एक नई सोच, एक नई धारा

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ईरान-इजराइल युद्ध की तपिश: भारत में पेट्रोल ₹5.30 और डीजल ₹3 महंगा, नायरा एनर्जी ने बढ़ाए दाम

नई दिल्ली/डेस्क: मध्य-पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और ईरान-इजराइल युद्ध के पदचापों का सीधा असर अब भारतीय आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है। देश की बड़ी प्राइवेट फ्यूल कंपनी नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का एलान किया है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम में ₹5.30 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर तक का इजाफा कर दिया है।68875183aa9f1

क्यों बढ़ी कीमतें? ग्लोबल सप्लाई चेन पर संकट

​इस मूल्य वृद्धि के पीछे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां मुख्य कारण हैं। रूस समर्थित नायरा एनर्जी, जो भारत में करीब 6,967 पेट्रोल पंप संचालित करती है, ने बढ़ती लागत का बोझ ग्राहकों पर डालने का फैसला किया है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:1002518072

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में तनाव: ईरान और अमेरिका-इजराइल टकराव के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
  • प्राइवेट कंपनियों पर दबाव: सरकारी तेल कंपनियों के उलट, प्राइवेट कंपनियों को सरकार से कोई सब्सिडी नहीं मिलती। लगातार बढ़ते घाटे के कारण नायरा को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा।

शहरों का हाल: हैदराबाद सबसे महंगा, कई जगह पेट्रोल ₹100 के पार

​स्थानीय टैक्स और VAT के कारण अलग-अलग राज्यों में कीमतें अलग हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, हैदराबाद में पेट्रोल की कीमत ₹107.46 तक जा पहुँची है, जो देश के महानगरों में सर्वाधिक है।

देश के प्रमुख शहरों में आज के भाव (26 मार्च 2026)

शहर

पेट्रोल (₹/लीटर)

डीजल (₹/लीटर)

हैदराबाद

107.46

95.70

कोलकाता

105.41

92.76

पटना

105.20

92.10

मुंबई

103.54

90.10

बेंगलुरु

102.92

89.45

नई दिल्ली

94.77

87.67

लखनऊ

95.50

88.70

पैनिक बाइंग: पेट्रोल पंपों पर उमड़ी भीड़

​कीमतें बढ़ने और भविष्य में किल्लत की आशंका के चलते देश के कई हिस्सों में ‘पैनिक बाइंग’ (Panic Buying) की स्थिति देखी जा रही है। लोग डर के मारे गाड़ियों के टैंक फुल करवा रहे हैं, जिससे पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं।

सरकार की अपील: घबराएं नहीं, स्टॉक पर्याप्त है

​बढ़ती भीड़ और डर के बीच भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे घबराकर ईंधन का स्टॉक न करें। सप्लाई चेन पर दबाव जरूर है, लेकिन फिलहाल देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है।

तीसरी धारा न्यूज की सलाह: अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के इस दौर में पैनिक होने के बजाय धैर्य रखें और केवल जरूरत के अनुसार ही ईंधन लें। सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

 

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जमशेदपुर: दिल्ली में 7 लाख की साइबर ठगी का खुलासा, जादूगोड़ा से शातिर अपराधी गिरफ्तार

जमशेदपुर/जादूगोड़ा: देश की राजधानी नई दिल्ली में हुए एक बड़े साइबर फ्रॉड के तार लौहनगरी जमशेदपुर और इसके ग्रामीण इलाकों से जुड़े पाए गए हैं। दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा थाना अंतर्गत इचड़ा गांव से मुख्य आरोपी को दबोच लिया है।Screenshot 2026 0326 140834

कैसे हुई गिरफ्तारी?

