Ranchi : पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के अध्यक्ष बनाए गए हैं. इससे संबंधित आदेश सरकार द्वारा गुरुवार की शाम जारी कर दिया गया. जारी आदेश में कहा गया है कि नीरज सिन्हा को झारखंड कर्मचारी चयन आयोग में अध्यक्ष के पद पर 27 सितंबर 2023 के प्रभाव से नियुक्त किया जाता है.
नीरज सिन्हा पदभार करने की तिथि से अधिकतम 65 वर्ष की आयु पूरी करने तक आयोग के अध्यक्ष के पद पर कार्यरत रहेंगे
घटना के लगभग चौबीस घंटे होने के बाद गोताखोरों का नहीं आना आपदा प्रबंधन की निष्क्रियता को दर्शाता है। मानगो सुभाष कॉलोनी निवासी अरविंद सिंह के इकलौता स्तरह वर्षीय बेटा कुणाल सिंह एवं सिदगोड़ा बारा फ्लैट का रहने वाला उसका साथी शिवम का कल दोपहर लगभग 2:00 बजे कांदरबेड़ा के स्वर्ण रेखा नदी में डूब जाने से देहांत होने की आशंका जताई जा रही हैं।
कुणाल केएमपीएम विद्यालय अपने घर से पढ़ने गया था दोपहर 1:00 बजे जब वह घर नहीं लौटा तो उसकी मां ने कुणाल के मोबाइल में लगभग 2:00 बजे फोन किया कुणाल का फोन कपाली थाना के थानेदार ने उठाकर उन्हें थाना बुलाकर बताया कि उनके बेटे का कपड़ा ,मोबाइल फोन और स्कूटी चांडिल कांदरबेड़ा के वैसे स्थान में मिला है जहां कोई आसानी से जा नहीं सकता।
परिजन दौड़े दौड़े कपाली थाना पहुंचे वहां कुणाल का कपड़ा ,मोबाइल और स्कूटी देखकर हतव्रत हो गए परिजनों कहना कि विद्यालय जाने वाला लड़का कैसे नदी किनारे चला गया समझ में नहीं आ रहा है। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता विकास सिंह परिजनों के साथ घटना स्थल पर पहुंचे जहां कपाली थाना के अफसर जांच पड़ताल कर रहे थे स्थानीय लोगों ने बताया कि कल दोपहर लगभग दो बजे दो बच्चों को लोगों ने डूबते हुए देखा गया था लेकिन वहां में पेयजल स्वच्छता विभाग का इंटकवेल रहने के कारण नदी लगभग सत्तर फीट गहरा है जिसके कारण बिना ऑक्सीजन लिए स्थानीय मछुआरा या कोई व्यक्ति नदी के भीतर जाकर बच्चों को खोज नहीं पा रहा है । मौके में पहुंचे भाजपा नेता विकास सिंह ने कहा घटना की सूचना सभी वरीय पदाधिकारी को कर दी गई है जिला प्रशासन के लोग स्वयं घटना समय मौजूद है उसके बावजूद भी लगभग चौबीस घंटे बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार ने रेस्क्यू टीम को घटनास्थल पर नहीं भेजना यह दुर्भाग्य की बात हैं निष्क्रिय पड़े आपदा प्रबंधन मंत्रालय को और सक्रिय करने की आवश्यकता है ।परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
रांची शहर के कांके इलाके में गुरुवार सुबह अपराधियों ने एक कारोबारी अवधेश कुमार पर अंधाधुंध फायरिंग की। उन्हें सात गोलियां मारी गई हैं। गंभीर हालत में उन्हें इलाज के लिए रांची के पल्स हॉस्पिटल में दाखिल कराया गया है, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
बताया गया कि दो अपराधी पैदल आये थे और घटना को अंजाम देने के बाद एक बाइक लूटकर फरार हो गये। ताबड़तोड़ फायरिंग की घटना से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी है।
अवधेश कुमार जमीन और प्रॉपर्टी डीलिंग के कारोबार से जुड़े थे। माना जा रहा है कि व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता या फिर रंगदारी की मांग को लेकर उन्हें निशाना बनाया गया है।
पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है। बता दें कि बीते दो महीने के भीतर रांची में दो कारोबारियों की हत्या दिनदहाड़े की गई है। दो अन्य के ऊपर फायरिंग की गई है।
जमशेदपुर, ब्रजेश सिंह : लौहनगरी जमशेदपुर में पर्यावरण के नियमों का लगातार उल्लंघन हो रहा है, जिससे प्रदूषण की रफ्तार बढ़ रही है. लेकिन इसे लेकर अब तक कोई ठोस कदम प्रशासन ने नहीं उठाया है.
