झारखंड के मौजूदा शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन 7,721.25 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट सदन में पेश किया। विभिन्न विभागों द्वारा 13,000 करोड़ रुपए की मांग भेजी गई थी, जिसे वित्तीय प्राथमिकताओं के आधार पर कम करके मंजूर किया गया। इस बजट में मंईयां सम्मान योजना, अधूरी योजनाओं, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्थानीय निकायों के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं।
कल यानि मंगलवार, 9 दिसंबर को इस अनुपूरक बजट पर विस्तृत बहस होगी। इससे पहले मानसून सत्र के दौरान 25 अगस्त को 4,296.62 करोड़ रुपए का पहला अनुपूरक बजट ध्वनिमत से पारित किया जा चुका है।राज्य के विभिन्न विभागों ने कुल 13,000 करोड़ रुपए के अनुपूरक बजट की मांग भेजी थी।
इन प्रस्तावों की प्राथमिकता, महत्व और उपलब्ध वित्तीय संसाधनों का मूल्यांकन करते हुए वित्त विभाग ने इस राशि को घटाकर 7,721.25 करोड़ रुपए पर अंतिम रूप दिया। अनुपूरक बजट में सबसे अधिक जोर मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना पर दिया गया है। इस योजना के लिए सर्वाधिक वित्तीय प्रावधान किया गया है, जिससे राज्य की महिलाओं को आर्थिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा, अधूरी विकास योजनाओं और चल रही परियोजनाओं को पूरा करने के लिए भी पर्याप्त राशि आवंटित की गई है।अनुपूरक बजट में गरीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है। पंचायतों और शहरी निकायों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता के लिए प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय निकायों के विकास कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, शिक्षा क्षेत्र में सुधार और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने से संबंधित परियोजनाओं के लिए भी राशि का उल्लेखनीय आवंटन किया गया है। विधायकों की विकास योजनाओं से जुड़े मदों को भी बजट में शामिल किया गया है।मार्च 2025 में राज्य सरकार ने 1.45 लाख करोड़ रुपए का वार्षिक बजट पेश किया था, जिसके बाद यह अनुपूरक बजट सरकार की विकास प्राथमिकताओं को और स्पष्ट करता है। झारखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र 5 दिसंबर से शुरू हुआ है और 11 दिसंबर तक चलेगा। कुल 5 कार्य दिवसों वाले इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधायी और वित्तीय निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।
यह अनुपूरक बजट सरकार की नीतिगत प्राथमिकताओं, कल्याणकारी योजनाओं और विकास की प्रतिबद्धता को मजबूत आधार देता है और आगामी महीनों में राज्य के संसाधनों के प्रभावी उपयोग की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है।
जमशेदपुर: जमशेदपुर के टेल्को स्थित गुरु गोबिंद सिंह हाई स्कूल में सोमवार को एक विज्ञान मॉडल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों ने भाग लिया. इस प्रतियोगिता में छात्रों ने विज्ञान के विभिन्न पहलुओं पर अपने मॉडल प्रस्तुत किए और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में स्कूल के चेयरमैन सह टाटा मोटर्स रिटायर्ड एकाउंट्स हेड जीएस अहूजा उपस्थित थे.
उन्होंने छात्रों के मॉडल्स को देखा और उनकी प्रशंसा की. स्कूल के सेक्रेटरी संतोष सिंह ने उन्हें गेस्ट ऑफ ऑनर का मेमोंटो देकर सम्मानित किया. स्कूल की प्रिंसिपल पुष्पा पांडे ने और स्कूल की विज्ञान शिक्षिका नूतन ने मिल के कार्यक्रम को सफल बनाया.
