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लोकसभा चुनाव-2024 के पहले चरण के नामांकन के लिए आज को अधिसूचना जारी की जाएगी। इस चरण में 21 राज्यों की 102 सीटों पर 19 अप्रैल को मतदान होगा। इन सीटों पर उम्मीदवार 27 मार्च तक नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
नामांकन पत्रों की जांच 28 मार्च को होगी और 30 मार्च तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
बिहार में होली के चलते नामांकन पत्र 28 मार्च तक दाखिल किए जा सकेंगे। पहले चरण में सबसे ज्यादा तमिलनाडु की 39 सीटों पर चुनाव होगा। इसके साथ, राजस्थान की 12, उत्तर प्रदेश की 8, मध्य प्रदेश की 6, असम, उत्तराखंड और महाराष्ट्र की 5-5, बिहार की 4, पश्चिम बंगाल की 3, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर व मेघालय की 2-2, मिजोरम, नगालैंड, अंडमान-निकोबार, जम्मू-कश्मीर, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, सिक्किम, छत्तीसगढ़ और त्रिपुरा की 1-1 सीट पर मतदान होगा।




रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के विकास का ब्योरा देते हुए कहा कि देश की पहली बुलेट ट्रेन वर्ष 2026 में चलने लगेगी। यह हाईस्पीड ट्रेन अहमदाबाद-मुंबई मार्ग पर सूरत से एक खंड पर चलेगी।
इसके अलावा उन्होंने यह भी बताया कि इस साल के अंत तक भारत में पहले स्वदेशी सेमीकंडक्टर चिप को तैयार कर लिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने मंगलवार को X पर पोस्ट में कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी के तीसरे कार्यकाल में बुलेट ट्रेन के लिए तैयार रहें। विभिन्न स्टेशनों के निर्माण में खासी प्रगति हुई है।

320 किमी प्रति घंटा होगी स्पीड
मुंबई से ठाणे के लिए समुद्र के अंदर सुरंग बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। इससे पहले रेल मंत्रालय ने बुलेट ट्रेन का एक वीडियो साझा करते हुए कहा था कि दो शहरों के बीच 508 किमी लंबे मार्ग की दूरी महज दो घंटे में तय हो जाएगी। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 1.08 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है। इस मार्ग पर बुलेट ट्रेन की अधिकतम रफ्तार 320 किमी प्रति घंटा रहने की उम्मीद है।
स्लैब ट्रैक प्रणाली तकनीक का हुआ यूज
इस कारिडोर के लिए भारत में पहली बार स्लैब ट्रैक प्रणाली तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। बुलेट ट्रेन इस रूट पर कुल 24 नदी पुलों, 28 स्टील ब्रिज और सात पर्वतीय सुरंगों को पार करेगी। इस कॉरिडोर में सात किमी लंबी समुद्र के अंदर टनल भी होगी।

सेमीकंडक्टर चिप को लेकर भी दी जानकारी
अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि इस साल के अंत तक दिसंबर महीने में देश की पहली सेमीकंडक्टर चिप को लांच कर दिया जाएगा। इसे बनाने का पहला प्रयास बहुत साल पहले 1962 में किया गया था। लेकिन जब तक आपकी नीति सही नहीं होती है, सफलता नहीं मिलती है। सही प्रतिबद्धता के साथ इसे साकार किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रुचि ली है। जब इस विषय पर चर्चा के लिए उनसे 45 मिनट का समय मांगा गया, तो उन्होंने इस पर लगातार तीन घंटे तक चर्चा की। विगत एक मार्च को उन्होंने घोषणा की कि भारत सेमीकंडक्टर के निर्माण में ग्लोबल हब बनेगा।

