एक नई सोच, एक नई धारा

असम में ‘तीर-धनुष’ का कमाल: सीमित संसाधनों में JMM ने दर्ज कराई धमक, हेमंत सोरेन ने जताया आभार

गुवाहाटी/रांची: असम विधानसभा चुनाव के परिणामों ने पूर्वोत्तर की राजनीति में एक नई चर्चा को जन्म दे दिया है। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने असम के चुनावी रण में अपनी पहली ही एंट्री से सभी को चौंका दिया है। बिना किसी बड़े गठबंधन और सीमित संसाधनों के बावजूद पार्टी ने कई सीटों पर प्रभावशाली प्रदर्शन कर अपनी राजनैतिक जड़ें जमाने के संकेत दे दिए हैं।n71101835517779533763997914fa1b2dce6a07863053a48e2b26d36835d660fd6db1c365368ef2c77d4a12

चुनावी आंकड़े: पहली ही कोशिश में कड़ा मुकाबला

​झामुमो ने असम की 16 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे। परिणामों के विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी ने केवल उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि जीत-हार के समीकरणों को भी प्रभावित किया:

  • दो सीटों पर नंबर 2: पार्टी दो विधानसभा क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही, जो एक नई पार्टी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
  • 7 सीटों पर 15 हजार से ज्यादा वोट: सात प्रमुख सीटों पर पार्टी को 15,000 से अधिक मतदाताओं का साथ मिला।
  • प्रमुख प्रदर्शन वाले क्षेत्र: * मजबत: 29,172 वोट
    • भेरगांव: 21,997 वोट
    • गोसाईगांव: 20,831 वोट
    • रंगापारा: 20,301 वोट
    • अन्य: डिगबोई, मार्गेरिटा, खुमताई और सोनारी में भी पार्टी को सम्मानजनक मत प्राप्त हुए।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

हेमंत सोरेन का संदेश: ‘यह अधिकारों की लड़ाई है’

​इस प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम की जनता का आभार जताया। उन्होंने कहा:

​”इतने कम समय और सीमित संसाधनों के बीच असम की जनता ने जो विश्वास दिखाया है, वह हमारे लिए हौसला बढ़ाने वाला है। यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है। यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।”

 

इन मुद्दों ने दिलाई पहचान

​असम में झामुमो की सफलता के पीछे स्थानीय और सामाजिक मुद्दों को प्रमुख माना जा रहा है। पार्टी ने मुख्य रूप से इन विषयों को उठाया:

  1. चाय बागान मजदूरों की कम मजदूरी का मुद्दा।
  2. ​राज्य के आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा दिलाने की मांग।
  3. ​भूमि अधिकार और स्थानीय पहचान की रक्षा।

भविष्य की राह: पूर्वोत्तर में विस्तार की संभावना

​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिना गठबंधन के चुनाव लड़कर झामुमो ने अपनी स्वतंत्र ताकत का अहसास कराया है। इस प्रदर्शन ने पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी पार्टी के विस्तार के लिए नए दरवाजे खोल दिए हैं। आने वाले समय में मजबूत संगठन और रणनीति के साथ झामुमो असम की राजनीति में एक ‘किंगमेकर’ की भूमिका में नजर आ सकती है।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

सरायकेला: जच्चा-बच्चा की मौत पर डीसी सख्त, जांच के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित

सरायकेला: राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के दौरान हुई विनिता नामक महिला और उनके नवजात शिशु की मौत के मामले को जिला प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। उपायुक्त (DC) नितीश कुमार सिंह ने इस दुखद घटना पर संज्ञान लेते हुए तत्काल एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी का गठन कर दिया है।IMG 20260505 WA0002

जांच टीम में शामिल अधिकारी

​उपायुक्त द्वारा गठित इस विशेष जांच टीम में जिले के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है:

