विधायक नितिन नबीन ने आधिकारिक तौर पर दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार संभाल लिया है।

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​दिल्ली में आयोजित एक भव्य ‘ताजपोशी’ समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और निवर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उन्हें यह बड़ी जिम्मेदारी सौंपी।

​”आज से नितिन नबीन मेरे बॉस हैं”: प्रधानमंत्री मोदी

​समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भावुक और ऊर्जावान नजर आए। उन्होंने नितिन नबीन को ‘मिलेनियल नेता’ बताते हुए कहा कि वह रेडियो के दौर से एआई (AI) के युग तक के गवाह रहे हैं।

​”नितिन जी उस पीढ़ी से हैं जिसने भारत के बड़े बदलावों को देखा है। उनके पास युवा ऊर्जा और संगठनात्मक अनुभव का अद्भुत मेल है। आज से नितिन नबीन जी मेरे बॉस हैं और मैं पार्टी का एक साधारण कार्यकर्ता।” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

​नामांकन से पदभार तक का सफर

​भाजपा की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत नितिन नबीन का चुनाव सर्वसम्मति से हुआ:

  • संख्या बल: देश के 30 राज्यों में संगठनात्मक चुनाव संपन्न होने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का मार्ग प्रशस्त हुआ।
  • प्रस्तावक: उनके नाम का प्रस्ताव स्वयं पीएम मोदी, अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे दिग्गजों ने रखा।
  • समर्थन: उनके पक्ष में कुल 37 नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे, जो पार्टी के भीतर उनकी स्वीकार्यता को दर्शाता है।

​कौन हैं नितिन नबीन? (राजनीतिक प्रोफाइल)

​44 वर्षीय नितिन नबीन का सफर जमीन से शिखर तक का रहा है। उन्होंने बहुत कम उम्र में राजनीति में कदम रखा और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।

विवरणउपलब्धि
विधायकबांकीपुर (बिहार) से लगातार 5 बार जीत (2006 से 2025 तक)
मंत्री पदबिहार सरकार में सड़क निर्माण, आवास और कानून जैसे अहम मंत्रालय संभाले
संगठनात्मक प्रभारछत्तीसगढ़ और सिक्किम जैसे राज्यों में भाजपा को मजबूत करने में मुख्य भूमिका
विशेषतातकनीक प्रेमी और युवाओं के बीच लोकप्रिय ‘मिलेनियल’ चेहरा

भविष्य की चुनौतियाँ और ‘विकसित भारत’ का संकल्प

​नितिन नबीन के कंधों पर अब 2029 के आम चुनाव की तैयारी और प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि नेतृत्व बदलता है लेकिन पार्टी के आदर्श और दिशा वही रहती है।

​नितिन नबीन का अध्यक्ष बनना न केवल बिहार के लिए गौरव की बात है, बल्कि यह संदेश भी है कि भाजपा में एक सामान्य कार्यकर्ता अपनी मेहनत और निष्ठा के बल पर सर्वोच्च पद तक पहुँच सकता है।

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JPSC Civil Service Exam 2025: झारखंड लोक सेवा आयोग ने शुरू की 142 पदों पर भर्ती प्रक्रिया, जानें परीक्षा का पूरा शेड्यूल

राँची, झारखंड: झारखंड में सरकारी नौकरी का सपना देख रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने सिविल सेवा परीक्षा 2025 के लिए कमर कस ली है। कार्मिक विभाग ने आयोग को 142 नियमित पदों पर नियुक्ति के लिए औपचारिक अधियाचना (प्रस्ताव) भेज दी है। इसके अतिरिक्त 45 बैकलॉग पद भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

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​पदों का विवरण: कहाँ कितनी रिक्तियां?