कांग्रेस इस लोकसभा चुनाव में जिस चुनावी घोषणापत्र के साथ उतरने जा रही है वो पार्टी के पांच ‘न्याय’ और 25 ‘गारंटी’ की घोषणा पर आधारित होगा। पार्टी का कहना है कि यह दस्तावेज उसके लिए ‘न्याय पत्र’ है जिसे वह ‘घर-घर गारंटी’ के मंत्र के साथ देश के हर मतदाता तक पहुंचाने का प्रयास करेगी।
कांग्रेस कार्य समिति ने इस घोषणापत्र के मसौदे पर साढ़े तीन घंटे की चर्चा के बाद पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को इसे मंजूर करने और जारी करने की तिथि निर्धारित करने के लिए अधिकृत किया।
घोषणापत्र को लेकर चर्चा हुई
कांग्रेस घोषणापत्र में जिन पांच ‘न्याय’ और 25 ‘गारंटी’ का प्रमुख रूप से उल्लेख होगा उनकी घोषणा ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान की गयी। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘आज कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में हमारे 5 न्याय और 25 गारंटियों समेत पार्टी के घोषणापत्र पर गहन चर्चा हुई। ‘भारत जोड़ो यात्रा’ और ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के माध्यम से हम लगातार गांव-गांव, गली-गली लोगों के बीच गए और ‘देश की आवाज़’ सुनी। हमने लोगों के साथ हो रहे अन्याय और उनके जीवन के संघर्षों को करीब से जाना और समझा।

राहुल गांधी ने कही ये बात
उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए हमारा घोषणा पत्र और गारंटी महज़ दस्तावेज नहीं, करोड़ों देशवासियों के साथ हुए संवाद से निकला रोडमैप है, जो रोज़गार क्रांति और अधिकारपूर्ण भागीदारी के माध्यम से हर वर्ग का जीवन बदलने जा रहा है।’’ राहुल गांधी का कहना है, ‘‘हम 5 न्याय का संकल्प लेकर किसानों, युवाओं, श्रमिकों, महिलाओं और वंचितों के बीच जाएंगे और सीधे तौर पर लोगों के जीवन से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस की गारंटियां देशवासियों के जीवन में खुशहाली लाने का संकल्प हैं।

क्या है कांग्रेस का पांच न्याय
कांग्रेस के अनुसार, उसका घोषणापत्र पार्टी के पांच न्याय – ‘हिस्सेदारी न्याय’, ‘किसान न्याय’, ‘नारी न्याय’, ‘श्रमिक न्याय’ और ‘युवा न्याय’- पर आधारित होगा। पार्टी ने ‘युवा न्याय’ के तहत जिन पांच गारंटी की बात की है उनमें 30 लाख सरकारी नौकरियां देने और युवाओं को एक साल के लिए प्रशिक्षुता कार्यक्रम के तहत एक लाख रुपये देने का वादा शामिल है। पार्टी ने ‘हिस्सेदारी न्याय’ के तहत जाति जनगणना कराने और आरक्षण की 50 प्रतिशत की सीमा खत्म करने की ‘गारंटी’ दी है। उसने ‘किसान न्याय’ के तहत न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा, कर्ज माफी आयोग के गठन तथा जीएसटी मुक्त खेती का वादा किया है।
शहरी रोजगार गारंटी का वादा
कांग्रेस ने ‘श्रमिक न्याय’ के तहत मजदूरों को स्वास्थ्य का अधिकार देने, न्यूनतम मजूदरी 400 रुपये प्रतिदिन सुनिश्चित करने और शहरी रोजगार गारंटी का वादा किया है। उसने ‘नारी न्याय’ के अंतर्गत ‘महालक्ष्मी’ गारंटी के तहत गरीब परिवारों की महिलाओं को एक-एक लाख रुपये प्रति वर्ष देने समेत कई वादे किए हैं।

देश में सफलतापूर्वक लोकसभा चुनाव कराने को लेकर चुनाव आयोग पूरी तैयारियों से लगा हुआ है।इस बीच, पोस्टल वोटिंग को लेकर चुनाव आयोग ने नई अधिसूचना जारी की है। आयोग ने इस अधिसूचना में बताया है कि अब मीडियाकर्मी भी चुनाव में अपना प्रतिभाग कर सकेंगे।
आयोग ने उन्हें पोस्टल बैलेट की सुविधा देने का निर्णय लिया है। इसके मुताबिक, वोटिंग ड्यूटी में लगे सभी मीडियाकर्मी अपनी तैनाती स्थल से ही पोस्टल बैलेट के जरिए वोट डाल सकेंगे। हालांकि ये सुविधा केवल उन्हें ही मिलेगी जिनके लिए चुनाव आयोग ने प्राधिकार पत्र जारी किया है। पत्रकारों के साथ ही आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों को भी यह सुविधा मिलेगी।