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर संसद में चर्चा की गई। पीएम मोदी के संबोधन से लोकसभा में चर्चा की शुरुआत की। इस दौरान पीएम मोदी ने आजादी से लेकर आपातकाल तक का जिक्र किया और वंदे मातरम की उपेक्षा के लिए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा।
पीएम ने कहा कि देश को आजादी वंदे मातरम की वजह से मिली।
पीएम ने चर्चा के दौरान कहा, ‘जिस मंत्र ने, जिस जयघोष ने देश के आज़ादी के आंदोलन को ऊर्जा और प्रेरणा दी थी, त्याग और तपस्या का मार्ग दिखाया था, उस वंदे मातरम् का पुण्य स्मरण करना इस सदन में हम सबका बहुत बड़ा सौभाग्य है। हमारे लिए यह गर्व की बात है कि वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं और हम सभी इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन रहे हैं।’ पढ़िए पीएम मोदी के संबोधन की 10 बड़ी बातें…
वंदे मातरम् की 150 वर्ष की यात्रा अनेक पड़ावों से गुजरी है, लेकिन जब वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए, तब देश गुलामी में जीने के लिए मजबूर था। जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, और जब वंदे मातरम् का अत्यंत उत्तम पर्व होना चाहिए था, तब भारत के संविधान का गला घोंट दिया गया था। जब वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल की सलाखों के पीछे बंद कर दिया गया था। जिस वंदे मातरम् के गीत ने देश को आजादी की ऊर्जा दी थी, उसके 100 वर्ष पूरे होने पर हमारे इतिहास का एक काला कालखंड दुर्भाग्य से उजागर हो गया। 150 वर्ष उस महान अध्याय और उस गौरव को पुनः स्थापित करने का अवसर हैं। मेरा मानना है कि देश और सदन, दोनों को इस अवसर को जाने नहीं देना चाहिए। यही वंदे मातरम् है, जिसने 1947 में देश को आजादी दिलाई। आज जब मैं वंदे मातरम् 150 निमित्त चर्चा आरंभ करने के लिए खड़ा हुआ हूं, यहां कोई पक्ष-प्रतिपक्ष नहीं है। क्योंकि हम सब जो यहां बैठे हैं, हमारे लिए यह ऋण स्वीकार करने का अवसर है, वह ऋण, जिसे निभाते हुए लाखों लोगों ने वंदे मातरम् के मंत्र के साथ आजादी का आंदोलन चलाया, और उसी का परिणाम है कि आज हम सब यहां बैठे हैं। इसलिए हम सभी सांसदों के लिए वंदे मातरम् का यह ऋण स्वीकार करने का अवसर है। वंदे मातरम्, सिर्फ राजनीतिक लड़ाई का मंत्र नहीं था। सिर्फ अंग्रेज जाएं और हम अपनी राह पर खड़े हो जाएं, वंदे मातरम् सिर्फ यहां तक सीमित नहीं था। आजादी की लड़ाई, इस मातृभूमि को मुक्त कराने की जंग थी। मां भारती को उन बेड़ियों से मुक्त कराने की एक पवित्र जंग थी। बंकिम दा ने जब वंदे मातरम् की रचना की, तब स्वाभाविक ही वह स्वतंत्रता आंदोलन का पर्व बन गया। तब पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण, वंदे मातरम् हर भारतीय का संकल्प बन गया। अंग्रेजों ने 1905 में बंगाल का विभाजन किया, तो वंदे मातरम् चट्टान की तरह खड़ा रहा। यह नारा गली-गली का स्वर बन गया। अंग्रेजों ने बंगाल विभाजन के माध्यम से भारत को कमजोर करने की दिशा पकड़ ली थी, लेकिन वंदे मातरम् अंग्रेजों के लिए चुनौती और देश के लिए शक्ति की चट्टान बनता गया। बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् गली-गली का नारा बन गया था, और यही नारा बंगाल को प्रेरणा देता था। अंग्रेज समझ चुके थे कि 1857 के बाद भारत में लंबे समय तक टिक पाना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। जिस प्रकार के सपने लेकर वे आए थे, उन्हें यह साफ दिखने लगा कि जब तक भारत को बांटा नहीं जाएगा, लोगों को आपस में लड़ाया नहीं जाएगा, तब तक यहां राज