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जमशेदपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहाँ शहर के अन्य क्षेत्रों में उत्सव का माहौल है, वहीं सोनारी स्थित दोमुंहानी घाट पर प्रशासन की भारी लापरवाही और नाकामी का एक अजब नजारा देखने को मिला। ‘तीसरी धारा न्यूज’ की पड़ताल में यह साफ हुआ कि महापर्व को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हुए।
हैरानी की बात यह है कि छठ जैसे पवित्र त्योहार पर भी दोमुंहानी घाट की साफ-सफाई की सुध लेने वाला कोई नहीं था। घाट पर चारों ओर गंदगी और कचरे का अंबार लगा रहा, जिसके बीच से होकर छठ व्रतियों को नदी तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भारी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद यहाँ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की लापरवाही डराने वाली रही। घाट पर किसी भी प्रकार की रेस्क्यू टीम या गोताखोरों की तैनाती नहीं देखी गई। गहरे पानी वाले इस संगम स्थल पर अगर कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता? प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसी है।
इसके अलावा, यातायात और पार्किंग व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई रही। सही पार्किंग स्लॉट न होने के कारण सड़कों पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे श्रद्धालुओं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
सफाई, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना नगर निकाय और जिला प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए थी। क्या प्रशासन केवल कागजों पर ही तैयारी करता है? आज की इस बदहाली ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था के इस महापर्व पर आम जनता की सुरक्षा और सुविधा की कोई अहमियत नहीं है?
नई दिल्ली: भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में आज एक नया इतिहास रचा गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने एक युगांतकारी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि महिला सैन्य अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की पूर्ण हकदार हैं। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं के मूल्यांकन में होने वाले ‘संस्थागत भेदभाव’ को खत्म करने का आदेश दिया है।
सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सेना की मूल्यांकन प्रक्रिया (ACR) की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने माना कि महिला अधिकारियों के करियर रिकॉर्ड (ACR) इस धारणा के साथ तैयार किए गए थे कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन मिलेगा ही नहीं।
कोर्ट की तीन बड़ी टिप्पणियां:
सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है:
सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में न्याय के हित में आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट ने साफ कहा कि पुरुष शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि स्थायी कमीशन केवल उन्हीं का अधिकार है।
अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों को लागू करने में हुई देरी के कारण कई योग्य महिला अधिकारियों को करियर में नुकसान उठाना पड़ा है। अब इस फैसले के बाद सेना को अपने मूल्यांकन ढांचे में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।
आसान शब्दों में कहें तो स्थायी कमीशन का मतलब है कि एक सैन्य अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) की आयु तक सेना में सेवा दे सकता है। इससे पहले, महिला अधिकारियों को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत 10 से 14 साल तक सेवा करने की अनुमति थी, जिससे वे पेंशन और उच्च पदों से वंचित रह जाती थीं।
मुंबई: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का बिगुल 28 मार्च से बजने जा रहा है। इस बार का आईपीएल केवल मैदान पर रनों की बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि BCCI द्वारा लागू किए गए 7 नए और कड़े नियमों के लिए भी चर्चा में है। बोर्ड ने सभी 10 टीमों के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
