टेल्को की संगत ने नयी परम्परा की शुरुआत कर सभी को प्रेरित किया: भगवान सिंह
जमशेदपुर : टेल्को गुरुद्वारा के नवनियुक्त प्रधान बलविंदर सिंह का सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी द्वारा विशेष सम्मान किया गया। गुरुवार को टेल्को गुरुद्वारा परिसर भगवान सिंह की अगुवाई में सीजीपीसी के अन्य सदस्यों ने बलविंदर सिंह का सरोपा पहनाकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर सीजीपीसी के प्रधान सरदार भगवान सिंह, टेल्को गुरुद्वारा के पूर्व प्रधान गुरमीत सिंह तोते, सीजीपीसी के महासचिव अमरजीत सिंह, सलाहकार गुरचरण सिंह बिल्ला, टिनप्लेट गुरुद्वारा के सुरजीत सिंह खुशीपुर, अकाली दल के रामकिशन सिंह व सुखदेव सिंह, परविंदर सिंह सोहल, सुरेंदर सिंह छिंदे, जोगा सिंह, गुरदयाल सिंह और अमरजीत सिंह भामरा समेत अन्य सदस्य मौजूद थे। बलविंदर सिंह को शुभकामना देते हुए भगवान सिंह ने कहा कि यह सम्मान समस्त टेल्को की संगत है जिन्होंने प्रधान चुनाव में पर्ची से नाम निकाल कर नयी सकारात्मक परम्परा की शरुआत कर सभी गुरुद्वारों के सेवादारों और संगत को प्रेरित करने का काम किया है। पूर्व प्रधान गुरमीत सिंह तोते ने भी बलविंदर सिंह को बधाई देते हुए सिख कौम के समृद्धि के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।
झारखंड हाइकोर्ट ने जमशेदपुर के घाघीडीह जेल में मनोज कुमार सिंह की हत्या मामले में 15 फांसी व आजीवन कारावास के सात सजायाफ्ताओं को बरी करने का फैसला सुनाया.
उनकी अपील याचिका को स्वीकार करते हुए 28 अगस्त, 2022 के निचली अदालत के सजा संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया. साथ ही खंडपीठ ने संदेह का लाभ देते हुए मामले से सजायाफ्ताओं को बरी कर दिया. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय व जस्टिस अंबुजनाथ की खंडपीठ ने बुधवार को उक्त फैसला सुनाया.
हाईकोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज को विधिसम्मत नहीं माना
खंडपीठ ने फैसले में अभियोजन पक्ष के मुख्य सबूत सीसीटीवी फुटेज को विधिसम्मत नहीं माना. कहा कि सीसीटीवी फुटेज को एविडेंस एक्ट की धारा 65बी के तहत प्रमाणित नहीं कराया गया है, इसलिए उसे वैध नहीं माना जा सकता है. अपीलकर्ता की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कश्यप व अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने पैरवी की.
घाघीडीह जेल में कैदियों के दो गुटों में हुआ था झगड़ा
उन्होंने पक्ष रखते हुए खंडपीठ को बताया कि घाघीडीह जेल में कैदियों के दो गुटों में झगड़ा हो गया. इसमें मनोज की मौत हो गयी. इस मामले में जमशेदपुर की निचली अदालत ने फांसी व आजीवन कारावास की सजा सुनायी थी, जो सही नहीं है. मामले में जो गवाह थे, उन्होंने यह नहीं बताया कि किसने किस पर हमला किया. मुख्य सबूत सीसीटीवी फुटेज था. इसमें देखा गया कि मारपीट हो रही है, लेकिन किसी ने नहीं पहचान की. एविडेंस एक्ट की 65बी के तहत प्रमाणित नहीं कराया गया था. बिना प्रमाणित सीसीटीवी फुटेज कानून के अनुसार, वैध नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती है. जमशेदपुर की निचली अदालत ने वर्ष 2022 में 15 को फांसी व सात को 10-10 साल की सजा सुनायी थी.