करना कठिन है। तब अंग्रेज़ों ने ‘बांटो और राज करो’ का रास्ता चुना, और उन्होंने बंगाल को इसकी प्रयोगशाला बनाया। हमारे देश के आजादी के आंदोलन में सैकड़ों महिलाओं ने नेतृत्व किया और अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। बारिसाल में वंदे मातरम् गाने पर सबसे अधिक जुर्माने लगाए गए थे। बारिसाल, आज भारत का हिस्सा नहीं रहा है, लेकिन उस समय बारिसाल में भारत की वीरांगनाओं ने वंदे मातरम् पर लगे प्रतिबंध के विरोध में बड़ा और लंबा प्रदर्शन किया। बारिसाल की एक वीरांगना, श्रीमती सरोजिनी बोस ने उस दौर में यह संकल्प लिया था कि जब तक वंदे मातरम् पर लगा प्रतिबंध नहीं हटता, तब तक वे अपनी चूड़ियां नहीं पहनेंगी। हमारे देश के बच्चे भी पीछे नहीं थे, उन्हें कोड़े की सजा दी जाती थी। उन दिनों बंगाल में लगातार प्रभात फेरियां निकलती थीं, और उन्होंने अंग्रेजों की नाक में दम कर दिया था। अंग्रेजों ने अखबारों पर रोक लगा दी, तो मैडम भीकाजी कामा ने पेरिस में एक अखबार निकाला, और उसका नाम उन्होंने वंदे मातरम रखा। 1907 में जब वी.ओ. चिदंबरम पिल्लै ने स्वदेशी कंपनी का जहाज बनाया, तब उस पर भी ‘वंदे मातरम्’ लिखा था। राष्ट्रकवि सुब्रमण्यम भारती ने वंदे मातरम् का तमिल में अनुवाद किया। उनके अनेक तमिल देशभक्ति गीतों में वंदे मातरम् के प्रति गहरी श्रद्धा स्पष्ट दिखाई देती है। हम लोगों पर वंदे मातरम् का कर्ज है। वही वंदे मातरम है जिसने वो रास्ता बनाया जिस रास्ते से हम यहां पहुंचे हैं और इसलिए हमारा कर्ज बनता है। भारत हर चुनौतियों को पार करने में सामर्थ्य है। वंदे मातरम् सिर्फ गीत या भावगीत नहीं, यह हमारे लिए प्रेरणा है…हम आत्मनिर्भर भारत के सपने को लेकर चल रहे हैं और इसको पूरा करने के लिए वंदे मातरम् हमारी प्रेरणा है। हम स्वदेशी आंदोलन को ताकत देना चाहते हैं। समय बदला होगा, रूप बदले होंगे लेकिन पूज्य गांधी ने जो भाव व्यक्त किया था उस भाव की ताकत आज भी मौजूद है और वंदे मातरम् हमें जोड़ता है। वंदे मातरम् के प्रति मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज होती जा रही थी, मोहम्मद अली जिन्नाह ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1937 को वंदे मातरम् के विरुद्ध नारा बुलंद किया। फिर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा, जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जवाब देने, निंदा करने की बजाय उल्टा वंदे मातरम् की पड़ताल शुरू कर दी। जिन्नाह के विरोध के 5 दिन बाद ही 20 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखी और जिन्नाह की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम् की आनंदमठ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को भड़का सकती है… इसके बाद कांग्रेस का बयान आया कि 26 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कोलकाता में होगी जिसमें वंदे मातरम् के उपयोग की समीक्षा की जाएगी… पूरे देश में इस प्रस्ताव के विरोध में लोगों ने प्रभात फेरियां निकाली लेकिन दुर्भाग्य से 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता कर लिया, वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए। उस फैसले के पीछे नकाब यह पहना गया कि यह सामाजिक सद्भाव का काम है लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए।
राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के बाईपास रोड पर स्थित माटिहाना चौक के समीप सोमवार दोपहर एक भीषण सड़क दुर्घटना में दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। एक बाइक सवार तथा सड़क पार कर रहे युवक को स्थानीय लोगों की तत्परता से तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया।