ये नियम खेल की तकनीक से ज्यादा टीमों के अनुशासन, प्रैक्टिस और मैनेजमेंट से जुड़े हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे 7 प्रमुख नियम:
BCCI के पहले नियम के मुताबिक, अब किसी भी टीम को उसके मैच वाले दिन मैदान पर प्रैक्टिस या ट्रेनिंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। खिलाड़ियों को मैच के लिए पूरी तरह फ्रेश रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
अब टीमें अपनी मर्जी से अनगिनत प्रैक्टिस मैच नहीं खेल सकेंगी। नए नियम के तहत:
नेट प्रैक्टिस को लेकर भी बोर्ड सख्त हो गया है। कोई भी टीम दूसरी टीम के साथ प्रैक्टिस नेट्स शेयर नहीं करेगी। हर टीम को अभ्यास के लिए नया नेट दिया जाएगा। अगर किसी दूसरी टीम का नेट खाली भी है, तो भी दूसरी टीम उसका उपयोग नहीं कर सकेगी।
जिस पिच पर होम टीम का पहला मैच होना है, उस पर मैच से 4 दिन पहले किसी भी तरह की ट्रेनिंग या प्रैक्टिस वर्जित होगी। खिलाड़ियों को रेंज हिटिंग, थ्रो डाउन और अन्य ड्रिल्स के लिए अलग से विकेट उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रैक्टिस शेड्यूल में हमेशा होम टीम को पहले अभ्यास करने की प्राथमिकता मिलेगी। यदि दो टीमें एक-दूसरे के ठीक बाद अभ्यास करती हैं, तो बोर्ड हर बार नई और तैयार पिच मुहैया कराएगा।
BCCI ने खिलाड़ियों के निजी जीवन और पेशेवर अनुशासन के बीच एक लकीर खींच दी है। अब खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों को उनके साथ टीम बस में ट्रेवल करने की इजाजत नहीं होगी।
खिलाड़ी जब भी होटल से प्रैक्टिस या मैच के लिए निकलेंगे, उन्हें व्यक्तिगत वाहनों के बजाय अनिवार्य रूप से टीम बस का ही उपयोग करना होगा। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और समय की पाबंदी को सुनिश्चित करना है।
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि BCCI इन नियमों के जरिए टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों की ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करना चाहता है। साथ ही, नेट्स और पिच शेयरिंग पर रोक लगाकर टीमों के बीच किसी भी तरह के विवाद या जासूसी की संभावना को खत्म करने की कोशिश की गई है।
मेरठ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है। एआईएमआईएम (AIMIM) के प्रदेश अध्यक्ष हाजी शौकत अली ने मेरठ में आयोजित एक ‘ईद मिलन’ कार्यक्रम के दौरान बेहद विवादित बयान दिया है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रदेश की कानून व्यवस्था और पुलिसिया कार्रवाई को चुनौती देते हुए ‘एनकाउंटर के बदले एनकाउंटर’ की बात कही है।
शौकत अली ने जनसभा को संबोधित करते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) पर तंज कसा और मुस्लिम मतदाताओं से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा:
“आपने जिसके 111 विधायक जिताए (सपा), वे आज कह रहे हैं कि हमारी सरकार नहीं है तो हम क्या कर सकते हैं? मैं आपसे वादा करता हूँ कि आप हमें 111 नहीं, सिर्फ 11 विधायक दे दें, हम अपनी ताकत दिखा देंगे।”
सबसे विवादित बयान देते हुए शौकत अली ने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में किसी मुसलमान का एनकाउंटर होता है, तो एनकाउंटर करने वालों का भी एनकाउंटर होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मदरसों पर ताले लटकाए जा रहे हैं और बिना किसी ठोस सबूत के केवल आरोपों के आधार पर लोगों के घरों पर बुलडोजर चलाए जा रहे हैं। उन्होंने देश की आजादी में मुसलमानों की भूमिका का जिक्र करते हुए कहा कि आज उन्हीं के साथ सबसे ज्यादा ज्यादती हो रही है।
मस्जिदों और मदरसों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए AIMIM नेता ने समर्थकों से अपील की कि वे ‘एक डंडा, एक झंडा और एक नेता’ के सिद्धांत पर एकजुट हों। उन्होंने मेरठ के पुलिस कप्तान के उस बयान पर भी सवाल उठाए जिसमें सड़क पर नमाज पढ़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही गई थी। शौकत अली ने कहा कि कानून सभी के लिए बराबर होना चाहिए और रामनवमी के जुलूसों के दौरान भी वैसी ही सख्ती दिखनी चाहिए।
विकास कार्यों को लेकर सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश का विकास केवल गोरखपुर और सैफई तक सीमित नहीं रहना चाहिए। मेरठ जैसे बड़े शहरों को भी उनका हक मिलना चाहिए।