एक्यूआइ (एयर क्वालिटी इंडेक्स) लेवल की जांच मशीनें भी बंद कर दी गयी हैं, जिससे हवा में प्रदूषण का पता नहीं चल पा रहा है. नदियों का पानी भी जहरीला हो रहा है. वहीं, पेड़ों को बचाने को लेकर भी प्रशासन की ओर से कोई कदम नहीं उठाया गया है. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने तीन बड़े आदेश पिछले दिनों दिये थे. इन आदेशों को प्रशासन ठेंगा दिखा रहा है. इसको लेकर अब तक कोई ठोस उपाय या सुगबुगाहट तक नहीं है.
केस 1 : पेड़ों के आसपास से कंक्रीट या टाइल्स हटाने की हुई खानापूर्ति
जमशेदपुर में पेड़ों की जड़ों के आसपास टाइल्स और कंक्रीट का जाल बिछाया गया है. इसके खिलाफ पर्यावरण प्रेमी अवधेश पांडेय ने एनजीटी में याचिका दाखिल की थी. एनजीटी ने आदेश दिया था कि प्रशासन पेड़ों के आसपास से कंक्रीट और टाइल्स को हटाये, लेकिन कोई काम नहीं हुआ. 11 सितंबर तक आदेश का अनुपालन करते हुए शपथ पत्र दायर करने को कहा गया था. एक कमेटी गठित की गयी थी, जिसमें उपायुक्त के अलावा जमशेदपुर अक्षेस के विशेष पदाधिकारी, डीएफओ जमशेदपुर, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के सीनियर साइंटिस्ट को शामिल किया गया था. कमेटी ने कुछ जगहों पर कार्रवाई कर तस्वीरें खिंचाई थी.
केस 2 : नदी में गंदा पानी गिराने को लेकर नहीं उठाया गया ठोस कदम
जमशेदपुर और आसपास सुवर्णरेखा नदी में बिना ट्रीटमेंट के नालों को पानी बहाने के मामले में एनजीटी ने मार्च में हाइलेवल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था. इसमें एसीएस इनवायरमेंट, झारखंड सरकार के प्रतिनिधि, सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के प्रतिनिधि, रांची के समेकित प्रदूषण पर्षद के ऑफिस के प्रतिनिधि और जमशेदपुर के डीसी को शामिल किया गया था. कमेटी को कहा गया था कि 15 दिनों में जांच कर फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट समर्पित करें. इसे लेकर रिपोर्ट जरूर भेजी गयी, जिसमें कहा गया कि टाटा स्टील और टाटा मोटर्स की ओर से प्रदूषण नहीं फैलाया गया है. आज भी 18 नाला नदियों में बहाये जा रहे है.
केस 3 : सोनारी यार्ड में कचरा का हो रहा डंपिंग, रिसाइक्लिंग की व्यवस्था नहीं
सोनारी मरीन ड्राइव स्थित कचरे के ढेर को छह माह के भीतर बायो माइनिंग और रिसोर्स रिकवरी के जरिये खत्म करने का जमशेदपुर अक्षेस ने गुरु रामदास कंस्ट्रक्शन को ठेका दिया था. लेकिन यह तय नहीं हो पाया है कि अगर सोनारी में कचरे की डंपिंग बंद हो जायेगी, तो आखिर कचरे की डंपिंग कहां होगी? सोनारी में मानगो नगर निगम और जमशेदपुर अक्षेस के कचरे की डंपिंग होती है. दोनों नगर निकायों की करीब 10 लाख की आबादी से रोजाना करीब 387.98 मीट्रिक टन कचरा निकलता है जबकि प्रति व्यक्ति औसतन 0.59 किलोग्राम कचरा निकलता है. कचरे को शिफ्ट करने को लेकर अब तक नयी जगह तय नहीं हो पायी है. ऐसे में कचरे का छह माह में कोई स्थायी समाधान हो पायेगा, इसको लेकर संशय है. जमशेदपुर अक्षेस के मुताबिक, सोनारी के डंपिंग साइट पर पार्क बनाया जायेगा. एनजीटी में भी समय लिया गया है. लिखित में दिया गया है कि सोनारी में कचरे की डंपिंग बंद की जायेगी. लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाये गये हैं. नतीजतन, कचरा वहीं डंप कर दी जा रही है.
