रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि भारत ‘राम राज्य’ की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार किसानों, मजदूरों, महिलाओं तथा युवाओं के कल्याण के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है.
सिंह ने यहां एक पुस्तक विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार भगवान राम द्वारा बताए गए आदर्शों के मार्ग पर चल रही है.
रक्षा मंत्री ने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि हम भगवान राम द्वारा निर्धारित आदर्शों के मार्ग पर चलने में सक्षम रहे हैं. हम किसानों, मजदूरों, व्यापारियों, छात्रों, युवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं.’
‘मैं आपको गुमराह नहीं करना चाहता’ सिंह पूर्व नौकरशाह धीरज भटनागर द्वारा ‘रामचरितमानस’ के सरल हिंदी काव्यानुवाद के विमोचन समारोह में बोल रहे थे. उन्होंने कहा, ‘मैं आपको गुमराह नहीं करना चाहता. मैं यह नहीं कहूंगा कि हमने देश में राम राज्य की शुरुआत की है. लेकिन, हम निश्चित रूप से उस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं.
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के तहत विश्व में भारत का कद बढ़ा है. उन्होंने कहा, ‘इससे पहले, जब भी भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बोलता था, उसे गंभीरता से नहीं लिया जाता था. लेकिन आज भारत का कद बढ़ा है, भारत का सम्मान बढ़ा है. आज जब भी भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कुछ कहता है, तो दुनिया ध्यान से सुनती है.’
रक्षा मंत्री ने कहा कि भगवान राम की जीवनगाथा ने सरकार के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में काम किया है.
समारोह में सूचना और प्रसारण मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा कि इस साल अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर खोल दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी और मंदिर इस साल श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा.
इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2023 में महेंद्र सिंह धोनी ने अभी तक महज 10 गेंदों का सामना किया है और इस दौरान उन्होंने 260 के स्ट्राइक रेट से 26 रन बनाए हैं। धोनी ने सोमवार को लखनऊ सुपर जायन्ट्स के खिलाफ तीन गेंद पर 12 रन ठोके।
आखिरी ओवर में लगातार दो छक्के लगाने के बाद धोनी आउट होकर पवेलियन लौटे। मार्क वुड मौजूदा समय में दुनिया के बेस्ट तेज गेंदबाजों में शुमार किए जाते हैं, ऐसे में धोनी का उनकी गेंद पर लगातार दो छक्के लगाना दर्शनीय था। धोनी ने सोमवार को आईपीएल में 5000 रन भी पूरे कर लिए। टीम इंडिया के पूर्व क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग का मानना है कि धोनी को इस तरह के माइलस्टोन से कोई फर्क नहीं पड़ता है।
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स्टार स्पोर्ट्स पर सहवाग ने कहा, ‘अगर आप एमएस धोनी से पूछेंगे, वह कहेंगे, इससे क्या फर्क पड़ता है, हम चाहें 5000, 3000 या 7000 रन बनाएं, अहम बात है कि ट्रॉफी जीती जाए, जो वह करके दिखा चुके हैं। मुझे नहीं लगता कि वह माइलस्टोन के पीछे जाने वाले खिलाड़ियों में से है। मैं भी ऐसा ही था। किसने कितने रन बनाए किसे पता, लेकिन बाद में इसे याद रखा जाता है। जब आप रिटायर होते हैं, तो इसे याद रखा जाता है कि खिलाड़ी ने आईपीएल में कितने रन बनाए।’
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धोनी के 5000 आईपीएल रन इसलिए भी अहम हैं क्योंकि वह कभी भी टॉप ऑर्डर में बैटिंग करने उतरे हैं। धोनी हमेशा से मिडिल ऑर्डर या लोअर मिडिल ऑर्डर में खेलते दिखे हैं। सहवाग ने कहा, ‘उम्मीद की जाती है कि टॉप ऑर्डर बल्लेबाज ज्यादा से ज्यादा रन बनाएं। धोनी मिडिल ऑर्डर या लोअर मिडिल ऑर्डर में बैटिंग करने आते हैं और 5000 रन बना चुके हैं। इन बैटिंग ऑर्डर पर कोई और बल्लेबाज इतने रन नहीं बना सकता। वह कंसिस्टेंट हैं, रन बनाते हैं, अपनी टीम को मैच जिताते हैं। वह बहुत बड़े खिलाड़ी हैं।’
छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक महिला ने कॉन्ग्रेस नेता पर लगाया सेक्स के बदले पद और प्रतिष्ठा का लालच देने का आरोप। अश्लील चैट भी आया सामने।छत्तीसगढ़ के रायपुर में कॉन्ग्रेस की एक महिला कार्यकर्ता ने अपनी ही पार्टी को सवालों के घेरे में ला कर खड़ा कर दिया है।
