गोलमुरी थाना अंतर्गत देबुन बगान में हनुमान मन्दिर के ठीक पिछले सरकारी चापाकल और भूमि पर दबंगों द्वारा अतिक्रमण कर के चारदिवारी निर्माण कर लेने का मामला सामने आया है. कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता दिबेश राज उर्फ़ राजा, दिव्यांशु उर्फ़ रौनक सहित उनके गुर्गों पर देबुन बगान में जमशेदपुर अक्षेस की अनुशंसा पर कुछ वर्षों पूर्व लगे सरकारी चापाकल को मिट्टी से दाबकर चारदीवारी निर्माण कर लेने का आरोप शिकायत में लगाया गया है।
लिखित शिकायत भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने किया है जिनपर एक सप्ताह पहले दिबेश राज और उनके नशेड़ी गुर्गों ने मारपीट और छिनतई किया था. भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने जिला उपायुक्त सहित अनुमंडल पदाधिकारी और जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी के समक्ष लिखित शिकायत करते हुए भू माफियाओं के कब्जे से सरकारी चापाकल और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की माँग की है. विक्रम पंडित ने शिकायत में जिक्र किया है कि गोलमुरी के देबुन बगान बस्ती के लोग दिबेश राज उर्फ़ राजा, दिव्यांशु उर्फ़ रौनक और उनके नशेड़ी गुर्गों से भयक्रांत रहते हैं. सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों पर अवैध कब्जा कर बेचना इनका पेशा है.
विरोध करने पर मारपीट करते हैं. सत्तारूढ़ राजनीतिक पार्टी के बड़े नेताओं द्वारा संरक्षण प्राप्त होने की वजह से थाना में इनके विरुद्ध शिकायत पर सुनवाई नहीं होती है. भाजपा कार्यकर्ता विक्रम पंडित ने उपायुक्त, एसडीओ सहित जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी से त्वरित संज्ञान लेकर कार्रवाई का आग्रह किया है. विक्रम ने बताया कि एक सप्ताह के अंदर यदि चापाकल और सरकारी भूमि से कब्जा नहीं हटाया जाता तो मामले को लेकर सक्षम न्यायालय में परिवाद दायर करेंगे।
निर्वतमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के विरोध में एक फरवरी को समस्त आदिवासी मूलवासी संगठन ने झारखंड बंद का एलान किया है. बंद को देखते हुए देवघर जिले में लॉ एंड आर्डर की समस्या की आशंका के मद्देनजर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं.
इस संदर्भ में सीसीआर डीएसपी आलोक रंजन ने बताया कि सभी थानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है. वहीं, एक्सट्रा फोर्सेस मुहैया कराये गये हैं. ताकि किसी भी विषम परिस्थिति से त्वरित गति से निबटा जा सके. वहीं कंट्रोल रूम में टीयर गैस व क्यूआरटी को तैयार मोड में रहने का निर्देश दिया गया है. साथ ही कंट्रोल रूम के समीप जवानों के साथ बस तैयार रखा गया है, ताकि किसी तरह की सूचना पर पुलिसकर्मी वहां तुरंत पहुंच सकें. नगर थाना क्षेत्र में विशेष फोर्स के साथ जवानों को चौक-चौराहों में तैनाती होगी. उल्लेखनीय है कि रांची स्थित केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष अजय तिर्की की ओर से विज्ञिप्ति जारी कर बंद का आह्वान करते हुए कई संगठनों के शामिल होने की सूचना दी गई है. हालांकि उनकी अोर से आवश्यक सेवाओं को बंद से मुक्त रखने की भी बात कही गयी है.