घटना के संबंध में मिली जानकारी के अनुसार कोकमरा गांव निवासी कृष्ण गोपाल राना अपनी निजी बाइक से गुजर रहे थे। इसी दौरान उसी गांव का प्रदीप नायक अचानक सड़क पार करने लगा। सामने पैदल यात्री को देखकर उसे बचाने के प्रयास में बाइक सवार का नियंत्रण बिगड़ गया और बाइक तेज रफ्तार में सीधे प्रदीप नायक से जा टकराई।
तेज टक्कर के चलते दोनों युवक सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद वहां मौजूद ग्रामीण तुरंत सक्रिय हो गए। लोगों ने बिना देर किए एक निजी वाहन की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बहरागोड़ा पहुंचाया।
अस्पताल में दोनों का उपचार जारी है और डॉक्टर उनकी स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। इधर, दुर्घटना की सूचना मिलते ही बहरागोड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
जमशेदपुर : जमशेदपुर के परसुडीह मकदुमपुर निवासी मो इरफान मलिक को विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का मामला सामने आया है, जहां पीड़ित ने सोमवार को एसएसपी से गुहार लगाते हुए न्याय दिलाने की मांग की है. इसे लेकर युवक ने एसएसपी को ज्ञापन सौंपा है. ज्ञात हो कि 23 सितंबर को मो इरफान द्वारा एजेंट शकील उर्फ प्याजू के जरीये दुबई भेजने के लिए 70 हजार रुपये लिये गये थे. बाद में इरफान को पता चला कि वहां कंपनी दुबई भेजकर लोगों के साथ धोखाधड़ी करती है. वहां उनसे सप्लायर का काम कराया जाता है, जिसके बाद इरफान वहां जाने से मना कर देता है और उस एजेंट को पैसा लौटाने की बात करता है.
परंतु वह पैसा नहीं लौटाता है और टालमोटल करता रहता है. अत्यधिक दबाव बनाने पर झुठे केस में फसा देने की धमकी देता है. उन्होंने बताया कि उनकी दफ्तर मकदुमपुर में स्थित है, जहां इरफान का इंटरव्यू भी लिया गया और एक माह बाद दुबई भेजने की बात की गयी. फिलहाल मकदुमपुर के युवक ने शिकायत की है और जांच कर उनके पैसे लौटाने की मांग की है.
दिल्ली। इंडिगो एयरलाइंस के परिचालन संकट के कारण देश भर में हज़ारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सोमवार, 8 दिसंबर को दिल्ली एयरपोर्ट से 200 से अधिक उड़ानें रद्द की गईं, जिसके बाद एयरपोर्ट अथॉरिटी ने एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए यात्रियों से फ्लाइट स्टेटस की ताज़ा जानकारी सीधे एयरलाइंस से प्राप्त करने की अपील की। नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) पहले ही इंडिगो को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुका है।
एयरपोर्ट का संचालन जारी, लेकिन कई उड़ानें प्रभावित दिल्ली एयरपोर्ट ने एक्स पर बताया कि हवाई अड्डे का संचालन सुचारू है, लेकिन परिचालन संकट की वजह से कुछ उड़ानें रद्द या पुनर्निर्धारित की जा सकती हैं। एयरपोर्ट की ग्राउंड टीम यात्रियों की मदद के लिए लगातार कार्यरत है।
कई रूटों पर उड़ानें रद्द सोमवार को दिल्ली एयरपोर्ट से कुल 234 उड़ानें रद्द की गईं। मुंबई से भी 9 उड़ानें कैंसिल हुईं। प्रभावित रूटों में दिल्ली से बनारस, इंदौर, हैदराबाद, विजयवाड़ा, जम्मू तथा मुंबई से चंडीगढ़, नागपुर, बैंगलुरु, हैदराबाद, गोवा, दरभंगा, भुवनेश्वर और कोलकाता शामिल हैं।
प्रमुख रद्द उड़ानें (चयनित) दिल्ली से – दिल्ली → बनारस – दिल्ली → इंदौर – दिल्ली → विजयवाड़ा – दिल्ली → अहमदाबाद
मुंबई से – मुंबई → चंडीगढ़ – मुंबई → नागपुर – मुंबई → बैंगलुरु – मुंबई → हैदराबाद – मुंबई → गोवा – मुंबई → दरभंगा – मुंबई → कोलकाता – मुंबई → भुवनेश्वर