शौकत अली के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है। बीजेपी और अन्य विपक्षी दलों ने इस बयान की तीखी निंदा की है। जानकारों का मानना है कि इस तरह के बयानों से आने वाले समय में ध्रुवीकरण की राजनीति और तेज हो सकती है। प्रशासन भी इस भड़काऊ भाषण को लेकर वीडियो फुटेज की जांच कर सकता है।
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) ने आरक्षण और धर्म परिवर्तन को लेकर एक बड़ा और युगांतकारी फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि अनुसूचित जाति (SC) से संबंधित कोई व्यक्ति मुस्लिम या ईसाई धर्म अपनाता है, तो उसका अनुसूचित जाति का दर्जा स्वतः ही समाप्त हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में संविधान के 1950 के आदेश की धारा 3 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित जाति का लाभ केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिल सकता है जो उन धर्मों का पालन करते हैं जिन्हें संविधान के तहत अधिसूचित किया गया है। कोर्ट के अनुसार:

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति दूसरे धर्म में जाने के बाद पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में वापस लौटता है और दोबारा SC दर्जे का दावा करता है, तो उसे तीन अनिवार्य शर्तें पूरी करनी होंगी, जिससे यह साबित हो सके कि वह पुनः अपने मूल समुदाय और परंपराओं का हिस्सा बन गया है।
संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जातियों की सूची तैयार की गई है। साल 1950 में जारी राष्ट्रपति के आदेश में स्पष्ट किया गया था कि केवल हिंदू धर्म के दलितों को ही एससी माना जाएगा। बाद में संशोधनों के जरिए इसमें सिख (1956) और बौद्ध (1990) धर्म को भी शामिल किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने अब इसी संवैधानिक व्यवस्था को पुनः पुख्ता किया है।
केंद्र सरकार ने 2022 में पूर्व सीजेआई केजी बालाकृष्णन के नेतृत्व में एक आयोग का गठन किया था, जिसे धर्मांतरित दलितों को आरक्षण देने के मुद्दे पर जांच करनी थी। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना के अनुसार:
“आरक्षण का आधार जाति है, धर्म नहीं। धर्म बदलने के बाद व्यक्ति की सामाजिक और धार्मिक पहचान बदल जाती है। यदि धर्मांतरण करने वालों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाता है, तो यह मूल एससी समुदाय के अधिकारों का हनन और संविधान की मूल भावना के खिलाफ होगा।”
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि आरक्षण की सुविधा केवल उन्हीं समुदायों तक सीमित रहेगी जो भारतीय मूल के उन धर्मों से जुड़े हैं जिन्हें ऐतिहासिक रूप से जातिगत भेदभाव का सामना करना पड़ा और जिन्हें संविधान में मान्यता दी गई है।
जमशेदपुर: शहर के सोनारी थाना क्षेत्र अंतर्गत सी-रोड (C-Road) में मंगलवार की सुबह एक भयानक हादसा होते-होते बचा। एक रिहायशी मकान में रखे फ्रिज में अचानक हुए जोरदार धमाके ने पूरे इलाके को दहला दिया। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि कुछ ही सेकंडों में आग की लपटों ने पूरे कमरे को अपनी आगोश में ले लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना अचानक हुआ कि घर के अंदर मौजूद लोगों को मुख्य दरवाजे से निकलने का मौका तक नहीं मिला। चारों तरफ धुआं और आग फैलती देख, अपनी जान बचाने के लिए घर के सदस्यों को मजबूरी में खिड़की से कूदना पड़ा। इस दौरान इलाके में अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई।
स्थानीय निवासियों ने अपनी ओर से बाल्टियों और उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि उन पर काबू पाना मुश्किल हो रहा था। घटना की सूचना मिलने के करीब आधे घंटे बाद दमकल की गाड़ी मौके पर पहुंची। दमकलकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया, जिससे इसे पड़ोस के घरों में फैलने से रोका जा सका।
राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ है और सभी सुरक्षित हैं। हालांकि, घर में रखा कीमती सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जलकर खाक हो गए हैं। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, लाखों रुपये की संपत्ति का नुकसान हुआ है। सोनारी थाना पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है कि आखिर फ्रिज में इतना शक्तिशाली विस्फोट कैसे हुआ।