हजारों की संख्या में कार्यकर्ता जायेंगे दुमका
झारखंड मुक्ति मोर्चा का 45वां स्थापना दिवस दुमका के गांधी मैदान में 2 फरवरी को मनाया जायेगा. स्थापना दिवस को सफल बनाने को लेकर जेएमएम प्रखंड अध्यक्ष जूलेस मरांडी की अध्यक्षता में बुधवार को बैठक की गयी. बैठक में स्थापना दिवस समारोह में प्रखंड क्षेत्र के सभी पंचायतों से अधिक से अधिक संख्या में कार्यकर्ताओं को दुमका पहुंचने का निर्णय लिया. मौके पर किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष तेजनारायण वर्मा ने कहा कि दो फरवरी को हजारों की संख्या में कार्यकर्ता दुमका रवाना होंगे. कहा कि इस बार का स्थापना दिवस ऐतिहासिक होगा. मौके पर सलीम अंसारी, सहुद अंसारी, दिनेश दास, मोती यादव, गोपाल मंडल, सीताराम दास, मृत्युंजय मंडल, राधेश्याम वर्मा, नसीम मियां, राजा मुर्मू, रहमान अंसारी, अंसार अहमद आदि मौजूद थे.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे तथा विधायक दल के नए नेता चंपाई सोरेन द्वारा सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के बाद अब गेंद राजभवन के पाले में है। सभी की निगाहें अब राजभवन पर टिकी हैं।
राज्यपाल सीपी राधाकृष्ण सारे संवैधानिक प्रविधानों का अध्ययन कर गुरुवार को इस पर निर्णय ले सकते हैं। वह इस पर विधिक राय भी ले सकते हैं। बुधवार को भी देर रात तक राजभवन में इसे लेकर मंथन होता रहा।
झारखंड में लागू हो सकता है राष्ट्रपति शासन
राज्यपाल के पास अब चम्पाई सोरेन को नई सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का विकल्प है। हालांकि इससे पहले वे आइएनडीआइए के सभी विधायकों को राजभवन बुला सकते हैं।
चम्पाई सोरेन ने उन्हें 47 विधायकों का समर्थन पत्र सौंपा है। कयास यह भी लगाया जा रहा है कि राज्यपाल खराब विधि व्यवस्था का हवाला देते हुए राष्ट्रपति शासन की भी अनुशंसा कर सकते हैं।
आज कई आशंकाओं से उठेगा पर्दा
राज्यपाल पहले ही कह चुके हैं कि संविधान के संरक्षक के रूप में उनकी पूरी स्थिति पर नजर है। साथ ही वे लचर विधि व्यवस्था पर भी लगातार सवाल उठाते रहे हैं। ईडी के विरोध में झामुमो के प्रदर्शन का भी हवाला दे सकते हैं। गुरुवार को भविष्य में छिपे इन सभी आशंकाओं से पर्दा उठेगा।
लग सकता है समय भी
राज्यपाल निर्णय लेने में एक-दो दिनों का समय भी ले सकते हैं। फिलहाल वे गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में मुख्यमंत्री की याचिका पर होने वाली सुनवाई का भी इंतजार कर सकते हैं। राज्यपाल कोई निर्णय नहीं ले पाते हैं तो वे केंद्रीय गृह मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट भेज सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा बीते बुधवार को जमीन घोटाले में गिरफ्तार किये गये झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ‘बिगड़ैल बच्चा’ बताया है।
मंत्री रिजिजू ने जांच एजेंसी के शिकंजे में फंसने के बाद सूबे की सत्ता गंवाने वाले हेमंत सोरने पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्हें जनता का पैसा नहीं लूटने के लिए खुला नहीं छोड़ा जा सकता है।
किरेन रिजिजू ने सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर किये एक पोस्ट में हेमंत सोरेन को निशाना बनाते हुए कहा, “मैं एक पिछड़े इलाके का आदिवासी हूं, आपकी यह टिप्पणी मुझे हास्यास्पद लगती है। अगर शिबू सोरेन जी यह डायलॉग कहते तो मैं मान सकता हूं, लेकिन एक ‘बिगड़ैल बच्चे’ को यह डायलॉग शोभा नहीं देता। वैसे भी आदिवासियों के पास इसका लाइसेंस नहीं है कि वो जनता का पैसा लूटें।”
मैं कहीं अधिक पिछड़े क्षेत्र का आदिवासी हूं। मुझे ये आपका डाइउग मज़ाकिया लगता है। अगर शिबू सोरेन जी ये डायलॉग कहते हैं तो मैं मान सकता हूं लेकिन एक बिगड़ैल बेटा को ये डायलॉग शोभा नहीं देता। वैसे भी आदिवासियों को जनता का पैसा लूटने का लाइसेंस नहीं है। https://t.co/Eptux567n4
