भगवान बिरसा मुंडा के संघर्षों को याद करते हुए अवधेश सिंह ने जल-जंगल-जमीन और परंपराओं के संरक्षण का दिया आह्वा
तीसरी धारा न्यूज | जमशेदपुर | 09 अगस्त 2026
आधुनिकता की दौड़ में सांस्कृतिक अस्तित्व पर सवाल
जमशेदपुर: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष अवधेश कुमार सिंह ने संपूर्ण आदिवासी समाज को शुभकामनाएं दी हैं। इस खास मौके पर उन्होंने समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखते हुए विचार करने का आह्वान किया कि आधुनिकता की इस तेज रफ्तार के बीच क्या हम अपनी सांस्कृतिक जड़ों को सुरक्षित रख पा रहे
स्वतंत्रता और सामाजिक संघर्षों में अतुलनीय योगदान
अपने एक वीडियो संदेश में अवधेश कुमार सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान केवल उसकी समृद्ध परंपराओं तक ही सीमित नहीं है। स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश के विभिन्न सामाजिक संघर्षों तक, आदिवासी समाज ने भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
भगवान बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी प्रेरणापुंज
धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा का संघर्ष आज भी पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे महान नायकों के इतिहास, उनके आदर्शों और विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण पूरे समाज की जिम्मेदारी
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने जोर देकर कहा कि भाषा, संस्कृति, परंपरा और सामाजिक विरासत किसी भी समुदाय की पहचान की बुनियाद होती हैं। इसलिए इनके संरक्षण की जिम्मेदारी केवल आदिवासी समाज की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
जल-जंगल-जमीन के सरोकारों से जुड़ने की अपील
उन्होंने आम लोगों से अपील की कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और जल-जंगल-जमीन से जुड़े सरोकारों को गहराई से समझा जाए। साथ ही, आने वाली पीढ़ी को उनके गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का हर संभव प्रयास किया जाए।
बदलते परिवेश में प्रासंगिक हुआ संदेश
गौरतलब है कि विश्व आदिवासी दिवस पर अवधेश कुमार सिंह का यह संदेश ऐसे समय में आया है, जब बदलते सामाजिक परिवेश में अपनी सांस्कृतिक पहचान और धरोहरों को बचाए रखने को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।
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