रामगढ़ जिले के मांडू प्रखंड अंतर्गत झारखंड मुक्ति मोर्चा को वरिष्ठ नेता सह झारखंड आंदोलनकारी और भोक्ता समाज के केंद्रीय संरक्षक युद्धेश्वर सिंह भोक्ता का रांची के मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान गुरुवार को निधन हो गया l
इस खबर से पूरे कोयलांचल में शोक की लार दौड़ गई l सूत्रों से पता चला है योगेश्वर सिंह गुप्ता लंबे समय से बीमार चल रहे थे किडनी और हार्ट की बीमारी से ग्रसित थे l योगेश्वर सिंह भोक्ता की उम्र 72 वर्ष थी l
इनका इलाज रांची के मेदांता अस्पताल में चल रहा था l इनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव वेस्ट बोकारो ओपी अंतर्गत फकोडीह के श्मशान घाट में किया जाएगा
जमशेदपुर। समाजवादी चिंतक एवं अधिवक्ता सुधीर कुमार पप्पू छपरा तरैया निवासी ने बिहार की नीतीश कुमार सरकार पर आरोप लगाया है कि यह रिमोट से संचालित हो रही है। इसका नियंत्रण दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह तथा नागपुर से आरएसएस कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवास खाली करने की नोटिस और नोटिस की भाषा से यह स्पष्ट हो गया है कि बिहार में जो सरकार बनी है, वह सामंतवादी एवं मनुवादी सोच से प्रेरित है।
दिखावे के तौर पर पिछड़ा वर्ग के नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री तथा पिछड़ा वर्ग के सम्राट चौधरी को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है, लेकिन नौकरशाही के माध्यम से पूरा नियंत्रण दिल्ली और नागपुर से किया जा रहा है।
मंडल आयोग लागू होने के बाद जो सामंतवादी और सांप्रदायिक शक्तियाँ बिहार में कमजोर पड़ गई थीं, उन्हें फिर से शक्ति प्रदान करने का काम तथाकथित ‘सामाजिक न्याय’ के नेता—नीतीश कुमार, जीतन राम मांझी, उपेंद्र प्रसाद कुशवाहा और चिराग पासवान—ने किया है। आने वाला इतिहास और वंचित–शोषित वर्ग इन्हें कभी क्षमा नहीं करेगा।
राष्ट्रीय जनता दल, विशेषकर लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव, दलित, महादलित, पिछड़ा, अति पिछड़ा, वंचित–शोषित एवं प्रगतिशील वर्ग के मसीहा हैं, और इसलिए उनके खिलाफ फर्जी मुकदमे खड़े किए जाते हैं, ताकि उनका समय न्यायालयों में बीतता रहे और वे जनता की आवाज न बन सकें।
बीजेपी और नीतीश कुमार जितनी मनमानी करना चाहें कर लें; आने वाला समय और बिहार की जनता उन्हें उचित सबक सिखाएगी।
चांडिल: चौका थाना क्षेत्र के चांदुडीह में गुरुवार दोपहर 21 वर्षीय राहुल मंडल ने अपनी दुकान के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. घटना तब हुई जब राहुल दुकान में अकेला था और दुकान का शीशे वाला दरवाजा अंदर से लॉक किया हुआ था.
जानकारी के अनुसार राहुल ने पहले अपनी गर्लफ्रेंड को वीडियो कॉल किया और फिर मोबाइल को खिड़की से बांधकर पूरे घटना क्रम को रिकॉर्ड करने का प्रयास किया. सूत्रों ने बताया कि राहुल ने दुकान के बिछौने के शीट से फंदा बनाकर फांसी लगाई और जीवन समाप्त कर लिया. घटना देख कर राहुल की गर्लफ्रेंड घबरा गई और उसने कॉल काट दी तथा कई बार कॉल कर के भी राहुल से बात नहीं कर पाई.
इसके बाद गर्लफ्रेंड ने राहुल के दोस्तों और बड़े भाई को फोन कर इस घटना की सूचना दी. राहुल का बड़ा भाई रांची में पढ़ाई करता है और रांची में रहता है. आनन-फानन में पिता कृपा मंडल को सूचित किया गया और जब परिवार मौके पर पहुंचा तो दुकान का शीशा का दरवाजा अंदर से बंद मिला और अंदर राहुल लटका हुआ था.