मंत्री रिजिजू की एक्स पर की गई यह तल्ख टिप्पणी हेमंत सोरेन के एक्स पर शेयर किये गये उस पोस्ट के जवाब में आई है, जिसमें हेमंत सोरने ने कहा था कि वह डरे हुए नहीं हैं और हार स्वीकार नहीं करेंगे।
ईडी की गिरफ्तारी के बाद हेमंत सोरेन ने एक्स पर किये एक पोस्ट में कहा, “यह एक ब्रेक है, जीवन एक महान लड़ाई है। मैंने हर पल संघर्ष किया है और मैं हर क्षण लड़ूंगा लेकिन समझौते की भीख नहीं मांगूंगा। चाहे हार में या जीत में, मैं डरता नहीं हूं। मैं हार नहीं मानूंगा।” व्यर्थ मैं हार स्वीकार नहीं करूंगा।”
मालूम हो कि बीते बुधवार को झारखंड की सियासच में भारी उथल-पुथल उस वक्त मची, जब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जमीन घोटाले में लंबी पूछताछ के बाद हेमंत सोरने को गिरफ्तार करने का फैसला किया। उसके बाद हेमंत सोरेन ईडी अधिकारियों के साथ राजभवन गये, जहां उन्होंने राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को मुख्यमंत्री पद से अपना त्यागपत्र सौंपा। राजभवन द्वारा सोरेन का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद ईडी अधिकारियों ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
हेमंत की गिरफ्तीर के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि झामुमो गठबंधन चंपई सोरेन को, जो राज्य के परिवहन मंत्री हैं। सूबे के नये मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ले सकते हें। चंपई सोरने ने राज्यपाल के सामने सीएम पद की दावेदारी भी पेश कर दी है।
जिला अदालत की ओर से ज्ञानवापी में व्यास जी के तहखाने में नियमित पूजन-अर्चन की बुधवार को अनुमति के बाद देर रात बैरिकेडिंग से रास्ता बनाते हुए व्यास जी का तहखाना खोल दिया गया।
इसके लिए डीएम एस. राजलिंगम व पुलिस कमिश्नर अशोक मुथा जैन समेत पुलिस-प्रशासन के अधिकारी विश्वनाथ धाम-ज्ञानवापी क्षेत्र में डटे रहे। रात 1.50 बजे परिसर से बाहर निकले जिलाधिकारी ने कहा कि न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया गया है।
तहखाने में पूजा की अनुमति
जिला जज अजय कृष्ण विश्वेश ने दोपहर में सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी में व्यास जी के तहखाने में विग्रहों की नियमित राग-भोग, पूजा-अर्चना की अनुमति दी। वादी और काशी विश्वनाथ ट्रस्ट बोर्ड को तहखाने में स्थित मूर्तियों का नाम निर्दिष्ट पुजारी से पूजा, राग-भोग कराने का निर्देश दिया। साथ ही डीएम को सात दिन में लोहे की बाड़ आदि में उचित प्रबंध करने को कहा।
छावनी बना ज्ञानवापी
इसके बाद से पुलिस ने सक्रियता बढ़ा दी। विश्वनाथ मंदिर-ज्ञानवापी क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाने के साथ शहर में पूरी रात थानेदारों ने खुद दलबल समेत चक्रमण की जिम्मेदारी संभाली। देर रात में जिलाधिकारी ए. राजलिंगम व पुलिस कमिश्नर अशोक मुथा जैन के साथ पुलिस-प्रशासन के अधिकारी विश्वनाथ धाम पहुंचे। जिला अदालत के फैसले के आलोक में अफसरों ने सभागार में बैठक की। मंदिर बंद होने के बाद भी पुलिस-प्रशासन के अफसर परिसर में ही डटे रहे।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गिरफ्तार कर लिया था। उनके दिल्ली आवास से ईडी की टीम को एक बीएमडब्ल्यू कार और 35 लाख रुपये कैश मिले थे।
इस घटनाक्रम ने पूरे देश की ध्यान अपनी तरफ खींचा है। साथ ही विपक्षी दलों के कई मौजूदा और पूर्व मुख्यमंत्रियों की भी इस घटनाक्रम पर गहरी नजर होगी। ऐसा इसलिए कि वे भी केंद्रीय एजेंसियों की जांच का सामना कर रहे हैं।
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब नीति मामले को लेकर केंद्रीय एजेंसी की जांच का सामना कर रहे हैं। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि उन्होंने इससे कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाया है। आरोप है कि केजरीवाल को ऐसा करने के लिए 100 रुपये की रिश्वत मिली है। केजरीवाल को अब तक ईडी ने चार समन भेजा है, हालांकि वह अभी तक पेश नहीं हुए हैं।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी की जांच के दायरे में हैं। विधानसभा में टीडीपी के तत्कालीन नेता रेवंत रेड्डी पर 2015 में एमएलसी चुनाव में अपने पक्ष में वोट देने के लिए एक विधायक को कथित तौर पर 50 लाख रुपये की रिश्वत देने का मामला दर्ज किया गया था।