चुनाव आयोग के एक प्रवक्ता ने इस बारे में बताया कि दिल्ली में जो मीडियाकर्मी मतदान के दिन कवरेज के लिए आयोग द्वारा अधिकृत हैं, वे डाक मतपत्रों के माध्यम से अपना वोट डालने के विकल्प का लाभ उठा सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने संसदीय क्षेत्र के संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से फॉर्म 12डी लेना होगा। हालांकि उनके पास मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट से भी फॉर्म डाउनलोड करने का भी विकल्प होगा। चुनाव आयोग (ईसी) ने इस सुविधा के लिए सभी राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ अपनी अधिसूचना साझा की है।
गौरतलब है कि मतदान दिवस की कवरेज के लिए पत्रकारों और आवश्यक सेवाओं में लगे लोग विधानसभा चुनावों में पहले ही इस सुविधा का लाभ ले रहे हैं। अब यह सुविधा लोकसभा चुनावों के लिए बढ़ा दी गई है। बता दें कि आवश्यक सेवाओं में मेट्रो, रेलवे और स्वास्थ्य देखभाल जैसे क्षेत्रों के लोग शामिल हैं।


आगामी लोकसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पहली लिस्ट में उत्तर प्रदेश से 51 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया है। अब बाकी बचे हुए कैंडिडेट्स को लेकर पार्टी चौंका सकती है।
सूत्रों के अनुसार, रायबरेली से मेरठ तक पार्टी कई नए चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी में है। गांधी परिवार का गढ़ रायबरेली से बीजेपी नूपुर शर्मा को टिकट दे सकती है तो मेरठ से प्रख्यात कवि कुमार विश्वास को टिकट देने की अटकलें लग रही हैं। इसके अलावा, बृजभूषण शरण सिंह का भी टिकट कट सकता है।
अपनी पहली लिस्ट में बीजेपी ने कुल 195 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी, जिसमें 51 यूपी के थे। इसमें बृजभूषण, वरुण गांधी, मेनका गांधी आदि के नाम नहीं होने की वजह से कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे। कहा जा रहा है कि पार्टी कई जगह नए उम्मीदवार देने की तैयारी कर रही है। वरुण और बृजभूषण के टिकट काटे जा सकते हैं। वरुण गांधी की पीलीभीत सीट से जहां योगी सरकार में मंत्री जितिन प्रसाद या संजय गंगवार को उतारा जा सकता है तो बृजभूषण सिंह की जगह कैसरगंज से उनकी पत्नी केतकी का नाम भी चल रहा है। अगर उनकी पत्नी को टिकट नहीं मिला तो बेटे प्रतीक को भी चुनाव लड़वाया जा सकता है। बृजभूषण पिछले कई बार से सांसद हैं और अपने क्षेत्र में खासा दबदबा रखते हैं। पिछले साल महिला पहलवानों ने यौन शोषण का आरोप लगाया, जिसके बाद अब पार्टी उनका टिकट काटकर उनके ही परिवार से किसी अन्य को देने की तैयारी कर रही है।

वहीं, मेरठ सीट से बीजेपी जाने-माने कवि कुमार विश्वास को चुनाव लड़वा सकती है। कुमार विश्वास के पहले भी कई बार राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने की अटकलें लगती रही हैं। सूत्रों के अनुसार, यूपी कोर कमेटी की बैठक में कुमार विश्वास के नाम की भी चर्चा हुई है और सीईसी उनके नाम पर मुहर लगा सकती है। अभी मेरठ से राजेंद्र अग्रवाल सांसद हैं। इससे पूर्व टीवी सीरियल रामायण के चर्चित नाम अरुण गोविल के नाम भी पर विचार हो चुका है। पार्टी वैश्य, ब्राह्रण, ठाकुर के समीकरण को विशेष तौर पर ध्यान में रखकर अपने उम्मीदवार पर विचार कर रही है।

