टूर्नामेंट में मुख्य अतिथि के रूप में अशोक मिश्रा (भारतीय क्रिकेटर सौरभ तिवारी के कोच) उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के खेल आयोजनों से बच्चों में जीत-हार को समझने का जज़्बा पैदा होता है और वे बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होते हैं। ऐसे आयोजन बच्चों को यह सोचने के लिए प्रेरित करते हैं कि जीत हासिल करने के लिए क्या विशेष किया जाए।
इस टूर्नामेंट में कुल 16 टीमों ने भाग लिया। सभी खिलाड़ियों ने खेल के दौरान अपनी प्रतिभा और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। आयोजन के दौरान पूरी बस्ती में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला और बस्तीवासियों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया।
फाइनल मुकाबले में बस्ती सुपर किंग की टीम विजेता बनी, जबकि पुच्चू 11 की टीम उपविजेता रही। दोनों टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन किया।
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में मैनेजमेंट टीम के सदस्य कन्हैया कुमार शर्मा, उत्तम गोराई, संतोष कुमार लाल, स्वप्न गोप, रवि सिंह, अमित डे, हेमराज कुमार, राकेश चंद्रा, सुमित कुमार सहित बस्ती के सभी गणमान्य लोगों का विशेष योगदान रहा ।
आयोजकों एवं अतिथियों ने सभी खिलाड़ियों को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दीं।
घड़ी की सुइयां शाम के 3.45 बजा रही थीं। एनआइटी के दीक्षा समारोह से लौटते वक्त राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अचानक आदित्यपुर और खरकई ब्रिज के बीच अपना काफिला रुकवा दिया।प्रोटोकॉल और कड़े सुरक्षा घेरे की परवाह किए बगैर वे गाड़ी से उतरीं और घंटों से इंतजार कर रहे आम लोगों के बीच जा पहुंचीं।
राष्ट्रपति को अपने करीब पाकर जनता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सोमवार की शाम जमशेदपुर के इतिहास में एक भावुक अध्याय के रूप में दर्ज हो गई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू एनआइटी के कार्यक्रम के बाद वापस लौट रही थीं। सड़क के दोनों ओर हजारों की संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे चिलचिलाती धूप और उमस की परवाह किए बिना अपनी ”दीदी” और देश की राष्ट्रपति की एक झलक पाने को बेताब थे। लोगों को उम्मीद थी कि वे केवल हाथ हिलाते हुए गुजर जाएंगी, लेकिन जो हुआ, उसने सभी को अचंभित कर दिया।
अचानक थमे पहिए, और सड़क पर उतरीं राष्ट्रपति
जैसे ही काफिला खरकई ब्रिज के पास पहुंचा, राष्ट्रपति ने गाड़ी रोकने का इशारा किया। सुरक्षाकर्मी कुछ समझ पाते, इससे पहले ही द्रौपदी मुर्मू कार का दरवाजा खोलकर बाहर आ गईं। उनके चेहरे पर वही पुरानी सौम्य मुस्कान थी।
उन्होंने सड़क के दोनों किनारों पर खड़े लोगों के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। वे बैरिकेडिंग के बिल्कुल करीब पहुंचीं और बुजुर्गों से उनका हाल-चाल पूछा।
लगा जैसे घर की कोई बड़ी बुजुर्ग मिल रही हों
भीड़ में मौजूद साकची की रहने वाली कॉलेज छात्रा रिया अपनी सहेलियों के साथ खड़ी थीं। राष्ट्रपति को देख उनकी आंखें नम हो गईं। रिया ने कहा, हमने सोचा था सिर्फ गाड़ी दिखेगी, लेकिन वे तो हमारे पास आ गईं।
मैंने उन्हें नमस्ते किया तो उन्होंने मुस्कुराकर जवाब दिया। लगा ही नहीं कि वे देश की राष्ट्रपति हैं, लगा घर की कोई बड़ी बुजुर्ग हैं। वहीं, अपनी मां की गोद में बैठे आठ साल के आरव ने खुशी से उछलते हुए कहा, मैम ने मुझे हाथ हिलाया। मैंने टीवी पर देखा था, आज सच में देख लिया।
सुरक्षाकर्मियों के फूले हाथ-पांव