ईडी ने अप्रैल 2021 में केरल के सीएम पिनाराई विजयन के खिलाफ पीएमएलए जांच शुरू की थी। सीबीआई ने 1995 एसएनसी लवलिन मामले में आरोप पत्र दायर किया। यह मामला इडुक्की में जलविद्युत परियोजनाओं के आधुनिकीकरण के लिए कनाडाई फर्म एसएनसी लवलिन को दिए गए अनुबंध में कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है। आपको बता दें कि विजयन तब बिजली मंत्री थे।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी यूपीए काल से ही कई जांचों का सामना कर रहे हैं। ईडी ने 2015 में उनके खिलाफ एक नए पीएमएलए मामले में मामला दर्ज किया था। यह मामला जगन के स्वामित्व वाली भारती सीमेंट्स के वित्तीय मामलों से संबंधित था।
छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल अपनी सरकार के दौरान कोयला परिवहन, शराब की दुकानों के संचालन और महादेव गेमिंग ऐप में अनियमितताओं से संबंधित कथित मनी लॉन्ड्रिंग के कम से कम तीन मामलों में ईडी जांच का सामना कर रहे हैं।
बिहार के पूर्व सीएम लालू प्रसाद, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव कथित आईआरसीटीसी घोटाले और नौकरी के बदले जमीन मामले में मुख्य आरोपी हैं। जबकि 2017 का आईआरसीटीसी मामला रेल मंत्री के रूप में लालू द्वारा आईआरसीटीसी के दो होटलों के रखरखाव के लिए किराए पर ली गई कंपनी को कथित लाभ देने से संबंधित है। 2022 का मामला नौकरी के बदले जमीन मामला लालू परिवार पर रेलवे में नौकरी के बदले प्लॉट लेने का है।
हरियाणा के पूर्व सीएम भूपिंदर सिंह हुड्डा की मानेसर भूमि सौदा मामले और एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को पंचकुला में भूमि आवंटन मामले में ईडी द्वारा जांच की जा रही है। एजेंसी पहले ही एजेएल मामले में हुड्डा और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मोतीलाल वोरा के खिलाफ शिकायत दर्ज कर चुकी है।
‘राजस्थान एम्बुलेंस घोटाला’ मामले में राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत और कभी उनके डिप्टी सीएम रह चुके सचिन पायलट समेत कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम का नाम भी शामिल है। 2015 का मामला 2010 में फर्जी तरीके से ज़िकित्जा हेल्थकेयर को ‘108’ एम्बुलेंस सेवा चलाने का ठेका देने से संबंधित है। कंपनी में पायलट और कार्ति कभी कथित तौर पर निदेशक थे। कंपनी पर अतिरंजित चालान जमा करने का आरोप है।
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव भी गोमती रिवरफ्रंट परियोजना के साथ-साथ खनन ठेकों में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई और ईडी दोनों की जांच के दायरे में हैं।
बसपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व सीएम मायावती का नाम किसी भी केंद्रीय एजेंसी की एफआईआर में नहीं है, लेकिन उनके सीएम रहते हुए कई परियोजनाएं और योजनाएं जांच के दायरे में हैं।
जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन (जेकेसीए) को बीसीसीआई द्वारा दिए गए अनुदान में कथित अनियमितताओं के संबंध में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला के खिलाफ भी जांच चल रही है।
फारूक अब्दुल्ला के बेटे और जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला से ईडी ने 2022 में जम्मू-कश्मीर बैंक के वित्तीय मामलों और उसके निदेशकों की नियुक्ति से संबंधित मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में पूछताछ की थी।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती को जम्मू-कश्मीर बैंक मामले में भी ईडी जांच का सामना करना पड़ रहा है। यह जांच छापेमारी के दौरान ईडी द्वारा जब्त की गई दो डायरियों पर आधारित है। डायरियों में कथित तौर पर मुफ्ती परिवार को किए गए कथित भुगतान का जिक्र है।