रायबरेली से कौन लड़ेगा?
यूपी की हाईप्रोफाइल सीट रायबरेली से सोनिया गांधी लगातार जीतती आई हैं। हालांकि, इस बार उन्होंने स्वास्थ्य का हवाला देते हुए राजस्थान से राज्यसभा चली गईं। इसके बाद कयास लगाए जाने लगे कि कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। हालांकि, कई रिपोर्ट्स ऐसी भी आईं कि प्रियंका शायद यह लोकसभा चुनाव न लड़ें। अब रायबरेली की अहम सीट पर बीजेपी चौंकाने वाला नाम देने जा रही है। यहां पार्टी नूपुर शर्मा को टिकट दे सकती है। नूपुर को बीजेपी ने पैगंबर विवाद के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था। उन्हें जान से मारने की धमकियां भी मिली थीं। लंबे समय तक वह ज्यादातर सार्वजनिक कार्यक्रमों में नहीं दिखाई देती थीं, लेकिन पिछले कुछ समय में वह कार्यक्रमों में दिखने लगी हैं। सोशल मीडिया पर भी नूपुर चर्चित नाम रही हैं। ऐसे में बीजेपी उन्हें रायबरेली सीट से मैदान में उतार सकती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले 5 दिनों से दक्षिण भारत के दौरे पर हैं. इसी क्रम में पीएम मंगलवार सुबह केरल के पलक्कड़ में रोड शो के बाद तमिलनाडु के सेलम पहुंचे, जहां उन्होंने रोड शो कर एक जनसभा को संबोधित किया.
इस दौरान उन्होंने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक सहित तमिलनाडु की सत्ता पर काबिज डीएमके पर जमकर निशाना साधा.
पीएम मोदी ने सेलम में जनसभा को संबोधित INDI अलायंस के नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि INDI गठबंधन जानबूझकर बार-बार हिंदू धर्म का अपमान कर रहा है. हिंदू धर्म के खिलाफ उनके सभी बयान सोच-समझकर बोले जाते हैं. वे कभी भी किसी दूसरे धर्म का अपमान नहीं करते. उनके मुंह से किसी दूसरे धर्म के खिलाफ एक शब्द भी नहीं निकलता, लेकिन वो हिंदू धर्म को गाली देने में एक सेकंड भी बर्बाद नहीं करते. ऐसा कैसे हो सकता है?

‘इंडिया ब्लॉक ने जानबूझकर किया सेनगोल का विरोध’
पीएम ने आगे कहा कि इन्होंने नई संसद भवन में पवित्र सेनगोल की स्थापना का विरोध किया. सेनगोल टीएन में मठों से जुड़ा हुआ है. इसीलिए इंडिया ब्लॉक ने जानबूझकर सेनगोल का अपमान किया जो लोग शक्ति को नष्ट करने की सोचेंगे उनका विनाश अवश्य होगा. ऐसे विचारों को हराने की लड़ाई तमिलनाडु द्वारा पहले चरण 19 अप्रैल को होने वाले मतदान से शुरू हो जाएगी.
‘DMK ने महिला आरक्षण बिल का किया विरोध’
प्रधानमंत्री ने जनसभा में डीएमके सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब जयललिता जीवित थीं तो आप सभी जानते हैं कि डीएमके ने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था. यही डीएमके का असली चेहरा है. इसीलिए उन्होंने संसद में भी महिला आरक्षण बिल का विरोध किया था. राज्य में महिलाओं के खिलाफ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं.

