
राँची : पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के गिरफ्तारी के बाद कल सुबह 10:30 बजे झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। यह सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी केके कोर्ट संख्या 02 के बेंच संख्या 01 में होगी।



राँची : पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के गिरफ्तारी के बाद कल सुबह 10:30 बजे झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई होगी। यह सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति अनुभा रावत चौधरी केके कोर्ट संख्या 02 के बेंच संख्या 01 में होगी।



जमशेदपुर : भाजपा जमशेदपुर महानगर के जिला पदाधिकारी एवं मोर्चा जिला अध्यक्षों की बैठक बुधवार को बिष्टुपुर स्थित तुलसी भवन के सभागार में संपन्न हुई। सुधांशु ओझा के जमशेदपुर महानगर के जिलाध्यक्ष बनने के उपरांत आयोजित प्रथम बैठक में जिला पदाधिकारी एवं मोर्चा जिलाध्यक्षों ने सुधांशु ओझा का गर्मजोशी से स्वागत किया। महानगर अध्यक्ष सुधांशु ओझा की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आगामी कार्यक्रमों की सफलता एवं बेहतर क्रियान्वयन को लेकर व्यापक चर्चा की गई।

बैठक में भाजपा प्रदेश मंत्री नंदजी प्रसाद मुख्यरूप से शामिल हुए। इस दौरान जिला अध्यक्ष सुधांशु ओझा ने विभिन्न सांगठनिक कार्यों और दायित्वों पर विस्तृत जानकारी ली। बैठक में ‘गाँव चलो अभियान’ एवं ‘शक्ति वंदन’ कार्यक्रम समेत अन्य कार्यक्रमों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। जिलाध्यक्ष सुधांशु ओझा ने लोकसभा चुनाव के साथ प्रदेश में भाजपा की मजबूत सरकार बनाने के लिए उपस्थित कार्यकर्ताओं को पूरी तन्मयता के साथ जुटने का आह्वान किया। कहा कि हम सब मिलकर पार्टी को बड़ी जीत दिलाने के लिए कार्य करें।
वहीं, प्रदेश मंत्री नंदजी प्रसाद ने पार्टी के 4 से 11 फरवरी तक होने वाले गाँव चलो अभियान के निमित्त विस्तृत जानकारी दी और अभियान के निमित्त नियुक्त किये गए जिला संयोजक से रिपोर्ट लिया। उन्होंने कहा कि गाँव चलो अभियान के माध्यम से हमें बूथों का सशक्तिकरण करना है। इसके साथ ही 24 घंटे के प्रवास के तहत लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं का समुचित समाधान भी करने की दिशा में कार्य करना है।

बैठक के दौरान जिला उपाध्यक्ष संजीव सिन्हा, प्रदीप महतो, बबुआ सिंह, जिला महामंत्री अनिल मोदी, राकेश सिंह, जिला मंत्री मंजीत सिंह, नीलू मछुआ, जिला कोषाध्यक्ष राजीव सिंह, कार्यालय मंत्री बोलटू सरकार, मीडिया प्रभारी प्रेम झा, सोशल मीडिया प्रभारी ज्ञान प्रकाश, बिनोद सिंह, आईटी सेल प्रभारी कौस्तव राय, भाजयुमो जिलाध्यक्ष अमित अग्रवाल, ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र प्रसाद, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष मुचिराम बाउरी, महिला मोर्चा जिलाध्यक्ष ज्योति अधिकारी, अनुसूचित जाति मोर्चा जिलाध्यक्ष अजीत कालिंदी, अल्पसंख्यक मोर्चा जिलाध्यक्ष मोहम्मद निसार समेत अन्य उपस्थित थे।

जमशेदपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इशारे पर ईडी ने झारखंड के लोकप्रिय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गिरफ्तार की है, इस कारण से आदिवासियों में काफी आक्रोश है यह आक्रोश भाजपा और मोदी सरकार के पतन का कारण बनेगा। गिरफ्तारी के कारण हेमंत सोरेन को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इस सारे प्रकरण में मोदी सरकार और रांची के राजभवन की भूमिका जग जाहिर है।

जमशेदपुर के जाने-माने अधिवक्ता एवं सामाजिक न्याय के चिंतक सुधीर कुमार पप्पू ने हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आगे कहा है कि एक आदिवासी नेता हेमंत सोरेन को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिल्कुल पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वह आदिवासी है। मोदी सरकार आदिवासी विरोधी है यह साबित हो गया। इसकी प्रतिक्रिया देश भर में होगी और जहां भी आदिवासी समुदाय के लोग हैं वे लोग मोदी सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करेंगे।