​गिरफ्तार आरोपी की पहचान जादूगोड़ा निवासी राज भकत के रूप में हुई है। वहीं, इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने जमशेदपुर के सीतारामडेरा निवासी आकाश कुमार कालिंदी को भी हिरासत में लिया है। दिल्ली पुलिस की विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से इचड़ा गांव में छापेमारी कर राज को गिरफ्तार किया।

16 मार्च को दर्ज हुई थी शिकायत

​मिली जानकारी के अनुसार, ठगी का यह मामला 16 मार्च को तब सामने आया जब पश्चिमी दिल्ली के साइबर थाने में एक पीड़ित ने 7 लाख रुपये की चपत लगने की शिकायत दर्ज कराई थी।1002518072

तकनीकी साक्ष्यों ने खोला राज

​दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन किया:

  • डिजिटल ट्रेल: पैसों के लेन-देन के डिजिटल रास्तों की जांच की गई।
  • मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग: आरोपियों के मोबाइल टावर लोकेशन से उनकी मौजूदगी झारखंड में पाई गई।
  • IP एड्रेस ट्रेसिंग: ठगी के दौरान इस्तेमाल किए गए इंटरनेट कनेक्शन के आधार पर आरोपियों तक पहुँचा गया।
  • ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली ले गई पुलिस

    ​गिरफ्तारी के बाद आरोपी राज भकत को घाटशिला अनुमंडल न्यायालय में पेश किया गया। दिल्ली पुलिस ने अदालत से ट्रांजिट रिमांड की मांग की, जिसे मंजूर कर लिया गया। कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस टीम आरोपी को पूछताछ के लिए दिल्ली ले गई है।

    बड़े गिरोह के शामिल होने की आशंका

    ​पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह केवल एक छोटी ठगी का मामला नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि राज भकत और आकाश कालिंदी किसी बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। दिल्ली पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और जमशेदपुर में इनके और कौन-कौन से साथी सक्रिय हैं।

    तीसरी धारा न्यूज की अपील: साइबर ठगों से सावधान रहें। किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना ओटीपी (OTP), बैंक विवरण या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें। सतर्क रहें, सुरक्षित रहे ।

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सरायकेला बैंक घोटाला: चाईबासा कोर्ट ने तत्कालीन मैनेजर समेत 3 को दोषी ठहराया, 30 मार्च को होगा सजा का एलान

चाईबासा/रांची: झारखंड के बहुचर्चित 32 करोड़ रुपये के सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में न्याय की प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। चाईबासा स्थित भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की विशेष अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन मुख्य आरोपियों को दोषी करार दिया है। कोर्ट के इस फैसले के तुरंत बाद तीनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।b0f9c5af3239becd7c99fc4ced38cb9bd81f712fb16e6d8263bc8681234dbdfb.0

दोषियों की सूची में बड़े नाम शामिल

​अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जिन तीन लोगों को इस गबन का मुख्य सूत्रधार माना है, वे हैं:

  1. सुनील कुमार सत्पति: तत्कालीन शाखा प्रबंधक (मुख्य आरोपी)
  2. मनीष देवगम: बैंक कर्मचारी
  3. संजय डालमिया: व्यवसायी

2019 से सुर्खियों में था मामला

​यह पूरा मामला वर्ष 2019 का है, जब सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक में 32 करोड़ रुपये की भारी वित्तीय अनियमितता और गबन का खुलासा हुआ था। इस घोटाले ने राज्य के बैंकिंग सेक्टर और सहकारिता विभाग में हड़कंप मचा दिया था। मामले की गहराई को देखते हुए इसकी जांच CID (Criminal Investigation Department) को सौंपी गई थी।1002518072

CID की तफ्तीश ने खोला राज

​जांच के दौरान CID ने अदालत में पुख्ता दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य पेश किए, जिससे यह साबित हुआ कि आरोपियों ने मिलीभगत कर बैंक के करोड़ों रुपये का निजी हितों के लिए गबन किया था। इन साक्ष्यों को आधार मानते हुए विशेष अदालत ने आरोपियों को धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का दोषी पाया।

अब सबकी नजरें 30 मार्च पर

​दोषी करार दिए जाने के बाद अब सजा की अवधि पर बहस होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 30 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई में दोषियों को दी जाने वाली जेल की अवधि और जुर्माने की राशि का निर्धारण किया जाएगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अपराध की प्रकृति और राशि को देखते हुए कोर्ट कड़ी सजा सुना सकता है।

तीसरी धारा न्यूज की टिप्पणी: आर्थिक अपराधों के खिलाफ यह फैसला एक नजीर साबित होगा, जिससे सरकारी और सहकारी संस्थानों में भ्रष्टाचार करने वालों के मन में कानून का खौफ पैदा होगा।

 

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बड़ी खबर: क्या दुनिया ‘Energy Lockdown’ की ओर बढ़ रही है? फिलीपींस में नेशनल इमरजेंसी घोषित

मनीला/नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट (मध्य-पूर्व) में गहराते तनाव ने अब वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर प्रहार करना शुरू कर दिया है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस ने मौजूदा संकट को देखते हुए देश में ‘राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल’ (National Energy Emergency) की घोषणा कर दी है। 2020 के कोविड संकट के बाद यह देश का पहला राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन जैसा कदम है।n70596139517745002974408d5d764c7635b78573657ee3a6f39057a19a05c796b75154137a5ddef12163a4

क्यों लगा फिलीपींस में एनर्जी लॉकडाउन?

​ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह से मध्य-पूर्व के देशों पर निर्भर है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन टूटने के डर से सरकार ने यह कड़ा फैसला लिया है ताकि ईंधन की जमाखोरी रोकी जा सके और आवश्यक सेवाओं के लिए भंडार सुरक्षित रहे।1002518072

क्या होता है Energy Lockdown?

​जब किसी देश की ऊर्जा सप्लाई (पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली) में अचानक बड़ी बाधा आती है, तो सरकारें संसाधनों को नियंत्रित करने के लिए ‘एनर्जी लॉकडाउन’ लगाती हैं। इसमें:

  • ​ईंधन की राशनिंग (सीमित बिक्री) की जा सकती है।
  • ​गैर-जरूरी उद्योगों में बिजली कटौती की जाती है।
  • ​परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लग सकते हैं।

भारत के लिए कितनी गंभीर है चुनौती?

​भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% से 90% कच्चा तेल आयात करता है। मिडिल ईस्ट संकट भारत के लिए दोहरे खतरे की घंटी है:

    1. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz): दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह मार्ग बाधित होता है, तो भारत की सप्लाई लाइन कट सकती है।
    2. रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): भारत के पास फिलहाल केवल 9.5 दिनों का ही आपातकालीन तेल भंडार सुरक्षित है। यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी और सप्लाई की कमी का संकट पैदा हो सकता है।

प्रधानमंत्री का संदेश: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोकसभा में इस स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा कि हमें कोरोना जैसी अनिश्चित चुनौतियों के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।

 

आम आदमी पर क्या होगा असर?

​अगर स्थिति ‘एनर्जी लॉकडाउन’ तक पहुँचती है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका सीधा असर माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों की महंगाई पर पड़ेगा। बिजली उत्पादन प्रभावित होने से उद्योगों की रफ्तार थम सकती है।

तीसरी धारा न्यूज इस वैश्विक संकट पर पल-पल की नजर बनाए हुए है।

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ट्रंप की करीबी लौरा लूमर ने पाकिस्तान को दिखाया आईना, शहबाज शरीफ के ‘शांति दूत’ बनने की कोशिशों पर बरसीं

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश करना पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भारी पड़ गया है। जहाँ एक ओर शरीफ ‘सार्थक वार्ता’ की मेजबानी के सपने देख रहे हैं, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कट्टर समर्थक और रिपब्लिकन नेता लौरा लूमर ने पाकिस्तान को ‘आतंकवादी देश’ बताते हुए कड़ी फटकार लगाई है।n7058893851774440971794a01763c9e4102ce42b52c87f6ab59d2a8c192bbcace8ebbbc18710c012404d77

“आतंकवादी पाकिस्तान को आईना देखना चाहिए”

​लौरा लूमर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर शहबाज शरीफ के पोस्ट को शेयर करते हुए उन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पाकिस्तान की साख पर सवाल उठाते हुए कहा:

  • दूतावास पर हमला: “यह वही पाकिस्तान है जिसके नागरिकों ने कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिकी दूतावास पर हमला कर कर्मचारियों की हत्या का प्रयास किया था।”
  • भारत को धमकी: लूमर ने याद दिलाया कि पाकिस्तान एक गैर-जिम्मेदार मुल्क है, जिसने पिछले सप्ताह ही भारत पर परमाणु हमले की धमकी दी थी।
  • आतंकवादी शासन: उन्होंने पाकिस्तानी सरकार और ईरान के मौजूदा शासन, दोनों को ही ‘इस्लामी आतंकवादी शासन’ करार दिया।

क्या था शहबाज शरीफ का प्रस्ताव?

​पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी छवि सुधारने की कोशिश करते हुए कहा था कि यदि अमेरिका और ईरान सहमत हों, तो पाकिस्तान ‘निर्णायक वार्ता’ की मेजबानी को अपना सम्मान समझेगा। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने भी पुष्टि की है कि इस्लामाबाद राजनयिक माध्यमों से संघर्ष समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।1002518072

ट्रंप और पाक आर्मी चीफ के बीच ‘सीक्रेट’ बातचीत?

​ब्रिटिश अखबार फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी रविवार को डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बात की थी। रिपोर्टों के अनुसार:

  1. मध्यस्थता की गुहार: पाक सेना प्रमुख ने ट्रंप से अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने का अनुरोध किया है।
  2. 15 मांगों की सूची: सीएनएन की रिपोर्ट बताती है कि अमेरिका ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 मांगों की एक सूची भेजी है।

कौन हैं लौरा लूमर?

​लौरा लूमर को अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ‘फायरब्रांड’ समर्थक माना जाता है। वह फ्लोरिडा से रिपब्लिकन उम्मीदवार रह चुकी हैं और हाल ही में भारत दौरे पर भी आई थीं। वह अपने कट्टर और बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं, विशेषकर कट्टरपंथ और आतंकवाद के मुद्दों पर।

मौजूदा स्थिति: क्या टल जाएगा युद्ध?

​डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की है कि अमेरिका ईरानी बिजली संयंत्रों पर हमलों को 5 दिनों के लिए स्थगित कर रहा है। ट्रंप ने इसे ‘सार्थक बातचीत’ का परिणाम बताया है। अब देखना यह है कि क्या पाकिस्तान वास्तव में इस वार्ता का केंद्र बन पाता है या लौरा लूमर जैसे समर्थकों का दबाव ट्रंप को पाकिस्तान से दूर रखता है।

रिपोर्ट: अंतरराष्ट्रीय डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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धर्मांतरण के बाद SC/ST एक्ट का लाभ नहीं: विहिप ने किया सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत

जमशेदपुर: विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने अनुसूचित जाति (SC) के अधिकारों और धर्मांतरण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए हालिया निर्णय को ऐतिहासिक बताया है। सिंहभूम विभाग के मंत्री अरुण सिंह ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि यह फैसला संविधान की मूल भावना और सामाजिक न्याय को सुदृढ़ करने वाला है।1002507138

संविधान की मूल भावना की जीत

​विहिप नेता अरुण सिंह ने स्पष्ट किया कि न्यायालय का यह निर्णय ‘संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950’ के पूर्णतः अनुरूप है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार केवल हिन्दू, सिख और बौद्ध धर्म के अनुयायी ही अनुसूचित जाति की श्रेणी में आते हैं। धर्मांतरण के बाद कोई भी व्यक्ति इस श्रेणी का हिस्सा नहीं रह जाता, इसलिए उसे SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत संरक्षण प्राप्त नहीं हो सकता।1002518072

धर्मांतरण माफिया पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​अरुण सिंह ने ईसाई और मुस्लिम नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:

  • दोहरा मापदंड: एक ओर ये धर्म खुद को समतावादी बताते हैं और कहते हैं कि उनके यहाँ जाति व्यवस्था नहीं है, वहीं दूसरी ओर ‘दलित ईसाई’ और ‘दलित मुस्लिम’ जैसे शब्द गढ़कर आरक्षण की मांग करते हैं।
  • कुचक्र पर चोट: विहिप का मानना है कि यह निर्णय उन ताकतों पर अंकुश लगाएगा जो धर्मांतरण के बाद भी पुरानी जातिगत पहचान का लाभ उठाकर संवैधानिक अधिकारों पर ‘डाका’ डालना चाहते हैं।

वापसी पर ही मिलेंगे अधिकार

​विहिप ने सामाजिक संदर्भ स्पष्ट करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति के अधिकार उस ऐतिहासिक अन्याय को दूर करने के लिए हैं जो हिन्दू समाज की संरचना से उपजा था।

​”यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म बदलता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से अलग हो जाता है जिसके आधार पर ये अधिकार दिए गए थे। केवल हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में ‘घर वापसी’ करने और समाज द्वारा स्वीकार किए जाने पर ही वह पुनः इन अधिकारों का पात्र बन सकता है।”