‘एक ही सिक्के के दो पहलू हैं DMK-कांग्रेस’
पीएम मोदी ने यह भी कहा कि डीएमके और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. डीएमके और कांग्रेस का मतलब है बड़ा भ्रष्टाचार और एक ही परिवार का शासन. जब देश को कांग्रेस से मुक्ति मिली तो देश 5जी तकनीक तक पहुंच गया है, लेकिन तमिलनाडु में डीएमके है जो खुद अपना 5जी चला रही है. यानी एक ही परिवार की 5वीं पीढ़ी तमिलनाडु पर कब्जा कर रही है. 5जी परिवार 2जी घोटाले में शामिल था और दुनिया में तमिलनाडु का नाम खराब किया. अगर मैं उनके घोटालों की संख्या गिनना शुरू कर दूं तो पूरा दिन निकल जाएगा.
पीएम मोदी ने के. कामराज की जमकर की तारीफ
प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि मैं आज जीके मूपनार को याद करना चाहता हूं. वो राष्ट्रीय राजनीति में बहुत आगे तक जा सकते थे. वो देश के पीएम बन सकते थे, लेकिन वंशवादी पार्टियों ने उन्हें आगे नहीं बढ़ने दिया. तमिलनाडु एक ऐसी भूमि है, जिसने के. कामराज जैसे महान नेता दिए हैं. चाहे वह राजनीति हो या मध्याह्न भोजन योजना जैसी उनकी क्रांतिकारी कल्याणकारी योजनाएं, वह हमारे लिए एक बड़ी प्रेरणा रहे हैं. उन्होंने गरीब बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई. मैं दुनिया को यह बताने के मिशन पर हूं कि मेरा देश दुनिया की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक तमिल का घर है. ये हमारे देश का दुर्भाग्य है कि पहले किसी ने ऐसा करने की कोशिश नहीं की.




लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जनता दल यूनाइटेड ने कमर कस ली है। जेडीयू बिहार की 16 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस सबके बीच नीतीश कुमार को बड़ा झटका भी लगा है। जदयू के दिग्गज नेता अली अशरफ फातमी ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
उन्होंने अपने इस्तीफे को लेकर खुद जानकारी दी है।
अली अशरफ फातमी ने कहा, “मैंने आज इस्तीफा दे दिया है। मैंने राष्ट्रीय महासचिव के पद से भी इस्तीफा दे दिया है। कारण व्यक्तिगत नहीं है… महागठबंधन सरकार बिहार में ठीक से चल रही थी। नीतीश कुमार की छवि स्थापित हो रही थी और उनके उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के कार्यों की भी सराहना हो रही थी”।

इसलिए छोड़ी पार्टी
उन्होंने आगे कहा कि संविधान और भारत के भविष्य को बचाने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इंडी गठबंधन चुनाव जीते। मैं इस बात से आहत था कि जदयू इंडी छोड़ एनडीए में चली गई और इसलिए मुझे पार्टी छोड़ने और अन्य विकल्प तलाशने के लिए मजबूर होना पड़ा।


लोकसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान साथ ही राजनीतिक दलों के नेता अपने दौरा तेज कर दिए हैं. चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी सांसद डिंपल यादव आज यानी मंगलवार (19 मार्च) को मैनपुरी पहुंची हैं.
डिंपल ऐसे वक्त में मैनपुरी पहुंची हैं जब अपर्णा यादव बिष्ट के भी इस सीट से चुनाव लड़ने की चर्चा है. डिंपल यादव मैनपुरी पहुंचकर लोगों से मुलाकात की.सीथ ही उन्होंने पार्टी के नेताओं और कर्यकर्ताओं से भी मुलाकात की है. उन्होंने लोगों के बीच पहुंचर जनसंवाद किया.
मैनपुरी पहुंचीं सपा सांसद डिंपल यादव ने अपर्णा यादव के मैनपुरी से चुनाव लड़ने की चर्चा पर दी प्रतिक्रिया दी है. डिंपल यादव ने कहा कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव) की कर्मभूमि रही है मैनपुरी, मुलायम सिंह यादव का उन सब के साथ भावनात्मक रिश्ता रहा है. बहुत अच्छा चुनाव होगा चाहे कोई भी आ जाए. बता दें कि डिंपल यादव ने मुलाकात के बहाने चुनाव प्रचार अभियान की शुरूआत कर दी है.समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनाए जाने पर मैनपुरी में पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया.