सूचना पाकर चौका पुलिस मौके पर पहुंची और शीशा का दरवाजा तोड़ कर दुकान के अंदर दाखिल हुई. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया.
परिजनों के अनुसार राहुल पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला के बागमुंडी थाना क्षेत्र के ईलू गांव की तन्नु नामक लड़की से बात करता था और दोनों के बीच हाल में कोई विवाद चल रहा था. यही विवाद आत्महत्या का कारण हो सकता है, ऐसा परिवार वालों का कहना है. चौका थाना प्रभारी सोनू कुमार ने बताया कि प्रथम दृष्टि से यह आत्महत्या लग रहा है और मामले की हर पहलू पर गंभीरता से जांच की जा रही है.
झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को बर्ष 2014 में बड़ी संख्या में 514 आदिवासी युवाओं को नौकरी दिलाने के नाम पर नक्सली बताकर फर्जी सरेंडर कराने के चर्चित मामले में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में सुनवाई के दौरान इस मामले को अत्यंत संवेदनशील बताते हुए राज्य पुलिस की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की. सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से डीएसपी रैंक के अधिकारी का शपथपत्र दाखिल किया गया.
इस पर खंडपीठ ने गहरी नाराजगी जताई और कहा कि इतने गंभीर और संवेदनशील मामले में निम्न स्तरीय अधिकारी का हलफनामा स्वीकार्य नहीं है. इसके साथ ही खंडपीठ ने इस प्रकरण में राज्य के डीजीपी को शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया. खंडपीठ ने इस मामले में पुलिस मुख्यालय से स्पष्ट और विस्तृत स्पष्टीकरण मांगी है. खंडपीठ ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए शीर्ष स्तर से जबाब आवश्यक है.
इस मामले में अब अगली सुनवाई 8 दिसंबर के लिए निर्धारित की है. जिसमें डीजीपी का शपथपत्र अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करना होगा. खंडपीठ ने कहा कि यह मामला सीधे पुलिस की कार्यप्रणाली और युवाओं के संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा है. इस तरह के मामलों में उच्चस्तरीय जबाबदेही जरूरी है. ज्ञात हो कि इस मामले में झारखंड काउंसिल फॉर डेमोक्रेटिक राइट्स की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है.
याचिका में बताया गया है कि बर्ष 2014 में 514 आदिवासी युवकों को नौकरी देने का लालच देकर कोचिंग संस्थान दिग्दर्शन और कुछ पुलिस अधिकारियों की मिलीभगत से नक्सली बताने की साजिश रची गई थी. युवाओं से कहा गया था कि यदि वे सरेंडर प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे तो उन्हें सरकारी नौकरी दिलाई जाएगी. याचिका में यह भी उल्लेख है कि फर्जी सरेंडर की तैयारी के दौरान इन युवकों को पुरानी जेल में बंद रखा गया, ताकि उन्हें वास्तविक नक्सली के रूप में प्रस्तुत किया जा सके.
कहा गया कि पुलिस अधिकारियों ने नक्सलियों के सरेंडर के आंकड़े बढ़ाने के लिए पूरी योजना बनाई थी. युवाओं को झांसा देकर उन्हें नक्सली घोषित करने और फिर उनके सरेंडर को उपलब्धि बताने की तैयारी राज्य स्तर पर की गई थी. राज्य सरकार के वरीय पुलिस अधिकारियों ने करोड़ों रुपए खर्च कराया, ताकि उन्हें केंद्रीय गृहमंत्री के सामने अवार्ड मिल सके.
