एक नई सोच, एक नई धारा

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तीसरी धारा न्यूज़: रसोई गैस को लेकर देशभर में हाहाकार, इंडेन का बुकिंग सिस्टम हुआ क्रैश; जानें क्या है असली वजह

नई दिल्ली/जमशेदपुर: देश के करोड़ों रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए बड़ी खबर है। पिछले कुछ दिनों से देशभर में एलपीजी (LPG) सिलेंडर की बुकिंग और सप्लाई को लेकर भारी अफरा-तफरी का माहौल बना हुआ है। आलम यह है कि लोग गैस एजेंसियों के गोदामों के बाहर लंबी कतारों में लगने को मजबूर हैं।

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क्यों ठप पड़ा है बुकिंग सिस्टम?

​इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) के लोकप्रिय ब्रांड इंडेन के उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जानकारी के मुताबिक, अचानक कॉल ट्रैफिक बढ़ने की वजह से रिफिल बुकिंग सिस्टम पूरी तरह क्रैश हो गया है। सामान्य दिनों के मुकाबले बुकिंग के लिए आने वाली कॉल्स की संख्या 8 से 10 गुना तक बढ़ गई है, जिससे सिस्टम बार-बार रिस्पॉन्स देना बंद कर रहा है।

सप्लाई में 50% की भारी कमी

​संकट सिर्फ बुकिंग तक सीमित नहीं है। जमीनी स्तर पर पड़ताल करने पर पता चला है कि मांग में जहाँ 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, वहीं पीछे से होने वाली सप्लाई में 50 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वेंडर इनवॉइस मैनेजमेंट सिस्टम ठप होने के कारण होम डिलीवरी में भारी देरी हो रही है, जिससे लोग खुद सिलेंडर ढोने को मजबूर हैं।

सरकार और कंपनी के कदम

तीसरी धारा न्यूज़ को मिली जानकारी के अनुसार, इस संकट से निपटने के लिए इंडेन ने अपने सिस्टम की क्षमता बढ़ाना शुरू कर दिया है। बुकिंग प्रक्रिया को तेज करने के लिए IVRS (फोन पर मिलने वाले निर्देश) की अवधि कम कर दी गई है।

बुकिंग से पहले ध्यान दें: 25 दिन का नया नियम

​सरकार ने घरेलू सिलेंडर की रिफिल बुकिंग का वेटिंग पीरियड अब 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। तकनीकी पाबंदी न होने के कारण लाखों उपभोक्ता 25 दिन पूरे होने से पहले ही कॉल कर रहे हैं, जिससे सर्वर पर बोझ और बढ़ गया है।

सावधानी की अपील: उपभोक्ता कृपया अपनी पिछली बुकिंग के 25 दिन पूरे होने के बाद ही दोबारा प्रयास करें, ताकि सिस्टम पर दबाव कम हो सके और जरूरतमंदों को समय पर गैस मिल सके।

ट्रंप प्रशासन का बड़ा प्रहार: भारत समेत 16 देशों के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ जांच शुरू, फिर बढ़ सकते हैं आयात शुल्क

वाशिंगटन/नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने भारत सहित दुनिया की 16 प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के खिलाफ एक नई और व्यापक जांच शुरू करने का ऐलान किया है। ‘व्यापार अधिनियम 1974’ की धारा 301 (Section 301) के तहत शुरू की गई इस जांच का सीधा असर आने वाले समय में इन देशों से अमेरिका निर्यात होने वाले उत्पादों पर पड़ सकता है।

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क्या है ‘सेक्शन 301’ और क्यों हो रही है जांच?

​अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के अनुसार, यह जांच मुख्य रूप से ‘अतिरिक्त उत्पादन क्षमता’ (Excess Capacity) को लेकर है। अमेरिका का आरोप है कि भारत, चीन और जापान जैसे देशों ने अपनी घरेलू मांग से कहीं अधिक उत्पादन क्षमता विकसित कर ली है, जो बाजार के संकेतों से मेल नहीं खाती।

​अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि ये देश सब्सिडी और सरकारी नीतियों के जरिए अनुचित लाभ ले रहे हैं और अपना अतिरिक्त माल अमेरिकी बाजार में डंप कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी घरेलू उद्योगों और वहां के रोजगार को नुकसान हो रहा है।

जांच के दायरे में कौन-कौन से देश?

​इस नई लिस्ट में एशिया और यूरोप के दिग्गज व्यापारिक साझेदार शामिल हैं:

  • एशिया: भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, कंबोडिया और बांग्लादेश।
  • यूरोप: यूरोपीय संघ (EU), स्विट्जरलैंड और नॉर्वे।
  • उत्तर अमेरिका: मैक्सिको। (नोट: दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े भागीदार ‘कनाडा’ को इस लिस्ट से बाहर रखा गया है।)

भारत के लिए नई चुनौती: ‘ऐतिहासिक समझौते’ पर संकट?

​यह जांच भारत के लिए विशेष रूप से चिंताजनक है क्योंकि अभी पिछले महीने (फरवरी 2026) ही भारत और अमेरिका के बीच एक ‘ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौता’ हुआ था।

  • ​इस समझौते के तहत, अमेरिका ने भारतीय सामानों पर प्रभावी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया था।
  • ​यह राहत तब मिली थी जब भारत ने रूस से तेल खरीद कम करने और अमेरिका से ऊर्जा आयात बढ़ाने पर सहमति जताई थी।
  • ​इससे पहले, अगस्त 2025 में रूस से तेल खरीदने के कारण भारत पर 25% अतिरिक्त दंडात्मक टैरिफ लगाया गया था।

​विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई जांच के परिणाम स्वरूप इस साल गर्मियों तक भारत पर फिर से नए आयात कर (Import Taxes) लग सकते हैं, जिससे हालिया समझौते से मिली राहत खत्म हो सकती है।

ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य: ‘अमेरिका फर्स्ट’

​ट्रंप प्रशासन का यह कदम उनके ‘अमेरिका फर्स्ट’ एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत वे अमेरिकी औद्योगिक आधार को मजबूत करना और सप्लाई चेन को वापस देश के भीतर लाना चाहते हैं।

निष्कर्ष: यदि इस जांच के बाद अमेरिका नए प्रतिबंध या टैरिफ लगाता है, तो इसका असर न केवल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन भी पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। आने वाले कुछ महीने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

ईरान-इजरायल तनाव के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत: होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय टैंकरों को मिला ‘सेफ पैसेज’

नई दिल्ली/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत के लिए एक बहुत बड़ी क राहत भरी खबर आई है। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास आराघची के बीच हुई उच्च-स्तरीय कूटनीतिक बातचीत का बड़ा असर देखने को मिला है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर भारतीय झंडाधारी (India-flagged) टैंकरों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दे दी है।

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दो भारतीय जहाजों की सुरक्षित वापसी

​कूटनीतिक सहमति बनते ही दो भारतीय टैंकर ‘Pushpak’ और ‘Parimal’ को होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित रूप से गुजरते हुए देखा गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है।

रणनीतिक हथियार बना ‘होर्मुज’

​ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस जलमार्ग को एक रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। ईरान के कड़े रुख के अनुसार, वह अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों वाले तेल को यहां से गुजरने नहीं देगा। ईरान के हालिया बयान, “हम एक भी लीटर तेल अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गुजरने नहीं देंगे,” ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है।

भारत के लिए क्यों है यह खास?

  1. ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर काफी निर्भर है। सुरक्षित मार्ग मिलने से तेल आपूर्ति बाधित नहीं होगी।
  2. मजबूत कूटनीति: जहां दुनिया के शक्तिशाली देश इस क्षेत्र में संघर्ष का सामना कर रहे हैं, वहीं भारत ने बातचीत के जरिए अपने हितों की रक्षा की है।
  3. वैश्विक प्रभाव: यह समझौता वैश्विक स्तर पर भारत और ईरान के मजबूत द्विपक्षीय संबंधों और भारत की ‘तटस्थ एवं प्रभावी’ विदेश नीति को दर्शाता है।

निष्कर्ष: युद्ध और नाकेबंदी के इस दौर में भारत की यह सफलता साबित करती है कि कठिन से कठिन वैश्विक संकटों का समाधान भी प्रभावी कूटनीति से निकाला जा सकता है।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ध्वनि मत से खारिज, अमित शाह ने विपक्ष को घेरा

नई दिल्ली: भारतीय संसदीय इतिहास के एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को निचले सदन में ध्वनि मत से खारिज हो गया। दो दिनों तक चली तीखी बहस और पक्ष-विपक्ष की भारी नारेबाजी के बाद, ओम बिरला सदन के अध्यक्ष पद पर बने रहेंगे।

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सत्ता पक्ष का बचाव: “सदन मार्केटप्लेस नहीं, नियमों से चलता है”

​प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर की भूमिका का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अध्यक्ष सदन के ‘न्यूट्रल कस्टोडियन’ (तटस्थ संरक्षक) हैं।

​अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा:

​”लोकसभा की कार्यवाही आपसी भरोसे और स्थापित नियमों के आधार पर चलती है। यह कोई बाजार (Marketplace) नहीं है। सदस्यों को नियमों और प्रक्रियाओं के भीतर रहकर ही अपनी बात रखनी चाहिए। स्पीकर सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं।”

विपक्ष के गंभीर आरोप: “चेयर बनी सत्ता पक्ष के ‘अत्याचार’ का प्रतीक”

​कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव के समर्थन में विपक्षी सांसदों ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया। आरजेडी सांसद अभय कुमार सिन्हा ने सदन में कहा कि आज चेयर लोकतंत्र की आजादी के बजाय सत्ता पक्ष के दबाव का प्रतीक बन गई है। उन्होंने 140 सांसदों के निलंबन की घटना को “लोकतंत्र का काला दिन” करार दिया।

​वहीँ, जेएमएम सांसद विजय कुमार हंसदक और एनसीपी (एसपी) सांसद बजंरग मनोहर सोनवाने ने भी अपनी बात रखी:

  • भाषणों में रुकावट: विपक्ष ने आरोप लगाया कि जब वे बोलते हैं तो उनके माइक बंद कर दिए जाते हैं या कैमरा दूसरी दिशा में घुमा दिया जाता है।
  • टेबल फैन का उदाहरण: सांसद सोनवाने ने चुटीले अंदाज में कहा, “चेयर एक टेबल फैन की तरह व्यवहार करती है जो सिर्फ दाईं ओर (सत्ता पक्ष) ठंडी हवा देती है और बाईं ओर देखते ही ‘नहीं-नहीं’ की रट लगा दी जाती है।”

लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई

​विपक्षी नेताओं ने स्वीकार किया कि उन्हें संख्या बल के कारण प्रस्ताव के गिरने का आभास था, लेकिन उनका मुख्य उद्देश्य संसद के भीतर सिमटते लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्ष की आवाज को दबाए जाने के मुद्दे को देश के सामने रखना था।

​अंततः, सदन में वोटिंग के दौरान ध्वनि मत से प्रस्ताव गिर गया और ओम बिरला के नेतृत्व पर सदन ने एक बार फिर मुहर लगा दी।

ब्यूरो रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज़

झारखंड विधानसभा: रामनवमी पर डीजे बैन को लेकर भारी हंगामा, ‘सनातनी’ स्वाभिमान पर भिड़े पक्ष-विपक्ष

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान आज सदन का माहौल उस वक्त गरमा गया, जब रामनवमी के जुलूसों में डीजे बजाने पर लगी रोक का मुद्दा उठा। विपक्षी दल भाजपा ने इस फैसले को हिंदुओं की आस्था पर प्रहार बताते हुए सदन में जोरदार हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही बाधित हुई।

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विपक्ष का तीखा हमला: “हिंदुओं को टारगेट करना बंद करे सरकार”

​सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक नवीन जायसवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि रामनवमी जैसे महापर्व पर डीजे और संगीत पर पाबंदी लगाना सीधे तौर पर एक समुदाय विशेष की भावनाओं को आहत करना है।

​जायसवाल ने चेतावनी भरे लहजे में कहा:

​”धार्मिक आयोजनों पर इस तरह की पाबंदी स्वीकार्य नहीं है। सरकार हिंदुओं को टारगेट करना बंद करे। यदि सनातनी समाज सड़कों पर उतरा, तो सरकार को संभालना मुश्किल हो जाएगा।”

सत्ता पक्ष का पलटवार: “विकास के मुद्दों से ध्यान भटका रहा विपक्ष”

​भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए सत्तारूढ़ दल के विधायकों ने इसे कानून-व्यवस्था का मामला बताया। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश आर्थिक चुनौतियों और बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है, तब विपक्ष केवल हिंदू-मुस्लिम की राजनीति कर रहा है।

​उन्होंने सदन में स्पष्ट किया कि प्रशासन के निर्णय सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं और विपक्ष का काम केवल धार्मिक भावनाओं को भड़काना रह गया है।

हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही

​सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि भाजपा विधायक वेल (आसन के सामने) तक पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। शोर-शराबे और बढ़ते तनाव को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।

रिपोर्ट: तीसरी धारा न्यूज डेस्क

फुकेट एयरपोर्ट पर एयर इंडिया एक्सप्रेस विमान का नोज गियर टूटा, बाल-बाल बचे 133 यात्री

फुकेट/नई दिल्ली: थाईलैंड के फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर बुधवार दोपहर एक बड़ा विमान हादसा टल गया। एयर इंडिया एक्सप्रेस की हैदराबाद से आई फ्लाइट (बोइंग 737 MAX 8) लैंडिंग के दौरान तकनीकी खराबी का शिकार हो गई। विमान का ‘नोज लैंडिंग गियर’ टूटने और पहिया अलग होने के कारण रनवे को आपातकालीन स्थिति में बंद करना पड़ा।

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क्या है पूरी घटना?

​जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया एक्सप्रेस का बोइंग 737 MAX 8 विमान बुधवार दोपहर जैसे ही फुकेट एयरपोर्ट के रनवे पर उतरा, लैंडिंग इतनी जोरदार थी कि विमान के अगले हिस्से का पहिया (नोज व्हील) टूटकर अलग हो गया। इस झटके से नोज लैंडिंग गियर को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

​विमान में उस समय 133 यात्री सवार थे। गनीमत यह रही कि इस गंभीर तकनीकी खराबी के बावजूद विमान पलटने या आग लगने जैसी स्थिति से बच गया और सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

इमरजेंसी प्रोटोकॉल और राहत कार्य

​घटना के तुरंत बाद एयरपोर्ट प्रशासन ने इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिया। एयर इंडिया एक्सप्रेस के क्रू मेंबर्स ने तत्परता दिखाते हुए सभी 133 यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। एयरलाइन ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि क्रू ने सभी स्टैंडर्ड सेफ्टी प्रोटोकॉल का पालन किया और किसी भी यात्री को चोट नहीं आई है।

विमानन सेवाओं पर असर

​इस हादसे के कारण फुकेट इंटरनेशनल एयरपोर्ट के रनवे पर विमान फंस गया, जिसे हटाने के लिए भारी मशीनों की मदद ली जा रही है। रनवे बंद होने की वजह से कई अन्य अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के समय में बदलाव करना पड़ा है। खबर लिखे जाने तक विमान रनवे पर ही मौजूद था।

जांच के घेरे में बोइंग 737 MAX 8

​चूंकि यह हादसा एक भारतीय एयरलाइंस के साथ हुआ है, इसलिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) इस मामले की विस्तृत जांच कर सकता है। गौरतलब है कि बोइंग 737 MAX 8 विमान पहले भी तकनीकी कारणों से दुनिया भर में चर्चा और जांच के दायरे में रहे हैं, ऐसे में फुकेट की यह घटना सुरक्षा मानकों पर दोबारा सवाल खड़े कर सकती है।

तीसरी धारा न्यूज डेस्क

जमशेदपुर: कर्ज के बोझ तले दबे युवक ने की आत्महत्या, बारीडीह में थी पूजा सामग्री की दुकान

जमशेदपुर: लौहनगरी के सिदगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत बिरसानगर जोन नंबर 10 में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ 28 वर्षीय एक युवक रिंकेश अग्रवाल ने बीती रात अपने घर में फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। बताया जा रहा है कि युवक लंबे समय से कर्ज न चुका पाने के कारण मानसिक तनाव (डिप्रेशन) में था।

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परिजनों ने फंदे से लटका पाया

​मृतक के पिता गणेश अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार की रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाकर अपने-अपने कमरों में सोने चले गए थे। देर रात जब उन्होंने बेटे के कमरे में देखा, तो रिंकेश फंदे से लटका हुआ था। आनन-फानन में परिजनों ने उसे फंदे से नीचे उतारा और तत्काल टीएमएच (TMH) अस्पताल ले गए, जहाँ जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

कर्ज बना मौत का कारण

​परिजनों के अनुसार, रिंकेश अग्रवाल बारीडीह बाजार में पूजा सामग्री की दुकान चलाता था। व्यवसाय या अन्य कारणों से उस पर कर्ज का बोझ बढ़ गया था, जिसे वह चुका नहीं पा रहा था। इसी तनाव के चलते उसने आत्मघाती कदम उठाया।

पुलिसिया कार्रवाई

​सिदगोड़ा थाना पुलिस ने मामले की जानकारी मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार सुबह शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। युवक की असमय मृत्यु से पूरे क्षेत्र और परिजनों में मातम पसरा हुआ है।

असम में आदिवासियों की सशक्त आवाज बनेगा झामुमो; बंगाल चुनाव पर सस्पेंस बरकरार

रांची: झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका विस्तार करने के संकेत दिए हैं। पार्टी महासचिव सुदिव्य कुमार ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हालिया असम यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के 12 करोड़ आदिवासियों को एक मजबूत और एकजुट मंच प्रदान करना है।

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​असम में नेतृत्व परिवर्तन की आहट

​मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के असम दौरे को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए सुदिव्य कुमार ने कहा कि वहां की जनता वर्तमान राजनीतिक स्थिति से ऊब चुकी है। उन्होंने दावा किया कि असम में स्पष्ट रूप से नेतृत्व परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही है और झामुमो वहां एक सकारात्मक और जन-केंद्रित विकल्प बनकर उभरेगा।

​पश्चिम बंगाल चुनाव पर रणनीति

​आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भागीदारी को लेकर पार्टी ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। महासचिव के अनुसार:

  • ​बंगाल चुनाव पर अंतिम निर्णय सही समय आने पर लिया जाएगा।
  • ​गठबंधन में शामिल होने या स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला तत्कालीन परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
  • ​पार्टी का प्राथमिक लक्ष्य हर हाल में आदिवासी हितों की रक्षा करना है।

​डीजे विवाद: भाजपा पर कड़ा प्रहार

​राज्य में डीजे (DJ) और लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध को लेकर हो रही राजनीति पर सुदिव्य कुमार ने भारतीय जनता पार्टी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि डीजे पर रोक का आदेश माननीय हाई कोर्ट का है और सरकार केवल उसका अनुपालन सुनिश्चित कर रही है।

​उन्होंने भाजपा पर ‘दोहरे मापदंड’ का आरोप लगाते हुए कहा:

​”जब बिहार या दिल्ली में ऐसे प्रतिबंध लगते हैं, तब भाजपा को धर्म खतरे में नहीं दिखता। लेकिन झारखंड में कोर्ट के आदेश पर भी राजनीति शुरू कर दी जाती है। भाजपा केवल तब ‘धर्म’ का कार्ड खेलती है जब उसके पास वास्तविक राजनीतिक मुद्दे खत्म हो जाते हैं।”

​प्रशासन को उन संवेदनशील जिलों में विशेष रूप से अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं जहाँ पूर्व में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं हुई हैं।

तीसरी धारा न्यूज के लिए ब्यूरो रिपोर्ट।

जमशेदपुर: मानगो की कीर्तन विहार कॉलोनी में चोरी की कोशिश करते युवक को स्थानीय लोगों ने दबोचा

जमशेदपुर: मानगो थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली कीर्तन विहार कॉलोनी में बुधवार को स्थानीय निवासियों की सतर्कता से एक युवक को चोरी की कोशिश करते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया गया। पकड़े गए युवक को पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जहाँ उससे पूछताछ की जा रही है।

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सीसीटीवी फुटेज से हुई पहचान

​जानकारी के मुताबिक, कीर्तन विहार कॉलोनी में पिछले कुछ दिनों से चोरी की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई थी, जिससे निवासियों में काफी रोष था। दो दिन पहले भी इसी इलाके में चोरी की एक वारदात हुई थी, जिसमें संदिग्ध युवक की तस्वीर पास में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई थी। स्थानीय लोग तभी से अलर्ट पर थे।

संदिग्ध हालत में दोबारा दिखा युवक

​बुधवार को वही युवक दोबारा कॉलोनी में संदिग्ध परिस्थितियों में घूमता पाया गया। जैसे ही उसने एक घर में घुसने का प्रयास किया, आसपास के लोगों ने उसे देख लिया और तुरंत घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया। आक्रोशित लोगों ने मौके पर ही युवक की पिटाई कर दी और मामले की जानकारी मानगो थाना पुलिस को दी।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

​सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और युवक को अपनी हिरासत में लेकर थाने ले गई। पुलिस के अनुसार:

  • ​प्रारंभिक जांच में युवक नशे का आदी प्रतीत हो रहा है।
  • ​पुलिस अब युवक के अपराधिक इतिहास की जांच कर रही है ताकि अन्य चोरियों में उसकी संलिप्तता का पता लगाया जा सके।
  • ​इलाके में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा पुख्ता करने के निर्देश दिए गए हैं।
ऐतिहासिक फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार दी ‘निष्क्रिय इच्छामृत्यु’ की अनुमति, 13 साल से कोमा में था युवक

नई दिल्ली: भारत के न्यायिक इतिहास में बुधवार को एक युगांतकारी अध्याय जुड़ गया। उच्चतम न्यायालय ने पहली बार निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) के तहत एक 32 वर्षीय व्यक्ति की जीवनरक्षक प्रणाली (Life Support) हटाने का आदेश पारित किया। यह फैसला गरिमा के साथ मरने के मौलिक अधिकार को व्यावहारिक रूप से लागू करने की दिशा में पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।

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क्या था मामला?

​हरीश राणा, जो कभी एक मेधावी युवा थे, 13 साल पहले एक पीजी (PG) आवास की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इस हादसे ने उन्हें स्थायी विजिटेटिव अवस्था (PVS) और 100% लकवे की स्थिति में पहुंचा दिया। पिछले एक दशक से अधिक समय से हरीश केवल एक ट्यूब (PEG ट्यूब) के माध्यम से दी जा रही फीडिंग के सहारे जीवित थे। उनके पिता ने सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उनके बेटे को इस कष्टदायक जैविक जीवन से मुक्ति दी जाए।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

​न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने मानवीय संवेदनाओं और कानून के संतुलन को रेखांकित करते हुए कहा:

  • उपचार बनाम जीवन: कोर्ट ने माना कि ट्यूब के जरिए दिया जा रहा पोषण (CAN) भी एक चिकित्सा उपचार है, जिसे मरीज के ‘सर्वोत्तम हित’ में बंद किया जा सकता है।
  • केवल जैविक प्रक्रिया: पीठ ने कहा कि उपचार जारी रखने से केवल उनकी जैविक जीवन प्रक्रिया बढ़ रही थी, स्वास्थ्य में कोई सुधार संभव नहीं था।
  • माता-पिता का प्रेम: कोर्ट ने हरीश के माता-पिता की सराहना करते हुए कहा, “अंधेरे समय में भी देखभाल करना ही वास्तविक प्रेम है।”

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

​अदालत ने इस प्रक्रिया को गरिमापूर्ण बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:

  1. AIIMS की भूमिका: मरीज को एम्स (AIIMS) के पैलिएटिव केयर सेंटर में भर्ती किया जाएगा, जहां चिकित्सा विशेषज्ञों की देखरेख में धीरे-धीरे उपचार बंद किया जाएगा।
  2. गरिमापूर्ण विदाई: यह सुनिश्चित किया जाए कि जीवनरक्षक प्रणाली हटाने की प्रक्रिया अपमानजनक न हो।
  3. राष्ट्रव्यापी व्यवस्था: केंद्र सरकार को निर्देश दिया गया है कि सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) डॉक्टरों का एक पैनल तैयार रखें, ताकि भविष्य में ‘द्वितीयक मेडिकल बोर्ड’ के गठन में देरी न हो।

कानूनी पृष्ठभूमि: क्या है ‘कॉमन कॉज’ फैसला?

​सुप्रीम कोर्ट ने 2018 के ऐतिहासिक ‘Common Cause’ फैसले में गरिमा के साथ मरने को मौलिक अधिकार माना था। 2023 में इसमें संशोधन कर प्रक्रिया को सरल बनाया गया था। यह हरीश राणा का मामला पहला ऐसा केस है, जिसमें कोर्ट ने इन गाइडलाइंस का पालन करते हुए अंतिम आदेश पारित किया है।

विशेष नोट: यह आदेश केवल उन्हीं मामलों में लागू होगा जहां चिकित्सा बोर्ड यह प्रमाणित कर दे कि मरीज के बचने की कोई संभावना नहीं है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस पर एक व्यापक कानून बनाने की भी सिफारिश की है।

रिपोर्ट: ब्यूरो, तीसरी धारा न्यूज

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