जुलाई 2019 में, सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार के लिए अरुणाचल के पूर्व सीएम नबाम तुकी पर मामला दर्ज किया था। सीबीआई की एफआईआर के आधार पर, ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग के लिए तुकी की जांच कर रही है। आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन मंत्री तुकी ने अपने भाई के साथ मिलकर पैसे की हेराफेरी की थी।
नवंबर 2019 में सीबीआई ने कथित भ्रष्टाचार के लिए मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी सिंह के आवास पर तलाशी ली थी। यह मामला मणिपुर डेवलपमेंट सोसाइटी में 332 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। इस समय इबोबी इसके अध्यक्ष थे। सीबीआई मामले के आधार पर ईडी ने पीएमएलए मामला दर्ज किया।
गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला के खिलाफ केंद्रीय कपड़ा मंत्री रहते हुए मुंबई में एक बेशकीमती जमीन बेचकर सरकारी खजाने को 709 करोड़ रुपये का कथित नुकसान पहुंचाने के मामले में सीबीआई और ईडी जांच कर रही है। सीबीआई ने उनके खिलाफ 2015 में मामला दर्ज किया था। ईडी ने अगस्त 2016 में मामला दर्ज किया था। इसके ठीक एक दिन बाद वाघेला ने पीएम नरेंद्र मोदी और तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को “मुठभेड़ विशेषज्ञ” कहा था। जांच अभी भी जारी है।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार और उनके भतीजे अजीत पवार महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक के संचालन में कथित अनियमितताओं के लिए ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का सामना कर रहे हैं।
झारखंड की राजनीति में शिबू सोरेन परिवार का बड़ा दखल रहा है. यह परिवार सत्ता के इर्द-गिर्द रहा है. शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रहे, तो उनके पुत्र हेमंत सोरेन ने शिबू की विरासत संभाली.
हेमंत सोरेन भी दो बार मुख्यमंत्री बने. हेमंत सोरेन के युग में झामुमो सत्ता के उत्कर्ष तक पहुंचा. कांग्रेस और राजद के साथ मिलकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनायी. झामुमो के वरिष्ठ विधायक और टाइगर के नाम से मशहूर चंपई सोरेन को शिबू परिवार ने सत्ता सौंप दी. चंपई झारखंड आंदोलन का बड़ा चेहरा रहे हैं. पार्टी के अंदर इनकी साख है. झामुमो जब-जब सत्ता में आयी, चंपई सोरेन को जगह मिली.
चंपई ने मंत्री पद संभाला. झामुमो में इनकी अपनी साख है. हेमंत सोरेन की सरकार जब भ्रष्टाचार में घिरती रही. सरकार पर संकट छाये, तो हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन के नाम पर अटकलें लगने लगी. मंगलवार को सत्ता पक्ष की बैठक में हेमंत सोरेन ने कल्पना सोरेन के साथ बैठक में भी आयीं. सत्ता के गलियारे में संकेत था कि कल्पना कुर्सी संभाल सकती हैं. पर झामुमो ने अपनी रणनीति बदली. बुधवार की शाम सत्ता पक्ष की बैठक में आनन-फानन में चंपई सोरेन के नाम पर सहमति बन गयी. सत्ता की चाबी बदलने के मामले में हेमंत सोरेन पारिवारिक विवाद से बाहर निकलना चाहते थे.
हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम आगे आते ही, घर की बड़ी बहू सीता सोरेन भड़क गयीं. सीता सोरेन शिबू सोरेन के बड़े बेटे स्व दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं. सीता सोरेन ने मंगलवार को कल्पना सोरेन का नाम आगे सुनते ही प्रतिक्रिया दे दी थी कि हमें स्वीकार नहीं होगा. मैं घर की बड़ी बहू हूं. मेरा पहला अधिकार है. उधर हेमंत सोरेन के छोटे भाई बसंत सोरेन, जो दुमका से विधायक उनको लेकर भी अटकलें लग रही थीं कि शायद वह भी फैसले का विरोध कर दें. इन सारे कयासों और संभावनाओं को हेमंत सोरेन ने खारिज कर दिया.