मोदी सरकार जहां भी विपक्ष की सरकार है और उसके जनाधार वाले नेता है उसे ईडी के माध्यम से जेल भेजने की साजिश कर रही है और इसकी शुरुआत हो चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजद के नेता तेजस्वी यादव और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के भी पीछे पड़ी है और जेल भेजने की साजिश कर रही है। अब तय है कि आगामी लोकसभा चुनाव में यह आक्रोश दिखेगा, भाजपा समेत मोदी सरकार का पतन हो जाएगा।

रांची : हेमंत सोरेन के इस्तीफा के बाद यह तय हो गया है कि सरायकेला के विधायक और मंत्री चंपई सोरेन ही मुख्यमंत्री बनाये जायेंगे. चंपई सोरेन के अलावा कांग्रेस के दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे. इसमें कांग्रेस के विधायक और मंत्री बन्ना गुप्ता और कांग्रेस के विधायक दल के नेता आलमगीर आलम को उपमुख्यमंत्री बनाया जायेगा.

इसके अलावा मंत्रिमंडल में भी बड़ा बदलाव किया जायेगा. इसको लेकर अब विधायक दल की बैठक भी सीएम आवास में हो चुकी है. बताया जाता है कि मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी के पहले झामुमो और कांग्रेस के विधायक दल की बैठक हुई. इस बैठक में विस्तार से चर्चा की गयी. इसके बाद सारे विधायकों ने सर्वसम्मति से चंपई सोरेन को विधायक दल का नेता चुन लिया. अब राज्यपाल सरकार बनाने के लिए विधायकों का समर्थन मांगेंगे, जिसके लिए राज्यपाल के पास झामुमो के तमाम विधायक पहुंच चुके है.


रांची: झारखंड के सियासत में नया मोड़ आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी की जानकारी महुआ माजी ने दी। सात घण्टे की चली लंबी पूछताछ के बाद हेमन्त सोरेन को गिरफ्तार किया गया। अभी फिलहाल उन्हें सेफ हॉउस में रखा जाएगा और कल पेशी की जाएगी। ईडी इनके दिए जवाबों से संतुष्ट नहीं हो पाई थी। लगभग 40 सवाल हेमन्त सोरेन से पूछा गया जिसका जवाब उन्होंने सिर्फ हाँ या ना में दिया। गौरतलब हो कि मामला 4.5 एकड़ जमीन घोटाला मामला और कोल माइनिंग का है। गिरफ्तारी से पूर्व ईडी कस्टडी में हेमन्त सोरेन राजभवन पहुँचे, जहाँ उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंपा।
वहीं हेमन्त सोरेन के इस्तीफा देने से पूर्व विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें सभी ने चम्पई सोरेन को विधायक दल का नेता चुना और अब अगले मुख्यमंत्री के रूप में चम्पई सोरेन होंगे। इससे पूर्व यह अनुमान लगाया जा रहा था को हेमन्त सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन या उनकी भाभी सीता सोरेन मुख्यमंत्री बनेंगी।



राँची : मुख्यमंत्री आवास से सत्तापक्ष के सभी विधायक और मंत्री राजभवन के लिए निकल गए है. राजभवन पहुंचने के बाद चंपई सोरेन राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। चंपई सोरेन विधायक दल के नेता चुने गए हैं, झारखंड के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
विधायक दल के नेता के रूप मे हम लोगों ने चंपई सोरेन को चुन लिया है, महामहिम राज्यपाल शपथ दिलाये : स्वास्थ्य मंत्री, बन्ना गुप्ता


बिहार में एक बार फिर से नीतीश कुमार ने राजद को झटका देते हुए भाजपा के साथ सरकार बना लिया है। लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार का ये कदम मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इंडिया गठबंधन में नीतीश कुमार असहज महसूस कर रहे थे और सीट शेयरिंग में हो रही देरी के चलते भी उनका गठबंधन से मोहभंग हो गया था।
वहीं स्थिति को देखते हुए नीतीश कुमार फिर से एनडीए में शामिल हो गए। इस सियासी उथल-पुथल के बीच भोजपूरी अभिनेता पवन सिंह 31 जनवरी यानी बुधवार को सीएम नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। वहीं जब सीएम आवास से वह बाहर निकले तो मुख्यमंत्री आवास पर तैनात सुरक्षाकर्मी उनके साथ सेल्फी लेने लगे और उन्होंने भी सभी लोगों के साथ सेल्फी लिया।

भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की है। चर्चा इस बात की है कि जदयू की तरफ से वह लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। भोजपुरी अभिनेता मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के बाद जब उनसे चुनाव लड़ने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि सब समय बताएगा। इससे पहले खबरें आई थी की वह भाजपा के टिकट से आरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट की हीरक जयन्ती एक अवसर है भारतीय न्याय प्रणाली की कमियों पर मंथन करते हुए उसे अधिक चुस्त, त्वरित एवं सहज सुलभ बनाना। मतलब यह सुनिश्चित करने से है कि सभी नागरिकों के लिये न्याय सहज सुलभ महसूस हो, वह आसानी से मिले, जटिल प्रक्रियाओं से मुक्त होकर सस्ता हो।

इस दृष्टि से यह अकल्पित उपलब्धियों से भरा-पूरा अवसर भारत न्याय प्रक्रिया को एक नई शक्ति, नई ताजगी, और नया परिवेश देने वाला साबित हो रहा है। क्योंकि आजादी के अमृतकाल में पहुंचने तक भारत की न्याय प्रणाली अनेक कंटिली झाड़ियों में उलझी रही है। भारतीय न्यायिक व्यवस्था का छिद्रान्वेषण करें तो हम पाते हैं कि न्यायाधीशों की कमी, न्याय व्यवस्था की खामियाँ और लचर बुनियादी ढाँचा जैसे कई कारणों से न्यायालयों में लंबित मुकदमों की संख्या बढ़ती जा रही है तो वहीं दूसरी ओर न्यायाधीशों व न्यायिक कर्मचारियों पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है। न्याय में देरी अन्याय कहलाती है लेकिन देश की न्यायिक व्यवस्था को यह विडंबना तेज़ी से घेरती जा रही है।
सुप्रीम कोर्ट की 75वं वर्षगांठ पर आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार द्वारा न्यायिक व्यवस्था को प्रभावी, आधुनिक, तकनीकी बनाने के लिये उठाये कदमों की चर्चा की। उन्होंने अप्रासंगिक हो चुके कानूनों को बदलने एवं आधुनिक अपेक्षाओं के नये कानून बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। जैसा कि खुद प्रधानमंत्री ने जिक्र किया औपनिवेशिक दौर के पुराने पड़ चुके कानूनों की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, भारतीय न्याय संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानून लाना बड़ा कदम है। हालांकि ये कानून अभी लागू नहीं हुए हैं और इनसे जुड़े कुछ पहलुओं पर पुनर्विचार की जरूरत भी महसूस की जा रही है, लेकिन फिर भी इस कदम की अहमियत को कम करके नहीं आंका जा सकता। इस कार्यक्रम में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों में भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता शामिल थे। अनेक कानूनविद् यहां उपस्थित थे।

सुप्रीम कोर्ट की पहली बैठक 28 जनवरी, 1950 को हुई थी, देश की न्याय प्रणाली सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित होती है। इसी बात का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हमारा काम है कि न्याय की पहुंच इस देश के हर कौने एवं हर नागरिक तक पहुंचे। इसी सोच के साथ ई-कोर्ट के तीसरे चरण को मंजूरी दी गई। पिछले साल केंद्रीय बजट में, सरकार ने ई-कोर्ट परियोजना के तीसरे चरण के लिए 7,000 करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की थी- जो कि 1,670 करोड़ रुपये के पिछले आवंटन से चार गुना अधिक है। मोदी सरकार भारत की न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिये हरसंभव सहयोग दे रही है। निश्चित ही जहां सरकार वर्तमान संदर्भ के अनुरूप कानूनों का आधुनिकीकरण कर रही है वहीं साधन-सुविधाओं को सुलभ कराने में तत्पर है। नये कानून एवं नयी आधुनिक अदालते कल के भारत को और मजबूत करेगी। नये भारत एवं सशक्त भारत को निर्मित करने में इनकी सर्वाधिक सार्थक भूमिका होगी। सरकार अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी या स्थानीय भाषाओं में न्याय-प्रक्रिया को संचालित करने के लिये भी प्रतिबद्ध है। न्याय की सुलभता की ओर इशारा करते हुए मोदी ने पहले कही गई उस बात को दोहराया कि आदेश सरल भाषा में देने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर संतोष जताया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद शुरू हो गया है और उम्मीद जताई कि देश की अन्य अदालतें भी इसका अनुसरण करेंगी।
टेक्नोलॉजी के बढ़ते महत्व पर उन्होंने कहा, “न्याय की सुगमता में टेक्नोलॉजी किस प्रकार सहायक हो सकती है, यह आज इस कार्यक्रम से ही पता चल रहा है। मेरा संबोधन अभी कृत्रिम बुद्धिमत्ता की सहायता से अनुवादित किया जा रहा है और लोगों द्वारा सुना जा रहा है। शुरुआत में कुछ रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन हम केवल कल्पना ही कर सकते हैं कि तकनीक कितने बड़े काम कर सकती है। इसी तरह, हमारी अदालतें हमारे नागरिकों के जीवन को आसान बनाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकती हैं।