राष्ट्रपति का यह अंदाज जनता के लिए जितना सुखद था, सुरक्षाकर्मियों के लिए उतना ही चुनौतीपूर्ण। जैसे ही राष्ट्रपति भीड़ की ओर बढ़ीं, एसपीजी और जिला पुलिस के जवानों के हाथ-पांव फूल गए। वे तत्काल सुरक्षा घेरा (रिंग) बनाने की कोशिश करने लगे, लेकिन लोगों के प्यार से अभिभूत राष्ट्रपति सुरक्षा घेरे की परवाह किए बिना आगे बढ़ती रहीं।
वे बच्चों के सिर पर हाथ फेर रही थीं और महिलाओं का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं। राष्ट्रपति की इस आत्मीयता को देख भीड़ का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
गूंज उठे भारत माता की जय के नारे
पूरा क्षेत्र भारत माता की जय और द्रौपदी मुर्मू जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा। कुछ युवतियों ने मोबाइल से इस पल को कैद किया। जुगसलाई की स्नेहा ने कहा, ‘हम तीन घंटे से खड़े थे, पैर दुख रहे थे।
लेकिन जब महामहिम ने कार रोककर हमें देखा, तो सारी थकान मिट गई। यह उनका बड़प्पन है कि वे अपनी जड़ों और अपने लोगों को नहीं भूली हैं। करीब पांच से सात मिनट तक लोगों के बीच रहने के बाद राष्ट्रपति वापस अपनी कार में बैठीं और काफिला आगे बढ़ गया, लेकिन वे अपने पीछे छोड़ गईं कभी न भूलने वाली सुनहरी यादें।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस समय झारखंड के दौरे पर हैं। जमशेदपुर के करनडीह पहुंचीं राष्ट्रपति ओलचिकी के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। मुर्मू ने कहा कि ओलचिकी को जन जन तक पहुंचाने के लिए दीवार पर संताली लिपि में कलाकृतियां बनाएं।
उन्होंने कहा कि ओलचिकी के विस्तार और उत्थान में मेरा भी छोटा सा योगदान रहा है। अपने बच्चों को अपनी मातृभाषा अवश्य सिखायें। एकजुट होकर इसे और समृद्ध बनाने में योगदान दें। सिर्फ संताली ही नहीं हो, मुंडा, समेत सभी का उत्थान करना है। इसके लिए जो आगे रहेगा उन्हें पीछे रह गए भाषा को साथ खींच कर आगे ले आना है।
उनके कपड़े नहीं हैं और हम…
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के 75 पीवीटी ट्राइबल (पर्टिक्यूलरली वुलरेनेबल ट्राइबल ग्रुप) अभी भी पेड़ में रहते हैं। उनके घर नहीं हैं। उनके कपड़े नहीं हैं और हम लोग अमृतपाल वर्ष मना रहे हैं। आखिरकार सरकार ने बात सुनी और बिरहोड समेत सभी आदिवासी के लिए 24 हजार करोड़ से उनके विकास को काम करने का मिशन शुरू किया। उन्होंने कहा कि ये आदिवासी नहीं जानते कि पीएम आवास बन रहे हैं। ये लोग यह भी नहीं जानते कि सीमेंट कहां से आएगा, घर कैसे बनेगा। इसलिए उन्हें घर बनाकर देना होगा।
इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता
राष्ट्रपति ने कहा आदिवासी अभी भी बच्चे हैं। इन्हें पैसे का इस्तेमाल करना नहीं आता। इसलिए उन्हें पैसे नहीं दें। इन्हें घर बनाकर दें। राष्ट्रपति ने कहा लेकिन हमें भी सीखना होगा। हमारे माता पिता भी हमेशा हमारा हाथ पकड़कर नहीं चलते। हमें खुद भी प्रयास करना होगा। दूसरों को देख कर चलना होगा। पहले जब मैं राजनीति में नहीं थी, तो मां से पूछा तो उन्होंने कहा बताया कि शिक्षा कितना जरूरी है, लेकिन इससे हम हमारे गांव घर से अलग हो गए, लेकिन समय निकाल कर हमें अपने गांव अपने भाई बहनों का हाल चाल लेना है। हमें कम से कम दो लोगों को विकसि करना है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि हमें क्षमता के हिसाब से गांव को गोद लेना है। ताकि जो पीछे रह गए उन्हें अपने साथ खड़े कर सकें। उन्होंने कारणडीह में महिलाओं को आगे मौका दिए जाने पर सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं को आगे बढ़ाने पर वे अपना रास्ता खोज लेंगी। मुझे खुशी है कि हमारे लोग अब आगे बढ़ते दिख रहे हैं। उन्होंने अपील की कि संतालों के विकास को हमें खुद प्रयास करना होगा।
