नई दिल्ली:
भारत को प्रदूषण मुक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने देश में 100 फीसदी इथेनॉल यानी E100 ईंधन के नियमों को औपचारिक रूप से हरी झंडी दे दी है। सरकार के इस फैसले के बाद अब भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में एक अभूतपूर्व क्रांति आने का रास्ता साफ हो गया है। देश की दिग्गज कार और बाइक कंपनियां अब ऐसे इंजन बनाने की तैयारी में पूरी तरह जुट गई हैं, जो बिना एक बूंद पेट्रोल के, सिर्फ और सिर्फ इस स्वदेशी ईंधन पर चलेंगे।
क्या है यह E100 ईंधन और कैसे बनता है?
सरल शब्दों में कहें तो E100 एक ऐसा ईंधन है जिसमें 100 फीसदी इथेनॉल होता है और पारंपरिक पेट्रोल की मात्रा शून्य होती है। इथेनॉल एक रिन्यूएबल (नवीकरणीय) ईंधन है, जिसे गन्ने के रस, मक्के, खराब हो चुके अनाज और खेती के बचे-कुचे कचरे से तैयार किया जाता है।
वर्तमान में भारतीय सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों में 20 फीसदी इथेनॉल और 80 फीसदी पेट्रोल के मिश्रण (E20) का इस्तेमाल हो रहा है। लेकिन E100 इस सफर का अगला और सबसे बड़ा चरण है, जिसे पूरी तरह से शुद्ध इथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियों के लिए ही डिजाइन किया गया है।
विदेशों पर निर्भरता घटेगी, किसानों की चमकेगी किस्मत
भारत फिलहाल अपनी जरूरत का लगभग 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, जिससे देश का लाखों-करोड़ों रुपया बाहर चला जाता है। E100 के आने से इस विदेशी निर्भरता पर लगाम लगेगी।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग (मिश्रण) नीति की वजह से अब तक कच्चे तेल के आयात में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की बचत हो चुकी है। वहीं दूसरी ओर, इस मुहिम से देश के अन्नदाताओं को 80,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई हुई है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से इस बात पर जोर दे रहे हैं कि इथेनॉल से न सिर्फ आम जनता के लिए ईंधन सस्ता होगा, बल्कि देश के ग्रामीण अर्थतंत्र और किसानों की जेब भी मजबूत होगी।
कौन सी गाड़ियां चलेंगी इस नए ईंधन पर?
E100 ईंधन पर गाड़ियां चलाने के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को विशेष रूप से ‘फ्लेक्स-फ्यूल इंजन’ तैयार करने पड़ रहे हैं। इस रेस में ऑटो कंपनियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं:
- कार कंपनियां: मारुति सुजुकी ने अपनी सबसे लोकप्रिय कार ‘वैगनआर’ का फ्लेक्स-फ्यूल प्रोटोटाइप पहले ही प्रदर्शित कर दिया है। इसके अलावा टोयोटा, एमजी (MG) और हुंडई भी अपनी गाड़ियों के फ्लेक्स-फ्यूल वेरिएंट्स पर तेजी से काम कर रही हैं।
- दोपहिया वाहन: टू-व्हीलर सेगमेंट में हीरो मोटोकॉर्प ने अपनी सबसे ज्यादा बिकने वाली बाइक्स ‘स्प्लेंडर’ और ‘एचएफ डीलक्स’ के फ्लेक्स-फ्यूल वर्जन पेश कर दिए हैं। टीवीएस और बजाज जैसी कंपनियां भी इस कतार में शामिल हैं।
E100 ईंधन: एक नजर में फायदे और चुनौतियां
इस नए ईंधन के आने से जहां देश को बड़े फायदे होंगे, वहीं कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आएंगी।
प्रमुख फायदे:
- आर्थिक आत्मनिर्भरता: देश में ही ईंधन का उत्पादन होने से कच्चे तेल का भारी-भरकम आयात बिल घटेगा और भारतीय रुपया मजबूत होगा।
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बूस्ट: गन्ना और मक्का उत्पादक किसानों की मांग बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और समृद्धि आएगी।
- पर्यावरण को बड़ी राहत: पेट्रोल की तुलना में इथेनॉल बहुत साफ जलता है, जिससे कार्बन उत्सर्जन बेहद कम होगा और शहरों को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी।
सामने खड़ी चुनौतियां:
- पुरानी गाड़ियों में सपोर्ट नहीं: आम उपभोक्ता आज की तारीख में अपनी पुरानी पेट्रोल कार या बाइक में सीधे E100 नहीं डाल सकते। इथेनॉल का स्वभाव पेट्रोल से अलग होने के कारण यह पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पाइप, इंजेक्टर्स और फ्यूल पंप को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके लिए नई फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां ही खरीदनी होंगी।
- माइलेज में मामूली कमी: इथेनॉल में पेट्रोल के मुकाबले ऊर्जा घनत्व (Energy Density) कम होता है, जिससे गाड़ियों के माइलेज में थोड़ी गिरावट देखी जा सकती है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार: देशभर के पेट्रोल पंपों पर E100 ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अलग स्टोरेज टैंक और डिस्पेंसिंग मशीनें लगाने में थोड़ा वक्त और निवेश लगेगा।
निष्कर्ष:
नितिन गडकरी का यह फैसला देश को ‘हरित भविष्य’ (Green Future) की ओर ले जाने वाला है। हालांकि पुरानी गाड़ियों के लिए सड़कों पर सामान्य पेट्रोल बिकता रहेगा, लेकिन भविष्य पूरी तरह से फ्लेक्स-फ्यूल और E100 ईंधन का होने वाला है।
– तीसरी धारा न्यूज