महिला का आरोप है कि उनकी ही पार्टी का एक सीनियर नेता उन पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बना रहा था। इसके बदले महिला को पद और प्रतिष्ठा का लालच भी दिया गया था। अपने आरोपों के समर्थन में पीड़िता ने नेता के साथ अपनी चैट होने का भी दावा किया है। आरोपित का नाम जयंत साहू है। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस से भी की है। वहीं अपनी सफाई में जयंत ने महिला को ब्लैकमेलर बताया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला रायपुर के तेलीबाँधा थानाक्षेत्र का है। आरोपित कॉन्ग्रेस नेता जयंत इसी क्षेत्र में रहते हैं और धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन पर हमबिस्तरी के दबाव का आरोप लगाने वाली महिला कार्यकर्ता बेमेतरा की रहने वाली है। पीड़िता के मुताबिक, उनका और जयंत का परिचय फेसबुक पर हुआ था। इस परिचय से दोस्ती बढ़ी और महिला रायपुर आने-जाने लगी। धीरे-धीरे दोनों के परिवार भी एक दूसरे से घुल-मिल गए।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सोशल मीडिया पोस्ट में पीड़िता ने बताया है कि थोड़े समय बाद जयंत उनसे फिजिकल रिलेशन बनाने की कोशिश करने लगा। पीड़िता ने जयंत की शौक के तौर पर उनके द्वारा महिलाओं को पद दिलाना बताया है। दावा इस बात का भी किया गया है कि पद दिलाने के नाम पर अन्य महिलाओं पर भी शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाया जाता है। अपने साथ जयंत द्वारा अश्लील बातें किए जाने की भी शिकायत पीड़िता ने पुलिस में दी है।
हालाँकि, महिला का यह भी आरोप है कि पुलिस ने उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की है। खुद को डिप्रेशन में बताते हुए पीड़िता ने कहा है कि अगर उन्हें न्याय नहीं मिला तो वो थाने में खुद को आग लगा कर जान दे देंगी। महिला का यह भी दावा है कि उलटे जयंती की ही झूठी शिकायत पर उन्हें पुलिस ने काफी प्रताड़ित किया है। पीड़िता द्वारा जयंत के साथ अपनी बातचीत का दावा कर के कुछ चैंट भी वायरल किए गए हैं।
आरोपों पर कॉन्ग्रेस नेता की सफाई
अपनी सफाई में कॉन्ग्रेस नेता जयंत ने खुद पर आरोप लगाने वाली महिला को ब्लैकमेलर बताया है। उनका कहना है कि महिला ने 2 लाख रुपए उधार लिए गए पैसे न लौटाने के लिए ये तमाम आरोप लगाए हैं। जयंत ने 14 मार्च को ही अपनी तरफ से महिला के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवा दी थी। जिस चैटिंग को पीड़िता द्वारा वायरल किया जा रहा है जयंत ने उसे फर्जी बताया है। जयंत का कहना है कि महिला ने उनकी फोटो लगा कर उन्हें फँसाने के लिए ये फर्जी चैट वायरल की है।
दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ मैच के दौरान हार्दिक पंड्या की कप्तानी वाली वाली गुजरात टाइटंस को मंगलवार रात खेले गए आईपीएल मुकाबले के दौरान आसान जीत मिली. मेजबान दिल्ली को वापसी का कोई मौका नही मिला.
11 गेंद बाकी रहते हुए गुजरात ने टूर्नामेंट में अपनी लगातार दूसरी जीत दर्ज कर ली. इस मुकाबले के दौरान हार्दिक पंड्या की जीत का हीरो कोई और नहीं बल्कि तमिलनाडु का युवा बैटर साई सुदर्शन हैं. सुदर्शन ने 62 रनों की नाबाद पारी खेली. इस दौरान उनके बैट से चार चौके और दो छक्के भी आए. अपनी पारी में उन्होंने 48 गेंदों का सामना किया. इस दौरान 129 की स्ट्राइकरेट से रन बनाए.
आईपीएल से पहले फरवरी के अंत में पहली बार तमिलनाडु प्रीमियर लीग में ऑक्शन कराए गए थे. इससे पहले साउथ की इस सबसे बड़ी लीग में ड्राफ्ट के माध्यम से क्रिकेटर्स को चुना जाता था. साई सुदर्शन टीएनपीएल में सबसे महंगे बिकने वाले खिलाड़ी बने थे.
साई सुदर्शन को इस ऑक्शन मे 21 लाख 60 हजार रुपये की रकम मिली थी. सुदर्शन को खरीदने के लिए टीएनपीएल की सभी फ्रेंचाइजी में होड़ लग गई थी. अंत में लाइका कोवई की टीम ने बाजी मारी. इस लीग का अगला सीजन जून-जुलाई में खेला जा सकता है.साई सुदर्शन को लेकर गुजरात टाइटंस के कप्तान हार्दिक पंड्या की तरफ से भी एक बड़ी भविष्यवाणी की गई. हार्दिक ने मैच के बाद कहा कि यह बैटर काफी अच्छी तकनीक के साथ खेल रहा है. आने वाले दो तीन सालों में वो फ्रेंचाइजी क्रिकेट में काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा. साथ ही भारत के लिए भी खेलेगा.