DGCA ने बढ़ाया जवाब देने का समय DGCA ने इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और जवाबदेही प्रबंधक इस्द्रो पोर्क्वेरास को जारी कारण बताओ नोटिस पर जवाब देने के लिए 24 घंटे का अतिरिक्त समय दिया है। पिछले छह दिनों से इंडिगो की उड़ान सेवाएँ गंभीर रूप से प्रभावित हैं, जिसके चलते यह नोटिस जारी किया गया था।
रेलवे की बड़ी राहत: 89 विशेष ट्रेनें इंडिगो संकट के बीच यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे ने अगले तीन दिनों में 89 विशेष ट्रेनें चलाने की घोषणा की है। – विभिन्न जोनों में 100 से अधिक फेरे संचालित किए जाएंगे। – जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त फेरे भी बढ़ाए जा सकते हैं। – 37 प्रीमियम ट्रेनों में 116 अतिरिक्त कोच जोड़े जाएंगे, जिससे हजारों अतिरिक्त सीटें उपलब्ध होंगी।
रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ उड़ान सेवाओं के प्रभावित होने से दिल्ली के रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई। इसके मद्देनजर रेलवे ने विशेष ट्रेनों और अतिरिक्त कोचों के जरिए भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास तेज़ कर दिए हैं।
यह संकट फिलहाल थमता नहीं दिख रहा है, और यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ान और ट्रेन से जुड़ी ताज़ा जानकारी सुनिश्चित करें।
जमशेदपुर। पंचायत प्रतिनिधियों के आग्रह पर पोटका विधानसभा क्षेत्र के विधायक संजीव सरदार ने विधानसभा सत्र के दौरान शून्य काल में अपने क्षेत्र की ज्वलंत समस्या को जोरदार ढंग से उठाते हुए टाटा स्टील के सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग सरकार के समक्ष रखी। उन्होंने बताया कि पोटका क्षेत्र अंतर्गत बागबेड़ा, कीताडीह, घाघीडीह, करनडीह, पुड़ीहासा, केरूवाडूंगरी, वयांगिल सहित 20 पंचायतों के लगभग एक लाख लोग टाटा स्टील कंपनी के 3 से 5 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र में निवास करते हैं, लेकिन इसके बावजूद इन्हें अब तक मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल सकी हैं।
विधायक ने सदन में कहा कि इन पंचायतों में टाटा ग्रुप में कार्यरत स्थायी, अस्थायी एवं ठेका मजदूर बड़ी संख्या में निवास करते हैं, परंतु कंपनी की ओर से यहां पेयजल, सफाई और बिजली जैसी नागरिक सुविधाएं स्थायी रूप से उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, जिससे आम ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि झारखंड सरकार द्वारा टाटा स्टील के लीज नवीकरण से पूर्व संबंधित क्षेत्रों में सीएसआर के तहत स्थायी नागरिक सुविधा बहाल की जाए, ताकि वर्षों से समस्याओं से जूझ रहे लोगों को राहत मिल सके।
पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा था मांग पत्र विदित हो कि बीते शनिवार को बागबेड़ा जिला परिषद सदस्य किशोर यादव के नेतृत्व में मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने संयुक्त रूप से विधायक संजीव सरदार से मुलाकात कर इस विषय में मांग पत्र सौंपा था। मांग पत्र में मुख्य रूप से बागबेड़ा, कीताडीह और घाघीडीह क्षेत्र के 15 पंचायतों में सीएसआर मद से स्थायी नागरिक सुविधा बहाल करने की मांग की गई थी। प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से आग्रह किया था कि इस मुद्दे को विधानसभा पटल पर उठाया जाए, ताकि सरकार एवं कंपनी का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर आकृष्ट हो सके। इसी आग्रह के आलोक में विधायक संजीव सरदार ने सदन में मामला रखकर क्षेत्रवासियों की आवाज बुलंद की। पंचायत प्रतिनिधिमंडल ने जताया आभार विधानसभा में मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाने पर जिला पार्षद किशोर यादव, मुखिया मायावती टुडू, पंचायत समिति सदस्य सुनील गुप्ता एवं वार्ड सदस्य राजू ठाकुर ने विधायक संजीव सरदार के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विधायक द्वारा इस पहल से पोटका क्षेत्र के लाखो लोगों को स्थायी नागरिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है, जो वर्षों से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे।
जुगसलाई, (दिनांक) – सैल्यूट तिरंगा जिला कमेटी की अहम बैठक आज जुगसलाई Pigment Gate, नगर पालिका पार्क में सम्पन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष श्री रवि शंकर तिवारी जी द्वारा गठित जिला कमेटी के पदाधिकारियों ने उपस्थित होकर संगठन के आगामी कार्यक्रमों पर विस्तार से चर्चा की।
बैठक की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश तिवारी ने की।
बैठक के दौरान देश के युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद किया गया, साथ ही 9 दिसंबर को आयोजित होने वाले रक्तदान शिविर के संबंध में तैयारियों की समीक्षा की गई।
जिला अध्यक्ष वेद प्रकाश तिवारी ने कहा कि “युवा ही राष्ट्र की शक्ति हैं। राष्ट्र सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को मजबूत करना सैल्यूट तिरंगा का मुख्य उद्देश्य है।”
इस अवसर पर आने वाले दिनों में युवाओं से जुड़े विभिन्न सामाजिक अभियानों को तेज करने पर भी सहमति बनाई गई।
कार्यक्रम में अनेक पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
मेरठ में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। नौचंदी थाना पुलिस ने जांच की जिम्मेदारी से बचने के लिए एक अज्ञात युवक के शव को उठाकर आधा किलोमीटर दूर दूसरे थाना क्षेत्र में फेंक दिया।
पुलिस की यह हरकत पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके सामने आने के बाद पूरे महकमे में हड़कंप मच गया।
बताया गया कि गुरुवार देर रात करीब 1:40 बजे नौचंदी थाना क्षेत्र के एल ब्लॉक में पुलिस को एक युवक का शव सड़क किनारे पड़ा मिला। नियमानुसार पुलिस को मौके पर पंचनामा और जांच की प्रक्रिया करनी चाहिए थी, लेकिन ड्यूटी पर लगाए गए सिपाही राजेश और होमगार्ड रोहताश ने जिम्मेदारी से बचने का तरीका निकाल लिया। दोनों पुलिसकर्मियों ने शव को ई-रिक्शा में लादा और करीब 500 मीटर दूर लोहियानगर थाना क्षेत्र में पहुंचकर एक स्टेशनरी की दुकान के बाहर फेंक दिया।
दुकान के बाहर शव देखकर घबरा गए दुकानदार
सुबह जब दुकानदार रोनित बैंसला अपनी दुकान खोलने पहुंचे तो बाहर पड़े शव को देखकर घबरा गए। उन्होंने तुरंत लोहियानगर थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस मौके पर पहुंची और दुकानदार द्वारा उपलब्ध कराए गए सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। वीडियो देखकर सभी अधिकारी दंग रह गए, फुटेज में स्पष्ट दिख रहा था कि वर्दीधारी पुलिसकर्मी ही शव को वहां डालकर जा रहे थे। सीमा विवाद में उलझे रहे दोनों थानों के प्रभारी
सबसे हैरानी की बात यह रही कि दोनों थानों के प्रभारी अधिकारी इस घटना को गंभीरता से लेने के बजाय दिनभर सीमा विवाद में उलझे रहे। न किसी ने उच्च अधिकारियों को सूचना दी और न ही शव का समय से पंचनामा भरा गया। मामले की भनक जब दुकानदार ने सीधे एसएसपी डॉ. विपिन ताडा को दी, तभी जाकर पुलिस प्रशासन हरकत में आया। होमगार्ड की सेवा समाप्त करने के लिए लिखा पत्र