कोलकाता के अपोलो अस्पताल में ईलाजरत युवराज से कोलकाता जाकर मिले भाजपा नेता विकास सिंह,अपोलो अस्पताल के न्यूरोसर्जन डॉक्टर सिंघानिया को पुष्पगुच्छ देकर किया सम्मानित । लगभग एक माह पूर्व सरायकेला खरसावां जिले के कांदरबेड़ा में हुए भीषण सड़क दुर्घटना में घायल मानगो डी चौधरी कांप्लेक्स के रहने वाले हरेंद्र सिंह का इकलौता बेटा युवराज अब खतरे से बाहर है । तेज गति से स्कॉर्पियो गाड़ी चलाने के कारण गाड़ी में सवार भाजपा नेता भाजपा वास्को बेसरा का बेटा और एक लड़की का दुर्घटना स्थल में ही निधन हो गया था ।
स्कॉर्पियो गाड़ी में सवार युवराज को स्थानीय जिला प्रशासन ने लगभग दो घंटे कड़ी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त स्कॉर्पियो से बाहर निकाल कर टाटा मुख्य अस्पताल भेजा था टाटा मुख्य अस्पताल के डॉक्टरों ने गंभीर रूप से घायल युवराज की स्थिति सही नहीं बताते हुए उसे उच्च स्तरीय इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर कर दिया था युवराज के परिजनों ने उसे उच्च स्तरीय इलाज के लिए कोलकाता के अपोलो अस्पताल में दाखिला कराया जहां एक महीने पांच दिन तक ईलाज होने के बाद डॉक्टरों ने आज युवराज को खतरे से बाहर बताते हुए पूरी तरह युवराज का जल्द स्वस्थ हो जाने का भरोसा परिजनों को दिया ।
भाजपा नेता विकास सिंह कोलकाता के अपोलो हॉस्पिटल जाकर युवराज से मिलकर हाल जाना युवराज का इलाज कर रहे हैं न्यूरोसर्जन डॉक्टर सिंघानिया को पुष्प गुच्छ देकर सम्मानित किया। अस्पताल में मौजूद युवराज के पिता और माता भाजपा नेता विकास सिंह को देखकर भावुक होकर रोते हुए कहा कि जमशेदपुर वासियों के आशीर्वाद से आज मेरा जिंदगी का जंग जीत गया ।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग के कोकेरनाग इलाके में आतंकियों से एनकाउंटर में आर्मी कर्नल, मेजर और डीएसपी बुधवार (13 सितंबर) को शहीद हो गए. अधिकारियों ने ये जानकारी दी.
अधिकारी ने बताया कि कर्नल मनप्रीत सिंह, मेजर आशीष, जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी हुमायूं भट्ट गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल हो गए थे. बाद में उनकी मृत्यु हो गई. उन्होंने बताया कि भट की जान अत्यधिक खून बह जाने के कारण गई है.
आतंकियों के खिलाफ शुरू किया था अभियान अधिकारियों ने कहा कि गाडोले इलाके में आतंकियों के खिलाफ अभियान मंगलवार (12 सितंबर) की शाम को शुरू हुआ था, लेकिन रात में इसे रोक दिया गया था. उन्होंने बताया कि बुधवार की सुबह आतंकवादियों की तलाश फिर शुरू की गई जब सूचना मिली कि उन्हें एक ठिकाने पर देखा गया है.
सरकार ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दुख जताते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ”जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान में दो सैन्य अधिकारियों और एक पुलिस अधिकारी की शहादत के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. मैं दिवंगत आत्माओं की सद्गति के लिए प्रार्थना करता हूं और उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं.”
उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा? जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला ने सुरक्षाबलों के शहीद होने पर दुख जताया. उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ”जम्मू-कश्मीर से बेहद भयानक खबर सामने आई. दक्षिण कश्मीर के कोकेरनाग इलाके में एक मुठभेड़ में सेना के कर्नल, मेजर और जम्मू-कश्मीर पुलिस डीएसपी ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया.”
उन्होंने आगे कहा, ”आतंकवादियों के साथ मुठभेड़ में डीएसपी हुमायूं भट्ट, मेजर आशीष और कर्नल मनप्रीत सिंह ने अपनी जान गंवा दी. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दें और उनके प्रियजनों को इस कठिन समय में शक्ति प्रदान करें.”