साई सुदर्शन को हार्दिक फिलहाल रेगुलर मौके देने के मूड में हैं. इससे पहले चेन्नई के खिलाफ मैच में भी उन्हें चांस मिला था. इस दौरान सुदर्शन ने 17 गेंदों पर 22 रनों की छोटी लेकर असरदार पारी खेली. सुदर्शन को नंबर-3 पर खेलने का मौका मिल रहा है.
आज 5 अप्रैल है और अभी देश के कई इलाकों बारिश हो रही है। इस बारिश के कारण जहां मौसम खुशनुमा हो गया है, वहीं किसानों की मुश्किलें बढ़ गई है। बारिश के कारण गेहूं और सरसों की फसलों को काफी नुकसान की आशंका है।
इस बीच आज भी देश के कई हिस्सों में बारिश के साथ-साथ ओले गिरने की आशंका जताई जा रही है।
आज भी कई इलाकों में आंधी तूफान के साथ बारिश की संभावना है। कई इलाकों में ओले भी गिरने के आसार जताए जा रहे हैं। दरअसल पश्चिमी विक्षोभ के कारण अभी ये बेमौसम बारिश हो रही है। आज भी लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कई इलाकों में बारिश के आसार हैं। वहीं कई जगहों पर छिटपुट हिमपात भी हो सकती है।
दरअसल पश्चिमी विक्षोभ के कारण देश के कई इलाकों में मौसम का मिजाज बिगड़ा हुआ है। अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के कई इलाकों भारी बारिश भी हो सकती है।
इसके साथ ही मध्य भारत के कई इलाकों में भी आंधी-तूफान के साथ बारिश की आशंका है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा में भी बारिश के आसार नजर आ रहे हैं। पूर्वी मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ ओले पड़ने की भी आशंका है।
पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र में कई जगहों भी पर भी गरज के साथ बारिश और ओले गिरने की संभावना है। इतना ही नहीं तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में भी हल्की बारिश के आसार नजर आ रहे हैं।
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर के मुताबिक गिलगित-बाल्टिस्तान, मुजफ्फराबाद, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में गरज के साथ बारिश के आसार हैं। शेष पूर्वोत्तर भारत, तटीय आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में बारिश संभावना है।इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम पंजाब, उत्तर-पश्चिम राजस्थान, हरियाणा के कुछ हिस्सों, विदर्भ और उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में हल्की बारिश और बादलों की गरज हो सकती है। ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बारिश आशंका है।
धानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सप्ताह के अंतिम दो दिनों में दक्षिण भारत के तीन राज्यों तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक का दौरा करेंगे। इस दौरान पीएम तेलंगाना और तमिलनाडु को वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन समेत कई तोहफा देंगे, जबकि कर्नाटक में बांदीपुर टाइगर रिजर्व के दौरे के बाद इसके 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।
पीएम आठ अप्रैल को सबसे पहले तेलंगाना पहुंचेंगे। यहां सिकंदराबाद स्टेशन पर 11वीं वंदेभारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के बाद परेड ग्राउंड हैदराबाद में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। दोपहर बाद चेन्नई जाएंगे। यहां एमजीआर रेलवे स्टेशन पर 12वीं वंदे भारत एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाने के अलावा चेन्नई एयरपोर्ट के नए इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे। रविवार को पीएम कर्नाटक के दौरे पर होंगे। यहां सुबह सवा सात बजे बांदीपुर टाइगर रिजर्व का दौरा करने के बाद प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में शिरकत करेंगे।
‘देश के लोग यह संकल्प क्यों नहीं लेते कि वो दूसरे समुदायों के प्रति सहिष्णुतापूर्ण रवैया अपनाएंगे.’ ये बात रामवनमी के ठीक एक दिन पहले देश की सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कही थी.
मगर ये बात किसी को भी सुनाई नहीं दी और देश के तीन राज्यों में कम से कम पांच जगहों पर भीषण हिंसा भड़क उठी. अगजनी, बम ब्लास्ट, जैसी घटनाएं हुई और कई लोग घायल हुए. बिहार में एक की जान भी गई. अलग-अलग राज्यों में ये हिंसा रामनवमी के दिन या रामनवमी के एक दिन बाद हुई.
दिल्ली के जंहागीरपुरी में रामनवमी के दिन हिंसा
दिल्ली के जंहागीरपुरी में रामनवमी के दिन शोभायात्रा निकाले जाने की कोशिश की गई, पुलिस ने इसकी इजाजत नहीं दी थी. यहां पर हिंसा भड़की और कुछ लोगों को छतों से पत्थर बरसाते हुए भी देखा गया. जहां पर पत्थर बरसाए गए उन इलाकों में मुस्लिम समुदाय की अधिक आबादी बताई जा रही है.
