एक नई सोच, एक नई धारा

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जमशेदपुर: टेल्को थीम पार्क के पास खूनी वारदात, प्रेम प्रसंग में युवक पर चापड़ से जानलेवा हमला

जमशेदपुर: शहर के टेल्को थाना क्षेत्र स्थित थीम पार्क के पास मंगलवार देर शाम प्रेम प्रसंग के चलते एक युवक पर जानलेवा हमला हुआ, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हमलावरों ने धारदार हथियार (चापड़) का इस्तेमाल कर युवक को लहूलुहान कर दिया। घायल युवक की पहचान आदर्श सिंह के रूप में हुई है।IMG 20260325 050253

टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) में भर्ती, हालत नाजुक

​घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की सक्रियता से आदर्श सिंह को गंभीर स्थिति में टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार, अत्यधिक खून बहने के कारण उसकी स्थिति नाजुक बनी हुई है और उसे सघन चिकित्सा कक्ष (ICU) में रखा गया है।

एकतरफा प्यार और ‘त्रिकोणीय’ रंजिश की आशंका

​प्रारंभिक जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है।

  • मौके पर मौजूदगी: बताया जा रहा है कि घटना के वक्त एक युवती भी वहां मौजूद थी।
  • विवाद की जड़: चर्चा है कि आदर्श उस युवती से एकतरफा प्रेम करता था। बार-बार समझाने और चेतावनी के बावजूद वह पीछे नहीं हट रहा था, जो इस हिंसक टकराव का कारण बना।

आरोपी की पहचान: फारुक अयान पर हमले का आरोप

​सूत्रों के मुताबिक, युवती के कथित प्रेमी फारुक अयान ने आदर्श सिंह पर चापड़ से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी जोरों पर है कि इस पूरी वारदात को युवती के उकसावे या साजिश के तहत अंजाम दिया गया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक साजिश के कोण पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

​सूचना मिलते ही टेल्को थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए हैं और क्षेत्र के CCTV फुटेज खंगाल रही है।

    • जांच के बिंदु: पुलिस प्रेम प्रसंग, आपसी रंजिश और आपराधिक साजिश समेत सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
    • दहशत का माहौल: सरेराह हुई इस वारदात के बाद थीम पार्क और आसपास के इलाकों में दहशत व्याप्त है।

पुलिस का बयान: “हम मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं। आरोपियों की पहचान लगभग सुनिश्चित कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा होगा।”

 

रिपोर्ट: क्राइम डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर: 21 पंचायतों में ‘हाहाकार’, 4 दिनों से बूंद-बूंद पानी को तरस रही 1.5 लाख की आबादी

जमशेदपुर/गोविंदपुर: लौहनगरी के गोविंदपुर क्षेत्र की 21 पंचायतों में पिछले चार दिनों से जलापूर्ति पूरी तरह ठप है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। पानी की इस गंभीर किल्लत से परेशान पंचायत प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को जिला उपायुक्त (DC) से मुलाकात कर उन्हें वस्तुस्थिति से अवगत कराया और एक मांग पत्र सौंपा।ea933f470f614ecfbe94975d4ac765e1f55a37917c82302399540d168285463a.0

1.5 लाख की आबादी संकट में

​प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को बताया कि गोविंदपुर और आसपास की 21 पंचायतों में रहने वाली लगभग 1.5 लाख की आबादी पिछले 96 घंटों से पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। जलापूर्ति बाधित होने का मुख्य कारण पंप हाउस को बिजली की आपूर्ति न मिलना बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उपायुक्त ने कड़ी नाराजगी जताई।1002518072

DC का कड़ा रुख: ‘बुनियादी जरूरतों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं’

​उपायुक्त ने तत्काल पेयजल एवं स्वच्छता विभाग तथा विद्युत विभाग के कार्यपालक अभियंताओं को तलब किया और समस्या के त्वरित समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता की बुनियादी जरूरतों, विशेषकर पानी और बिजली, में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कल से सुचारू हो सकती है सप्लाई