 

विहिप बनाएगी ‘हकमारी’ करने वालों की सूची

​आगामी रणनीति का खुलासा करते हुए अरुण सिंह ने कहा कि विहिप के कार्यकर्ता अब देशभर में ऐसे लोगों की पहचान करेंगे जिन्होंने धर्मांतरण के बावजूद अनुसूचित समाज के अधिकारों का गलत लाभ उठाया है। संगठन का लक्ष्य ऐसे लोगों से अधिकार छीनकर उन वास्तविक पात्रों को दिलाना है जो इसके हकदार हैं।

रिपोर्ट: डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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बहरागोड़ा: स्वर्णरेखा में ‘दूसरे विश्व युद्ध’ का अंत! भारतीय सेना ने रिमोट से उड़ाए 227 किलो के दो जिंदा बम

बहरागोड़ा/पूर्वी सिंहभूम: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी के तट पर दशकों से दफन एक महाविनाशकारी खतरा बुधवार को हमेशा के लिए खत्म हो गया। द्वितीय विश्व युद्ध (World War II) के समय के दो विशालकाय जिंदा बमों को भारतीय सेना के जांबाज इंजीनियरों ने एक बेहद जटिल और साहसिक ऑपरेशन के जरिए सफलतापूर्वक डिफ्यूज कर दिया।

1.5 KM दूर से रिमोट से ‘ब्लास्ट’, थर्रा उठी धरती

​इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील ऑपरेशन का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह ने किया। खतरे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सेना ने अपना कंट्रोल सेंटर मुख्य ब्लास्ट साइट से करीब 1.5 किलोमीटर दूर सुरक्षित स्थान पर बनाया था। रिमोट के जरिए जैसे ही बटन दबा, एक जोरदार धमाके के साथ सदियों पुराना यह खतरा जमींदोज हो गया।

ऑपरेशन ‘सुरक्षा घेरा’: 15 फीट गहरा गड्ढा और बालू की दीवारें

​मंगलवार को पूरे दिन नदी के बहाव और भौगोलिक स्थिति का बारीकी से अध्ययन करने के बाद सेना की 50 सदस्यीय टीम ने मास्टर प्लान तैयार किया:

  • सुरक्षा बंकर: बमों को जमीन के अंदर 15 फीट गहरे गड्ढे में रखा गया।
  • एनर्जी कंट्रोल: विस्फोट की ऊर्जा को नीचे की ओर सीमित रखने के लिए चारों ओर बालू की बोरियों का एक अभेद्य सुरक्षा घेरा (बंकर) बनाया गया।
  • गांव खाली: एहतियात के तौर पर आसपास के गांवों को पूरी तरह खाली करा लिया गया था और जमीन से लेकर आसमान तक सुरक्षा का कड़ा पहरा रहा।

‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंजा स्वर्णरेखा तट

​सफलतापूर्वक बम डिफ्यूज होते ही वहां मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों का चेहरा खुशी से खिल उठा। सेना के इस अदम्य साहस को सलाम करते हुए पूरा इलाका ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। ग्रामीणों ने राहत की सांस लेते हुए कहा कि सेना ने एक बड़ी मुसीबत को बिना किसी जान-माल के नुकसान के टाल दिया।

क्यों खास था यह ऑपरेशन?

​ये बम 227 किलो वजनी थे और द्वितीय विश्व युद्ध के समय के थे। इतने दशकों बाद भी इनके सक्रिय होने की संभावना ने प्रशासन की नींद उड़ा रखी थी। भारतीय सेना की इंजीनियरिंग विंग ने जिस सटीकता से इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह उनकी पेशेवर दक्षता का प्रमाण है।

विशेष रिपोर्ट: रक्षा डेस्क, तीसरी धारा न्यूज

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जमशेदपुर: ‘स्टील सिटी’ या ‘क्राइम सिटी’? बेलगाम अपराधियों के आगे नतमस्तक पुलिस, चापड़बाजी से दहला शहर

जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर में इन दिनों कानून का इकबाल खत्म होता नजर आ रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में शहर के अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जिस तरह से चाकूबाजी और चापड़बाजी की घटनाएं बढ़ी हैं, उसने पुलिसिया चौकसी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सरेराह खून-खराबा अब आम बात हो गई है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ रत्ती भर भी नहीं बचा है।jamshedpur police