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के चौथे कार्यकाल का शुक्रवार को एक बर्ष पूरा हो जायेगा। इसको लेकर राज्य सरकार की ओर से 28 नवंबर को मोरहाबादी मैदान में भव्य समारोह आयोजित किया जायेगा। कार्यक्रम को लेकर सरकार के मुख्यसचिव अविनाश कुमार ने मुख्यमंत्री सोरेन को आमंत्रित किया। कार्यक्रम में हेमंत सरकार के सभी मंत्री भी उपस्थित रहेंगे और अपनी उपलब्धियां बतायेंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विभिन्न विभागों के लगभग 10 हजार अभ्यर्थियों के बीच नियुक्ति पत्र वितरित करेंगे। इसके अलावा परिसंपत्तियों का भी वितरण किया जायेगा। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा तैयारियों को लेकर विस्तृत दिशानिर्देश जारी कर सभी विभागों को वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
राज्य सरकार की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिताए 2023 के माध्यम से झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित 197 असैनिक अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके लिए विभागवार अधिकारियों और सहायक कर्मियों की टीम गठित की गई है। प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों एवं कर्मियों को सुबह 8 बजे तक स्थल पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री डा इरफान अंसारी ने निजी अस्पतालों को मरीज की मौत पर शव रोकने के मामले को अमानवीय, क्रूर और कानूनन अपराध बताया और कहा कि ऐसी हरकत करने वाले अस्पताल को तुरंत सील कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अस्पतालों को भुगतान, संसाधन और सुविधाएँ उपलब्ध करा रही है।
लेकिन मानवता और संवेदनशीलता अस्पताल प्रबंधन को दिखानी होगी। स्वास्थ्य मंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि दुर्घटना पीड़ितों या गंभीर मरीजों को यह कहकर वापस न भेजा जाए कि उनका इलाज कार्ड की कवरेज में नहीं है। किसी मरीज को बिना इलाज लौटाना अस्वीकार्य है। कवरेज को सरल और स्पष्ट बनाया जाय।
झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में कैदियों को परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की विस्तृत जांच कराने का निर्देश दिया है. रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों से जुड़े मामले में गुरुवार को जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली बेंच में सुनवाई हुई.
शिकायतें आकाश कुमार राय नामक शख्स की ओर से दायर क्रिमिनल अपील के दौरान अदालत के सामने लाई गई थीं. इस दौरान जेल अधीक्षक सुदर्शन मुर्मू और जेलर लवकुश कुमार गुरुवार को हाईकोर्ट में उपस्थित हुए. दोनों अधिकारियों ने कैदियों को दिए जा रहे भोजन की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की.
जेलर ने अदालत को बताया कि अब भोजन पूरी तरह से जेल मैनुअल के अनुसार उपलब्ध कराया जा रहा है और उसमें सुधार सुनिश्चित किया गया है. कोर्ट द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देश के अनुसार, गृह सचिव और आईजी जेल की ओर से सभी जिलों की जेलों में भोजन की गुणवत्ता पर तैयार रिपोर्ट के साथ एक शपथ पत्र दाखिल किया गया.
सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि भोजन की गुणवत्ता में पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है और अब सभी जेलों में मैनुअल के प्रावधानों के अनुरूप भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है. कैदियों के हित में अदालत ने जेल परिसर में कैंटीन संचालित करने की अनुमति भी दी है. साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि भोजन आपूर्ति में किसी भी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी सीधे जेलर की होगी.
हाईकोर्ट ने झारखंड लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) और जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) को राज्य के जिलों का औचक निरीक्षण कर दो सप्ताह के भीतर जेलों में भोजन पर अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल करने का आदेश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 11 दिसंबर को निर्धारित की गई है.
कोर्ट ने झालसा के सदस्य सचिव को निर्देश दिया है कि वे सभी डालसा चेयरमैन को आदेश की प्रति भेजें और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करें.