इन्हें मिली थी फांसी की सजा
हत्याकांड में बासुदेव महतो, रामेश्वर अंगारिया, गंगा खंडैत, अरूप कुमार बोस, रमई करुवा, जानी अंसारी, अजय मल्लाह, पंचानंद पात्रो, गोपाल तिरिया, पिंकू पूर्ति, श्यामू जोजो, संजय दिग्गी, रामराय सुरीन, शिवशंकर पासवान, शरत गोप को फांसी की सजा सुनायी थी. कोर्ट ने आइपीसी की धारा 147, 323, 148, 325, 302, 307 व 120 बी में 15 लोगों को दोषी पाया था. कोर्ट ने आरोपियों को आइपीसी की धारा 302 व 120 बी में फांसी की सजा सुनायी थी, जबकि आइपीसी की धारा 307 में 10 वर्ष, 325 में पांच साल, 323 में एक साल, 147 में एक साल और 148 में दो साल की सजा सुनायी थी. फांसी की सजा पाने वाले 15 आरोपियों में से 12 पहले से ही आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं, जबकि तीन अन्य जघन्य हत्याकांड के आरोपी हैं.
इन्हें सुनायी गयी थी 10 साल सश्रम कारावास की सजा
ऋषि लोहार, सुमित सिंह, संजीत दास, तौकीर, सौरभ सिंह, सोनू लाल और शोएब अख्तर उर्फ शिबू को हत्या के प्रयास में दोषी पाकर कोर्ट ने दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी. कोर्ट ने आइपीसी की धारा 147, 148, 323, 325 व 307 में सात लोगों को दोषी पाया था. आइपीसी की धारा 307 में 10 वर्ष, 325 में पांच साल, 323 में एक साल, 147 में एक साल और 148 में दो साल की सजा सुनायी गयी थी.
चार सिपाही समेत पांच के खिलाफ चल रहा ट्रायल, हरीश के खिलाफ वारंट जारी
मामले में आरोपी बनाये गये घाघीडीह जेल में तैनात चार सिपाही अनिल कुमार, पंकज कुमार मंडल, राम प्रताप यादव और संतोष कुमार के खिलाफ अपर जिला व सत्र न्यायाधीश चार की अदालत में ट्रायल चल रहा है. एक आरोपी अविनाश श्रीवास्तव के खिलाफ भी ट्रायल चल रहा है. हरीश सिंह के खिलाफ कोर्ट ने वारंट जारी किया है. वह फरार है. चारों सिपाहियों ने डिस्चार्ज पिटीशन दाखिल किया है.
बेटे की हत्या करने वाले चार सिपाही को मिले सजा : अनिरुद्ध सिंह
घाघीडीह जेल में मनोज सिंह की मौत के मामले में पिता अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि उनके बेटे की मौत के लिए जेल में तैनात चार सिपाही दोषी हैं. इसमें तत्कालीन जेलर बालेश्वर सिंह भी दोषी हैं. कोर्ट उन्हें सजा दे. हाइकोर्ट के फैसले से दुख पहुंचा है.
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल परिसर की पार्किंग में मंगलवार की देर रात एक भिखारी की मौत हो गयी. रात भर शव पार्किंग में पड़ी रही. उसके हाथ की एक उंगली को चूहे ने कुतर दिया था.
बुधवार की सुबह जब होमगार्ड के जवानों ने शव देखा, तो इसकी जानकारी अधीक्षक डॉ रवींद्र कुमार को दी. उसके बाद उन्होंने शव को शीतगृह में रखवा दिया.
शव के हाथ का नाखून नोचा हुआ था
अस्पताल उपाधीक्षक डॉ नकुल चौधरी ने बताया कि शव के हाथ का नाखून नोचा हुआ था.यह कैसे हुआ इस बारे में कहा नहीं जा सकता है. होमगार्ड के जवानों ने बताया कि मृतक भिखारी था. रात-दिन पार्किंग में पड़ा रहता था.
पहले भी हो चुकी है घटना
इससे पहले 30 नवंबर, 2015 को जुगसलाई के एक व्यक्ति के शव की हथेली को चूहों ने कुतर दिया था. वहीं 28 सितंबर, 2018 को एक मरीज की इमरजेंसी में मौत हो गयी थी. उसका शव अस्पताल के शौचालय के पास पड़ा मिला था. उस लाश के चहरे को चूहों ने कुतर दिया था. इस मामले में इमरजेंसी के दो नर्सों को शोकॉज भी हुआ था.