गली-नुक्कड़ पर ‘चापड़’ का खौफ

​टेल्को हो या सोनारी, मानगो हो या जुगसलाई—शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा है जहां हाल के दिनों में हिंसक वारदात न हुई हो। छोटी-छोटी बातों और मामूली विवादों में धारदार हथियारों का इस्तेमाल ‘ट्रेंड’ बन गया है।

  • आम हुई घटनाएं: सरेआम चाकू लहराना और जानलेवा हमला करना अब अपराधियों के लिए साधारण बात हो गई है।
  • असुरक्षित महसूस कर रहे नागरिक: शाम ढलते ही लोग पार्कों और सार्वजनिक स्थलों पर जाने से कतराने लगे हैं, क्योंकि सुरक्षा का दावा करने वाली पुलिस मौके से नदारद रहती है।

प्रशासन की ‘प्राथमिकता’ पर सवाल: चेकिंग में व्यस्त, अपराध में पस्त?

​स्थानीय नागरिकों और प्रबुद्ध जनों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि पुलिस प्रशासन का पूरा जोर केवल हेलमेट और कागजात चेकिंग के नाम पर ‘वसूली’ तक सीमित रह गया है।

  • वसूली बनाम सुरक्षा: चौक-चौराहों पर चेकिंग के नाम पर आम जनता को परेशान करने वाली पुलिस, गलियों में सक्रिय अपराधियों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है।
  • इंटेलिजेंस फेल्योर: संदिग्ध तत्वों पर नजर रखने और सूचना तंत्र को मजबूत करने के बजाय पुलिस केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त दिखती है।

कानून का डर खत्म, पुलिस की नाकामी उजागर

​हाल ही में टेल्को थीम पार्क के पास हुई चापड़बाजी की घटना हो या अन्य क्षेत्रों में हुई हिंसक वारदातें, अपराधी घटना को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं। पुलिस की गश्ती (Patrolling) केवल मुख्य सड़कों तक सिमट गई है, जबकि अपराधी बस्तियों और भीतरी इलाकों में अपनी समानांतर सत्ता चला रहे हैं।

तीसरी धारा न्यूज का तीखा प्रहार

​प्रशासन की यह शिथिलता शहर की शांति के लिए बड़ा खतरा है। यदि समय रहते पुलिस ने अपना रवैया नहीं बदला और अपराधियों के खिलाफ कड़े कदम नहीं उठाए, तो जमशेदपुर की छवि एक ‘क्रिमिनल हब’ के रूप में बन जाएगी।

जनता पूछती है: क्या एसएसपी और जिला प्रशासन केवल बैठकों तक सीमित रहेंगे या धरातल पर अपराधियों के भीतर पुलिस का खौफ फिर से पैदा किया जाएगा?

 

विशेष रिपोर्ट: टीम तीसरी धारा न्यूज

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सीनी: रेलवे पंपु तालाब में डूबने से व्यक्ति की मौत, अज्ञात शव बरामद होने से इलाके में सनसनी

सीनी: सरायकेला-खरसावां जिले के सीनी स्थित रेलवे पंपु तालाब में बुधवार सुबह एक व्यक्ति के डूबने का दुखद समाचार प्राप्त हुआ है। तालाब में अज्ञात शव मिलने की खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद मौके पर स्थानीय लोगों और रेल कर्मचारियों की भारी भीड़ जमा हो गई।1774411349219

नहाने गए लोगों ने देखा शव

​प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह जब कुछ स्थानीय लोग तालाब में नहाने पहुंचे, तो उन्होंने पानी के ऊपर एक व्यक्ति का सिर तैरता हुआ देखा। ग्रामीणों ने तत्काल इसकी सूचना स्थानीय पुलिस और रेलवे सुरक्षा बल (RPF) को दी। सूचना मिलते ही RPF सीनी और टीओपी थाना सीनी के प्रभारी दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे।

शव की शिनाख्त की कोशिश जारी

​काफी मशक्कत के बाद शव को तालाब से बाहर निकाला गया। समाचार लिखे जाने तक मृतक की शिनाख्त नहीं हो पाई है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और आस-पास के थानों में गुमशुदगी की रिपोर्ट खंगाल रही है ताकि मृतक की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