राज्य गठन के बाद पहली बार 2005 में शिबू परिवार के पास आयी सत्ता
वर्ष 2000 हजार में राज्य गठन के बाद पांच वर्षों के बाद यानी 2005 में शिबू परिवार ने पहली बार सत्ता संभाली. खुद पार्टी सुप्रीमो शिबू सोरेन 2003 में 12 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने. इसके बाद शिबू सोरेन ने ही 2008 में तत्कालीन मधु कोड़ा को हटा कर मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. हालांकि शिबू विधानसभा चुनाव हार गये और सत्ता हाथ से निकल गयी. इसके बाद शिबू के बेटे हेमंत सोरेन ने राजनीति में पकड़ बनायी और हेमंत 2013 में पहली बार मुख्यमंत्री बने. करीब 13 महीने सरकार चलायी. वर्ष 2019 में हेमंत सोरेन ने पूर्ण बहुमत के साथ मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली. विवादों में सरकार घिरती गयी. हेमंत सोरेन को इस्तीफा देना पड़ा और चंपई सोरेन के हाथ सत्ता आयी.
हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद विपक्षी दलों का INDIA ब्लॉक महागठबंधन एक्टिव हो गया है. सोरेन के अरेस्ट होने के बाद बुधवार की शाम INDIA ब्लॉक के शीर्ष नेताओं ने एक हाई लेवल मीटिंग की.
इस बैठक में गिरफ्तारी के बाद बनने वाली स्थिति पर चर्चा की गई.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर हुई बैठक में सोनिया गांधी, सीपीआई (एम) महासचिव सीताराम येचुरी, एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार और डीएमके नेता टीआर बालू समेत कई नेता मौजूद रहे. दरअसल, सोरेन की झारखंड मुक्ति मोर्चा पार्टी INDIA ब्लॉक की एक घटक है.
INDIA ब्लॉक का हिस्सा है झामुमो
दरअसल, INDIA ब्लॉक को आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी से मुकाबला करने के लिए बनाया गया है, इसमें कई विपक्षी दल शामिल हैं. दरअसल, सोरेन को झारखंड के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद कथित जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बुधवार को गिरफ्तार किया गया है. उनकी गिरफ्तारी के बाद नए मुख्यमंत्री के तौर पर राज्य के परिवहन मंत्री चंपई सोरेन का नाम प्रस्तावित किया गया है.
8 घंटे तक पूछताछ के बाद गिरफ्तारी
बुधवार दोपहर सवा एक बजे ईडी की टीम रांची में स्थित हेमंत सोरेन के आवास पर पहुंची. यहां उनसे 8 घंटे पूछताछ हुई. रात साढ़े 8 बजे के आसपास हेमंत सोरेन राजभवन पहुंचे. इस दौरान ईडी की टीम भी साथ थी. सोरेन ने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा, जिसे राज्यपाल ने मंजूर कर लिया. यहां से हेमंत अपने आवास पर पहुंचे. यहां 9 बजकर 33 मिनट पर ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. इस तरह हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी बड़ी नाटकीय रही.