एमजीएम के शीतगृह से तीन अज्ञात शवों का हुआ अंतिम संस्कार
एमजीएम अस्पताल के शीतगृह में लगभग 15 दिनों से रखे तीन अज्ञात शव का बुधवार को पोस्टमार्टम कराकर साकची पुलिस व अस्पताल प्रबंधन ने अंतिम संस्कार कराया. अज्ञात होने के कारण उसका अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा रहा था. शव से उठने वाली दुर्गंध से मरीज परेशान होते थे. उपायुक्त की पहल पर बुधवार को तीन शवों का अंतिम संस्कार कराया गया जबकि चार शवों का अंतिम संस्कार कराना बाकी है. नियम के अनुसार किसी भी अज्ञात शव को 72 घंटे रखने के बाद पुलिस की अनुमति से उस शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता था. जो पुलिस केस होता था जैसे सड़क दुर्घटना या अन्य किसी कारण से मौत होती है. तो पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार होता था. अब अज्ञात शव का भी पोस्टमार्टम के बाद संस्कार होता है.
झारखण्ड न्यूज़ डेस्क, पूर्वी सिंहभूम के पूर्व सिविल सर्जन डॉ अरविंद कुमार लाल की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए हाईकोर्ट ने उने पुन बहाल करने का आदेश सरकार को दिया है. जस्टिस आर मुखोपाध्याय की अदालत ने डॉ. लाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया.
छह साल तक विभागीय कार्रवाई के बाद डॉ. लाल को वर्ष 2022 में बर्खास्त कर दिया गया था. इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. सुनवाई के दौरान डॉ लाल का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता अजीत कुमार व अपराजिता भारद्वाज की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रार्थी पर नौकरी में रहते हुए चुनाव लड़ने का आरोप लगाते हुए विभागीय कार्रवाई के बाद बर्खास्त कर दिया गया. आरोप है कि वर्ष 1995, 2001 और 2005 में बिना पद छोड़े ही विधानसभा का चुनाव लड़ा था. इसके लिए वर्ष 2016 में उन्हें शो कॉज जारी किया गया. विभागीय कार्रवाई में 21 साल की देरी का भी कोई कारण नहीं बताया गया. प्रार्थी ने कहा कि उन्होंने 1995 और 2001 में कोई चुनाव नहीं लड़ा है. जहां तक 2005 की बात है, तो उन्होंने चुनाव से पहले अपना त्याग पत्र दिया था.
छह साल तक चली विभागीय कार्रवाई उनके त्यागपत्र पर क्या निर्णय लिया गया, इसके बारे में उन्होंने विभाग से कई बार जानकारी मांगी थी. लेकिन उन्हें कोई दस्तावेज नहीं दिया गया. छह साल तक चली विभागीय कार्रवाई के दौरान संचालन पदाधिकारी ने भी बिहार सरकार और स्वास्थ्य विभाग से दस्तावेज मांगे थे, लेकिन उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया. इसके बाद अचानक उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था. हाईकोर्ट के फैसले पर जमशेदपुर आईएमए ने खुशी जाहिर की है. एसोसिएशन के सचिव डॉ. सौरभ चौधरी ने कहा कि फैसले से चिकित्सक समुदाय में खुशी है. कुछ विधायकों को यह समझने की जरूरत है कि राजनीतिक लड़ाई और महत्वाकांक्षा के लिए डॉक्टर को बलि का बकरा बनाना गलत है.
यह है मामला डॉ. एके लाल पर नौकरी में रहते बिहार के झंझारपुर से विधानसभा से चुनाव लड़ने का आरोप था. मामला 2005 का है. शिकायत के बाद अक्तूबर 2014 से जांच शुरू हुई. 2022 में जिले के प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. लाल को बर्खास्त कर दिया गया. डॉ. एके लाल के मुताबिक, चुनाव में नामांकन के साथ नौकरी से त्यागपत्र की जानकारी दी थी, लेकिन त्यागपत्र मंजूर नहीं हुआ और नाम वापसी का समय गुजर चुका था. इससे नामांकन के बावजूद चुनाव प्रचार व अन्य प्रक्रिया से दूर रहे थे. बर्खास्तगी के बाद डॉ. एके लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की. डॉ. लाल फिलहाल रिटायर हो चुके हैं.
जमशेदपुर के कदमा थाना अंतर्गत तिस्ता रोड स्थित क्वार्टर नंबर 97/99 निवासी बीना कुमारी, दीया कुमारी, सांधी कुमारी और रिंकी घोष की हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी दीपक कुमार को फांसी की सजा सुनाई है.
गुरुवार को को मामले की सुनवाई करते हुए ए़डीजे 4 राजेंद्र कुमार सिन्हा की अदालत ने दीपक को फांसी की सजा सुनाई है. इसके पूर्व शनिवार को अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 302, 307, 379, 201 और 376(1) के तहत दोषी पाया था. इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से अधिवक्ता जॉली दास, कार्तिक डे, हरविलास दास, दिलीप गोराई और जयंत कुमार ने बहस की थी. मामले में कुल 25 लोगों की गवाही हुई थी. अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक राजीव कुमार ने पैरवी की.
12 अप्रैल 2021 को कदमा थाना अंतर्गत तीस्ता रोड स्थित क्वार्टर नंबर 97-99 में दीपक ने अपनी पत्नी, दो बच्ची और ट्यूशन टीचर की हत्या कर दी थी. ट्यूशन टीचर की हत्या करने के बाद उसने दुष्कर्म भी किया था. घटना को अंजाम देने के बाद उसे अपने साथी प्रभु के साला अंकित पर भी हमला किया था. घटना को अंजाम देने के बाद वह अपनी बुलेट से राउरकेला गया था, जहां से कैब बुक कर वह धनबाद गया. पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी धनबाद से की थी.
राँची : झारखंड सरकार में रही शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो की चेन्नई में इलाज के दौरान मौत हो गई इससे झारखंड की राजनीतिक में शोक का लहर दौड़ पड़ा है झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने ट्वीट कर दी जानकारी।
जगरनाथ महतो एक भारतीय राजनीतिज्ञ और वर्तमान में झारखंड सरकार के शिक्षा मंत्री हैं। वे भारत के झारखण्ड राज्य की डुमरी विधानसभा सीट से झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के विधायक हैं। 2019 के चुनावों में वे भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार लालचन्द महतो को 32481 वोटों के अंतर से हराकर निर्वाचित हुए। जिसके बाद हेमंत सोरेन की सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्री का पद दिया था आपको बता दें उनकी तबीयत लगातार खराब होती रही है बीच-बीच में जिसको लेकर भी इलाजरथ थे जिसके बाद आज चेन्नई के अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली।
कल्पतरु पेड़ वातावरण में जीवनी शक्ति का संचार करता है. यह कई गंभार बीमारियों को जड़ से खत्म करने में फायदेमंद है. अपने इसी गुण के कारण इसके संरक्षण की आवश्यकता समाज में बढ़ गई है.
रांची: आपने पीपल, नीम, बरगद पेड़ों के बारे में सुना ही होगा. आज आपका परिचय एक ऐसे पेड़ से कराते है जो दुर्लभ है. नाम है कल्पतरु. जी हां इसकी चर्चा हमारे धर्म ग्रंथों में भी की जाती रही है. इतना ही नहीं समुंद्र मंथन के दौरन निकले चौदह रत्नों में से एक था कल्पतरु पेड़. यह वातावरण में जीवनी शक्ति तो उपलब्ध कराता ही है. साथ में यह कई बीमारियों को दूर करने में भी फायदेमंद है. अपने इन्हीं गुणों के कारण इसके संरक्षण की जरूरत महसूस होने लगी है. अफसोस कि पूरे रांची में इसके केवल तीन पेड़ ही शेष है. रांची के डोरंडा क्षेत्र और रिंग रोड में लगे हुए हैं.
कल्पतरु पेड़ के ये हैं लाभ: कल्पतरु पेड़ लोगों को भरपुर ऑक्सीजन तो देता ही है. वातावरण को शुद्ध रखने में भी मदद करता है. इस पेड़ के चारों ओर दूर-दूर तक वायरस या कीटाणु नहीं भटकते. इस पेड़ को जहां लगाया जाता है, यह नुकसानदायक वायरस को नष्ट कर देता है. उस एरिया के आस-पास कीड़े-मकोड़े भी नहीं रहते. इसी कारण इस पेड़ की डिमांड बढ़ गई है. साथ ही इसको संरक्षित करना महत्वपूर्ण हो गया है.