सुरक्षा पर उठे सवाल: बाउंड्री वॉल की मांग अधर में

​इस घटना ने रेलवे प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि दक्षिण पूर्व रेलवे मेन्स यूनियन के सचिव श्री विश्वजीत बड़ाईक ने पूर्व में ही दक्षिण पूर्व रेलवे (कोलकाता) के महाप्रबंधक श्री अनिल कुमार मिश्रा को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा था।

  • प्रमुख मांग: ज्ञापन में पंपु तालाब के चारों ओर चारदीवारी (Boundary Wall) निर्माण की मांग की गई थी ताकि ऐसी दुर्घटनाओं और बाहरी हस्तक्षेप को रोका जा सके।
  • स्वास्थ्य का खतरा: इसी तालाब के पानी को फिल्टर कर पूरे रेलवे कॉलोनी वासियों को सप्लाई की जाती है। शव मिलने के बाद पानी की शुद्धता को लेकर रेल कर्मचारियों और परिजनों में भारी रोष व्याप्त है।

रेल कर्मचारियों में आक्रोश

​रेलवे कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि बार-बार चेतावनी और मांग के बावजूद चारदीवारी का निर्माण न होना प्रशासन की लापरवाही को दर्शाता है। कर्मचारियों ने यथाशीघ्र सुरक्षा घेरा बनाने और पानी की सफाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज (सीनी)

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सोनारी दोमुहानी: आस्था पर भारी पड़ी प्रशासनिक अनदेखी, गंदगी के अंबार के बीच अर्घ्य देने को विवश हुए श्रद्धालु

जमशेदपुर: लोक आस्था के महापर्व छठ के दौरान जहां एक ओर पूरे शहर में सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे, वहीं सोनारी स्थित दोमुहानी छठ घाट की बदहाली ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। घाट पर पसरी गंदगी और कुप्रबंधन के कारण छठ व्रतियों और श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।IMG 20260325 062914

गंदगी के बीच सूर्योपासना, श्रद्धा हुई शर्मसार

​सोनारी दोमुहानी घाट, जो शहर के प्रमुख घाटों में से एक है, वहां इस बार गंदगी का अंबार लगा रहा। श्रद्धालु कचरे और सड़ांध के बीच भगवान भास्कर को अर्घ्य देने को मजबूर दिखे। प्रशासन और स्थानीय नगर निकाय द्वारा समय रहते सफाई न कराए जाने के कारण श्रद्धालुओं में गहरा रोष देखा गया।

विसर्जित मूर्तियों से बढ़ा खतरा: कई श्रद्धालु हुए चोटिल

​सबसे गंभीर लापरवाही विसर्जित मूर्तियों को लेकर सामने आई। घाट के किनारे विसर्जित की गई मूर्तियों के अवशेष और उनके ढांचे की सफाई नहीं की गई थी।

  • भय का माहौल: पानी के अंदर छिपे लकड़ी के ढांचे और कील-कांटों के कारण कई श्रद्धालुओं के पैरों में चोट आई।
  • आस्था को ठेस: पवित्र त्योहार के दौरान घाटों पर मूर्तियों का इस तरह बिखरा होना न केवल सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक रहा, बल्कि धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाने वाला साबित हुआ।

स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने जताया विरोध

​घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं का कहना था कि हर साल यहां हजारों की भीड़ उमड़ती है, फिर भी प्रशासन ने सुरक्षा और सफाई के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि विसर्जन के बाद से ही मूर्तियां उसी अवस्था में पड़ी रहीं, जिसे हटाने की जहमत किसी विभाग ने नहीं उठाई।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

​छठ जैसे बड़े पर्व के लिए विशेष बजट और सफाई अभियान चलाने का दावा करने वाला नगर निकाय इस बार दोमुहानी घाट के मामले में पूरी तरह विफल नजर आया। विसर्जन के बाद घाटों के सौंदर्यीकरण और सफाई के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं।

तीसरी धारा न्यूज का सवाल: क्या प्रशासन केवल वीआईपी घाटों की सफाई तक सीमित है? दोमुहानी जैसे महत्वपूर्ण घाट पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वच्छता से यह खिलवाड़ क्यों?

 

रिपोर्ट: ग्राउंड जीरो, तीसरी धारा न्यूज (जमशेदपुर)

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