हजारीबाग/रांची: झारखंड में सत्ता के अहंकार और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमले की एक रूह कपा देने वाली घटना सामने आई है। हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल (सदर अस्पताल) में सोमवार को न्यूज़ 18 झारखंड के वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सोनी पर उस वक्त जानलेवा हमला किया गया, जब उन्होंने जनता के हक में एक वाजिब सवाल पूछने की हिम्मत की।
क्या था वह ‘गुनाह’ जो मंत्री समर्थकों को चुभ गया?
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी जब अस्पताल का दौरा कर रहे थे, तब पत्रकार सुशांत सोनी ने उनसे फरवरी 2026 में हुए चतरा एयर एंबुलेंस क्रैश के पीड़ितों को लेकर सवाल किया। सवाल सीधा था— “हादसे में जान गंवाने वाले 7 लोगों के परिजनों को अब तक मुआवजा क्यों नहीं मिला?” हैरानी की बात यह है कि जिस मुआवजे का वादा खुद मंत्री जी ने विधानसभा में किया था, उस पर जवाब देने के बजाय उनके समर्थकों ने पत्रकार पर लात-घूंसों की बरसात कर दी।
अस्पताल परिसर में ही पत्रकार लहूलुहान
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सवाल पूछते ही समर्थकों की भीड़ पत्रकार पर टूट पड़ी। गंभीर रूप से घायल सुशांत सोनी को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ वे रिपोर्टिंग करने पहुंचे थे। विडंबना देखिए कि दो महीने बीत जाने के बाद भी सरकार मुआवजे की फाइल नहीं खोल पाई, लेकिन सवाल पूछने वाले का सिर खोलने में जरा भी देर नहीं लगाई गई।
पुलिस की चुप्पी और प्रशासन पर सवाल
घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। सार्वजनिक स्थान पर, कैमरों के सामने हुई इस गुंडागर्दी पर पुलिस की सुस्ती प्रशासन की निष्पक्षता पर गंभीर सवालिया निशान लगाती है। क्या राज्य में अब पत्रकारों को सुरक्षा के बजाय सत्ता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ेगा?
तीसरी धारा न्यूज की तीखी प्रतिक्रिया
यह घटना न केवल शर्मनाक है, बल्कि अक्षम्य भी है। दिन-रात लोकतंत्र और अधिकारों की बात करने वाले नेताओं के संरक्षण में अगर पत्रकारों का गला घोंटा जाएगा, तो जनता तक सच कैसे पहुँचेगा?
तीसरी धारा न्यूज इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा करता है। हम मांग करते हैं कि:
- दोषी समर्थकों और इस कृत्य को बढ़ावा देने वाले जिम्मेदार लोगों पर तत्काल कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।
- घायल पत्रकार को उचित सुरक्षा और न्याय मिले।
- सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या राज्य में अब सवाल पूछना अपराध की श्रेणी में आता है?
सत्ता के गलियारों में बैठे लोगों को यह नहीं भूलना चाहिए कि शेखीबाज समर्थकों के दम पर सच को ज्यादा दिनों तक नहीं छुपाया जा सकता।
ब्यूरो रिपोर्ट, तीसरी धारा न्यूज