​बैठक के बाद पेयजल और विद्युत विभाग के अधिकारियों ने प्रतिनिधियों को आश्वस्त किया कि विभाग ‘युद्ध स्तर’ पर वैकल्पिक व्यवस्था कर रहा है।

  • वैकल्पिक बिजली व्यवस्था: पंप हाउस को बिजली देने के लिए नए सिरे से प्रयास किए जा रहे हैं।
  • समय-सीमा: विभाग ने भरोसा दिलाया है कि कल (बुधवार) से जलापूर्ति सुचारू रूप से शुरू होने की पूरी संभावना है।

प्रतिनिधिमंडल में ये रहे मौजूद

​इस महत्वपूर्ण बैठक और ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) के साथ जिला परिषद सदस्य डॉ. परितोष सिंह, उपप्रमुख शिव हंसदा, पंचायत समिति सदस्य सतवीर सिंह बग्गा, मनोज यादव, सुशील कुमार, सकरो सोरेन, सोनिया भूमिज, जैस्मिन गुड़िया, रवि कुरली, किशोर सिंह और मुखिया सोनका सरदार मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज (जमशेदपुर)

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मोबाइल रिचार्ज का ’28 दिनों’ वाला खेल खत्म होगा? संसद में गूंजा 13वें महीने के एक्स्ट्रा खर्च का मुद्दा

नई दिल्ली: क्या आपने कभी गौर किया है कि साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन आपको मोबाइल रिचार्ज 13 बार करना पड़ता है? टेलीकॉम कंपनियों की इसी ‘गणित’ को लेकर संसद में जोरदार बहस छिड़ गई है। सांसद राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त बोझ का मुद्दा उठाया, जिस पर सरकार और TRAI की ओर से भी स्थिति स्पष्ट की गई है।IMG 20260325 025050

सालाना 13 रिचार्ज: कंपनियों का मुनाफा, जनता का नुकसान

​सांसद राघव चड्ढा ने तर्क दिया कि टेलीकॉम कंपनियां “मंथली प्लान” के नाम पर केवल 28 दिनों की वैलिडिटी देती हैं।

  • गणित का खेल: हर महीने के बचे हुए 2-3 दिन साल के अंत तक मिलकर एक पूरा महीना (28-30 दिन) बन जाते हैं।
  • अतिरिक्त बोझ: इसके कारण यूजर्स को 365 दिन की सेवा के लिए 12 के बजाय 13 बार रिचार्ज करना पड़ता है।
  • डेटा की बर्बादी: उन्होंने यह भी मुद्दा उठाया कि यदि डेली कोटा (जैसे 2GB) में से डेटा बच जाता है, तो वह आधी रात को खत्म हो जाता है, जबकि ग्राहक ने उसके लिए पूरा भुगतान किया होता है।

सरकार का रुख: ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिया जवाब

​इस मुद्दे पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार टेलीकॉम कंपनियों को 30 दिन वाले प्लान अधिक प्रमोट करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  1. TRAI का निर्देश: टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने 2022 में ही नियम बनाया था कि हर ऑपरेटर को अपनी हर कैटेगरी में कम से कम एक प्लान 30 दिन की वैलिडिटी वाला रखना अनिवार्य है।
  2. विकल्प की उपलब्धता: कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे ग्राहकों को ‘सही मंथली’ विकल्प दें ताकि भ्रम की स्थिति न रहे।

क्या बदल सकते हैं नियम? सांसद के बड़े सुझाव

​संसद में चर्चा के दौरान कुछ महत्वपूर्ण सुझाव भी सामने आए जो भविष्य में मोबाइल सेवाओं का स्वरूप बदल सकते हैं:

