रांची/सरायकेला: झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में तीन दिवसीय ‘झारखंड कृषि व्यापार मेला’ का शानदार आगाज हो चुका है। मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया। उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री ने मेले का अवलोकन किया और विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों को संबोधित किया। इस अवसर पर किसानों में मेले को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।
कृषि का कोई जाति या धर्म नहीं होता: मुख्यमंत्री
किसानों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खेती-बाड़ी के समृद्ध इतिहास का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कृषि एक ऐसा पावन क्षेत्र है जहां न कोई जाति देखी जाती है, न कोई धर्म और न ही कोई पंथ। यह हर वर्ग को एक सूत्र में पिरोता है, इसलिए हर किसान को अपनी खेती पर गर्व होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कृषि को केवल एक सरकारी योजना के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे हर परिवार का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

आने वाले समय में पानी सबसे बड़ी चुनौती: जल संचयन की अपील
मुख्यमंत्री ने एक सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए किसानों को भविष्य के खतरों के प्रति सचेत किया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी को लेकर बहुत बड़ी चुनौती पैदा होने जा रही है। इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने किसानों से विशेष अपील की:
- किसान भाई अविलंब जल संचयन (Water Harvesting) का कार्य शुरू कर दें।
- खेती-बाड़ी के साथ-साथ जल संरक्षण के उपायों को अपनाना बेहद जरूरी है।
- आज किया गया जल संचयन आने वाली पीढ़ी के लिए वरदान साबित होगा।
भाषण के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ का भी विशेष रूप से जिक्र किया। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि किसानों के लिए एक विशेष पटल (पोर्टल/मंच) तैयार किया गया है, जिस पर किसान सीधे अपने महत्वपूर्ण सुझाव दर्ज करा सकते हैं।

मेले में गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले के शुभारंभ के अवसर पर राजनीति और कृषि जगत से जुड़े कई दिग्गज शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से:
- कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की
- विभिन्न क्षेत्रों के सांसद, विधायक और मंत्रीगण
- कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चेयरमैन
- संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी एवं राज्य के अलग-अलग जिलों से आए हजारों किसान उपस्थित रहे।
यह मेला किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और व्यापार के नए अवसरों से जोड़ने में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।
तीसरी धारा न्यूज