सुप्रीम कोर्ट से अन्य हितधारकों की क्षमता निर्माण की दिशा में काम करना जरूरी है। सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण का काम शुरू कर दिया है। निश्चित तौर पर एक मजबूत न्यायपालिका विकसित भारत की नींव के रूप में काम करेगी। मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि जन विश्वास विधेयक न्यायपालिका पर अनावश्यक बोझ को कम करने के लिए उठाया गया कदम है। एक सशक्त न्यायिक प्रणाली विकसित भारत का एक हिस्सा है। सरकार एक भरोसेमंद न्याय व्यवस्था बनाने के लिए लगातार काम कर रही है और कई फैसले ले रही है। जन विश्वास विधेयक इसी दिशा में एक कदम है। सुप्रीम कोर्ट की अगुआई में पिछले कुछ समय से न्यायपालिका में डिजिटाइजेशन पर खासा जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में ईकोर्ट्स मिशन के तीसरे फेज को भी मंजूरी मिल गई है, जिसमें कोर्ट के रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन समेत कई और क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने का इरादा है।
‘ईज ऑफ जस्टिस’ से जुड़े कुछ अन्य बेहद अहम पहलू हैं, जिन पर ध्यान देने की जरूरत है। सबसे बड़ा मसला है अदालतों में लंबित पड़े मुकदमों का। 2023 में पेंडिंग केसों की संख्या 5 करोड़ को पार कर गई। इनमें 1,69,000 मुकदमे ऐसे हैं, जो 30 साल से भी ज्यादा समय से हाईकोर्टों और जिला कोर्टों में लंबित हैं। वर्तमान में 10 लाख लोगों पर सिर्फ 18 न्यायाधीश ही है। ऐसे में किसी भी न्यायपालिका से समय पर न्याय देने की उम्मीद करना उचित नहीं हो सकता है। विधि आयोग की सिफारिश के अनुसार इन पदों की संख्या में वृद्धि किया जाना चाहिये। सुप्रीम कोर्ट में जजों के खाली पद भरने का काम हुआ है, लेकिन हाईकोर्टों में अभी भी काफी पद खाली पड़े हैं। डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश के सभी 25 हाईकोर्टों में जजों के कुल 1,114 पद मंजूर हैं, लेकिन इन कोर्टों की मौजूदा न्यायाधीशों की संख्या 784 है यानी हाईकोर्टों में जजों के 330 पद खाली हैं।
न्याय प्रणाली में आमूल-चूल-परिवर्तन, परिवर्तन जरूरी है और उसे अधिक प्रभावी बनाने की अपेक्षा है। इसके लिये यह भी जरूरी है कि विशेष श्रेणी के मामलों के समाधान के लिये समय-सीमा तय की जानी चाहिये तथा लोक अदालतों और ग्राम न्यायालयों की स्थापना की जानी चाहिये। इससे न केवल विचाराधीन मामलों की संख्या में आनुपातिक कमी आएगी बल्कि न्यायपालिका के मूल्यवान समय की बचत होगी। अधीनस्थ न्यायालयों के स्तर पर सर्वोत्तम उपलब्ध प्रतिभा को आकर्षित करने के लिये अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का गठन किया जा सकता है। यह जजों की योग्यता व गुणवत्ता में सुधार करेगा। सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के कुशलतापूर्वक उपयोग से न्यायिक डेटाबेस बनाया जा सकता है। अधिवक्ताओं के लिये आचार संहिता के अनुपालन को प्रभावी बनाया जाना चाहिये ताकि मामलों को जानबूझकर विलंबित न किया जा सके। उपर्युक्त सभी बातों को देखते हुए स्पष्ट है कि भारतीय न्याय तंत्र में विभिन्न स्तरों पर सुधार की दरकार है। यह सुधार न सिर्फ न्यायपलिका के बाहर से बल्कि न्यायपालिका के भीतर भी होने चाहिये। ताकि किसी भी प्रकार के नवाचार को लागू करने में न्यायपालिका की स्वायत्तता बाधा न बन सके। न्यायिक व्यवस्था में न्याय देने में विलंब न्याय के सिद्धांत से विमुखता है, अतः न्याय सिर्फ होना ही नहीं चाहिये बल्कि दिखना भी चाहिये।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Paytm की बैंकिंग सर्विस के खिलाफ बुधवार को बड़ा एक्शन लिया. आरबीआई ने पेटीएम पेमेंट बैंक (Paytm Payments Bank) पर क्रेडिट ट्रांजैक्शन और किसी भी तरह का डिपॉजिट लेने की रोक लगा दी है. ऐसे में 29 फरवरी के बाद Paytm अब बैंकिंग नहीं दे पाएगा. RBI ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने की वजह से Paytm Payments Bank पर एक्शन लिया गया है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि 29 फरवरी के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को कस्टमर अकाउंट या वॉलेट और फास्टैग जैसे प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट में डिपॉजिट एक्सेप्ट करने या क्रेडिट ट्रांजेक्शन या टॉप-अप की परमिशन देने से रोक दिया गया है. आरबीआई ने यह भी कहा है कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक मौजूदा कस्टमर सेविंग्स अकाउंट, करेंट अकाउंट, प्रीपेड इंस्ट्रूमेंट, फास्टैग, नेशनल या फि कॉमन मोबिलिटी कार्ड में रखे अपने पैसे का इस्तेमाल बिना किसी प्रतिबंध के कर सकते हैं.
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा कि Paytm Payments Bank की ऑडिट में सुपरवाइजरी खामियां मिली हैं. बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट के तहत कार्रवाई की गई. 15 मार्च तक Paytm Payments Bank को नोडल अकाउंट सेटल करने को कहा गया है. नए ग्राहकों के डिपॉजिट लेने पर तत्काल रोक लगा दी है. इससे पहले RBI ने 11 मार्च 2022 को पेटीएम पेमेंट्स बैंक को नए अकाउंट खोलने से रोक दिया था. केंद्रीय बैंक ने एक बयान में कहा, ”आरबीआई ने अपने अधिकार क्षेत्र के तहत अन्य कानूनों के साथ-साथ बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 35ए के तहत पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को नए ग्राहकों के बैंक खाते पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया है.”