इस तरह के हादसों से बचने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं, जिन्हें आप अपने पाठकों के साथ साझा कर सकते हैं:
जमशेदपुर: शहर के औद्योगिक इलाके बर्मामाइंस में मंगलवार की तड़के एक लकड़ी गोदाम में अचानक आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। घटना मिल एंड गोदाम एरिया की है, जहाँ कारोबारी इम्तियाज खान के गोदाम में सुबह करीब 4 बजे लपटें उठने लगीं। राहत की बात यह रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई।
हादसा उस वक्त हुआ जब पूरा इलाका नींद में था। गोदाम में तैनात सुरक्षा गार्ड ने सबसे पहले धुएं का गुबार और आग की लपटें देखीं। गार्ड ने बिना वक्त गंवाए तुरंत गोदाम मालिक को इसकी सूचना दी। यदि गार्ड ने तत्परता न दिखाई होती, तो सूखी लकड़ी होने के कारण आग पूरे रिहायशी और गोदाम इलाके को अपनी चपेट में ले सकती थी।
आग की भयावहता को देखते हुए तत्काल सूचना अग्निशमन विभाग को दी गई। मौके पर टाटा स्टील की फायर ब्रिगेड और झारखंड अग्निशमन विभाग की कई गाड़ियां पहुँचीं। दमकलकर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद घंटों की कोशिशों के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया।
प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, आग मुख्य रूप से गोदाम में रखे लकड़ी के बोटों (Logs) तक ही सीमित रही। राहत की बात यह है कि गोदाम के भीतर स्थित कीमती मशीनें सुरक्षित हैं। घटना के समय कोई कर्मचारी अंदर नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। मौके पर मौजूद अनिकेत ने बताया कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि संपत्ति के कुल नुकसान का सटीक आकलन अभी किया जा रहा है।
आग लगने के कारणों का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है, लेकिन प्राथमिक रूप से इसे शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग मामले की जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।
नई दिल्ली: देश की राजधानी से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज खबर सामने आई है। दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता को एक धमकी भरा ईमेल मिला है, जिसमें विधानसभा भवन (असेंबली बिल्डिंग) और दिल्ली मेट्रो स्टेशन को बम से उड़ाने की बात कही गई है। इस धमकी के बाद सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं।
दिल्ली विधानसभा स्पीकर कार्यालय ने मंगलवार (24 मार्च) को इस ईमेल की पुष्टि की। जानकारी के अनुसार, इस मेल में न केवल स्पीकर विजेंद्र गुप्ता, बल्कि देश और दिल्ली के कई शीर्ष नेताओं को भी निशाना बनाने की धमकी दी गई है। मेल में निम्नलिखित दिग्गजों के नाम शामिल हैं:
धमकी भरे मेल में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दिल्ली विधानसभा भवन के साथ-साथ दिल्ली मेट्रो स्टेशन को भी बम से दहला दिया जाएगा। मंगलवार सुबह जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, सुरक्षा बलों ने विधानसभा परिसर और प्रमुख मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा बढ़ा दी है।
दिल्ली पुलिस और साइबर सेल अब इस ईमेल के सोर्स (IP Address) का पता लगाने में जुट गई है। शुरुआती जांच में इसे किसी बड़ी साजिश या दहशत फैलाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि वे इस धमकी को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं और संबंधित नेताओं की सुरक्षा व्यवस्था की भी समीक्षा की जा रही है।
इस घटना के बाद दिल्ली की राजनीति में हड़कंप मच गया है। विधानसभा के भीतर और बाहर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय और एलजी सचिवालय को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है।
जमशेदपुर: आस्था के महापर्व चैती छठ को लेकर लौहनगरी जमशेदपुर के सिदगोड़ा स्थित प्रसिद्ध सूर्य मंदिर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सूर्य मंदिर समिति ने व्रतधारियों की सुविधा, सुरक्षा और स्वच्छता को प्राथमिकता देते हुए व्यापक इंतजाम किए हैं।
