एक नई सोच, एक नई धारा

लोकलुभावन हो सकता है चुनावी बजट, जानें क्या-क्या राहत दे सकती है मोदी सरकार?
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एक फरवरी को देश का अंतरिम बजट पेश होना है। देश में कुछ महीनों बाद ही लोकसभा के चुनाव होने हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि यह बजट मतदाताओं को लुभाने वाला होगा। चुनाव से पहले का आखिरी बजट ऐसा होगा जिससे राजकोषीय घाटा कम हो और समाज के सभी वर्गों को साधने की कोशिश हो सकती है। किसनों, युवाओं, महिलाओं और गरीबों पर पर्याप्त ध्यान देने से बनियादी ढ़ांचे पर भी उतना खर्च कर पाना मुश्किल होगा।

बजट को लोकलुभावन बनाने में विकास की बातों से समझौता करना पड़ सकता है। ऐसे में देखना होगा कि यह बजट दूरगामी परिणामों को देखकर बनाया जाता है या कुछ अलग होने वाला है। अर्थव्यवस्था का विकास तेज गति से हो रहा है। ऐसे में सरकार की कमाई भी बढ़ी है। कई अर्थशास्त्री खर्च बढ़ने की उम्मीद न करें। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने पहले ही कह दिया है कि बजट में कोई बड़ा ऐलान नहीं होगा।

क्या कहना है जानकारों का

इकोनॉमिक टाइम्स ने ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के अभिषेक गुप्ता की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि सरकार पर आने वाले चुनावों में लोकलुभावन कदम उठाने का दबाव कम होगा। एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड की अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने कहा है कि राजकोषीय समेकन की गति और आगे की नीतिगत प्राथमिकताओं पर नजर रखी जा सकती है।

सरकार राजकोषीय घाटा लगातार कम कर रही है ताकि खर्च कंट्रोल में रहे। ब्लूमबर्ग द्वारा सर्वे किए गए अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्तीय वर्ष के लिए 5.9 प्रतिशत घाटे का लक्ष्य पूरा हो सकता है और अगले वित्तीय वर्ष में इसे और कम करके 5.3% कर दिया जाएगा।

पेश होगा अंतरिम बजट

कुछ ही महीनों में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इस वजह से इस साल पूरे साल का बजट नहीं बल्कि अंतरिम बजट पेश किया जाएगा। क्या आपको पता है कि अंतरिम बजट क्या होता है और यह रेग्युलर बजट या आम बजट से अलग कैसे है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का अंतरिम बजट पेश करेंगी। चुनावी साल में सरकार शुरू के कुछ महीनों का ही बजट पेश करती है जिसे अंतरिम बजट कहा जाता है। यह आम बजट से कई मायनों में अलग होता है।

क्या है अंतरिम बजट का मकसद

चुनाव जब खत्म हो जाता है तब नई सरकार पूर्ण बजट पेश करती है। इसकी वजह यह है कि चुनावी साल में सरकार पूरे साल का बजट पेश करेगी तो कई ऐसे ऐलान कर सकती है जिससे उसे चुनाव में फायदा हो। अंतरिम बजट का मकसद सरकार का वित्त प्रबंधन करना है। इसे वोट ऑन अकाउंट के रूप में जाना जाता है। इसका मतलब है कि अप्रैल और मई में कितना पैसा खर्च होगा उसका सरकार पहले ही अनुमान बता देगी और उसे एडवांस में ही सरकार को दे दिया जाएगा। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि इन दो महीनों में सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसे की कमी न हो।

नई सरकार पेश करती है पूर्ण बजट

अंतरिम बजट में सिर्फ वित्तीय वर्ष के शुरुआती महीनों के खर्चे ही कवर होते हैं। एक अप्रैल से नए वित्तवर्ष की शुरुआत होती है और यह 31 मार्च तक चलता है। मई और जून के बीच सरकार पूर्ण बजट पेश कर सकती है। चूंकि चुनाव इसबार इसबार मई-जून में होने हैं, इस वजह से सिर्फ अप्रैल और मई के लिए बजट पेश होगा। चुनावी साल में सरकार और मंत्रियों के बदलने की संभावना की वजह से भी सिर्फ 2 या तीन महीने का डेटा दिया जाता है। नई सरकार बनने के बाद एक पूर्ण बजट तैयार होगा।

झारखंड में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना? राज्यपाल ने दो टूक में दिया जवाब
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झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन का कहना है कि सीएम हेमंत सोरेन को ईडी का समन मिलने के बाद वह राज्य के हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

सीएम सोरेन 27 जनवरी की रात को दिल्ली रवाना हो गए हैं. जबकि राज्य में सीएम सोरेन के निर्धारित कार्य़क्रम को बिना किसी स्पष्टीकऱण दिए रद्द कर दिया गया है. राज्यपाल ने कहा, ”मैं संविधान के संरक्षक के रूप में पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. यह राज्यपाल का काम है, मैं कर रहा हूं. ”

पत्रकारों ने राज्यपाल राधाकृष्णन से पूछा कि राज्य में जो हालात हैं ऐसे में क्या राजभवन के लिए सभी विकल्प खुले हैं? राज्यपाल ने कहा कि जब जरूरत होगी हम उस पुल को पार कर लेंगे. वहीं, झारखंड राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की संभावना के बारे में पूछने पर राधाकृष्णन लने कहा कि यह केवल अनुमान है और राजनीतिक दलों को इसमें नहीं पड़ना चाहिए. सीएम सोरेन द्वारा ईडी की पूछताछ से बचने के सवालों पर राज्यपाल ने कहा कि ”मैं केवल इतना कहना चाहूंगा कि कोई भी कानून से ऊपर नहीं है. हमें ऐसी स्थिति बनने नहीं देनी चाहिए कि हम कानून से बड़े बन जाएं. अगर वह आज जवाब नहीं दे रहे हैं तो कल जवाब देना होगा.” राज्यपाल ने झारखंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने कहा, ” राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं हैं, मैं यह कई बार जाहिर कर चुका है. कदम उठाने की जरूरत है.”

सीएम आवास, राजभवन की बढ़ाई गई सुरक्षा
इस बीच सीएम सोरेन के आवास, राजभवन और केंद्र सरकार के कार्यालयों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) अविनाश कुमार ने बताया कि राजभवन, ईडी दफ्तर, केंद्री कार्यालय और मुख्यमंत्री आवास पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. रांची में सुरक्षा बढ़ाई गई है ताकि भीड़ से बचा जा सके. मौजूदा स्थिति को देखते हुए सावधानी बरती जा रही है. उधर, सोमवार को ईडी की टीम दिल्ली स्थित सीएम के आवास पहुंची है. ईडी ने उन्हें समन जारी कर पूछा था कि वह 29 या 31 को उपलब्ध होंगे या नहीं. सोरेन ने इसका जवाब नहीं दिया था जबकि वह 27 तारीख को दिल्ली पहुंच गए. दूसरी तरफ उनकी पार्टी जेएमएम के कार्यकर्ता ईडी के समन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं.

पंजाब, बंगाल और बिहार के बाद अब आम आदमी पार्टी I.N.D.I.A गठबंधन का हिस्‍सा नही, केजरीवाल बोले- अकेले चुनाव लड़ेंगे
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आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने रविवार (28 जनवरी) को बड़ा एलान किया. केजरीवाल ने घोषणा की है कि आप हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने वाली है.

उन्होंने कहा कि हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों पर पार्टी भले ही अकेले चुनाव लड़ेगी, लेकिन इस साल होने वाले लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के साथ चुनावी मैदान में उतरा जाएगा. केजरीवाल के एलान ने सभी को हैरान कर दिया ह।

केजरीवाल ने क्या कहा?तीन राज्यों में पहले ही इंडिया के लिए बिगड़ चुकी है बात?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तरफ से इस तरह की घोषणा ऐसे समय पर की गई है, जब पंजाब में पार्टी अकेले लोकसभा चुनाव लड़ने का एलान कर चुकी है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन को झटका देते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भी पश्चिम बंगाल में अकेले लोकसभा चुनाव लड़ेंगी. बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू भी इंडिया गठबंधन से बाहर हो गई है. हालांकि, केजरीवाल ने हरियाणा में लोकसभा चुनाव के लिए दरवाजे खुले रखे हैं।

केजरीवाल ने क्या कहा?

हरियाणा के जींद में आप के ‘बदलाव जनसभा’ को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘आज लोगों को सिर्फ एक ही पार्टी पर भरोसा है, वह है आम आदमी पार्टी. एक तरफ उन्हें पंजाब दिखता है और दूसरी तरफ दिल्ली में हमारी सरकार. आज हरियाणा एक बड़ा परिवर्तन चाह रहा है. पहले दिल्ली और पंजाब में लोगों ने ये बड़ा बदलाव किया और अब वहां लोग खुश हैं. आप सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और हम हरियाणा में अगली सरकार बनाएंगे. इसे देश का नंबर 1 राज्य बनाएंगे।

तीन राज्यों में पहले ही इंडिया के लिए बिगड़ चुकी है बात?

केजरीवाल के हरियाणा विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ने के एलान ने इंडिया गठबंधन के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. एक तरफ गठबंधन सभी राज्यों में एकजुट होने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ इसमें शामिल दल एक-एक करके उससे अलग होते जा रहे हैं. पश्चिम बंगाल उन पहले राज्यों में से है, जहां इंडिया गठबंधन में शामिल टीएमसी ने सभी सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया. टीएमसी ने ये जरूर कहा है कि वह बाकी राज्यों में गठबंधन के साथ है।

पश्चिम बंगाल के बाद पंजाब में भी आप एलान कर चुकी है कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं करने वाली है. पार्टी का कहना है कि 2024 लोकसभा चुनाव में सभी 13 सीटों पर वह अकेले लड़ने वाली है. बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं और यहां पर भी गठबंधन में दरार पड़ गई. नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जेडीयू इंडिया से बाहर हो गई है. इस वजह से अब इंडिया गठबंधन के लिए बिहार में लोकसभा चुनाव में अच्छा प्रदर्शन काफी मुश्किल होने वाला है।

रेलवे की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए बड़ी खुशखबरी, अब हर साल होगी भर्ती
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भारतीय रेलवे में नौकरी करने का अगर आप सपना देखते हैं, या इच्छुक हैं तो आपके लिए बड़ी खुशखबरी है। दरअसल, इंडियन रेलवे अब हर साल भर्ती निकालने वाला है।

इंडियन रेलवे ने हर साल नौकरियां निकालने की योजना बना रही है ताकि खाली पदों को भरा जा सके। ईस्ट सेंट्रल रेलवे के जनरल मैनेजर अनिल कुमार खंडेलवाल ने इसकी जानकारी दी है।

बता दें, भारतीय रेलवे ने हाल ही में 1.5 लाख पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया पूरी की है। इसके साथ ही आगे की भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

हर साल नियमित रिक्तियां निकालने की तैयारी

इंडियन रेलवे के मैनेजर अनिल खंडेलवाल ने कहा, “रेलवे एक नई प्रक्रिया शुरू की है। रेलवे की योजना अब हर साल नियमित रूप से रिक्तियां लाने की है, क्योंकि रेलवे का बुनियादी ढांचा और संचालन बढ़ रहा है। कई श्रेणियों में रिक्तियां सालाना भरी जाएंगी।”

लोको पायलट की भर्ती हो चुकी है शुरू

रेलवे अधिकारी ने कहा, “हर साल नियमित रिक्तियां लाने की दिशा में 5,696 एएलपी (लोको पायलट) की भर्ती शुरू हो चुकी है। आवेदकों को हर साल अवसर मिलेंगे। किसी कारणवश गर आवेदक वर्तमान साल में असफल होते है तो वे अगले साल दोबारा परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। इसलिए अगले अवसर के लिए कोई अंतराल नहीं होगा। 5,696 लोको पायलटों की पहली अधिसूचना 20 जनवरी को पहले ही जारी की जा चुकी है।”

15 राज्यों की 56 राज्यसभा सीटों पर 27 फरवरी को चुनाव, इन राज्यों में डाले जाएंगे वोट
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नई दिल्ली : देश के 15 राज्यों में 56 राज्यसभा सीटों पर होने वाले मतदान का ऐलान हो गया है। चुनाव आयोग ने मतदान की तिथि 27 फरवरी घोषित की है। आयोग के अनुसार, अगर कहीं पर मतदान की जरुरत पड़ती है तो 27 फरवरी तो सुबह 9 बजे से शाम चार बचे तक वोटिंग की जा सकती है। उम्मीदवार 15 फरवरी को नामांकन कर सकते हैं। चुनाव के दिन ही मतगणना भी की जाएगी।

इन राज्यों की इतनी सीटों पर होगा मतदान

चुनाव आयोग के अनुसार, उत्तर प्रदेश (10), महाराष्ट्र (6), बिहार (6), पश्चिम बंगाल (5), मध्य प्रदेश (5), गुजरात (4), कर्नाटक (4) शामिल हैं। , आंध्र प्रदेश (3), तेलंगाना (3), राजस्थान (3), ओडिशा (3), उत्तराखंड (1), छत्तीसगढ़ (1), हरियाणा (1) और हिमाचल प्रदेश एक सीटों पर राज्यसभा की सीटों पर मतदान होगा।

3 अप्रैल तक रिक्त हो रही हैं ये सीटें

आयोग ने बताया कि 50 सदस्य दो अप्रैल को सेवानिवृत्त होंगे, जबकि छह सदस्य तीन अप्रैल को सेवानिवृत्त होंगे। जिन राज्यों से सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उनमें आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और राजस्थान शामिल हैं।

सबसे ज्यादा यूपी में रिक्त हो रही हैं सीटें

चुनाव आयोग ने बताया कि सबसे अधिक संख्या 10 सांसद उत्तर प्रदेश से 2 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त होंगे। महाराष्ट्र और बिहार दोनों में 6 सदस्य 2 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इस बीच, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में प्रत्येक में 5 सदस्य उसी तिथि पर सेवानिवृत्त होंगे। कर्नाटक और गुजरात दोनों में 2 अप्रैल, 2024 को 4 सदस्यों की सेवानिवृत्ति होगी। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और राजस्थान, प्रत्येक में तीन सदस्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जबकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सदस्य 2 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, ओडिशा और राजस्थान के सदस्य 3 अप्रैल, 2024 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में से प्रत्येक में 2 अप्रैल, 2024 को एक सदस्य की सेवानिवृत्ति होगी।

दिल्ली मेंमुख्यमंत्री सोरेन को तलाश रही प्रवर्तन निदेशालय, एयरपोर्ट पर चार्टेड प्लेन तैयार; आवास पर सर्च अभियान जारी
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प्रवर्तन निदेशालय की टीम आज झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली स्थित शांति निकेतन के घर पर पहुंची है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने हेमंत सोरेन के घर से कई अहम दस्तावेज बरामद किए हैं, जिन्हे एक बैग में डालकर प्रवर्तन निदेशालय के एक अधिकारी ने बाहर गाड़ी में बैठे अन्य प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों को सौंप दिया।

प्रवर्तन निदेशालय की टीम अभी भी घर के अंदर मौजूद है और पूरे घर में सर्चिंग की जा रही है। बताया जा रहा है कि सीएम हेमन्त सोरेन शांति निकेतन स्थित घर पर मौजूद नहीं हैं। बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय ने लैंड डील स्कैम में 29 से 31 जनवरी के बीच हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए समय मांगा था। बता दें कि धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा नया समन जारी किए जाने के बाद सोरेन अचानक दिल्ली रवाना हो गए थे। शनिवार रात को ही वह दिल्ली रवाना हो गए थे, जिसके बाद कयासों का दौर शुरू हो गया था।

एयरपोर्ट पर खड़ा सीएम का चार्टेड प्लेन

फिलहाल सीएम हेमंत सोरेन का चार्टेड प्लेन दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद है। दिल्ली एयरपोर्ट के जनरल एविएशन टर्मिनल पर सीएम सोरेन का चार्टेड प्लेन मौजूद है। आज ही सीएम सोरेन को वापस झारखंड जाना था, लेकिन वह एयरपोर्ट नहीं पहुंचे हैं। इतना ही नहीं सीएम सोरेन शांति निकेतन, मोतीलाल नेहरू स्थित आवास और झारखंड भवन में भी मौजूद नहीं हैं। वहीं प्रवर्तन निदेशालय की टीम अभी भी शांति निकेतन स्थित आवास में सर्च अभियान चला रही है। प्रवर्तन निदेशालय की टीम सुबह झारखंड भवन में भी पहुंची थी और वहां रिसेप्शन पर पूछा था कि मुख्यमंत्री कहां हैं?

ईडी के समन के बाद रवाना हुए थे दिल्ली

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत समन को समन भेजकर पूछा था कि क्या वह 29 या 31 जनवरी को पूछताछ के लिए उपलब्ध हैं? इसके बाद ही सोरेन दिल्ली के लिए रवाना हो गए थे। एक अधिकारी ने बताया कि ‘‘उनके दिल्ली जाने की कोई योजना नहीं थी। ईडी द्वारा समन भेजे जाने के बाद अचानक उनकी योजना बनी। उनके कई कार्यक्रम प्रस्तावित हैं जिनमें 29 जनवरी को चाईबासा में, 30 जनवरी को पलामू में और 31 जनवरी को गिरिडीह में पूर्व निर्धारित कार्यक्रम शामिल हैं।’’ एक सूत्र ने बताया कि सोरेन कानूनी परामर्श के लिए दिल्ली गये हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।

अब तक 14 लोग गिरफ्तार

केंद्रीय एजेंसी ने 20 जनवरी को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मुख्यमंत्री का बयान उनके आधिकारिक आवास पर दर्ज किया था। जानकारी के मुताबिक ताजा समन इसलिए जारी किया गया क्योंकि उस दिन पूछताछ पूरी नहीं हुई थी। एजेंसी के अनुसार, जांच झारखंड में ‘‘माफिया द्वारा भूमि के स्वामित्व में अवैध परिवर्तन के एक बड़े गिरोह से संबंधित है। ईडी ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 2011 बैच की भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की अधिकारी छवि रंजन भी शामिल हैं। वह राज्य के समाज कल्याण विभाग के निदेशक और रांची के उपायुक्त के रूप में कार्यरत थीं।

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली आवास पर क्यों पहुंची ईडी की टीम?
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झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली आवास पर सोमवार को ईडीकी टीम पहुंची. इस बीच प्रशासनिक महकमा अलर्ट मोड में है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई है.

कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को रांची पहुंचने का निर्देश दिया है. एक तरह जहां झारखंड के मुख्य सचिव (सीएस) एल खियांग्ते ने आपात बैठक बुलाई है, वहीं रांची एसएसपी ने सभी थानेदारों को तलब किया है. आपको बता दें कि जमीन घोटाले से जुड़े मनी लाउंड्रिंग केस में ईडी ने हेमंत सोरेन को 10वां समन जारी कर 29 से 31 जनवरी के बीच समय 28 जनवरी तक देने को कहा था, लेकिन सीएम की ओर को कोई जवाब नहीं दिया गया. वे 27 जनवरी की रात को ही दिल्ली निकल गए थे.

जमीन घोटाला मामले में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने 10वां समन भेजकर यह तय करने को कहा था कि 29 से 31 जनवरी के बीच कब पूछताछ की जाए. निर्धारित समय (28 जनवरी) पर जवाब नहीं देने पर सोमवार 29 जनवरी को ईडी की टीम सीएम हेमंत सोरेन के दिल्ली आवास पर पहुंच गयी. आपको बता दें कि 10वां समन भेजकर पहले की तरह ही ईडी ने फिर लिखा था कि अगर वह बयान दर्ज कराने नहीं आएंगे, तो ईडी खुद उनके पास पहुंचेगी. इससे पहले 22 जनवरी को ईडी ने नौवां समन भेजकर सीएम को पूछताछ के लिए 27 से 31 जनवरी का समय दिया था.

25 जनवरी को सीएम हेमंत सोरेन ने ईडी को पत्र लिखकर 9वें समन का जवाब दिया था. 9वें समन के बाद ईडी को भेजी चिट्ठी में सीएम हेमंत सोरेन ने अपनी व्यस्तता का हवाला दिया और कहा कि वह इस समन का जवाब बाद में देंगे. इधर, ईडी ने 27 जनवरी को मुख्यमंत्री को 10वां समन भेजकर समय देने को कहा था.

सरकार बनते ही एक्शन में भाजपा, राजद के इस बड़े चेहरे के खिलाफ नोटिस
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बिहार में नीतीश कुमार की अगुवाई में नई सरकार बन गई है. बिहार में एनडीए की सरकार बनने के बाद आरजेडी के खिलाफ पहला एक्शन लिया गया है. मामला विधानसभा अध्यक्ष से जुड़ा है. विधानसा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है. (जारी…)

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विधानसभ अध्यक्ष को पद से हटाने के लिये बीजेपी के नन्दकिशोर यादव सहित कई अन्य विधायकों ने विधानसभा सचिव को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस भेजा है. माना जा रहा है कि इस्तीफा नहीं देने पर अवध बिहारी चौधरी को बहुमत से हटाने को तैयारी की जा रही है. (जारी…)

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बिहार में विधानसभा के दलगत स्थिति की बात करें तो एनडीए गठबंधन के पास 128 विधायक हैं तो वहीं विपक्षी महागठबंधन के पास 114 विधायक हैं. बिहार विधानसभआ के स्पीकर अवध बिहारी चौधरी हैं जो कि राजद कोटे से हैं. उनके खिलाफ 128 विधायकों के होने से उनका हटना तय माना जा रहा है.

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झारखंड को बचाना है, तो आदिवासियों-मूलवासियों को बचाना होगा : डॉ उरांव

वरिष्ठ पत्रकार व लेखक श्याम किशोर चौबे की पुस्तक ‘झारखंड एक बेचैन राज्य का सुख’ का लोकार्पण वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव ने प्रेस क्लब में किया. इस अवसर पर मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी थे. मौके पर डॉ रामेश्वर उरांव ने कहा कि वह इस बात के गवाह हैं कि झारखंड कैसे बना. झारखंड अलग राज्य का उद्देश्य बिहार के शोषण से मुक्ति थी. प्रथम मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी के समय से यहां विकास शुरू हुआ. शासन, प्रशासन और सरकार में बेईमानी नहीं के बराबर थी. वर्तमान समय में हम काफी आगे बढ़े हैं, लेकिन उतना नहीं, जितना होना चाहिए था. अगर इस राज्य को बचाना है, तो यहां के आदिवासियों और मूलवासियों को बचाना होगा. (जारी…)

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सिर्फ कृषि के आधार पर रोजगार नहीं दे सकते: इस मौके पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में अच्छा हो, इसके लिए बेचैनी का होना जरूरी है. संतुष्ट होने से आगे काम करने की प्रेरणा समाप्त हो जाती है. अविभाजित बिहार की तुलना करने पर राज्य बेहतर स्थिति में है. विकास के लिए सड़क, बिजली, पानी, सुरक्षा, दक्षता निर्माण और रोड कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी बातों पर ध्यान देना जरूरी है. सिर्फ कृषि के आधार पर रोजगार नहीं दे सकते. (जारी…)

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झारखंड में आदिवासी-गैर आदिवासी की भावना ज्यादा

अध्यक्षीय संबोधन में पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि आज की दुनिया काफी बदल चुकी है. झारखंड में आदिवासी-गैर आदिवासी की भावना कुछ ज्यादा ही है, जबकि छत्तीसगढ़ में झारखंड से छह प्रतिशत अधिक आदिवासी आबादी है, लेकिन वहां ऐसी बात नहीं है. (जारी…)

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बाहरी को गाली देना बंद करें : इस मौके पर विशिष्ट अतिथि सह कार्यक्रम के संचालनकर्ता बैजनाथ मिश्र ने कहा कि बाहरी को गाली देना बंद करें. कृष्ण की जन्मभूमि का दर्शन जिन मंत्रियों ने किया है, उनमें से एक का किसी एक का नाम बताइये, जो बाहरी है. राजनीति की रेखा खींच कर बात करना ठीक नहीं है. इस मौके पर लेखक श्याम किशोर चौबे, हिमांशु शेखर चौधरी, प्रो रमेश शरण और नीरज नाथ पाठक ने भी अपनी बात रखी.

जब तक नहीं मिलेगा तब तक…’ मनोज जारंगे के फिर बदले सुर

मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने रविवार को कहा कि जब तक समुदाय के सदस्यों को महाराष्ट्र सरकार की प्रस्तावित अधिसूचना के तहत लाभ मिलना शुरू नहीं हो जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

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उन्होंने यह घोषणा नवी मुंबई में अपने प्रदर्शन को स्थगित करने के एक दिन बाद की है. जरांगे को कुछ वर्गों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. उनका दावा है कि सरकार ने जरांगे को केवल एक मसौदा प्रस्ताव दिया था न कि औपचारिक अधिसूचना. (जारी…)

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सरकार द्वारा उनकी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद जरांगे ने मराठा आरक्षण के लिए अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया था. मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि जब तक मराठा को आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक समुदाय के सदस्यों को ओबीसी को मिलने वाले सभी लाभ दिए जाएंगे. जालना में जब संवाददाताओं ने उनसे अगले कदम के बारे में पूछा तो जरांगे ने कहा, ”हमारा आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक कि राज्य द्वारा लागू किए जा रहे नए नियमों के तहत समुदाय के कम से कम एक व्यक्ति को लाभ नहीं मिलता. (जारी…)

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राज्य सरकार ने मुझे मसौदा दिखाया है और अंतिम अधिसूचना अभी आना बाकी है. हम घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहे हैं.’ जरांगे ने कहा कि वह सोमवार को ऐतिहासिक रायगढ़ किले का दौरा करेंगे और मंगलवार को छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। उन्होंने कहा, ”मैं श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद ही घर (जालना जिले में) जाऊंगा.’

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