​इस बार की नियुक्ति में प्रशासनिक और पुलिस सेवा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों में पद शामिल हैं। कार्मिक विभाग ने संकेत दिया है कि भविष्य में इन पदों की संख्या बढ़ाई भी जा सकती है।

सेवा का नामपदों की संख्या
झारखंड पुलिस सेवा (DSP)42
झारखंड प्रशासनिक सेवा28
सहायक नगर आयुक्त10
सूचना सेवा06
प्रोवेशन अधिकारी04
सामाजिक सुरक्षा (सहायक निदेशक)03
अन्य सेवाएँ (कृषि, समादेष्टा आदि)शेष पद

परीक्षा कैलेंडर 2026: नोट कर लें ये तारीखें

​आयोग ने कार्मिक विभाग से अधियाचना मिलने के साथ ही परीक्षा का एक संभावित कार्यक्रम (Tentative Schedule) भी तैयार कर लिया है, जो इस प्रकार है:

  • प्रारंभिक परीक्षा (PT): 8 मार्च 2026
  • मुख्य परीक्षा (Mains): 2, 3 और 4 मई 2026
  • साक्षात्कार (Interview): 16 से 19 जून 2026
  • आयु सीमा गणना: न्यूनतम आयु की गणना 1 अगस्त 2025 के आधार पर की जाएगी।

​युवाओं के लिए बड़ा अवसर

​वर्ष 2003 से 2023 तक JPSC ने कई चरणों में नियुक्तियाँ की हैं, लेकिन 2025 की यह परीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें पुलिस सेवा (42 पद) और प्रशासनिक सेवा के लिए अच्छी संख्या में रिक्तियां हैं। बैकलॉग पदों में प्रशासनिक और शिक्षा सेवा के पदों को शामिल किया गया है, जिससे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

​विशेषज्ञों की राय

​प्रतियोगी परीक्षाओं के विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा कैलेंडर समय पर जारी होने से अभ्यर्थियों को तैयारी के लिए स्पष्ट दिशा मिलेगी। चूंकि मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के बीच समय कम है, इसलिए अभ्यर्थियों को प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ मुख्य परीक्षा की तैयारी भी शुरू कर देनी चाहिए।

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दावोस में झारखंड का डंका: हेमंत सोरेन और टाटा स्टील के बीच ₹11,100 करोड़ का ऐतिहासिक समझौता

दावोस, स्विट्जरलैंड / जमशेदपुर: विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक में झारखंड ने औद्योगिक क्रांति और पर्यावरण संरक्षण के मेल का एक नया अध्याय लिखा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के दूरदर्शी नेतृत्व में झारखंड सरकार और टाटा स्टील ने ₹11,100 करोड़ के एक ऐतिहासिक ‘लेटर ऑफ इंटेंट’ (LoI) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी झारखंड को ‘ग्रीन स्टील’ उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाएगी।

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​ग्रीन स्टील: अगली पीढ़ी की आयरनमेकिंग

​इस समझौते का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा ₹7,000 करोड़ का निवेश है, जो क्रांतिकारी तकनीकों पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य जमशेदपुर में 2030 तक 1 मिलियन टन क्षमता का कार्बन-न्यूट्रल संयंत्र स्थापित करना है।

  • HISARNA तकनीक: यह स्वदेशी कोयले का उपयोग कर कार्बन उत्सर्जन में 80% तक की कमी लाएगी।
  • EASyMelt तकनीक: यह कोक (Coke) की खपत को कम कर उत्सर्जन को 50% तक घटा देगी।

​बुनियादी ढांचे का विस्तार और रोजगार सृजन

​टाटा स्टील के एमडी और सीईओ टी.वी. नरेंद्रन की मौजूदगी में हुए इस समझौते में औद्योगिक सुदृढ़ीकरण के लिए दो बड़े प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई:

  1. टिनप्लेट विस्तार: ₹2,600 करोड़ का निवेश।
  2. कॉम्बी मिल प्रोजेक्ट: ₹1,500 करोड़ का निवेश।

​ये परियोजनाएं न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेंगी, बल्कि हजारों की संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष उच्च-तकनीकी रोजगार के अवसर भी पैदा करेंगी।

​खनन से हरित नवाचार की ओर संक्रमण

​राज्य की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह समझौता झारखंड की बदलती छवि का प्रतीक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि राज्य अब केवल खनन पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर आर्थिक विकास करेगा।

  • औद्योगिक पर्यटन: पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक अलग एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
  • कौशल विकास: टाटा स्टील ने राज्य के ITI संस्थानों को गोद लेने पर सहमति जताई है, जिससे झारखंड के युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण मिल सके।
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जमशेदपुर सिटीजन फोरम का सम्मान समारोह: विकास सिंह को मिला प्रतिष्ठित ‘कॉरपोरेट पुरुष अवॉर्ड’