दिल्ली से दूर पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा के पीछे ममता बनर्जी ने बीजेपी का हाथ बताया. हिंसा के बाद दो समुदायों के बीच तनावपूर्ण माहौल बना रहा.
बिहार के सासाराम और बिहारशरीफ में भी बना रहा संप्रादायिक तनाव
बिहार में रामनवमी के त्योहार के बाद दो शहरों सासाराम और बिहारशरीफ से लगातार संप्रादायिक तनाव की खबरें आई. बिहारशरीफ में रामनवमी के जुलूस के दौरान पथराव हुआ था. दोनों तरफ से किए गए हमलों में दो लोगों को गोली लगी थी. पथराव में तीन लोग जख्मी हुए थे.
रोहतास जिले के सासाराम कस्बे में रामनवमी के बाद दो बार ब्लास्ट हुए. पहले विस्फोट में एक और दूसरे में छह लोगों के घायल होने की खबर आई.
त्योहारों में बढ़ जाती है हिंसा
गौर करने वाली बात ये है कि इन सभी जगहों पर हिंसा रामनवमी और रमजान के मौके पर हुई. दिल्ली में शोभायात्रा के दौरान सतर्कता बरती गई लेकिन यही सतर्कता बंगाल, गुजरात और बिहार में नहीं बरती गई. जब भी कोई हिंसा भड़कती है तो गलती दोनों समुदायों की होती है. इसका एक उदाहरण जमशेदपुर में रामनवमी के दौरान साल 1979 में हुआ दंगा है.
इस दिन हुआ था रामनवमी के मौके पर पहला बड़ा दंगा
1979 का जमशेदपुर दंगा रामनवमी के मौके पर हुआ पहला बड़ा दंगा था, जिसमें 108 लोगों की जान गई थी. मारे गए लोगों में 79 मुस्लिम और 25 हिंदुओं की पहचान की गई थी.
रिपोर्टस के मुताबिक आरएसएस ने 1978 के राम नवमी जुलूस की योजना बनाई. इसकी शुरुआत डीमना बस्ती नामक एक आदिवासी पड़ोस इलाके से की गई.
हालांकि, पड़ोसी इलाका साबिरनगर एक मुस्लिम क्षेत्र था और अधिकारियों ने जुलूस को वहां से गुजरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया. आरएसएस ने पूरे एक साल तक इस मुद्दे पर अभियान चलाया. आरएसएस ने ये तर्क दिया कि हमें अपने ही देश में स्वतंत्र रूप से जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जा रही थी.
दोनों समुदायों के बीच गतिरोध बढ़ा, और शहर का माहौल खराब हो गया. हिंदुओं ने दुकानों को बंद करने के लिए मजबूर किया और उनमें से कुछ को गिरफ्तार कर लिया गया. रिपोर्ट्स के मुताबिक मार्च 1979 में आरएसएस प्रमुख बालासाहेब देवरस ने जमशेदपुर का दौरा किया और ध्रुवीकरण को लेकर भाषण दिया. इससे स्थिति और खराब हो गयी.
श्री रामनवमी केंद्रीय अखाड़ा समिति नामक एक संगठन ने 7 अप्रैल को एक पर्चा जारी किया जिसमें सांप्रदायिक हिंसा की घोषणा की गई थी . जुलूस निकाला गया. मुस्लिम पक्ष भी अपनी तरफ से पलटवार के लिए पूरी तरह से तैयार था. पत्थरबाजी हुई और दंगा भड़क गया. उस समय बिहार में कर्पूरी ठाकुर की सरकार थी. घटना के लगभग दस दिन बाद सरकार गिर गई.
सिख विरोधी दंगे- 1984
भारत के इतिहास में 31 अक्टूबर, 1984 का दिन काले दिन की तरह याद किया जाता है. उस दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके ही सिक्योरिटी गार्ड्स ने हत्या कर दी. अगले 24 घंटे में देशभर में सिखों के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और दंगे भड़क उठे. सिखों को निशाना बनाकर उन्हें बेरहमी से मारा गया, उनके घर-दुकानें भी जला दी गई. दंगों में कुल मौतों की संख्या 410 थी जबकि1,180 लोग घायल हुए थे.
मलियाना दंगा- 1987
मई 1987 को मेरठ शहर में एक दिन के अंतराल में दो ऐसे दंगे हुए जिन्होंने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. 22 मई को हाशिमपुरा में हुए दंगे की चिंगारी से शहर झुलस उठा था. दूसरे ही दिन 23 मई साल 1987 में मलियाना के होली चौक पर सांप्रदायिक दंगा भड़का था. मलियाना में दंगाइयों ने 63 लोगों की हत्या कर दी थी और 100 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.
शबे-बरात के दिन हुई दंगे की शरुआत
दंगे की शुरुआत अप्रैल 1987 में शबे-बरात के दिन मेरठ से शुरू हई और रुक-रुक कर दो-तीन महीनों तक चलती रही. इस दौरान कई बार कर्फ्यू भी लगाया गया लेकिन हालात काबू से बाहर ही बने रहे.
घटनाक्रम के मुताबिक 23 मई 1987 की दोपहर करीब 2 बज कर 30 मिनट पर पीएसी की 44 वीं बटालियन के कमांडेंट और मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का जत्था भारी पुलिस बल के साथ मलियाना पहुंचा और वहां पहले से चल रहे दंगे को कंट्रोल करने के लिए गोलियां चलाई गई.
उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह और तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी बाद में दंगा पीड़ितों से मिलने पहुंचे थे.
24 मई 1987 को मेरठ के जिलाधिकारी ने 12 लोगों का मारा जाना स्वीकार किया. जून 1987 में आधिकारिक रूप से 15 लोगों की हत्या स्वीकार की गई. इस दौरान कई शव कुएं से बरामद किए गए थे. 27 मई 1987 को तत्कालीन मुख्यमंत्री ने मलियाना दंगा मामले में न्यायिक जांच की घोषणा की थी.
भागलपुर दंगा – 1989
भागलपुर 1989 को भुला दिए गए दंगे के रूप में याद किया जाता है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस दंगे भागलपुर शहर और तत्कालीन भागलपुर जिले के 18 प्रखंडों के 194 गांवों के ग्यारह सौ से ज़्यादा लोग मारे गये थे.
सरकारी दस्तावेज ये बताते हैं कि ये दंगा दो महीने से ज्यादा वक्त तक चला था. रिपोर्टस के मुताबिक सामाजिक कार्यकर्ताओं और दंगा पीड़ितों का ये कहना था कि लगभग छह महीने तक दंगे होते रहे थे.
नीतीश कुमार 2005 में मुख्यमंत्री बने थे. मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद नीतीश कुमार ने न्यायमूर्ति एनएन सिंह के नेतृत्व में एक नए जांच आयोग का गठन किया. 2013 में, लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उन्होंने 384 दंगा प्रभावित परिवारों के लिए पेंशन को दोगुना कर दिया.
एनएन सिंह समिति की रिपोर्ट में 125 आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई थी. यह वही समय था जब राज्य की कांग्रेस सरकार को भी दोषी ठहराया गया था.
पीपुल्स यूनियन फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स में 1996 में छपी एक रिपोर्ट में ये बताया गया है कि भागलपुर जिले में सांप्रदायिक हिंसा का इतिहास कैसा रहा है. इस रिपोर्ट में 1924, 1936, 1946 और 1967 का जिक्र है.
1989 का दंगा इसलिए भी याद किया जाता है क्योंकि भागलपुर के ग्रामीण इलाकों में इस तरह की हिंसा इससे पहले कभी नहीं हुई थी.
दंगा मामले में अबतक न्यायालय में 346 लोगों को सजा हो चुकी है. इनमें 128 लोगों को उम्र कैद और बाकियों को 10 साल से कम की सजा मिल चुकी है.
गोधरा दंगा -2002
गुजरात के गोधरा स्टेशन पर 27 फरवरी 2002 को 23 पुरुष और 15 महिलाओं और 20 बच्चों सहित 58 लोग साबरमती एक्सप्रेस के कोच नंबर S6 में जिंदा जला दिए गए थे. उस दौरान गुजरात के सहायक महानिदेशक जे महापात्रा ने कहा था कि दंगाई ट्रेन के गोधरा पहुंचने से काफी पहले से पेट्रोल से लैस थे और पूरी तैयारी करके आए थे.
गोधरा में हुई इस घटना के बाद पूरा गुजरात सुलगने लगा था. पूरे गुजरात में दंगे देखने को मिले. साबरमती एक्सप्रेस की आग में कारसेवकों की मौत के बाद पूरे गुजरात में जगह-जगह हिंदू और मुसलमानों के बीच हिंसक टकराव हुए थे. उस समय गुजरात के सीएम नरेन्द्र मोदी थे.
2006 अलीगढ़ दंगा
5 अप्रैल 2006 को रामनवमी उत्सव के दौरान हिंदुओं और मुसलमानों के बीच हिंसा भड़क गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई थी.
2009 पुसद दंगा
2009 में महाराष्ट्र के पुसद में रामनवमी जुलूस को दूसरे समुदाय के लोगों की तरफ से बाधित किया गया और पथराव किया गया. पथराव के बाद माहौल हिंसक बन गया. दंगों में 70 से ज्यादा दुकानों को जला दिया गया था और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया था.