  • 28 दिन वाले प्लान की समाप्ति: सुझाव दिया गया कि ‘मंथली’ का मतलब सीधे 30 दिन या कैलेंडर महीना होना चाहिए।
  • इनकमिंग की सुविधा: रिचार्ज खत्म होने के बाद भी कम से कम एक साल तक इनकमिंग कॉल और मैसेज की सुविधा बंद नहीं होनी चाहिए। (वर्तमान में TRAI के अनुसार 90 दिनों तक नंबर पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता)।

कंपनियों की आजादी बनाम रेगुलेशन

​भारत में टेलीकॉम सेक्टर ‘टैरिफ फॉरबेयरेंस’ (Tariff Forbearance) सिस्टम पर चलता है। इसका मतलब है कि कंपनियां अपने प्लान की कीमतें खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि, TRAI यह सुनिश्चित करता है कि यह स्वतंत्रता उपभोक्ताओं के शोषण का जरिया न बने।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज

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घरेलू गैस सिलेंडर बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव: उज्ज्वला और सामान्य उपभोक्ताओं के लिए नई समय-सीमा तय

पटना/डेस्क: घरेलू गैस सिलेंडर की किल्लत और बुकिंग को लेकर असमंजस में रहने वाले उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने बड़ी राहत दी है। सरकार ने सिलेंडर बुकिंग के प्रतिबंध नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन करते हुए पूरी प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल और पारदर्शी बना दिया है। नए नियमों के लागू होने से अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार नहीं करना होगा।1002480797

क्या हैं बुकिंग के नए नियम?

​नए सरकारी निर्देश के अनुसार, अब गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के लिए लाभार्थियों को दो श्रेणियों में बांटा गया है:

  • सामान्य उपभोक्ता (Non-PMUY): गैर-प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना वाले उपभोक्ता अब 25 दिनों के अंतराल पर दूसरा सिलेंडर बुक कर सकेंगे।
  • उज्ज्वला योजना लाभार्थी (PMUY): प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए यह समय-सीमा 45 दिन निर्धारित की गई है।

श्रेणीगत प्रतिबंध हुए समाप्त

​इस बदलाव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अब वितरण प्रणाली में शहरी (Urban), ग्रामीण (Rural) और दुर्गम (Inaccessible) क्षेत्रों के आधार पर लागू अलग-अलग प्रतिबंधों को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।

​साईं गैस एजेंसी के संचालक नीरज कुमार लाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले मार्केट टाइप के आधार पर नियमों में असमानता थी, जिससे वितरण में तकनीकी समस्याएं आती थीं। अब पूरे देश में एकसमान नियम लागू होने से वितरण व्यवस्था अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।

आम जनता को क्या होगा लाभ?

  1. भ्रम की स्थिति खत्म: पहले अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग नियम होने से उपभोक्ताओं में असमंजस रहता था, जो अब दूर हो जाएगा।
  2. कृत्रिम किल्लत पर रोक: बुकिंग प्रक्रिया सरल होने से सिलेंडरों की कालाबाजारी और कृत्रिम किल्लत पर अंकुश लगेगा।
  3. बेहतर समन्वय: गैस एजेंसियों और ग्राहकों के बीच तालमेल बेहतर होगा, जिससे समय पर डिलीवरी सुनिश्चित की जा सकेगी।
  4. ग्रामीण क्षेत्रों को राहत: दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों को अब शहरी उपभोक्ताओं के समान ही पारदर्शी सेवा मिलेगी।

विशेषज्ञों की राय

​स्थानीय उपभोक्ताओं और गैस एजेंसी संचालकों ने इस फैसले का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन नियमों का सख्ती से पालन किया गया, तो आने वाले समय में गैस आपूर्ति की स्थिति में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा और एजेंसियों पर भी अनावश्यक दबाव कम होगा।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

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भ्रष्टाचार पर बड़ा प्रहार: शिवहर DDC बृजेश कुमार पर SVU का शिकंजा, पत्नी के नाम करोड़ों का ‘सफेद’ खेल