राजौरी में भी हुई मुठभेड़ जम्मू कश्मीर में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच राजौरी में भी मुठभेड़ हुई. न्यूज एजेंसी पीटीआई ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि राजौरी में बुधवार को ही मुठभेड़ के दौरान सुरक्षा बलों ने एक और आतंकवादी को मार गिराया. इससे राजौरी जिले के सुदूरवर्ती नारला गांव में तीन दिन से जारी अभियान के दौरान मारे गए आतंकवादियों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है.
जम्मू कश्मीर के राजौरी में मारा गया पाकिस्तानी आतंकी सुदूरवर्ती नारला गांव में मंगलवार को हुई मुठभेड़ में एक संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकवादी मारा गया. गोलीबारी में सेना का एक जवान और सेना की श्वान इकाई की छह वर्षीय मादा लैब्राडोर केंट भी शहीद हो गई, जबकि तीन सुरक्षाकर्मी घायल हो गए.
पाकिस्तान से हो रही है घुसपैठ सेना की उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने जम्मू शहर के बाहरी इलाके जगती में आईआईटी परिसर में ‘नॉर्थ टेक संगोष्ठी’ से इतर से कहा कि जम्मू-कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा स्थितियों में हो रही प्रगति में बाधा डालने के लिए पाकिस्तान क्षेत्र में विदेशी आतंकवादियों की घुसपैठ कराने की पूरी कोशिश कर रहा है.
राजस्थान में कोटा शहर की ख्याति प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तो है ही, लेकिन इस शहर को अब सुसाइड सिटी के रूप में भी कुख्याति मिलने लगी है. सुसाइड के मामले यहां थमते नजर नहीं आ रहे है.
इस साल के बीते आठ महीने में ही यहां 23 छात्र छात्राओं ने सुसाइड किया है. इनमें 23वीं सुसाइड मंगलवार को हुई है. इस बार नीट की तैयारी करने आई एक छात्रा ने सुसाइड किया है. यह छात्रा पांच महीने पहले ही यहां आई और विज्ञान नगर थाना क्षेत्र में रह कर एक कोचिंग में पढ़ाई कर रही थी.
सूचना मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रा का शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. यह छात्रास झारखंड की रहने वाली थी. पुलिस ने छात्रा के परिजनों को सूचित करने के साथ ही घटना के कारणों की जांच पड़ताल शुरू कर दी है. पुलिस के मुताबिक इस साल कोटा में छात्रों के सुसाइड के मामले बेतहाशा बढ़े हैं. इस वर्ष ही 23 स्टूडेंट मौत का विकल्प चुनते हुए फांसी लगा चुके हैं.
विज्ञाननगर थाने के एएसआई अमर कुमार ने बताया कि छात्रा की पहचान मूल रूप से रांची झारखंड की रहने वाली रिचा सिन्हा (16) के रूप में हुई है. पुलिस की प्राथमिक जांच में पता चला है कि रिचा कोटा में रहकर नीट की तैयारी के लिए पांच महीने पहले मई महीने में ही आई थी. यहां उसने इलेक्ट्रॉनिक कॉम्प्लेक्स स्थित हॉस्टल में कमरा लिया था. पड़ोस में रह रही अन्य छात्राओं से पूछताछ में पता चला है कि वह मंगलवार की शाम से ही कमरे से बाहर नहीं आई थी.
संदेह होने पर बुधवार की सुबह दरवाजा की झिरी से झांककर देखा गया और कमरे की स्थिति देखकर दरवाजा तोड़ा गया. मौके पर मौजूद लोगों ने उसे फंदे से उतार कर अस्पताल पहुंचाया, जहां से पुलिस को सूचना दी गई. पुलिस ने बताया कि यह घटना मंगलवार देर रात का है. पुलिस को तलवंडी स्थित निजी अस्पताल से सूचना मिली थी. इसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लिया है. पुलिस ने बताया कि फिलहाल शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया है. परिजनों के आने पर पोस्टमार्टम कराया जाएगा.