एसएसपी ने तत्काल सख्त कार्रवाई करते हुए शास्त्रीनगर एल ब्लॉक चौकी प्रभारी जितेंद्र कुमार और बीट सिपाही राजेश को निलंबित कर दिया। इसके अलावा होमगार्ड रोहताश की सेवा समाप्त करने के लिए कमांडेंट को पत्र भेज दिया गया। साथ ही लोहियानगर और नौचंदी, दोनों थाना प्रभारियों की लापरवाही की भी जांच के आदेश दिए गए हैं। एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। डेडबॉडी पर नहीं मिला चोट का निशान
एसपी सिटी आयुष बिक्रम सिंह ने बताया कि युवक की पहचान नहीं हो सकी है। मृतक के शरीर पर किसी प्रकार की चोट का निशान नहीं मिला है। ऐसे में मौत हादसे, अत्यधिक ठंड या किसी अन्य कारण से हुई होगी, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। फिलहाल शव की फोटो सोशल मीडिया और पुलिस समूहों में पहचान के लिए भेजी गई है।
बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म निर्देशक विक्रम भट्ट को राजस्थान पुलिस और मुंबई पुलिस ने एक जॉइंट ऑपरेशन में मुंबई के यारी रोड इलाके से गिरफ्तार कर लिया है.
विक्रम भट्ट पर उदयपुर के एक डॉक्टर से फिल्मों के नाम पर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का गंभीर आरोप है. राजस्थान पुलिस अब उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए बांद्रा कोर्ट में अर्जी देगी, जिसके बाद उन्हें आगे की पूछताछ के लिए उदयपुर ले जाया जाएगा.
करीब 20 दिन पहले, उदयपुर के इंदिरा ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक डॉ. अजय मुर्डिया ने विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट और 6 अन्य आरोपियों के खिलाफ 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया था. भूपालपुरा स्थित पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR के मुताबिक, आरोपियों ने डॉ. मुर्डिया को फिल्मों में निवेश करने पर 200 करोड़ रुपये की मोटी कमाई का झांसा दिया था. जांच में सामने आया है कि डॉ. अजय मुर्डिया ने अपनी दिवंगत पत्नी की याद में एक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए विक्रम भट्ट की कंपनी के साथ डील की थी. ये भी आरोप है कि चार फिल्मों के लिए एग्रीमेंट हुआ, जिसमें से केवल दो ही बनीं और उनके राइट्स भी डॉक्टर को नहीं दिए गए. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी बिल और ओवरवैल्यूड बिल बनाकर पैसों का गलत इस्तेमाल किया गया.
सात दिन पहले जारी हुआ था लुकआउट नोटिस
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए, उदयपुर पुलिस ने सात दिन पहले ही विक्रम भट्ट, उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट समेत सभी 8 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया था. नोटिस में सभी आरोपियों को 8 दिसंबर तक उदयपुर पुलिस के सामने पेश होने का आदेश दिया गया था. इस नोटिस के बाद आरोपी बिना इजाजत देश छोड़कर बाहर यात्रा नहीं कर सकते थे.
क्यों पुलिस ले रही है ट्रांजिट रिमांड?
विक्रम भट्ट की गिरफ्तारी महाराष्ट्र (मुंबई) में हुई है, जबकि केस राजस्थान (उदयपुर) में दर्ज है. जब किसी आरोपी को अपराध क्षेत्र से बाहर किसी दूसरे राज्य या शहर से गिरफ्तार किया जाता है, तो उसे कानूनी रूप से वापस लाने के लिए स्थानीय अदालत से ट्रांजिट रिमांड की अनुमति लेनी पड़ती है. पुलिस को उम्मीद है कि उदयपुर ले जाकर पूछताछ करने पर इस पूरे 30 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड्स और लेनदेन से जुड़े अन्य अहम खुलासे हो सकते हैं.