पटना/शिवहर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने एक और बड़े प्रशासनिक अधिकारी का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। शिवहर के उप विकास आयुक्त (DDC) बृजेश कुमार अब जांच के घेरे में हैं। मुजफ्फरपुर में SDO रहने के दौरान पद का दुरुपयोग कर काली कमाई करने और उसे पत्नी के नाम पर निवेश करने के गंभीर साक्ष्यों ने अफसर की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।n70582814817743858981227e1ac928993dde22fbe0887242a294eb3d2e29e41ee3685ccf977d339960c7a9

सगुना मोड़ की ‘आलीशान’ संपत्तियों ने खोला राज

​SVU की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा राजधानी पटना के प्राइम लोकेशन सगुना मोड़ को लेकर हुआ है। साल 2023 में जब बृजेश कुमार मुजफ्फरपुर (पश्चिमी) के SDO थे, तब उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि कुमारी के नाम पर एक के बाद एक चार कीमती संपत्तियां खरीदीं।

  • बाजार मूल्य करोड़ों में: इन संपत्तियों का सरकारी मूल्य करीब 2.26 करोड़ रुपये आंका गया है, जबकि बाजार भाव इससे कहीं अधिक है।
  • कमर्शियल निवेश: दानापुर के ‘ओम गंगा परिसर’ और ‘प्रगति टावर’ जैसे नामी कमर्शियल सेंटरों में कीमती दुकानें खरीदी गईं।

आय से 1.44 करोड़ अधिक की संपत्ति: बेनामी निवेश का जाल

​विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या-11/26 के अनुसार, DDC बृजेश कुमार पर अपनी ज्ञात आय से 1 करोड़ 44 लाख 32 हजार 900 रुपये अधिक अर्जित करने का पुख्ता आरोप है।

​जांच का दायरा केवल अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। SVU की टीम ने सीतामढ़ी में उनके ससुर (सेवानिवृत्त कार्यपालक अभियंता) के आवास पर भी दबिश दी। जांच में निम्नलिखित निवेश सामने आए हैं:

  1. बैंक निवेश: विभिन्न वित्तीय संस्थानों में 21 लाख रुपये से अधिक के निवेश के सबूत।
  2. संदेहास्पद उपहार: नरकटियागंज में एक संबंधी से ‘उपहार’ के रूप में मिली 31 लाख रुपये की जमीन भी अब रडार पर है।

सरकारी रिकॉर्ड में ‘साफ-सुथरे’, हकीकत में ‘करोड़पति’

​इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू पारदर्शिता का अभाव है। बृजेश कुमार ने हर साल सरकार को सौंपे जाने वाले अपने संपत्ति विवरण (Asset Declaration) में इन चल-अचल संपत्तियों का कोई जिक्र नहीं किया था। उन्होंने अपनी और पत्नी की बेनामी संपत्तियों को पूरी तरह गोपनीय रखा, जबकि SVU ने उनकी पत्नी के नाम से पांच संपत्तियों के डीड (दस्तावेज) बरामद किए हैं।

अगला कदम: निगरानी इकाई अब उन गुप्त निवेशों और ‘बेनामी’ संपत्तियों की तलाश में है जो रिश्तेदारों के नाम पर छिपाई गई हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।

 

रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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श्रीनाथ विश्वविद्यालय में गूंजा ‘फूड–प्लैनेट–हेल्थ’ का संदेश: पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए ‘वीगन’ जीवनशैली को बताया जरूरी

जमशेदपुर: भविष्य की चुनौतियों और बिगड़ते पर्यावरण संतुलन को देखते हुए श्रीनाथ विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) इकाई और वीगन आउटरीच संस्था ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। शुक्रवार को आयोजित एक विशेष वेबिनार में विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि पशु आधारित भोजन न केवल मानव स्वास्थ्य, बल्कि धरती के अस्तित्व के लिए भी संकट पैदा कर रहा है।IMG 20260324 WA0039