सूर्य मंदिर समिति के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया कि समिति के मुख्य संरक्षक एवं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास तथा संरक्षक चंद्रगुप्त सिंह के कुशल मार्गदर्शन में तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया है। मंदिर परिसर के दोनों तालाबों (छठ घाटों) की गहन सफाई कराई गई है और उनमें स्वच्छ जल भरा गया है। पूरे परिसर को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है।
समिति द्वारा छठ व्रतियों की सेवा के लिए विशेष शिविर लगाए गए हैं:
भारी भीड़ की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मंदिर समिति के पदाधिकारी और सैकड़ों स्वयंसेवक मुस्तैदी से तैनात रहेंगे। अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालु “पहले आओ-पहले पाओ” की तर्ज पर घाटों पर स्थान ग्रहण कर भगवान भास्कर को अर्घ्य दे सकेंगे।
समय सारणी:
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर के सभी घाटों के प्रवेश द्वार दोपहर 2 बजे खोल दिए जाएंगे। समिति ने सभी शहरवासियों से सूर्य मंदिर आकर इस पावन पर्व में सम्मिलित होने और भगवान भास्कर का आशीर्वाद लेने का आग्रह किया है।
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पर्व का दिन |
तिथि |
मुख्य अनुष्ठान |
अर्घ्य का समय (अनुमानित) |
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तीसरा दिन |
24 मार्च (मंगलवार) |
संध्या अर्घ्य (डूबते सूर्य को अर्घ्य) |
सायं 05:58 बजे |
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चौथा दिन |
25 मार्च (बुधवार) |
उषा अर्घ्य (उगते सूर्य को अर्घ्य) |
प्रातः 5:46 बजे |
नोट: सूर्योदय और सूर्यास्त के समय में स्थानीय भौगोलिक स्थिति के अनुसार 1-2 मिनट का अंतर हो सकता है। सिदगोड़ा सूर्य मंदिर के द्वार मंगलवार दोपहर 02:00 बजे से ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे।
जमशेदपुर: 23 मार्च को शहीद दिवस के अवसर पर नेताजी सुभाष विश्वविद्यालय में एक विशेष श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय परिवार ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर नायकों—भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव—के बलिदान को याद किया और युवाओं में देशभक्ति की अलख जगाई।
कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत वीर शहीदों की तस्वीरों पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस दौरान परिसर में उपस्थित सभी पदाधिकारियों, प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं ने दो मिनट का मौन रखकर देश के सपूतों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। वक्ताओं ने अपने संबोधन में 1931 के उस ऐतिहासिक बलिदान का जिक्र किया जिसने पूरे देश में आजादी की ज्वाला सुलगा दी थी।

विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मदन मोहन सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा:
“23 मार्च केवल एक तिथि नहीं, बल्कि अदम्य साहस का प्रतीक है। हमें शहीदों के आदर्शों को केवल याद नहीं करना है, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए।”
कुलपति प्रो. डॉ. प्रभात कुमार पाणि ने युवाओं को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराते हुए कहा कि आज की स्वतंत्रता अनगिनत बलिदानों का फल है, इसलिए अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग देश के विकास के लिए करें। वहीं, कुलसचिव नागेंद्र सिंह ने जोर दिया कि ऐसे कार्यक्रम सामाजिक चेतना और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने के लिए आवश्यक हैं।
इस अवसर पर प्रशासनिक अधिष्ठाता प्रो. नाजिम खान, अकादमिक अधिष्ठाता प्रो. दिलीप शोम, मुख्य वित्त अधिकारी वाई ज्योति, और परीक्षा नियंत्रक प्रो. मोईज़ अशरफ़ सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष और शिक्षक मौजूद रहे।
छात्रों का संकल्प:
कार्यक्रम के अंत में बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में देश के प्रति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करेंगे और शहीदों के सपनों का भारत बनाने में अपनी भूमिका निभाएंगे।