जमशेदपुर: शहर की प्रमुख सामाजिक संस्था जमशेदपुर सिटीजन फोरम द्वारा वर्ष 2024-25 के वार्षिक सम्मान समारोह का आयोजन बिष्टुपुर स्थित प्रतिष्ठित बेल्डीह क्लब में किया गया। इस भव्य समारोह में शहर के जाने-माने व्यक्तित्व विकास सिंह को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘कॉरपोरेट पुरुष अवॉर्ड’ (Corporate Man of the Year) से नवाजा गया।

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​सम्मान का आधार: नेतृत्व और सामाजिक सरोकार

​श्री सिंह को यह सम्मान कॉरपोरेट जगत में उनके प्रभावी नेतृत्व, निरंतर व्यावसायिक विकास और कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के प्रति उनके गंभीर समर्पण के लिए दिया गया है। फोरम के सदस्यों ने कहा कि विकास सिंह ने यह सिद्ध किया है कि व्यावसायिक सफलता और समाज सेवा एक साथ चल सकते हैं।

​गरिमामय उपस्थिति

​समारोह के दौरान शहर के कई गणमान्य अतिथि, उद्योग प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम में श्री सिंह को निम्नलिखित भेंट कर सम्मानित किया गया:

  • प्रशस्ति पत्र (Citation)
  • स्मृति चिह्न (Memento)
  • अंगवस्त्र (Traditional Stole)

​वक्ताओं के विचार

​समारोह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि ऐसे पुरस्कार न केवल व्यक्ति के प्रयासों को मान्यता देते हैं, बल्कि शहर में एक सकारात्मक और जिम्मेदार कॉरपोरेट संस्कृति को भी बढ़ावा देते हैं। विकास सिंह का व्यक्तित्व आने वाले युवा उद्यमियों के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण है।

​आभार संदेश

​सम्मान ग्रहण करने के बाद विकास सिंह ने जमशेदपुर सिटीजन फोरम का आभार व्यक्त करते हुए कहा:

​”यह पुरस्कार मेरे अकेले का नहीं, बल्कि मेरी टीम और उन सभी लोगों का है जिन्होंने मुझ पर विश्वास जताया। यह सम्मान मुझे भविष्य में सामाजिक हितों के लिए और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने की ऊर्जा देगा।”

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जमशेदपुर: साकची में भीषण सड़क हादसा, खराब ट्रेलर से टकराया तेज रफ्तार टेंपो; चालक की मौत, एक गंभीर

जमशेदपुर: शहर के साकची थाना क्षेत्र स्थित हाथी घोड़ा मंदिर के पास देर रात तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला। सड़क के बीचों-बीच खराब होकर खड़े एक ट्रेलर से पीछे से आ रहे टेंपो की जोरदार भिड़ंत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में टेंपो चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन में सवार एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल है।

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​टक्कर इतनी भीषण कि टेंपो के उड़े परखच्चे

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टेंपो की रफ्तार काफी तेज थी। अंधेरे और सड़क पर बिना किसी संकेत (Reflector) के खड़े ट्रेलर के कारण टेंपो चालक स्थिति को भांप नहीं पाया और सीधे पीछे से टक्कर मार दी।

  • चालक की मौत: टक्कर के बाद टेंपो पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। चालक वाहन के मलबे के बीच इस कदर फंस गया कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
  • बचाव कार्य: स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत कार्य शुरू किया और कड़ी मशक्कत के बाद टेंपो में फंसे दूसरे व्यक्ति को बाहर निकाला। उसे आनन-फानन में एमजीएम अस्पताल (MGM Hospital) में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

​पुलिस की कार्रवाई और यातायात बहाल

​हादसे के बाद साकची थाना पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने:

  1. ​क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त टेंपो और खड़े ट्रेलर को सड़क से हटवाया ताकि यातायात सुचारू हो सके।
  2. ​मृतक के शव को पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
  3. ​मामले की जांच शुरू कर दी गई है कि क्या ट्रेलर चालक ने सड़क पर गाड़ी खड़ी करते समय कोई सुरक्षा चेतावनी या रिफ्लेक्टर का उपयोग किया था या नहीं।