पौध आधारित भोजन: वक्त की मांग

​वेबिनार के मुख्य वक्ता, वीगन आउटरीच के अभिषेक दुबे ने विस्तार से बताया कि कैसे हमारी खान-पान की आदतें वैश्विक समस्याओं से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा:

  • पर्यावरण संरक्षण: पौध आधारित (Plant-based) भोजन अपनाने से वनों की कटाई, जैव विविधता का ह्रास और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।
  • मानव स्वास्थ्य: वीगन डाइट न केवल शरीर को स्वस्थ रखती है, बल्कि गंभीर बीमारियों के खतरे को भी कम करती है।
  • SDG लक्ष्य: जिम्मेदार उपभोग संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) का एक अभिन्न हिस्सा है, जिसे अपनाना हर नागरिक की प्राथमिकता होनी चाहिए।

विद्यार्थियों को मानवीय जीवनशैली की प्रेरणा

​कार्यक्रम का संचालन कर रहीं एनएसएस समन्वयक सुश्री शालिनी ओझा ने कहा कि इस वेबिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें एक जागरूक और मानवीय जीवनशैली के प्रति प्रेरित करना है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाकर पर्यावरण और जीव-जंतुओं की रक्षा में अपना योगदान दें।

150 स्वयंसेवकों ने ली सीख

​इस डिजिटल चर्चा में विश्वविद्यालय के लगभग 150 विद्यार्थियों और एनएसएस स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए वीगन विकल्पों को तलाशने और उन्हें समाज में बढ़ावा देने का संकल्प लिया।

तीसरी धारा न्यूज – डिजिटल हेडलाइंस

  • बदलाव की पहल: श्रीनाथ विश्वविद्यालय में ‘फूड-प्लैनेट-हेल्थ’ पर मंथन; 150 छात्रों ने सीखा वीगन डाइट का महत्व।
  • धरती को बचाने का मंत्र: पशु आधारित भोजन छोड़, पौध आधारित विकल्प अपनाने की अपील; श्रीनाथ विवि में वेबिनार आयोजित।
  • शिक्षा और जागरूकता: वीगन आउटरीच और NSS का संयुक्त प्रयास, जमशेदपुर के युवाओं को दिया पर्यावरण सुरक्षा का संदेश।
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सेवा की मिसाल: बागबेड़ा कॉलोनी में अस्थाई छठ घाटों पर राजकुमार सिंह ने कराई निःशुल्क पानी की व्यवस्था

जमशेदपुर (बागबेड़ा): लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहाँ एक ओर अव्यवस्थाओं की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर बागबेड़ा कॉलोनी पंचायत क्षेत्र में मानवता और सेवा की एक सुखद तस्वीर देखने को मिली। श्रद्धालुओं और छठ व्रतियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह ने अपने निजी संसाधनों से अस्थाई छठ घाटों पर पानी उपलब्ध कराकर सराहनीय पहल की है।IMG 20260324 WA0025

इन प्रमुख स्थानों पर पहुँचा टैंकर

​पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता के विशेष आग्रह पर राजकुमार सिंह ने अपने निजी पानी टैंकरों के माध्यम से तीन प्रमुख अस्थाई घाटों को जलमग्न कराया:

  1. रोड नंबर 1: श्री कृष्णा पब्लिक स्कूल के समीप त्रिपाठी जी के बागान परिसर।
  2. रोड नंबर 1: रंजन श्रीवास्तव के घर के पास बना अस्थाई घाट।
  3. रोड नंबर 5: काली मंदिर परिसर स्थित छठ घाट।

“सच्ची मानव सेवा ही धर्म” – राजकुमार सिंह

​इस अवसर पर राजकुमार सिंह ने स्पष्ट किया कि पर्व-त्योहारों के समय जरूरतमंदों की सेवा करना ही सबसे बड़ा पुण्य है। उन्होंने स्थानीय निवासियों को आश्वस्त करते हुए कहा कि केवल छठ ही नहीं, बल्कि आने वाले भीषण गर्मी के मौसम में भी पिछले वर्षों की भांति जरूरतमंद क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की निःशुल्क आपूर्ति निरंतर जारी रखी जाएगी।IMG 20260324 WA0026

जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों की रही मौजूदगी

​पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता और उप मुखिया संतोष ठाकुर ने बताया कि इस व्यवस्था से क्षेत्र के सैकड़ों छठ व्रतियों को अर्घ्य देने में बड़ी सहूलियत होगी। इस नेक कार्य के लिए स्थानीय निवासियों ने राजकुमार सिंह का आभार व्यक्त किया है।

​इस दौरान समाजसेवी पिंटू त्रिपाठी, रंजन, देवलोचन, टुनटुन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिन्होंने इस सामूहिक प्रयास की सराहना की।

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प्रशासनिक अनदेखी की भेंट चढ़ा दोमुंहानी छठ घाट: बदहाली के बीच अर्घ्य देने को मजबूर हुए श्रद्धालु

जमशेदपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ के अवसर पर जहाँ शहर के अन्य क्षेत्रों में उत्सव का माहौल है, वहीं सोनारी स्थित दोमुंहानी घाट पर प्रशासन की भारी लापरवाही और नाकामी का एक अजब नजारा देखने को मिला। ‘तीसरी धारा न्यूज’ की पड़ताल में यह साफ हुआ कि महापर्व को लेकर जिला प्रशासन द्वारा किए गए बड़े-बड़े दावे धरातल पर पूरी तरह खोखले साबित हुए।IMG 20260324 174039

गंदगी के अंबार और अव्यवस्था के बीच छठ

​हैरानी की बात यह है कि छठ जैसे पवित्र त्योहार पर भी दोमुंहानी घाट की साफ-सफाई की सुध लेने वाला कोई नहीं था। घाट पर चारों ओर गंदगी और कचरे का अंबार लगा रहा, जिसके बीच से होकर छठ व्रतियों को नदी तक पहुंचना पड़ा। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भारी रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के बावजूद यहाँ सफाई की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी।1002518072

सुरक्षा के नाम पर ‘शून्य’: न रेस्क्यू टीम, न पार्किंग

​सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन की लापरवाही डराने वाली रही। घाट पर किसी भी प्रकार की रेस्क्यू टीम या गोताखोरों की तैनाती नहीं देखी गई। गहरे पानी वाले इस संगम स्थल पर अगर कोई अप्रिय घटना घट जाती, तो उसका जिम्मेदार कौन होता? प्रशासन की यह चुप्पी किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसी है।IMG 20260324 172437

​इसके अलावा, यातायात और पार्किंग व्यवस्था भी पूरी तरह चरमराई रही। सही पार्किंग स्लॉट न होने के कारण सड़कों पर घंटों जाम लगा रहा, जिससे श्रद्धालुओं और आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

तीसरी धारा न्यूज का सवाल

​सफाई, सुरक्षा और सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित करना नगर निकाय और जिला प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए थी। क्या प्रशासन केवल कागजों पर ही तैयारी करता है? आज की इस बदहाली ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आस्था के इस महापर्व पर आम जनता की सुरक्षा और सुविधा की कोई अहमियत नहीं है?