उच्च न्यायालय ने भारतीय रेलवे से यह बताने को कहा है कि दुर्घटना बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को ही क्यों प्रदान किया जाता है, ऑफलाइन टिकट बुक करने वालों को क्यों नहीं।
शीर्ष अदालत भारतीय रेलवे से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रही थी।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि दुर्घटनाओं के लिए बीमा कवर केवल ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को प्रदान किया जाता है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) विक्रमजीत बनर्जी इस मामले में रेलवे की ओर से अदालत में पेश हुए।
पीठ ने 25 नवंबर को पारित अपने आदेश में कहा, ‘इसके अलावा, न्याय मित्र ने बताया है कि दुर्घटनाओं को कवर करने के लिए ऑनलाइन टिकट खरीदने वाले यात्रियों को बीमा कवर प्रदान किया जाता है, जो ऑफलाइन टिकट खरीदने वालों के लिए उपलब्ध नहीं है। श्री बनर्जी को निर्देश लेने की आवश्यकता है कि टिकट प्राप्त करने के इन दो माध्यमों के बीच इस अंतर का क्या कारण है।’
पीठ ने राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर द्वारा प्रस्तुत एक रिपोर्ट का अवलोकन किया और कहा कि शुरुआती चरण में, पटरियों और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए, जिससे अन्य पहलू सामने आएंगे। अदालत ने मामले को 13 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। अदालत ने रेलवे को दो मुद्दों पर रिपोर्ट या हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बीमा से जुड़े मुद्दे पर भी जवाब देने के लिए कहा है।
घाटशिला प्रखंड अंतर्गत राजाबासा गांव के एक टोला में मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत आज से विद्युत आपूर्ति शुरु हो गई है । बिजली सुविधा से वंचित 6 परिवारों को इस योजना के अंतर्गत कनेक्शन प्रदान किया गया जिसपर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर की ।
इस अवसर पर उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने राजाबासा गांव पहुंचकर योजना के क्रियान्वयन की गुणवत्ता का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी 6 परिवारों को सुरक्षित और सुचारू ढंग से विद्युत सुविधा मिलती रहे, आगे किसी प्रकार की बाधा न आए। उपायुक्त ने ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी अन्य स्थानीय समस्याओं व आवश्यकताओं को भी सुना तथा मौके पर मौजूद घाटशिला बीडीओ को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपायुक्त ने कहा कि मुख्यमंत्री उज्जवल झारखंड योजना के तहत छूटे हुए गांव-टोलों में विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास है । योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है, राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी परिवार मूलभूत सुविधा से वंचित न रहे ।
राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार जिला अंतर्गत सभी प्रखंडों एवं पंचायतों में आयोजित ‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के शिविर के माध्मम से व्यापक स्तर पर नागरिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इस अभियान के तहत अबतक कुल 24367 आवेदन प्राप्त हुए हैं। आज 24 पंचायत एवं 3 नगर निकाय में शिविर का आयोजन किया गया । शिविरों में बड़ी संख्या में जिलेवासियों की भागीदारी रही। माननीय विधायकगण एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों ने शिविर में शामिल होकर विभिन्न योजनाओं के लाभुकों के बीच परिसंपत्ति का वितरण किया तथा नागरिकों से अपील किया कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें ।
उपायुक्त के निर्देशानुसार इन शिविरों में राईट टू सर्विस अंतर्गत चिन्हित सभी सेवाओं से संबंधित प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जा रहा है । पंचायत एवं नगर निकायों में लगाए गए शिविर के माध्यम से अबतक प्राप्त आवेदनों में दिव्यांग पेंशन के 32, विधवा पेंशन 105, वृद्धा पेंशन के 2393, जन्म प्रमाण पत्र 179, आय प्रमाण पत्र 616, स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र 567, नया राशन कार्ड के 526, जाति प्रमाण पत्र के 760, झारखंड राज्य सेवा देने की गारंटी अधिनियम 2011 से जुड़ी अन्य सेवाएं के 306 आवेदन, भूमि की मापी के 34, मृत्यु प्रमाण पत्र के 89, भूमि धारण प्रमाण पत्र 25, दाखिल खारिज वादों का निष्पादन 68, तथा अन्य लोककल्याणकारी योजनाओं के 18664 आवेदन शामिल हैं।
‘सेवा का अधिकार सप्ताह’ के तहत आयोजित किए जा रहे शिविर 28 नवंबर तक प्रस्तावित हैं। उपायुक्त श्री कर्ण सत्यार्थी ने अपील करते हुए कहा कि अंतिम दिन अपने नजदीकी शिविर में जिलावासी जरूर शामिल हों तथा इस अभियान में परस्पर भागीदारी निभाते हुए सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठायें।