दाहोद (गुजरात): भारतीय राजनीति में दलबदल की खबरें तो आम हैं, लेकिन गुजरात के दाहोद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर राजनीतिक पंडित भी सिर पकड़ कर बैठ गए हैं। यहां जिला पंचायत की पीपेरो (Pipero) सीट पर एक स्थानीय नेता ने ऐसा ‘पॉलिटिकल थ्रिलर’ रच दिया है, जिसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।
स्थानीय दिग्गज नेता भरत सिंह वाखला ने एक ही सीट के लिए भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP)—इन तीनों कट्टर विरोधी दलों के उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पर्चा भरकर सबको हैरत में डाल दिया है।
नामांकन का ‘नंबर गेम’ और वाखला का जाल
जब चुनाव अधिकारियों ने पीपेरो सीट के 11 नामांकन फॉर्मों की जांच (Scrutiny) शुरू की, तो आंकड़ों ने सबको चौंका दिया:
- भाजपा: कुल 5 फॉर्म (भरत सिंह वाखला का नाम शामिल)
- कांग्रेस: 2 फॉर्म (यहाँ भी वाखला मौजूद)
- आम आदमी पार्टी: 1 फॉर्म (यह भी वाखला के ही नाम)
- अन्य: 2 निर्दलीय और 1 बीआरपी।
कौन हैं भरत सिंह वाखला?
भरत सिंह वाखला का पाला बदलने का इतिहास काफी पुराना रहा है। वह पहले कांग्रेस में थे, फिर ‘आप’ में गए और पिछला विधानसभा चुनाव ‘आप’ के टिकट पर लड़कर भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी। हाल ही में उनके भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं थीं, लेकिन एक साथ तीनों पार्टियों से फॉर्म भरकर उन्होंने सबको उलझा दिया है।
क्या कहता है चुनाव नियम? फैसला 15 को!
तकनीकी रूप से कोई भी व्यक्ति कितनी भी पार्टियों से फॉर्म भर दे, लेकिन उसकी उम्मीदवारी तभी वैध मानी जाती है जब वह पार्टी का आधिकारिक ‘मैंडेट’ (फॉर्म-बी) जमा करता है।
चुनाव अधिकारी का बयान: “पूरी तस्वीर 15 तारीख को साफ होगी। नाम वापसी और मैंडेट जमा करने के आखिरी दिन ही पता चलेगा कि वाखला किस पार्टी का ‘फॉर्म-बी’ पेश करते हैं। बाकी पार्टियों के नामांकन या तो वापस लिए जाएंगे या नियमों के तहत खारिज हो जाएंगे।”
यह सीट पारंपरिक रूप से वरिष्ठ नेता बच्चूभाई खाबड़ का गढ़ मानी जाती है, लेकिन वाखला की इस ‘ट्रिपल चाल’ ने इस चुनाव को पूरे गुजरात में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सबकी नजरें 15 तारीख पर टिकी हैं कि वाखला आखिर किस ‘हाथ’ का साथ देंगे, ‘झाड़ू’ थामेंगे या ‘कमल’ खिलाएंगे।