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ऐतिहासिक फैसला: महिला सैन्य अफसरों को स्थायी कमीशन पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, CJI ने कहा- भेदभाव बर्दाश्त नहीं

नई दिल्ली: भारतीय सेना में लैंगिक समानता की दिशा में आज एक नया इतिहास रचा गया है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की पीठ ने एक युगांतकारी फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि महिला सैन्य अधिकारी सेना में स्थायी कमीशन (Permanent Commission) की पूर्ण हकदार हैं। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए महिलाओं के मूल्यांकन में होने वाले ‘संस्थागत भेदभाव’ को खत्म करने का आदेश दिया है।n7057424601774343728328e4a6e6e2fe588edecbbf71028823a4fb5d112c9a9aecf92d30db902f617cefdc

मूल्यांकन ढांचे में छिपा था भेदभाव: CJI

​सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने सेना की मूल्यांकन प्रक्रिया (ACR) की कड़ी आलोचना की। कोर्ट ने माना कि महिला अधिकारियों के करियर रिकॉर्ड (ACR) इस धारणा के साथ तैयार किए गए थे कि उन्हें कभी स्थायी कमीशन मिलेगा ही नहीं।1002518072

कोर्ट की तीन बड़ी टिप्पणियां:

  1. मनमानी सीमा: हर साल केवल 250 महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने की सीमा को कोर्ट ने ‘मनमाना’ करार दिया है।
  2. असमान मापदंड: तय किए गए मापदंडों ने महिला अधिकारियों को पुरुष अधिकारियों की तुलना में नुकसान की स्थिति में रखा।
  3. अप्रत्यक्ष भेदभाव: स्थायी कमीशन न मिलना मूल्यांकन के उस ढांचे का परिणाम था जिसमें भेदभाव की जड़ें बहुत गहरी थीं।

पेंशन में राहत, लेकिन रैंक प्रमोशन पर रोक

​सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों की कार्यप्रणाली और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए संतुलित फैसला सुनाया है:

  • बढ़ी हुई पेंशन: कोर्ट ने निर्देश दिया है कि महिला अधिकारियों को सेवा से रिहाई के समय उनके ‘नेशनल रैंक’ के आधार पर हाइक्ड पेंशन (Hiked Pension) का लाभ मिलेगा। यह उनके लिए एक बड़ी आर्थिक राहत है।
  • रैंक प्रमोशन: कोर्ट ने साफ किया कि ‘नेशनल टाइम स्केल प्रमोशन’ या ‘रैंक प्रमोशन’ देना संभव नहीं है, क्योंकि इससे सेना के कामकाज और संरचना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

अनुच्छेद 142 का ‘ब्रह्मास्त्र’

​सुप्रीम कोर्ट ने ‘पूर्ण न्याय’ सुनिश्चित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 142 का उपयोग किया। यह अनुच्छेद सुप्रीम कोर्ट को किसी भी मामले में न्याय के हित में आवश्यक आदेश देने की विशेष शक्ति प्रदान करता है। कोर्ट ने साफ कहा कि पुरुष शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को यह नहीं समझना चाहिए कि स्थायी कमीशन केवल उन्हीं का अधिकार है।

देरी से हुआ नुकसान

​अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेशों को लागू करने में हुई देरी के कारण कई योग्य महिला अधिकारियों को करियर में नुकसान उठाना पड़ा है। अब इस फैसले के बाद सेना को अपने मूल्यांकन ढांचे में आमूल-चूल बदलाव करने होंगे।

तीसरी धारा न्यूज विशेष: क्या होता है स्थायी कमीशन (PC)?

​आसान शब्दों में कहें तो स्थायी कमीशन का मतलब है कि एक सैन्य अधिकारी अपनी सेवानिवृत्ति (Retirement) की आयु तक सेना में सेवा दे सकता है। इससे पहले, महिला अधिकारियों को केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत 10 से 14 साल तक सेवा करने की अनुमति थी, जिससे वे पेंशन और उच्च पदों से वंचित रह जाती थीं।

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IPL 2026: BCCI ने लागू किए 7 नए और सख्त नियम, खिलाड़ियों के परिवार के साथ सफर करने पर भी लगी रोक