​सुरक्षा पर सवाल: “यमराज” साबित हो रहे हैं बीच सड़क पर खड़े वाहन

​जमशेदपुर की सड़कों पर अक्सर खराब वाहन या ट्रेलर बिना किसी पार्किंग लाइट या रिफ्लेक्टर के खड़े कर दिए जाते हैं, जो रात के समय काल का ग्रास बन रहे हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सड़क पर लापरवाही से खड़े होने वाले भारी वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाए।

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बोकारो में गजराज का तांडव: कार से खींचकर युवक को उतारा मौत के घाट, इलाके में दहशत

बोकारो (गोमिया): झारखंड में हाथियों और इंसानों के बीच संघर्ष एक खूनी मोड़ लेता जा रहा है। ताजा मामला बोकारो जिले के गोमिया थाना क्षेत्र का है, जहाँ जंगली हाथियों के एक झुंड ने एक युवक की बेहद दर्दनाक तरीके से जान ले ली। हाथियों ने न केवल युवक की कार रुकवाई, बल्कि उसे बाहर खींचकर खेतों में ले जाकर कुचल डाला।

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​घटना का विवरण: सब्जी विक्रेता बना शिकार

​मृतक की पहचान रामगढ़ जिले के मुरुमतला निवासी रविंद्र डांगी के रूप में हुई है, जो पेशे से सब्जी विक्रेता था। 18 जनवरी की रात करीब 8 बजे, रविंद्र अपनी मारुति ओम्नी कार से जा रहा था। कांडर गांव के सिमराबेड़ा महतो टोला के पास अचानक 3 से 5 जंगली हाथियों का झुंड सड़क पर आ गया।

  • कैसे हुई घटना: बताया जा रहा है कि कार की हेडलाइट बंद होने के बावजूद हाथियों ने गाड़ी को घेर लिया। ग्रामीणों की चेतावनी को अनसुना कर आगे बढ़ना रविंद्र के लिए जानलेवा साबित हुआ। हाथियों ने उसे कार से बाहर घसीटा और पास के खेत में ले जाकर कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

​वन विभाग की कार्रवाई और मुआवजा

​घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) मौके पर पहुंची। बोकारो वन प्रमंडल के डीएफओ संदीप शिंदे ने बताया:

  1. ​शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
  2. ​नियमों के तहत मृतक के परिजनों को तत्काल आंशिक मुआवजा प्रदान किया गया है, शेष राशि प्रक्रिया पूरी होते ही दी जाएगी।
  3. ​हाथियों का यह झुंड वर्तमान में भोजन और पानी की तलाश में बोकारो और रामगढ़ की सीमाओं पर विचरण कर रहा है।

​ग्रामीणों में आक्रोश: सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

​इस घटना के बाद कांडर और आसपास के इलाकों में भारी दहशत और वन विभाग के प्रति नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इलाके में हाथियों की नियमित आवाजाही के बावजूद विभाग द्वारा पर्याप्त चेतावनी बोर्ड या सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं।

वन विभाग की अपील:

“रात के समय जंगली रास्तों और ‘हाथी गलियारों’ (Elephant Corridors) से गुजरने से बचें। यदि कहीं भी हाथियों का झुंड दिखाई दे, तो उनके करीब जाने या उन्हें छेड़ने के बजाय तुरंत नजदीकी वन चौकी को सूचित करें।”

​विश्लेषण: क्यों बढ़ रहा है खतरा?

​झारखंड के जंगलों में भोजन की कमी और प्राकृतिक गलियारों में बढ़ते मानवीय हस्तक्षेप के कारण हाथी अब रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों की ओर रुख कर रहे हैं। गोमिया की यह घटना बताती है कि हाथियों का व्यवहार अब और अधिक आक्रामक होता जा रहा है।

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जमशेदपुर: लिट्टी पार्टी के बहाने भाजपा नेताओं का मिलन, अखिलेश चौधरी का जन्मदिन भी धूमधाम से मना

जमशेदपुर (बिरसानगर): बिरसानगर क्षेत्र में हाल ही में राजनीतिक और सामाजिक सौहार्द का अनूठा संगम देखने को मिला। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिरसानगर मंडल के पूर्व अध्यक्ष और ‘सेवा ही लक्ष्य’ (युवाशक्ति) के मुख्य संरक्षक श्री बबलू गोप तथा पूर्व मीडिया प्रभारी ओंकार सिंह के आवास पर एक भव्य ‘लिट्टी पार्टी’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व अखिलेश चौधरी का जन्मदिन भी हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

