समाजवाद और धर्मनिरपेक्षता रहित ‘मूल संविधान’ की वकालत, तमिलनाडु में हिंदी प्रतिबंध को बताया गंभीर






जमशेदपुर: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने बारीडीह और बिष्टुपुर में ध्वजारोहण के बाद देश की वर्तमान स्थिति और संवैधानिक ढांचे पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि राष्ट्र की एकता को चोट पहुँचाने वाले तत्वों और अलगाववादी प्रवृत्तियों से सख्ती से निपटा जाए।
मूल संविधान की ओर लौटने का आह्वान
बिष्टुपुर स्थित अपने आवास पर तिरंगा फहराने के बाद श्री राय ने संविधान के प्रस्तावना (Preamble) में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
- आपातकाल के बदलाव: 1970 के दशक में आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवाद’ और ‘धर्मनिरपेक्षता’ शब्द जोड़े गए थे।
- मूल भावना: देश को उस मूल संविधान की भावना से चलना चाहिए जिसमें ये दोनों शब्द नहीं थे। संविधान में 100 से अधिक संशोधन हुए हैं, लेकिन मूल प्रस्तावना से छेड़छाड़ ठीक नहीं।






तमिलनाडु में हिंदी का विरोध: ‘अलगाववाद’ का खतरा
विधायक ने तमिलनाडु जैसे राज्यों में हिंदी के कथित प्रतिबंध को एक गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा:
- ”कुछ राज्य आज भी पूरे मन से खुद को भारत के साथ नहीं रखना चाहते। तमिलनाडु द्वारा हिंदी को प्रतिबंधित करना अलगाववाद की भावना को उभारने जैसा है।”
- उन्होंने याद दिलाया कि संविधान केंद्र को यह शक्ति देता है कि यदि कोई राज्य राष्ट्रविरोधी आचरण करे, तो उसे भंग किया जा सकता है। सरकार को लचीलेपन के साथ-साथ कड़ाई का भी उपयोग करना चाहिए।
भीतर का संकट सीमा से बड़ा
बारीडीह में संबोधन के दौरान सरयू राय ने आंतरिक सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि आज सीमा से ज्यादा संकट देश के भीतर है।
- नक्सलवाद का उदाहरण: उन्होंने कहा कि जैसे 70 के दशक के नक्सलवाद को प्रायः खत्म कर दिया गया, वैसे ही देश को कमजोर करने वाली अन्य शक्तियों पर भी एक्शन जरूरी है।
- अल्पसंख्यक अधिकार: उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि धार्मिक स्वतंत्रता का कई मामलों में दुरुपयोग हो रहा है, जिससे आंतरिक सुरक्षा और अखंडता पर खतरा पैदा हुआ है।







विकास और सामर्थ्य की चुनौती
श्री राय ने स्वीकार किया कि भारत ने आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में जबरदस्त तरक्की की है, लेकिन उन्होंने इस बात पर दुख जताया कि जनसंख्या का एक बड़ा हिस्सा आज भी सामर्थ्यवान नहीं बन सका है। उन्हें मुख्यधारा में लाना और ‘अनेकता में एकता’ के संवैधानिक मंत्र को प्रभावी ढंग से लागू करना ही भविष्य की सबसे बड़ी चुनौती है।
प्रमुख बिंदु (Highlights):
- समाजवाद/धर्मनिरपेक्षता: इन शब्दों को हटाकर मूल संविधान की भावना लागू करने पर जोर।
- आंतरिक सुरक्षा: देश के भीतर छिपे शत्रुओं पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी सख्ती की मांग।
- संवैधानिक शक्ति: अलगाववाद को बढ़ावा देने वाली राज्य सरकारों पर कार्रवाई की वकालत।