मुंबई: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का बिगुल 28 मार्च से बजने जा रहा है। इस बार का आईपीएल केवल मैदान पर रनों की बारिश के लिए ही नहीं, बल्कि BCCI द्वारा लागू किए गए 7 नए और कड़े नियमों के लिए भी चर्चा में है। बोर्ड ने सभी 10 टीमों के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।n705732811177434352028067c30541641f229330dc7ff95cba4626d4b14d18569ea73d0370b77eed881526

​ये नियम खेल की तकनीक से ज्यादा टीमों के अनुशासन, प्रैक्टिस और मैनेजमेंट से जुड़े हैं। आइए जानते हैं क्या हैं वे 7 प्रमुख नियम:

1. मैच के दिन ‘नो प्रैक्टिस’ रूल

​BCCI के पहले नियम के मुताबिक, अब किसी भी टीम को उसके मैच वाले दिन मैदान पर प्रैक्टिस या ट्रेनिंग करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। खिलाड़ियों को मैच के लिए पूरी तरह फ्रेश रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

2. प्रैक्टिस मैचों पर लगा पहरा

​अब टीमें अपनी मर्जी से अनगिनत प्रैक्टिस मैच नहीं खेल सकेंगी। नए नियम के तहत:

  • ​कोई भी टीम 2 से ज्यादा प्रैक्टिस मैच नहीं खेल सकती।
  • ​इसके लिए BCCI से लिखित अनुमति लेनी होगी।
  • ​प्रैक्टिस मैच की अवधि साढ़े 3 घंटे से अधिक नहीं होनी चाहिए।

3. ‘अपना नेट, अपना अभ्यास’

​नेट प्रैक्टिस को लेकर भी बोर्ड सख्त हो गया है। कोई भी टीम दूसरी टीम के साथ प्रैक्टिस नेट्स शेयर नहीं करेगी। हर टीम को अभ्यास के लिए नया नेट दिया जाएगा। अगर किसी दूसरी टीम का नेट खाली भी है, तो भी दूसरी टीम उसका उपयोग नहीं कर सकेगी।

4. पिच की सुरक्षा के लिए ‘4 दिन’ का बैन

​जिस पिच पर होम टीम का पहला मैच होना है, उस पर मैच से 4 दिन पहले किसी भी तरह की ट्रेनिंग या प्रैक्टिस वर्जित होगी। खिलाड़ियों को रेंज हिटिंग, थ्रो डाउन और अन्य ड्रिल्स के लिए अलग से विकेट उपलब्ध कराए जाएंगे।

5. होम टीम को प्राथमिकता

​प्रैक्टिस शेड्यूल में हमेशा होम टीम को पहले अभ्यास करने की प्राथमिकता मिलेगी। यदि दो टीमें एक-दूसरे के ठीक बाद अभ्यास करती हैं, तो बोर्ड हर बार नई और तैयार पिच मुहैया कराएगा।

6. परिवार और दोस्तों के साथ सफर पर रोक

​BCCI ने खिलाड़ियों के निजी जीवन और पेशेवर अनुशासन के बीच एक लकीर खींच दी है। अब खिलाड़ियों के परिवार और दोस्तों को उनके साथ टीम बस में ट्रेवल करने की इजाजत नहीं होगी।

7. टीम बस अनिवार्य

​खिलाड़ी जब भी होटल से प्रैक्टिस या मैच के लिए निकलेंगे, उन्हें व्यक्तिगत वाहनों के बजाय अनिवार्य रूप से टीम बस का ही उपयोग करना होगा। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा और समय की पाबंदी को सुनिश्चित करना है।

क्यों लिए गए ये फैसले?

​क्रिकेट जानकारों का मानना है कि BCCI इन नियमों के जरिए टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों की ‘वर्कलोड मैनेजमेंट’ और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता करना चाहता है। साथ ही, नेट्स और पिच शेयरिंग पर रोक लगाकर टीमों के बीच किसी भी तरह के विवाद या जासूसी की संभावना को खत्म करने की कोशिश की गई है।

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