कीडनी की बीमारी में फायदेमंद:
कल्पतरु का पेड़ बड़े-बड़े बीमारियों को नष्ट करने में भी उपयोगीहै. इसकी पत्तियां और छाल को आयुर्वेद के रूप में प्रयोग किया जाता है. यह कई गंभीर बीमारियों को जड़ मूल से खत्म करने में सहायक होता है. रांची के आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ संजय ने बताया कि कल्पतरु का पेड़ पाइल्स, भगंदर, कीडनी, लीवर, फेफड़े जैसे खतरनाक बीमारियों को ठीक करने में सहायक है. इसके अलावा ये कफ, बाबासीर, पाचन, पेट से जुड़ी समस्या आदि में भी लाभदायक है. डॉ संजय ने कहा कि एलोपैथ में लीवर के लिए प्रत्यारोपण ही एक विकल्प हैं. कल्पतरु की मदद से लीवर और कीडनी की बीमारी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है.
संरक्षण के लिए हो रहे ये प्रयास:
पेड़ के संरक्षण के लिए रांची वन विभाग लोगों में जागरूकता फैला रहा है. विभिन्न प्रकार के बोर्ड लगाकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है. फॉरेस्ट डिवीजन ने कई होर्डिंग लगा दी है जिसमें लिखा है- मैं कल्पतरु हूं, कृपया मेरी रक्षा करें. आम लोगों से कल्पतरु के संरक्षण के लिए आए दिन अपील की जाती रही है. कल्पतरु तीन पेड़ जो डोरंडा एरिया में बचे है उनमें फेंसिंग कर दिया गया है. ताकि जानवर या इंसान इसे नुकसान नहीं पहुंचा सके. रांची वन विभाग के श्रीकांत वर्मा ने बताया कि कल्पतरु बहुत ही दुर्लभ प्रजाति का पेड़ है. इसके औषधीय व पर्यावरणीय गुण को ध्यान में रखते हुए इसके संरक्षण की व्यवस्था की जा रही है.
ऐसे हो रहे है नए पौध के प्रयास:
रांची वन विभाग के श्रीकांत वर्मा नेकहा कि कल्पतरु के नए पौधें उगाने के भी प्रयास किये जा रहे हैं. इसे लेकर रिर्सच नर्सरी में इसके 300 से 400 पौधे को उगाये जाने को लेकर जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की गई है. उन्होंने बताया कि इस पेड़ को उगाने में काफी मेहनत लगती हैं. यदि 100 छोटे छोटे पेड़ लगाए जाते हैं, उनमें से मात्र 5 से 10 पेड़ सफल हो पाते हैं. अगर यह प्रयास सफल रहा तो पूरे झारखंड को इसका लाभ मिलेगा. वातावरण को शुद्ध और प्रदूषण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी.
250 सौ साल होती कल्पतरु की आयु:
वन विभाग के अधिकारी श्रीकांत वर्मा बताते हैं कि कल्पतरु की आयु दो से ढाई सौ साल होती है. यह पेड़ रांची के डोरंडा क्षेत्र और रिंग रोड में लगे है. श्रीकांत वर्मा बताते हैं कि यह पेड़ मूल रूप से अफ्रीकी देशों में पैदा होता है. कई सौ वर्ष पहले व्यापारियों ने रांची में कल्पतरु कापेड़ लगाया था. उस समय भारत के व्यापारी अफ्रीकी देश आया जाया करते थे.
पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित शाह रशीद अहमद क़ादरी ने बुधवार को पुरस्कार प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया. उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस शासन के दौरान मुझे यह (पद्म श्री) नहीं मिला.
मुझे लगा कि भाजपा सरकार मुझे यह सम्मान नहीं देगी, लेकिन आपने मेरा ख्याल रखकर मुझे गलत साबित कर दिया.’
राष्ट्रपति ने इस वर्ष के गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 106 पद्म पुरस्कार दिए जाने को मंजूरी दी थी. बुधवार को कुल 53 पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित किया गया, जिनमें तीन पद्म विभूषण, पांच पद्म भूषण और 45 पद्म श्री शामिल रहे. अन्य प्रतिष्ठित हस्तियों को 22 मार्च को पद्म पुरस्कार दिए गए थे.
उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने इस पुरस्कार को पाने के लिए 10 साल तक कोशिश की. जब बीजेपी सरकार आई तो मैंने सोचा था कि मुझे यह पुरस्कार नहीं मिलेगा क्योंकि बीजेपी कभी भी मुसलमानों को कुछ नहीं देती है, लेकिन पीएम मोदी ने मुझे इस पुरस्कार के लिए चुनकर गलत साबित कर दिया.’
इससे पहले, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को दिग्गज समाजवादी नेता मुलायम सिंह यादव और मशहूर चिकित्सक दिलीप महालनाबिस को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया. लेखक सुधा मूर्ति, भौतिक विज्ञानी दीपक धर, उपन्यासकार एस.एल. भैरप्पा और वैदिक विद्वान त्रिदंडी चिन्ना जे. स्वामीजी को भी यहां राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक समारोह में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. दीपक धर सांख्यिकीय भौतिकी में अपने लंबे शोध करियर के लिए जाने जाते हैं.
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव को मरणोपरांत सम्मान दिया गया. वह भारत के रक्षा मंत्री और लंबे समय तक सांसद भी रहे थे. वहीं, 1971 के बांग्लादेश युद्ध शरणार्थी शिविरों में सेवा करने के लिए अमेरिका से लौटे महालनाबिस को मरणोपरांत सम्मान दिया गया. उन्हें ‘ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन’ (ओआरएस) पर किए गए कार्य के लिए वैश्विक स्तर पर पहचान मिली थी.
अखिलेश यादव के बेटे एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुरस्कार प्राप्त किया, जबकि महालनाबिस का पुरस्कार उनके भतीजे ने प्राप्त किया. फिल्म ‘आरआरआर’ के गीत ‘नाटू नाटू’ के लिए भारत का पहला ऑस्कर जीतने वाले संगीत निर्देशक एम.एम. कीरावानी और बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन को पद्मश्री दिया गया. समारोह में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा और कई केंद्रीय मंत्रियों समेत अन्य अतिथि उपस्थित थे.
प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बिरसानगर में बन रहे आवासों का आवंटन बुधवार को लॉटरी के माध्यम से किया गया. 9532 आवास में तीसरे चरण में 696 लाभुकों को किफायती आवास आवंटित किए गए हैं
हालांकि आवास का निर्माण अभी चल रहा है. आवंटन के संबंध में जानकारी देते हुए जेएनएसी के विशेष पदाधिकारी संजय कुमार ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के घटक-3 अन्तर्गत बिरसानगर में जी+8 भवन का निर्माण कराया जा रहा है. जिसमें 32 ब्लॉक में कुल 9592 आवासों का निर्माण किया जाना है. तीसरे चरण में 696 सक्षम लाभार्थियों को लॉटरी के माध्यम से आवास आवंटित किए गए.
इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली से रैंडमाइजेशन के माध्यम से लॉटरी निकाली गई. उन्होंने बताया कि दिव्यांगजन एवं वरिष्ठ नागरिको को भूतल में 65 तथा समान्य वर्ग के 631 लाभुकों को प्रथम से छठा तल्ला में आवास आवंटित हुआ. इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से सांसद प्रतिनिधि जमशेदपुर पूर्वी के विधायक, प्रतिनिधि, डीआरडीए निदेशक सौरभ सिंहा , एडीसी, एडीएम, जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी, जेएनएसी के नगर प्रबंधक, प्रधानमंत्री आवास (शहरी) के विशेषज्ञ समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे.
टाटा वर्कर्स यूनियन हाई स्कूल के सभाकक्ष में सभी प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी, बीपीओ, बीआरपी, सीआरपी, एमआईएस को ऑर्डिनेटर की बैठक आहूत की गई। बैठक में सभी बच्चों का खाता पोस्ट ऑफिस में खोलने हेतु निर्देश दिए गए। इस बैठक में पोस्ट ऑफिस के सीनियर पदाधिकारी उपस्थित थे जिन्होंने खाता खोलने से संबंधित पूरी प्रक्रिया एवं फॉर्म का वितरण किया । साथ ही 2023 -24 में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गई जिसमें 100% बच्चों का खाता खोलना, आधार में रजिस्ट्रेशन का कार्य पूर्ण करना, ज्ञान सेतु कार्यक्रम चलाना, सभी विद्यालय के लाइब्रेरी में सड़क सुरक्षा संबंधित पुस्तिका रखना, ई विद्या वाहिनी में सीआरपी, बीआरपी का प्रतिदिन मॉनिटरिंग प्रतिवेदन अपलोड करना इत्यादि विषय पर विस्तृत चर्चा की गई। इस बैठक में जिला शिक्षा पदाधिकारी, अतिरिक्त जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, सभी सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी उपस्थित हुए।