  • अभिनव प्रकाश: अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), सरायकेला
  • डॉ. सरयू प्रसाद सिंह: सिविल सर्जन, सरायकेला
  • डॉ. प्रीति मांझी: स्त्री रोग विशेषज्ञ, सदर अस्पताल सरायकेला

मौके पर पहुंचे डीसी, सीसीटीवी फुटेज खंगालने के निर्देश

​मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त नितीश कुमार सिंह स्वयं जांच कमेटी के साथ राजनगर सीएचसी पहुंचे। उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण किया और घटना के समय की परिस्थितियों की जानकारी ली।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

डीसी ने कड़े निर्देश देते हुए कहा:

​”अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज की गहनता से जांच की जाए। प्रसव के दौरान हुई प्रक्रिया और इलाज के हर तथ्य का सूक्ष्म परीक्षण करें। स्वास्थ्य व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

 

प्रशासन की प्राथमिकता: बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

​उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि जिले के आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जांच में किसी डॉक्टर या स्वास्थ्य कर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उन पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

​इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश है, वहीं प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से निष्पक्ष जांच की उम्मीद जगी है।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

बंगाल में ‘कमल’ खिलने के बाद अब सीएम की बारी: रेस में ये 5 दिग्गज, क्या महिला चेहरे पर दांव खेलेगी बीजेपी?

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों और नतीजों ने राज्य की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) 124 सीटों पर जीत और कई अन्य पर बढ़त के साथ पूर्ण बहुमत की ओर कदम बढ़ा चुकी है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर बंगाल की सत्ता का ताज किसके सिर सजेगा?n7110520631777952749974aeec34e364e2dc9578341ffc591e81f6e36f319c26105542da4730f90241077a

​बीजेपी की रणनीति हमेशा से ‘सरप्राइज’ देने वाली रही है, लेकिन गृह मंत्री अमित शाह के ‘बंगाली सीएम’ वाले वादे ने स्थानीय नेताओं की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। आइए नजर डालते हैं उन चेहरों पर जो मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे हैं:

1. शुभेंदु अधिकारी: जमीन से जुड़े कद्दावर नेता

​ममता बनर्जी को नंदीग्राम में धूल चटाने वाले शुभेंदु अधिकारी इस पद के सबसे स्वाभाविक दावेदार माने जा रहे हैं। उनका सांगठनिक कौशल और जमीनी पकड़ बेजोड़ है। हालांकि, विरोधियों द्वारा नारदा स्टिंग जैसे पुराने मुद्दों को उछाले जाने की चुनौती उनके सामने हो सकती है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

2. दिलीप घोष: संगठन के शिल्पकार

​बंगाल में बीजेपी को फर्श से अर्श तक ले जाने का श्रेय काफी हद तक दिलीप घोष को जाता है। कार्यकर्ताओं के बीच उनकी लोकप्रियता और आक्रामक भाषण शैली उन्हें एक मजबूत विकल्प बनाती है।

3. समीक भट्टाचार्य: संतुलित और सौम्य चेहरा

​मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य को पार्टी के भीतर एक ‘सबको साथ लेकर चलने वाले’ नेता के रूप में देखा जाता है। उनकी साफ-सुथरी छवि और बौद्धिक क्षमता उन्हें आलाकमान की पसंद बना सकती है।

4. अग्निमित्रा पॉल: ‘नारी शक्ति’ का नया चेहरा

​फैशन की दुनिया से राजनीति में आईं अग्निमित्रा पॉल ने अपनी बेबाकी से खास पहचान बनाई है। चूंकि बीजेपी ने महिला सुरक्षा को चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था, इसलिए अग्निमित्रा को सीएम बनाकर पार्टी एक बड़ा संदेश दे सकती है।

5. रूपा गांगुली: अनुभव और लोकप्रियता का संगम

​पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली न केवल बंगाल बल्कि देश भर में एक जाना-पहचाना नाम हैं। महिला मोर्चा की अध्यक्ष के तौर पर उनके पास जमीनी काम का लंबा अनुभव है, जो उन्हें इस दौड़ में बनाए रखता है।

क्या होगा बीजेपी का ‘प्लान बी’?

इतिहास गवाह है कि बीजेपी कई बार स्थापित नामों के बजाय किसी नए और चौंकाने वाले चेहरे को कमान सौंप देती है। पार्टी का लक्ष्य एक ऐसे ‘ताकतवर मुख्यमंत्री’ को चुनना है जो अगले पांच सालों तक बंगाल में बीजेपी की जड़ों को और गहरा कर सके।

 

तीसरी धारा न्यूज इस खबर पर पल-पल की अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा। बंगाल की इस नई राजनीतिक पारी से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहें।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

जमशेदपुर: नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी के 3 छात्रों का ‘किया मोटर्स’ में चयन, 2.6 लाख के पैकेज पर मिली नियुक्ति

जमशेदपुर: शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के क्षेत्र में अपनी पहचान मजबूत करते हुए, नेताजी सुभाष यूनिवर्सिटी (NSU) के तीन विद्यार्थियों ने ऑटोमोबाइल जगत की प्रतिष्ठित कंपनी ‘उत्कल किया’ (किया मोटर्स) में सफलता के झंडे गाड़े हैं। यूनिवर्सिटी के ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल द्वारा आयोजित कैंपस ड्राइव के माध्यम से इन छात्रों का चयन सेल्स और टेक्नीशियन के पदों पर हुआ है।IMG 20260504 WA0051

चयन और पैकेज का विवरण

​यूनिवर्सिटी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, चयनित विद्यार्थियों को कंपनी की ओर से 2.6 लाख रुपये प्रति वर्ष का आकर्षक शुरुआती पैकेज दिया गया है। इस प्लेसमेंट ड्राइव में बीबीए (BBA), एमबीए (MBA) और बी.टेक (B.Tech) के छात्रों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया था।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

  • चयनित पद: सेल्स और टेक्नीशियन।
  • प्रक्रिया: शैक्षणिक पृष्ठभूमि और तकनीकी कौशल के आधार पर चयन।

कुलाधिपति और कुलपति ने जताया गर्व

​विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री मदन मोहन सिंह ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा:

​”उत्कल किया जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में हमारे मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग छात्रों का चयन यह दर्शाता है कि हमारा पाठ्यक्रम उद्योग की व्यावहारिक आवश्यकताओं के अनुरूप है। यह छात्रों के लिए एक बेहतरीन करियर की शुरुआत है।”

 

​वहीं, कुलपति डॉ. प्रभात कुमार पाणी ने विद्यार्थियों की सराहना करते हुए कहा कि मैनेजमेंट और तकनीकी कौशल का सही समन्वय ही आज की सफलता की कुंजी है। उन्होंने विश्वास जताया कि ये छात्र भविष्य में संस्थान का नाम रोशन करेंगे।

कैंपस में उत्साह का माहौल

​इस चयन के बाद संबंधित विभागों के शिक्षकों और छात्रों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। यूनिवर्सिटी के प्लेसमेंट विभाग ने पुष्टि की है कि कंपनी जल्द ही चयनित छात्रों को जॉइनिंग प्रक्रिया के लिए आमंत्रित करेगी।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

बंगाल चुनाव 2026: भाजपा की ऐतिहासिक जीत और पानीहाटी में ‘न्याय’ की गूंज

कोलकाता/पानीहाटी: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नए युग की शुरुआत कर दी है। 15 वर्षों के ममता बनर्जी के शासन को पीछे छोड़ते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 200 से अधिक सीटों के साथ पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया है। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) महज 80-90 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है।1777914437343

रत्ना देवनाथ: दुख से जीत तक का सफर

​इस चुनाव की सबसे भावुक और बड़ी खबर उत्तर 24 परगना की पानीहाटी सीट से आई। यहाँ भाजपा उम्मीदवार रत्ना देवनाथ ने टीएमसी के कद्दावर नेता तीर्थंकर घोष को करारी शिकस्त दी। रत्ना देवनाथ उस ट्रेनी डॉक्टर की माँ हैं, जिनकी 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज में नृशंस हत्या कर दी गई थी।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

जीत का समीकरण:

  • शुरुआती दौर: टीएमसी उम्मीदवार तीर्थंकर घोष ने बढ़त बनाई हुई थी।
  • आठवां राउंड: यहाँ से पासा पलटा और रत्ना देवनाथ ने करीब 20,463 वोटों की निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
  • नारा: “हमें न्याय चाहिए” (We Want Justice) के नारे के साथ उन्होंने पूरे चुनाव में जनता की भावनाओं को जोड़े रखा।

चुनावी नतीजों का मुख्य आकर्षण

पार्टी

सीटें

स्थिति

भारतीय जनता पार्टी (BJP)

 208

प्रचंड बहुमत

तृणमूल कांग्रेस (TMC)

 79

भारी नुकसान

अन्य/वाम दल

नगण्य

प्रभावहीन

सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब

​रत्ना देवनाथ की जीत की खबर फैलते ही सोशल मीडिया ‘जस्टिस फॉर आरजी कर’ के संदेशों से भर गया।

  • ​एक यूजर ने लिखा, “यह केवल एक सीट की जीत नहीं, बल्कि एक माँ के धैर्य और इंसाफ की पुकार की जीत है।”
  • ​दूसरे ने कहा, “जनता ने दिखा दिया कि वे अब व्यवस्था में बदलाव और सुरक्षा चाहते हैं।”

आरजी कर मामला: जो चुनाव का केंद्र बना

​अगस्त 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में हुई घटना ने न केवल बंगाल बल्कि पूरे भारत को आंदोलित कर दिया था। डॉक्टरों के लंबे विरोध प्रदर्शन और परिवार द्वारा जांच पर उठाए गए सवालों ने सरकार विरोधी लहर पैदा की। भाजपा ने इसी ‘संस्थानिक विफलता’ को मुद्दा बनाया और पीड़िता की माँ को चुनावी मैदान में उतारकर इसे एक नैतिक लड़ाई में बदल दिया।

निष्कर्ष:

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के साथ ही पानीहाटी की यह जीत प्रतीकात्मक रूप से यह संदेश दे रही है कि जनता ने “विकास” के साथ-साथ “न्याय” और “सुरक्षा” को भी प्राथमिकता दी है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

जमशेदपुर: आकाश श्रीवास्तव ने मनाया भाजपा की जीत का जश्न, पटाखों की गूंज के साथ दीं शुभकामनाएं

जमशेदपुर: पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी की शानदार चुनावी सफलता का उत्साह लौहनगरी जमशेदपुर में भी देखने को मिला। युवा समाजसेवी और वर्ल्ड एनआरआई संगठन के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष एवं भारतीय जनता मजदूर मंच के प्रदेश मंत्री आकाश श्रीवास्तव ने इस ऐतिहासिक जीत पर अपने आवास के बाहर समर्थकों के साथ भव्य जश्न मनाया।IMG 20260504 WA0047

आतिशबाजी और नारों से गूंजा परिसर

​जीत की खुशी में आकाश श्रीवास्तव और उनके सहयोगियों ने जमकर पटाखे फोड़े और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी। इस दौरान कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया। आकाश श्रीवास्तव ने इस सफलता को ‘लोकतंत्र की जीत’ बताते हुए पूरे देशवासियों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

मोदी के नेतृत्व पर अटूट विश्वास

​मीडिया से बात करते हुए आकाश श्रीवास्तव ने कहा कि यह जीत देश की जनता के अटूट विश्वास और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का प्रत्यक्ष प्रमाण है। उन्होंने कहा:WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

​”आदरणीय मोदी जी ने जिस समर्पण और विजन के साथ देश को विकास की राह पर आगे बढ़ाया है, जनता ने उसी पर अपनी मुहर लगाई है। यह जीत न केवल नेतृत्व की है, बल्कि बूथ स्तर पर काम करने वाले हर उस कार्यकर्ता की मेहनत का परिणाम है जिसने संगठन को मजबूती दी।”

 

सक्रिय योगदान की सराहना

​जश्न के दौरान मौजूद समर्थकों और स्थानीय नागरिकों ने न केवल पार्टी की जीत पर खुशी जताई, बल्कि आकाश श्रीवास्तव के सक्रिय सामाजिक योगदान और संगठनात्मक कौशल की भी सराहना की। कार्यकर्ताओं का कहना था कि आकाश श्रीवास्तव के नेतृत्व में युवा शक्ति समाज और संगठन के लिए निरंतर ऊर्जावान होकर कार्य कर रही है।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन: क्या झारखंड में टूटेगा अवैध सिंडिकेट का तिलिस्म?

कोलकाता/रांची: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के ऐतिहासिक नतीजों ने 15 वर्षों के अंतराल के बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन की नींव रख दी है। भाजपा की इस संभावित जीत ने केवल राजनीतिक समीकरण ही नहीं बदले हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल और झारखंड के बीच फल-फूल रहे अवैध कारोबार के नेटवर्क में भी हड़कंप मचा दिया है।IMG 20260501 120910

अवैध कारोबार पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तैयारी

सत्ता गलियारों में चर्चा है कि भाजपा के एजेंडे में शामिल ‘राष्ट्रहित’ सर्वोपरि है, जिसके कारण तस्करी और अवैध गतिविधियों में शामिल तत्वों का मार्ग अब अवरुद्ध होना तय है। बंगाल में सरकार बदलने का सीधा असर झारखंड की महागठबंधन सरकार पर भी पड़ता दिख रहा है, जो अब नीतिगत और राजनीतिक मोर्चे पर घिरती नजर आ रही है।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

झारखंड के 10 जिलों पर विशेष नजर

​झारखंड का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा हुआ है। अवैध कारोबारियों के लिए झारखंड हमेशा से एक ‘सुरक्षित गलियारा’ रहा है। अब इन जिलों में चौकसी बढ़ाने की तैयारी है:

  • संताल परगना: साहिबगंज, पाकुड़, दुमका, जामताड़ा।
  • कोयलांचल और औद्योगिक बेल्ट: धनबाद, बोकारो, रामगढ़।
  • राजधानी और कोल्हान: रांची, सरायकेला-खरसावां और पूर्वी सिंहभूम।

पशु तस्करी: बांग्लादेश का सफर अब होगा नामुमकिन

​पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,216 किलोमीटर लंबी सीमा का फायदा उठाकर तस्कर झारखंड के रास्ते पशुओं को सीमा पार कराते रहे हैं।

  • BSF को मिलेगी नई ताकत: जानकारों का मानना है कि राज्य में अनुकूल सरकार होने से सीमा सुरक्षा बल (BSF) को स्थानीय पुलिस का पूरा सहयोग मिलेगा।
  • पिछला रिकॉर्ड: अप्रैल 2025 में मालदा में 8 मवेशियों को छुड़ाया गया था, जो झारखंड के रास्ते पहुंचे थे। अब ऐसे मामलों पर नकेल कसने के लिए सीमावर्ती जिलों में सघन तलाशी अभियान की योजना है।

बालू और पत्थर माफियाओं का टूटेगा गठजोड़

​झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच बालू, पत्थर और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की तस्करी का एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

सूत्रों का दावा: झारखंड के कई रसूखदार नेता इस अवैध कारोबार में शामिल हैं। बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद तृणमूल और झारखंड के नेताओं के बीच का यह ‘अवैध सिंडिकेट’ पूरी तरह ध्वस्त हो सकता है।

 

राजनीतिक गलियारों में बेचैनी

​बंगाल के इस बदलाव ने झारखंड की राजनीति में ‘हवा का रुख’ मोड़ दिया है। राज्य के कई दिग्गज नेता अब अपने भविष्य के सफर को लेकर असमंजस में हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि झारखंड की वर्तमान सरकार इस नए सुरक्षा और राजनीतिक दबाव का सामना कैसे करती है।

ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज

बड़ा उलटफेर: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन कोलाथुर सीट से हारे, ‘विजय’ की पार्टी ने ढहाया किला

चेन्नई/डेस्क: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में एक ऐसा चौंकाने वाला परिणाम सामने आया है, जिसने देश की राजनीति में हलचल मचा दी है। सूबे के मौजूदा मुख्यमंत्री और डीएमके (DMK) प्रमुख एम. के. स्टालिन अपनी पारंपरिक और सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली कोलाथुर सीट से चुनाव हार गए हैं।n71097617917778937242035073479581f082fdce0f875c04561e854010241d1cd376120512a70e664a898d

पुराने साथी ने ही दी मात

​कोलाथुर सीट, जिसे स्टालिन का अभेद्य किला कहा जाता था, वहां अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने सेंध लगा दी है। टीवीके उम्मीदवार और स्टालिन के पुराने सहयोगी रहे वी.एस. बाबू ने उन्हें कड़े मुकाबले में पटखनी दी। यह परिणाम इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि वी.एस. बाबू कभी स्टालिन के करीबियों में गिने जाते थे।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

टूटा जीत का ‘विजय’ रथ

​एम. के. स्टालिन इस सीट से लगातार तीन बार (2011, 2016 और 2021) चुनाव जीत चुके थे। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एआईएडीएमके (AIADMK) के आदि राजाराम को बड़े अंतर से हराया था। हालांकि, इस बार ‘विजय’ की पार्टी की सक्रियता और स्थानीय समीकरणों ने बाजी पलट दी।

तमिलनाडु की राजनीति में नए युग की शुरुआत?

​मुख्यमंत्री स्टालिन की अपनी ही सीट पर हार डीएमके के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अभिनेता विजय की चुनावी राजनीति में एंट्री और उनके उम्मीदवार द्वारा मुख्यमंत्री को हराना तमिलनाडु की सत्ता में एक नए युग का संकेत दे रहा है।

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आदित्यपुर: माता-पिता गए थे शादी में गांव, पीछे से 25 वर्षीय युवती ने घर में की खुदकुशी

आदित्यपुर (सरायकेला-खरसावां): औद्योगिक क्षेत्र के आरआईटी थाना अंतर्गत रोड नंबर 11 में रविवार को एक हृदयविदारक घटना घटी। यहाँ नेहा मिश्रा (25 वर्ष) नामक एक युवती ने अपने सूने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में शोक की लहर है।IMG 20260504 WA0036

सूने घर में अकेली थी युवती

​जानकारी के अनुसार, मृतका नेहा मिश्रा गम्हरिया के बीको मोड़ स्थित ASL एंटरप्राइजेज में कार्यरत थी। पिछले 10 दिनों से नेहा के पिता कृष्णा मिश्रा और उसकी माता अपने पैतृक गांव में एक पारिवारिक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। नेहा घर पर अकेली थी और वहीं से अपनी ड्यूटी कर रही थी।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

पड़ोसियों को हुई अनहोनी की आशंका

​रविवार को जब देर तक नेहा के घर का दरवाजा नहीं खुला और कोई हलचल नहीं हुई, तो आसपास के लोगों को शक हुआ। अनहोनी की आशंका को देखते हुए स्थानीय लोगों ने तुरंत आरआईटी थाना पुलिस को सूचित किया।

पुलिस ने दरवाजा तोड़कर निकाला शव

​मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मौजूदगी में घर का दरवाजा तोड़ा। अंदर प्रवेश करने पर पुलिस ने नेहा का शव फंदे से लटका हुआ पाया। पुलिस ने तुरंत शव को फंदे से नीचे उतारा और जमशेदपुर स्थित एमजीएम (MGM) अस्पताल भेजा, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

जांच में जुटी आरआईटी पुलिस

​फिलहाल आत्महत्या के कारणों का पता नहीं चल पाया है। पुलिस को घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट भी बरामद नहीं हुआ है। घटना की जानकारी नेहा के माता-पिता को दे दी गई है, जिसके बाद वे गांव से आदित्यपुर के लिए रवाना हो गए हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।

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IPL 2026: आईपीएल में खिलाड़ियों की ‘गर्लफ्रेंड्स’ की एंट्री पर लग सकती है लगाम, BCCI बना रहा है सख्त नियम

खेल डेस्क: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के बीच क्रिकेट गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। मैदान पर चौकों-छक्कों की बरसात के बीच अब खिलाड़ियों की निजी जिंदगी और उनके साथ यात्रा करने वाले करीबियों को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है।61519 website 3

भ्रष्टाचार और बेटिंग ऐप्स का बढ़ता खतरा

​खबरों के मुताबिक, बीसीसीआई जल्द ही खिलाड़ियों की गर्लफ्रेंड्स के साथ ठहरने और यात्रा करने को लेकर नई गाइडलाइंस जारी कर सकता है। इस संभावित फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह ‘भ्रष्टाचार’ (Corruption) को रोकना बताया जा रहा है। बोर्ड को ऐसी जानकारी मिली है कि कुछ खिलाड़ियों की गर्लफ्रेंड्स सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं और वे उन बेटिंग ऐप्स (सट्टेबाजी ऐप्स) व शराब ब्रांड्स का प्रचार करती हैं, जो बीसीसीआई की आचार संहिता के खिलाफ हैं।WhatsApp Image 2026 03 07 at 17.22.01

दैनिक जागरण की रिपोर्ट: अगली बैठक में होगा फैसला

​’दैनिक जागरण’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीसीसीआई की आगामी बैठक में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो सकती है। फिलहाल आईपीएल में खिलाड़ियों के ठहरने और यात्रा की व्यवस्था फ्रेंचाइजी मालिकों के हाथ में होती है। हालांकि, विदेशी दौरों पर पत्नियों और परिवार के सदस्यों के लिए पहले से ही नियम लागू हैं, लेकिन आईपीएल के लिए अब तक कोई स्पष्ट गाइडलाइन नहीं थी।

चर्चा में हैं ये जोड़ियाँ

​मौजूदा सीजन के दौरान कई स्टार खिलाड़ी अपनी गर्लफ्रेंड्स के साथ नजर आए हैं, जिनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही हैं:

  • हार्दिक पांड्या: मुंबई इंडियंस के कप्तान महिका शर्मा के साथ।
  • अर्शदीप सिंह: पंजाब किंग्स के गेंदबाज समरीन कौर के साथ।
  • यशस्वी जायसवाल: राजस्थान रॉयल्स के ओपनर मौंडी हैमिल्टन के साथ।
  • ईशान किशन: अपनी गर्लफ्रेंड अदिति हुंडिया के साथ।

क्यों जरूरी है नियम?

​बीसीसीआई अधिकारियों का मानना है कि खिलाड़ियों द्वारा गर्लफ्रेंड्स से मिलने के लिए फ्रेंचाइजी बसों का इस्तेमाल करना और उनके साथ होटलों में रुकना सुरक्षा और अनुशासन के लिहाज से चुनौती बन रहा है। बोर्ड नहीं चाहता कि भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने वाले युवा खिलाड़ियों की छवि किसी भी तरह के गलत प्रचार या सट्टेबाजी के विज्ञापनों से धूमिल हो।

मुख्य बिंदु:

  • ​पत्नियों और रजिस्टर्ड पार्टनर के लिए नियम होंगे स्पष्ट।
  • ​आचार संहिता के उल्लंघन पर खिलाड़ियों पर हो सकती है कार्रवाई।
  • ​बेटिंग ऐप्स को प्रमोट करने वाले इन्फ्लुएंसर्स पर रहेगी नजर।

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