इससे पहले अगस्त 2018 में, RBI ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की थी. उस समय नियामक ने नो योर कस्टमर (KYC) नॉर्म्स के उल्लंघन का हवाला दिया था.
मध्यप्रदेश के बुधनी से विधायक और चार बार मुख्यमंत्री रहे शिवराज सिंह चौहान अब केंद्रीय मंत्री बन सकते हैं। केंद्रीय मंत्री और NDA यानी नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस के साथी रामदास आठवले ने दावा किया है कि चौहान लोकसभा का चुनाव लड़ सकते हैं।
हालांकि, इसे लेकर अभी तक विधायक की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष आठवले ने रविवार को कहा, ‘शिवराज सिंह चौहान का लोकसभा में आना है पक्का, इसलिए उनके दुश्मनों को लगेगा बहुत बड़ा धक्का।’ खास बात है कि आठवले शायराना प्रतिक्रियाएं देने के लिए मशहूर हैं। एमपी में भारतीय जनता पार्टी ने मोहन यादव को सीएम बनाया है।

आठवले ने कहा कि अगर चौहान दिल्ली आते हैं और लोकसभा चुनाव लड़ते हैं, तो पीएम मोदी उनका ‘सम्मान’ करेंगे और उन्होंने कैबिनेट मंत्री बनाएंगे। हालांकि, अब तक स्थिति साफ नहीं है कि चौहान का लोकसभा टिकट तय है या नहीं। आठवले की तरफ से भी इसे लेकर साफ जवाब नहीं दिया गया है।
शिवराज सिंह ने किया बड़ी जीत का दावा
एजेंसी वार्ता के अनुसार, चौहान ने रविवार को कहा कि मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी 29 में से 29 सभी लोकसभा की सीटे जीतेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा में 400 सीटें भाजपा की आएंगी। वहीं मध्यप्रदेश में 29 में से 29 सीटें भाजपा जीतेगी। वर्ष 2019 में भाजपा ने 28 सीटें जीती थीं और अब 2024 में 29 में से पूरी 29 ही सीटें जीतेगी।

चौहान साल 2005 में पहली बार एमपी के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद वह साल 2018 तक इस पद पर रहे। 2020 में राज्य में तत्कालीन सीएम कमलनाथ की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद एक बार फिर उन्होंने सीएम की गद्दी पर वापसी की थी। हालांकि, 2023 विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत के बाद भाजपा ने यादव को कमान सौंपी थी।