2016 हजारीबाग हिंसा
रामनवमी उत्सव के अंतिम दिन झारखंड के हजारीबाग शहर और आसपास के इलाकों में लोगों के दो समूहों के बीच झड़प हुई. दुकानों में आग लगाने और पुलिसकर्मियों पर पथराव के बाद कर्फ्यू लगा दिया गया था.
रामनवमी जुलूस के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे लाउडस्पीकर को लेकर एक समूह के लोगों ने आपत्ति जताई थी, जिसे लेकर विवाद बढ़ा. वहीं हजारीबाग में 2015 में मुहर्रम के जुलूस में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर दंगा भड़का था. हिंसा में कई लोगों की मौत भी हुई थी.
2018 पश्चिम बंगाल दंगे
पश्चिम बंगाल के रानीगंज में रामनवमी के जुलूस के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोगों ने लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई. इसके बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा शुरू हो गयी. पुलिस कर्मियों पर ईंटों और पत्थरों से हमला किया गया. भीड़ के हिंसक होते ही देसी बमों से बमबारी शुरू हो गई.
पुलिस उपायुक्त (मुख्यालय) अरिंदम दत्ता चौधरी पर भी बम से हमला किया गया. हादसे में उनका दाहिना हाथ लगभग उड़ गया.
2019 पश्चिम बंगाल के आसनसोल दंगे
पश्चिम बंगाल के आसनसोल में बराकर मारवाड़ी विद्यालय से निकाली गई रामनवमी रैली पर पथराव किया गया. जवाबी कार्रवाई हुई और हिंसा बढ़ गई.
2019 में राजस्थान के जोधपुर में 13 अप्रैल को सांप्रदायिक झड़प हुई थी. रामनवमी के जुलूस के दौरान मुसलमानों के एक वर्ग ने पथराव किया था.
2022 के दंगे
अप्रैल 2022 में चार भारतीय राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी. 10 अप्रैल 2022 को रामनवमी के मौके पुलिस इन सभी राज्यो में हिंसा हुई और पुलिस अधिकारियों सहित दर्जनों लोग घायल हो गए. गुजरात में एक व्यक्ति की मौत हो गई.
इसी दौरान झारखंड के बोकारो और लोहरदगा कम से कम 2 जगहों पर झड़पों की सूचना मिली. बोकारो में रामनवमी जुलूस के लिए जा रहे कुछ युवकों पर हमला किया गया. लोहरदगा में हिंसा बड़े पैमाने पर हुई थी, जिसमें दंगाइयों ने कई वाहनों को आग लगा दी थी. लोहारदगा में रामनवमी जुलूस के दौरान पथराव सहित झड़प में कम से कम 12 लोग घायल हो गए.
वो दंगा जिसमें हिंदू और मुसलमान एक साथ मिलकर लड़े थे
आज से ठीक 100 साल पहले एक ऐसा दंगा भी हुआ था जिसमें हिंदू- मुसलमान एक साथ मिलकर लड़े थे. ये दंगा गुलाम भारत के बॉम्बे (अब मुंबई) में हुआ था. बॉम्बे का ये दंगा नवंबर 1921 में हुआ. इस दंगे को प्रिंस ऑफ वेल्स दंगे के नाम से भी जाना जाता है.
ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स (एडवर्ड आठवें) नवंबर 1921 में भारत के अपने साम्राज्य के शाही दौरे पर आए थे. देश में उन दिनों महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन चल रहा था. गांधी जी उस समय हिंदू-मुस्लिम एकता की वकालत कर रहे थे.
सांप्रदायिक एकता के उस दौर में हिंदुओं और मुसलमानों की एकता हो गई थी. दोनों समुदायों की एकता ने बाकी अल्पसंख्यक समुदायों जैसे- ईसाई, सिख, पारसी और यहूदी के मन में बहुसंख्यक समुदायों के वर्चस्व को लेकर भय का भाव बिठा पैदा कर दिया था. नतिजतन बहुसंख्यक समुदायों ने कुछ हिंसक वारदातों को अंजाम दिया.
रामनवमी के मुद्दे में गरमाई जमशेदपुर की राजनीति में झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता पर पलटवार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और रामनवमी अखाड़ा समिति के केंद्रीय संरक्षक अभय सिंह ने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अब जब सारा मामला का पटाक्षेप हो गया तब वे विधवा विलाप कर रहे हैं। कांग्रेसी कल्चर के डीएनए में श्रीराम का विरोध विगत काल खंड से रहा है, ये इतिहास में सर्वविदित रहा है। जिनके केंद्रीय नेताओं का प्रभु श्रीराम के विरुद्ध हमेशा बयानबाजी रहा है, वह अब नैतिकता की पाठ की दुहाई जमशेदपुर की जनता को दे रहे है।
राम जन्मभूमि का फैसला ना हो उनके प्रिय नेता कपिल सिब्बल जैसे लोग कांग्रेस के नेता राहुल गांधी एवं पूरे कांग्रेस के कहने पर कोर्ट के मामले के विरुद्ध खड़ा हो जाना यह सारा इतिहास सभी लोग जानते हैं। राम जन्मभूमि को सार्वजनिक शौचालय बनाने की बात जिस पार्टी के द्वारा विगत वर्षों में किया गया हो उनकी पार्टी के नीचे के नेताओं का यह कथन कि हम प्रभु राम के पुजारी हैं, भक्त हैं कहना हास्यास्पद है।
शुरू से कांग्रेस दंगा फसाद करने वाली पार्टी रही है और हिंदुओं के हर त्यौहार में यह बखेड़ा खड़ा किया गया । एक सोची समझी साजिश के तहत पूरे हिंदुस्तान में रामनवमी के शुभ अवसर में जानबूझकर आगजनी, पत्थरबाजी, दंगा-फसाद किया गया, क्योंकि मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति थी। जिसका उदाहरण हावड़ा, गुजरात, बिहार, झारखंड रहा है । एक षड्यंत्र जानबूझकर पैदा किया गया। आखिर विगत वर्षों में ऐसी घटना कही नही हुई लेकिन इस वर्ष में ही क्यों हुआ ? कहीं ये 2024 के आगामी चुनाव का हिस्सा तो नही ?
झारखंड राज्य स्वास्थ्य मंत्री को यह बताना चाहिए कि झारखंड विधानसभा के अंदर जब भाजपा के विधायक डीजे पाबंदी का विरोध कर रहे थे तो उस समय आप एक राज्य के सम्मानित मंत्री होने के नाते अपनी कौन सी भूमिका का निभा रहे थे इसका पर्दाफाश हो गया है। क्यों नहीं आपने उस समय अपने सरकार की नीति और नियत का विरोध किया ?
जमशेदपुर में लगातार एक हफ्ते से वही स्थिति बनी हुई थी, उस परिस्थिति में भी आप कुंडली मारकर व्यवधान पैदा होने का क्या इंतजार कर रहे थे ? और क्या आप अपनी राजनीति रोटी सेंकने का इंतजार कर रहे थे ? क्या आप इस भूमिका में थे ? आपके कदमा आवास के अगल-बगल के अखाड़ा भी नहीं निकाल रहे थे तो आपने अगल-बगल के लोगों से भी बात करना क्यों उचित नहीं समझा ? जब सारा मामला पटाक्षेप हो गया शांति पूर्वक, तब आपकी निद्रा बौखलाहट में जगी, आप वोट बैंक की राजनीति करना चाहते थे, वह नहीं पूर्ण होने से आपकी महत्वाकांक्षी राजनीति में गहरा धक्का लगा।
आपने जो आज के अखबार या सोशल मीडिया में आरोप लगाए कि अभय सिंह का परिवार 30 वर्ष पहले दंगा फसाद( इशारों इशारों में) में सम्मिलित थी, जिसे आज अखबार में प्रमुखता से छापा, तो मैं गर्व से कहता हूं कि जमशेदपुर में हिंदू त्रासदी हुआ, हिंदुओं के साथ में नाइंसाफी हुई तो मेरे पूर्वज हिंदुओं को बचाने के लिए अपनी भूमिका अदा किए। यह गर्व का विषय मैं मानता था, मानता हूं, और मानता रहूंगा। अगर हिंदुओं को बचाने के लिए हमारे परिवार को दंगाई बोलते हैं तो मैं इससे गर्व महसूस करता हूं और यह गलती एक बार नहीं सौ बार करने के लिए मैं भी तैयार हूं।
जहां तक हमारी राजनीतिक चोला बदलने की बात है तो सारे लोग जानते हैं कि हमने जेवीएम में भी रहते हुए हिंदुत्व से कभी समझौता नहीं किया, जिसका उदाहरण 2017 में बृहस्पतिवार, शुक्रवार के मुद्दे में स्थानीय प्रशासन के दबाव के बावजूद हमने अपना झंडा शुक्रवार को अकेले निकाला यह इतिहास को पढ़ ले और आप किस राजनीतिक चरित्र की बात करते हैं जिनके छन्नी में 100 छेद हैं वो दूसरे के ऊपर में आरोप ना लगाएं।
25 पार्टी बदलने वाले लोग जिनकी रात की और दिन की मानसिकता मात्र अपने कपड़े बदलने के जैसी भूमिका में हो उनको यह आरोप लगाने का अधिकार नहीं है। जमशेदपुर की जनता आपके चरित्र को जानती है, आप चुप ही रहे अन्यथा हमारी पार्टी, हिंदू समाज आपको कभी माफ नहीं करेगा। बन्ना गुप्ता के हिन्दू धर्म पर डिबेट करने की बात पर हमला करते हुए अभय सिंह ने कहा कि मैं कोई बहुत बड़ा विद्वान नहीं हूँ, न ही मैं कोई पंडित हूँ, मैं एक छोटा सा राम भक्त हूँ और यदि स्वास्थ्य मंत्री चाहते हैं तो बोले अपनी सरकार को कि मंच तैयार करवाएं मैं डिबेट करने को तैयार हूँ। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्हें इतना भी ज्ञात नहीं कि गीता में कितने श्लोक हैं वो डिबेट करेंगे, जो जूते पहन कर नारियल फोड़ने का कार्य कर रहे हैं उन्हें वेद और उपनिषद के बारे में कितना ज्ञान होगा यह सब जानते हैं।
अभय सिंह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि …और एक आवश्यक जानकारी मैं मीडिया के माध्यम से देना चाहता हूँ कि मैं अपनी गिरफ्तारी को एवं जमशेदपुर के सारे मुद्दों को लेकर अपने वरीय नेताओं से, प्रतिपक्ष के नेता श्री बाबूलाल मरांडी जी से, वरीय नेताओं को जानकारी दी। उन्होंने इसमें कहा कि यह केवल आप का मुद्दा नहीं समाज का मुद्दा है। आप गिरफ्तारी नहीं दे, पुलिस ने स्वयं गलती की है। वह विगत दिनों दुर्गा पूजा भोग वितरण के मामले में जिसमें आपको केस किया गया है वह आप की गिरफ्तारी करें आपको अपनी गिरफ्तारी नहीं देनी है।
इंडिगो फ्लाइट में तकनीकी समस्या आने के बाद उसकी इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी है।दरअसल,बेंगलुरु से वाराणसी जाने वाली (6E897) फ्लाइट में 137 यात्री सवार थे, जिसकी तकनीकी खराबी के कारण आज सुबह 6.15 बजे तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग की गई। सभी यात्री सुरक्षित बताए गए हैं।
तकनीकी समस्या के चलते हुई इमरजेंसी लैंडिंग
जानकारी के अनुसार, फ्लाइट जैसे बेंगलुरु से रवाना हुई कुछ देर बाद पायलट को उसमें तकनीकी समस्या का पता चला। इसके बाद पायलट ने विमान की तेलंगाना के शमशाबाद हवाई अड्डे पर इमरजेंसी लैंडिंग की। बता दें कि बीते दिन बेंगलुरु से अबू धाबी के लिए उड़ान भरने वाली एतिहाद एयरवेज की फ्लाइट EY237 में भी तकनीकी खराबी आई थी, जिसके तुरंत बाद उसकी वापिस बेंगलुरु के एयरपोर्ट पर आपातकालीन लैंडिंग करवाई गई।
कैबिन प्रेशर में दिक्कत
दरअसल, जैसे ही फ्लाइट ने टेक-ऑफ किया तो पायलट को अहसास हुआ कि प्लाइट में कुछ दिक्कत है। कैप्टन ने पाया कि विमान के कैबिन प्रेशर में कमी है, जिसके बाद उसने इमरजेंसी लैंडिंग का फैसला किया।
राँची : झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन पट्टा मामले में की गई जांच की स्थिति रिपोर्ट पेश करने का सोमवार को निर्देश दिया। सोरेन अंगड़ा में अपने नाम पर एक खनन भूखंड की खबरों को लेकर मुश्किल में हैं। आरोप है कि पट्टा मुख्यमंत्री के पक्ष में उनकी व्यक्तिगत हैसियत से प्रदान किया गया था, जबकि उनके पास खान विभाग का प्रभार था।
मुख्य न्यायाधीश संजय कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति आनंद सेन की खंडपीठ ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता सुनील कुमार महतो द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और ईडी को स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। मामले में अगली सुनवाई एक मई को होगी।
महतो ने अपनी याचिका में कहा है कि सोरेन का उनके पक्ष में लीज पर ली गई खदान जनप्रतिनिधियों के लिए “लाभ का पद नहीं रखने” के शासनादेश का सीधा उल्लंघन है। महाधिवक्ता राजीव रंजन ने राज्य सरकार का बचाव करते हुए कहा कि जनहित याचिका ओछे ढंग से दायर की गई है और राजनीति से प्रेरित है। इससे पहले भी हाईकोर्ट में इसी तरह की याचिका दायर की गई थी, जिसने मामले की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद, मामले को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।
महाधिवक्ता के बयानों पर पलटवार करते हुए महतो के वकील ने कहा कि पहले का मामला एक शिव शंकर शर्मा द्वारा दायर किया गया था, जिसे शायद सोरेन परिवार के खिलाफ व्यक्तिगत द्वेष दिखाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष शर्मा की विश्वसनीयता भी स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुई थी। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास ने सोरेन पर आरोप लगाया था कि उन्होंने रांची के अंगारा ब्लॉक में 0.88 एकड़ में फैली एक पत्थर की खदान के लिए मई 2021 में उनके द्वारा आयोजित एक कंपनी को खनन पट्टा आवंटित किया था।