एक नई सोच, एक नई धारा

एकतरफा बात से सच का पता नहीं चलता, प्रशासन मंत्री के इशारे पर राजनीति का हिस्सा बन रही है- निर्भय सिंह

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जमशेदपुर : भाजपा नेता अभय सिंह को जमानत मिलने के बाद भी जेल से बाहर नहीं आने देने के लिए प्रशासन और सरकार लगी हुई है। जिसके कारण कदमा मामले में जमानत मिलने बाद जुगसलाई थाना में केस दर्ज करा दिया गया और जब जुगसलाई मामले में जमानत मिली तो मानगो थाना में केस दर्ज करके उन्हें जेल से बाहर आने से रोका जा रहा है। इस मामले में कुछ चुनिंदा अखबारों में बिल्डर मो सागिर की जुबानी में समाचार छापा गया जिसमें अभय सिंह एवं उनके भाई निर्भय सिंह और दिलीप सिंह पर रंगदारी और दबंगई दिखाने की बात कही गयी है। जिसका विरोध करते हुए निर्भय सिंह ने आज मीडिया वार्ता में कहा कि एक अखबार का कार्य होता है सच को उजागर करना और सच कभी भी एकतरफा बात से सामने नहीं आता। जिन अखबारों और उनके सम्पादकों ने मो सागिर की झूठी और मनगढ़त कहानी सुनी और छापी उन्हें सच्चाई का पता लगाने के लिए हमारे पास भी आना चाहिए था और तब खबर को चलाना चाहिए था। मेरा उनसे आग्रह है कि एक पक्ष को जान कर समाचार न छापें, हमें भी अपनी बात रखने की आज़ादी और हमारा मानवाधिकार भी है। (जारी..)

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निर्भय सिंह ने कहा कि बिल्डर मो सागिर को इस्तेमाल करके प्रशासन झूठा केस दर्ज करके अभय सिंह को जेल से न निकलने देने और परेशान करने की कोशिश कर रही है। हमारे पास पुख्ता साक्ष्य है कि यह केस फ़र्ज़ी है। एक अनैतिक बिल्डर जो मानगो का रहने वाला है वो 2012 से यहाँ बिल्डिंग का कार्य कर रहा है। 2019 में उन्होंने कहा कि उनका कार्य पूरा हुआ। लेकिन समझ से यह परे है कि इतने सालों तक उनका उदय नहीं हुआ किन्तु जब शास्त्री नगर दंगा हो जाता है उसके उपरांत बहुत ही नाटकीय ढंग से साकची के थाना में न होकर मानगो थाना में मामला दर्ज किया गया ताकि हम वहाँ विरोध दर्ज न कर सके।
निर्भय सिंह ने बताया कि मकान संख्या 256 जो बन रहा था वह हमारे घर से 2-3 घर छोड़कर बन रहा था, वाजिब है जब हमारे आसपास कोई बिल्डिंग बनता है तो बढ़ते हुए परिवार को देखकर आप उस बिल्डिंग का भागीदार बनना चाहते हैं। उसी के तहत मैनें ट्रांजेक्शन और सप्लाई के माध्यम से एक फ्लैट लिया। जिसका उल्लेख कभी भी स्थानीय पुलिस ने नहीं किया। सन 2020 में जब यहाँ के एसएसपी तमिल साहब थे और सिटी एसपी ने इस मामले की तहकीकात करके दोनों तरफ से एफआईआर किया था। जिसमें चंद्रशेखर की माँ का विरोध था कि आप रेलिंग नहीं लगाने दे रहे और मेरा कहना था कि मामला जब लंबित है और मेरा पैसा फंसा हुआ है तो मेरा अधिकार है कि मैं बिल्डिंग में कोई कार्य न होने दूँ। मो. सागिर चंद्रशेखर का पार्टनर है और मीडिया के माध्यम से यह जानकारी देना चाहता हूं कि पार्वती सिंह द्वारा मुझपर और मेरे भाई दिलीप सिंह पर 10 लाख रंगदारी मांगने का केस दर्ज हुआ था जिसका पटाक्षेप होने के ठीक एक साल बाद कदमा प्रकरण के उपरांत एसएसपी द्वारा सुनियोजित ढंग से सजाकर अभय सिंह को जेल से न निकलने देने और समाज में उनकी प्रतिष्ठा को खत्म करने की कोशिश कर रही है। जिसके पीछे स्थानीय मंत्री बन्ना गुप्ता हैं और अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के साथ उनका साथ दे रहें हैं और यह भी एक जाँच का विषय है।
निर्भय सिंह ने बताया कि मो.सागिर और मेरे भाई दिलीप सिंह के बीच एक पार्टनरशिप डीड भी बनी थी जिसमें मो. सागिर का रिलीजन इस्लाम लिखा हुआ है तो क्या हमें उस समय ज्ञात नहीं था जो उन्होंने बयान दर्ज कराया कि उनके कर्मचारियों के कपड़े उतार कर हमने धर्म जांच की। उनकी नियत में खोट है तब ही तो ऐसा हुआ और जब पार्टनरशिप डीड बनी तब ही आप शिकायत लेकर जाते। चूंकि गवाह के तौर पर मेरा हस्ताक्षर है और एक हस्ताक्षर हमारे पड़ोसी बद्रीलाल का हैं। यह जानकारी आप आस पड़ोस से ले सकते हैं और यदि आप पूरे लाइन से भी पूछेंगे तो आपको हमारे विरुद्ध गवाह नहीं मिलेगा, क्योंकि हम गलत नहीं है। (जारी..)

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हमने क्या बनने का विरोध किया उसका उल्लेख स्थानीय पुलिस को दिया है और विशेष पदाधिकारी को भी दिया कि काशीडीह में आपके विभाग द्वारा और सरकार द्वारा निर्देशित 1.8 पास करना है लेकिन इन दोनों ने मिलकर 9.8 अफेयर बना दिया और जिसे भी बेचा गया उसका एक रजिस्ट्री दिखा दें। बिल्डर मो. सागिर द्वारा निर्मित बिल्डिंग खुद एक जाँच का विषय है। जिसकी जांच होने पर सच्चाई खुद ब खुद बाहर आ जायेगी।
उन्होंने कहा कि मैं विगत 1 साल से सब को मैसेज भेज रहा हूं कि मोहम्मद सागिर नहीं मिल रहा है, इसके आईओ रोहित बाबू से 7 मई से पहले से मेरी व्हाट्सएप में बात हो रही थी, लेकिन एसएससी ने उन्हें आईओ से हटाकर मुसाबनी का थाना इंचार्ज बना दिया। मेरे द्वारा लगातार शिकायत करने पर भी यह लोग मेरी रिसीविंग नहीं लेते हैं। बिल्डर मोहम्मद सागिर के ऊपर एसएसपी तमिल के समय में 420/506/ 504 /406 /201 /120B का केस लगा था, लेकिन यह फाइल आज तक जमशेदपुर न्यायालय में पहुंची नहीं है। इस एसएसपी के आने बाद यह फ़ाइल संदूक में चली गयी। एक आईपीएस अधिकारी को इस तरह का कार्य शोभित नहीं करता है और उन्हें यह समझना चाहिए कि आने वाले दिनों में यह सरकार रहेगी या नहीं इसका पता नहीं है लेकिन द्वेष पूर्ण तरीके से किया गया उनके इस कार्य को जहाँ तक हो पायेगा मैं लेकर जाऊंगा।