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​सम्मान और शुभकामनाओं का दौर

​कार्यक्रम के दौरान ‘सेवा ही लक्ष्य’ (युवाशक्ति) के संस्थापक पीयूष ठाकुर ने अखिलेश चौधरी को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। जन्मदिन के जश्न के साथ-साथ पारंपरिक लिट्टी-चोखा का आनंद लेते हुए नेताओं ने क्षेत्र के विकास और आपसी समन्वय पर भी चर्चा की।

​दिग्गजों की उपस्थिति

​इस मिलन समारोह में भाजपा और सामाजिक संगठनों के कई प्रमुख चेहरे शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • दिनेश कुमार: भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष
  • मिथिलेश सिंह यादव: प्रदेश कार्य समिति सदस्य
  • अभय पांडे: सह-संयोजक, युवाशक्ति
  • विकास डे: अध्यक्ष, युवाशक्ति

​कार्यक्रम की सफलता में इनका रहा सहयोग

​आयोजन को सफल बनाने में बिरसानगर मंडल के अनुभवी नेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उपस्थिति दर्ज कराने वालों में राम प्रसाद सिंह (पूर्व मंडल अध्यक्ष), जीतेन्द्र कुमार मिश्रा, नरेश प्रसाद सिंह, कृपा गोप, अनुप सिंह, खोखन पांडे, मुकेश मिश्रा, अनिल अग्रवाल, मीनाल बनर्जी, सुदीप घेरा, संतोष साडिल, सुदर्शन दास और दीपक सिंह सहित भारी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता और नागरिक शामिल थे।

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​सामाजिक एकजुटता का संदेश

​बबलू गोप और ओंकार सिंह ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य न केवल उत्सव मनाना है, बल्कि कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच आपसी जुड़ाव को और मजबूत करना है। ‘सेवा ही लक्ष्य’ टीम ने अखिलेश चौधरी के सामाजिक योगदान की सराहना करते हुए उन्हें युवाओं का प्रेरणास्रोत बताया।

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जमीन घोटाला मामला: CM हेमंत सोरेन की ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ पर 30 जनवरी को होगी अहम सुनवाई

राँची, झारखंड। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से जुड़े 8.86 एकड़ जमीन के कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। रांची की विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत अब 30 जनवरी को मुख्यमंत्री द्वारा दायर ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ (आरोप मुक्त करने की याचिका) पर विस्तृत सुनवाई करेगी।

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​मुख्य घटनाक्रम:

  • याचिका दाखिल: मुख्यमंत्री ने 5 दिसंबर 2025 को खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों से मुक्त करने का अनुरोध किया था।
  • हेमंत सोरेन का तर्क: आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया और कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का कोई ठोस सबूत नहीं है।
  • प्रारंभिक सुनवाई: सोमवार को इस याचिका पर शुरुआती दलीलें पेश की गईं, जिसके बाद कोर्ट ने अगली तारीख तय की।

​मामले की पृष्ठभूमि: बड़गाईं जमीन घोटाला

​यह पूरा विवाद रांची के बड़गाईं अंचल स्थित 8.86 एकड़ जमीन के स्वामित्व और दस्तावेजों में कथित हेराफेरी से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस जमीन को अवैध तरीके से हड़पने के लिए सरकारी दस्तावेजों में बदलाव किए गए और इसमें भारी वित्तीय लेन-देन हुआ।

मामले की टाइमलाइन:

  • 31 जनवरी 2024: 10 समन के बाद ED ने लंबी पूछताछ के बाद हेमंत सोरेन को गिरफ्तार किया।
  • जून 2024: लगभग पांच महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद अदालत से उन्हें जमानत मिली।
  • चार्जशीट: ED ने अब तक इस मामले में दो चार्जशीट दाखिल की हैं। पहली चार्जशीट में सीएम समेत भानु प्रताप प्रसाद, विनोद सिंह और अन्य के नाम थे, जबकि दूसरी चार्जशीट में अंतू तिर्की समेत 10 अन्य आरोपी शामिल हैं।

​’डिस्चार्ज पिटीशन’ क्या है और इसके मायने?