जमीन घोटाले में हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद अब राजभवन पर निगाहें टिक गई हैं। हेमंत के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद महागठबंधन ने चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया है।
इसके बाद चंपई ने 43 विधायकों के साथ सरकार बनाने का दावा भी पेश किया, लेकिन खबर लिखे जाने तक राजभवन ने शपथ ग्रहण का कोई समय नहीं दिया है। ऐसे में अब निगाहें राजभवन पर है कि आगे क्या होगा। वहीं इन सबको लेकर रांची में सियासी हलचल भी तेज हो गयी है। सभी दलों के वरीय नेता रांची में कैंप किए हुए हैं। गुरुवार को भी कई नेताओं के पहुंचने की संभावना है।
चंपई ने राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा किया। राज्यपाल से मुलाकात के बाद कांग्रेस विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने कहा कि राज्यपाल ने अभी कुछ नहीं कहा है। वहीं चंपई ने बताया कि राज्यपाल ने कहा कि बताएंगे। विधायक प्रदीप यादव ने भी स्पष्ट किया कि हमने राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश किया है। उधर, निर्दलीय विधायक सरयू राय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि हेमंत का त्यागपत्र राज्यपाल द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद झारखंड में कोई मुख्यमंत्री नहीं है। कोई सरकार नहीं है। राज्य में संवैधानिक संकट है।
इधर, राज्य के सियासी हालात पर भाजपा भी नजर जमाए हुई है। भाजपा के प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी बुधवार की रात रांची पहुंचे। रांची पहुंचने के बाद उन्होंने कहा कि हेमंत सोरेन ने जो किया, वही भरेंगे। जानकारी के मुताबिक, गुरुवार को भाजपा के प्रदेश प्रभारी लक्ष्मीकांत वाजपेयी सभी जिलाध्यक्षों व प्रभारियों के साथ बैठक करेंगे। उधर, गुरुवार को भाजपा के संगठन महामंत्री बीएल संतोष के भी रांची पहुंचने की संभावना है।
विधायकों को झारखंड से बाहर ले जाया जा सकता है महागठबंधन घटक दल झामुमो, कांग्रेस और राजद के विधायक सर्किट हाउस में कैंप कर रहे हैं। राजभवन से देर रात सीधे सभी को सर्किट हाउस लाया गया। हॉर्स ट्रेडिंग की संभावना से लेकर पार्टियों को टूटने से बचाने के लिए विधायकों को झारखंड से बाहर भी ले जाया जा सकता है। सभी विधायकों का अल्टरनेट मोबाइल के साथ साजो-सामान मंगा लिया गया है। इन्हें झारखंड से बाहर तेलंगाना या पश्चिम बंगाल शिफ्ट करने की भी तैयारी है।
संवैधानिक संकट के हालात नहीं हेमंत सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने और किसी के कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त नहीं किए जाने की स्थिति कुछ दिन रह सकती है। इसे संवैधानिक संकट नहीं माना जा सकता। विधि विशेषज्ञ और पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार के अनुसार हेमंत सोरेन के इस्तीफे के बाद महागठबंधन ने नया नेता का चयन कर लिया है। नए नेता ने सरकार बनाने का अपना दावा अपने समर्थक विधायकों के साथ पेश कर दिया है। यदि दावा पेश करने वाले के पास बहुमत है तो राज्यपाल उन्हें सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने को बाध्य हैं। इसके लिए राज्यपाल एक-दो दिन का समय ले सकते हैं। इस दौरान राज्य के मुख्य सचिव राज्यपाल के निर्देश पर काम करेंगे। राज्यपाल के आदेश से ही सरकार के सभी काम निष्पादित होते हैं। ऐसे में राज्य में संवैधानिक संकट की स्थिति नहीं हो सकती है।
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के मामले में केंद्रीय चुनाव आयोग के दिये गये निर्देश से संबंधित पत्र बंद लिफाफा 25 अगस्त 2022 से ही राज्यपाल के पास पड़ा हुआ है.
उस लिफाफे के अंदर क्या है, इसको लेकर अभी तक आधिकारिक खुलासा तो नहीं हुआ है, लेकिन झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ती रही है. 20 जनवरी 2022 को आरटीआइ कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो द्वारा जय झारखंड अभियान बैनर के नाम से राजभवन में शिकायत की गयी कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए माइनिंग लीज अपने नाम की है.
इसी के आधार पर भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (अब ओड़िशा के राज्यपाल) रघुवर दास और अन्य नेताओं ने तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस (अब महाराष्ट्र के राज्यपाल) से फरवरी, 2022 में से मिल कर इस बात की शिकायत की कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए हेमंत सोरेन ने एक खनन पट्टा अपने नाम कर लिया. इसलिए श्री सोरेन पर संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. भाजपा की इस शिकायत पर ही राज्यपाल श्री बैस ने इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग से जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 ए के तहत अपनी राय मांगी. पुन: भाजपा की ओर से 12 मई 2022 को दीपक प्रकाश, बाबूलाल मरांडी आदि नेताओं ने राज्यपाल से राजभवन में मिल कर श्री सोरेन पर मुख्यमंत्री रहते अनगड़ा में खाता नंबर 187 व प्लाट नंबर 482 में 0.88 एकड़ खनन पट्टा अपने नाम कर लेने पर कार्रवाई करने की मांग की.