जमशेदपुर : जमशेदपुर के दौरे पर पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का सोनारी एयरपोर्ट पर स्वागत किया गया. भारी धुंध के कारण करीब आधे घंटे देर से वह सोनारी एयरपोर्ट पर उतरी.
जमशेदपुर के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी और मंत्री दीपक बिरुआ के अलावा तमाम प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से उनका अभिनंदन किया गया. वे जमशेदपुर के करणडीह में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के बाद एनआइटी जमशेदपुर में आयोजित दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने के बाद शाम को वापस रांची लौटेगी. उनके साथ राज्यपाल और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी है. वे लोग सभी कार्यक्रम में उनके साथ रहेंगे.
लौहनगरी जमशेदपुर के करनडीह स्थित दिशोम जाहेरथान की पवित्र धरा सोमवार को एक ऐतिहासिक और भावुक पल की साक्षी बनेगी।
देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अपनी जड़ों की ओर लौटते हुए सखुआ (साल) कुंज की छांव में बसी इस देवस्थली में माथा टेकेंगी।
अवसर बेहद खास है, संताली लिपि ‘ओल चिकी’ का शताब्दी समारोह। राष्ट्रपति यहां प्रकृति शक्ति मरांग बुरु और जाहेर आयो की पारंपरिक पूजा कर अपनी माटी को नमन करेंगी। उनके स्वागत में सेंदरा की वीर रस से भरी धुन और मांदर-नगाड़े की थाप गूंजेगी, जो आदिवासियत के गौरव को नए शिखर पर ले जाएगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जब दिशोम जाहेरथान की देहरी पर कदम रखेंगी, तो यह महज एक संवैधानिक दौरा नहीं, बल्कि हापड़म (पुरखों) के आशीर्वाद और अपनी संस्कृति के प्रति कृतज्ञता का एक महापर्व होगा। सखुआ के ऊंचे वृक्षों से छनकर आती धूप और मिट्टी की सौंधी महक के बीच राष्ट्रपति अपने कार्यक्रम की शुरुआत करेंगी।
सेंदरा की धुन: शौर्य का संगीत और अद्भुत स्वागत
राष्ट्रपति के आगमन पर जो स्वागत होगा, वह प्रोटोकॉल से परे, भावनाओं और परंपराओं का संगम होगा। संताली और हो समाज में सेंदरा (शिकार) केवल एक प्रथा नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और सामूहिक जीवन का प्रतीक है।
जैसे ही राष्ट्रपति का काफिला जाहेरथान पहुंचेगा, पारंपरिक वाद्ययंत्र तुमदा (मांदर) और तमाक (नगाड़ा) की गूंज से आसमान गूंज उठेगा। स्थानीय आदिवासी कलाकार सेंदरा सेरेंग (शिकार गीत) की धुन छेड़ेंगे।
यह संगीत सामान्य स्वागत गान नहीं है, इसमें जंगल की ललकार और वीरों का ओज समाहित है। वाद्ययंत्रों की तीव्र और लयबद्ध थाप, जो कभी जंगल में शिकारियों को एकजुट करती थी, आज देश के सर्वोच्च पद पर आसीन अपनी ‘बेटी’ के स्वागत में बजेगी। इस धुन के बीच राष्ट्रपति पूजा स्थल से मंच की ओर बढ़ेंगी, तो वह दृश्य रोमांचित करने वाला होगा।
जाहेरथान: जहां सरजोम की छांव में बसते हैं देवता
करनडीह का दिशोम जाहेरथान आदिवासियों का वेटिकन सरीखा पवित्र है। यहां ईंट-गारे का मंदिर नहीं, बल्कि सरजोम दारे (साल के वृक्ष) ही देवालय हैं। यह स्थल इस बात का प्रमाण है कि आदिवासी समाज प्रकृति का रक्षक है।
राष्ट्रपति मुर्मू यहां सबसे पहले मरांग बुरु (विशाल पर्वत देवता), जो शक्ति और संरक्षण के प्रतीक हैं, और जाहेर आयो (जाहेर एरा/ग्राम देवी), जो ममता और समृद्धि की देवी हैं, की आराधना करेंगी।
जाहेरथान की पूजा पद्धति पूर्णतः प्रकृतिवादी है। यहां नायके (पुजारी) द्वारा साल के पत्तों (सरजोम साकम) पर शुद्ध जल, अरवा चावल, सिंदूर और फूलों का अर्पण किया जाता है। राष्ट्रपति भी इसी सात्विक विधि से, बिना किसी आडंबर के, जल और फूल अर्पित कर मोंणे को-तुरुई को (पांच-छह लोक देवता) का आह्वान करेंगी।
यह पूजा समाज में सुख, शांति, अच्छी बारिश और महामारी से रक्षा के लिए की जाती है। राष्ट्रपति का यह नमन, प्रकृति और मानव के बीच के उस आदिम रिश्ते को पुनर्जीवित करेगा, जो आधुनिकता की दौड़ में कहीं खोता जा रहा है।
ओल चिकी के 100 साल: अस्मिता का उत्सव
पूजा-अर्चना के बाद राष्ट्रपति मुर्मू उस तपस्वी को श्रद्धांजलि देंगी, जिन्होंने संताली भाषा को अक्षर दिए। वे गुरु गोमके पंडित रघुनाथ मुर्मू की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगी। वर्ष 2025 ओल चिकी लिपि के अस्तित्व में आने का 100वां साल है।
1925 में मयूरभंज की धरती पर रची गई इस लिपि ने करोड़ों आदिवासियों को अपनी भाषा में लिखने और पढ़ने का अधिकार दिया। इस ऐतिहासिक मौके पर राष्ट्रपति 12 ऐसी विभूतियों को सम्मानित करेंगी, जिन्होंने ओल चिकी और संताली साहित्य की मशाल को जलाए रखा है। यह सम्मान उस संघर्ष को सलाम है, जिसने भाषा को विलुप्त होने से बचाया।
साहित्य, सिनेमा और संस्कृति का महाकुंभ
जाहेरथान परिसर में आयोजित ट्राइबल बुक फेयर और इंडीजीनस शार्ट फिल्म फेस्टिवल ने इस आयोजन को एक बौद्धिक आयाम दे दिया है। देशभर से जुटे आदिवासी साहित्यकार, फिल्मकार और कलाकार अपनी-अपनी बोलियों- संताली, हो, मुंडारी, कुड़ुख-के साथ यहां उपस्थित हैं।
किताबों के स्टाल और फिल्मों का प्रदर्शन यह बता रहा है कि आदिवासी समाज अब केवल मौखिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह विश्व पटल पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। राष्ट्रपति की उपस्थिति इस सांस्कृतिक नवजागरण को एक नई ऊर्जा देगी।
आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले में झारखंड से केरल जा रही टाटा–एर्नाकुलम एक्सप्रेस में मंगलवार को आग लगने की घटना सामने आई। इस हादसे में ट्रेन के दो कोच आग की चपेट में आ गए, जबकि एक यात्री की मौत हो गई। रेलवे ने घटना की पुष्टि की है और बताया है कि आग एक कोच में लगी थी, जो बाद में पास के कोच तक फैल गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह ट्रेन झारखंड के टाटा (टाटानगर) से केरल के एर्नाकुलम की ओर जा रही थी। अनाकापल्ली के पास अचानक एक कोच से धुआं उठता दिखाई दिया, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। घटना के बाद यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और कई यात्रियों ने ट्रेन से कूदकर अपनी जान बचाई।
रेलवे अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। आग पर काबू पा लिया गया है और प्रभावित कोचों को अलग कर दिया गया है। मृतक यात्री की पहचान और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
रेलवे ने बताया कि घटना के कारणों का पता लगाने के लिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही, प्रभावित यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था और सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। रेलवे ने यात्रियों से अफवाहों पर ध्यान न देने और आधिकारिक जानकारी का ही पालन करने की अपील की है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तीन दिवसीय झारखंड दौरे पर रांची पहुंच गयी है। एयरपोर्ट पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति आज रांची में ही रात्रि विश्राम करेगी, उसके बाद वो सोमवार को सरायकेला-खरसावां, जमशेदपुर और गुमला में कार्यक्रमों में शामिल होंगी।
बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से लेकर लोकभवन तक राष्ट्रपति का काफिला पूरी सुरक्षा और निर्धारित प्रोटोकॉल के साथ रवाना हुआ। इस दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह मुस्तैद नजर आईं। राजधानी में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर पहले से ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने किया भव्य स्वागत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू विशेष विमान से रांची पहुंचीं। बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उनका आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राष्ट्रपति को राज्य का प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। एयरपोर्ट पर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, पुलिस अधिकारी और सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
एयरपोर्ट से लोकभवन तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था राष्ट्रपति के आगमन को देखते हुए रांची में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। एयरपोर्ट से लेकर लोकभवन तक पूरे रूट लाइन में रांची पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी। राष्ट्रपति के काफिले के गुजरने से पहले ही मार्ग को पूरी तरह से सुरक्षित कर लिया गया था। रूट लाइन पर तैनात सुरक्षाकर्मी अलर्ट मोड में नजर आए और हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही थी।
करीब 20 से 22 मिनट के भीतर राष्ट्रपति का काफिला कड़ी सुरक्षा के बीच लोकभवन पहुंचा। इस दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए यातायात को नियंत्रित किया गया और आम लोगों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।
लोकभवन में रात्रि विश्राम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार की रात लोकभवन में ही विश्राम करेंगी। लोकभवन परिसर में भी सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं। राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर विशेष सुरक्षा दल के साथ-साथ स्थानीय पुलिस भी तैनात है। लोकभवन और उसके आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
अपने दौरे के दूसरे दिन यानी सोमवार को राष्ट्रपति सरायकेला-खरसावां और जमशेदपुर में आयोजित दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में शिरकत करेंगी। इन कार्यक्रमों को लेकर संबंधित जिलों में भी प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। कार्यक्रम स्थलों पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और स्थानीय प्रशासन को विशेष निर्देश दिए गए हैं।
दोनों कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद राष्ट्रपति वापस रांची लौटेंगी और सोमवार की रात भी लोकभवन में ही विश्राम करेंगी।मंगलवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुमला जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल होंगी। इस कार्यक्रम के बाद उनका झारखंड दौरा समाप्त होगा। राष्ट्रपति के दौरे को लेकर पूरे राज्य में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हैं और सुरक्षा एजेंसियां हर स्तर पर सतर्कता बरत रही हैं।
जमशेदपुर: जमशेदपुर पूर्वी की विधायक श्रीमती पूर्णिमा साहू ने रविवार को बारीडीह मंडल अंतर्गत बागुन नगर टीओपी मैदान में सैकड़ों जरूरतमंद लोगों के बीच कंबल का वितरण किया. इस दौरान विधायक पूर्णिमा साहू ने कही कि इस बढ़ती हुई ठंड को देखते हुए पूरे जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र में प्रत्येक जरूरतमंद लोगों को कंबल दिया जाएगा ताकि उन्हें ठंड से राहत मिल सके.
इस मौके पर भाजपा बारीडीह मंडल के अध्यक्ष कुमार अभिषेक,काजू शांडिल, पंकज प्रिय, राजेश रजक, विष्णु गुप्ता, राजीव झा, प्रेम कुमार, मीरा झा, उर्मिला देवी, ओम पोद्दार, राम मिश्रा, अनिकेत रॉय, नारायण लोहरा, जितेश कुमार, साकेत कुमार, मनोज तिवारी आदि उपस्थित थे.
धनबाद : धनबाद के कतरास बाजार स्थित राजस्थानी धर्मशाला में विश्व हिंदू परिषद झारखंड प्रांत कार्यसमिति की तीन दिवसीय बैठक का समापन विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री माननीय अम्बरीष जी के उद्बोधन के साथ समाप्त हुआ। समापन समारोह में उपस्थित विश्व हिंदू परिषद के प्रांत विभाग एवं जिला के पदाधिकारी को संबोधित करते हुए श्री अंबरीश सिंह ने कहा कि स्वाधीन देश में स्व का अभिमान करने वालों की कमी के कारण हमारी संस्कृति को नष्ट करने का कुचक्र चलता रहा। सनातन मानबिंदु, आचार पद्धति, संस्कृति को सुरक्षित रखने के विचार से ही विश्व हिंदू परिषद की स्थापना की गई थी। मंदिर सनातन परंपरा के श्रद्धा एवं भक्ति- शक्ति का केंद्र होता था जिसे आक्रांताओं ने निरंतर क्षति पहुंचाने पहुंचाने की चेष्टा की। परिवारों में परंपरागत संस्कार का अभाव देखने को मिल रहा है परिवार में संस्कारों का जिस तरह क्षरण हो रहा है उसके रक्षण की आवश्यकता है । गोरक्षा, सेवा, धर्म प्रसार, सामाजिक समरसता जैसे आयामों पर विशेष कार्य करने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र ने बताया 12 से 18 जनवरी तक मकर संक्रांति उत्सव समरसता दिवस के रूप में माघ पूर्णिमा के दिन श्री रविदास जयंती, वर्ष प्रतिपदा से हनुमान जन्मोत्सव तक सभी समितियों के माध्यम से श्री रामोत्सव एवं 14 जनवरी को बाबा साहब अंबेडकर जयंती प्रत्येक प्रखंड केन्द्रों में मनाया जाएगा। इसके साथ ही समिति का दृढिकरण एवं आयामों के कार्यों का विस्तार करने का निर्णय लिया गया।
प्रांत अध्यक्ष श्री चंद्रकांत रायपत ने विभिन्न जिलों से आए समस्त प्रतिनिधियों एवं वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हजारीबाग के डेमोटांड़ में परिषद द्वारा चल रहे आवासीय विद्यालय एवं अन्य सेवा कार्यों की जानकारी देते हुए झारखंड के सभी जिलों में सेवा कार्य सुचारू रूप से चलाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर क्षेत्र मंत्री डॉ वीरेंद्र साहू जी द्वारा प्रांत के नवीन दायित्व एवं प्रांत मंत्री मिथिलेश्वर मिश्र द्वारा जिलों के नवीन दायित्वों की घोषणा की गई।
श्रीमती कीर्ति गौरव दुर्गा वाहिनी प्रांत संयोजिका, गंगा कच्छप प्रांत सहसंयोजिका , श्रीमती शशि शर्मा एवं श्रीमती अनिमा पांडे को प्रांत मातृशक्ति सहसंयोजिका, श्रीमती सविता सिंह संस्कार केंद्र प्रांत प्रमुख मातृशक्ति, एवं सुश्री कीर्ति सुमन मोदी को प्रांत साप्ताहिक मिलन केंद्र एवं संस्कार केंद्र प्रमुख दुर्गावाहिनी का दायित्व दिया गया।
बैठक का समापन बजरंग दल प्रांत संयोजक श्री रंगनाथ महतो ने पूर्णता मंत्र एवं जयघोष के साथ कराया।
बैठक में क्षेत्र संगठन मंत्री माननीय आनंद पांडे, क्षेत्र गोरक्षा टोली के पालक त्रिलोकी नाथ बागी, प्रांत उपाध्यक्ष श्री गंगा प्रसाद यादव, प्रांत संगठन मंत्री चितरंजन कुमार, देवी सिंह प्रांत सह मंत्री श्री राम नरेश सिंह, श्री मनोज पोद्दार, मार्गदर्शक मंडल के प्रांत संयोजक स्वामी कृष्ण चैतन्य ब्रह्मचारी, प्रांत धर्माचार्य संपर्क प्रमुख श्री जुगल किशोर प्रसाद, प्रांत सत्संग प्रमुख श्री रंजन कुमार सिन्हा, विशेष संपर्क प्रांत प्रमुख अरविंद सिंह, गोरक्षा प्रांत प्रमुख कमलेश सिंह, प्रांत प्रचार प्रसार प्रमुख प्रकाश रंजन, सामाजिक समरसता प्रांत सह प्रमुख मनोज चंद्रवंशी, सेवा सहप्रमुख विनय कुमार, अमरेन्द्र विष्णुपुरी, धनबाद विभाग मंत्री राजेश दुबे, महानगर अध्यक्ष अशोक चौरसिया, महानगर मंत्री आनंद कुमार, बजरंग दल सहसंयोजक तापस कुमार डे सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।
जमशेदपुर : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के 140 वां स्थापना दिवस के अवसर पर झारखंड प्रदेश महिला कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव रजनी बंसल के नेतृत्व में भुइयांडीह बाबूडीह बस्ती में कड़ाके की ठंड में राहत पहुंचाने के उद्देश्य से जरूरतमंदों के बीच कंबल का वितरण किया गया।
इस अवसर पर महिला कांग्रेस के प्रदेश महासचिव रजनी बंसल ने कहा कि समाज मे अन्तिम पंक्ति पर बैठे अत्यंत जरूरतमंद के घर घर जाकर कंबल वितरण का कार्य आगे भी जारी रहेगा। युवा कांग्रेस राकेश साहू ने आगे कहा बिना पद बिना किसी लालच या किसी प्रतिष्ठा पाने की होड़ के बिना 72 लोगों की टीम ने धीरे धीरे एक विशाल संस्था बनाई और नाम पड़ा कांँग्रेस। कांग्रेस के सेवा भाव और परस्पर मेहनत के आगे दमनकारी अंग्रेज भी टिक नही पाए और भारत को स्वतंत्रता दिलाई। उन्होंने कांग्रेसियों से कहा कि हम कम है ये मत कहिए हममे दम है ये कहना शुरु करिए।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य रूप से कांग्रेस मंडल अध्यक्ष विनोद यादव, अमर मिश्रा, धर्मेंद्र कुमार, पंकज कुमार, धनजी पांडे, महिला अध्यक्ष सुनीता ओझा, चन्दावती देवी, ओम कुमार, विनोद यादव, नरेश कुमार, रामदास मेहता, सुनीता ओझा, चंद्रावती पाल, आर के वर्मा, मोहरा यादव आदि कार्यकर्ता उपस्थित थे।