जमशेदपुर : साकची गुरुद्वारा द्वारा प्रकाशोत्सव को समर्पित निकाली गयी शोभा यात्रा में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सम्मान में ‘धन्य है धन्य है धन्य है पंथ खालसा धन्य है’ और ‘सब सिख्खण को हुक्म है गुरु मान्यो ग्रन्थ’ के जयकारे के साथ संगत ने साकची गुरुद्वारा की नयी पालकी में गुरु ग्रन्थ साहिब को विराजमान किया। बुधवार को श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के प्रकाशोत्सव के मौके पर साकची गुरुद्वारा में अरदास उपरांत एक शोभा यात्रा निकाली गयी जहाँ सिख संगत ने पुरे उत्साह, श्रद्धा भाव और सत्कार से शामिल होकर शोभा यात्रा को सफल बनाया। (जारी…)
शोभा यात्रा साकची गुरुद्वारा साहिब से शुरू होकर कालीमाटी रोड, बसंत टॉकीज गोलचक्कर, काशीडीह मोड़ गोलचक्कर होते हुए वापस साकची गुरुद्वारा में संपन्न हुई। शोभा यात्रा की अगुवाई स्त्री सत्संग सभा और सुखमणि साहिब जत्था की बीबियों ने किया। प्रधान निशान सिंह, ट्रस्टी सतनाम सिंह सिद्धू-अवतार सिंह फुर्ती-जगजीत सिंह, महासचिव परमजीत सिंह काले, जोगिन्दर सिंह जोगी, सतनाम सिंह घुम्मन, देवेंद्र सिंह मारवाह, जगमिंदर सिंह, ताज सिंह, मनमोहन सिंह, जसबीर सिंह गाँधी, महेंद्र सिंह, सुखविंदर सिंह निक्कू, त्रिलोचन सिंह तोची, बलबीर सिंह, अवतार सिंह, अमरपाल सिंह, नानक सिंह, कीताडीह के अर्जुन सिंह वालिया समेत साकची कमिटी के सभी सदस्य शोभा यात्रा में उत्साहपूर्वक शामिल हुए। जबकि मनप्रीत सिंह के नेतृत्व में नौजवान सभा के युवकों ने ट्रैफिक कंट्रोलर की भूमिका बखूबी निभाई। शोभा यात्रा समाप्ति की अरदास के बाद गुरु ग्रन्थ साहिब को श्रद्धा भाव और सम्मानपूर्वक नयी पालकी साहिब में विराजमान किया गया। साकची गुरुद्वारा के ग्रंथी अमृतपाल सिंह मन्नण ने अखंड पाठ आरम्भ किया जिसमे सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह, चेयरमैन सरदार शैलेन्द्र सिंह, महासचिव गुरचरण सिंह बिल्ला, सुखदेव सिंह बिट्टू, सरबजीत सिंह ग्रेवाल, जसपाल सिंह और सुखविंदर सिंह राजू भी शामिल हुए। (जारी…)
बाद में साकची के प्रधान निशान सिंह और महासचिव परमजीत सिंह काले ने बताया कि अखंड पाठ की समाप्ति 15 सितम्बर को होगी तथा 15 और 16 सितम्बर को दो-दिवसीय विशेष कीर्तन समागम का आयोजन किया जायेगा जहां दोपहर में दोनों दिन गुरु का अटूट लंगर बरताया जायेगा। दरबार साहिब, अमृतसर के कीर्तनीये हजूरी रागी जत्था भाई साहब भाई संदीप सिंह और भाई साहब भाई दिलजीत सिंह भोपालवाले अपने रसभरे कीर्तन से संगत को निहाल करेंगे जबकि भाई साहब भाई भूपिंदर सिंह जोगी ढाढ़ी जत्था मोहाली संगत को धार्मिक बयार से मंत्रमुग्ध करेंगे। इनके अलावा साकची गुरुद्वारा के ग्रंथी ज्ञानी अमृतपाल सिंह मनन और सरदार करतार सिंह भी गुरु ग्रन्थ साहिब की महिमा का बखान संगत के बीच करेंगे। निशान सिंह ने अपील की है कि जमशेदपुर की तमाम सिख संगत कीर्तन दरबार में हाजिरी भरकर गुरु घर की खुशियां जरूर प्राप्त करे।
यतीन्द्र नाथ दास उर्फ जतीन्द्र नाथ दास उर्फ जतिन दास। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का अनमोल हीरा, जिनकी आज यानी 13 सितंबर को पुण्यतिथि है। कोलकाता में जन्म हुआ। नौ साल के थे तभी मां ने दुनिया छोड़ दी। पिता बड़े जतन से उन्हें पढ़ने को प्रेरित कर रहे थे। वे पढ़ने तो जाते लेकिन उस समय आजादी का आंदोलन देश में चल रहा था, धीरे-धीरे बालक यतीन्द्र ने देश की आजादी में अपना योगदान देने का फैसला किया। महज 17 साल की उम्र में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन में कूद पड़े।
अंग्रेज पुलिस ने उन्हें अन्य आंदोलनकारियों के साथ गिरफ्तार कर लिया। अब वे स्कूल की जगह जेल पहुंच गए। आंदोलन जब धीमा पड़ा तो कुछ दिन बाद जेल से रिहा कर दिए गए।
जब यतीन्द्र नाथ का खून खौल उठा
जेल में रहने के दौरान उनमें देश प्रेम का ज्वार बढ़ने लगा था। अब वे कुछ बड़ा योगदान देना चाहते थे। भारत माता को जल्दी से जल्दी आजाद देखना चाहते थे। जब वे असहयोग आंदोलन में कूदे तो उसे अंतिम जंग मान लिया। उन्हें लगा कि अंग्रेज इसी से देश छोड़कर भाग जाएंगे। पर, अंग्रेज कहीं नहीं गए। हां, असहयोग आंदोलन एक तरह से वापस ले लिया गया। वह महात्मा गांधी का अपना तरीका था। यतीन्द्र को यह बात पसंद नहीं आई। उनका खून खौल रहा था।
वे कुछ नया सोचते हुए आंदोलन में शामिल होते रहे और पिता के सुझाव पर कोलकाता में बीए करने को राजी हो गए। एडमिशन हो गया, कुछ दिन क्लासेज भी चलीं लेकिन इसी दौरान उनकी गतिविधियों को देखते हुए अंग्रेज पुलिस ने फिर गिरफ्तार कर लिया।
जेल पहुंचकर उन्होंने देखा कि राजनीतिक कैदियों के साथ अफसर दुर्व्यवहार कर रहे हैं। जरूरी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। इनकी मांग को लेकर पहले उन्होंने अफसरों से बातचीत की। जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो उन्होंने जेल में ही भूख हड़ताल शुरू कर दी। उस समय यह कोई आसान काम नहीं था और 21 की उम्र में तो बिल्कुल नहीं। पहले जेल अफसरों ने उनके आंदोलन को गंभीरता से नहीं लिया।
20 दिन तक भूख हड़ताल पर रहे
जेफ अफसरों को लग रहा था कि दो-चार दिन में आंदोलन की हवा निकल जाएगी। पर, यतीन्द्र तो 20 दिन तक भूख हड़ताल पर डटे रहे। अंत में जेल अधीक्षक ने न केवल उनसे माफी मांगी बल्कि रिहा भी कर दिया। भूखे रहने के बावजूद जब वे जेल से छूटे तो उत्साह दोगुना हो चुका था। अंग्रेज अफसर ने उनसे माफी जो मांग ली थी। जेल से निकल कर वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक शचीन्द्र नाथ सान्याल से मिले जो गर्म दल के आंदोलनकारी थे। थोड़ी देर में ही यतीन्द्र को लगा कि यह सही जगह है और वे गहरे तक उनसे जुड़ गए. वहीं यतीन्द्र न बम बनाना सीख लिया। अब वे पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में डूब चुके थे।
भगत सिंह और चंद्रशेखर से मुलाकात
साल 1928 में उनकी मुलाकात सरदार भगत सिंह से हुई। फिर चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल भी मिले। उनकी प्रेरणा से यतीन्द्र ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के लिए बम बनाना शुरू कर दिया। उन्हीं के बनाए बम से भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल 1929 को सेंटर असेंबली पर बम फेंका था। यह एक ऐसा हमला था जिससे ब्रिटिश सरकार हिल गई।
आनन-फानन सबकी गिरफ़्तारी के आदेश हुए और एक-एक कर सब जेल भेज दिए गए, यतीन्द्र भी पकड़े गए। लाहौर जेल में रखकर इन पर सशस्त्र विद्रोह का आरोप लगाया गया। लाहौर जेल में यतीन्द्र ने आमरण अनशन शुरू कर दिया। उनके साथ अन्य क्रान्तिकारी भी थे। मांग जरूरी सुविधाओं की थी, जो नहीं मिल पा रही थीं। बहुत कठिन परिस्थितियों में भारतीय क्रांतिकारी जेल में समय काट रहे थे।
जब उनके आंदोलन से अंग्रेज भी सहम गए
यतीन्द्र का यह आंदोलन धीरे-धीरे चर्चा का विषय बन गया। अंग्रेज अफसर भी सहम से गए। उन्हें जबरन पाइप से दूध पिलाने का प्रयास किया गया। दर्द बढ़ता गया लेकिन वे झुके नहीं। आंदोलन जारी रखा। 63 दिन तक लगातार चले इस आंदोलन के बाद 13 सितंबर 1929 को उन्होंने अंतिम सांस ली। 27 अक्तूबर 1904 को दुनिया में आया एक बालक महज 25 साल की उम्र में देश पर मर मिटा।
अंतिम संस्कार में 5 लाख से अधिक लोग शामिल
यतीन्द्र के अंतिम संस्कार में पांच लाख से ज्यादा लोग शामिल हुए। सड़कों पर लोगों का हुजूम था। लाहौर से कोलकाता तक रास्ते में बड़ी संख्या में लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। नेहरू, गणेश शंकर विद्यार्थी ने उन्हें कानपुर स्टेशन पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे। हावड़ा स्टेशन पर सुभाष चंद्र बोस ने उनके अंतिम दर्शन किए। एक आंदोलनकारी की असमय जेल में मृत्यु के बाद उसकी लोकप्रियता ने अंग्रेजों के माथे पर बल ला दिया।
इसके बाद से उन्होंने किसी भी आंदोलनकारी का शव परिवार को नहीं सौंपा। फांसी के बाद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शव गुपचुप सतलुज नदी के किनारे आधी रात अंतिम संस्कार कर दिए। सुभाष चंद्र बोस ने उनकी तुलना ऋषि दधीचि से की थी। उनकी मौत के बाद देश भर में प्रदर्शन हुए।
राँची : रिम्स में इलाजरत हत्या का आरोपी वारिस मीर मंगलवार की शाम हथकड़ी के साथ फरार हो गया। वारिस मीर को दो दिन पहले ही बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था। वारिस को मई माह में पत्नी को जलाकर मार डालने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। (जारी…)
मंगलवार की रात आठ बजे वह कैदी वार्ड में हथकड़ी के साथ घूम रहा था। उस वक्त उसकी निगरानी में लगे पुलिसकर्मी इधर-उधर घूम रहे थे। उसी का फायदा उठाकर वह कैदी वार्ड से फरार हो गया। कुछ देर बाद जब पुलिसकर्मी वार्ड में पहुंचे तो देखा कि कैदी नहीं है। इसके बाद रिम्स परिसर में खोजा, मगर कुछ पता नहीं चला। सूचना मिलने के बाद बरियातू पुलिस पहुंची और रिम्स परिसर में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। फुटेज में वह रिम्स परिसर से भागता हुआ दिख रहा है। पुलिस अब उसकी तलाश में जुट गई है। बता दें कि 16 अक्तूबर 2022 को हजारीबाग और गुमला से लाए गये दो कैदी रिम्स से फरार हो गये थे। कैदियों को इलाज के लिए रिम्स लाया गया था। दोनों कैदी मौका मिलते ही ग्रिल तोड़कर फरार हो गये थे।उसे पत्नी की हत्या के आरोप में जेल भेजा गया था। (जारी…)
इटकी टिकरा टोली निवासी वारिस मीर की पत्नी की मौत मई 2023 में आग से झुलसने से हुई थी। इस मामले में विवाहिता के परिजनों ने वारिस के खिलाफ इटकी थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी थी। परिजनों का आरोप था कि दहेज के लिए वारिस ने पत्नी को जलाकर मार दिया। दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस ने इसी साल मई में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा था। उस समय से वह बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद था।
हाथ काटकर पहुंचा रिम्स अस्पताल
जेल प्रशासन के अनुसार, आरोपी वारिस ने बीते 10 सितंबर को खुद से हाथ काट लिया था। इसके बाद उसे 10 सितंबर को ही रिम्स में भर्ती कराया गया था। उस समय से आरोपी रिम्स के कैदी वार्ड में भर्ती था।
हत्या के आरोपी वारिस मीर रिम्स से फरार हुआ है। उसकी तलाश की जा रही है। आरोपी को 10 सितंबर को रिम्स में भर्ती कराया गया था। मामले की जांच की जा रही है। संबंधित पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई होगी। – राज कुमार मेहता, सिटी एसपी रांची