इसके बाद निर्वाचन आयोग ने भाजपा की शिकायत व राज्यपाल द्वारा राय मांगे जाने पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 20 मई 2022 तक जवाब देने के लिए कहा. साथ ही भाजपा अध्यक्ष को भी जवाब देने के लिए कहा गया. भाजपा की ओर से जवाब भेज दिया गया, जबकि श्री सोरेन ने जवाब देकर स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई माइनिंग लीज नहीं ली है. वहीं आयोग ने श्री सोरेन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हो कर जवाब देने के लिए 31 मई 2022 की तिथि निर्धारित कर दी. श्री सोरेन ने जवाब देने के लिए समय की मांग की. आयोग ने पुन: समय देते हुए उन्हें 14 जून, 2022 को जवाब देने के लिए समय निर्धारित किया. इस दिन फिर श्री सोरेन ने वकील की तबीयत खराब होने का हवाला देकर पुन: समय की मांग की. आयोग ने इस बार फिर 28 जून 2022 को जवाब देने के लिए समय निर्धारित किया और उन्होंने जवाब भी दिया. इस बीच 25 अगस्त 2022 को निर्वाचन आयोग ने श्री सोरेन के संबंध में अपना निर्देश स्पेशल मैसेंजर से राज्यपाल के पास एक लिफाफा के अंदर चिपका कर भेजा.
दरअसल इस लिफाफे के अंदर जो पत्र है, उसके आधार पर तय हो सकता है कि राज्य के मुख्यमंत्री श्री सोरेन की विधानसभा सदस्यता खारिज हो जायेगी या बनी रहेगी. मीडिया में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगी. लेकिन राज्यपाल श्री बैस ने इस पत्र को बंद लिफाफे से बाहर नहीं आने दिया और इसके चलते श्री सोरेन की सरकार कई महीनों तक अनिश्चितताओं के भंवर में फंसी रही. राजनीतिक गलियारे में फैली अनिश्चितताओं पर विराम लगाने के उद्देश्य से एक सितंबर, 2022 को सत्तारूढ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन का 10 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल श्री बैस से राजभवन में मिला और आग्रह करते हुए जानना चाहा कि राजनीतिक गलियारे व मीडिया में संविधान के अनुच्छेद 192 के तहत चुनाव आयोग से बरहेट विधायक तथा राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को लेकर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 9 ए के तहत अयोग्य घोषित करने की बात कही जा रही है.
इसमें कितनी सच्चाई है. इसकी जानकारी उपलब्ध करायी जाये. खुलासा नहीं होने से अनिश्चितता पैदा हो रही है. राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि वे शीघ्र ही इसका खुलासा कर देंगे. इस बीच श्री बैस ने आड्रे हाउस में स्वास्थ्य विभाग के एक कार्यक्रम में मीडिया द्वारा लिफाफा खोलने के बारे में बात कही, तो श्री बैस ने कहा कि लिफाफा गोंद से ऐसा चिपका हुआ है कि वह खुल नहीं रहा है. 28 अक्तूबर 2022 को रायपुर में श्री बैस ने मीडिया से कहा कि हेमंत सोरेन मामले में एटम बम कभी भी फट सकता है. इधर फरवरी 2023 में श्री बैस का स्थानांतरण महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में हो गया. जाने से पहले श्री बैस ने राजभवन में मीडिया से रू-ब-रू होते हुए कहा कि नये राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन चाहें, तो चुनाव आयोग से आये पत्र के आधार पर फैसला कर सकते हैं.
श्री बैस ने कहा कि उन्होंने इस पर फैसला इसलिए नहीं लिया, क्योंकि इससे राज्य की सरकार अस्थिर हो सकती थी. राज्यपाल एक संवैधानिक पद है, उन्होंने वही किया, जो संविधान के दायरे में रहा. चुनाव आयोग से आये पत्र पर निर्णय लेना या नहीं लेना, ये राज्यपाल का अधिकार है. उन्होंने कहा कि सही समय पर फैसला लेने के लिए सोचा था, लेकिन देखा कि लिफाफा मिलने से पहले के दो साल हेमंत सोरेन सरकार जितना काम किया, उससे अधिक काम लिफाफा आने के बाद करने लगी. ऐसे में उन्होंने राज्य हित में फैसला नहीं लेना उचित समझा. इधर, नये राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से जब मीडिया ने लिफाफा के बारे में जानना चाहा, तो उन्होंने सिर्फ यह कह कर सवाल टाल दिया कि उन्होंने अब तक लिफाफा नहीं देखा है.