​कानूनी प्रक्रिया के तहत, जब किसी आरोपी को लगता है कि उसके खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं हैं, तो वह ‘डिस्चार्ज पिटीशन’ दाखिल कर सकता है।

  • सफल होने पर: यदि अदालत इसे स्वीकार करती है, तो हेमंत सोरेन इस मामले में सभी आरोपों से बरी हो जाएंगे, जो उनके लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत होगी।
  • अस्वीकार होने पर: यदि याचिका खारिज होती है, तो कोर्ट औपचारिक रूप से आरोप तय (Frame Charges) करेगा और केस का ट्रायल (मुकदमा) आगे बढ़ेगा।

​राजनीतिक गलियारों में हलचल

​झारखंड की राजनीति में इस सुनवाई को काफी अहम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री के समर्थक जहां इसे ‘न्याय की जीत’ की उम्मीद बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। 30 जनवरी का फैसला यह तय करेगा कि मुख्यमंत्री को इस कानूनी पचड़े से राहत मिलेगी या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी।

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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पहली शादी के रहते दूसरे रिश्ते से जन्मे बच्चों को नहीं मिलेगा कानूनी उत्तराधिकार

बिलासपुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पारिवारिक रिश्तों और बच्चों की वैधता (Legitimacy) को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महिला की पहली शादी कानूनी रूप से अस्तित्व में है, तो उस दौरान पैदा हुए बच्चों को केवल उसके कानूनी पति की ही संतान माना जाएगा। कोर्ट ने ‘दूसरी पत्नी’ होने का दावा करने वाली महिला और उसकी दो बेटियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने एक प्रतिष्ठित व्यवसायी को पिता घोषित करने की मांग की थी।

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​मुख्य कानूनी निष्कर्ष:

  • अवैध रिश्ता वैध नहीं: कोर्ट ने कहा कि कानूनी रूप से अवैध रिश्ते को भावनात्मक आधार पर वैध नहीं ठहराया जा सकता।
  • कानूनी धारणा (Legal Presumption): जब तक पहली शादी वैध है, तब तक जन्म लेने वाले बच्चे पहले पति की ही संतान कहलाएंगे, भले ही जैविक पिता (Biological Father) कोई और हो।
  • स्वीकारोक्ति का महत्व नहीं: अगर कोई पुरुष स्वेच्छा से किसी बच्चे को अपनी संतान स्वीकार करता है या महिला के साथ लिव-इन में रहता है, तो भी वह कानूनन पिता का दर्जा नहीं ले सकता जब तक कि पहली शादी समाप्त न हो गई हो।

​क्या था पूरा मामला?

​यह मामला बिलासपुर के एक प्रतिष्ठित व्यवसायी से जुड़ा है। दो महिलाओं ने फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि उनकी मां ने वर्ष 1971 में उक्त व्यवसायी के साथ ‘माला-बदली’ कर विवाह किया था। उनका तर्क था कि उनके पिता (व्यवसायी) ने उन्हें हमेशा अपनी बेटियों की तरह माना और समाज के सामने भी यह स्वीकार किया कि वे उनकी संतान हैं।

विवाद का आधार:

याचिकाकर्ताओं की मां का पहला विवाह पहले ही हो चुका था। दावा किया गया कि पहला पति 1984 में घर छोड़कर चला गया था। हालांकि, कोर्ट में यह साबित नहीं हो सका कि पहले पति की मृत्यु हो गई है या कानूनन तलाक हो चुका है।

​कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

​न्यायमूर्ति रजनी दुबे और न्यायमूर्ति एके प्रसाद की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:

  1. साक्ष्यों की कमी: याचिकाकर्ता यह साबित करने में विफल रहे कि महिला और उसके पहले पति के बीच ‘नॉन-एक्सेस’ (संपर्क का अभाव) था।
  2. सरकारी दस्तावेज: कोर्ट ने गौर किया कि याचिकाकर्ताओं के आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में उनके पिता के रूप में मां के पहले पति का ही नाम दर्ज है।
  3. हिंदू विवाह अधिनियम: अधिनियम की धारा 5 और 11 के तहत, पहले विवाह के अस्तित्व में रहते हुए किया गया दूसरा विवाह शून्य (Void) माना जाता है।
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