मैनपुरी से एक बार फिर चुनाव लड़ेंगी डिंपल यादव
सपा ने डिंपल यादव को मैनपुरी सीट से प्रत्याशी घोषित किया है. वर्तमान में डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं. मैनपुरी सीट पर लंबे समय से समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है. मैनपुरी लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ है. मैनपुरी लोकसभा सीट से प्रत्याशी बनाई गईं डिंपल यादव अपनी शालीनता के लिए जानी जाती हैं. डिंपल यादव भारतीय राजनीति के बड़े घराने सैफई परिवार की बहु हैं. समाजवादी पार्टी के संस्थापक और दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव की पुत्रवधू हैं, इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की धर्मपत्नी है.

बीजेपी बनाएगी अपर्णा यादव को मैनपुरी से उम्मीदवार?
अपर्णा यादव यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की दूसरी पत्नी साधना गुप्ता के बेटे प्रतीक यादव की पत्नी हैं.उन्होंने कुछ दिन पहले ही सीएम योगी से मुलाकात की थी और बीजेपी का दामन थाम लिया है.अपर्णा यादव की सीएम योगी से मुलाकात के बाद मैनपुरी से बीजेपी उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा तेज है. ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि बीजेपी डिंपल यादव के सामने अपर्णा यादव को टिकट देगी।

लोकसभा चुनाव से ठीक पहले झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) में जारी कलह खुलकर सामने आ गया. झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी और जामा विधानसभा सीट से जेएमएम की विधायक सीता सोरेन ने आज भाजपा ज्वाइन कर ली.

प्रमुख शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन ने बीजेपी की सदस्यता ले ली है. झारखंड में बीजेपी के प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद लक्ष्मीकांत वाजपेयी और पार्टी के राष्ट्रीय सचिव विनोद तावड़े ने उनका स्वागत किया और पार्टी की सदस्यता दिलाई.

सीता सोरेन ने कुछ घंटे पहले ही JMM छोड़ने का ऐलान किया था. उसके बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया था. सीता, दुर्गा सोरेन की पत्नी और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की पत्नी हैं.
‘बीजेपी की ताकत बढ़ी है’
विनोद तावड़े ने कहा, झारखंड की एक नेता और बहन सीता सोरेन बीजेपी में शामिल हुई हैं. उनके बीजेपी में आने से पार्टी की ताकत बढ़ी है. लोकसभा चुनाव के बाद वहां इसका अलग असर दिखेगा. हम झारखंड में शक्तिशाली हो रहे हैं. हम उनका स्वागत करते हैं. वे आदिवासी के कार्यक्रम में अपनी पूरी शक्ति लगाएंगी.

‘संघर्ष की पर्याय हैं सीता सोरेन’
लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने कहा, JMM में रहते हुए भी सीता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष किया. उन्होंने दिल्ली तक आवाज उठाई है. आदिवासी बहन संघर्ष की पर्याय हैं.
विकास से कोसों दूर है झारखंड’
सीता सोरेन ने कहा, आज हम विशाल परिवार में शामिल हो रहे हैं. जिस तरह से नरेंद्र मोदी का सोच पूरे भारत और विश्व को देखने को मिल रहा है. आए दिन विकास के कार्य हो रहे हैं. सभी मिलकर देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं. आज हर कोई इस परिवार में जुड़ रहा है. मैंने भी झारखंड में कई संघर्ष किए. 14 साल झारखंड मुक्ति मोर्चा में रही. मेरे ससुर शिबू सोरेन और पति दुर्गा सोरेन की अगुआई में अलग राज्य बना. उन्होंने राज्य के विकास कार्य की लड़ाई लड़ी. मेरे पति का सपना सिर्फ सपना ही रह गया. उनके सपने को पूरे करने के लिए मैं JMM की विधायक रही. लेकिन जिस मुकाम तक पहुंचना चाहिए था, वो हासिल नहीं हो पाया. झारखंड आज भी विकास से कोसों दूर है. हमें झारखंड बचाना है और न्याय दिलाना है, इसलिए मैं मोदी जी के परिवार में शामिल हुई हूं.
